"जब दूसरों की आकांक्षाएँ, अपनी आकांक्षाएँ बन जाएँ, जब दूसरों के सपनों को पूरा करना अपनी सफलता का पैमाना बन जाए, तो फिर वो कर्तव्य पथ इतिहास रचता है"
“आज आकांक्षी जिले, देश के आगे बढ़ने के अवरोध को समाप्त कर रहे हैं। वे गतिरोधक के बजाय गतिवर्धक बन रहे हैं”
"आज आज़ादी के अमृतकाल में देश का लक्ष्य है सेवाओं और सुविधाओं का शत प्रतिशत सैचुरेशन"
“डिजिटल इंडिया के रूप में देश एक साइलेंट रिवॉल्यूशन का साक्षी बन रहा है। हमारा कोई भी जिला इसमें पीछे नहीं छूटना चाहिए”

नमस्कार !

कार्यक्रम में हमारे साथ उपस्थित देश के अलग-अलग राज्यों के सम्मानित मुख्यमंत्रीगण, लेफ्टिनेंट गवर्नर्स, केंद्रीय मंत्रीमंडल के मेरे सहयोगी, सभी साथी, राज्यों के सभी मंत्री, विभिन्न मंत्रालयों के सचिव और सैकड़ों जिलों के जिलाधिकारी, कलेक्टर-कमिश्नर, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों,

जीवन में अक्सर हम देखते हैं कि लोग अपनी आकांक्षाओं के लिए दिन रात परिश्रम करते हैं और कुछ मात्रा में उन्हें पूरा भी करते हैं। लेकिन जब दूसरों की आकांक्षाएँ, अपनी आकांक्षाएँ बन जाएँ, जब दूसरों के सपनों को पूरा करना अपनी सफलता का पैमाना बन जाए, तो फिर वो कर्तव्य पथ इतिहास रचता है। आज हम देश के Aspirational Districts-आकांक्षी जिलों में यही इतिहास बनते हुए देख रहे हैं। मुझे याद है, 2018 में ये अभियान शुरू हुआ था, तो मैंने कहा था कि जो इलाके दशकों से विकास से वंचित हैं, उनमें लोगों की सेवा करने का अवसर, ये अपने आप में एक बहुत बड़ा सौभाग्‍य है। मुझे ख़ुशी है कि आज जब देश अपनी आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, तो आप इस अभियान की अनेकों उपलब्धियों के साथ आज यहाँ उपस्थित हैं। मैं आप सभी को आपकी सफलता के लिए बधाई देता हूं, आपके नए लक्ष्यों के लिए शुभकामनाएं देता हूँ। मैं मुख्‍यमंत्रियों का भी और राज्‍यों का भी विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं कि उन्‍होंने, मैंने देखा कि अनेक जिलों में होनहार और बड़े तेज तर्रार नौजवान अफसरों को लगाया है, ये अपने आप में एक सही रणनीति है। उसी प्रकार से जहां vacancy थी उसको भरने में भी priority दी है। तीसरा मैंने देखा है कि उन्‍होंने tenure को भी stable रखा है। यानी एक प्रकार से aspirational districts में होनहार लीडरशिप, होनहार टीम देने का काम मुख्‍यमंत्रियों ने किया है। आज शनिवार है, छुट्टी का मूड होता है, उसके बावजूद भी सभी आदरणीय मुख्‍यमंत्री समय निकाल करके इसमें हमारे साथ जुड़े हैं। आप सब भी छुट्टी मनाये बिना आज इस कार्यक्रम में जुड़े हैं। ये दिखाता है कि aspirational district का राज्‍यों का मुख्‍यमंत्रियों के दिल में भी कितना महत्‍व है। वे भी अपने राज्‍य में इस प्रकार से जो पीछे रह गये हैं, उनको राज्‍य की बराबरी में लाने के लिये कितने दृढ़निश्चयी हैं, ये इस बात का सबूत है।

साथियों,

हमने देखा है कि एक तरफ बजट बढ़ता रहा, योजनाएं बनती रहीं, आंकड़ों में आर्थिक विकास भी होता दिखा, लेकिन फिर भी आजादी के 75 साल, इतनी बड़ी लंबी यात्रा के बाद भी देश में कई जिले पीछे ही रह गए। समय के साथ इन जिलों पर पिछड़े जिले का टैग लगा दिया गया। एक तरफ देश के सैकड़ों जिले प्रगति करते रहे, दूसरी तरफ ये पिछड़े जिले और पीछे होते चले गए। पूरे देश की प्रगति के आंकड़ों को भी ये जिले नीचे कर देते थे। समग्र रूप से जब परिवर्तन नजर नहीं आता है, तो जो जिले अच्छा कर रहे हैं, उनमें भी निराशा आती है और इसलिए देश ने इन पीछे रह गए जिलों की Hand Holding पर विशेष ध्यान दिया। आज Aspirational Districts, देश के आगे बढ़ने के अवरोध को समाप्त कर रहे हैं। आप सबके प्रयासों से, Aspirational Districts, आज गतिरोधक के बजाय गतिवर्धक बन रहे हैं। जो जिले पहले कभी तेज प्रगति करने वाले माने जाते थे, आज कई पैरामीटर्स में ये Aspirational Districts उन जिलों से भी अच्छा काम करके दिखा रहे हैं। आज यहां इतने माननीय मुख्यमंत्री जुड़े हुए हैं। वो भी मानेंगे कि उनके यहां के आकांक्षी जिलों ने कमाल का काम किया है।

साथियों,

Aspirational Districts इसमें विकास के इस अभियान ने हमारी जिम्मेदारियों को कई तरह से expand और redesign किया है। हमारे संविधान का जो आइडिया और संविधान का जो स्पिरिट है, उसे मूर्त स्वरूप देता है। इसका आधार है, केंद्र-राज्य और स्थानीय प्रशासन का टीम वर्क। इसकी पहचान है- फेडरल स्ट्रक्चर में सहयोग का बढ़ता कल्चर। और सबसे अहम बात, जितनी ज्यादा जन-भागीदारी, जितनी efficient monitoring उतने ही बेहतर परिणाम।

