“सिर्फ 6 सालों में कृषि बजट कई गुणा बढ़ा है, किसानों के लिए कृषि लोन में भी 7 सालों में ढाई गुणा की बढ़ोतरी की गई है”
" साल 2023 इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स है, इसमें भी हमारा कॉरपोरेट जगत आगे आए, भारत के मिलेट्स की ब्रैंडिंग करे, प्रचार करे"
"आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस 21वीं सदी में खेती और खेती से जुड़े ट्रेड को बिल्कुल बदलने वाली है"
“पिछले 3-4 सालों में, देश में 700 से अधिक कृषि स्टार्टअप तैयार किए गए हैं”
“हमारी सरकार ने इससे जुड़ा नया मंत्रालय भी बनाया है, आपका लक्ष्य यह होना चाहिए कि सहकारी समितियों को एक सफल व्यावसायिक उद्यम में कैसे बदला जाए"

नमस्कार !

मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, इंडस्ट्री और अकादमी से जुड़े सभी साथी, कृषि विज्ञान केंद्रों से जुड़े हमारे सभी किसान भाई-बहन, देवियों और सज्जनों !

ये सुखद संयोग है कि 3 साल पहले आज ही के दिन पीएम किसान सम्मान निधि की शुरुआत की गई थी। ये योजना आज देश के छोटे किसानों का बहुत बड़ा संबल बनी है। इसके तहत देश के 11 करोड़ किसानों को लगभग पौने 2 लाख करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। इस योजना में भी हम स्मार्टनेस का अनुभव कर सकते हैं। सिर्फ एक क्लिक पर 10-12 करोड़ किसानों के बैंक खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर होना, ये अपने-आप में किसी भी भारतीय को, किसी भी हिन्‍दुस्‍तानी के लिए गर्व करने वाली बात है।

साथियों,

बीते 7 सालों में हमने बीज से बाज़ार तक ऐसी ही अनेक नई व्यवस्थाएं तैयार की हैं, पुरानी व्यवस्थाओं में सुधार किया है। सिर्फ 6 सालों में कृषि बजट कई गुणा बढ़ा है। किसानों के लिए कृषि लोन में भी 7 सालों में ढाई गुणा की बढ़ोतरी की गई है। कोरोना के मुश्किल काल में भी स्पेशल ड्राइव चलाकर हमने 3 करोड़ छोटे किसानों को KCC की सुविधा से जोड़ा है। इस सुविधा का विस्तार Animal Husbandry और Fisheries से जुड़े किसानों के लिए भी किया गया है। माइक्रो इरीगेशन का नेटवर्क जितना सशक्त हो रहा है, उससे भी छोटे किसानों को बहुत मदद मिल रही है।

साथियों,

इन्हीं सभी प्रयासों के चलते हर साल किसान रिकॉर्ड प्रोडक्शन कर रहे हैं और MSP पर भी खरीद के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। ऑर्गेनिक खेती को प्रोत्साहन देने के कारण आज organic products का मार्केट अब 11,000 करोड़ का हो चुका है। इसका एक्सपोर्ट भी 6 वर्षों में 2000 करोड़ से बढ़कर 7000 करोड़ रुपए से ज्यादा हो रहा है।

साथियों,

इस वर्ष का एग्रीकल्चर बजट बीते सालों के इन्हीं प्रयासों को continue करता है, उनको विस्तार देता है। इस बजट में कृषि को आधुनिक और स्मार्ट बनाने के लिए मुख्य रूप से सात रास्ते सुझाए गए हैं।

पहला- गंगा के दोनों किनारों पर 5 किलोमीटर के दायरे में नेचुरल फार्मिंग को मिशन मोड पर कराने का लक्ष्य है। उसमें हर्बल मेडिसिन पर भी बल दिया जा रहा है। फल-फूल पर भी बल दिया जा रहा है।

दूसरा- एग्रीकल्चर और हॉर्टीकल्चर में आधुनिक टेक्नॉलॉजी किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी।

तीसरा- खाद्य तेल के इंपोर्ट को कम करने के लिए मिशन ऑयल पाम के साथ-साथ तिलहन को जितना हम बल दे सकते हैं, उसको सशक्‍त करने का हम प्रयास कर रहे हैं और इस बजट में इस पर बल दिया गया है।

