प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट का अनावरण किया
पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत की ‘अष्टलक्ष्मी’ है: प्रधानमंत्री
अष्टलक्ष्मी महोत्सव पूर्वोत्तर क्षेत्र के उज्जवल भविष्य का उत्सव है। यह विकास के नूतन सूर्योदय का उत्सव है, जो विकसित भारत के मिशन को गति देने वाला है: प्रधानमंत्री
हम पूर्वोत्तर क्षेत्र को भावना, अर्थव्यवस्था और इकोलॉजी की त्रिवेणी से जोड़ रहे हैं: प्रधानमंत्री

असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंता बिस्वा सरमा जी, मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा जी, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा जी, सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी ज्योतिरादित्य सिंधिया जी, सुकांता मजूमदार जी, अरुणाचल प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री, मिजोरम और नागालैंड की सरकार के मंत्रीगण, अन्य जनप्रतिनिधि, नॉर्थ ईस्ट से आए सभी भाई और बहनों, देवियों और सज्जनों।

साथियों,

आज संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस है। बाबा साहेब का बनाया संविधान, संविधान के 75 वर्ष के अनुभव...हर देशवासी के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है। मैं सभी देशवासियों की तरफ से बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, उन्हें नमन करता हूं।

साथियों,

हमारा ये भारत मंडपम, बीते 2 वर्षों में अनेक राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों का साक्षी रहा है। यहां हमने G-20 का इतना बड़ा और सफल आयोजन देखा। लेकिन आज का आयोजन और भी विशेष है। आज दिल्ली पूर्वोत्तरमय हो गई है। पूर्वोत्तर के विविधता भरे रंग आज राजधानी में एक सुंदर सा इंद्रधनुष बना रहे हैं। आज हम यहां पर पहला अष्टलक्ष्मी महोत्सव मनाने के लिए इकट्ठा हुए हैं। आने वाले तीन दिन तक, ये महोत्सव हमारे नॉर्थ-ईस्ट का सामर्थ्य पूरे देश को दिखाएगा, पूरे विश्व को दिखाएगा। यहां व्यापार-कारोबार से जुड़े समझौते होंगे, नॉर्थ ईस्ट के उत्पादों से दुनिया परिचित होगी, नॉर्थ ईस्ट का कल्चर, वहां की कुज़ीन आकर्षण का केंद्र होगा। नॉर्थ ईस्ट के जो हमारे अचीवर्स हैं, जिनमें से अनेक पद्म पुरस्कार विजेता यहां मौजूद हैं...इन सभी की प्रेरणा के रंग बिखरेंगे। ये पहला और अनोखा आयोजन है, जब इतने बड़े स्तर पर नॉर्थ ईस्ट में निवेश के द्वार खुल रहे हैं। ये नॉर्थ ईस्ट के किसानों, कारीगरों, शिल्पकारों के साथ-साथ दुनियाभर के निवेशकों के लिए भी एक बेहतरीन अवसर है। नॉर्थ ईस्ट का पोटेंशियल क्या है, ये हम यहां जो प्रदर्शनी लगी है, यहां जो हाट-बाज़ार में भी अगर जाएंगे तो हम अनुभव कर सकते हैं, उसकी विविधता, उसके सामर्थ्य को। मैं अष्टलक्ष्मी महोत्सव के आयोजकों को, नॉर्थ ईस्ट के सभी राज्यों के निवासियों को, यहां आए सभी निवेशकों को, यहां आने वाले सभी अतिथियों को बधाई देता हूं, अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

बीते सौ-दो सौ साल के कालखंड को देखें...तो हमने पश्चिम की दुनिया का, वेस्टर्न वर्ल्ड का एक उभार देखा है। आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक हर स्तर पर दुनिया में पश्चिमी क्षेत्र की एक छाप रही है। और संयोग से, भारत में भी हमने देखा है कि जो हमारे देश को अगर हम देखें नक्शा पूरा तो वो पश्चिमी क्षेत्र ने भारत की ग्रोथ स्टोरी में बड़ी भूमिका निभाई है। इस वेस्ट सेंट्रिक कालखंड के बाद अब कहा जाता है कि 21वीं सदी ईस्ट की है, एशिया की है, पूर्व की है, भारत की है। ऐसे में, मेरा ये दृढ़ विश्वास है कि भारत में भी आने वाला समय पूर्वी भारत का है, हमारे पूर्वोत्तर का है। बीते दशकों में हमने मुंबई, अहमदाबाद, दिल्ली, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद...ऐसे बड़े शहरों को उभरते देखा है। आने वाले दशकों में हम गुवाहाटी, अगरतला, इंफाल, ईटानगर, गंगटोक, कोहिमा, शिलॉन्ग और आइजॉल जैसे शहरों का नया सामर्थ्य देखने वाले हैं। और उसमें अष्टलक्ष्मी जैसे इन आयोजनों की बहुत बड़ी भूमिका होगी।

