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हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता डिपॉजिटर और इन्वेस्टर दोनों के लिए विश्वास और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है: प्रधानमंत्री
देश को Non-Transparent क्रेडिट कल्चर से मुक्त करने के लिए कदम उठाए गए हैं: प्रधानमंत्री
फाइनेंशियल इंक्लूजन के बाद देश तेजी से वित्तीय सशक्तिकरण की ओर बढ़ रहा है : प्रधानमंत्री

फाइनंशियल सेक्टर से जुड़े आप सभी साथियों को नमस्कार !! आप भली-भांति परिचित हैं कि इस वर्ष के बजट में फाइनेंशियल सेक्टर से जुड़े अनेक बड़े कदम उठाए गए हैं। बैंकिंग हो, नॉन-बैंकिंग हो या फिर इंश्योरेंस हो, फाइनेंशियल सेक्टर से जुड़े हर पहलू को मज़बूत करने के लिए एक रोडमैप इस बजट में हमने प्रस्तुत किया है। पब्लिक सेक्टर से जुड़े संस्थानों को हम ताकतवर बनाएंगे, और कैसे बनाएंगे,प्राइवेट सेक्टर के पार्टिसिपेशन का विस्तार कैसे करेंगे, इसकी भी एक झलक इस बजट में आप देखते हैं ।अब बजट के बाद ये संवाद इसलिए अहम है क्योंकि पब्लिक और प्राइवेट, दोनों को ही मिलकर इन सारी बातों को आगे ले जाना है। सरकार की प्राथमिकता, सरकार की प्रतिबद्धता आपको पता होनी चाहिए और इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि आपके सुझाव, आपकी शंका-आशंका, इसका पूरा पता सरकार को भी होना चाहिए। 21वीं सदी में हमें देश को जिस गति से आगे ले जाना है, उसमें आपका सक्रिय योगदान proactive मैं समझता हूं ये बहुत ही आवश्यक है और इसलिए आज की ये बातचीत मेरी दृष्टि से दुनिया की जो स्थिति है उसका फायदा उठाने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

साथियों,

देश के फाइनेंशियल सेक्टर को लेकर सरकार का विजन बिल्कुल साफ है। कोई इफ्स एण्ड बट्स की जगह नहीं है। देश में कोई भी Depositor हो या कोई भी Investor, दोनों ही Trust और Transparency अनुभव करें, ये हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। देश की वित्तीय व्यवस्था चलती ही, अगर किसी एक बात पर वो टिकी हुई है तो वो है विश्वास। विश्वास अपनी कमाई की सुरक्षा का, विश्वास निवेश के फलने-फूलने का और विश्वास देश के विकास का। बैंकिंग और नॉन बैंकिंग सेक्टर के पुराने तौर-तरीकों और पुरानी व्यवस्थाओं में स्वाभाविक रूप से बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है। और बदलना हम लोगों के लिए भी अनिवार्य हो चुका है। 10-12 साल पहले Aggressive Lending के नाम पर कैसे देश के बैंकिंग सेक्टर को, फाइनेंशियल सेक्टर को नुकसान पहुंचाया गया, ये आप अच्छी तरह जानते भी हैं, समझते भी हैं। Non-Transparent क्रेडिट कल्चर से देश को बाहर निकालने के लिए एक के बाद एक कदम उठाए गए हैं। आज NPAs को कार्पेट के नीचे दबाने के बजाय, उसे यहां-वहां दिखाकर बचने के बजाय, 1 दिन का NPA भी रिपोर्ट करना ज़रूरी है।

साथियों,

सरकार ये भलीभांति समझती है कि बिजनेस में उतार-चढ़ाव आते ही आते हैं। सरकार इस बात को भी मानती है कि हर बिजनेस सफल हो, और जैसा चाहें वैसा ही परिणाम दें ये संभव नहीं है। हम भी कभी सोचते हैं कि मेरा बेटा या मेरे परिवार का सदस्य ये बनेगा, नहीं बन पाता है। कौन चाहता है कि मेरा बेटा न करे फिर भी कभी-कभी नहीं होता है। तो ये बातें सरकार समझती है। और ये संभव नहीं है और हर बिजनेस Decision के पीछे खराब नीयत है बद इरादा है, स्वार्थ है ऐसी धारणा कम से कम हमारी सरकार की नहीं है। ऐसे में सही नीयत के साथ लिए गए फैसलों के साथ खड़े होना सरकार का दायित्व है और ये हम कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। और मैं फाइनेंशियल सेक्टर के सब लोगों को कहना चाहता हूं। सही नीयत से सही इरादे से किए गए काम, आपके साथ खड़ा रहने के लिए मैं हमेशा तैयार हूं। ये आप लिखकर के रखिए। Insolvency and bankruptcy code, जैसे मैकेनिज्म से आज Lenders और Borrowers को भरोसा मिला है।