इसके अलावा चौथा लक्ष्य है कि- कि खेती से जुड़े उत्पादों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए पीएम गति-शक्ति प्लान द्वारा लॉजिस्टिक्स की नई व्यवस्थाएं बनाई जाएंगी।

बजट में पांचवां समाधान दिया गया है कि एग्री-वेस्ट मेनेजमेंट को अधिक organize किया जाएगा, वेस्ट टू एनर्जी के उपायों से किसानों की आय बढ़ाई जाएगी।

छठा सॉल्यूशन है कि देश के डेढ़ लाख से भी ज्यादा पोस्ट ऑफिस में रेगुलर बैंकों जैसी सुविधाएं मिलेंगी, ताकि किसानों को परेशानी ना हो।

और सातवां ये कि - एग्री रिसर्च और एजुकेशन से जुड़े सिलेबस में स्किल डेवलपमेंट, ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट में आज के आधुनिक समय के अनुसार बदलाव किया जाएगा।

साथियों,

आज दुनिया में हेल्थ अवेयरनेस बढ़ रही है। Environment Friendly Lifestyle के प्रति जागरूता बढ़ रही है। ज्यादा से ज्यादा लोग इसकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इसका मतलब ये है कि इसका मार्केट भी बढ़ रहा है। हम इससे जुड़ी जो चीजें हैं, जैसे नैचुरल फार्मिंग है, ऑर्गैनिक फार्मिंग है, इसकी मदद से इसके मार्केट को कैप्चर करने की कोशिश कर सकते हैं। नेचुरल फार्मिंग के फायदे जन-जन तक पहुंचाने में हमारे कृषि विज्ञान केंद्र और एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज़ को पूरी ताकत से जुटना होगा। हमारे KVK's एक-एक गांव गोद ले सकते हैं। हमारी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी 100 या 500 किसानों को अगले एक साल में नेचुरल खेती की तरफ लाने का लक्ष्य रख सकती हैं।

साथियों,

आजकल हमारी मिडिल क्लास फैमिलीज में, अपर मिडिल क्लास फैमिलीज में, एक और ट्रेंड दिखता है। अक्सर देखने में आता है कि उनकी डाइनिंग टेबल पर कई सारी चीजें पहुंच गई हैं। प्रोटीन के नाम पर, कैल्शियम के नाम पर, ऐसे कई प्रॉडक्ट्स अब डाइनिंग टेबल पर जगह बना रहे हैं। इसमें बहुत सारे प्रॉडक्ट विदेश से आ रहे हैं और ये भारतीय Taste के अनुसार भी नहीं होते। जबकि ये सारे प्रॉडक्ट्स हमारे भारतीय उत्पाद, जो हमारे किसान पैदा करते हैं, उसमें सब कुछ है, लेकिन हम सही ढंग से प्रस्‍तुत नहीं कर पा रहे हैं। उसकी मार्केटिंग नहीं कर पा रहे हैं, और इसलिए हमें कोशिश करनी चाहिए, इसमें भी वोकल फॉर लोकल जरूरी है।

भारतीय अन्न, भारतीय फसलों में भी वो बहुतायत में पाया ही जाता है और ये हमारे Taste का भी होता है। दिक्कत ये है कि हमारे यहां इसकी उतनी जागरूकता नहीं है, काफी लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं है। कैसे हम भारतीय अन्न को प्रचारित करें, प्रसारित करें, इस ओर भी हमें ध्यान देना होगा।

हमने देखा है कि कोरोना काल में हमारे यहां के मसाले, हल्दी जैसी चीजों का आकर्षण बहुत बढ़ा है। साल 2023 International Year of Millets है। इसमें भी हमारा कॉरपोरेट जगत आगे आए, भारत के Millets की ब्रैंडिंग करे, प्रचार करे। हमारा जो मोटा धान है और हमारे दूसरे देशों में जो बड़े मिशन्स हैं, वो भी अपने देशों में बड़े-बड़े सेमीनार करे, वहां के लोगों को जो importers हैं वहां, उनको समझाएं कि भारत के जो Millets हैं, जो भारत का धान है वो कितने प्रकार से उत्‍तम है। उसकी tasting कितनी महत्‍वपूर्ण है। हम हमारे मिशनों को लगा सकते हैं, हम सेमिनार, वेबिनार, importer-exporter के बीच हमारे Millets के संबंध में कर सकते हैं। भारत के Millets की Nutritional Value कितनी ज्यादा है, इस पर हम बल दे सकते हैं।

