दुनिया की नजर भारत पर है और दुनिया की उम्मीद भी भारत से है: प्रधानमंत्री
भारत ने दोगुनी गति से आगे बढ़ते हुए, मात्र एक दशक में अपनी अर्थव्यवस्था का आकार दोगुना कर लिया है: प्रधानमंत्री
जिन्होंने सोचा था कि भारत धीमी और स्थिर गति से प्रगति करेगा, वे अब एक तेज और निडर भारत देखेंगे: प्रधानमंत्री
देरी विकास का दुश्मन है: प्रधानमंत्री
जब विकास आकांक्षाओं से प्रेरित होता है, तो यह समावेशी और सतत बन जाता है: प्रधानमंत्री
वक्फ कानून सभी के लिए सम्मान सुनिश्चित करते हैं, खासकर वंचित समुदायों के लिए: प्रधानमंत्री
वेव्स भारतीय कलाकारों को अपना कंटेंट बनाने और इसे वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए सशक्त बनाएगा: प्रधानमंत्री

नमस्‍कार!

आपने मुझे इस समिट के माध्‍यम से देश और दुनिया के सम्मानित अतिथियों से, आपके दर्शकों से जुडने का अवसर दिया है, मैं नेटवर्क 18 का आभार व्यक्त करता हूं। मुझे खुशी है कि आपने इस वर्ष के समिट को भारत के युवाओं की एस्‍पीरेशन से जोड़ा है। इस साल के शुरुआत में, विवेकानंद जयंती के दिन, यहीं भारत मंडप में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग हुआ था। तब मैंने युवाओं की आंखों में देखा था, सपनों की चमक, संकल्प का सामर्थ्य और भारत को विकसित बनाने का जुनून, 2047 तक हम भारत को जिस ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं, जिस रोडमैप को लेकर हम चल रहे हैं, उसके कदम-कदम पर अगर मंथन होगा, तो निश्चित ही अमृत निकलेगा। और यही अमृत, अमृत काल की पीढ़ी को ऊर्जा देगा, दिशा देगा और भारत को गति देगा। मैं आपको इस समिट की बधाई देता हूं, शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

आज दुनिया की नजर भी भारत पर है और दुनिया की उम्मीद भी भारत से है। कुछ ही वर्षों में हम दुनिया की 11वीं से 5वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बने हैं, बहुत कम समय में, अनेक प्रकार के ग्लोबल चैलेंजेस आए लेकिन भारत रुका नहीं, भारत ने डबल स्पीड से दौड़ लगाई। और एक दशक में अपनी के साइज को डबल करके दिखाया है। जो सोचते थे कि भारत स्लो और स्टेडी चलेगा, उन्हें अब फास्‍ट एंड फियरलेस इंडिया दिख रहा है और इसमें भी कोई संदेह नहीं है कि जल्द ही भारत की दुनिया की तीसरी इकोनॉमी बनना तय है। ग्रोथ की इस अभूतपूर्व स्पीड को कौन ड्राइव कर रहा है? इसे ड्राइव कर रहे हैं भारत के युवा, उनके एंबीशंस और उनके एस्‍पीरेशंस, युवा भारत की इन्हीं एंबीशंस और एस्‍पीरेशंस को एड्रेस करना आज देश की प्राथमिकता भी है।

साथियों,

आज 8 अप्रैल है, कल परसों ही 2025 के 100 दिन पूरे हो रहे हैं, 100 days 2025 का पहला पड़ाव, इन 100 दिनों में जो निर्णय हुए हैं, उनमें भी आपको युवा एस्‍पीरेशंस की ही झलक दिखेगी।