साथियों,

सामान्य परिवारों की कमाई की सुरक्षा, गरीब तक सरकारी लाभ की प्रभावी और लीकेज फ्री डिलिवरी, देश के विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निवेश को प्रोत्साहन, ये सारी बातें हमारी प्राथमिकता है। बीते सालों में जितने भी रिफॉर्म्स इस सेक्टर में किए गए हैं, ये सारे लक्ष्य उनमें Reflect होते हैं। दुनिया का सबसे बड़ा Financial Inclusion हो, सबसे बड़ा Digital Inclusion हो, Direct Benefit का इतना बड़ा मैकेनिज्म हो या फिर छोटे बैंकों का Merger, कोशिश सिर्फ यही है कि भारत का फाइनेंशियल सेक्टर सुदृढ़ हो, वाइब्रेंट हो, प्रोएक्टिव हो। इस बजट में भी आप देखते हैं तो आपने इसी विजन को आगे बढ़ाने का काम हमने किया है। आपको नजर आता होगा।

साथियों,

इस वर्ष हमने नई पब्लिक सेक्टर पॉलिसी घोषित की है। इस पॉलिसी में फाइनेंशियल सेक्टर भी शामिल है। हमारी अर्थव्यवस्था में अभी भी बैंकिंग और इंश्योरेंस के लिए बहुत अधिक संभावनाएं हैं। इन्हीं संभावनाओं को देखते हुए इस बजट में भी हमने अनेक कदम उठाए हैं। 2 पब्लिक सेक्टर बैंकों का निजीकरण हो, बीमा में FDI को 74 प्रतिशत तक करना हो या LIC का IPO लाने का फैसला हो, ये ऐसे ही कुछ कदम हैं।

साथियों,

हमारा ये लगातार प्रयास है कि जहां संभव हो वहां प्राइवेट उद्यम को ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहित किया जाए। लेकिन इसके साथ-साथ बैंकिंग और बीमा में पब्लिक सेक्टर की भी एक प्रभावी भागीदारी अभी देश की बहुत ज़रूरत है। गरीबों और वंचितों को संरक्षण देने के लिए ये बहुत आवश्यक है। पब्लिक सेक्टर को मज़बूत करने के लिए equity capital infusion पर बल दिया जा रहा है। इसके साथ-साथ एक नया ARC Structure भी बनाया जा रहा है जो बैंकों के NPAs का ध्यान रखेगा। ये ARC इन Loans को फिर फोकस्ड तरीके से Address करता रहेगा। इससे पब्लिक सेक्टर बैंक मज़बूत होंगे और उनकी Lending की क्षमता बढ़ जाएगी।

साथियों,

इसी तरह इंफ्रास्ट्रक्चर और कुछ इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के विकास के लिए एक नया Development Finance Institution बनाया जा रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स की Long Term Financing needs को देखते हुए ये कदम उठाया गया है। इसके साथ-साथ sovereign wealth funds, pension funds और insurance companies को भी इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। Long Term Bonds Issue किए जा सकें इसके लिए Corporate Bond Market के लिए नई Backstop Facilities भी दी जा रही है।

साथियों,

इसी भावना को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए भी मज़बूती से आगे बढ़ाया जा रहा है। आत्मनिर्भर भारत सिर्फ बड़े उद्योगों या बड़े शहरों से नहीं बनेगा। आत्मनिर्भर भारत गांव में, छोटे शहरों में छोटे-छोटे उद्यमियों के, सामान्य भारतीयों के परिश्रम के योगदान का उसमे बहुत महत्व है। आत्मनिर्भर भारत किसानों से, कृषि उत्पादों को बेहतर बनाने वाली इकाइयों से बनेगा। आत्मनिर्भर भारत, हमारे MSMEs से बनेगा, हमारे Start Ups से बनेगा। और आत्मनिर्भर भारत की एक बड़ी पहचान हमारे Start Ups, हमारे MSMEs होंगे। इसलिए कोरोना काल में MSMEs के लिए विशेष योजनाएं बनाई गईं। इनका लाभ उठाते हुए करीब 90 लाख उद्यमों को 2.4 ट्रिलियन रुपए का क्रेडिट मिल चुका है। MSMEs और Start Ups को सपोर्ट करना, इन तक क्रेडिट फ्लो का विस्तार करना आप भी आवश्यक समझते हैं। सरकार ने अनेक रिफॉर्म्स करके इनके लिए कृषि, कोयला और स्पेस जैसे अनेक सेक्टरों को खोल दिया है। अब ये देश के फाइनेंसियल सेक्टर की जिम्मेदारी है कि गांवों और छोटे शहरों में पल रही इन आकांक्षाओं की पहचान करके, उनको आत्मनिर्भर भारत की ताकत बनाएं।

