भारत का समुद्री क्षेत्र तेज़ गति और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है: प्रधानमंत्री
हमने एक सदी से भी अधिक पुराने औपनिवेशिक नौवहन कानूनों को 21वीं सदी के अनुकूल आधुनिक, भविष्य के अनुकूल कानूनों से बदल दिया है: प्रधानमंत्री मोदी
भारत के बंदरगाह आज विकासशील देशों में सबसे कुशल बंदरगाहों में गिने जाते हैं; कई मायनों में, वे विकसित देशों से भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं: प्रधानमंत्री
भारत जहाज निर्माण में नई ऊँचाइयों तक पहुँचने के तेज़ प्रयास कर रहा है, हमने अब बड़े जहाजों को बुनियादी ढाँचा संपत्ति का दर्जा दे दिया है: प्रधानमंत्री मोदी
भारत के नौवहन क्षेत्र में काम करने और विस्तार करने का यह सही समय है: प्रधानमंत्री
जब वैश्विक समुद्र अशांत होते हैं, तो दुनिया एक स्थिर प्रकाश स्तंभ की खोज करती है, भारत उस भूमिका को मजबूती और स्थिरता के साथ निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है: प्रधानमंत्री मोदी
वैश्विक तनावों, व्यापार व्यवधानों और बदलती आपूर्ति श्रृंखलाओं के बीच, भारत रणनीतिक स्वायत्तता, शांति और समावेशी विकास का प्रतीक है: प्रधानमंत्री

महाराष्ट्र के गवर्नर आचार्य देवव्रत जी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी सर्बानंद सोनोवाल जी, शांतनु ठाकुर जी, कीर्तिवर्धन सिंह जी, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे जी, अजित पवार जी, शिपिंग और दूसरी इंडस्ट्रीज से जुड़े लीडर्स, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

साथियों,

मैं आप सभी का ग्लोबल मैरिटाइम लीडर्स कॉन्क्लेव में अभिनंदन करता हूं। साल 2016 में मुंबई में ही इस आयोजन की शुरुआत हुई थी, और यह हम सभी के लिए खुशी की बात है, कि आज यह समिट एक ग्लोबल इवेंट बन गई है। आज यहां इस कार्यक्रम में दुनिया के 85 से अधिक देशों की भागीदारी, यह अपने आप में एक बहुत बड़ा मैसेज दे रही है। Shipping giants उसके CEOs से लेकर स्टार्टअप तक और पॉलिसी मेकर्स से लेकर इन्वेस्टर्स तक, इस समय सभी यहां मौजूद हैं। स्मॉल आईलैंड नेशंस के प्रतिनिधि भी यहां उपस्थित हैं। आप सभी के विजन ने इस समिट की सिनर्जी और एनर्जी दोनों बढ़ा दी है।

साथियों,

अभी यहां शिपिंग सेक्टर से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ हुआ है। शिपिंग सेक्टर में हुए लाखों करोड़ों रुपए के MOUs भी जारी हुए हैं। यह दिखाता है कि भारत के मैरिटाइम सामर्थ्य पर दुनिया का कितना विश्वास है। इस आयोजन में आपकी उपस्थिति हमारे कॉमन कमिटमेंट का प्रतीक है।

साथियों,

21वीं सदी के इस कालखंड में भारत का मैरिटाइम सेक्टर तेज गति और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। खासकर साल 2025 भारत के मैरिटाइम सेक्टर के लिए बहुत अहम साल रहा है। मैं इस वर्ष की कुछ खास उपलब्धियों का जिक्र आपके बीच करना चाहता हूं! विझिंजम पोर्ट के रूप में भारत का पहला डीप वॉटर इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट हब अब ऑपरेशनल हो चुका है। कुछ समय पहले ही दुनिया का सबसे बड़ा कंटेनर वेसल वहां पहुंचा है। यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण था। साल 2024-25 में भारत के मेजर पोर्ट्स में अब तक का सबसे अधिक कार्गो हैंडल करके भी नया रिकॉर्ड बनाया है। इतना ही नहीं, पहली बार किसी इंडियन पोर्ट ने मेगावाट स्केल indigenous ग्रीन हाइड्रोजन फैसिलिटी शुरू की है। और ये उपलब्धि हमारे कंडला पोर्ट ने हासिल की है। एक और बड़ा काम हुआ है JNPT में, JNPT में भारत मुंबई कंटेनर टर्मिनल फेज 2 भी शुरू हो गया है। इससे इस टर्मिनल की हैंडलिंग कैपेसिटी दोगुनी हो गई है और यह भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट बन गया है। यह भारत के पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में सबसे बड़े FDI की वजह से संभव हुआ है। इसके लिए मैं आज सिंगापुर के अपने साथियों का भी विशेष आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

