दुनिया की नजर भारत पर है और दुनिया की उम्मीद भी भारत से है: प्रधानमंत्री
भारत ने दोगुनी गति से आगे बढ़ते हुए, मात्र एक दशक में अपनी अर्थव्यवस्था का आकार दोगुना कर लिया है: प्रधानमंत्री
जिन्होंने सोचा था कि भारत धीमी और स्थिर गति से प्रगति करेगा, वे अब एक तेज और निडर भारत देखेंगे: प्रधानमंत्री
देरी विकास का दुश्मन है: प्रधानमंत्री
जब विकास आकांक्षाओं से प्रेरित होता है, तो यह समावेशी और सतत बन जाता है: प्रधानमंत्री
वक्फ कानून सभी के लिए सम्मान सुनिश्चित करते हैं, खासकर वंचित समुदायों के लिए: प्रधानमंत्री
वेव्स भारतीय कलाकारों को अपना कंटेंट बनाने और इसे वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए सशक्त बनाएगा: प्रधानमंत्री

नमस्‍कार!

आपने मुझे इस समिट के माध्‍यम से देश और दुनिया के सम्मानित अतिथियों से, आपके दर्शकों से जुडने का अवसर दिया है, मैं नेटवर्क 18 का आभार व्यक्त करता हूं। मुझे खुशी है कि आपने इस वर्ष के समिट को भारत के युवाओं की एस्‍पीरेशन से जोड़ा है। इस साल के शुरुआत में, विवेकानंद जयंती के दिन, यहीं भारत मंडप में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग हुआ था। तब मैंने युवाओं की आंखों में देखा था, सपनों की चमक, संकल्प का सामर्थ्य और भारत को विकसित बनाने का जुनून, 2047 तक हम भारत को जिस ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं, जिस रोडमैप को लेकर हम चल रहे हैं, उसके कदम-कदम पर अगर मंथन होगा, तो निश्चित ही अमृत निकलेगा। और यही अमृत, अमृत काल की पीढ़ी को ऊर्जा देगा, दिशा देगा और भारत को गति देगा। मैं आपको इस समिट की बधाई देता हूं, शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

आज दुनिया की नजर भी भारत पर है और दुनिया की उम्मीद भी भारत से है। कुछ ही वर्षों में हम दुनिया की 11वीं से 5वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बने हैं, बहुत कम समय में, अनेक प्रकार के ग्लोबल चैलेंजेस आए लेकिन भारत रुका नहीं, भारत ने डबल स्पीड से दौड़ लगाई। और एक दशक में अपनी के साइज को डबल करके दिखाया है। जो सोचते थे कि भारत स्लो और स्टेडी चलेगा, उन्हें अब फास्‍ट एंड फियरलेस इंडिया दिख रहा है और इसमें भी कोई संदेह नहीं है कि जल्द ही भारत की दुनिया की तीसरी इकोनॉमी बनना तय है। ग्रोथ की इस अभूतपूर्व स्पीड को कौन ड्राइव कर रहा है? इसे ड्राइव कर रहे हैं भारत के युवा, उनके एंबीशंस और उनके एस्‍पीरेशंस, युवा भारत की इन्हीं एंबीशंस और एस्‍पीरेशंस को एड्रेस करना आज देश की प्राथमिकता भी है।

साथियों,

आज 8 अप्रैल है, कल परसों ही 2025 के 100 दिन पूरे हो रहे हैं, 100 days 2025 का पहला पड़ाव, इन 100 दिनों में जो निर्णय हुए हैं, उनमें भी आपको युवा एस्‍पीरेशंस की ही झलक दिखेगी।

साथियों,

इन 100 दिनों में हमने सिर्फ फैसले नहीं लिए हैं, हमने भविष्य की मजबूत नींव रखी है। हमने Policies से Possibilities की राह खोली है। 12 लाख रुपये तक की इनकम तक टैक्स जीरो, थैंक्यू! इसका सबसे बड़ा फायदा हमारे यंग प्रोफेशनल्स और आंत्रप्रन्योर्स को मिल रहा है। मेडिकल की 10 हजार नई सीटें, आईआईटी में 6500 नई सीटें यानी एजुकेशन का एक्‍सपेंशन, इनोवेशन का एक्सीलेरेशन, 50 हजार नई अटल टिंकरिंग लैब यानी अब देश के हर कोने में इनोवेशन का दीप जलेगा और एक दीप से जले दीप अनेक! एआई और स्किल डेवलपमेंट के लिए सेंटर ऑफ एक्‍सीलेंस यूथ को मिलेगा फ्यूचर रेडी बनने का मौका, 10 हजार नई पीएम रिसर्च फेलोशिप, अब आइडिया से इंपैक्ट तक का सफर और आसान होने वाला है। जैसे स्‍पेस सेक्टर खोला गया, वैसे ही अब न्‍यूक्‍लियर एनर्जी सेक्टर भी ओपन किया गया, इनोवेशन को अब सीमाएं नहीं, समर्थन मिलेगा। गिग इकोनॉमी से जुड़े युवाओं को पहली बार सोशल सिक्‍योरिटी का कवच दिया जाएगा। जो पहले दूसरों के लिए invisible थे, अब वे नीतियों के केंद्र में हैं और एससी, एसटी तथा वुमन आंत्रप्रन्योर्स के लिए दो करोड़ के टर्म लोन Inclusivity is not just a promise, it’s a policy. इन सभी निर्णयों का सीधा लाभ भारत के नौजवानों को मिलने वाला है क्योंकि जब युवा आगे बढ़ेगा, तभी भारत आगे बढ़ेगा।

साथियों,

इन 100 दिनों में भारत ने जो किया है, वो दिखाता है कि भारत रुकने वाला नहीं है, भारत झुकने वाला भी नहीं है, भारत अब थमने वाला भी नहीं है। इन 100 दिनों में भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बना, जिसने Satellites की Docking और Undocking की क्षमता हासिल की। भारत ने सेमी क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण करके दिखाया। भारत ने 100 गीगावॉट सोलर कैपेसिटी का ऐतिहासिक पड़ाव पार कर लिया। भारत ने 1 हजार मिलियन टन का रिकॉर्ड बनाया। National Critical Mineral Mission की शुरुआत हुई और इन्‍हीं 100 दिनों में कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग गठित करने का निर्णय हुआ। किसानों के लिए खाद पर सब्सिडी में बढ़ोतरी का फैसला हुआ यानी अन्नदाता की चिंता सरकार की प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ में 3 लाख से ज्यादा परिवारों ने एक साथ नए घरों में गृह प्रवेश किया। स्‍वामित्‍व योजना के तहत 65 लाख से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड सौंपे गए और इतना ही नहीं इन्‍हीं 100 दिनों में दुनिया की सबसे ऊंची टनलों में से एक सोनमर्ग टनल राष्‍ट्र को समर्पित की गई। आईएनएस सूरत, आईएनएस नीलगिरि, आईएनएस वाघशीर भारतीय नौसेना की ताकत में नए नगीने जुड़ गए। सेना के लिए मेड इन इंडिया लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर खरीदी को हरी झंडी मिली और वक्‍फ का, वक्फ कानून में संशोधन का बिल पास हुआ यानी सामाजिक न्‍याय के लिए एक और बड़ा और ठोस कदम लिया गया। ये 100 दिन, 100 फैसलों से भी बढ़कर है। ये 100 संकल्पों की सिद्धि के दिन हैं।