साथियों,

Aspirational Districts में विकास के लिए प्रशासन और जनता के बीच सीधा कनेक्ट, एक इमोशनल जुड़ाव बहुत जरूरी है। एक तरह से गवर्नेंस का 'टॉप टु बॉटम' और 'बॉटम टु टॉप' फ़्लो। और इस अभियान का महत्वपूर्ण पहलू है - टेक्नोलॉजी और इनोवेशन! जैसा कि हमने अभी के presentations में भी देखा, जो जिले, टेक्नोलॉजी का जितना ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं, गवर्नेंस और डिलिवरी के जितने नए तरीके इनोवेट कर रहे हैं, वो उतना ही बेहतर परफ़ॉर्म कर रहे हैं। आज देश के अलग-अलग राज्यों से Aspirational Districts की कितनी ही सक्सेस स्टोरीज़ हमारे सामने हैं। मैं देख रहा था, आज मुझे पाँच ही जिला अधिकारियों से बात करने का अवसर मिला। लेकिन बाकी जो यहां बैठे हैं, मेरे सामने सैकड़ों अधिकारी बैठे हैं। हर एक के पास कोई ना कोई success story है। अब देखिए हमारे सामने असम के दरांग का, बिहार के शेखपुरा का, तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडम का उदाहरण है। इन जिलों ने देखते ही देखते बच्चों में कुपोषण को काफी हद तक कम किया है। पूर्वोत्तर में असम के गोलपारा और मणिपुर के चंदेल जिलों ने पशुओं के वैक्सीनेशन को 4 साल में 20 प्रतिशत से 85 प्रतिशत पर पहुंचा दिया है। बिहार में जमुई और बेगूसराय जैसे जिले, जहां 30 प्रतिशत आबादी को भी बमुश्किल दिन भर में एक बाल्टी पीने का नसीब होता था, वहां अब 90 प्रतिशत आबादी को पीने का साफ पानी मिल रहा है। हम कल्पना कर सकते हैं कि कितने ही गरीबों, कितनी महिलाओं, कितने बच्चों बुजुर्गों के जीवन में सुखद बदलाव आया है। और मैं ये कहूंगा कि ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। हर आंकड़े के साथ कितने ही जीवन जुड़े हुए हैं। इन आंकड़ों में आप जैसे होनहार साथियों के कितने ही Man-hours लगे हैं, Man-power लगा है, इसके पीछे आप सब, आप सब लोगों की तप-तपस्या और पसीना लगा है। मैं समझता हूं, ये बदलाव, ये अनुभव आपके पूरे जीवन की पूंजी है।

साथियों,

Aspirational Districts में देश को जो सफलता मिल रही है, उसका एक बड़ा कारण अगर मैं कहूंगा तो वो है Convergence और अभी कर्नाटका के हमारे अधिकारी ने बताया कि Silos में से कैसे बाहर आए। सारे संसाधन वही हैं, सरकारी मशीनरी वही है, अधिकारी वही हैं लेकिन परिणाम अलग-अलग हैं। किसी भी जिले को जब एक यूनिट के तौर पर एक इकाई के तौर पर देखा जाता है, जब जिले के भविष्य को सामने रखकर काम किया जाता है, तो अधिकारियों को अपने कार्यों की विशालता की अनुभूति होती हैं। अधिकारियों को भी अपनी भूमिका के महत्व का अहसास होता है, एक Purpose of Life फील होता है। उनकी आंखों के सामने जो बदलाव आ रहे होते हैं और जो परिणाम दिखते हैं, उनके जिले के लोगों की जिंदगी में जो बदलाव दिखते हैं, अधिकारियों को, प्रशासन से जुड़े लोगों को इसका Satisfaction मिलता है। और ये Satisfaction कल्पना से परे होता है, शब्दों से परे होता है। यह मैंने स्वयं देखा है जब ये कोरोना नहीं था तो मैंने नियम बना रखा था कि अगर किसी भी राज्‍य में जाता था, तो Aspirational District के लोगों को बुलाता था, उन अधिकारियों के साथ खुल के बाते करता था, चर्चा करता था। उन्हीं से बातचीत के बाद मेरा ये अनुभव बना है कि Aspirational Districts में जो काम कर रहे हैं, उनमें काम करने की संतुष्टि की एक अलग ही भावना पैदा हो जाती है। जब कोई सरकारी काम एक जीवंत लक्ष्य बन जाता है, जब सरकारी मशीनरी एक जीवंत इकाई बन जाती है, टीम स्पीरिट से भर जाती है, टीम एक कल्चर को लेकर आगे बढ़ती है, तो नतीजे वैसे ही आते हैं, जैसे हम Aspirational Districts में देख रहे हैं। एक दूसरे का सहयोग करते हुए, एक दूसरे से Best Practices शेयर करते हुए, एक दूसरे से सीखते हुए, एक दूसरे को सिखाते हुए, जो कार्यशैली विकसित होती है, वो Good Governance की बहुत बड़ी पूंजी है।

साथियों,

Aspirational Districts- आकांक्षी जिलों में जो काम हुआ है, वो विश्व की बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटीज के लिए भी अध्ययन का विषय है। पिछले 4 सालों में देश के लगभग हर आकांक्षी जिले में जन-धन खातों में 4 से 5 गुना की वृद्धि हुई है। लगभग हर परिवार को शौचालय मिला है, हर गाँव तक बिजली पहुंची है। और बिजली सिर्फ गरीब के घर में नहीं पहुंची है बल्कि लोगों के जीवन में ऊर्जा का संचार हुआ है, देश की व्यवस्था पर इन क्षेत्रों के लोगों का भरोसा बढ़ा है।

साथियों,

हमें अपने इन प्रयासों से बहुत कुछ सीखना है। एक जिले को दूसरे जिले की सफलताओं से सीखना है, दूसरे की चुनौतियों का आकलन करना है। कैसे मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में 4 साल के भीतर गर्भवती महिलाओं का पहली तिमाही में रजिस्ट्रेशन 37 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत हो गया? कैसे अरुणाचल के नामसाई में, हरियाणा के मेवात में और त्रिपुरा के धलाई में institutional delivery 40-45 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत पर पहुँच गई? कैसे कर्नाटका के रायचूर में, नियमित अतिरिक्त पोषण पाने वाली गर्भवती महिलाओं की संख्या 70 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत हो गई? कैसे हिमाचल प्रदेश के चंबा में, ग्राम पंचायत स्तर पर कॉमन सर्विस सेंटर्स की कवरेज 67 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत हो गई? या फिर छत्तीसगढ़ के सुकमा में, जहां 50 फीसदी से भी कम बच्चों का टीकाकरण हो पाता था, वहाँ अब 90 प्रतिशत टीकाकरण हो रहा है। इन सभी सक्सेस स्टोरीज़ में पूरे देश के प्रशासन के लिए अनेकों नयी-नयी बाते सीखने जैसी हैं, अनेक नये-नये सबक भी हैं।