इस साल भारत के Maritime Sector में Next Generation Reforms के लिए भी बड़े कदम उठाए हैं। हमने सौ साल से ज्यादा पुराने Colonial Shipping Laws को हटाकर, ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी के मॉडर्न और फ्यूचरिस्टिक Laws लागू किए हैं। ये नए कानून State Maritime Boards को Empower करते हैं, Safety और Sustainability को बल देते हैं और साथ ही, Port Management में डिजिटलाईजेशन का भी विस्तार करते हैं।

साथियों,

The Merchant Shipping Act में, हमने भारतीय कानूनों को International Conventions के साथ ग्लोबली अलाइन्ड किया है। इससे Safety का भरोसा बढ़ा है, Ease Of Doing Business को बेहतर बनाने में मदद मिली है, सरकार का दखल कम हुआ है। मुझे विश्वास है, इन प्रयासों से आपका, हमारे Investors का, Confidence भी और अधिक बढ़ेगा।

साथियों,

The Coastal Shipping Act को इस तरह तैयार किया गया है, कि Trade और आसान हो सके। ये Supply Chain Security को मजबूत करता है। साथ ही, इससे भारत की लंबी Coastline पर Balanced Development सुनिश्चित होगी। ऐसे ही, One Nation – One Port Process, पोर्ट से जुड़े Procedures को स्टैन्डर्डाइज़ करेगा, और Documentation का काम भी काफी कम हो जाएगा।

साथियों,

शिपिंग सेक्टर के ये रिफॉर्म्स, एक प्रकार से बीते एक दशक की हमारी रिफॉर्म्स जर्नी का कंटीन्यूएशन है। अगर हम पिछले दस-ग्यारह वर्षों को देखें, तो भारत के Maritime Sector में जो परिवर्तन आया है, वो ऐतिहासिक है। Maritime India Vision के तहत 150 से अधिक नए Initiatives शुरू किए गए हैं। इनसे Major Ports की Capacity लगभग दोगुनी हुई है, Turnaround Time में भारी कमी आई है, Cruise Tourism को भी नई गति मिली है, आज Inland Waterways पर Cargo Movement में 700 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ोतरी हुई है, Operational Waterways की संख्या Three से बढ़कर Thirty Two हो गई है, हमारे पोर्ट्स का, Net Annual Surplus भी एक दशक में Nine Times Increase हुआ है।

साथियों,

हमें गर्व है कि आज भारत के Ports, Developing World के सबसे Efficient Ports में गिने जाते हैं। कई मामलों में तो वे Developed World के Ports से भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। मैं आपको कुछ और आंकड़े देता हूं। आज भारत में Average Container Dwell Time तीन दिन से भी कम रह गया है। ये कई विकसित देशों से भी बेहतर है। Average Vessel Turnaround Time, Ninety Six Hours से घटकर सिर्फ Forty Eight Hours रह गया है। इससे भारतीय Ports Global Shipping Lines के लिए और अधिक Competitive और Attractive बन गए हैं। World Bank के Logistics Performance Index में भी भारत ने काफी अच्छा सुधार किया है।

