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प्रधानमंत्री मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कोविड वैक्सीन रोलआउट की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
हम 16 जनवरी से दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू कर रहे हैं। हम सभी के लिए गौरव की बात है कि जिन दो वैक्सीन को ऑथराइजेशन दिया गया है वो दोनों ही मेड इन इंडिया हैं : प्रधानमंत्री मोदी
पहले फेज में स्वास्थ्य कर्मचारियों, स्वच्छता कार्यकर्ताओं, अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स, सुरक्षा बलों, पुलिस और अन्य अर्धसैनिक बलों को टीका लगाया जाएगा: प्रधानमंत्री मोदी
दूसरे फेज में उन लोगों को प्राथमिकता है जिनकी उम्र या तो 50 साल से ज्यादा है या फिर 50 साल से कम हैं लेकिन जिनको को-मॉर्बिडिटी है: प्रधानमंत्री मोदी

कोरोना की मेड इन इंडिया वैक्सीन और दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान इस विषय में अभी विस्तार से हमारी चर्चा हुई है, Presentation में भी काफी चीजें details में बताई गई है और हमारे राज्‍यों के district level के अधि‍कारियों तक बहुत विस्‍तार से इसकी चर्चा हुई है और इस दरम्‍यान कुछ राज्‍यों से अच्‍छे सुझाव भी मिले हैं। केंद्र और राज्यों के बीच इस संवाद और सहयोग ने कोरोना से लड़ाई में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। एक प्रकार से federalism का उत्‍तम उदाहरण, इस सारी लड़ाई मं हमलोगों ने प्रस्‍तुत किया है।

साथियों,

आज हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि भी है। मैं उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। साल 1965 में शास्त्री जी ने Administrative Services की एक कॉन्फ्रेंस में एक महत्वपूर्ण बात कही थी जिसका जिक्र मैं आज यहां आपके सामने करना चाहता हूं। उन्होंने कहा था कि -The Basic Idea of Governance, as I see it, is to hold the society together so that it can develop and march towards certain goals. The task of the government is to facilitate this evolution, this process. मुझे संतोष है कि कोरोना के इस संकट काल में हम सभी ने एकजुट होकर काम किया, जो सीख लाल बहादुर शास्‍त्री जी ने दी थी, उसी पर चलने का हम सबने प्रयास किया और इस दरम्‍यान संवेदनशीलता के साथ त्‍वरित फैसले भी किए गए, जरूरी संसाधन जुटाए भी गए और देश की जनता को निरंतर हम लगातार जागरूक भी करते रहे और आज इसी का परिणाम है कि भारत में कोरोना का संक्रमण वैसा नहीं है और न ही वैसा फैला है जैसा दुनिय के अन्य देशों में हमने देखा है। जितनी घबराहट और चिंता 7-8 महीने पहले देशवासियों में थी, अब लोग उससे बाहर निकल चुके हैं। ये अच्‍छी स्थिति है लेकिन careless न हो जाएं, य भी हमें चिन्‍ता करनी है। देशवासियों में बढ़ते विश्वास का प्रभाव आर्थिक गतिविधियों पर भी सकारात्मक रूप से दिखाई दे रहा है। मैं आपके राज्य प्रशासन की भी दिन रात जुटे रहने के लिए, प्रशंसा करता हूं।

साथियों,

अब हमारा देश कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहा है। ये चरण है- वैक्सीनेशन का। जैसे यहां जिक्र हुआ, 16 जनवरी से हम दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरु कर रहे हैं। ये हम सभी के लिए गौरव की बात है कि जिन दो वैक्सीन्स को Emergency Use Authorization दिया गया है, वो दोनों ही मेड इन इंडिया है। इतना ही नहीं, 4 और वैक्सीन्स, progress में हैं। और ये जो मैं करीब 60-70 पर्सेंट काम पहले राउण्‍ड का होने के बाद बैठने की चर्चा इसलिए करता हूं कि उसे बाद और वैक्‍सीन भी आ जाएगी और जब और वैक्‍सीन आ जाएगी तो हमें फ्यूचर के प्‍लान करने में वो भी बहुत बड़ी सुविधा रहेगी और इसलिए second part जो है, उसमें हम 50 से ऊपर वाले के लिए जानेवाले हैं, तब तक शायद हमारे पास और भी वैक्‍सीन आने की संभावनाएं हैं।