साथियों,

परफॉर्मेंस का यही मंत्र राइजिंग भारत के पीछे की असली एनर्जी है। आप जानते हैं, अभी दो दिन पहले ही मैं रामेश्वरम में था। वहां मुझे ऐतिहासिक पंबन ब्रिज के लोकार्पण का अवसर मिला। करीब सवा सौ साल पहले अंग्रेजों ने वहां एक पुल बनवाया था। उस पुल ने इतिहास देखा, उसने आंधियां सहीं, एक बार सुनामी ने, साइक्लोन ने उस पुल को बहुत नुकसान पहुंचाया। सालों तक देश इंतजार करता रहा, लोग मांग करते रहे, लेकिन पहले की सरकारों की नींद नहीं टूटी, जब हमारी सरकार आई, तो नए पंबन ब्रिज के लिए काम शुरू हुआ। और अब देश को अपना पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल-सी ब्रिज मिल गया है।

साथियों,

परियोजनाओं को लटकाते रहने से देश नहीं चलता, देश चलता है, परफॉर्म करने से, तेजी से काम करने से। Delay is the enemy of development और हमने इस दुश्मन को हराने की ठान ली है। मैं आपको और भी उदाहरण दूंगा। जैसे असम का बोगीबील ब्रिज, हमारे पूर्व पीएम देवगौड़ा जी ने 1997 में इसकी आधारशिला रखी। वाजपेयी जी की सरकार आई, उन्होंने काम शुरू करवाया। वाजपेयी जी की सरकार गई, कांग्रेस की सरकार आई, तो ब्रिज का काम भी लटक गया। अरुणाचल और असम के लाखों लोग परेशान होते रहे, लेकिन तब की सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ा। 2014 में आपने जब हमें सेवा करने का मौका दिया और ये प्रोजेक्ट फिर से शुरू हुआ। और सिर्फ 4 साल में, 2018 में ब्रिज का काम पूरा हो गया। ऐसे ही केरला में कोल्लम बाईपास रोड प्रोजेक्ट का भी उदाहरण है। ये 1972 से अटका था, सोचिए! 50 साल! LDF हो या UDF किसी सरकार ने 50 साल तक इसपर कोई काम नहीं कराया। हमने सरकार बनने के 5 साल के अंदर इसका काम पूरा कर दिया।

साथियों,

नवी मुंबई एयरपोर्ट पर भी 1997 से चर्चा शुरू हुई थी, 2007 में इसे मंजूरी मिली, लेकिन कांग्रेस की सरकार ने इस पर काम नहीं किया। हमारी सरकार ने इस प्रोजेक्ट को भी तेज़ी से पूरा किया। वो दिन दूर नहीं जब नवी मुंबई एयरपोर्ट से कमर्शियल फ्लाइट्स भी शुरू हो जाएंगी।

साथियों,

ये जो मैं गिना रहा हूं न, उसमें संसद भवन भी आएगा, ये भारत मंडपम भी आएगा।

साथियों,

आज 8 अप्रैल का एक और वजह से बहुत महत्व है। आज ही मुद्रा योजना के 10 साल पूरे हुए हैं। यहां जो युवा साथी बैठे हैं, उन्होंने तो अपने माता-पिता से जरूर कहानियां सुनी होंगी कि पहले बिना गारंटी के बैंक खाता तक नहीं खुलता था। खाता खोलने के लिए गारंटी चाहिए, किसी और एक के साथी की मदद चाहिए। बैंक लोन, ये सामान्य परिवार के लिए तो सपना हुआ करता था। गरीब परिवार, SC/ST, OBC, भूमिहीन मजदूर, महिलाएं, जो सिर्फ मेहनत कर सकते थे, लेकिन जिनके पास गिरवी रखने को कुछ नहीं था, क्या उनके सपनों की कोई कीमत नहीं थी? क्या उनकी Aspirations कम थीं? क्या उनकी मेहनत का कोई मोल नहीं था? हमारी मुद्रा योजना ने, उनकी एस्पिरेशन को एड्रेस किया, यूथ को एक नया रास्ता दिया। पिछले 10 साल में मुद्रा योजना के तहत 52 करोड़ लोन, बिना गारंटी दिए गए, 52 करोड़! और मुद्रा स्कीम की स्केल ही नहीं, स्पीड भी अद्भुत है। जब तक ट्रैफिक लाइट रेड से ग्रीन होती है, तब तक 100 मुद्रा लोन क्लियर हो जाते हैं। जब तक आप ब्रश करके फ्री होते हैं, तब तक 200 मुद्रा लोन अप्रूव होते हैं। जब तक आप किसी रेडियो चैनल पर अपना पसंदीदा गाना सुनकर खत्म करते हैं, तब तक 400 मुद्रा लोन सेंक्शन हो जाते हैं। आजकल instant delivery apps, इसका बड़ा चलन है। आपके ऑर्डर के बाद जितनी देर में डिलीवरी होती है, उतनी देर में एक हज़ार मुद्रा लोन सेंक्शन हो जाते हैं। जब तक आप किसी OTT पर एक एपिसोड खत्म करते हैं, तब तक 5 हज़ार मुद्रा बिजनेस का आधार बन जाता है।

साथियों,

मुद्रा योजना ने गारंटी नहीं मांगी, उसने भरोसा किया। और आप सभी को जानकर अच्छा लगेगा, मुद्रा योजना की वजह से 11 करोड़ लोगों को पहली बार अपना कोई काम करने के लिए स्वरोजगार के लिए लोन मिला है। ये 11 करोड़ लोग अब फर्स्ट टाइम आंत्रप्रन्योर्स बने हैं। यानी 10 साल में, 11 करोड़ नए सपनों को उड़ान मिली है। और आप जानते हैं कि मुद्रा से कितना पैसा, गांवों और छोटे शहरों में पहुंचा है? करीब 33 lakh crore रुपीज, तैंतीस लाख करोड़ रुपये! इतनी तो कई देशों की GDP भी नहीं है। This is not just microfinance, this is a mega transformation at the grassroots.

साथियों,

ऐसा ही उदाहरण, एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट और एस्पिरेशनल ब्लॉक्स का है। पहले की सरकारों ने देश के सौ से अधिक ऐसे जिलों को पिछड़ा घोषित करके उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया था। इनमें से अनेक जिले नॉर्थ ईस्ट में थे, ट्राइबल बेल्ट में थे। करना तो ये चाहिए था कि इन जिलों में सरकार अपना बेस्ट टैलेंट भेजती, लेकिन होता ये था कि इन जिलों में अफसरों को पनिशमेंट पोस्टिंग के लिए भेजा जाता था। यही तो पुरानी सोच थी, ‘पिछड़े को पिछड़ा ही रहने दो’। हमने ये अप्रोच बदली और इन जिलों को एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट घोषित किया। हमने इन जिलों की एडमिस्ट्रेशन पर फोकस किया है, अपनी फ्लैगशिप स्कीम्स को मिशन मोड पर इन जिलों में लागू किया। अलग-अलग पैरामीटर्स के आधार पर इन जिलों की ग्रोथ को मॉनीटर किया गया। आज वही Aspirational Districts कई राज्यों की एवरेज से बेहतर और कई तो national averages से आगे निकल चुके हैं। और इसका सबसे बड़ा लाभ वहीं के युवाओं को मिला है। अब वहां के नौजवान कहते हैं, हम भी कर सकते हैं, हम भी आगे बढ़ सकते हैं। आज दुनिया के कई reputed institutions, reputed journals, एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम की सराहना करते हैं। इसी सफलता से प्रेरणा लेकर अब हम 500 एस्पिरेशनल ब्लॉक्स पर काम कर रहे हैं। जब ग्रोथ को एस्पिरेशन्स ड्राइव करती हैं, तो वो समावेशी भी होती है और सस्टेनबल भी होती है।