साथियों,

हमारी परंपरा में मां लक्ष्मी को सुख, आरोग्य और समृद्धि की देवी कहा जाता है। जब भी लक्ष्मी जी की पूजा होती है, तो हम उनके आठ रूपों को पूजते हैं। आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी और विद्यालक्ष्मी इसी तरह भारत के पूर्वोत्तर में आठ राज्यों की अष्टलक्ष्मी विराजमान हैं...असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम। नॉर्थ ईस्ट के इन आठों राज्यों में अष्टलक्ष्मी के दर्शन होते हैं। अब जैसे पहला रूप है आदि लक्ष्मी। हमारे नॉर्थ ईस्ट के हर राज्य में आदि संस्कृति का सशक्त विस्तार है। नॉर्थ ईस्ट के हर राज्य में, अपनी परंपरा, अपनी संस्कृति का उत्सव मनाया जाता है। मेघालय का चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल, नागालैंड का हॉर्नबील फेस्टिवल, अरुणाचल का ऑरेंज फेस्टिवल, मिज़ोरम का चपचार कुट फेस्टिवल, असम का बीहू, मणिपुरी नृत्य...कितना कुछ है नॉर्थ ईस्ट में।

साथियों,

दूसरी लक्ष्मी…धन लक्ष्मी, यानि प्राकृतिक संसाधन का भी नॉर्थ ईस्ट पर भरपूर आशीर्वाद है। आप भी जानते हैं...नॉर्थ ईस्ट में खनिज, तेल, चाय के बागान और बायो-डायवर्सिटी का अद्भुत संगम है। वहां रीन्युएबल एनर्जी का बहुत बड़ा पोटेंशियल है। "धन लक्ष्मी" का ये आशीर्वाद, पूरे नॉर्थ ईस्ट के लिए वरदान है।

साथियों,

तीसरी लक्ष्मी…धान्य लक्ष्मी की भी नॉर्थ ईस्ट पर भरपूर कृपा है। हमारा नॉर्थ ईस्ट, नैचुरल फार्मिंग के लिए, जैविक खेती के लिए, मिलेट्स के लिए प्रसिद्ध है। हमें गर्व है कि सिक्किम भारत का पहला पूर्ण जैविक राज्य है। नॉर्थ ईस्ट में पैदा होने वाले चावल, बांस, मसाले और औषधीय पौधे...वहां कृषि की शक्ति को दिखाते हैं। आज का भारत, दुनिया को हेल्दी लाइफ स्टाइल से जुड़े हुए, न्युट्रिशन से जुड़े हुए, जो सोल्यूशन देना चाहता है...उसमें नॉर्थ ईस्ट की बड़ी भूमिका है।

साथियों,

अष्टलक्ष्मी की चौथी लक्ष्मी हैं...गज लक्ष्मी। गज लक्ष्मी कमल पर विराजमान हैं और उनके आसपास हाथी हैं। हमारे नॉर्थ ईस्ट में विशाल जंगल हैं, काजीरंगा, मानस-मेहाओ जैसे नेशनल पार्क और वाइल्ड लाइफ सेंचुरी हैं, वहां अद्भुत गुफाएं हैं, आकर्षक झीलें हैं। गजलक्ष्मी का आशीर्वाद नॉर्थ ईस्ट को दुनिया का सबसे शानदार टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने का सामर्थ्य रखता है।

साथियों,

पांचवीं लक्ष्मी हैं...संतान लक्ष्मी यानि उत्पादकता की, क्रिएटिविटी की प्रतीक। नॉर्थ ईस्ट, क्रिएटिविटी के लिए, स्किल के लिए जाना जाता है। जो लोग यहां एग्ज़ीबिशन में जाएंगे, हाट-बाज़ार में जाएंगे..उन्हें नॉर्थ ईस्ट की क्रिएटिविटी दिखेगी। हैंडलूम्स का, हैंडीक्राफ्ट्स का ये हुनर सबका दिल जीत लेता है। असम का मुगा सिल्क, मणिपुर का मोइरांग फी, वांखेई फी, नागालैंड की चाखेशांग शॉल...ऐसे दर्जनों GI tagged products हैं, जो नॉर्थ ईस्ट की क्राफ्ट को, क्रिएटिविटी को दिखाते हैं।

साथियों,

अष्टलक्ष्मी की छठी लक्ष्मी हैं…वीर लक्ष्मी। वीर लक्ष्मी यानि साहस और शक्ति का संगम। नॉर्थ ईस्ट, नारी-शक्ति के सामर्थ्य का प्रतीक है। मणिपुर का नुपी लान आंदोलन, महिला-शक्ति का उदाहरण है। नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं ने कैसे गुलामी के विरुद्ध बिगुल फूंका था, ये हमेशा भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से दर्ज रहेगा। रानी गाइदिन्ल्यु, कनकलता बरुआ, रानी इंदिरा देवी, ललनु रोपिलियानी लोक-गाथाओं से लेकर हमारी आज़ादी की लड़ाई तक...नॉर्थ ईस्ट की नारीशक्ति ने पूरे देश को प्रेरणा दी है। आज भी इस परंपरा को नॉर्थ ईस्ट की हमारी बेटियां समृद्ध कर रही हैं। यहां आने से पहले मैं जिन स्टॉल्स में गया, वहां भी अधिकतर महिलाएं ही थीं। नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं की इस उद्यमशीलता से पूरे नॉर्थ ईस्ट को एक ऐसी मजबूती मिलती है, जिसका कोई मुकाबला नहीं।

