पूरी दुनिया आज विकासशील भारत के हमारे संकल्प के बारे में चर्चा कर रही है, जो उन बदलावों, विशेष रूप से बुनियादी ढाँचे को दर्शाता है, जिन पर एक विकसित भारत की इमारत का निर्माण हो रहा है: प्रधानमंत्री
हमने एक राष्ट्र, एक गैस ग्रिड के दृष्टिकोण पर काम किया है और प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा परियोजना बनाई है: प्रधानमंत्री मोदी
हमें वर्ष 2047 तक भारत को विकसित बनाना है, हमारा मार्ग है - विकास के माध्यम से सशक्तिकरण, रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता और संवेदनशीलता के माध्यम से सुशासन: प्रधानमंत्री

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉक्टर सीवी आनंद बोस जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी हरदीप सिंह पुरी, शांतनु ठाकुर जी, सुकांता मजूमदार जी, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी जी, संसद में मेरे सहयोगी शॉमिक भट्टाचार्य जी, ज्योतिर्मय सिंह महतो जी, अन्य जनप्रतिनिधिगण, मेरे प्यारे भाइयों और बहनों। नमस्कार!

हमारा ये दुर्गापुर, स्टील सिटी होने के साथ ही भारत की श्रम शक्ति का भी बड़ा केंद्र है। भारत के विकास में दुर्गापुर की बहुत बड़ी भूमिका है। आज इसी भूमिका को और मजबूत करने का अवसर हमें मिला है। थोड़ी देर पहले यहां से 5 हजार चार सौ करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। ये सारी परियोजनाएं, यहां की कनेक्टिविटी को सशक्त करेंगी। यहां गैस बेस्ड ट्रांसपोर्ट, गैस बेस्ड इकॉनॉमी को बल मिलेगा। आज की परियोजनाओं से इस स्टील सिटी की पहचान और मजबूत होगी। यानि ये परियोजनाएं, मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड, इस मंत्र के साथ पश्चिम बंगाल को आगे बढ़ने में मदद करेंगी। इससे यहां के नौजवानों के लिए रोजगार के अनेक अवसर भी पैदा होंगे। मैं आप सभी को, इन परियोजनाओं के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज पूरी दुनिया में विकसित भारत के संकल्प की चर्चा है। इसके पीछे भारत में दिख रहे वो बदलाव हैं, जिन पर विकसित भारत की इमारत का निर्माण हो रहा है। इन बदलावों का एक बड़ा पहलू, भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर है। जब मैं इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करता हूं, तो इसमें सोशल, फिजिकल और डिजिटल, हर प्रकार का इंफ्रास्ट्रक्चर है। 4 करोड़ से अधिक गरीबों के पक्के घर, करोड़ों टॉयलेट्स, 12 करोड़ से अधिक नल कनेक्शन, हज़ारों किलोमीटर की नई सड़कें, नए हाईवे, नई रेल लाइन्स, छोटे-छोटे शहरों में बने एयरपोर्ट, गांव-गांव घर-घर पहुंचा इंटरनेट, ऐसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ, पश्चिम बंगाल सहित देश के हर राज्य को मिल रहा है।

साथियों,

पश्चिम बंगाल की ट्रेन कनेक्टिविटी पर अभूतपूर्व काम हुआ है। बंगाल देश के उन राज्यों में है, जहां बड़ी संख्या में वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं। कोलकाता मेट्रो का तेज़ी से विस्तार हो रहा है। यहां नई रेल लाइनें बिछाने का काम, चौड़ीकरण और बिजलीकरण का काम तेजी से चल रहा है। अनेक रेलवे स्टेशन आधुनिक हो रहे हैं। इसके अलावा, बहुत बड़ी संख्या में रेल ओवर ब्रिज भी बनाए जा रहे हैं। आज दो और रेलवे ओवर ब्रिज पश्चिम बंगाल को मिले हैं। ये सारे काम बंगाल के लोगों का जीवन आसान बनाने में बड़ी मदद करेंगे।

साथियों,

हमने यहां के एयरपोर्ट को भी उड़ान योजना से जोड़ा है। बीते एक वर्ष में ही 5 लाख से ज्यादा यात्री, इसके ज़रिए सफर कर चुके हैं। आप भी जानते हैं, जब ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर बनता है, तो सुविधाएं तो मिलती ही हैं, हजारों नौजवानों को नौकरी भी मिलती है। इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में जो रॉ मटैरियल लग रहा है, उसे बनाने में भी बड़ी संख्या में रोजगार का निर्माण हो रहा है।

साथियों,

पिछले 10-11 सालों में देश में गैस कनेक्टिविटी पर जितना काम हुआ है, उतना पहले कभी नहीं हुआ। बीते दशक में देश में एलपीजी गैस घर-घर पहुंची है। और इसकी दुनियाभर में वाह वाही भी हो रही है। हमने वन नेशन वन गैस ग्रिड के विजन पर काम किया, प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा योजना बनाई। इसके तहत, पश्चिम बंगाल सहित पूर्वी भारत के छह राज्यों में गैस पाइपलाइन बिछाई जा रही है। लक्ष्य ये है कि इन राज्यों में भी पाइप से सस्ती गैस उद्योगों तक पहुंचे, रसोई तक पहुंचे। जब गैस की उपलब्धता होगी, तभी इन राज्यों में सीएनजी से गाड़ियां चल सकेंगी, हमारे उद्योग, गैस आधारित टेक्नॉलॉजी का उपयोग कर सकेंगे। मुझे खुशी है कि आज दुर्गापुर की ये औद्योगिक धरती भी नेशनल गैस ग्रिड का हिस्सा बन गई है। इसका बड़ा लाभ यहां के उद्योगों को होगा। इस प्रोजेक्ट से, पश्चिम बंगाल के करीब 25 से 30 लाख घरों में पाइप से सस्ती गैस पहुंचेगी। यानी इतने परिवारों का, माताओं-बहनों का जीवन आसान होगा। इससे हज़ारों लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

साथियों,

आज दुर्गापुर और रघुनाथपुर के बड़े स्टील और बिजली कारखानों को भी नई टेक्नॉलॉजी से लैस किया गया है। इनमें करीब 1500 करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। अब ये कारखाने दुनिया के साथ कंपीट करने के लिए और अधिक efficient हो गए हैं। मैं बंगाल के लोगों को, इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने की विशेष बधाई देता हूं।

साथियों,

भारत की फैक्ट्रियां हों या फिर हमारे खेत-खलिहान, हर जगह एक ही निश्चय के साथ काम हो रहा है। हमें 2047 तक भारत को विकसित बनाना है। हमारा रास्ता है- विकास से सशक्तिकरण। रोज़गार से आत्मनिर्भरता। और संवेदनशीलता से सुशासन। इन्हीं मूल्यों पर चलते हुए हम पश्चिम बंगाल को भारत की विकास यात्रा का मजबूत इंजन बनाकर के रहेंगे। आप सभी को फिर से विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। अभी के लिए इतना ही, बहुत कुछ कहना है, लेकिन इस मंच पर कहने के बजाय, अच्छा है, पास में दूसरा मंच है, वहीं जाकर के बोलूंगा, पूरा बंगाल और पूरा देश, वहां होने वाली बातें सुनने के लिए जरा ज्यादा आतूर है, मीडिया के लोग भी बड़े उत्सुक हैं, तो साथियों, यहां तो इस कार्यक्रम में मैं, मेरी वाणी को यहीं पर विराम देता हूं। लेकिन कुछ पल के बाद वहीं से गर्जना होगी, बहुत-बहुत धन्यवाद।.`

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कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।