साथियों,

किसी भी देश के तेज विकास के लिए बहुत जरूरी है, देश में शांति, स्थिरता और सुरक्षा की भावना। गुरुदेव टैगोर की कल्पना थी, चित्त जेथा भयशून्यो, उच्च जेथा शिर, Where the mind is without fear, and the head is held high. लेकिन दशकों तक भारत में डर का, भय का, आतंक का माहौल बढ़ता ही गया। इसका सबसे ज्यादा नुकसान भी युवाओं को ही हुआ। हिंसा, अलगाव, आतंक की आग में सबसे ज्यादा देश का युवा ही झुलसा है। जम्मू कश्मीर में दशकों तक युवाओं की अनेक पीढ़ियां बम-बंदूक और पत्थरबाजी में खप गईं। लेकिन दशकों तक देश पर शासन करने वाले, इस आग को बुझाने का साहस नहीं दिखा पाए। हमारी सरकार की स्ट्रॉन्ग पॉलिटिकल विल और संवेदनशीलता के चलते आज वहां हालात बदले हैं। आज जम्मू कश्मीर का नौजवान विकास से जुड़ चुका है।

साथियों,

आप नक्सलवाद को भी देखिए, देश के सवा सौ से अधिक जिले, नक्सलवाद की चपेट में, हिंसा की चपेट में थे, सवा सौ डिस्ट्रिक्ट! जहां से नक्सलवाद शुरू होता था, वहां सरकार की बाउंड्री खत्म हो जाती थी। बड़ी संख्या में नौजवान नक्सलवाद से पीड़ित थे। हमने ऐसे नौजवानों को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रयास किए। बीते 10 वर्षों में 8 हज़ार से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया है, हिंसा का रास्ता छोड़ा है। आज नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या भी 20 से कम रह गई है। हमारे नॉर्थ ईस्ट में भी दशकों से अलगाव का, हिंसा का एक अंतहीन सिलसिला चल रहा था। हमारी सरकार ने, बीते 10 सालों में 10 बड़े शांति समझौते किए। इस दौरान, 10 हजार से ज्यादा युवाओं ने हथियारों को छोड़ा और विकास की मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। सफलता सिर्फ ये नहीं है कि हज़ारों युवाओं ने हथियार छोड़े, सफलता ये भी है कि इसने हज़ारों नौजवानों का वर्तमान और भविष्य बचाया है।

साथियों,

हमारे यहां दशकों तक एक प्रवृत्ति चली। राष्ट्रीय चुनौतियों को पहचानने के बजाय, उन्हें राजनीतिक कालीन के नीचे छिपा दिया गया। लेकिन अब समय आ गया है कि हम ऐसे मुद्दों से आँख न चुराएं। 21वीं सदी की पीढ़ियों को हम 20वीं सदी की राजनीतिक भूलों का बोझ नहीं दे सकते हैं। भारत की ग्रोथ में, तुष्टिकरण की राजनीति एक बहुत बड़ी चुनौती रही है। अभी संसद में वक्फ से जुड़े कानून में संशोधन हुआ है। इस पर आपके नेटवर्क ने भी काफी चर्चा की है। ये जो वक्फ से जुड़ी डिबेट है, इसके मूल में तुष्टिकरण की राजनीति है, पॉलिटिक्स ऑफ अपिजमेंट है। ये तुष्टिकरण की राजनीति कोई नई नहीं है। इसका बीज, हमारे स्वतंत्रता संग्राम के समय ही बो दिया गया था। आप सोचिए, भारत से पहले, भारत के साथ-साथ और हमारे बाद, दुनिया में कई देश आजाद हुए। लेकिन कितने देश ऐसे हैं, जिनकी आजादी की शर्त विभाजन थी? कितने देश हैं, जो आजादी के साथ ही टूट गए? भारत के साथ ही ऐसा क्यों हुआ? क्योंकि उस समय राष्ट्र के हित से ऊपर सत्ता का मोह रख दिया गया। अलग देश का विचार सामान्य मुस्लिम परिवारों का नहीं था। बल्कि कुछ कट्टरपंथियों का था। जिसको कांग्रेस के कुछ नेताओं ने खाद-पानी दिया। ताकि वे सत्ता के अकेले दावेदार बन सकें।

साथियों,

तुष्टिकरण की इस राजनीति में कांग्रेस को सत्ता मिली, कुछ कट्टरपंथी नेताओं को ताकत और दौलत मिली लेकिन सवाल ये है, आम मुसलमान को क्या मिला? गरीब, पसमांदा मुसलमान को क्या मिला? उसे मिली उपेक्षा। उसे मिली अशिक्षा। उसे मिली बेरोजगारी। और मुस्लिम महिलाओं को क्या मिला? उन्हें मिला, शाहबानो जैसा अन्याय। जहाँ उनका संवैधानिक हक कट्टरपंथ की भेंट चढ़ गया। उन्हें मिला, चुप रहने का आदेश, सवाल न पूछने का दबाव। और कट्टरपंथियों को मिल गया खुला लाइसेंस, महिलाओं के अधिकारों को कुचलने का।

साथियों,

तुष्टिकरण यानी पॉलिटिक्स ऑफ appeasement भारत की सोशल जस्टिस की मूल अवधारणा के पूरी तरह खिलाफ है। लेकिन कांग्रेस ने इसे वोटबैंक की राजनीति का हथियार बना दिया। 2013 में वक्फ कानून में किया गया संशोधन मुस्लिम कट्टरपंथियों और भू-माफियाओं को खुश करने का प्रयास था। इस कानून को ऐसा रूप दिया गया कि उसने संविधान के ऊपर खड़ा होने का भ्रम पैदा किया। जिस संविधान ने न्याय के रास्ते खोले, उन्हीं रास्तों को वक्फ कानून में संकुचित कर दिया गया। और इसके दुष्परिणाम क्या हुए? कट्टरपंथियों और भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हुए। केरल में ईसाई समाज के ग्रामीणों की जमीन पर वक्फ के दावे, हरियाणा में गुरुद्वारों की जमीन विवादों में, कर्नाटक में किसानों की जमीन पर दावा, कई राज्यों में गाँव के गाँव, हजारों हेक्टेयर जमीन अब NOC और कानूनी उलझनों में फंसी पड़ी हैं। मंदिर हों, चर्च हों, गुरुद्वारे हों, खेत हों, सरकारी जमीनें हों, किसी को भी अब भरोसा नहीं रह गया था कि उनकी जमीन उनकी ही रहेगी। सिर्फ एक नोटिस आता था और लोग अपने ही घर और खेत के लिए कागज़ ढूंढते रह जाते थे। जो कानून न्याय के लिए था, वो डर का कारण बन गया, ये कैसा कानून था?

साथियों,

मैं देश की संसद को, सर्वसमाज के हित में, मुस्लिम समाज के हित में एक शानदार कानून बनाने के लिए बधाई देता हूं। अब वक्फ की पवित्र भावना की भी रक्षा होगी और गरीब-पसमांदा मुसलमान, महिला-बच्चे, सबके हक भी महफ़ूज़ रहेंगे। वक्फ बिल पर हुई बहस, हमारे संसदीय इतिहास की दूसरी सबसे लंबी डिबेट थी, यानी 75 साल में दूसरी सबसे लंबी डिबेट। इस बिल को लेकर दोनों सदनों को मिलाकर 16 घंटे चर्चा हुई। JPC की 38 बैठकें हुईं, 128 घंटे चर्चा हुई। देशभर से लगभग एक करोड़ ऑनलाइन सुझाव आए। ये दिखाता है कि, आज भारत में लोकतंत्र सिर्फ संसद की चार दीवारों तक सीमित नहीं है। हमारा लोकतंत्र जन-भागीदारी से और अधिक मजबूत हो रहा है।