और साथियों,

शिपिंग सेक्टर में ह्यूमन रीसोर्स में भारत अपना परचम लहरा रहा है। भारत के Seafarers की संख्या पिछले एक दशक में सवा लाख से बढ़कर 3 लाख से ज़्यादा हो गई है। आप दुनिया के किसी भी समुद्री तट पर जाएंगे, तो कोई न कोई शिप होगा, जहां कोई न कोई भारतीय Seafarers आपको मिलेगा। आज भारत सीफेरर्स की संख्या के मामले में दुनिया के टॉप तीन देशों में आ चुका है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। इस सदी के अगले 25 साल और भी अहम हैं। इसलिए हमारा फोकस, “Blue Economy” पर है, “Sustainable Coastal Development” पर है, हम Green Logistics, Port Connectivity और Coastal Industrial Clusters पर बहुत जोर दे रहे हैं।

साथियों,

शिप बिल्डिंग भी आज के भारत की टॉप priority में है। एक समय था, जब भारत दुनिया के शिप-बिल्डिंग का बहुत बड़ा सेंटर था। यहां से अजंता केव्स बहुत दूर नहीं हैं। वहां आपको Sixth Century का एक चित्र दिखेगा, इसमें एक Three-Masted Ship का डिज़ायन आपको मिलेगा, आप कल्पना कर सकते हैं, Sixth Century के चित्र में Three-Masted Ship का डिजाइन, और ये डिजाइन इसके सदियों बाद दूसरे देशों ने इस्तेमाल करना शुरू किया, सदियों का फासला था।

साथियों,

भारत में बने शिप, ग्लोबल ट्रेड का अहम हिस्सा हुआ करते थे। फिर हम शिप ब्रेकिंग के क्षेत्र में आगे बढ़े। अब भारत, फिर से Ship-Making के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छूने के लिए अपने प्रयास तेज कर रहा है। भारत ने, अब Large Ships को Infrastructure Assets का दर्जा भी दे दिया है। ये पॉलिसी डिसिजन, इस कार्यक्रम में मौजूद सभी Shipbuilders के लिए नए रास्ते खोलेगा। इससे आपको Financing के नए विकल्प मिलेंगे, Interest Cost घटेगी, और Credit की सुविधा आसान होगी।

और साथियों,

इस Reform को गति देने के लिए सरकार भी लगभग 70 हजार करोड़ रुपए Invest करेगी। इससे Domestic Capacity बढ़ेगी, Long-Term Financing को बढ़ावा मिलेगा, Greenfield और Brownfield शिपयार्ड्स का विकास होगा, Advanced Maritime Skills तैयार होंगी और युवाओं के लिए लाखों जॉब्स जेनरेट होंगी। और आप सभी के लिए भी इससे इन्वेस्टमेंट के नए रास्ते खुलेंगे।

साथियों,

ये धरती छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने, न केवल समुद्री सुरक्षा की नींव रखी, बल्कि अरब सागर के ट्रेड रूट्स पर भारतीय सामर्थ्य का परचम भी फहराया था। उनके विजन ने हमें दिखाया है कि समुद्र केवल सीमाएँ नहीं, अवसरों के द्वार भी होते हैं। आज भारत, उसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है।

साथियों,

भारत आज ग्लोबल स्तर पर Supply Chain Resilience को मजबूती देना चाहता है। हम World-Class Mega Ports के निर्माण में जुटे हैं, यहां महाराष्ट्र के वाढ़वण में ही 76 हजार करोड़ रुपए की लागत से नया पोर्ट बनाया जा रहा है। हम अपने Major Ports की Capacity को चार गुना बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। हम कंटेनराइज्ड कार्गो शेयर में भी भारत का हिस्सा बढ़ाना चाहते हैं, और इन सभी लक्ष्यों की प्राप्ति में, आप सभी हमारे अहम पार्टनर्स हैं। हम आपके Ideas, Innovations और Investments का स्वागत करते हैं। आप भी जानते हैं, भारत में Ports और Shipping में 100 प्रतिशत FDI की अनुमति है। अभी Public-Private Partnerships तेजी से बढ़ रही है। “Make In India, Make For The World” इस Vision के तहत Incentives भी दिए जा रहे हैं। हम States को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं कि वे Investments को आकर्षित करें, इसलिए आप सभी अलग-अलग देशों के इंवेस्टर्स के लिए भी, भारत के शिपिंग सेक्टर में काम करने का, अपना विस्तार करने का, यही समय है, सही समय है।

