हम सब मिलकर एक भव्य राम मंदिर बनाने की दिशा में काम करें: प्रधानमंत्री मोदी
राम जन्मभूमि के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं जो सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुरूप है: पीएम मोदी
राम जन्मभूमि मुद्दे पर फैसला आने के बाद भारत के लोगों ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उल्लेखनीय विश्वास प्रदर्शित किया है: प्रधानमंत्री

माननीय अध्यक्ष महोदय, आज मैं आपके बीच देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक विषय पर जानकारी देने के लिए विशेष तौर पर उपस्थित हूं। ये विषय करोड़ों देशवासियों की तरह ही मेरे ह्रदय के भी करीब है और इस पर बात करना मैं अपना बहुत बड़ा सौभाग्य समझता हूं। ये विषय श्रीराम जन्मभूमि से जुड़ा हुआ है। ये विषय है- अयोध्या में श्रीराम जन्मस्थली पर भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण से जुड़ा हुआ है। माननीय अध्यक्ष महोदय, 9 नवंबर 2019 को मैं करतारपुर साहिब कॉरिडोर के लोकार्पण हेतु पंजाब में था, गुरूनानक देव जी का 550वां प्रकाश पर्व था, बहुत ही पवित्र वातावरण था उसी दिव्य वातावरण में मुझे देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा रामजन्म भूमि विषय पर दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बारे में पता चला था। इस फैसले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि श्रीराम जन्मभूमि के विवादित स्थल के भीतरी और बाहरी आंगन पर रामलला विराजमान का ही स्वामित्व है। माननीय उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में ये भी कहा था कि केंद्र और राज्य सरकार आपस में परामर्श करके सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ ज़मीन आबंटित करें।

माननीय अध्यक्ष जी, मुझे आज इस सदन को, पूरे देश को ये बताते हुए बहुत ही खुशी हो रही है कि आज सुबह केंद्रीय मंत्रिमंडल की हुई बैठक में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। मेरी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार श्रीराम जन्मस्थली पर भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण के लिए और इससे संबंधित अन्य विषयों के लिए एक वृहद योजना तैयार की है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार एक स्वायत्त ट्रस्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र, ट्रस्ट का नाम होगा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का गठन करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। ये ट्रस्ट अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मस्थली पर भव्य और दिव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण और उससे संबंधित विषयों पर निर्णय लेने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र होगा।

माननीय अध्यक्ष जी, माननीय सर्वोच्च अदालत के आदेशानुसार गहन विचार-विमर्श और संवाद के बाद अयोध्या में 5 एकड़ ज़मीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को आबंटित करने का अनुरोध उत्तर प्रदेश सरकार से किया गया है। इस पर राज्य सरकार ने भी अपनी सहमति प्रदान कर दी है। माननीय अध्यक्ष जी, भारत की प्राण वायु में भारत के आदर्शो में, भारत की मर्यादा में भगवान श्री राम की महत्ता और अयोध्या की ऐतिहासिकता से अयोध्या धाम की पवित्रता से हम सभी भलीभांति परिचित है। अयोध्या में भगवान श्री राम के भव्य मंदिर के निर्माण में वर्तमान और भविष्य में रामलला के दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और उनके भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है मेरी सरकार ने फैसला किया है कि अयोध्या कानून के तहत अधिगृहित संपूर्ण भूमि जो लगभग 67.703 एकड़ है और जिसमें भीतरी और बाहरी आंगन भी सम्मिलित है उसे नवगठित श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र को हस्तांतरित किया जाए।

माननीय अध्यक्ष महोदय, नवंबर को राम जन्म भूमि पर फैसला आने के बाद सभी देशवासियों ने अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास जताते हुए बहुत ही परिपक्वता का उदाहरण दिया था। मैं आज सदन में देशवासियों के इस परिपक्व व्यवहार की भूरि‍-भूरि प्रशंसा करता हूं।

माननीय अध्यक्ष जी, हमारी संस्कृति, हमारी पंरपराएं, हमें वसुधैव कुटुम्बकम और सर्वे भवन्तु सुखिन: का दर्शन देती है। इसी भावना के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती है। हिंदुस्तान में हर पंथ के लोग चाहे वो हिंदु हो, मुस्लिम हो, सिख हो, ईसाई हो, बौद्ध, पारसी और जैन हो, हम सभी वृहद परिवार के सदस्य है। इस परिवार के हर सदस्य का विकास हो, वो सुखी रहे, स्वस्थ रहे, समृद्ध बने, देश का विकास हो, इसी भावना के साथ मेरी सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के मंत्र पर चल रही है आइए इस ऐतिहासिक क्षण में हम सभी सदस्य मिलकर अयोध्या में श्री राम के जीर्णोद्धार के लिए भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए एक स्वर में अपना समर्थन दें।