साथियों,

आज दुनिया तेजी से टेक्नॉलजी और AI की ओर बढ़ रही है। और इसीलिए अब ये ज्यादा जरूरी है कि हम हमारी Softer Sides पर आर्ट, म्यूजिक, कल्चर, क्रिएटिविटी, क्योंकि हम Robots तैयार करना नहीं चाहते, हम मनुष्य तैयार करना चाहते हैं। यानी जो कुछ भी हमें मशीनों के सहारे चलता है, उन पर मानवता के लिए, संवेदनशीलता के लिए ज्यादा काम करें। Entertainment, आज दुनिया की सबसे बड़ी इंडस्ट्री में से एक है और आने वाले समय में इसका और विस्तार होगा। ऐसे ही समय में, हमने आर्ट और कल्चर को Encourage करने के लिए, इसे Celebrate करने के लिए, Waves और अभी राहुल जब भाषण कर रहे थे, शायद 10 बार Waves आए, 10 बार Waves शब्द था, लेकिन वो Waves 2014 में ही शुरू हुआ है, ऐसा नहीं, हर 10 साल में नए रंग रूप के साथ आता है और आज जब मैं उस Waves की बात कर रहा हूं यानी Waves यानी World Audio-Visual and Entertainment Summit, इस Waves नाम का प्लेटफॉर्म बनाया गया है। अगले महीने मुंबई में इसका बहुत बड़ा आयोजन होने जा रहा है और ये लगातार होते रहने वाला है, एक लंबी व्यवस्था खड़ी हो रही है। आप सभी जानते हैं, हमारे यहां मूवीज, पॉडकास्ट, गेमिंग, म्यूजिक, ए-आर और वी-आर की बहुत Vibrant और Creative Industry है। हमने Create in India का मंत्र लेकर इसे नेक्स्ट लेवल पर ले जाने का फैसला लिया है। WAVES, Indian Artists को Content बनाने और Global बनाने के लिए Encourage करेगा। और इसके साथ-साथ Create in India, दुनिया भर के आर्टिस्ट्स को भारत में आने का अवसर भी देगा। मैं Network18 के साथियों से भी कहूंगा कि वो WAVES के प्लेटफार्म को Popularise करने के लिए आगे आएं। यहां बड़ी संख्या में क्रिएटिव डोमेन्स में काम करने वाले युवा साथी हैं, कुछ लोगों से मुझे मिलने का मौका भी मिला। मैं उन्हें भी कहूंगा, वो इस मूवमेंट, इस प्लेटफार्म का हिस्सा बनें। WAVES की लहर, हर घर, हर दिल तक पहुंचनी चाहिए! आप लोग ये करेंगे, ये मुझे पूरा विश्वास है।

साथियों,

Network18 ने इस समिट के माध्यम से देश के युवाओं की क्रिएटिविटी, उनकी सोच, उनकी संकल्प-शक्ति को जिस तरह सामने रखा है, वह सराहनीय है। आपने युवाओं को engage किया, उन्हें देश की समस्याओं पर सोचने, सुझाव देने और समाधान खोजने का मंच दिया और सबसे बड़ी बात, उन्हें सिर्फ श्रोता नहीं, परिवर्तन का भागीदार बनाया। अब मैं देश की यूनिवर्सिटीज़, कॉलेजों और रिसर्च इंस्टीट्यूशंस से आग्रह करता हूँ कि इस समिट के engagement को आगे ले जाएं। जो insights निकले हैं, जो सुझाव आए हैं, उन्हें डॉक्यूमेंट करें, स्टडी करें, और पॉलिसी तक पहुंचाएं। तभी ये समिट सिर्फ एक इवेंट नहीं, एक प्रभाव बन पाएगी। आपका उत्साह, आपकी सोच, आपकी भागीदारी ही, भारत को विकसित देश बनाने के संकल्प की ऊर्जा है। मैं एक बार फिर, इस आयोजन से जुड़े सभी साथियों को और विशेषकर हमारे युवा साथियों को, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा पर भारत-नीदरलैंड का जॉइंट स्टेटमेंट
May 17, 2026

नीदरलैंड के प्रधानमंत्री श्री रॉब जेटेन के निमंत्रण पर, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 16-17 मई 2026 को नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा की। यह प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड की दूसरी यात्रा थी।

16 मई की सुबह, नीदरलैंड के महामहिम राजा विलेम अलेक्जेंडर और महारानी मैक्सिमा ने हेग स्थित रॉयल पैलेस हुइस टेन बॉश में प्रधानमंत्री मोदी का द्विपक्षीय बैठक के लिए स्वागत किया। महामहिम ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए दोपहर के भोजन का भी आयोजन किया।

प्रधानमंत्री जेटन और प्रधानमंत्री मोदी ने प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की, जिसके बाद 16 मई की शाम को रात्रिभोज का आयोजन किया गया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक और ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों, गहरे जन-संबंधों और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को याद किया और इन बहुआयामी संबंधों को और अधिक गहरा करने की इच्छा व्यक्त की। इस बावत, दोनों नेताओं ने नियमित बातचीत के ज़रिए, जिसमें उच्चतम राजनीतिक स्तर पर हुई बातचीत और 2023 में भारत की जी20 की अध्यक्षता और फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुए सार्थक सहयोग के ज़रिए विभिन्न सहयोग कार्यक्रमों में हाल के वर्षों में हासिल की गई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों और बढ़ती समानताओं को देखते हुए, दोनों नेताओं ने भारत और नीदरलैंड के संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया। इस संदर्भ में, उन्होंने एक रणनीतिक साझेदारी रोडमैप को अपनाने का स्वागत किया, जिसके तहत दोनों पक्ष राजनीतिक, व्यापार और निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, एआई और क्वांटम सिस्टम सहित महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों, विज्ञान एवं नवाचार, स्थिरता, स्वास्थ्य, सतत् कृषि एवं खाद्य प्रणालियों, जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन एवं ऊर्जा संक्रमण, सतत् परिवहन, समुद्री विकास, शिक्षा, संस्कृति एवं दोनों देशों की जनता के बीच संबंधों सहित सभी क्षेत्रों में नियमित और सुनियोजित सहयोग के ज़रिए कार्य करने पर सहमत हुए। दोनों पक्षों ने नीति नियोजन के क्षेत्र में आदान-प्रदान की संभावनाओं का पता लगाने पर भी सहमति जताई।

दोनों नेताओं ने इस संबंध में दिसंबर 2025 में विभिन्न प्राथमिकता वाले क्षेत्रों, जैसे रक्षा, सेमीकंडक्टर और संबंधित उभरती प्रौद्योगिकियों, डिजिटल और साइबरस्पेस में सहयोग बढ़ाने, दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों में सहयोग, संयुक्त व्यापार और निवेश समिति की स्थापना, साथ ही लोथल और एम्स्टर्डम के समुद्री संग्रहालयों के बीच सहयोग पर हुए समझौतों का स्वागत किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भविष्य के लिए समझौते का उल्लेख किया और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के अनुरूप लोकतंत्र, मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा तथा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था सहित साझा मूल्यों और सिद्धांतों को बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता ज़ाहिर की। दोनों सरकारों ने समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी सदस्यता श्रेणियों के विस्तार सहित बहुपक्षीय प्रणाली को मजबूत और सुधारने की अपनी प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया और एक निश्चित समय सीमा के भीतर लिखित वार्ता का आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने एक सुधारित और विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए भारत की स्थायी सदस्यता के लिए निरंतर मिले डच समर्थन के लिए प्रधानमंत्री जेटन को धन्यवाद दिया।

दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई और इस संबंध में इस साल जनवरी में पारस्परिक रूप से लाभकारी भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के लिए वार्ता के सफल समापन का स्वागत किया। उन्होंने सहमति जताई कि यह मुक्त व्यापार समझौता, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के दौर में दुनिया की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा और आर्थिक खुलेपन और नियम-आधारित व्यापार के प्रति संयुक्त प्रतिबद्धता को उजागर करेगा। दोनों नेताओं ने सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर एक साथ हस्ताक्षर का भी स्वागत किया, जो सुरक्षा और रक्षा पर यूरोपीय संघ और भारत के संवाद और सहयोग को मजबूत करेगा और समुद्री सुरक्षा, साइबर, आतंकवाद-विरोधी और रक्षा औद्योगिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में ठोस परिणाम देगा।

दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान, नौवहन की स्वतंत्रता और दवाब तथा संघर्षों से परे एक स्वतंत्र, खुले, सुरक्षित और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्व पर सहमति व्यक्त की। इंडो-पैसिफिक पर यूरोपीय संघ की रणनीति का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री जेटन ने इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) में नीदरलैंड्स के शामिल होने और जर्मनी तथा यूरोपीय संघ के साथ क्षमता निर्माण एवं संसाधन साझाकरण का सह-नेतृत्व करने के निर्णय की घोषणा की।

यूक्रेन के मुद्दे पर, दोनों पक्षों ने जारी युद्ध पर चिंता जताई, जिसमें भारी तादाद में लोगों को कष्ट झेलने पड़ रहे हैं और जिसके वैश्विक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों पर आधारित संवाद और कूटनीति के माध्यम से यूक्रेन में व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति प्राप्त करने के प्रयासों का समर्थन जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।

दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व की स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई और क्षेत्र तथा व्यापक विश्व पर इसके गंभीर प्रभावों का उल्लेख किया, जिनमें भारी मानवीय पीड़ा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार नेटवर्क में व्यवधान शामिल हैं। दोनों नेताओं ने 8 अप्रैल 2026 को घोषित युद्धविराम का स्वागत किया। उन्होंने तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के महत्व पर बल दिया और पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व में स्थायी शांति की उम्मीद जताई। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से निर्बाध नौवहन और वैश्विक व्यापार प्रवाह का आह्वान किया और किसी भी प्रतिबंधात्मक उपाय का विरोध करते हुए इस संबंध में चल रहे प्रयासों और पहलों के प्रति अपना समर्थन दोहराया।

आर्थिक सहयोग, व्यापार एवं निवेश

दोनों नेताओं ने कहा कि नीदरलैंड-भारत आर्थिक साझेदारी, सहयोग का एक आदर्श उदाहरण है, जो स्थिरता, नवाचार और दीर्घकालिक विकास जैसी साझा प्राथमिकताओं से प्रेरित है और दोनों देशों के लिए पारस्परिक समृद्धि का सृजन करती है। उन्होंने कुशल आपूर्ति श्रृंखलाओं और खुले बाजारों के प्रति साझा प्रतिबद्धता द्वारा समर्थित दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि का स्वागत किया। विश्व स्तरीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क वाला नीदरलैंड, रॉटरडैम बंदरगाह सहित अन्य मार्गों से, भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोप का एक रणनीतिक प्रवेश द्वार है। वहीं, भारत डच कंपनियों के लिए एक विशाल और गतिशील बाजार प्रदान करता है, जिन्हें विस्तार के अवसरों, व्यापार-अनुकूल वातावरण और भारत में उपलब्ध कुशल प्रतिभाओं के विशाल भंडार से काफी लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, भारतीय व्यवसाय जल प्रबंधन, सतत् कृषि और स्मार्ट शहरों के क्षेत्र में डच विशेषज्ञता का लाभ उठा सकते हैं।

दोनों देशों के बीच मौजूदा आर्थिक सहयोग पर संतोष व्यक्त करते हुए, नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से उत्पन्न अवसरों को लेकर, विशेष रूप से आगे की वृद्धि की अपार संभावनाओं पर बल दिया। नीदरलैंड भारत के प्रमुख व्यापार और निवेश साझेदारों में से एक बना हुआ है, जो द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों की गहराई और मजबूती को दर्शाता है।

व्यापार और निवेश को और सुगम बनाने के लिए, प्रधानमंत्रियों ने सीमा शुल्क मामलों में पारस्परिक प्रशासनिक सहायता समझौते पर हस्ताक्षर का स्वागत किया, जिससे दोनों देशों के सीमा शुल्क अधिकारियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान संभव हो सकेगा और इस प्रकार सीमा शुल्क प्रवर्तन को बढ़ावा मिलेगा तथा भारत और नीदरलैंड के बीच वैध व्यापार को सुगम बनाया जा सकेगा।

दोनों नेताओं ने भारत-नीदरलैंड संयुक्त व्यापार और निवेश समिति और फास्ट ट्रैक तंत्र जैसे अन्य माध्यमों से द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को और आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने सतत् विकास, रोजगार सृजन और सुदृढ़ मूल्य श्रृंखलाओं को समर्थन देने के लिए निवेश सुगमता बढ़ाने और नवाचार तंत्र को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने पर सहमति जताई।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने स्टार्टअप और नवाचार में सहयोग की प्रबल संभावनाओं पर ज़ोर देते हुए कहा कि भारत और नीदरलैंड में विकसित समाधानों को वैश्विक स्तर पर, जिनमें भारतीय और यूरोपीय संघ के बाजार भी शामिल हैं, लागू किया जा सकता है। उन्होंने दोनों देशों की स्टार्टअप व्यवस्थाओं को और अधिक जोड़ने, आदान-प्रदान को सुगम बनाने और डिजिटल सॉफ्ट-लैंडिंग कार्यक्रमों के साथ-साथ व्यापार मिशनों, नवाचार मिशनों और प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलनों में भागीदारी बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग

दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग को लेकर आशय पत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया और संबंधित रक्षा मंत्रालयों के बीच नियमित बातचीत और स्टाफ स्तर की वार्ताओं के ज़रिए दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को गहरा करने के महत्व पर बल दिया, ताकि सूचनाओं के आदान-प्रदान, यात्राओं, अनुसंधान, नवाचार और प्रशिक्षण गतिविधियों का बेहतर ढंग से समन्वय किया जा सके। उन्होंने दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग के दायरे को और अधिक विस्तारित करने की दिशा में आगे बढ़ने पर भी सहमति व्यक्त की।

दोनों नेता यूरोपीय संघ के तंत्रों और अन्य साझेदारों के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी एकमत हुए और साथ ही उन्होंने एक रक्षा औद्योगिक रोडमैप स्थापित करने की संभावनाओं का पता लगाने पर भी सहमति जताई, जिसमें दोनों देशों के सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सह-विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सह-उत्पादन के लिए संयुक्त उद्यमों की स्थापना के ज़रिए रक्षा उपकरण, प्रणालियों, घटकों और अन्य प्रमुख क्षमताओं के निर्माण हेतु रक्षा औद्योगिक सहयोग को निर्धारित किया गया है।

दोनों नेताओं ने सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी उपायों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के अन्य पारस्परिक रूप से सहमत मामलों सहित पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा मुद्दों पर दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्रों के बीच नियमित आदान-प्रदान शामिल है।

दोनों नेताओं ने वार्षिक द्विपक्षीय साइबर परामर्शों पर संतोष व्यक्त किया और साथ ही ऑनलाइन साइबर स्कूल के 8वें सत्र के आयोजन को एक खुले, स्वतंत्र और सुरक्षित साइबरस्पेस को सुनिश्चित करने के लिए, दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने का साधन बताया। इस संदर्भ में, नेताओं ने साइबरस्पेस में सहयोग बढ़ाने के लिए आशय पत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया, जिसमें बहुपक्षीय मंचों में घनिष्ठ समन्वय और क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान के ज़रिए साइबर खतरों और साइबर अपराध का मुकाबला करने के लिए संयुक्त प्रयास शामिल हैं।

दोनों नेताओं ने एक खुले, स्वतंत्र, सुरक्षित, स्थिर, सुलभ और शांतिपूर्ण सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) वातावरण के महत्व पर जोर दिया, जिसे नवाचार और आर्थिक विकास का प्रवर्तक माना जाता है। इस संबंध में प्रधानमंत्री मोदी ने 19 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में नीदरलैंड की रचनात्मक भागीदारी के लिए उसे धन्यवाद दिया।