साथियों,

अष्टलक्ष्मी की सातवीं लक्ष्मी हैं....जय लक्ष्मी। यानि ये यश और कीर्ति देने वाली हैं। आज पूरे विश्व में भारत प्रति जो उम्मीदें हैं, उसमें हमारे नॉर्थ ईस्ट की अहम भूमिका है। आज जब भारत, अपने कल्चर, अपने ट्रेड की ग्लोबल कनेक्टिविटी पर फोकस कर रहा है...तब नॉर्थ ईस्ट, भारत को साउथ एशिया और ईस्ट एशिया के असीम अवसरों से जोड़ता है।

साथियों,

अष्टलक्ष्मी की आठवीं लक्ष्मी हैं...विद्या लक्ष्मी यानि ज्ञान और शिक्षा। आधुनिक भारत के निर्माण में शिक्षा के जितने भी बड़े केंद्र हैं, उनमें से अनेक नॉर्थ ईस्ट में हैं। IIT गुवाहाटी, NIT सिल्चर, NIT मेघालय, NIT अगरतला, और IIM शिलॉन्ग...ऐसे अनेक बड़े एजुकेशन सेंटर्स नॉर्थ ईस्ट में हैं। नॉर्थ ईस्ट को अपना पहला एम्स मिल चुका है। देश की पहली नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी भी मणिपुर में ही बन रही है। मैरी कॉम, बाइचुंग भूटिया, मीराबाई चानू, लोवलीना, सरिता देवी...ऐसे कितने ही स्पोर्ट्स पर्सन नॉर्थ ईस्ट ने देश को दिए हैं। आज नॉर्थ ईस्ट टेक्नोलॉजी से जुड़े स्टार्ट अप्स, सर्विस सेंटर्स और सेमीकंडक्टर जैसे उद्योगों में भी आगे आने लगा है। इनमें हज़ारों नौजवान काम कर रहे हैं। यानि "विद्या लक्ष्मी" के रूप में ये रीजन, युवाओं के लिए शिक्षा और कौशल का बड़ा केंद्र बन रहा है।

साथियों,

अष्टलक्ष्मी महोत्सव...नॉर्थ ईस्ट के बेहतर भविष्य का उत्सव है। ये विकास के नूतन सूर्योदय का उत्सव है...जो विकसित भारत के मिशन को गति देने वाला है। आज नॉर्थ ईस्ट में इन्वेस्टमेंट के लिए इतना उत्साह है। बीते एक दशक में हम सब ने North East Region के विकास की एक अद्भुत यात्रा देखी है। लेकिन यहां तक पहुंचना सरल नहीं था। नॉर्थ ईस्ट के राज्यों को भारत की ग्रोथ स्टोरी के साथ जोड़ने के लिए हमने हर संभव कदम उठाए हैं। लंबे समय तक हमने देखा है कि विकास को भी कैसे वोटों की संख्या से तौला गया। नॉर्थ ईस्ट के राज्यों के पास वोट कम थे, सीटें कम थीं। इसलिए, पहले की सरकारों द्वारा वहां के विकास पर भी ध्यान नहीं दिया गया। ये अटल जी की सरकार थी जिसने नॉर्थ ईस्ट के विकास के लिए पहली बार अलग मंत्रालय बनाया।

साथियों,

बीते दशक में हमने मन से प्रयास किया कि दिल्ली और दिल इससे दूरी का जो भाव है...वो कम होना चाहिए। केंद्र सरकार के मंत्री 700 से अधिक बार नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में गए हैं, लोगों के साथ वहां लंबा समय गुजारा है। इससे सरकार का नॉर्थ ईस्ट के साथ, उसके विकास के साथ एक इमोशनल कनेक्ट भी बना है। इससे वहां के विकास को अद्भुत गति मिली है। मैं एक आंकड़ा देता हूं। नॉर्थ ईस्ट के विकास को गति देने के लिए 90 के दशक में एक पॉलिसी बनाई गई। इसके तहत केंद्र सरकार के 50 से ज्यादा मंत्रालयों को अपने बजट का 10 परसेंट नॉर्थ ईस्ट में निवेश करना पड़ता था। इस नीति के बनने के बाद से लेकर साल 2014 तक जितना बजट नॉर्थ ईस्ट को मिला है...उससे कहीं अधिक हमने सिर्फ बीते 10 सालों में दिया है। बीते दशक में इस एक स्कीम के तहत ही, 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक नॉर्थ ईस्ट में खर्च किया गया है। ये नॉर्थ ईस्ट को लेकर वर्तमान सरकार की प्राथमिकता दिखाता है।

साथियों,

इस स्कीम के अलावा भी, हमने कई बड़ी स्पेशल योजनाएं नॉर्थ ईस्ट के लिए शुरु की हैं। PM-डिवाइन, Special Infrastructure Development Scheme और North East Venture Fund...इन स्कीम्स से रोजगार के, अनेक नए अवसर बने हैं। हमने नॉर्थ ईस्ट के इंडस्ट्रियल पोटेंशियल को बढ़ावा देने के लिए उन्नति स्कीम भी शुरु की है। नए उद्योगों के लिए बेहतर माहौल बनेगा, तो नए रोजगार भी बनेंगे। अब जैसे सेमीकंक्टर का सेक्टर भारत के लिए भी नया है। इस नए सेक्टर को गति देने के लिए भी हमने नॉर्थ ईस्ट को, असम को चुना है। नॉर्थ ईस्ट में जब इस प्रकार की नई इंडस्ट्री लगेगी, तो देश और दुनिया के निवेशक वहां नई संभावनाएं तलाशेंगे।