साथियों,

आपने तो देखा है कि Aspirational Districts में जो लोग रहते हैं, उनमें आगे बढ़ने की कितनी तड़प होती है, कितनी ज्यादा आकांक्षा होती है। इन जिलों के लोगों ने अपने जीवन का बहुत लंबा समय अभाव में, अनेक मुश्किलों में गुजारा है। हर छोटी-छोटी चीज के लिए उन्हें मशक्कत करनी पड़ी है, संघर्ष करना पड़ा है। उन्होंने इतना अंधकार देखा होता है कि उनमें, इस अंधकार से बाहर निकलने की जबरदस्त अधीरता होती है। इसलिए वो लोग साहस दिखाने के लिए तैयार होते हैं, रिस्क उठाने के लिए तैयार होते हैं और जब भी अवसर मिलता है, उसका पूरा लाभ उठाते हैं। Aspirational Districts में जो लोग रहते हैं, जो समाज है, हमें उसकी ताकत को समझना चाहिए, पहचानना चाहिए। और मैं मानता हूं, इसका भी बहुत प्रभाव Aspirational Districts में हो रहे कार्यों पर दिखता है। इन क्षेत्रों की जनता भी आपके साथ आकर काम करती है। विकास की चाह, साथ चलने की राह बन जाती है। और जब जनता ठान ले, शासन प्रशासन ठान ले, तो फिर कोई पीछे कैसे रह सकता है। फिर तो आगे ही जाना है, आगे ही बढ़ना है। और आज यही Aspirational Districts के लोग कर रहे हैं।

साथियों,

पिछले साल अक्टूबर में मुझे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री रहते हुए जनता की सेवा करते हुए 20 साल से भी अधिक समय हो गया। उससे पहले भी मैंने दशकों तक देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रशासन के काम को, काम करने के तरीके को बहुत करीब से देखा है, परखा है। मेरा अनुभव है कि निर्णय प्रक्रिया में जो Silos होते हैं, उससे ज्यादा नुकसान, Implementation में जो Silos होता है, तब वो नुकसान भयंकर होता है। और Aspirational Districts ने ये साबित किया है कि Implementation में Silos खत्म होने से, संसाधनों का Optimum Utilisation होता है। Silos जब खत्म होते हैं तो 1+1, 2 नहीं बनता, Silos जब खत्‍म हो जाते हैं तब 1 और 1, 11 बन जाता है। ये सामर्थ्य, ये सामूहिक शक्ति, हमें आज Aspirational Districts में नजर आ रही है। हमारे आकांक्षी जिलों ने ये दिखाया है कि अगर हम गुड गवर्नेंस के बेसिक सिद्धांतों को फॉलो करें, तो कम संसाधनों में भी बड़े परिणाम आ सकते हैं। और इस अभियान में जिस अप्रोच के साथ काम किया गया, वो अपने आप में अभूतपूर्व है। आकांक्षी जिलों में देश की पहली अप्रोच रही- कि इन जिलों की मूलभूत समस्याओं को पहचानने पर खास काम किया गया। इसके लिए लोगों से उनकी समस्याओं के बारे में सीधे पूछा गया, उनसे जुड़ा गया। हमारी दूसरी अप्रोच रही कि - आकांक्षी जिलों के अनुभवों के आधार पर हमने कार्यशाली में निरंतर सुधार किया। हमने काम का तरीका ऐसा तय किया, जिसमें Measurable indicators का selection हो, जिसमें जिले की वर्तमान स्थिति के आकलन के साथ प्रदेश और देश की सबसे बेहतर स्थिति से तुलना हो, जिसमें प्रोग्रेस की रियल टाइम monitoring हो, जिसमें दूसरे जिलों के साथ healthy Competition हो, और बेस्ट प्रैक्टिसेस को replicate करने का उमंग हो, उत्‍साह हो, प्रयास हो। इस अभियान के दौरान तीसरी अप्रोच ये रही कि हम ऐसे गवर्नेंस reforms किए जिससे जिलों में एक प्रभावी टीम बनाने में मदद मिली। जैसे, नीति आयोग के प्रेजेंटेशन में अभी ये बात बताई गई कि ऑफिसर्स के stable tenure से नीतियों को बेहतर तरीके से लागू करने में बहुत मदद मिली। और इसके लिए मैं मुख्‍यमंत्रियों को बधाई देता हूं। उनका मैं अभिनंदन करता हूं। आप सभी तो इन अनुभवों से खुद गुजरे हुए हैं। मैंने ये बातें इसलिए दोहराईं ताकि लोगों को ये पता चल सके कि गुड गवर्नेंस का प्रभाव क्या होता है। जब हम emphasis on basics के मंत्र पर चलते हैं, तो उसके नतीजे भी मिलते हैं। और आज मैं इसमें एक और चीज जोड़ना चाहूंगा। आप सभी का प्रयास होना चाहिए कि फील्ड विजिट के लिए, inspection और night halt के लिए detailed guidelines भी बनाई जाए, एक मॉडल विकसित हो। आप देखिएगा, आप सभी को इससे कितना ज्यादा लाभ होगा।