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पीएम मोदी ने 52वीं PRAGATI मीटिंग की अध्यक्षता की
June 24, 2026
प्रधानमंत्री ने सड़क, बिजली, औद्योगिक कॉरिडोर और मेट्रो रेल क्षेत्रों से जुड़ी लगभग 30,000 करोड़ रुपये लागत वाले चार प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की, जो चार राज्यों में फैली हुई हैं
प्रधानमंत्री ने कुशल योजना निर्माण के लिए पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के उपयोग तथा पोर्टल पर परियोजनाओं, उपयोगिताओं और अवसंरचना संबंधी आंकड़ों को समय पर अपडेट करने पर जोर दिया
प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों और राज्य सरकारों से लंबित मुद्दों का मिशन मोड में समाधान करने और उनकी कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने को कहा
प्रधानमंत्री ने टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा की और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित नवीनतम डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया
प्रधानमंत्री ने साइबर अपराध और डिजिटल गिरफ्तारी से संबंधित शिकायतों की समीक्षा की तथा समयबद्ध कार्रवाई, समन्वित प्रतिक्रिया और ई-जीरो एफआईआर पंजीकरण व्यवस्था पर जोर दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सेवा तीर्थ में 'प्रगति' की 52वीं बैठक की अध्यक्षता की। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित यह बहु-माध्यम मंच केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों को निर्बाध रूप से एकीकृत कर सक्रिय शासन और समयबद्ध क्रियान्वयन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सड़क, बिजली, औद्योगिक कॉरीडोर और मेट्रो रेल क्षेत्रों से संबंधित चार महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा की। लगभग 30,000 करोड़ रुपये लागत वाली ये परियोजनाएं चार राज्यों में फैली हुई हैं। आर्थिक विकास, क्षेत्रीय संपर्क, औद्योगिक प्रगति और जनकल्याण की दृष्टि से महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा समयसीमा, विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल, समस्याओं के समाधान और समय पर पूरा होने पर विशेष ध्यान देते हुए की गई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में देरी न केवल लागत बढ़ाती है, बल्कि लोगों और उद्योगों को समय पर मिलने वाले लाभों से भी वंचित कर देती है। उन्होंने संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों को लंबित मुद्दों का मिशन मोड में समाधान करने तथा उच्चतम स्तर पर उनकी सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रभावी योजना और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने परियोजनाओं के विवरण, उपयोगिताओं, अवसंरचना परतों, स्वीकृतियों और अन्य क्षेत्रीय सूचनाओं को पोर्टल पर नियमित एवं समय पर अपडेट करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मंच पर जमीनी स्तर की नवीनतम स्थिति दिखाई देनी चाहिए ताकि रूकावटों के बारे में पहले से पता चल सके और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर हो तथा विश्वसनीय एवं वास्तविक समय के आंकड़ों के आधार पर निर्णय लिए जा सकें।

प्रधानमंत्री ने टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा की और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित नवीनतम डिजिटल तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जागरूकता, रोगियों के फॉलो-अप और सामुदायिक सहभागिता के लिए एनसीसी कैडेटों और ‘माय भारत’ स्वयंसेवकों की एक टीम गठित करने का सुझाव दिया।

प्रधानमंत्री ने साइबर अपराध और डिजिटल गिरफ्तारी से संबंधित शिकायतों की भी समीक्षा की। उन्होंने नागरिकों को ठगने के लिए डिजिटल मंचों के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की और कहा कि ऐसे मामलों का सभी संबंधित एजेंसियों द्वारा समन्वित, संवेदनशील और समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी समस्या के समाधान के लिए एक विभाग या एजेंसी से दूसरी एजेंसी के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट जवाबदेही, त्वरित प्रतिक्रिया, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बैंकों और डिजिटल मंचों के बीच बेहतर समन्वय तथा जन-जागरूकता अभियानों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में वित्तीय नुकसान को रोकने और लोगों का विश्वास बहाल करने के लिए समय पर कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी हितधारकों से रोकथाम, रिपोर्टिंग, जांच और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों को साइबर धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित पंजीकरण और प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था लागू करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।