प्रधानमंत्री जेटन ने अप्रैल 2025 में भारत के जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में नागरिकों पर हुए जघन्य और घृणित आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद, जिसमें सीमा पार आतंकवाद भी शामिल है, के खिलाफ लड़ाई में भारत के प्रति नीदरलैंड की एकजुटता और अटूट समर्थन व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने दोषियों को जवाबदेह ठहराने का आह्वान किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की साफ तौर पर निंदा की। उन्होंने आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता का दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया और आतंकवाद का मुकाबला करने में दोहरे मापदंडों को भी अस्वीकार किया।

दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र और एफएटीएफ सहित द्विपक्षीय और बहुपक्षीय तंत्रों के ज़रिए व्यापक और सतत् तरीके से आतंकवाद का मुकाबला करने की ज़रुरत पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा प्रतिबंधित समूहों और उनके प्रतिनिधियों, सहयोगियों, प्रायोजकों, समर्थकों और वित्तपोषकों सहित सभी आतंकवादियों और आतंकवादी समूहों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया। दोनों पक्षों ने सभी देशों से आतंकवादी सुरक्षित ठिकानों और बुनियादी ढांचे को समाप्त करने, आतंकवादी नेटवर्क और उनके वित्तपोषण को बाधित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार आतंकवाद के अपराधियों को शीघ्रता से न्याय के कटघरे में लाने की दिशा में काम जारी रखने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री जेटन ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र व्यापक सम्मेलन (सीसीआईटी) स्थापित करने के भारत के प्रयासों के प्रति समर्थन व्यक्त किया।

दोनों नेताओं ने मानवरहित विमान प्रणालियों, आतंकवादियों द्वारा आभासी संपत्तियों के उपयोग, आतंकवादी संगठनों और सूचना तथा संचार प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग से बढ़ते खतरों पर भी चिंता जताई।

आतंकवाद से निपटने और इस संबंध में वैश्विक सहयोग के ढांचे को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को स्वीकार करते हुए, दोनों नेताओं ने सभी देशों द्वारा धन शोधन विरोधी और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।

उभरती प्रौद्योगिकियां, नवाचार, विज्ञान और शिक्षा

दोनों नेताओं ने सेमीकंडक्टर और संबंधित उभरती प्रौद्योगिकी पर साझेदारी के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया, जो निवेश, अनुसंधान और प्रतिभाओं के आदान-प्रदान सहित सेमीकंडक्टर क्षेत्र में गहन सहयोग के लिए ढांचा प्रदान करता है।

दोनों नेताओं ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में जारी सहयोग का भी स्वागत किया, जिसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी शुरू करने और सरकारों, व्यवसायों और ज्ञान संस्थानों की विशेषज्ञता को जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह सहयोग विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पर पहले से सक्रिय संयुक्त कार्य समूह के ज़रिए संयुक्त अनुसंधान और विकास परियोजनाओं, प्रतिभा गतिशीलता और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सुगम बनाता है। दोनों नेताओं ने पिछले वर्षों में संयुक्त रूप से शुरू किए गए लगभग पचास बड़े अनुसंधान और नवाचार कार्यक्रमों पर विचार किया और साझा समाधानों के साथ सामान्य सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के मकसद से प्रमुख सहायक प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में निरंतर सहयोग के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया।

दोनों नेताओं ने डच सेमीकंडक्टर कॉम्पिटेंस सेंटर को भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) से जोड़ने की पहल का भी स्वागत किया, जिसका मकसद सहयोग, प्रौद्योगिकी और प्रतिभा विकास के ज़रिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र, खास तौर पर उद्योगों, स्टार्टअप्स, स्केल-अप्स, एसएमई और उनके आपूर्तिकर्ताओं को समर्थन देना और मज़बूत करना है। इसके अलावा, दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-डच सेमीकंडक्टर ऑनलाइन स्कूल और इसके अगले चरण के लिए सराहना की।

दोनों नेताओं ने आइंडहोवेन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और यूनिवर्सिटी ऑफ ट्वेंटे तथा छह प्रमुख भारतीय तकनीकी संस्थानों (आईआईएससी बैंगलोर, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी गुवाहाटी और आईआईटी मद्रास) के बीच सेमीकंडक्टर और संबंधित प्रौद्योगिकियों में ब्रेन ब्रिज के लिए सहयोग ज्ञापन को अपनाने का स्वागत किया, जिसमें NXP, ASML, TATA और CG Semi की औद्योगिक भागीदारी है। इससे दोनों पक्षों की अकादमिक और उद्योग भागीदारी के साथ अनुसंधान विकास तथा प्रतिभा विकास को गति मिलेगी।

सतत् नवाचार के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के रणनीतिक महत्व और मज़बूत एवं टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता को पहचानते हुए, दोनों नेताओं ने अन्वेषण, अनुसंधान एवं नवाचार, मूल्य श्रृंखलाओं के एकीकरण, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, चक्रीय प्रक्रिया और ईएसजी मानकों तथा संबंधित आकलन सहित महत्वपूर्ण खनिजों की मूल्य श्रृंखला में सहयोग को और मज़बूत करने में अपनी पारस्परिक रुचि व्यक्त की। इस संदर्भ में, नेताओं ने महत्वपूर्ण खनिजों पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने भारत के शिक्षा मंत्रालय और नीदरलैंड के शिक्षा, संस्कृति और विज्ञान मंत्रालय के बीच उच्च शिक्षा पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। इस समझौता ज्ञापन का मकसद दोनों देशों के उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच उनकी संबंधित शैक्षणिक प्राथमिकताओं और ज़रुरतों के मुताबिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

दोनों नेताओं ने डच और भारतीय विश्वविद्यालयों के बीच चल रहे संस्थागत सहयोग पर भी संतोष जताया, जिसमें हाल ही में हुए सहयोग शामिल हैं, जैसे कि ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय और नालंदा विश्वविद्यालय; डेल्फ़्ट प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और मुंबई महानगर क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण; सर्वे ऑफ इंडिया और आईटीसी, ट्वेंटे विश्वविद्यालय; व्रीजे यूनिवर्सिटेट एम्स्टर्डम और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की और कई अन्य। दोनों नेताओं ने माना कि भारत-डच शिक्षा एवं अकादमिक नेटवर्क जैसे मंच शैक्षिक और वैज्ञानिक सहयोग को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

दोनों नेताओं ने भारत और नीदरलैंड के बीच खास तौर पर जलवायु परिवर्तन, जल समस्या, खाद्य सुरक्षा और वायु गुणवत्ता जैसी सामाजिक चुनौतियों के समाधान में अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों के उपयोग पर जारी अंतरिक्ष साझेदारी और इसे और अधिक मज़बूत करने की संभावना को स्वीकार किया।

ऊर्जा सुरक्षा और परिवर्तन / चक्रीय अर्थव्यवस्था

जैव ईंधन और जैव रसायन के क्षेत्र में सक्रिय द्विपक्षीय सहयोग को देखते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने जी20 की भारत की अध्यक्षता के दौरान शुरू किए गए वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन में नीदरलैंड के शामिल होने का स्वागत किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने जैव अर्थव्यवस्था पर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया और भारत और नीदरलैंड द्वारा सह-अध्यक्षता में चलाए गए जैव रिफाइनरी मिशन इनोवेशन प्रोग्राम की सफलता पर विचार-विमर्श किया।