साथियों,

आकांक्षी जिलों में मिली सफलताओं को देखते हुए, देश ने अब अपने लक्ष्यों का और विस्तार किया है। आज आज़ादी के अमृतकाल में देश का लक्ष्य है सेवाओं और सुविधाओं का शत प्रतिशत saturation! यानी, हमने अभी तक जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उसके आगे हमें एक लंबी दूरी तय करनी है। और बड़े स्तर पर काम करना है। हमारे जिले में हर गाँव तक रोड कैसे पहुंचे, हर पात्र व्यक्ति के पास आयुष्मान भारत कार्ड कैसे पहुंचे, बैंक अकाउंट की व्‍यवस्‍था कैसे हो, कोई भी गरीब परिवार उज्ज्वला गैस कनैक्शन से वंचित न रहे, हर योग्य व्यक्ति को सरकार की बीमा का लाभ मिले, पेंशन और मकान जैसी सुविधाओं का लाभ मिले, ये हर एक जिले के लिए एक time bound target होना चाहिए। इसी तरह, हर जिले को अगले दो सालों के लिए अपना एक विज़न तय करना चाहिए। आप ऐसे कोई भी 10 काम तय कर सकते हैं, जिन्हें अगले 3 महीनों में पूरा किया जा सके, और उनसे सामान्य मानवी की ease of living बढ़े। इसी तरह, कोई 5 टास्क ऐसे तय करें जिन्हें आप आज़ादी के अमृत महोत्सव के साथ जुड़कर पूरा करें। ये काम इस ऐतिहासिक कालखंड में आपकी, आपके जिले की, जिले के लोगों की ऐतिहासिक उपलब्धियां बननी चाहिए। जिस तरह देश आकांक्षी जिलों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहा है, वैसे ही जिले में आप ब्लॉक लेवेल पर अपनी प्राथमिकताएं और लक्ष्य तय कर सकते हैं। आपको जिस जिले की ज़िम्मेदारी मिली है, आप उसकी खूबियों को भी जरूर पहचानें, उनसे जुड़ें। इन खूबियों में ही जिले का potential छिपा होता है। आपने देखा है, 'वन डिस्ट्रिक, वन प्रॉडक्ट' जिले की खूबियों पर ही आधारित है। आपके लिए ये एक मिशन होना चाहिए कि अपने डिस्ट्रिक्ट को नेशनल और ग्लोबल पहचान देनी है। यानि वोकल फॉर लोकल का मंत्र आप अपने जिलों पर भी लागू करिए। इसके लिए आपको जिले के पारंपरिक प्रॉडक्ट्स को, पहचान को, स्किल्स को पहचानना होगा और वैल्यू चेन्स को मजबूत करना होगा। डिजिटल इंडिया के रूप में देश एक silent revolution का साक्षी बन रहा है। हमारा कोई भी जिला इसमें पीछे नहीं छूटना चाहिए। डिजिटल इनफ्रास्ट्रक्चर हमारे हर गाँव तक पहुंचे, सेवाओं और सुविधाओं की डोर स्टेप डिलिवरी का जरिया बने, ये बहुत जरूरी है। नीति आयोग की रिपोर्ट में जिन जिलों की प्रगति अपेक्षा से धीमी आई है, उनके DMs को, सेंट्रल प्रभारी ऑफिसर्स को विशेष प्रयास करना होगा। मैं नीति आयोग को भी कहूँगा कि आप एक ऐसा mechanism बनाए जिससे सभी जिलों के DMs के बीच रेगुलर interaction होता रहे। हर जिला एक दूसरे की बेस्ट practices को अपने यहाँ लागू कर सके। केंद्र के सभी मंत्रालय भी उन सभी challenges को document करें, जो अलग-अलग जिलों में सामने आ रहे हैं। ये भी देखें कि इसमें पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान से कैसे मदद मिल सकती है।

साथियों,

आज के इस कार्यक्रम में मैं एक और चैलेंज आपके सामने रखना चाहता हूं, एक नया लक्ष्य भी देना चाहता हूं। ये चैलेंज देश के 22 राज्यों के 142 जिलों के लिए है। ये जिले विकास की दौड़ में पीछे नहीं हैं। ये aspirational district की category में नहीं हैं। ये काफी आगे निकले हुए हैं। लेकिन अनेक पैरामीटर में आगे होने के बावजूद भी एक आद दो पैरामीटर्स ऐसे हैं जिसमें वो पीछे रह गए हैं। और तभी मैंने मंत्रालयों को कहा था कि वो अपने-अपने मंत्रालय में ऐसा क्‍या-क्‍या है जो ढूंढ सकते हैं। किसी ने दस जिले ढूंढे, किसी ने चार जिले ढूंढे, तो किसी ने छ: जिले ढूंढे, ठीक है, अभी इतना आया है। जैसे कोई एक जिला है जहां बाकी सब तो बहुत अच्छा है लेकिन वहां कुपोषण की दिक्कत है। इसी तरह किसी जिले में सारे इंडीकेटर्स ठीक हैं लेकिन वो एजुकेशन में पिछड़ रहा है। सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों ने, अलग-अलग विभागों ने ऐसे 142 जिलों की एक लिस्ट तैयार की है। जिन एक-दो पैरामीटर्स पर ये अलग-अलग 142 जिले पीछे हैं, अब वहां पर भी हमें उसी कलेक्टिव अप्रोच के साथ काम करना है, जैसे हम Aspirational Districts में करते हैं। ये सभी सरकारों के लिए, भारत सरकार, राज्य सरकार, जिला प्रशासन, जो सरकारी मशीनरी है, उसके लिए एक नया अवसर भी है, नया चैलेंज भी है। इस चैलेंज को अब हमें मिलकर पूरा करना है। इसमें मैं अपने सभी मुख्यमंत्री साथियों का भी सहयोग हमेशा मिलता रहा है, आगे भी मिलता रहेगा, मुझे पूरा विश्‍वास है।

साथियों,

अभी कोरोना का समय भी चल रहा है। कोरोना को लेकर तैयारी, उसका मैनेजमेंट, और कोरोना के बीच भी विकास की रफ्तार को बनाए रखना, इसमें भी सभी जिलों की बड़ी भूमिका है। इन जिलों में भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए भी अभी से काम होना चाहिए।