साथियों,

हमारी अर्थव्यवस्था, जैसे-जैसे बड़ी हो रही है, तेज़ी से बढ़ने लगी है तो क्रेडिट फ्लो भी उतना ही ज़रूरी हो गया है। आपको ये देखना है कि नए सेक्टर्स, नए उद्यमियों तक क्रेडिट कैसे पहुंचे। नए Startups और Fintechs के लिए आप नए और बेहतर financial products तैयार करने पर फोकस करें। आप सभी भलीभांति जानते हैं कि हमारे Fintech Start ups आज बेहतरीन काम कर रहे हैं और इस सेक्टर में हर संभावनाओं को एक्स्प्लोर कर रहे हैं। कोरोना काल में भी जितनी Start Up Deals हुई हैं, उनमें हमारे Fintechs की हिस्सेदारी बहुत अधिक रही है। जानकार बताते हैं कि इस वर्ष भी ये Momentum बना रहेगा, इसलिए आपको भी इसमें नई संभावनाएं तलाश करनी हैं। इसी तरह, जो हमारा Social Security coverage है, उसको यूनिवर्सल बनाने में आपकी भूमिका क्या होगी, इस पर विचार करें। इससे जुड़े बेहतर सुझाव और समाधान इस वेबिनार से निकलेंगे, क्योंकि आपका इस क्षेत्र में गहरा अनुभव है। और मैं चाहता हूं कि आप आज खुलकर के अपने विचार रखेंगे। और मेरा पक्का विश्वास है कि आज के मंथन से जो अमृत निकलेगा। वो आत्मनिर्भर भारत के भी काम आएगा, जनकल्याण के कामों के लिए भी आएगा और आत्मविश्वास को गहरा करने के लिए भी काम आएगा।

साथियों,

बीते वर्षों में टेक्नोलॉजी के बेहतर इस्तेमाल ने, नई व्यवस्थाओं के निर्माण ने financial inclusion में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। आज देश में 130 करोड़ लोगों के पास आधार कार्ड, 41 करोड़ से ज्यादा देशवासियों के पास जनधन खाते हैं। इनमें से करीब 55 प्रतिशत जनधन खाते महिलाओं के हैं और इनमें करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए जमा हैं। कोरोना काल में भी इन जनधन खातों के कारण लाखों बहनों को सीधी मदद तेज़ी से देना संभव हो पाया है। आज UPI से हर महीने औसतन 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक का लेन-देन हो रहा है और Rupay कार्ड की संख्या भी 60 करोड़ पहुंच चुकी है। आधार की मदद से instant ओथेनटीकेशन, India Post Bank का विशाल नेटवर्क, लाखों कॉमन सर्विस सेंटर्स के निर्माण ने financial services को देश के दूर-दराज वाले इलाकों तक पहुंचा दिया है। आज देश में 2 लाख से ज्यादा बैंक मित्र Aadhaar enabled Payment System (AePS) devices की मदद से गांवों में लोगों के घर तक बैंकिंग सेवा को लेकर पहुंच रहे हैं। सवा लाख से ज्यादा पोस्ट ऑफिसेस भी इसमें मदद कर रहे हैं। आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि पिछले साल अप्रैल से लेकर जून के बीच इन बैंक मित्रों ने अपने AePS devices से 53 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन करने में ग्रामीणों की मदद की है। और हमें ये याद रखना है कि ये कोरोना का वो समय था, जब भारत में लॉकडाउन था।

साथियों,

आज भारत गर्व कर सकता है कि देश का करीब-करीब हर वर्ग किसी ना किसी रूप से देश के Financial Sector में Include हो चुका है। देश अब दशकों के Financial Exclusion से मजबूत हो रहा है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, इसका मंत्र फाइनेंशियल सेक्टर में स्पष्ट दिखता है। आज गरीब हों, किसान हों, पशुपालक हों, मछुआरे हों, छोटे दुकानदार हों, सबके लिए Credit Access संभव हो पाया है।