साथियों,

आपने देखा है कि हमारी सरकार का बहुत ज्यादा जोर सॉयल हेल्थ कार्ड पर रहा है। देश के करोड़ों किसानों को सरकार ने सॉयल हेल्थ कार्ड दिए हैं। जिस तरह एक जमाना था न पैथोलॉजी लैब होती थी, न लोग पैथोलॉजी टेस्‍ट करवाते थे, लेकिन अब कोई भी बीमारी आई तो सबसे पहले पैथोलॉजी चैकअप होता है, पैथोलॉजी लैब में जाना होता है। क्‍या हमारे स्‍टार्टअप्‍स, क्‍या हमारे private investors स्‍थान-स्‍थान पर प्राइवेट पैथोलॉजी लैब्‍स जैसी होती हैं वैसे ही हमारी धरती माता, हमारी जमीन उसके सैंपल को भी पैथोलॉजिकल टेस्‍ट कर-करके किसानों को गाइड कर सकते हैं। सॉयल हेल्‍थ की जांच, ये लगातार होती रहे, हमारे किसानों को अगर हम इसकी आदत डालेंगे तो छोटे-छोटे किसान भी हर साल एक बार सॉयल टेस्‍ट जरूर करवाएंगे। और इसके लिए इस प्रकार की सॉयल टेस्टिंग लैब्‍स का एक पूरा नेटवर्क खड़ा हो सकता है। नए equipment बन सकते हैं। मैं समझता हूं एक बहुत बड़ा क्षेत्र है, स्टार्ट-अप्स को आगे आना चाहिए।

हमें किसानों में भी ये जागरूकता बढ़ानी होगी, उनका सहज स्वभाव बनाना होगा कि वो हर एक-दो साल में अपने खेत की मिट्टी का टेस्ट कराए, और उसके मुताबिक उसमें कौन सी दवाइयों की जरूरत है, कौन से फर्टिलाइजर की जरूरत है, किस फसल के लिए उपयोगी है, उसका उनको एक साइंटिफिक ज्ञान मिलेगा आपकी जानकारी में है कि हमारे युवा वैज्ञानिकों ने नैनो फर्टिलाइजर develop किया है। ये एक गेम चेंजर बनने वाला है। इसमें भी काम करने के लिए हमारे कॉरपोरेट वर्ल्ड के पास बहुत संभावनाएं हैं।

साथियों,

माइक्रोइरीगेशन भी इनपुट कॉस्ट कम करने और ज्यादा प्रोडक्शन का बहुत बड़ा माध्यम है और एक प्रकार से एनवायरमेंट की भी सेवा है। पानी बचाना, ये भी आज मानव जाति के लिए बहुत बड़ा काम है। Per Drop More Crop पर सरकार का बहुत जोर है और ये समय की मांग भी है। इसमें भी व्यापार जगत के लिए बहुत संभावनाएं हैं कि इस क्षेत्र में आप आइए। अब जैसे केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड में क्या परिवर्तन आएंगे, ये आप सभी भलीभांति जानते हैं। जो कृषि सिंचाई योजनाएं देश में दशकों से अटकी हुई हैं, उन्हें भी तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।

साथियों,

आने वाले 3-4 सालों में हमने एडिबल ऑयल प्रोडक्शन को अभी के लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का जो लक्ष्य रखा है, उसको हमें समय पर हासिल करना है। National mission on edible oil के तहत oil Palm की खेती के विस्तार में बहुत पोटेंशियल है और तिलहन के क्षेत्र में भी हमें बहुत बड़ी मात्रा में आगे बढ़ने की आवश्‍यकता है।