साथियों,

हमारे ऋषियों ने कहा है- ''जल बिन्दु निपातेन क्रमशः पूर्यते घट:'' अर्थात्, बूंद बूंद से ही पूरा घड़ा भरता है। इसलिए, आकांक्षी जिलों में आपका एक एक प्रयास आपके जिले को विकास के नए आयाम तक लेकर जाएगा। यहां जो सिविल सर्विसेस के साथी जुड़े हैं, उनसे मैं एक और बात याद करने को मैं कहूंगा। आप वो दिन जरूर याद करें जब आपका इस सर्विस में पहला दिन था। आप देश के लिए कितना कुछ करना चाहते थे, कितना जोश से भरे हुए थे, कितने सेवा भाव से भरे हुए थे। आज उसी जज्बे के साथ आपको फिर आगे बढ़ना है। आजादी के इस अमृतकाल में, करने के लिए, पाने के लिए बहुत कुछ है। एक-एक आकांक्षी जिले का विकास देश के सपनों को पूरा करेगा। आज़ादी के सौ साल पूरे होने पर नए भारत का जो सपना हमने देखा है, उनके पूरे होने का रास्ता हमारे इन जिलों और गाँवों से होकर ही जाता है। मुझे पूरा भरोसा है कि आप अपने प्रयासों में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। देश जब अपने सपने पूरे करेगा, तो उसके स्वर्णिम अध्याय में एक बड़ी भूमिका आप सभी साथियों की भी होगी। इसी विश्वास के साथ, मैं सभी मुख्‍यमंत्रियों का धन्यवाद करते हुए आप सब नौजवान साथियो ने अपने-अपने जीवन में जो मेहनत की है, जो परिणाम लाए हैं, इसके लिये बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, धन्‍यवाद करता हूं ! आज सामने 26 जनवरी है, उस काम का भी प्रैशर होता है, जिलाधिकारियों को ज्‍यादा प्रैशर होता है। कोरोना का पिछले दो साल से आप लड़ाई के मैदान में अग्रिम पंक्‍ति में हैं। और ऐसे में शनिवार के दिन आप सबके साथ बैठने का थोड़ा ही जरा कष्‍ट दे ही रहा हूं मैं आपको, लेकिन फिर भी जिस उमंग और उत्‍साह के साथ आज आप सब जुड़े हैं, मेरे लिये खुशी की बात है। मैं आप सबको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूं ! बहुत-बहुत शुभाकामनाएं देता हूं !

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प्रधानमंत्री मोदी का ‘IANS’ के साथ इंटरव्यू
May 27, 2024

पहले तो मैं आपकी टीम को बधाई देता हूं भाई, कि इतने कम समय में आपलोगों ने अच्छी जगह बनाई है और एक प्रकार से ग्रासरूट लेवल की जो बारीक-बारीक जानकारियां हैं। वह शायद आपके माध्यम से जल्दी पहुंचती है। तो आपकी पूरी टीम बधाई की पात्र है।

Q1 - आजकल राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल को पाकिस्तान से इतना endorsement क्यों मिल रहा है ? 370 ख़त्म करने के समय से लेकर आज तक हर मौक़े पर पाकिस्तान से उनके पक्ष में आवाज़ें आती हैं ?

जवाब – देखिए, चुनाव भारत का है और भारत का लोकतंत्र बहुत ही मैच्योर है, तंदरुस्त परंपराएं हैं और भारत के मतदाता भी बाहर की किसी भी हरकतों से प्रभावित होने वाले मतदाता नहीं हैं। मैं नहीं जानता हूं कि कुछ ही लोग हैं जिनको हमारे साथ दुश्मनी रखने वाले लोग क्यों पसंद करते हैं, कुछ ही लोग हैं जिनके समर्थन में आवाज वहां से क्यों उठती है। अब ये बहुत बड़ी जांच पड़ताल का यह गंभीर विषय है। मुझे नहीं लगता है कि मुझे जिस पद पर मैं बैठा हूं वहां से ऐसे विषयों पर कोई कमेंट करना चाहिए लेकिन आपकी चिंता मैं समझ सकता हूं।

 

Q 2 - आप ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहिम तेज करने की बात कही है अगली सरकार जब आएगी तो आप क्या करने जा रहे हैं ? क्या जनता से लूटा हुआ पैसा जनता तक किसी योजना या विशेष नीति के जरिए वापस पहुंचेगा ?