Friends,

भारत की एक और विशेषता है- हमारी वाइब्रेंट डेमोक्रेसी और रिलाएबिलिटी, When The Global Seas Are Rough, The World Looks For A Steady Lighthouse. और भारत ऐसे Lighthouse की भूमिका को बहुत मजबूती से निभा सकता है। Global Tensions, Trade Disruptions और Shifting Supply Chains के बीच, भारत Strategic Autonomy, Peace और Inclusive Growth का प्रतीक है। हमारे Maritime और Trade Initiatives इसी बड़े Vision का हिस्सा हैं। इसका एक उदाहरण है, India–Middle East–Europe Economic Corridor, ये Trade Routes को फिर से Define करेगा, ये Clean Energy और Smart Logistics को बढ़ावा देगा।

साथियों,

आज हमारा फोकस Inclusive Maritime Development पर भी है। ये तभी संभव है, जब Small Island Developing States, और Least Developed Countries को, Technology, Training और Infrastructure के माध्यम से सशक्त बनाया जाए। Climate Change, Supply Chain Disruptions, Economic Uncertainty और Maritime Security, हमें मिलकर इन सभी का सामना करना होगा।

साथियों,

आइए, हम सब साथ मिलकर Peace, Progress, Prosperity को और तेजी से आगे बढ़ाएं, एक Sustainable Future का निर्माण करें। एक बार फिर आप सभी का इस समिट का हिस्सा बनने के लिए अभिनंदन, आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

Thank You.

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नॉर्थ ईस्ट का एक बड़ा लॉजिस्टिक्स और ट्रेड हब बनेगी बराक वैली: असम के सिलचर में पीएम मोदी
March 14, 2026
Today, North-East India is the center of India’s Act East Policy; It is becoming a bridge that connects India with South-East Asia: PM
बराक वैली के किसानों और चाय बागान श्रमिकों का असम के विकास में बहुत बड़ा योगदान है; डबल इंजन सरकार किसानों के कल्याण के लिए निरंतर कदम उठा रही है: प्रधानमंत्री
हम बॉर्डर के गांवों को देश के पहले गांव मानते हैं; कछार जिले से ही वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का अगला चरण शुरु किया था, इससे बराक वैली के अनेक गांवों में भी सुधार होना तय हो गया है: प्रधानमंत्री

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

प्रानोप्रिय बोराक उपत्यकार, सम्मानित नागरिकवृंद, आपनादेर शोबाई के आमार प्रोणाम जानाई।

राज्य के लोकप्रिय मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे साथी सर्बानंद सोनोवाल जी, उपस्थित राज्य सरकार के मंत्रीगण, जनप्रतिनिधिगण और मेरे प्यारे भाईयों और बहनों।

संस्कृति, साहस और जीवंतता से भरपूर बराक वैली के आप सभी परिवारजनों के बीच आना बहुत विशेष अनुभव रहता है। सिलचर को तो बराक घाटी का गेटवे कहा जाता है। ये वो जगह है जहां इतिहास, भाषा, संस्कृति और उद्यम ने मिलकर अपनी एक विशेष पहचान बनाई है। यहां बांग्ला बोली जाती है, असमिया की गूँज सुनाई देती है और अन्य जनजातीय परंपराएं भी फुलती-फलती हैं। यहां इतनी विविधता को अपनी ताकत बनाकर आप सभी भाईचारे के साथ, सद्भाव के साथ, इस पूरे क्षेत्र का विकास कर रहे हैं। ये बराक वैली का बहुत बड़ा सामर्थ्य है