साथियों,

नॉर्थ ईस्ट को हम, emotion, economy और ecology- इस त्रिवेणी से जोड़ रहे हैं। नॉर्थ ईस्ट में हम सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं बना रहे, बल्कि भविष्य कि एक सशक्त नींव तैयार कर रहे हैं। बीते दशकों में नॉर्थ ईस्ट की बहुत बड़ी चुनौती रही थी...कनेक्टिविटी। दूर-सुदूर के शहरों में पहुंचने के लिए कई-कई दिन और हफ्ते लग जाते थे। हालत ये थी कि ट्रेन की सुविधा तक कई राज्यों में नहीं थी। इसलिए 2014 के बाद हमारी सरकार ने फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बहुत ज्यादा फोकस किया। इससे नॉर्थ ईस्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर की क्वालिटी और लोगों के जीवन की क्वालिटी...दोनों में जबरदस्त सुधार हुआ। हमने प्रोजेक्ट्स के इंप्लीमेंटेशन को भी तेज किया। कई वर्षों से चल रहे प्रोजेक्ट्स पूरे किए गए। आप बोगी-बील ब्रिज का ही उदाहरण लीजिए। कई सालों से लटके इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से पहले, धेमाजी से डिब्रूगढ़ तक की यात्रा में पूरा एक दिन लगता था। आज, एक-आध घंटे में ही ये सफर पूरा हो जाता है। ऐसे कई उदाहरण मैं दे सकता हूं।

साथियों,

बीते 10 सालों में करीब 5 हज़ार किलोमीटर के नेशनल हाईवे वो प्रोजेक्ट्स पूरे हो चुके हैं। अरुणाचल प्रेदश में सेला टनल हो, भारत-म्यांमार-थायलैंड ट्रायलेटरल हाईवे हो, नागालैंड, मणिपुर और मिज़ोरम में बॉर्डर रोड्स हों...इससे एक सशक्त रोड कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है। पिछले साल जी-20 के दौरान भारत ने आई-मैक का विजन दुनिया के सामने रखा है। आई-मैक यानि भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर, भारत के नॉर्थ ईस्ट को दुनिया से जोड़ेगा।

साथियों,

नॉर्थ ईस्ट की रेल कनेक्टिविटी में कई गुणा वृद्धि हुई है। अब नॉर्थ ईस्ट के राज्यों की सभी राजधानियों को रेल से कनेक्ट करने का काम पूरा होने वाला है। नॉर्थ ईस्ट में पहली वंदे भारत ट्रेन भी चलने लगी है। बीते दस वर्षों में नॉर्थ ईस्ट में एयरपोर्ट्स और फ्लाइट्स की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। ब्रह्मपुत्र और बराक नदियों पर वॉटर-वे बनाने का काम चल रहा है। सबरूम लैंडपोर्ट से भी वॉटर कनेक्टिविटी बेहतर हो रही है।

साथियों,

मोबाइल और गैस पाइप-लाइन कनेक्टिविटी को लेकर भी तेजी गति से काम हो रहा है। नॉर्थ ईस्ट के हर राज्य को नॉर्थ ईस्ट गैस ग्रिड से जोड़ा जा रहा है। वहां 1600 किलोमीटर से अधिक लंबी गैस पाइप-लाइन बिछाई जा रही है। इंटरनेट कनेक्टिविटी पर भी हमारा जोर है। नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में 2600 से अधिक मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं। 13 हज़ार किलोमीटर से अधिक का ऑप्टिकल फाइबर नॉर्थ ईस्ट में बिछाया गया है। मुझे खुशी है कि नॉर्थ ईस्ट के सभी राज्यों तक 5G कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है।

साथियों,

नॉर्थ ईस्ट में सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर में भी अभूतपूर्व काम हुआ है। नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में मेडिकल कॉलेज का काफी विस्तार हुआ है। कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज के लिए भी अब वहीं पर आधुनिक सुविधाएं बन रही हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत, नॉर्थ ईस्ट के लाखों मरीज़ों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिली है। चुनाव के समय मैंने आपको गारंटी दी थी कि 70 वर्ष की आयु के ऊपर के बुजुर्गों को मुफ्त इलाज मिलेगा। आयुष्मान वय वंदना कार्ड से सरकार ने अपनी ये गारंटी भी पूरी कर दी है।