जवाब – आपका सवाल बहुत ही रिलिवेंट है क्योंकि आप देखिए हिंदुस्तान का मानस क्या है, भारत के लोग भ्रष्टाचार से तंग आ चुके हैं। दीमक की तरह भ्रष्टाचार देश की सारी व्यवस्थाओं को खोखला कर रहा है। भ्रष्टाचार के लिए आवाज भी बहुत उठती है। जब मैं 2013-14 में चुनाव के समय भाषण करता था और मैं भ्रष्टाचार की बातें बताता था तो लोग अपना रोष व्यक्त करते थे। लोग चाहते थे कि हां कुछ होना चाहिए। अब हमने आकर सिस्टमैटिकली उन चीजों को करने पर बल दिया कि सिस्टम में ऐसे कौन से दोष हैं अगर देश पॉलिसी ड्रिवन है ब्लैक एंड व्हाइट में चीजें उपलब्ध हैं कि भई ये कर सकते हो ये नहीं कर सकते हो। ये आपकी लिमिट है इस लिमिट के बाहर जाना है तो आप नहीं कर सकते हो कोई और करेगा मैंने उस पर बल दिया। ये बात सही है..लेकिन ग्रे एरिया मिनिमल हो जाता है जब ब्लैक एंड व्हाइट में पॉलिसी होती है और उसके कारण डिसक्रिमिनेशन के लिए कोई संभावना नहीं होती है, तो हमने एक तो पॉलिसी ड्रिवन गवर्नेंस पर बल दिया। दूसरा हमने स्कीम्स के सैचुरेशन पर बल दिया कि भई 100% जो स्कीम जिसके लिए है उन लाभार्थियों को 100% ...जब 100% है तो लोगों को पता है मुझे मिलने ही वाला है तो वो करप्शन के लिए कोई जगह ढूंढेगा नहीं। करप्शन करने वाले भी कर नहीं सकते क्योंकि वो कैसे-कैसे कहेंगे, हां हो सकता है कि किसी को जनवरी में मिलने वाला मार्च में मिले या अप्रैल में मिले ये हो सकता है लेकिन उसको पता है कि मिलेगा और मेरे हिसाब से सैचुरेशन करप्शन फ्री गवर्नेंस की गारंटी देता है। सैचुरेशन सोशल जस्टिस की गारंटी देता है। सैचुरेशन सेकुलरिज्म की गारंटी देता है। ऐसे त्रिविध फायदे वाली हमारी दूसरी स्कीम, तीसरा मेरा प्रयास रहा कि मैक्सिमम टेक्नोलॉजी का उपयोग करना। टेक्नोलॉजी में भी..क्योंकि रिकॉर्ड मेंटेन होते हैं, ट्रांसपेरेंसी रहती है। अब डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर में 38 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हमने। अगर राजीव गांधी के जमाने की बात करें कि एक रुपया जाता है 15 पैसा पहुंचता है तो 38 लाख करोड़ तो हो सकता है 25-30 लाख करोड़ रुपया ऐसे ही गबन हो जाते तो हमने टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग किया है। जहां तक करप्शन का सवाल है देश में पहले क्या आवाज उठती थी कि भई करप्शन तो हुआ लेकिन उन्होंने किसी छोटे आदमी को सूली पर चढ़ा दिया। सामान्य रूप से मीडिया में भी चर्चा होती थी कि बड़े-बड़े मगरमच्छ तो छूट जाते हैं, छोटे-छोटे लोगों को पकड़कर आप चीजें निपटा देते हो। फिर एक कालखंड ऐसा आया कि हमें पूछा जाता था 19 के पहले कि आप तो बड़ी-बड़ी बातें करते थे क्यों कदम नहीं उठाते हो, क्यों अरेस्ट नहीं करते हो, क्यों लोगों को ये नहीं करते हो। हम कहते थे भई ये हमारा काम नहीं है, ये स्वतंत्र एजेंसी कर रही है और हम बदइरादे से कुछ नहीं करेंगे। जो भी होगा हमारी सूचना यही है जीरो टोलरेंस दूसरा तथ्यों के आधार पर ये एक्शन होना चाहिए, परसेप्शन के आधार पर नहीं होना चाहिए। तथ्य जुटाने में मेहनत करनी पड़ती है। अब अफसरों ने मेहनत भी की अब मगरमच्छ पकड़े जाने लगे हैं तो हमें सवाल पूछा जा रहा है कि मगरमच्छों को क्यों पकड़ते हो। ये समझ में नहीं आता है कि ये कौन सा गैंग है, खान मार्केट गैंग जो कुछ लोगों को बचाने के लिए इस प्रकार के नैरेटिव गढ़ती है। पहले आप ही कहते थे छोटों को पकड़ते हो बड़े छूट जाते हैं। जब सिस्टम ईमानदारी से काम करने लगा, बड़े लोग पकड़े जाने लगे तब आप चिल्लाने लगे हो। दूसरा पकड़ने का काम एक इंडिपेंडेंट एजेंसी करती है। उसको जेल में रखना कि बाहर रखना, उसके ऊपर केस ठीक है या नहीं है ये न्यायालय तय करता है उसमें मोदी का कोई रोल नहीं है, इलेक्टेड बॉडी का कोई रोल नहीं है लेकिन आजकल मैं हैरान हूं। दूसरा जो देश के लिए चिंता का विषय है वो भ्रष्ट लोगों का महिमामंडन है। हमारे देश में कभी भी भ्रष्टाचार में पकड़े गए लोग या किसी को आरोप भी लगा तो लोग 100 कदम दूर रहते थे। आजकल तो भ्रष्ट लोगों को कंधे पर बिठाकर नाचने की फैशन हो गई है। तीसरा प्रॉब्लम है जो लोग कल तक जिन बातों की वकालत करते थे आज अगर वही चीजें हो रही हैं तो वो उसका विरोध कर रहे हैं। पहले तो वही लोग कहते थे सोनिया जी को जेल में बंद कर दो, फलाने को जेल में बंद कर दो और अब वही लोग चिल्लाते हैं। इसलिए मैं मानता हूं आप जैसे मीडिया का काम है कि लोगों से पूछे कि बताइए छोटे लोग जेल जाने चाहिए या मगरमच्छ जेल जाने चाहिए। पूछो जरा पब्लिक को क्या ओपिनियन है, ओपिनियन बनाइए आप लोग।

 

Q3- नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक सबने गरीबी हटाने की बात तो की लेकिन आपने आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया, इसे लेकर कैसे रणनीति तैयार करते हैं चाहे वो पीएम स्वनिधि योजना हो, पीएम मुद्रा योजना बनाना हो या विश्वकर्मा योजना हो मतलब एकदम ग्रासरूट लेवल से काम किया ?

जवाब – देखिए हमारे देश में जो नैरेटिव गढ़ने वाले लोग हैं उन्होंने देश का इतना नुकसान किया। पहले चीजें बाहर से आती थी तो कहते थे देखिए देश को बेच रहे हैं सब बाहर से लाते हैं। आज जब देश में बन रहा है तो कहते हैं देखिए ग्लोबलाइजेशन का जमाना है और आप लोग अपने ही देश की बातें करते हैं। मैं समझ नहीं पाता हूं कि देश को इस प्रकार से गुमराह करने वाले इन ऐलिमेंट्स से देश को कैसे बचाया जाए। दूसरी बात है अगर अमेरिका में कोई कहता है Be American By American उसपर तो हम सीना तानकर गर्व करते हैं लेकिन मोदी कहता है वोकल फॉर लोकल तो लोगों को लगता है कि ये ग्लोबलाइजेशन के खिलाफ है। तो इस प्रकार से लोगों को गुमराह करने वाली ये प्रवृत्ति चलती है। जहां तक भारत जैसा देश जिसके पास मैनपावर है, स्किल्ड मैनपावर है। अब मैं ऐसी तो गलती नहीं कर सकता कि गेहूं एक्सपोर्ट करूं और ब्रेड इम्पोर्ट करूं..मैं तो चाहूंगा मेरे देश में ही गेहूं का आटा निकले, मेरे देश में ही गेहूं का ब्रेड बने। मेरे देश के लोगों को रोजगार मिले तो मेरा आत्मनिर्भर भारत का जो मिशन है उसके पीछे मेरी पहली जो प्राथमिकता है कि मेरे देश के टैलेंट को अवसर मिले। मेरे देश के युवाओं को रोजगार मिले, मेरे देश का धन बाहर न जाए, मेरे देश में जो प्राकृतिक संसाधन हैं उनका वैल्यू एडिशन हो, मेरे देश के अंदर किसान जो काम करता है उसकी जो प्रोडक्ट है उसका वैल्यू एडिशन हो वो ग्लोबल मार्केट को कैप्चर करे और इसलिए मैंने विदेश विभाग को भी कहा है कि भई आपकी सफलता को मैं तीन आधारों से देखूंगा एक भारत से कितना सामान आप..जिस देश में हैं वहां पर खरीदा जाता है, दूसरा उस देश में बेस्ट टेक्नोलॉजी कौन सी है जो अभीतक भारत में नहीं है। वो टेक्नोलॉजी भारत में कैसे आ सकती है और तीसरा उस देश में से कितने टूरिस्ट भारत भेजते हो आप, ये मेरा क्राइटेरिया रहेगा...तो मेरे हर चीज में सेंटर में मेरा नेशन, सेंटर में मेरा भारत और नेशन फर्स्ट इस मिजाज से हम काम करते हैं।