साथियों,

बराक नदी के उपजाऊ मैंदानों ने, यहां के चाय बागानों ने, यहां के किसानों को, यहां के ट्रेड रूट्स को, एजुकेशन सेंटर्स को हमेशा प्रोत्साहित किया है। ये क्षेत्र असम ही नहीं, पूरे नॉर्थ ईस्ट और पश्चिम बंगाल को भी कनेक्ट करता है। बराक घाटी के इसी महत्व को 21वीं सदी में और अधिक सशक्त करने के लिए मैं आज आपके बीच आया हूं, आपके आशीर्वाद लेने आया हूं। थोड़ी देर पहले यहां बराक वैली की कनेक्टिविटी से जुड़े, नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी से जुड़े, हजारों करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। रोड़ हो, रेल हो, एग्रीकल्चर कॉलेज हो, ऐसे हर प्रोजेक्ट्स से बराक वैली नॉर्थ ईस्ट का एक बड़ा लॉजिस्टिक और ट्रेड हब बनने जा रहा है। इससे यहां के नौजवानों के लिए रोजगार के, स्वरोजगार के अनगिनत, अनगिनत अवसर बनने जा रहे हैं। मैं आप सभी को इन सभी विकास परियोजाओं के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आजादी के अनेक दशकों तक कांग्रेस की सरकारों ने नॉर्थ ईस्ट को दिल्ली से और दिल से, दोनों से ही दूर रखा। कांग्रेस ने नॉर्थ ईस्ट को एक प्रकार से भुला दिया था। लेकिन बीजेपी की डबल इंजन सरकार ने नॉर्थ ईस्ट को ऐसे कनेक्ट किया है कि आज हर तरफ इसकी चर्चा है। आज नॉर्थ ईस्ट भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का केंद्र है, दक्षिण पूर्व एशिया के साथ भारत को जोड़ने वाला सेतु बन रहा है।

लेकिन साथियों,

जैसे कांग्रेस ने नॉर्थ ईस्ट को अपने हाल पर छोड़ दिया था, ठीक वैसे ही बराक वैली को भी बेहाल करने में कांग्रेस की बहुत बड़ी भूमिका रही है। जब देश आज़ाद हुआ, तो कांग्रेस ने ऐसी बाउंड्री खींचने दी, जिससे बराक घाटी का समंदर से संपर्क ही कट गया। जो बराक वैली कभी ट्रेड रूट के रूप में, एक औद्योगिक केंद्र के रूप में जानी जाती थी, उस बराक वैली से उसकी ताकत ही छीन ली गई। आज़ादी के बाद भी दशकों तक कांग्रेस की सरकारें रहीं, लेकिन बराक घाटी के विकास के लिए कुछ खास नहीं हुआ।

साथियों,

बीजेपी की डबल इंजन सरकार, इस स्थिति को बदल रही है। हम बराक घाटी को फिर से व्यापार कारोबार का बड़ा हब बनाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। आज इस दिशा में एक बहुत बड़ा और अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। आज करीब 24 हजार करोड़ रुपए के शिलांग-सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर का भूमि पूजन हुआ है, 24 हजार करोड़ रुपए, कितने? कितने? 24 हजार करोड़ रुपए। कितने? कितने? कितने? ये जरा कांग्रेस वालों को पूछना, जरा कागज पेन देना और उनको कहना कि जरा कागज पर 24 हजार करोड़ लिखो तो, कितने, कितने जीरो लगते हैं, आएगा नहीं उनको। ये कांग्रेस वालों के दिमाग का ताला जहां बंद हो जाता है ना, वहां हमारा काम शुरू हो जाता है। यह नॉर्थ-ईस्ट का पहला Access Controlled High-Speed Corridor होगा।

साथियों,

ये सिर्फ एक हाईवे प्रोजेक्ट नहीं है, ये नॉर्थ ईस्ट के लोगों के दशकों पुराने इंतजार का अंत हो रहा है। इस कॉरिडोर से सिलचर, मिजोरम, मणिपुर और त्रिपुरा, ये सब राज्य कनेक्ट होने वाले हैं। इन तीनों राज्यों से आगे बांग्लादेश और म्यांमार हैं और फिर आगे दक्षिण-पूर्व एशिया का विशाल बाजार है। यानी बराक घाटी, एक बहुत उज्जवल भविष्य की तरफ जुड़ने का आज शिलान्यास कर रही है। इसका फायदा असम सहित पूरे नॉर्थ ईस्ट के किसानों को होगा, यहां के नौजवानों को होगा। इतनी अच्छी कनेक्टिविटी वाले ये सारा क्षेत्र बनने से, इस पूरे क्षेत्र में इंडस्ट्री को बल मिलेगा, टूरिज्म को फायदा होगा और सबसे बड़ी बात, हिन्दुस्तान का कोना-कोना आसानी से आप लोगों से जुड़ जाने वाला है।