साथियों,

नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी के अलावा हमने वहां के ट्रेडिशन, टेक्सटाइल और टूरिज्म पर भी बल दिया है। इसका फायदा ये हुआ कि देशवासी अब नॉर्थ ईस्ट को एक्सप्लोर करने के लिए बड़ी संख्या में आगे आ रहे हैं। बीते दशक में नॉर्थ ईस्ट जाने वाले पर्यटकों की संख्या भी करीब-करीब दोगुनी हो चुकी है। निवेश और पर्यटन बढ़ने से वहां नए बिजनेस बने हैं, नए अवसर बने हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर से इंटीग्रेशन, कनेक्टिविटी से क्लोज़नेस, इक्नॉमिक से इमोशनल...इस पूरी यात्रा ने नॉर्थ ईस्ट के विकास को, अष्टलक्ष्मी के विकास को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

साथियों,

आज भारत सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता अष्टलक्ष्मी राज्यों के युवा हैं। नॉर्थ ईस्ट का नौजवान हमेशा से विकास चाहता है। बीते 10 वर्षों से नॉर्थ ईस्ट के हर राज्य में स्थाई शांति के प्रति, एक अभूतपूर्व जन-समर्थन दिख रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों से हज़ारों नौजवानों ने हिंसा का रास्ता छोड़ा है...और विकास का नया रास्ता अपनाया है। बीते दशक में नॉर्थ ईस्ट में अनेक ऐतिहासिक शांति समझौते हुए हैं। राज्यों के बीच भी जो सीमा विवाद थे, उनमें भी काफी सौहार्दपूर्ण ढंग से प्रगति हुई है। इससे नॉर्थ ईस्ट में हिंसा के मामलों में बहुत कमी आई है। अनेक जिलों में से AFSPA को हटाया जा चुका है। हमें मिलकर अष्टलक्ष्मी का नया भविष्य लिखना है और इसके लिए सरकार हर कदम उठा रही है।

साथियों,

हम सभी की ये आकांक्षा है कि नॉर्थ ईस्ट के प्रोडक्ट्स, दुनिया के हर बाज़ार तक पहुंचने चाहिए। इसलिए हर जिले के प्रोडक्ट्स को, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट अभियान के तहत प्रमोट किया जा रहा है। नॉर्थ ईस्ट के अनेक उत्पादों को हम यहां लगी प्रदर्शनियों में, ग्रामीण हाट बाजार में देख सकते हैं, खरीद सकते हैं। मैं नॉर्थ ईस्ट के प्रोडक्ट्स के लिए वोकल फॉर लोकल के मंत्र को बढ़ावा देता हूं। मेरा प्रयास रहता है वहां के उत्पादों को अपने विदेशी मेहमानों को भेंट करुं। इससे आपकी इस अद्भुत कला, आपके क्राफ्ट को इंटरनेशनल स्तर पर पहचान मिलती है। मैं देशवासियों से, दिल्ली वासियों से भी आग्रह करुंगा कि नॉर्थ ईस्ट के प्रोडक्ट्स को अपनी लाइफ-स्टाइल का हिस्सा बनाएं।

साथियों,

आज मैं आप सभी को वैसे कितने कुछ सालों से लगातार हमारे नॉर्थ ईस्ट के भाई-बहन वहां जरूर जाते हैं। आपको पता है गुजरात के पोरबंदर में, पोरबंदर के पास माधवपुर वहां एक मेला होता है। उस माधवपुर मेले का मैं अग्रिम निमंत्रण देता हूं। माधवपुर मेला, भगवान कृष्ण और देवी रुक्मिणी के विवाह का उत्सव है। और देवी रुक्मिणी तो नॉर्थ ईस्ट की ही बेटी हैं। मैं पूर्वोत्तर के अपने सभी परिवारजनों को अगले वर्ष होने वाले, मार्च-अप्रैल में होता है रामनवमी के साथ, उस मेले में शामिल होने का भी आग्रह करूंगा। और मैं चाहूंगा उस समय भी ऐसा ही एक हॉट गुजरात में लगाया जाए ताकि वहां भी बहुत बड़ा मार्केट मिले, और हमारे नॉर्थ ईस्ट के भाई-बहन जो चीजें बनाते हैं उनको कमाई भी हो। भगवान कृष्ण और अष्टलक्ष्मी के आशीर्वाद से हम जरूर नॉर्थ ईस्ट को 21वीं सदी में विकास का एक नया प्रतिमान स्थापित करते हुए देंखेंगे। इसी कामना के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। मैं इसको बड़ी सफलता के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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नमस्ते!

बों जू!

ऐसा लग रहा है, आप सब छुट्टी के मूड में हैं।

साथियों,

ये पेरिस शहर, Lights का शहर है, रंगों का शहर है, यहां Art है, Ideas हैं, और innovation की प्रेरणा भी है। इस शहर को भारत के अलग-अलग राज्यों से आए आप सभी लोग और भी खूबसूरत बना देते हैं। नए नए रंगों से भर देते हैं।

कोई तमिल है, कोई पंजाबी है, कोई गुजराती है, तो कोई मराठी है, और कोई बंगाली है। भारत के हर कोने का प्रतिनिधित्व यहां दिखाई देता है।

साथियों,

मैं जब 14 जून को नीस पहुंचा था तो सबसे पहले भारत इनोवेट्स कार्यक्रम में शामिल हुआ था। आज जब मैं फ्रांस से वापसी की तैयारी में हूं तो लग रहा है जैसे भारत कनेक्ट्स कार्यक्रम में आ गया हूं।