 

Q 4 - एक तरफ आप विश्वकर्माओं के बारे में सोचते हैं, नाई, लोहार, सुनार, मोची की जरूरतों को समझते हैं उनसे मिलते हैं तो वहीं दूसरी तरफ गेमर्स से मिलते हैं, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की बात करते हैं, इन्फ्लुएंसर्स से आप मिलते हैं इनकी अहमियत को भी सबके सामने रखते हैं, इतना डाइवर्सीफाई तरीके से कैसे सोच पाते हैं?

जवाब- आप देखिए, भारत विविधताओं से भरा हुआ है और कोई देश एक पिलर पर बड़ा नहीं हो सकता है। मैंने एक मिशन लिया। हर डिस्ट्रिक्ट का वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट पर बल दिया, क्यों? भारत इतना विविधता भरा देश है, हर डिस्ट्रिक्ट के पास अपनी अलग ताकत है। मैं चाहता हूं कि इसको हम लोगों के सामने लाएं और आज मैं कभी विदेश जाता हूं तो मुझे चीजें कौन सी ले जाऊंगा। वो उलझन नहीं होती है। मैं सिर्फ वन डिस्ट्रिक, वन प्रोडक्ट का कैटलॉग देखता हूं। तो मुझे लगता है यूरोप जाऊंगा तो यह लेकर जाऊंगा। अफ्रीका जाऊंगा तो यह लेकर जाऊंगा। और हर एक को लगता है एक देश में। यह एक पहलू है दूसरा हमने जी 20 समिट हिंदुस्तान के अलग-अलग हिस्से में की है। क्यों? दुनिया को पता चले कि दिल्ली, यही हिंदुस्तान नहीं है। अब आप ताजमहल देखें तो टूरिज्म पूरा नहीं होता जी मेरे देश का। मेरे देश में इतना पोटेंशियल है, मेरे देश को जानिए और समझिए और इस बार हमने जी-20 का उपयोग भारत को विश्व के अंदर भारत की पहचान बनाने के लिए किया। दुनिया की भारत के प्रति क्यूरियोसिटी बढ़े, इसमें हमने बड़ी सफलता पाई है, क्योंकि दुनिया के करीब एक लाख नीति निर्धारक ऐसे लोग जी-20 समूह की 200 से ज्यादा मीटिंग में आए। वह अलग-अलग जगह पर गए। उन्होंने इन जगहों को देखा, सुना भी नहीं था, देखा वो अपने देश के साथ कोरिलिरेट करने लगे। वो वहां जाकर बातें करने लगे। मैं देख रहा हूं जी20 के कारण लोग आजकल काफी टूरिस्टों को यहां भेज रहे हैं। जिसके कारण हमारे देश का टूरिज्म को बढ़ावा मिला।

इसी तरह आपने देखा होगा कि मैंने स्टार्टअप वालों के साथ मीटिंग की थी, मैं वार्कशॉप करता था। आज से मैं 7-8 साल पहले, 10 साल पहले शुरू- शुरू में यानी मैं 14 में आया। उसके 15-16 के भीतर-भीतर मैंने जो नए स्टार्टअप की दुनिया शुरू हुई, उनकी मैंने ऐसे वर्कशॉप की है तो मैं अलग-अलग कभी मैंने स्पोर्ट्स पर्सन्स के की, कभी मैंने कोचों के साथ की कि इतना ही नहीं मैंने फिल्म दुनिया वालों के साथ भी ऐसी मीटिंग की।

मैं जानता हूं कि वह बिरादरी हमारे विचारों से काफी दूर है। मेरी सरकार से भी दूर है, लेकिन मेरा काम था उनकी समस्याओं को समझो क्योंकि बॉलीवुड अगर ग्लोबल मार्केट में मुझे उपयोगी होता है, अगर मेरी तेलुगू फिल्में दुनिया में पॉपुलर हो सकती है, मेरी तमिल फिल्म दुनिया पॉपुलर हो सकती है। मुझे तो ग्लोबल मार्केट लेना था मेरे देश की हर चीज का। आज यूट्यूब की दुनिया पैदा हुई तो मैंने उनको बुलाया। आप देश की क्या मदद कर सकते हैं। इंफ्लुएंसर को बुलाया, क्रिएटिव वर्ल्ड, गेमिंम अब देखिए दुनिया का इतना बड़ा गेमिंग मार्केट। भारत के लोग इन्वेस्ट कर रहे हैं, पैसा लगा रहे हैं और गेमिंग की दुनिया में कमाई कोई और करता है तो मैंने सारे गेमिंग के एक्सपर्ट को बुलाया। पहले उनकी समस्याएं समझी। मैंने देश को कहा, मेरी सरकार को मुझे गेमिंग में भारतीय लीडरशिप पक्की करनी है।

इतना बड़ा फ्यूचर मार्केट है, अब तो ओलंपिक में गेमिंग आया है तो मैं उसमें जोड़ना चाहता हूं। ऐसे सभी विषयों में एक साथ काम करने के पक्ष में मैं हूं। उसी प्रकार से देश की जो मूलभूत व्यवस्थाएं हैं, आप उसको नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। हमें गांव का एक मोची होगा, सोनार होगा, कपड़े सिलने वाला होगा। वो भी मेरे देश की बहुत बड़ी शक्ति है। मुझे उसको भी उतना ही तवज्जो देना होगा। और इसलिए मेरी सरकार का इंटीग्रेटेड अप्रोच होता है। कॉम्प्रिहेंसिव अप्रोच होता है, होलिस्टिक अप्रोच होता है।