साथियों,

इन 100 दिनों में हमने सिर्फ फैसले नहीं लिए हैं, हमने भविष्य की मजबूत नींव रखी है। हमने Policies से Possibilities की राह खोली है। 12 लाख रुपये तक की इनकम तक टैक्स जीरो, थैंक्यू! इसका सबसे बड़ा फायदा हमारे यंग प्रोफेशनल्स और आंत्रप्रन्योर्स को मिल रहा है। मेडिकल की 10 हजार नई सीटें, आईआईटी में 6500 नई सीटें यानी एजुकेशन का एक्‍सपेंशन, इनोवेशन का एक्सीलेरेशन, 50 हजार नई अटल टिंकरिंग लैब यानी अब देश के हर कोने में इनोवेशन का दीप जलेगा और एक दीप से जले दीप अनेक! एआई और स्किल डेवलपमेंट के लिए सेंटर ऑफ एक्‍सीलेंस यूथ को मिलेगा फ्यूचर रेडी बनने का मौका, 10 हजार नई पीएम रिसर्च फेलोशिप, अब आइडिया से इंपैक्ट तक का सफर और आसान होने वाला है। जैसे स्‍पेस सेक्टर खोला गया, वैसे ही अब न्‍यूक्‍लियर एनर्जी सेक्टर भी ओपन किया गया, इनोवेशन को अब सीमाएं नहीं, समर्थन मिलेगा। गिग इकोनॉमी से जुड़े युवाओं को पहली बार सोशल सिक्‍योरिटी का कवच दिया जाएगा। जो पहले दूसरों के लिए invisible थे, अब वे नीतियों के केंद्र में हैं और एससी, एसटी तथा वुमन आंत्रप्रन्योर्स के लिए दो करोड़ के टर्म लोन Inclusivity is not just a promise, it’s a policy. इन सभी निर्णयों का सीधा लाभ भारत के नौजवानों को मिलने वाला है क्योंकि जब युवा आगे बढ़ेगा, तभी भारत आगे बढ़ेगा।

साथियों,

इन 100 दिनों में भारत ने जो किया है, वो दिखाता है कि भारत रुकने वाला नहीं है, भारत झुकने वाला भी नहीं है, भारत अब थमने वाला भी नहीं है। इन 100 दिनों में भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बना, जिसने Satellites की Docking और Undocking की क्षमता हासिल की। भारत ने सेमी क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण करके दिखाया। भारत ने 100 गीगावॉट सोलर कैपेसिटी का ऐतिहासिक पड़ाव पार कर लिया। भारत ने 1 हजार मिलियन टन का रिकॉर्ड बनाया। National Critical Mineral Mission की शुरुआत हुई और इन्‍हीं 100 दिनों में कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग गठित करने का निर्णय हुआ। किसानों के लिए खाद पर सब्सिडी में बढ़ोतरी का फैसला हुआ यानी अन्नदाता की चिंता सरकार की प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ में 3 लाख से ज्यादा परिवारों ने एक साथ नए घरों में गृह प्रवेश किया। स्‍वामित्‍व योजना के तहत 65 लाख से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड सौंपे गए और इतना ही नहीं इन्‍हीं 100 दिनों में दुनिया की सबसे ऊंची टनलों में से एक सोनमर्ग टनल राष्‍ट्र को समर्पित की गई। आईएनएस सूरत, आईएनएस नीलगिरि, आईएनएस वाघशीर भारतीय नौसेना की ताकत में नए नगीने जुड़ गए। सेना के लिए मेड इन इंडिया लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर खरीदी को हरी झंडी मिली और वक्‍फ का, वक्फ कानून में संशोधन का बिल पास हुआ यानी सामाजिक न्‍याय के लिए एक और बड़ा और ठोस कदम लिया गया। ये 100 दिन, 100 फैसलों से भी बढ़कर है। ये 100 संकल्पों की सिद्धि के दिन हैं।

साथियों,

परफॉर्मेंस का यही मंत्र राइजिंग भारत के पीछे की असली एनर्जी है। आप जानते हैं, अभी दो दिन पहले ही मैं रामेश्वरम में था। वहां मुझे ऐतिहासिक पंबन ब्रिज के लोकार्पण का अवसर मिला। करीब सवा सौ साल पहले अंग्रेजों ने वहां एक पुल बनवाया था। उस पुल ने इतिहास देखा, उसने आंधियां सहीं, एक बार सुनामी ने, साइक्लोन ने उस पुल को बहुत नुकसान पहुंचाया। सालों तक देश इंतजार करता रहा, लोग मांग करते रहे, लेकिन पहले की सरकारों की नींद नहीं टूटी, जब हमारी सरकार आई, तो नए पंबन ब्रिज के लिए काम शुरू हुआ। और अब देश को अपना पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल-सी ब्रिज मिल गया है।