'अपशिष्ट से मूल्य' पर जारी सहयोग को स्वीकार करते हुए, दोनों नेताओं ने कहा कि डच राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था कार्यक्रम 2023-2030 का 2025 का अद्यतन और विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (WCEF) 2026 की भारतीय अध्यक्षता, नए क्षेत्रों में साझेदारी के विस्तार का अवसर प्रदान करेगी। इसमें औद्योगिक चक्रीयता, सतत् और जलवायु-परिवर्तनीय शहरी प्रणालियों के लिए ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन, पायलट और स्केलेबल परियोजनाओं में प्रौद्योगिकी तैनाती, नवाचार की शुरुआत और व्यापार और निवेश प्रोत्साहन के अवसर शामिल हैं, जैसे कि बी2बी साझेदारी के माध्यम से, जिसके लिए डच कंपनियों को संसाधन दक्षता और चक्रीय अर्थव्यवस्था उद्योग गठबंधन (RECEIC) में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था। सतत् गतिशीलता के क्षेत्र में, स्मार्ट और अंतर-संचालनीय चार्जिंग अवसंरचना, बैटरी प्रौद्योगिकी और सिस्टम एकीकरण, मानकीकरण और खुले प्रोटोकॉल, भारी और मध्यम-भारी शून्य-उत्सर्जन वाहन, स्मार्ट शहरी गतिशीलता प्रणाली और बहुमॉडल एकीकरण और वैकल्पिक ईंधन और सक्रिय गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा किया जा सकता है।

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और नीदरलैंड के बीच साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से, दोनों नेताओं ने नवीकरणीय ऊर्जा पर समझौता ज्ञापन के तहत एक संयुक्त कार्य समूह की स्थापना का स्वागत किया। यह समझौता ज्ञापन नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग के विविध एजेंडे के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करता है, जिसमें नवोन्मेषी सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, भंडारण और ऊर्जा परिवर्तन को सुगम बनाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश शामिल हैं।

नवीकरणीय ऊर्जा पर सहयोग और द्विपक्षीय निवेश को और मजबूत करने के लिए, दोनों नेताओं ने हरित हाइड्रोजन विकास पर महत्वाकांक्षी भारत-नीदरलैंड रोडमैप का शुभारंभ किया। नेताओं ने सहमति जताई कि यह रोडमैप हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए भारत की महत्वाकांक्षा, विशाल क्षमता और प्रतिस्पर्धी लाभों का समर्थन करने में सहायक होगा, साथ ही दोनों देशों में ऊर्जा के एक स्थायी स्रोत के रूप में हरित हाइड्रोजन को तेजी से अपनाने में योगदान देगा।

इसके अतिरिक्त, नीति आयोग और नीदरलैंड के बीच ऊर्जा परिवर्तन के लिए क्षमता निर्माण पर संयुक्त आशय वक्तव्य का नवीनीकरण ऊर्जा सुरक्षा और परिवर्तन क्षेत्रों में निरंतर सहयोग सुनिश्चित करेगा।

दोनों नेताओं ने अकादमिक सहयोग को मजबूत करने के लिए ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय (आरयूजी) और 19 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन का स्वागत किया। उन्होंने भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और आरयूजी के बीच हाइड्रोजन पर पीएचडी फैलोशिप कार्यक्रम की स्थापना का भी स्वागत किया।

जल प्रबंधन

दोनों नेताओं ने भारत की जल संबंधी आवश्यकताओं और नीदरलैंड की विशेषज्ञता एवं अनुभव के बीच तालमेल को और बेहतर करने के लिए जल संबंधी रणनीतिक साझेदारी के तहत हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने जल एवं नदी प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे संयुक्त प्रयासों की सराहना की, जिनमें नमामि गंगा मिशन में साझेदारी, जलवायु परिवर्तन के दौरान शहरी नदी प्रबंधन योजनाओं के ज़रिए 'जल का लाभ उठाना', डेल्टा प्रबंधन, जल गुणवत्ता प्रबंधन, अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग और नई जल प्रौद्योगिकियों का परिचय शामिल है। दोनों नेताओं ने सुरक्षित स्वच्छता प्रबंधन और स्वच्छ जल तक समावेशी पहुंच के महत्व पर जोर दिया और स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों के अनुरूप, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जल संरक्षण और स्वच्छता संबंधी विकासात्मक परियोजनाओं के लिए सतत् वित्तपोषण में नीदरलैंड के योगदान को स्वीकार किया।

दोनों नेताओं ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड सरकार के अवसंरचना एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के सहयोग से जल उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना का स्वागत किया। नेताओं ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल राज्यों में चल रहे विभिन्न संयुक्त कार्यक्रमों के तहत हुई प्रगति पर भी ग़ौर किया।

दोनों नेताओं ने गुजरात के कल्पसर परियोजना पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की, जहां परियोजना में डच विशेषज्ञता और तकनीकी सहायता जल पर रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने में सहायक हो सकती है।

दोनों नेताओं ने भारत के नेतृत्व वाले वैश्विक आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) के शहरी जल अवसंरचना सशक्तिकरण कार्यक्रम में अब तक हुई प्रगति पर भी गौर किया, जिसके ज़रिए नीदरलैंड अपनी सदस्यता के तहत अपनी विशेषज्ञता साझा करता है। दोनों नेता राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के साथ भारतीय शहरों में और वैश्विक स्तर पर 50 से अधिक CDRI सदस्य देशों में विकसित प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

समुद्री विकास

दोनों प्रधानमंत्रियों ने समुद्री सहयोग पर हाल ही में नवीनीकृत समझौता ज्ञापन का ज़िक्र किया और भारत और नीदरलैंड के बीच अक्टूबर 2025 में हस्ताक्षरित आशय पत्र में उल्लिखित रणनीतिक 'हरित और डिजिटल समुद्री गलियारे' के विकास में सहयोग करते हुए, सुरक्षित, संरक्षित और टिकाऊ समुद्री क्षेत्र की दिशा में निरंतर सहयोग के महत्व पर बल दिया। इस संदर्भ में, उन्होंने बंदरगाहों और अंतर्देशीय जलमार्गों के स्मार्ट और टिकाऊ विकास, आपूर्ति श्रृंखला अनुकूलन और हरित बंदरगाहों और जहाजरानी के क्षेत्रों में अपनी साझेदारी को और गहरा और व्यापक बनाने पर सहमति जताई। अगले कदम के रूप में, दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक व्यापक 'हरित और डिजिटल समुद्री गलियारे पर रणनीतिक रोडमैप' विकसित करने की संभावनाओं पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की, जिसका मकसद भारत और नीदरलैंड के बीच पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ, डिजिटल रूप से एकीकृत और आर्थिक रूप से कुशल भविष्य के लिए तैयार समुद्री गलियारे की दिशा में काम करना है।

वैश्विक और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में, साझा हितों को देखते हुए, दोनों प्रधानमंत्रियों ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, जिसमें बंदरगाहों और अंतर्देशीय जलमार्गों में साइबर सुरक्षा और विविध एवं मज़बूत आपूर्ति श्रृंखलाओं (महत्वपूर्ण कच्चे माल, दवा और खाद्य पदार्थ सहित) को बढ़ावा देना शामिल है, के क्षेत्र में संबंधित सरकारी संस्थाओं, व्यवसायों और ज्ञान संस्थानों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान पर सहमति व्यक्त की।