साथियों,

देशवासियों को एक प्रभावी वैक्सीन देने के लिए हमारे Experts ने हर प्रकार की सावधानियां बरतीं हैं। और अभी scientific community के तरफ से विस्‍तार से हमे बताया भी गया है। और आपको मालूम होगा कि मै इस विषय में जब भी मुख्‍यमंत्रियों के साथ बात हुई। मैंने हमेशा एक ही जवाब दिया था कि इस विषय में हमें जो भी निर्णय करना होगा, वो scientific community जो कहंगी, वही हम करेंगे। scientific community को ही हम final word मानेंगे और हम उसी प्रकार चलते रहें हैं। कई लोग कहते थे देखिए दुनिया में वैक्‍सीन आ गई है। भारत क्‍या कर रहा है, भारत सो रहा है, इतने लाख हो गया, इतना हो गया, ऐसी भी चिल्‍लाहट हुई। लेकिन फिर भी हमारा मत था कि scientific community व देश के लिए जिम्‍मेवार लोग हैं। उनकी तरफ से जब आएगा तभी हमारे लिए उचित होगा और हम उसी दिशा में चले हैं। बड़ी बात, जो मैं दोहराना चाहता हूं कि हमारी दोनों Vaccines दुनिया की दूसरी Vaccines से ज्यादा cost-effective हैं। हम कल्पना कर सकते हैं अगर भारत को कोरोना टीकाकरण के लिए विदेशी वैक्सीन्स पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ता तो हमारे क्‍या हालत होते, कितनी बड़ी मुश्किल होती, हम उसका अंदाजा लगा सकते हैं। ये Vaccines भारत की स्थितियों और परिस्थितियों को देखते हुए निर्मित की गई हैं। भारत को टीकाकरण का जो अनुभव है, जो दूर-सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचने की व्यवस्थाएं हैं, वो कोरोना वैक्सीनेशन कार्यक्रम में बहुत उपयोगी सिद्ध होने वाली हैं।

साथियों,

आप सभी राज्यों के साथ सलाह-मशविरा करके ही ये तय किया गया है कि टीकाकरण अभियान की शुरुआत में किसे प्राथमिकता दी जाएगी। हमारी कोशिश सबसे पहले उन लोगों तक कोरोना वैक्सीन पहुंचाने की है जो देशवासियों की स्वास्थ्य सुरक्षा में दिन-रात जुटे हैं। जो हमारे Health Workers हैं, सरकारी हों या प्राइवेट, पहले उनको टीका लगाया जाएगा। इसके साथ-साथ हमारे जो सफाई कर्मचारी हैं, दूसरे Front Line Workers हैं, सैन्य बल है, पुलिस और केंद्रीय बल हैं, होम गार्ड हैं, Disaster management volunteers समेत तमाम सिविल डिफेंस के जवान हैं, Containment और surveillance से जुड़े रेवेन्यु कर्मचारी हैं, ऐसे साथियों को भी पहले चरणों में टीका लगाया जा रहा है। देश के अलग-अलग राज्यों के हेल्थ वर्कर्स, फ्रंट लाइन वर्कर्स की संख्या देखें तो ये करीब-करीब 3 करोड़ होती है। ये तय किया गया है कि पहले चरण में इन 3 करोड़ लोगों को वैक्सीन देने के लिए जो खर्च होगा, वो राज्य सरकारों को वहन नहीं करना है, भारत सरकार इसको वहन करेगी।

साथियों,

वैक्सीनेशन के दूसरे चरण में वैसे एक प्रकार से वह तीसरा चरण हो जाएगा लेकिन अगर हम इन तीन करोड़ को एक मानें तो दूसरा चरण। 50 वर्ष से ऊपर के सभी लोगों को और 50 वर्ष से नीचे के उन बीमार लोगों को जिनको संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है, उनको टीका लगाया जाएगा। आप सभी परिचित हैं कि बीते कुछ हफ्तों में ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर Logistics तक की तैयारियां सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श करके लगातार मीटिंग करके modules बना करे इसको पूरा किया गया है। देश के लगभग हर जिले में Dry Runs भी पूरे हो चुके हैं। इतने बड़े देश में सभी जिलों में dry runs हो जाना ये भी अपने-आप में हमारी काफी बड़ी capability को दिखाता है। हमारी जो नई तैयारियां हैं, जो COVID के SOPs हैं, उनको अब हमें अपने पुराने अनुभवों के साथ जोड़ना है। भारत में पहले से ही अनेक universal immunization programmes already चल रहे हैं, हमारे लोग बड़ी सफलतापूर्वक कर भी रहे हैं। मीसल्स - रूबेला जैसी बीमारियों के खिलाफ भी व्यापक कैंपेन हमलोग चला चुके हैं। दुनिया के सबसे बड़े चुनाव और देश के कोने-कोने तक पहुंचकर मतदान की सुविधा देने का भी हमारे पास बहुत ही अच्‍छा अनुभव है। इसके लिए जो बूथ स्तर की रणनीति हम बनाते हैं, उसी को हमें यहां भी प्रयोग में लाना है।