साथियों,

परियोजनाओं को लटकाते रहने से देश नहीं चलता, देश चलता है, परफॉर्म करने से, तेजी से काम करने से। Delay is the enemy of development और हमने इस दुश्मन को हराने की ठान ली है। मैं आपको और भी उदाहरण दूंगा। जैसे असम का बोगीबील ब्रिज, हमारे पूर्व पीएम देवगौड़ा जी ने 1997 में इसकी आधारशिला रखी। वाजपेयी जी की सरकार आई, उन्होंने काम शुरू करवाया। वाजपेयी जी की सरकार गई, कांग्रेस की सरकार आई, तो ब्रिज का काम भी लटक गया। अरुणाचल और असम के लाखों लोग परेशान होते रहे, लेकिन तब की सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ा। 2014 में आपने जब हमें सेवा करने का मौका दिया और ये प्रोजेक्ट फिर से शुरू हुआ। और सिर्फ 4 साल में, 2018 में ब्रिज का काम पूरा हो गया। ऐसे ही केरला में कोल्लम बाईपास रोड प्रोजेक्ट का भी उदाहरण है। ये 1972 से अटका था, सोचिए! 50 साल! LDF हो या UDF किसी सरकार ने 50 साल तक इसपर कोई काम नहीं कराया। हमने सरकार बनने के 5 साल के अंदर इसका काम पूरा कर दिया।

साथियों,

नवी मुंबई एयरपोर्ट पर भी 1997 से चर्चा शुरू हुई थी, 2007 में इसे मंजूरी मिली, लेकिन कांग्रेस की सरकार ने इस पर काम नहीं किया। हमारी सरकार ने इस प्रोजेक्ट को भी तेज़ी से पूरा किया। वो दिन दूर नहीं जब नवी मुंबई एयरपोर्ट से कमर्शियल फ्लाइट्स भी शुरू हो जाएंगी।

साथियों,

ये जो मैं गिना रहा हूं न, उसमें संसद भवन भी आएगा, ये भारत मंडपम भी आएगा।

साथियों,

आज 8 अप्रैल का एक और वजह से बहुत महत्व है। आज ही मुद्रा योजना के 10 साल पूरे हुए हैं। यहां जो युवा साथी बैठे हैं, उन्होंने तो अपने माता-पिता से जरूर कहानियां सुनी होंगी कि पहले बिना गारंटी के बैंक खाता तक नहीं खुलता था। खाता खोलने के लिए गारंटी चाहिए, किसी और एक के साथी की मदद चाहिए। बैंक लोन, ये सामान्य परिवार के लिए तो सपना हुआ करता था। गरीब परिवार, SC/ST, OBC, भूमिहीन मजदूर, महिलाएं, जो सिर्फ मेहनत कर सकते थे, लेकिन जिनके पास गिरवी रखने को कुछ नहीं था, क्या उनके सपनों की कोई कीमत नहीं थी? क्या उनकी Aspirations कम थीं? क्या उनकी मेहनत का कोई मोल नहीं था? हमारी मुद्रा योजना ने, उनकी एस्पिरेशन को एड्रेस किया, यूथ को एक नया रास्ता दिया। पिछले 10 साल में मुद्रा योजना के तहत 52 करोड़ लोन, बिना गारंटी दिए गए, 52 करोड़! और मुद्रा स्कीम की स्केल ही नहीं, स्पीड भी अद्भुत है। जब तक ट्रैफिक लाइट रेड से ग्रीन होती है, तब तक 100 मुद्रा लोन क्लियर हो जाते हैं। जब तक आप ब्रश करके फ्री होते हैं, तब तक 200 मुद्रा लोन अप्रूव होते हैं। जब तक आप किसी रेडियो चैनल पर अपना पसंदीदा गाना सुनकर खत्म करते हैं, तब तक 400 मुद्रा लोन सेंक्शन हो जाते हैं। आजकल instant delivery apps, इसका बड़ा चलन है। आपके ऑर्डर के बाद जितनी देर में डिलीवरी होती है, उतनी देर में एक हज़ार मुद्रा लोन सेंक्शन हो जाते हैं। जब तक आप किसी OTT पर एक एपिसोड खत्म करते हैं, तब तक 5 हज़ार मुद्रा बिजनेस का आधार बन जाता है।