 

Q 5 - डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया उसका विपक्ष ने मजाक भी उड़ाया था, आज ये आपकी सरकार की खास पहचान बन गए हैं और दुनिया भी इस बात का संज्ञान ले रही है, इसका एक उदहारण यूपीआई भी है।

जवाब – यह बात सही है कि हमारे देश में जो डिजिटल इंडिया मूवमेंट मैंने शुरू किया तो शुरू में आरोप क्या लगाए इन्होंने? उन्होंने लगाई कि ये जो सर्विस प्रोवाइडर हैं, उनकी भलाई के लिए हो रहा है। इनको समझ नहीं आया कि यह क्षेत्र कितना बड़ा है और 21वीं सदी एक टेक्नॉलॉजी ड्रिवन सेंचुरी है। टेक्नोलॉजी आईटी ड्रिवन है। आईटी इन्फोर्स बाय एआई। बहुत बड़े प्रभावी क्षेत्र बदलते जा रहे हैं। हमें फ्यूचरस्टीक चीजों को देखना चाहिए। आज अगर यूपीआई न होता तो कोई मुझे बताए कोविड की लड़ाई हम कैसे लड़ते? दुनिया के समृद्ध देश भी अपने लोगों को पैसे होने के बावजूद भी नहीं दे पाए। हम आराम से दे सकते हैं। आज हम 11 करोड़ किसानों को 30 सेकंड के अंदर पैसा भेज सकते हैं। अब यूपीआई अब इतनी यूजर फ्रेंडली है तो क्योंकि यह टैलेंट हमारे देश के नौजवानों में है। वो ऐसे प्रोडक्ट बना करके देते हैं कि कोई भी कॉमन मैन इसका उपयोग कर सकता है। आज मैंने ऐसे कितने लोग देखे हैं जो अपना सोशल मीडिया अनुभव कर रहे हैं। हमने छह मित्रों ने तय किया कि छह महीने तक जेब में 1 पैसा नहीं रखेंगे। अब देखते हैं क्या होता है। छह महीने पहले बिना पैसे पूरी दुनिया में हम अपना काम, कारोबार करके आ गए। हमें कोई तकलीफ नहीं हुई तो हर कसौटी पर खरा उतर रहा है। तो यूपीआई ने एक प्रकार से फिनटेक की दुनिया में बहुत बड़ा रोल प्ले किया है और इसके कारण इन दिनों भारत के साथ जुड़े हुए कई देश यूपीआई से जुड़ने को तैयार हैं क्योंकि अब फिनटेक का युग है। फिनटेक में भारत अब लीड कर रहा है और इसलिए दुर्भाग्य तो इस बात का है कि जब मैं इस विषय को चर्चा कर रहा था तब देश के बड़े-बड़े विद्वान जो पार्लियामेंट में बैठे हैं वह इसका मखौल उड़ाते थे, मजाक उड़ाते थे, उनको भारत के पोटेंशियल का अंदाजा नहीं था और टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य का भी अंदाज नहीं था।

 

Q 6 - देश के युवा भारत का इतिहास लिखेंगे ऐसा आप कई बार बोल चुके हैं, फर्स्ट टाइम वोटर्स का पीएम मोदी से कनेक्ट के पीछे का क्या कारण है?

एक मैं उनके एस्पिरेशन को समझ पाता हूं। जो पुरानी सोच है कि वह घर में अपने पहले पांच थे तो अब 7 में जाएगा सात से नौ, ऐसा नहीं है। वह पांच से भी सीधा 100 पर जाना चाहता है। आज का यूथ हर, क्षेत्र में वह बड़ा जंप लगाना चाहता है। हमें वह लॉन्चिंग पैड क्रिएट करना चाहिए, ताकि हमारे यूथ के एस्पिरेशन को हम फुलफिल कर सकें। इसलिए यूथ को समझना चाहिए। मैं परीक्षा पर चर्चा करता हूं और मैंने देखा है कि मुझे लाखों युवकों से ऐसी बात करने का मौका मिलता है जो परीक्षा पर चर्चा की चर्चा चल रही है। लेकिन वह मेरे साथ 10 साल के बाद की बात करता है। मतलब वह एक नई जनरेशन है। अगर सरकार और सरकार की लीडरशिप इस नई जनरेशन के एस्पिरेशन को समझने में विफल हो गई तो बहुत बड़ी गैप हो जाएगी। आपने देखा होगा कोविड में मैं बार-बार चिंतित था कि मेरे यह फर्स्ट टाइम वोटर जो अभी हैं, वह कोविड के समय में 14-15 साल के थे अगर यह चार दीवारों में फंसे रहेंगे तो इनका बचपन मर जाएगा। उनकी जवानी आएगी नहीं। वह बचपन से सीधे बुढ़ापे में चला जाएगा। यह गैप कौन भरेगा? तो मैं उसके लिए चिंतित था। मैं उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंस से बात करता था। मैं उनको समझाता था का आप यह करिए। और इसलिए हमने डेटा एकदम सस्ता कर दिया। उस समय मेरा डेटा सस्ता करने के पीछे लॉजिक था। वह ईजिली इंटरनेट का उपयोग करते हुए नई दुनिया की तरफ मुड़े और वह हुआ। उसका हमें बेनिफिट हुआ है। भारत ने कोविड की मुसीबतों को अवसर में पलटने में बहुत बड़ा रोल किया है और आज जो डिजिटल रिवॉल्यूशन आया है, फिनटेक का जो रिवॉल्यूशन आया है, वह हमने आपत्ति को अवसर में पलटा उसके कारण आया है तो मैं टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को समझता हूं। मैं टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना चाहता हूं।

प्रधानमंत्री जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपने हमें समय दिया।

नमस्कार भैया, मेरी भी आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं, आप भी बहुत प्रगति करें और देश को सही जानकारियां देते रहें।