साथियों,

इस टीकाकरण अभियान में सबसे अहम, उनकी पहचान और मॉनीटरिंग का है जिनको टीका लगाना है। इसके लिए आधुनिक टेक्नॉलॉजी का उपयोग करते हुए, Co-WIN नाम का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बनाया गया है। आधार की मदद से लाभार्थियों की पहचान भी की जाएगी और उनको दूसरी डोज़ समय पर मिले ये भी सुनिश्चित किया जाएगा। मेरा आप सभी से ये विशेष आग्रह रहेगा कि टीकाकरण से जुड़ा रियल टाइम डेटा Co-Win पर अपलोड हो, ये सुनिश्चित करना है। इसमें ज़रा सी चूक भी इस मिशन को नुकसान पहुंचा सकती है। Co-Win पहले टीके के बाद एक डिजिटल Vaccination Certificate generate करेगा। लाभार्थी को ये सर्टिफिकेट टीका लगाने के बाद डिजिटली तुरंत देना ज़रूरी है, ताकि उसे सर्टिफिकेट लेने के लिए फिर ना आना पड़े। किसको टीका लग चुका है, ये तो इस सर्टिफिकेट से पता चलेगा ही, साथ ही दूसरी डोज उसको कब लगेगी इसके Reminder के रूप में भी ये काम करेगा। दूसरी डोज़ के बाद फाइनल सर्टिफिकेट दिया जाएगा।

साथियों,

भारत जो करने वाला है, उससे दुनिया के अनेक देश फिर Follow करेंगे, इसलिए हमारी ज़िम्मेदारी बहुत ज्‍यादा है। एक और अहम तथ्य है जिसका हमें ध्यान रखना है। दुनिया के 50 देशों में 3-4 सप्ताह से वैक्सीनेशन का काम चल रहा है, करीब-करीब एक महीना हुआ लेकिन अब भी करीब-करीब ढाई करोड़ लोग ही Vaccinate हो पाई है पूरी दुनिया में। उनकी अपनी तैयारियां हैं, उनका अपना अनुभव है, अपना सामर्थ्य है, वो अपने तरीके से कर रहे हैं। लेकिन अब भारत में हमें अगले कुछ महीनों में ही लगभग 30 करोड़ आबादी के टीकाकरण का लक्ष्य हासिल करना है। इस चुनौती का पूर्वानुमान लगाते हुए ही बीते महीनों में भारत ने बहुत व्यापक तैयारियां की हैं। कोरोना की वैक्सीन से अगर किसी को कुछ असहजता होती है, तो उसके लिए भी ज़रूरी प्रबंध किए गए हैं। Universal Immunization Programme में पहले से ही इसके लिए एक मैकेनिज्म हमारे पास रहता है। कोरोना टीकाकरण के लिए इसको और मज़बूत किया गया है।

साथियों,

वैक्सीन और टीकाकरण की इन बातों के बीच, हमें ये भी याद रखना है कि कोविड से जुड़े जो Protocols हम Follow करते आ रहे हैं उनको इस पूरी प्रक्रिया के दौरान भी बनाए रखना है। थोड़ा सा भी लुजनेस नुकसान कर सकता है और यही नहीं जिनको टीका लगाया जा रहा है, वो भी संक्रमण को रोकने के लिए जो सावधानियां हम लेते रहे हैं, उनको Follow करते रहें, ये सुनिश्चित करना ही होगा। एक और बात है जिस पर हमें बहुत गंभीरता से काम करना है। हर राज्य, हर केंद्र शासित प्रदेश को ये सुनिश्चित करना होगा कि अफवाहों पर, वैक्सीन से जुड़े अपप्रचार को कोई हवा ना मिले। ifs and buts से बात नहीं होनी चाहिए। देश और दुनिया के अनेक स्वार्थी तत्व हमारे इस अभियान में रुकावट डालने की कोशिश कर सकते हैं। कारपोरेट कंम्‍पीटिशन भी इसमें आ सकती हैं, कंट्री का प्राइड के नाम से भी आ सकती है। बहुत सी चीजें हो सकती हैं। ऐसी हर कोशिश को देश के हर नागरिक तक सही जानकारी पहुंचाकर हमें नाकाम करना है। इसके लिए हमें धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं, NYK, NSS, self-help groups, professional bodies, Rotary Lions Clubs और Red Cross जैसी संस्‍थाएं इनको हमें साथ जोड़ना है, जो हमारी रुटीन स्वास्थ्य सेवाएं हैं, जो दूसरे टीकाकरण अभियान वो भी ठीक से चलते रहें, इसका भी हमने ध्यान रखना है। क्‍योंकि हमें मालूम है, हम 16 को शुरू कर रहे हैं लेकिन हम 17 को भी रूटीन वैक्‍सीन का भी डेट है तो इसलिए हमारा जो रूटीन वैक्‍सीन का काम चलता है वो भी कहीं damage नहीं होना चाहिए।