साथियों,

मुद्रा योजना ने गारंटी नहीं मांगी, उसने भरोसा किया। और आप सभी को जानकर अच्छा लगेगा, मुद्रा योजना की वजह से 11 करोड़ लोगों को पहली बार अपना कोई काम करने के लिए स्वरोजगार के लिए लोन मिला है। ये 11 करोड़ लोग अब फर्स्ट टाइम आंत्रप्रन्योर्स बने हैं। यानी 10 साल में, 11 करोड़ नए सपनों को उड़ान मिली है। और आप जानते हैं कि मुद्रा से कितना पैसा, गांवों और छोटे शहरों में पहुंचा है? करीब 33 lakh crore रुपीज, तैंतीस लाख करोड़ रुपये! इतनी तो कई देशों की GDP भी नहीं है। This is not just microfinance, this is a mega transformation at the grassroots.

साथियों,

ऐसा ही उदाहरण, एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट और एस्पिरेशनल ब्लॉक्स का है। पहले की सरकारों ने देश के सौ से अधिक ऐसे जिलों को पिछड़ा घोषित करके उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया था। इनमें से अनेक जिले नॉर्थ ईस्ट में थे, ट्राइबल बेल्ट में थे। करना तो ये चाहिए था कि इन जिलों में सरकार अपना बेस्ट टैलेंट भेजती, लेकिन होता ये था कि इन जिलों में अफसरों को पनिशमेंट पोस्टिंग के लिए भेजा जाता था। यही तो पुरानी सोच थी, ‘पिछड़े को पिछड़ा ही रहने दो’। हमने ये अप्रोच बदली और इन जिलों को एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट घोषित किया। हमने इन जिलों की एडमिस्ट्रेशन पर फोकस किया है, अपनी फ्लैगशिप स्कीम्स को मिशन मोड पर इन जिलों में लागू किया। अलग-अलग पैरामीटर्स के आधार पर इन जिलों की ग्रोथ को मॉनीटर किया गया। आज वही Aspirational Districts कई राज्यों की एवरेज से बेहतर और कई तो national averages से आगे निकल चुके हैं। और इसका सबसे बड़ा लाभ वहीं के युवाओं को मिला है। अब वहां के नौजवान कहते हैं, हम भी कर सकते हैं, हम भी आगे बढ़ सकते हैं। आज दुनिया के कई reputed institutions, reputed journals, एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम की सराहना करते हैं। इसी सफलता से प्रेरणा लेकर अब हम 500 एस्पिरेशनल ब्लॉक्स पर काम कर रहे हैं। जब ग्रोथ को एस्पिरेशन्स ड्राइव करती हैं, तो वो समावेशी भी होती है और सस्टेनबल भी होती है।

साथियों,

किसी भी देश के तेज विकास के लिए बहुत जरूरी है, देश में शांति, स्थिरता और सुरक्षा की भावना। गुरुदेव टैगोर की कल्पना थी, चित्त जेथा भयशून्यो, उच्च जेथा शिर, Where the mind is without fear, and the head is held high. लेकिन दशकों तक भारत में डर का, भय का, आतंक का माहौल बढ़ता ही गया। इसका सबसे ज्यादा नुकसान भी युवाओं को ही हुआ। हिंसा, अलगाव, आतंक की आग में सबसे ज्यादा देश का युवा ही झुलसा है। जम्मू कश्मीर में दशकों तक युवाओं की अनेक पीढ़ियां बम-बंदूक और पत्थरबाजी में खप गईं। लेकिन दशकों तक देश पर शासन करने वाले, इस आग को बुझाने का साहस नहीं दिखा पाए। हमारी सरकार की स्ट्रॉन्ग पॉलिटिकल विल और संवेदनशीलता के चलते आज वहां हालात बदले हैं। आज जम्मू कश्मीर का नौजवान विकास से जुड़ चुका है।