स्वास्थ्य क्षेत्र

दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के महत्व पर बल दिया, विशेष रूप से संक्रामक रोगों और रोगाणुरोधी प्रतिरोध जैसे वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों के साथ-साथ गैर-संक्रामक रोगों के बढ़ते प्रभाव से निपटने के लिए। दोनों नेताओं ने डिजिटल स्वास्थ्य (एआई और साइबर सुरक्षा सहित) और क्षमता निर्माण में और अधिक सहयोग को प्रोत्साहित करने पर भी सहमति जताई। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर समझौता ज्ञापन के नवीनीकरण और महिला स्वास्थ्य, जलवायु और स्वास्थ्य तैयारियों के लिए क्षमता विकास और दोनों देशों में टिकाऊ स्वास्थ्य प्रणालियों पर ज्ञान के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में नई सहयोग पहलों पर विचार करने का स्वागत किया। इस नवीनीकृत समझौता ज्ञापन के आलोक में दोनों नेताओं ने डच राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संस्थान (RIVM) और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित आशय पत्र का भी स्वागत किया, जिसमें संक्रामक रोगों, वेक्टर जनित रोगों, एक स्वास्थ्य और रोग निगरानी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

दोनों नेताओं ने इस बात पर भी बल दिया कि भारत-नीदरलैंड रणनीतिक साझेदारी के ढांचे के तहत उच्च गुणवत्ता वाली, सुलभ, सुरक्षित और टिकाऊ स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 2026 में, नव हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के तहत पहली संयुक्त कार्य समूह की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें समझौता ज्ञापन और इसकी कार्य योजना के कार्यान्वयन और आगे के विकास पर चर्चा की जाएगी और शैक्षणिक सहयोग, नियामक सहयोग, व्यावसायिक जुड़ाव और बाजार पहुंच पर ज्ञान के आदान-प्रदान सहित सहयोग के प्रमुख अवसरों की पहचान की जाएगी।

कृषि एवं खाद्य प्रणालियाँ

दोनों नेताओं ने कृषि, खाद्य प्रणालियों और जिम्मेदार मूल्य श्रृंखलाओं के क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड के निरंतर सहयोग पर संतोष व्यक्त किया, जिसमें कृषि पर संयुक्त कार्य समूह के ज़रिए ज्ञान का आदान-प्रदान और अनुभव साझा करना शामिल है। नेताओं ने संरक्षित खेती, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी और मुर्गी पालन के क्षेत्र में भारत में डच कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति का स्वागत किया। नेताओं ने कृषि क्षेत्र, जिसमें कृषि-तकनीक भी शामिल है, से संबंधित भारतीय और डच कंपनियों के बीच सहयोग के अवसरों का लाभ उठाने के महत्व पर जोर दिया।

दोनों नेताओं ने डच विशेषज्ञता के साथ भारत में कृषि संबंधी क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना में हुई प्रगति की समीक्षा की। ये केंद्र उच्च-तकनीकी ग्रीनहाउस कृषि उत्पादन में प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दे रहे हैं, साथ ही छोटे किसानों के लिए बेहतर कृषि उपज और क्षमता निर्माण कर रहे हैं, जिससे अधिक टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता/उत्पादकता प्राप्त हो रही है और पानी और कृषि रसायनों का उपयोग कम हो रहा है।

दोनों नेताओं ने निरंतर सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान के ज़रिए केंद्रों के प्रभाव और प्रभावशीलता को और बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने खाद्य प्रणालियों के विभिन्न पहलुओं में व्यावसायिक शिक्षा में विस्तारित सहयोग की संभावनाओं पर भी सहमति जताई।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय तथा नीदरलैंड के कृषि, मत्स्य पालन, खाद्य सुरक्षा और प्रकृति मंत्रालय के बीच संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। साथ ही, बेंगलुरु स्थित पशुपालन उत्कृष्टता केंद्र (CEAH) में दुग्ध उत्पादन प्रशिक्षण के लिए एक भारत-डच उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना का भी स्वागत किया गया। दोनों पक्षों ने खाद्य प्रसंस्करण सहित दुग्ध उत्पादन और अन्य संबद्ध कृषि क्षेत्रों में सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई।

दोनों नेताओं ने भारत में जारी स्वच्छ पौधे कार्यक्रम के तहत स्वच्छ पौधा केंद्रों (सीपीसी) की स्थापना हेतु बागवानी क्षेत्र में भारत-डच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। इसका मकसद उच्च मूल्य वाली बागवानी और फलों की फसलों के रोगमुक्त, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की उपलब्धता को बढ़ावा देना है, ताकि भारतीय बागवानी क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और बेहतर हो सके। इस संदर्भ में, नेताओं ने भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड और नक्तुइनबाउ के बीच क्षमता निर्माण एवं समर्थन पर हुए समझौता ज्ञापन का स्वागत किया।

खाद्य सुरक्षा एवं संरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए, दोनों नेताओं ने नीदरलैंड खाद्य एवं उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा प्राधिकरण (NVWA) और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के बीच हुए समझौता ज्ञापन का स्वागत किया।

जनसंपर्क एवं संस्कृति

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-नीदरलैंड संबंधों के मजबूत स्तंभ माने जाने वाले आपसी संबंधों की प्रगाढ़ता को भी स्वीकार किया। प्रधानमंत्री जेटन ने नीदरलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय द्वारा डच समाज में किए गए योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने विशेष रूप से युवा, शिक्षाविद, पेशेवर कार्यबल, खेल और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के ज़रिए दोनों देशों के बीच आपसी संपर्क को और बढ़ावा देने के अपने संकल्प को दोहराया।

दोनों देशों के बीच निष्पक्ष प्रवासन और आवागमन को सुगम बनाने के महत्व को देखते हुए, दोनों नेताओं ने प्रवासन और आवागमन पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया।

दोनों पक्षों ने अवैध प्रवासन और मानव तस्करी को रोकने और उससे निपटने तथा उच्च कुशल पेशेवरों के निष्पक्ष आवागमन को प्रोत्साहित करने के लिए सहयोग को और मजबूत करने पर भी सहमति जताई। यह दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय मानकों द्वारा निर्देशित है, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रवासी श्रमिकों के साथ गरिमा और सम्मान के साथ व्यवहार किया जाए, जिसमें निष्पक्ष आवागमन, पारदर्शी वीजा प्रक्रिया और श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा शामिल है।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने डिजाइन, प्रदर्शन कला, दृश्य कला, संग्रहालय और विरासत सहयोग जैसे क्षेत्रों में आपसी ज्ञान को बढ़ाने के लिए प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक पहलों को बढ़ावा देने सहित, उन्नत सांस्कृतिक सहयोग के ज़रिए दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करने पर सहमति व्यक्त की और सांस्कृतिक सहयोग पर एक संयुक्त कार्य समूह की संभावित स्थापना पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

आपसी सांस्कृतिक सम्मान के महत्व पर जोर देते हुए, दोनों नेताओं ने ड्रेन्ट्स संग्रहालय और राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा के बीच हुए समझौता ज्ञापन के तहत ड्रेन्ट्स संग्रहालय में अमृता शेर-गिल की कलाकृतियों की प्रदर्शनी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा में वैन गॉग की एक कलाकृति और अन्य डच कलाकृतियों की वापसी प्रदर्शनी की भी उम्मीद जताई।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने सांस्कृतिक कलाकृतियों की वापसी और पुनर्स्थापन में सहयोग के महत्व पर बल दिया और इस संबंध में लीडेन विश्वविद्यालय से चोल काल की तांबे की प्लेटों की भारतीय अधिकारियों को वापसी का स्वागत किया।

भारत और नीदरलैंड के बीच सदियों पुराने द्विपक्षीय समुद्री इतिहास को याद करते हुए, दोनों नेताओं ने एम्स्टर्डम के राष्ट्रीय समुद्री संग्रहालय और भारत के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के बीच लोथल (गुजरात) में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) के विकास में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया।

वार्ता सौहार्दपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई और इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के और विकास तथा भारत-नीदरलैंड रणनीतिक साझेदारी रोडमैप के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में बहुआयामी सहयोग की अपार संभावनाओं पर विश्वास व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री जेटन को उनके गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया और उन्हें यथाशीघ्र भारत आने का निमंत्रण दिया।