साथियों,

आप सभी यहां सिलचर में ट्रैफिक को लेकर भी काफी परेशान रहे हैं। अब सिलचर फ्लाईओवर से ये समस्या भी कम हो जाएगी। सिल्चर मेडिकल कॉलेज, NIT सिल्चर और असम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे युवा साथियों के लिए, ये बहुत अच्छी सुविधा हो गई है। इससे आने-जाने में उनका बहुत ही कीमती समय बचने वाला है।

साथियों,

डबल इंजन की बीजेपी सरकार, असम की रेल कनेक्टिविटी पर भी बहुत अधिक काम कर रही है। खासतौर पर रेलवे का बिजलीकरण हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। अब असम का ढाई हजार किलोमीटर से अधिक का रेल नेटवर्क, अब इलेक्ट्रिफाई हो चुका है। अब यहां भी तेज़ गति से ट्रेनें चल पाएंगी, इससे बराक वैली के स्वच्छ वातावरण को भी फायदा मिलेगा।

साथियों,

बराक वैली के किसानों और यहां के चाय-बागानों में काम करने वाले श्रमिकों का असम के विकास में बहुत बड़ा योगदान है। डबल इंजन सरकार किसानों के कल्याण के लिए निरंतर कदम उठा रही है। कल ही, गुवाहाटी से मैंने पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किश्त जारी की है। अब तक पीएम किसान सम्मान निधि का देश के किसानों को लाखों करोड़ रूपया, और अकेले हमारे असम के किसानों को 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा पैसा असम के किसानों को मिल चुका है। अब आप सोचिये, हमने 10 साल में यहां के किसानों की जेब में, 20 हजार करोड़ रुपया उनकी जेब में दिया है। ये कांग्रेस वालों ने 10 साल राज किया, प्रधानमंत्री तो असम से चुनकर के गए थे, उसके बावजूद भी एक फूटी कौड़ी नहीं दी, एक फूटी कौड़ी किसानों को नहीं दी, हमने 20 हजार करोड़ रूपया दिया है। कल बराक वैली के हज़ारों किसानों के खाते में भी, ये आखिरी किस्त भी पहुंची है, ये वाली किस्त पहुंची है और फिर जब चुनाव के बाद आएगा समय, तब भी पहुंचेगी। ये पैसा खेती से जुड़ी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने में, मेरे गांव के छोटे-छोटे किसान भाई-बहनों को बहुत बड़ी मदद कर रहा है।

साथियों,

बराक वैली अब अपनी फसलों के लिए ही नहीं, बल्कि कृषि से जुड़ी पढ़ाई और रिसर्च के लिए भी जानी जाएगी। पत्थरकांडी में बराक घाटी के पहले एग्रीकल्चर कॉलेज का निर्माण कार्य आज से शुरु हो रहा है। इससे किसानों को तो फायदा होगा ही, यहां के नौजवानों को कृषि स्टार्टअप्स के लिए सहयोग, समर्थन और प्रोत्साहन मिलेगा।

साथियों,

भाजपा का मंत्र है- जो विकास की दौड़ में पीछे रह गया, उसे प्राथमिकता देना। कांग्रेस की सरकारें बॉर्डर एरिया को, देश के अंतिम गांव मानती थीं। हम बॉर्डर के गांवों को देश के पहले गांव मानते हैं। और इसलिए, बॉर्डर एरिया के विकास के लिए, कछार जिले से ही वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का अगला चरण शुरु किया था। इससे बराक वैली के अनेक गांवों में भी सुधार होना तय हो गया है।

साथियों,

यहां बड़ी संख्या में चाय-बागानों में कार्य करने वाले साथी भी हैं। असम सरकार ने, चाय-बगानों से जुड़े हजारों परिवारों को, उनकी जमीन का अधिकार देने का ऐतिहासिक काम किया है, वो इन परिवारों के भविष्य को बदलने की एक बड़ी शुरुआत है। जमीन के पट्टे मिलने से, इन परिवारों को सुरक्षा मिली है, उन्हें सम्मान का जीवन मिलना सुनिश्चित हुआ है।