साथियों,

आप नक्सलवाद को भी देखिए, देश के सवा सौ से अधिक जिले, नक्सलवाद की चपेट में, हिंसा की चपेट में थे, सवा सौ डिस्ट्रिक्ट! जहां से नक्सलवाद शुरू होता था, वहां सरकार की बाउंड्री खत्म हो जाती थी। बड़ी संख्या में नौजवान नक्सलवाद से पीड़ित थे। हमने ऐसे नौजवानों को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रयास किए। बीते 10 वर्षों में 8 हज़ार से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया है, हिंसा का रास्ता छोड़ा है। आज नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या भी 20 से कम रह गई है। हमारे नॉर्थ ईस्ट में भी दशकों से अलगाव का, हिंसा का एक अंतहीन सिलसिला चल रहा था। हमारी सरकार ने, बीते 10 सालों में 10 बड़े शांति समझौते किए। इस दौरान, 10 हजार से ज्यादा युवाओं ने हथियारों को छोड़ा और विकास की मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। सफलता सिर्फ ये नहीं है कि हज़ारों युवाओं ने हथियार छोड़े, सफलता ये भी है कि इसने हज़ारों नौजवानों का वर्तमान और भविष्य बचाया है।

साथियों,

हमारे यहां दशकों तक एक प्रवृत्ति चली। राष्ट्रीय चुनौतियों को पहचानने के बजाय, उन्हें राजनीतिक कालीन के नीचे छिपा दिया गया। लेकिन अब समय आ गया है कि हम ऐसे मुद्दों से आँख न चुराएं। 21वीं सदी की पीढ़ियों को हम 20वीं सदी की राजनीतिक भूलों का बोझ नहीं दे सकते हैं। भारत की ग्रोथ में, तुष्टिकरण की राजनीति एक बहुत बड़ी चुनौती रही है। अभी संसद में वक्फ से जुड़े कानून में संशोधन हुआ है। इस पर आपके नेटवर्क ने भी काफी चर्चा की है। ये जो वक्फ से जुड़ी डिबेट है, इसके मूल में तुष्टिकरण की राजनीति है, पॉलिटिक्स ऑफ अपिजमेंट है। ये तुष्टिकरण की राजनीति कोई नई नहीं है। इसका बीज, हमारे स्वतंत्रता संग्राम के समय ही बो दिया गया था। आप सोचिए, भारत से पहले, भारत के साथ-साथ और हमारे बाद, दुनिया में कई देश आजाद हुए। लेकिन कितने देश ऐसे हैं, जिनकी आजादी की शर्त विभाजन थी? कितने देश हैं, जो आजादी के साथ ही टूट गए? भारत के साथ ही ऐसा क्यों हुआ? क्योंकि उस समय राष्ट्र के हित से ऊपर सत्ता का मोह रख दिया गया। अलग देश का विचार सामान्य मुस्लिम परिवारों का नहीं था। बल्कि कुछ कट्टरपंथियों का था। जिसको कांग्रेस के कुछ नेताओं ने खाद-पानी दिया। ताकि वे सत्ता के अकेले दावेदार बन सकें।

साथियों,

तुष्टिकरण की इस राजनीति में कांग्रेस को सत्ता मिली, कुछ कट्टरपंथी नेताओं को ताकत और दौलत मिली लेकिन सवाल ये है, आम मुसलमान को क्या मिला? गरीब, पसमांदा मुसलमान को क्या मिला? उसे मिली उपेक्षा। उसे मिली अशिक्षा। उसे मिली बेरोजगारी। और मुस्लिम महिलाओं को क्या मिला? उन्हें मिला, शाहबानो जैसा अन्याय। जहाँ उनका संवैधानिक हक कट्टरपंथ की भेंट चढ़ गया। उन्हें मिला, चुप रहने का आदेश, सवाल न पूछने का दबाव। और कट्टरपंथियों को मिल गया खुला लाइसेंस, महिलाओं के अधिकारों को कुचलने का।