आखिरी में एक और गंभीर विषय के बारे में, मैं आपसे जरूर बात करना चाहता हूं। देश के 9 राज्यों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। ये राज्य हैं - केरला, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र। बर्ड फ्लू से निपटने के लिए पशु पालन मंत्रालय द्वारा कार्ययोजना बनाई गई है जिसका तत्परता से पालन आवश्यक है। इसमें डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट्स की भी बड़ी भूमिका है। मेरा आग्रह है कि प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्री साथी भी मुख्य सचिवों के माध्यम से सभी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का मार्गदर्शन करें। जिन राज्यों में अभी बर्ड फ्लू नहीं पहुंचा है, वहां की राज्य सरकारों को भी पूरी तरह सतर्क रहना होगा। हमें, सभी राज्यों-स्थानीय प्रशासन को वाटर बॉडीज के आसपास, पक्षी बाजारों में, Zoo में, Poultry Farm इत्यादि पर निरंतर निगरानी रखनी है ताकि पक्षियों के बीमार होने की जानकारी प्राथमिकता पर मिले। बर्ड फ्लू की जांच के लिए जो लैबोरेटरीज हैं, वहां समय पर सैंपल भेजने से सही स्थिति का जल्दी पता लगेगा और स्थानीय प्रशासन भी उतनी ही तेजी से कार्रवाई कर पाएगा। वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पशु पालन विभाग के बीच जितना अधिक कॉ-ऑर्डिनेशन होगा, उतनी ही तेजी से हम बर्ड फ्लू के नियंत्रण में सफल होंगे। बर्ड फ्लू को लेकर लोगों में अफवाहें न फैलें, इसे भी हमें देखना होगा। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे एकजुट प्रयास, हर चुनौती से देश को बाहर निकालेंगे।

मैं फिर एक बार आप सबका बहुत आभारी हूं और 60 पर्सेंट काम होने के बाद हम दोबारा एक बार बैठ करके रिव्‍यू करेंगे। उस समय जरा विस्‍तार से भी बात करेंगे और तब तक कुछ नई वैक्‍सीन आ जाए तो उसको भी हम संज्ञान में ले करके आगे की अपनी रणनीति बनाएंगे।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद आप सबका।

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प्रधानमंत्री 20 अक्टूबर को वैश्विक तेल एवं गैस क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) और विशेषज्ञों के साथ बातचीत करेंगे
October 19, 2021
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 20 अक्टूबर, 2021 को शाम 6 बजे वैश्विक तेल एवं गैस क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) और विशेषज्ञों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत करेंगे। यह ऐसी छठी वार्षिक बातचीत है, जिसकी वर्ष 2016 में शुरुआत हुई थी। यह तेल एवं गैस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों की भागीदारी का प्रतीक है। ये अग्रणी देश तेल और गैस क्षेत्र से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं और भारत के साथ सहयोग एवं निवेश के संभावित क्षेत्रों का पता लगाते हैं।

इस बातचीत का मुख्य विषय स्वच्छ विकास और स्थिरता को बढ़ावा देना है। इस बातचीत में भारत में हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में खोज और उत्पादन को प्रोत्साहन देने, ऊर्जा स्वतंत्रता, गैस आधारित अर्थव्यवस्था, स्वच्छ और ऊर्जा के मामले में सक्षम उपायों के माध्यम से उत्सर्जन घटाना, हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था, जैव ईंधन उत्पादन को बढ़ाना तथा अपशिष्ट से धन सृजन जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रमुख बहुराष्ट्रीय निगमों और शीर्ष अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सीईओ और विशेषज्ञ विचारों के इस आदान-प्रदान में शामिल होंगे।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।