साथियों,

आप जरा वहां से दूर रहिए, अब जगह नहीं है, आगे नहीं आ सकते हैं। देखिए वहां से जरा दूर रखिये उनको, अब आगे नहीं आ सकते भईया, अरे हमारे असम के भाई-बहन तो बड़े समझदार हैं। आपका से प्यार, आपका आशीर्वाद, ये इतनी बड़ी ताकत है, कृपा करके आप।

साथियों,

मैं हेमंता जी की सरकार को बधाई देता हूं, चाय-बागानों में करीब 200 सालों से सेवा दे रही अनेक पीढ़ियों के संघर्ष को आपने आज सम्मान दिया है। देखिए मेरी इस बात पर बादल भी गरजने लग गए। मुझे खुशी है कि जिनको पहले की सरकारों ने अपने हाल पर छोड़ दिया था, उनकी सुध बीजेपी सरकार ने ली है।

साथियों,

ये सिर्फ भूमि पर कानूनी अधिकार का ही मामला नहीं है। इससे ये लाखों परिवार, केंद्र और राज्य सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाओं से भी तेज़ी से जुड़ेंगे। पक्के घर की योजना हो, बिजली, पानी और गैस की योजनाएं हों, इन सब स्कीम्स का पूरा फायदा अब इन परिवारों को मिलना संभव होगा।

साथियों,

बीते सालों में बीजेपी सरकार ने चाय-बागानों में अनेक स्कूल खोले हैं, बच्चों को स्कॉलरशिप्स दिए हैं। सरकारी नौकरियों के लिए भी रास्ते खोले गए हैं। ऐसे प्रयासों से चाय-बागानों के युवाओं के लिए सुनहरे भविष्य के द्वार खुल रहे हैं।

साथियों,

बीजेपी की डबल इंजन सरकार के लिए शिक्षा, कौशल विकास और स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत बड़ी प्राथमिकताएं रही हैं। असम ने तो शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर कांग्रेस की उपेक्षा को बहुत लंबे समय तक भुगता है। आज असम शिक्षा और स्वास्थ्य का बहुत बड़ा हब बनकर सामने आ रहा है। इसका बहुत अधिक फायदा बराक वैली को मिला है। आज यहां शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े अनेक बड़े संस्थान बन चुके हैं।

साथियों,

कांग्रेस ने असम के युवाओं को सिर्फ हिंसा और आतंकवाद के कुचक्र में ही उलझाए रखा था। कांग्रेस ने असम को फूट डालो और राज करो की नीति की प्रयोगशाला बनाया। आज असम के युवाओं के सामने अवसरों का खुला आसमान है। आज असम भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर का अहम हिस्सा बन रहा है। यहां नेक्स्ट जेनरेशन टेक्नॉलॉजी से जुड़ा इकोसिस्टम और टैलेंट तैयार हो रहा है। यहां IIT और IIM जैसे संस्थान बन रहे हैं। मेडिकल कॉलेज, एम्स और कैंसर अस्पतालों का सशक्त नेटवर्क बन रहा है। शांति और प्रगति का ये नया दौर, अनेक बलिदानों और अनेक प्रयासों से आया है। अब ऐसी हर ताकत को मुंहतोड़ जवाब देना है, जो असम को पुराने दौर में धकेलने की कोशिश करती है।