साथियों,

तुष्टिकरण यानी पॉलिटिक्स ऑफ appeasement भारत की सोशल जस्टिस की मूल अवधारणा के पूरी तरह खिलाफ है। लेकिन कांग्रेस ने इसे वोटबैंक की राजनीति का हथियार बना दिया। 2013 में वक्फ कानून में किया गया संशोधन मुस्लिम कट्टरपंथियों और भू-माफियाओं को खुश करने का प्रयास था। इस कानून को ऐसा रूप दिया गया कि उसने संविधान के ऊपर खड़ा होने का भ्रम पैदा किया। जिस संविधान ने न्याय के रास्ते खोले, उन्हीं रास्तों को वक्फ कानून में संकुचित कर दिया गया। और इसके दुष्परिणाम क्या हुए? कट्टरपंथियों और भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हुए। केरल में ईसाई समाज के ग्रामीणों की जमीन पर वक्फ के दावे, हरियाणा में गुरुद्वारों की जमीन विवादों में, कर्नाटक में किसानों की जमीन पर दावा, कई राज्यों में गाँव के गाँव, हजारों हेक्टेयर जमीन अब NOC और कानूनी उलझनों में फंसी पड़ी हैं। मंदिर हों, चर्च हों, गुरुद्वारे हों, खेत हों, सरकारी जमीनें हों, किसी को भी अब भरोसा नहीं रह गया था कि उनकी जमीन उनकी ही रहेगी। सिर्फ एक नोटिस आता था और लोग अपने ही घर और खेत के लिए कागज़ ढूंढते रह जाते थे। जो कानून न्याय के लिए था, वो डर का कारण बन गया, ये कैसा कानून था?

साथियों,

मैं देश की संसद को, सर्वसमाज के हित में, मुस्लिम समाज के हित में एक शानदार कानून बनाने के लिए बधाई देता हूं। अब वक्फ की पवित्र भावना की भी रक्षा होगी और गरीब-पसमांदा मुसलमान, महिला-बच्चे, सबके हक भी महफ़ूज़ रहेंगे। वक्फ बिल पर हुई बहस, हमारे संसदीय इतिहास की दूसरी सबसे लंबी डिबेट थी, यानी 75 साल में दूसरी सबसे लंबी डिबेट। इस बिल को लेकर दोनों सदनों को मिलाकर 16 घंटे चर्चा हुई। JPC की 38 बैठकें हुईं, 128 घंटे चर्चा हुई। देशभर से लगभग एक करोड़ ऑनलाइन सुझाव आए। ये दिखाता है कि, आज भारत में लोकतंत्र सिर्फ संसद की चार दीवारों तक सीमित नहीं है। हमारा लोकतंत्र जन-भागीदारी से और अधिक मजबूत हो रहा है।