मुद्रा योजना से ही बीते सालों में करीब 15 लाख करोड़ रुपए का ऋण छोटे उद्यमियों तक पहुंचा है। इसमें भी लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं हैं और 50 प्रतिशत से ज्यादा दलित, वंचित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के उद्यमी हैं। पीएम किसान स्वनिधि योजना से अब तक करीब 11 करोड़ किसान परिवारों के खाते में 1 लाख 15 हज़ार करोड़ रुपए से ज्यादा की मदद पहुंच चुकी है। कुछ महीने पहले ही हमारे street vendors के लिए, रेहड़ी-पटरी वालों के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना शुरू की गई है। इस वर्ग का पहली बार देश के Financial Sector में Inclusion किया गया है। इसके तहत करीब 15 लाख रेहड़ी-पटरी वालों को अब तक 10 हज़ार रुपए के ऋण दिए जा चुके हैं। ये सिर्फ One Time Inclusion नहीं है, बल्कि उनकी Credit History भविष्य में उनको Expand करने में भी मदद करेगी। इसी तरह, ट्रेड्स और पीएसबी लोन जैसे Digital lending platforms से MSMEs को सस्ता ऋण तेज़ी से मिल पा रहा है। किसान क्रेडिट कार्ड जैसी सुविधा, तेज़ी से Informal Lending के कुचक्र से छोटे किसान को, पशुपालक को, मछुआरे को बाहर निकाल रही है।

साथियों,

अब प्राइवेट सेक्टर को भी कहीं ना कहीं, विचार करना होगा कि हमारे समाज के इस सेक्शन के लिए Innovative Financial Products आप कैसे निकालते हैं? जो हमारे Self Help Groups हैं, उनमें मैन्युफेक्चरिंग से लेकर Services तक, हर सेक्टर में बहुत बड़ी कैपेबिलिटी है। ये ऐसे ग्रुप्स हैं, जिनका Credit Discipline, हमेशा आपने अनुभव किया है, बहुत बेहतरीन रहता है। प्राइवेट सेक्टर ऐसे ग्रुप्स के माध्यम से Rural Infrastructure में Investment की संभावनाएं तलाश कर सकता है। ये सिर्फ वेलफेयर का मामला नहीं है, बल्कि एक बेहतरीन बिजनेस मॉडल भी सिद्ध हो सकता है।

साथियों,

Financial Inclusion के बाद अब देश Financial Empowerment की तरफ तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत का Fintech market अगले 5 सालों में 6 trillion से ज्यादा होने का अनुमान है। Fintech Sector की इसी संभावना को देखते हुए IFSC GIFT City में एक World Class Financial Hub बनाया जा रहा है। भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण भी सिर्फ हमारी आकांक्षा नहीं है, बल्कि ये आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता है। इसलिए इस सेक्टर में इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बहुत ही Bold Targets रखे गए हैं। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत है। इस इन्वेस्टमेंट को लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। ये लक्ष्य पूरे फाइनेंशियल सेक्टर के सक्रिय सहयोग से ही प्राप्त हो सकेगा।

साथियों,

हमारा फाइनेंशियल सिस्टम मजबूत हो, इसके लिए अपने बैंकिंग सेक्टर को सशक्त करने के लिए भी सरकार कमिटेड है। अब तक जो बैंकिंग रिफॉर्म्स किए गए हैं, वो आगे भी जारी रहेंगे। मुझे विश्वास है, कि रिफॉर्म्स को लेकर और बजट में तय प्रावधानों के implementation को लेकर आपकी तरफ से सार्थक सुझाव मिलेंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि देश और दुनिया के इस क्षेत्र के महारथी आज पूरा दिवस इस विषय पर हमारा मार्गदर्शन करने वाले हैं। आपकी एक-एक बात मेरी सरकार के लिए बहुत मूल्यवान है। आप बिना संकोच आगे के रोडमैप के लिए हम क्या कर सकते हैं, हम मिलकर के कैसे आगे बढ़ सकते हैं। आपकी कोई कठिनाईयां हो तो हम कैसे दूर कर सकते हैं। आप जिम्मेवारी लेकर के देश को कैसे आगे बढ़ाने में भागीदार बन सकते हैं। इन सारे विषयों को एक एक्सनेबल पॉइन्ट के साथ, रोड़मैप के साथ, टारगेट के साथ और समय सीमा के साथ आज की चर्चा से हम बहुत बड़ा लाभ उठाना चाहते हैं। मुझे विश्वास है कि आपका ये समय मूल्यवान है, उससे भी मूल्यवान आपके सुझाव हैं और हमारा संकल्प है। बहुत-बहुत धन्यवाद !!

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