क्रॉप पैटर्न के लिए, क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन को बढ़ावा देने के लिए भी हमारे एग्री-इंवेस्टर्स को भी आगे आना चाहिए। जैसे भारत में किस तरह की मशीनें चाहिए, इस बारे में इंपोटर्स को पता होता है। वो जानते हैं कि किस तरह की चीजें चलेंगी। उसी तरह से हमारे यहां फसलों की जानकारी होनी चाहिए। जैसे अभी तिलहन और दलहन का ही उदाहरण लें। देश में इसकी बहुत ज्यादा डिमांड है। ऐसे में हमारे कॉरपोरेट वर्ल्ड को इसमें आगे आना चाहिए। ये आपके लिए एक एश्योर्ड मार्केट है। विदेश से लाने की क्‍या जरूरत है, आप किसानों से पहले से कह सकते हैं कि हम इतनी फसल आपसे लेंगे। अब तो इंश्‍योरेंस की व्‍यवस्‍था है तो इंश्‍योरेंस के कारण सुरक्षा तो मिल ही रही है। भारत की फूड रिक्वायर्मेंट की स्टडी हो, और जिन चीजों की आवश्यकता है, उसे भारत में ही Produce करने की दिशा में हम सबको मिल करे काम करना चाहिए।

साथियों,

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस 21वीं सदी में खेती और खेती से जुड़े ट्रेड को बिल्कुल बदलने वाली है। किसान ड्रोन्स का देश की खेती में अधिक से अधिक उपयोग, इसी बदलाव का हिस्सा है। ड्रोन टेक्नॉलॉजी, एक स्केल पर तभी उपलब्ध हो पाएगी, जब हम एग्री स्टार्टअप्स को प्रमोट करेंगे। पिछले 3-4 वर्षों में देश में 700 से ज्यादा एग्री स्टार्टअप्स तैयार हुए हैं।

साथियों,

Post-Harvest Management पर बीते 7 सालों में काफी काम हुआ है। केंद्र सरकार का ये निरंतर प्रयास रहा है कि प्रोसेस्ड फूड का दायरा बढ़े, हमारी क्वालिटी इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की हो। इसके लिए किसान संपदा योजना के साथ ही PLI स्कीम महत्वपूर्ण है। इसमें वैल्यू चेन की भी बहुत बड़ी भूमिका है। इसलिए 1 लाख करोड़ रुपए का विशेष एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड बनाया गया है। आपने देखा है कि कुछ दिन पहले ही भारत ने UAE, गल्‍फ कंट्रीज के साथ, आबूधाबी के साथ कई महत्वपूर्ण समझौते किए हैं। इसमें फूड प्रोसेसिंग में सहयोग बढ़ाने के लिए भी कई अहम फैसले लिए गए हैं।

साथियों,

Agri-Residue जिसे पराली भी कहते हैं, उसका Management किया जाना भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए इस बजट में कुछ नए उपाय किए गए हैं, जिससे कार्बन एमीशन भी कम होगा और किसानों को इनकम भी होगी। और ये हम सबको जो वैज्ञानिक, जो टेक्‍नोलॉजी के दिमाग के लोग हैं, कृषि जगत का एक भी waste बर्बाद नहीं होना चाहिए, हर waste का best में कनर्वजन होना चाहिए। हमें बारीकी से सोचना चाहिए, इसके लिए नई-नई चीजें लानी चाहिए।

पराली के मैनेजमेंट को लेकर हम जो भी समाधान ला रहे हैं, वो किसानों को, उनके लिए भी स्‍वीकार करना बड़ा आसान हो जाएगा, इस पर बातचीत होनी चाहिए। पोस्ट हार्वेस्टिंग वेस्ट हमारे यहां किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। अब उसको वेस्‍ट को बेस्‍ट में कनर्वट कर देंगे तो किसान भी सक्रिय रूप से हमारा साथी बन करके भागीदार बन जाएगा। ऐसे में लॉजिस्टिक्स और स्टोरेज की व्यवस्था को बढ़ावा, उसे विस्तार देते रहना बहुत जरूरी है।