फ्रांस में रहने वाले आप लोगों ने 21वीं सदी के भारत-फ्रांस रिश्तों को जिस तरह कनेक्ट किया है, वो हमारी Strategic Partnership की बहुत बड़ी ताकत बन रही है। मैं आप सभी के लिए भारत से 140 करोड़ देशवासियों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं। इस आत्मीय स्वागत के लिए, मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

आज मैं ऐसे समय में फ्रांस आया हूं जब कुछ ही दिन पहले हमारी सरकार के 12 वर्ष पूरे हुए हैं। चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप निरंतर 12 साल तक देश की सेवा करना मेरे जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य रहा है। यह भारत के लोकतंत्र की शक्ति है जिसने एक चायवाले को यहां तक पहुंचा दिया।

साथियों,

बीते 12 वर्ष, 140 करोड़ भारतीयों के अद्भुत सामर्थ्य के रहे हैं। 12 साल के इस कालखंड में भारत का GDP दोगुना हुआ है। Airports की संख्या दोगुनी हुई है। Universities की संख्या भी दोगुनी हो गई है। Highway Construction की स्पीड तीन गुना बढ़ गई। और Metro Network, चार गुणा बड़ा हो गया है।

मैं आपको कुछ और फैक्ट्स दूंगा, उससे आप अंदाजा लगा पाएंगे कि भारत किस स्पीड और कितने बड़े स्केल पर काम कर रहा है। पिछले 12 वर्षों में भारत का Defence Export 35 गुणा यानि Thirty Five Times बढ़ गया है।

औऱ एक फैक्ट सुनिए भारत में मोबाइल मैन्यूफैक्टरिंग यूनिट्स में, 100 गुणा की बढ़ोतरी हुई है। 100 times. भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा mobile phone manufacturer है। इसी गति, इसी प्रगति का नतीजा है कि आज भारत दुनिया की Fastest Growing Major Economy है।

साथियों,

आज भारत की कहानी सिर्फ Economic Progress की कहानी नहीं है। सिर्फ यहाँ अटक नहीं जाती है। ये Social Transformation की भी कहानी है।

पिछले 12 साल में देश में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। यानि एक ऐसी प्रगति जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। फ्रांस में जितने घर हैं, उससे भी अधिक पक्के घर बीते 12 वर्ष में हमने जरूरतमंदों के लिए बनाए हैं।

अब हर परिवार के पास, गरीब से गरीब क्यों न हो, Bank Account है। Financial Inclusion एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का अभियान बना है।

साथियों,

इन 12 वर्षों की उपलब्धियों में, एक उपलब्धि ऐसी भी है जिसे किसी आंकड़े से, या अंकों से, नहीं मापा जा सकता। वह है 140 करोड़ भारतीयों का आत्मविश्वास।

आज का भारत और आज के भारत का युवा बहुत बड़े सपने देख रहा है। भारत का किसान नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत की महिलाएं नए नेतृत्व का परिचय दे रही हैं। इसलिए ये सिर्फ Achievements के 12 साल नहीं हैं, ये भारत की एस्पिरेशन्स को नई बुलंदी देने का कालखंड रहा है।

साथियों,

एक समय था जब दूर-दराज के गांवों तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचाना वाकई बहुत मुश्किल भरा था। आज उन्हीं गांवों में बिजली भी है, इंटरनेट भी है, और डिजिटल सेवाओं की पूरी दुनिया भी है। आज एक क्लिक पर, कभी भी, कहीं भी बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हैं।

आज मोबाइल फोन, भारत के नागरिकों को अनेक सुविधाओं से कनेक्ट कर रहा है। हमारे किसान, हमारे मछुआरे, हमारे dairy farmers, हमारी महिलाएं, हमारे स्टूडेंट्स, सभी टेक्नोलॉजी के माध्यम से सशक्त हो रहे हैं, और अपने लिए नए अवसर बना रहे हैं।

साथियों,

आपने 125 करोड़ से अधिक Aadhaar IDs के बारे में सुना है। लेकिन आज भारत सिर्फ पहचान को डिजिटल नहीं बना रहा। आज करीब 90 करोड़ भारतीयों की Unique Digital Health IDs बनाई जा चुकी हैं। जिससे मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित और accessible बन गए हैं। इससे हेल्थकेयर डिलीवरी और अधिक आसान और efficient हो रही है।

साथियों,

इन उपलब्धियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें से अधिकांश चीजें कुछ वर्ष पहले तक कल्पना जैसी लगती थीं। कौन सोच सकता था कि गांव-गांव तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचेगा ? कौन सोच सकता था कि दूर-सुदूर के गांवों में भी QR code जीवन का हिस्सा बन जायेगा ? गांव में कोई बहन, ड्रोन से खेती करने में मदद करेगी, ये भी असंभव लगता था।

लेकिन आज यह सब, भारत के करोड़ों लोगों के जीवन का सामान्य हिस्सा बनता जा रहा है। और आपको गर्व होगा साथियों, यही नए भारत की पहचान है।