साथियों,

आज दुनिया तेजी से टेक्नॉलजी और AI की ओर बढ़ रही है। और इसीलिए अब ये ज्यादा जरूरी है कि हम हमारी Softer Sides पर आर्ट, म्यूजिक, कल्चर, क्रिएटिविटी, क्योंकि हम Robots तैयार करना नहीं चाहते, हम मनुष्य तैयार करना चाहते हैं। यानी जो कुछ भी हमें मशीनों के सहारे चलता है, उन पर मानवता के लिए, संवेदनशीलता के लिए ज्यादा काम करें। Entertainment, आज दुनिया की सबसे बड़ी इंडस्ट्री में से एक है और आने वाले समय में इसका और विस्तार होगा। ऐसे ही समय में, हमने आर्ट और कल्चर को Encourage करने के लिए, इसे Celebrate करने के लिए, Waves और अभी राहुल जब भाषण कर रहे थे, शायद 10 बार Waves आए, 10 बार Waves शब्द था, लेकिन वो Waves 2014 में ही शुरू हुआ है, ऐसा नहीं, हर 10 साल में नए रंग रूप के साथ आता है और आज जब मैं उस Waves की बात कर रहा हूं यानी Waves यानी World Audio-Visual and Entertainment Summit, इस Waves नाम का प्लेटफॉर्म बनाया गया है। अगले महीने मुंबई में इसका बहुत बड़ा आयोजन होने जा रहा है और ये लगातार होते रहने वाला है, एक लंबी व्यवस्था खड़ी हो रही है। आप सभी जानते हैं, हमारे यहां मूवीज, पॉडकास्ट, गेमिंग, म्यूजिक, ए-आर और वी-आर की बहुत Vibrant और Creative Industry है। हमने Create in India का मंत्र लेकर इसे नेक्स्ट लेवल पर ले जाने का फैसला लिया है। WAVES, Indian Artists को Content बनाने और Global बनाने के लिए Encourage करेगा। और इसके साथ-साथ Create in India, दुनिया भर के आर्टिस्ट्स को भारत में आने का अवसर भी देगा। मैं Network18 के साथियों से भी कहूंगा कि वो WAVES के प्लेटफार्म को Popularise करने के लिए आगे आएं। यहां बड़ी संख्या में क्रिएटिव डोमेन्स में काम करने वाले युवा साथी हैं, कुछ लोगों से मुझे मिलने का मौका भी मिला। मैं उन्हें भी कहूंगा, वो इस मूवमेंट, इस प्लेटफार्म का हिस्सा बनें। WAVES की लहर, हर घर, हर दिल तक पहुंचनी चाहिए! आप लोग ये करेंगे, ये मुझे पूरा विश्वास है।

साथियों,

Network18 ने इस समिट के माध्यम से देश के युवाओं की क्रिएटिविटी, उनकी सोच, उनकी संकल्प-शक्ति को जिस तरह सामने रखा है, वह सराहनीय है। आपने युवाओं को engage किया, उन्हें देश की समस्याओं पर सोचने, सुझाव देने और समाधान खोजने का मंच दिया और सबसे बड़ी बात, उन्हें सिर्फ श्रोता नहीं, परिवर्तन का भागीदार बनाया। अब मैं देश की यूनिवर्सिटीज़, कॉलेजों और रिसर्च इंस्टीट्यूशंस से आग्रह करता हूँ कि इस समिट के engagement को आगे ले जाएं। जो insights निकले हैं, जो सुझाव आए हैं, उन्हें डॉक्यूमेंट करें, स्टडी करें, और पॉलिसी तक पहुंचाएं। तभी ये समिट सिर्फ एक इवेंट नहीं, एक प्रभाव बन पाएगी। आपका उत्साह, आपकी सोच, आपकी भागीदारी ही, भारत को विकसित देश बनाने के संकल्प की ऊर्जा है। मैं एक बार फिर, इस आयोजन से जुड़े सभी साथियों को और विशेषकर हमारे युवा साथियों को, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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PM to meet French President Macron in Mumbai on 17 February
February 16, 2026
The two leaders to review progress made in India-France Strategic Partnership and exchange views on issues of regional and global importance
PM Modi and President Macron to inaugurate the India-France Year of Innovation 2026

Prime Minister Shri Narendra Modi will travel to Mumbai on 17 February 2026 where he will meet the President of the French Republic, H.E. Mr. Emmanuel Macron.

President Emmanuel Macron will be on an official visit to India from 17-19 February 2026 at the invitation of Prime Minister Narendra Modi to participate in the AI Impact Summit hosted by India, as well as hold a bilateral summit with the Prime Minister in Mumbai. This will be President Macron’s fourth visit to India and his first visit to Mumbai.

At around 3:15 PM on 17 February, the two leaders will hold bilateral engagements at Lok Bhavan, Mumbai. During these engagements, they will review the progress made in the India-France Strategic Partnership. Their discussions will focus on cementing the strategic partnership and further diversifying it into new and emerging areas. Prime Minister Modi and President Macron will also exchange views on issues of regional and global importance.

At around 5:15 PM, the two leaders will inaugurate the India-France Year of Innovation 2026 and address a gathering of business leaders, start-ups, researchers, and other innovators from both countries.