साथियों,

आज मैं सिलचर से असम को सावधान-सतर्क भी करना चाहता हूं। आपने कांग्रेस को असम से बाहर किया। आज देश का हर राज्य कांग्रेस को सबक सिखा रहा है। कांग्रेस एक के बाद एक चुनाव हार रही है। अब निकट भविष्य में, कांग्रेस खुद के पराजय के इतिहास की सेंचूरी मारने वाला है। हार की हताशा से भरी कांग्रेस ने देश के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के नेता देश को बदनाम करने में जुट गए हैं, आपने देखा है, दिल्ली में इतनी बड़ी AI समिट हुई। आज पूरी दुनिया जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, AI को लेकर बहुत ही उत्सुक है। दिल्ली में सफलतापूर्वक विश्व की एक नई आशा पैदा करने वाला AI समिट हुआ। दुनियाभर के नेता, दुनियाभर की टेक्नॉलॉजी कंपनियां, टेक्नॉलॉजी के बड़े-बड़े लीडर दिल्ली आए थे। कांग्रेस ने इस समिट को बदनाम करने के लिए कपड़ा फाड़ प्रदर्शन किया। अब कांग्रेस के पास खुद के कपड़े फाड़ने के सिवा कुछ नहीं बचा है। पूरे देश ने कांग्रेस के इस भौंडे और भद्दे प्रदर्शन की आलोचना की। लेकिन दिल्ली में जो कांग्रेस का शाही परिवार है, वो इस कांड को भी अपना मेडल बता रहा है, देश को बदनाम करने वालों की वाहवाही कर रहा है। ऐसी कांग्रेस, जो देश की विरोधी हो, वो किसी राज्य का भला नहीं कर सकती, वो असम के युवाओं का कभी भला नहीं सोच सकती।

साथियों,

आजकल दुनिया में चारों तरफ और हमारे तो अड़ोस पड़ोस में ही युद्ध के हालात और आप सब भलिभांति युद्ध कि क्या भयानकता है, वो रोजमर्रा देख रहे हो। युद्ध से जो स्थितियां बनी हैं, हमारी सरकार उनसे निपटने के लिए, हमारे देश के नागरिकों को कम से कम मुसीबत आए इसलिए हो सके उतने सारे प्रयास कर रही है। हमारा प्रयास है कि देश के नागरिकों पर युद्ध का कम से कम प्रभाव पड़े। इस समय कांग्रेस से उम्मीद थी कि वो एक जिम्मेदार राजनीतिक दल की भूमिका निभाए, लेकिन कांग्रेस देश हित के इस महत्वपूर्ण काम में भी फिर एक बार फेल हो गई। कांग्रेस पूरी कोशिश कर रही है कि देश में पैनिक क्रिएट हो, देश मुश्किल में फंस जाए। और उसके बाद कांग्रेस भर-भर कर मोदी को गाली दे।

साथियों,

कांग्रेस के लिए और कांग्रेस असम के लिए, देश के लिए कांग्रेस का कोई विजन ही नहीं है, इसलिए, इन्होंने अफवाहों को, झूठ-प्रपंच को ही, और जैसे झूठे रील बनाने की इंडस्ट्री खोलकर रखी है, उसी को हथियार बना दिया है। दुनिया में जो ताकतें भारत के तेज़ विकास को नहीं पचा पा रहीं हैं, जिन विदेशी ताकतों को देश की प्रगति रास नहीं आ रही, कांग्रेस देश का दुर्भाग्य देखिए, कांग्रेस उनके हाथ की कठपुतली बनती जा रही है। इसलिए, असम के हर नागरिक को, हर नौजवान को कांग्रेस से सावधान रहना है।

साथियों,

असम हो, बराक वैली हो, अब ये विकास के पथ पर बढ़ चुका है। बराक वैली, अपनी भाषा, अपने साहित्य, अपनी संस्कृति के लिए जानी जाती है। वो दिन दूर नहीं, जब बराक वैली को विकास के नए सेंटर के रूप में पहचान मिलेगी।

साथियों,

आप इतनी बड़ी तादाद में हमें आशीर्वाद देने आए हैं। जो राजनीति के भविष्य की रेखाएं अंकित करने वाले लोग हैं, वो भांति-भांति की जो संभावनाएं तलाशते रहते हैं, वे आज बराक वैली का ये दृश्य, कल बोड़ो समुदाय का वो दृश्य, टी गार्डन वालों के समूह का दृश्य, ये साफ-साफ बता रहा है कि, इस चुनाव का नतीजा भी क्या होने वाला है। और आप इतनी बड़ी तादाद में आशीर्वाद देने के लिए आए हैं, मैं आपका हृदय से आभारत व्यक्त करता हूं और आप सभी को फिर से विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरे साथ बोलिये-

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!