सरकार इसमें काफी कुछ कर रही है लेकिन हमारा जो प्राइवेट सेक्टर है, उसे भी इस क्षेत्र में अपना योगदान बढ़ाना चाहिए। और मैं बैंकिंग सेक्‍टर को भी कहूंगा। बैंकिंग सेक्‍टर भी हमारे priority landing में इन सारी चीजों को कैसे बदले, टारगेट कैसे तय करे, इसका मॉनिटरिंग कैसे करे; अगर हम बैंकों के द्वारा इस क्षेत्र में धन मुहैया कराएंगे तो तो हमारे प्राइवेट सेक्‍टर के छोटे-छोटे लोग भी बहुत बड़ी मात्रा में इस क्षेत्र में आएंगे। मैं एग्रीकल्चर के क्षेत्र में मौजूद प्राइवेट प्लेयर्स से कहूंगा कि इसे भी वो अपनी प्राथमिकता में रखें।

साथियों,

एग्रीकल्चर में इनोवेशन और पैकेजिंग, दो ऐसे क्षेत्र हैं जिन पर और ज्यादा ध्यान दिए जाने की जरूरत है। आज दुनिया में कंज्यूमरिज्म बढ़ रहा है, तो पैकेजिंग और ब्रैंडिंग इसका बहुत महत्व है। फलों की पैकेजिंग में हमारे कॉरपोरेट हाउसेस को, एग्री स्टार्ट-अप्स को बड़ी संख्या में आगे आना चाहिए। इसमें भी जो Agri Waste होता है, उससे Best Packaging कैसे की जा सकती है, उस ओर उन्हें ध्यान देना चाहिए। वो इसमें किसानों की मदद करें और इस दिशा में अपनी योजनाएं बनाएं।

भारत में फूड प्रोसेसिंग और इथेनॉल में निवेश की बहुत संभावनाएं बन रही हैं। सरकार, इथेनॉल की 20 परसेंट ब्लेंडिंग का लक्ष्य लेकर चल रही है, एश्‍योर मार्केट है। 2014 से पहले जहां 1-2 परसेंट इथेनॉल ब्लेडिंग होती थी, वहीं अब ये 8 परसेंट के आस-पास पहुंच चुकी है। इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ाने के लिए सरकार काफी इंसेटिव्स दे रही है। इस क्षेत्र में भी हमारा व्यापारी जगत आगे आए, हमारे बिजनेस हाउसेस आगे आएं।

एक विषय नैचुरल जूसेस का भी है। इसकी पैकेजिंग का बहुत महत्व है। ऐसी पैकेजिंग जिससे उस प्रॉडक्ट की आयु लंबी हो, वो ज्यादा से ज्यादा दिनों तक चले, इस ओर भी काम किए जाने की आवश्यकता है, क्‍योंकि हमारे यहां इतनी विविधिता वाले फल होते हैं और भारत में नैचुरल जूसेस, हमारे जो फलों के रस हैं, बहुत सारे ऑप्‍शंस अवेलेबल हैं, बहुत सारी वैरायटीज हैं। हमें बाहर की नकल करने के बजाय भारत में जो नैचुरल जूसेस हैं, उन्हें प्रमोट करना चाहिए, पॉपुलर करना चाहिए।

साथियों,

एक और विषय है, कॉपरेटिव सेक्टर का। भारत का कॉपरेटिव सेक्टर काफी पुराना है, वाइब्रेंट है। चाहे वो चीनी मिलें हों, खाद कारखाने हों, डेयरी हो, ऋण की व्यवस्था हो, अनाज की खरीद हो, कॉपरेटिव सेक्टर की भागीदारी बहुत बड़ी है। हमारी सरकार ने इससे जुड़ा नया मंत्रालय भी बनाया है और उसका मूल कारण किसानों की ज्‍यादा से ज्‍यादा मदद करने का है। हमारी Cooperative में एक vibrant business entity बनाने का बहुत स्कोप होता है। आपका लक्ष्य होना चाहिए कि Cooperatives को एक सफल Business enterprise में कैसे बदलें।