जो कभी सपना था, वह आज सच्चाई है। जो कभी नामुमकिन लगता था, वो आज मुमकिन हुआ है, औऱ ये करने के पीछे सबसे बड़ी ताकत क्या है? किसकी वजह से ये सब संभव हुआ है? यह मोदी के कारण नहीं, वो ताकत है- भारत का लोकतंत्र, भारत की डेमोक्रेसी। इस डेमोक्रेसी में सबका साथ है, सबका विकास है।

साथियों,

आज से 50 या 100 साल बाद जब भारत के इस कालखंड की समीक्षा होगी, तो ये बात उभरकर सामने आएगी कि इस कालखंड को भारत की Aspirations ने ड्राइव किया। यह भारत के एस्पिरेशन्स का नया युग है।

जहां बिजली पहुंची है, वहां लोग सिर्फ बिजली नहीं चाहते, वे Smart Living चाहते हैं। जहां ट्रेन पहुंची है, वहां लोग High-Speed Connectivity चाहते हैं। जहां हाईवे बने हैं, वहां लोग World-Class Expressways चाहते हैं। जहां इंटरनेट पहुंचा है, वहां लोग AI और Digital Innovation में नेतृत्व चाहते हैं।

यानि आज भारत के लोग अपने जीवन को भी Next Level पर ले जाना चाहते हैं, और भारत को भी Next Level पर ले जाना उनका मकसद है, उनका संकल्प है, उनके सपने है।

और साथियों,

यही Aspirations आज भारत की विकास यात्रा की सबसे बड़ी शक्ति हैं। मैं आपको भारत की Space Journey का उदाहरण दूंगा।

भारत ने चंद्रयान को चंद्रमा के South Pole पर उतारा। दुनिया ने इसे एक बहुत बड़ी उपलब्धि माना। लेकिन भारत इसे अपनी मंजिल मानकर रुका नहीं। आज देश गगनयान की तैयारी कर रहा है। भारत अंतरिक्ष में अपना Space Station बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

हमारे Space Startups Global Space Economy में अपनी जगह बनाने के लिए पुरजोश काम कर रहे हैं, आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

Green Energy के क्षेत्र में भी भारत की यही एस्पिरेशंस दिखाई देती है। Solar Power में भारत की उपलब्धियों की दुनिया भर में लगातार चर्चा हो रही हैं। लेकिन भारत अगली छलांग की तैयारी कर रहा है।

Green Hydrogen में बड़े निवेश हो रहे हैं। Advanced Nuclear Energy पर तेजी से काम हो रहा है। आपने भारत के Fast Breeder nuclear Reactor से जुड़ी प्रोग्रेस के बारे में भी सुना ज़रूर होगा। ये भारत के न्यूक्लियर एनर्जी लैंडस्केप में क्रांतिकारी परिवर्तन करने का बहुत बड़ा अचीवमेंट हमारे सीसेन्टिस्टों ने किया है।

साथियों,

आज का भारत भविष्य का पूरा Ecosystem बना रहा है। भारत एक साथ हर उस क्षेत्र में निवेश कर रहा है, जो आने वाले दशकों की दिशा तय करेगा।

अभी आपने कुछ दिन पहले ही देखा है नीस में भारत इनोवेट्स का एक आयोजन किया। ये इवेंट भारत के डीप टेक सामर्थ्य को दुनिया तक पहुंचाने का एक और माध्यम था। इसमें भारत के 120 Deep-Tech Startups उपस्थित थे। Bharat Innovates में करीब एक हजार चार सौ B2B Meetings हुईं है। कई Startups के लिए Investment Commitments आगे बढ़ीं, Commercial Orders के लिए रास्ते खुले। French और European Universities तथा Incubators के साथ Engagements बढ़ रही हैं।

Student Exchanges, Joint Research, और Innovation Support के नए रास्ते बने। इसलिए Bharat Innovates सिर्फ एक Summit नहीं रहा। यह Innovation Diplomacy का एक नया मॉडल बना है।

और आज ही पेरिस में VivaTech इवेंट के जरिए, इस यात्रा को हमने और आगे बढ़ाया। नीस में हमने Ideas को Capital से जोड़ा और पेरिस में Indian Innovation को Global Scale से जोड़ा। आज दुनिया देख रही है भारत केवल भविष्य के लिए तैयार नहीं हो रहा है। भारत भविष्य को आकार दे रहा है।

साथियों,

एक समय था, जब देशों के बीच रिश्ते केवल व्यापार से तय होते थे। आज व्यापार के साथ-साथ Trust यानि भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।

हर देश Reliable Supply Chains चाहता है। हर देश Stable Partnerships चाहता है। हर देश ऐसे साथियों की तलाश में है, जिन पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके। और ऐसे समय में, भारत विश्व में एक Trusted Partner के रूप में उभर रहा है।

एवियां में G7 बैठक के दौरान मैंने trust based partnerships बनाने पर ज़ोर दिया। ग्लोबल साउथ के देशों के साथ equal पार्टनर्स के रूप में आगे बढ़ने का आह्वान किया। भारत का G7 समिट में संदेश था Global Governance तभी प्रभावी होगी जब वह Inclusive होगी। Global Growth तभी Sustainable होगी जब वह शेयर्ड होगी। और Global Technology तभी मानवता के लिए उपयोगी होगी जब वह Trusted होगी।