साथियों,

हमारे जो माइक्रो-फाइनेंसिंग इंस्टीट्यूशंस हैं, उनसे भी मेरा आग्रह है कि वो आगे आए और एग्री स्टार्ट-अप्स को, Farmer Produce Organisation- FPO's को ज्यादा से ज्यादा आर्थिक मदद करें। हमारे देश के छोटे किसानों का खेती पर होने वाले खर्च कम करने में एक बड़ी भूमिका भी आप सभी निभा सकते हैं। जैसे हमारा छोटा किसान, खेती में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक उपकरण नहीं खरीद सकता। इसका एक समाधान है, छोटा किसान कहां से लाएगा और उसको आज लेबरर भी बहुत कम मिलते हैं, ऐसी स्थिति में हम एक नए तरीके से सोच सकते हैं क्‍या, Pooling का।

हमारे कॉरपोरेट जगत को ऐसी व्यवस्थाएं बनाने के लिए आगे आना चाहिए, जिसमें खेती से जुड़े उपकरणों को किराए पर देने की सुविधा हो। हमारी सरकार किसानों को अन्नदाता के साथ ही ऊर्जादाता बनाने के लिए बड़ा अभियान चला रही है। देश भर के किसानों को सोलर पंप वितरित किए जा रहे हैं। हमारे ज्यादा से ज्यादा किसान, खेतों में कैसे सोलर पावर पैदा करें, इस दिशा में भी हमें अपने प्रयास बढ़ाने होंगे।

उसी प्रकार से ‘मेड़ पर पेड़’ हमारे जो खेत की सीमा होती है, आज हम टिम्‍बर इंपोर्ट करते हैं। अगर हम हमारे किसानों को साइंटिफिक तरीके से अपनी मेढ़ पर इस प्रकार के टिम्‍बर के लिए प्रेरित करें तो 10-20 साल के बाद उसकी आय का एक नया साधन वो बन जाएगा। सरकार उसमें आवश्‍यक कानूनी जो भी बदलाव हैं, वो भी करेगी।

साथियों,

किसानों की आय बढ़ाना, खेती का खर्च कम करना, बीज से बाजार तक किसानों को आधुनिक सुविधाएं देना, ये हमारी सरकार की प्राथमिकता है। मुझे विश्वास है, आपके सुझावों से सरकार के प्रयासों को, और हमारा किसान जो सपने देख करके कुछ करना चाहता है, उन सबको बल मिलेगा। और मुझे विश्‍वास है कि आज हम कृषि के एक नेक्‍स्‍ट जेनरेशन पर चर्चा करना चाहते हैं, परंपरागत पद्धतियों से बाहर आने के लिए सोचना चाहते हैं, बजट की लाइट में, बजट में जिन चीजों का प्रावधान किया गया है उसकी लाइट में हम अच्‍छा कैसे कर सकते हैं, और आपसे मेरा आग्रह यही है, इस सेमिनार में ये निकलना चाहिए।

एक अप्रैल से ही नया बजट जिस दिन लागू होगा, उसी दिन हम चीजों को rollout कर दें, काम शुरू कर दें। अभी हमारे पास पूरा मार्च महीना है। बजट already संसद में रख दिया गया है1 अब वो बजट ही हमारे सामने है। ऐसी स्थिति में हम समय न खराब करते हुए जून-जुलाई में हमारा किसान खेती का नया वर्ष प्रारंभ करे, उसके पहले इस मार्च महीने में सारी तैयारी कर लें, अप्रैल में हम किसानों तक चीजों को पहुंचाने का प्‍लान करें, उसमें हमारा कॉरपोरेट वर्ल्‍ड आएं, हमारा फाइनेंशन वर्ल्‍ड आएं, हमारे स्‍टार्टअप आएं, हमारे टेक्‍नोलॉजी के लोग आएं। हम भारत की आवश्‍यकताओं को जोकि कृषि प्रधान देश है, हमें एक कक्षु चीज बाहर से नहीं लानी चाहिए, देश की आवश्‍यकताओं के अनुसार हमें तैयार करना चाहिए।

और मुझे विश्‍वास है अगर हम हमारे किसानों को, हमारी एग्रीकल्‍चर यूनिवर्सिटीज को, हमारे एग्रीकल्‍चर के स्टूडैंट्स को, इन सारे कामों को एक प्‍लेटफॉर्म पर ला करके आगे बढ़ेंगे तो सच्‍चे अर्थ में बजट ये सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं रहेगा, बजट जीवन परिवर्तन, कृषि परिवर्तन, ग्राम जीवन परिवर्तन का एक बहुत बड़ा साधन बन सकता है। इसलिए मैं आपसे आग्रह करता हूं कि ये सेमिनार, ये वेबिनार बहुत ही productive होना चाहिए, concrete होना चाहिए, सारे actionable points के साथ होना चाहिए। और तभी जा करके हम परिणाम ला सकेंगे। मुझे विश्‍वास है कि आप सभी इस क्षेत्र से जुड़े देश भर के लोग आज इस वेबिनार से जुड़े हैं। इसके कारण डिपार्टमेंट को भी बहुत ही अच्‍छा मार्गदर्शन आपकी तरफ से मिलेगा। Seamlessly चीजों को लागू करने का रास्‍ता निकलेगा, और हम तेजी से साथ मिल करके आगे बढ़ेंगे।

मैं फिर एक बार आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं और मैं शुभकामनाएं देता हूं।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
UPI — an eventful journey

Media Coverage

UPI — an eventful journey
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
PM chairs 53rd PRAGATI Meeting
August 25, 2026
PM reviews six key infrastructure projects across the Railway, Road and Power sectors
Projects reviewed span across 9 States with cumulative investment of more than ₹30,000 crore
PM says Infrastructure projects should be viewed as an integrated whole, rather than as individual sections or packages
PM calls for continuous reforms across all stages of project implementation and a proactive work culture across Ministries and States
PM says Speed must go hand-in-hand with quality
While reviewing AgriStack, PM emphasises the need to leverage the latest digital technologies including AI to derive greater value from agricultural data
On cyber fraud and ‘digital arrest’, PM stresses training, public awareness, cyber-safety education and coordinated action

Prime Minister Shri Narendra Modi chaired the 53rd meeting of PRAGATI, the ICT-enabled, multi-modal platform for Pro-Active Governance and Timely Implementation, at Seva Teerth earlier today.

During the meeting, Prime Minister reviewed six key infrastructure projects across the Railway, Road and Power sectors, spanning nine States with a cumulative cost of more than ₹30,000 crore. The projects, significant for strengthening connectivity, supporting industrial and economic activity and improving public services, were reviewed with particular emphasis on adherence to timelines, inter-agency coordination, resolution of pending issues and expeditious completion.

Prime Minister emphasised that delays in infrastructure projects have consequences beyond cost escalation, as they also postpone the benefits intended for citizens, businesses and the economy. He said that infrastructure projects should be viewed and monitored as an integrated whole, rather than as isolated sections, stretches or packages. He noted that progress in individual packages should ultimately translate into timely completion and operationalisation of the entire project. Ministries and States were therefore asked to adopt an end-to-end approach, and address critical gaps that could delay the overall commissioning and delivery of benefits. He called for fostering a proactive work culture across Ministries and State Governments, with greater ownership at every level of project implementation.

Prime Minister stressed the need to explore common utility corridors for infrastructure services, wherever feasible, particularly while planning major transport and infrastructure projects. He called upon Ministries and States to examine such integrated approaches at the planning stage itself, keeping in view their technical and economic feasibility.

Prime Minister said that speed of execution must be accompanied by uncompromising quality. He called upon Ministries, States and implementing agencies to adopt modern technologies and strengthen quality assurance and supervision at every stage.

While reviewing AgriStack under the Digital Agriculture Mission, Prime Minister emphasised the need to leverage the latest digital technologies, including Artificial Intelligence, to derive greater value from agricultural data. He stressed that the data ecosystem should be effectively utilised across the agricultural value chain, from input planning to processing, enabling more informed interventions, better targeting and data-driven decision-making. He appreciated the efforts of the States and the Central Government in building the AgriStack ecosystem and called for further strengthening its use for delivering better outcomes for farmers.

During the review of cyber fraud cases, including incidents of digital arrest, Prime Minister said that prevention must be strengthened through a sustained focus on training, awareness and education. He stressed the need for continuous and targeted public-awareness campaigns, particularly for senior citizens, youth and other vulnerable sections, to familiarise them with common fraud techniques, warning signs and safe digital practices. He also called for regular capacity-building of personnel involved so that emerging modes of cyber fraud are identified and acted upon swiftly.