साथियों,

भारत और दुनिया के बीच व्यापारिक रिश्तों में नई ऊर्जा नज़र आ रही है। फ्रांस के साथ भारत का ट्रेड लगतार बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दुनिया के अनेक देशों के साथ Free Trade Agreements किए हैं। यूरोपियन यूनियन हो, यूनाइटेड किंगडम हो दुनिया के हर देश, हर रीजन के साथ भारत समझौते कर रहा है।

अगले महीने से भारत और UK के बीच ट्रेड एग्रीमेंट भी लागू हो जाएगा। यह एग्रीमेंट भारत के farmers, workers और innovators को अनेक नए अवसर प्रदान करेगा।

साथियों,

आज दुनिया Uncertainty और Disruption के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत और फ्रांस की साझेदारी विश्वास, स्थिरता और सहयोग का एक मजबूत स्तंभ बन रहा है।

इस वर्ष हमने भारत और फ्रांस के संबंधों को Special Global Strategic Partnership का दर्जा दिया था। नीस में मेरे मित्र President Macron और मैंने हमारे संबंधों को force for global good बनाने पर चर्चा की। Defence से लेकर space और नुक्लियर तक AI और क्रिटीकल मिनरल्स से लेकर high speed railway तक, हर क्षेत्र में हम मिलकर आगे बढ़ेंगे।

साथियों,

Solar energy हो, या AI के क्षेत्र में सहयोग हो, भारत और फ्रांस मिलकर ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं जो पूरी मानवता के हित में हैं। पिछले वर्ष पेरिस में और इस वर्ष दिल्ली में हमने AI Summit को Co-chair किया।

अब हम साथ मिलकर अगले वर्ष “तृष्णा” satellite को लॉन्च करने जा रहें हैं। यह “तृष्णा” satellite जो विश्व में फूड और वाटर सिक्युरिटी सुनिश्चित करने में योगदान देगा।

और साथियों,

यह सभी गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट पहलो में आप सभी का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। ये आप हैं जो भारत और यूरोप के बीच सबसे मजबूत सेतु हैं। आप दोनों समाजों को समझते हैं। दोनों बाजारों को समझते हैं। आने वाले समय में Talent, Trade, Technology, Tourism और Investment के नए अवसरों को आगे बढ़ाने में आपकी भूमिका लगातार बढ़ने वाली हैं।

साथियों,

भारत और फ्रांस के रिश्तों को साझा इतिहास, साझा मूल्यों और साझा विश्वास ने आगे बढ़ाया है। विश्व युद्धों के दौरान फ्रांस की धरती पर बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों की स्मृतियां आज भी हमें जोड़ती हैं।

मुझे पहले नव शापेल में श्रद्धांजलि देने का अवसर मिला, पिछले वर्ष प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मार्सेय के वॉर मेमोरियल जाने का अवसर भी मिला। ये हमारी साझा विरासत है।

फ्रांस, भारतीयों के योगदान को संजोता भी है और सराहता भी है। भारतीय मूल की नूर इनायत खान हों, जिन्होंने फ्रांस की Resistance के लिए अपना जीवन बलिदान किया, या महाराजा रणजीत सिंह के साथ काम करने वाले जनरल जां फ्रांस्वा अलार हों ये सभी भारत और फ्रांस की साझा विरासत के प्रतीक हैं।

भारत के राज्य पुडुचेरी में भी फ्रेंच विरासत की झलक दिखाई देती है। वहां का Architecture, वहां की कला-संस्कृति और खान-पान सभी में हमारे संबंधों की महेक है।

साथियों,

इस समय फ्रांस समेत पूरी दुनिया में International Yoga Day की तैयारी भी चल रही है। इस अवसर पर मैं, फ्रांस में योग को आगे बढ़ाने वाले श्रीमान महेश घाट्राड्याल जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धांजलि देता हूं। मैं पद्म पुरस्कार से सम्मानित, शार्लोत शोपां जी को भी प्रणाम करता हूं। जिन्होंने सौ वर्ष की आयु में भी, योग के माध्यम से फ़्रांस को भारत की विरासत से जोड़ा है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है: Yoga does not add years to life, it adds life to years.

साथियों,

मैं फ्रेद नेग्री जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धापूर्वक याद करता हूं। भारतीय विरासत को संरक्षित करने में उनका योगदान अतुल्य रहा है।

साथियों,

भारत और फ्रांस को कनेक्ट करने वाली एक और चीज है, और वो है फुटबॉल। इस वक्त यहां फुटबॉल फीवर पूरे जोर पर है। फ्रांस में इसकी दीवानगी, चप्पे-चप्पे पर दिखती है। लेकिन भारत में भी फुटबॉल का क्रेज़ सिर चढ़कर बोलता है।

खासतौर पर फ्रांस की टीम के फैन्स भारत में बहुत अधिक हैं। फ़्रांस ने इस वर्ल्ड कप की शुरुआत एक जोरदार जीत से शुरू की है। मैं फ्रांस की टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

जाने से पहले, आप सभी के लिए कुछ और अच्छी खबरें भी लेकर के आया हूँ। वो आपके लिए हैं। पिछले वर्ष, मार्सेय में कॉन्सुलेट खोला गया, इससे काफी अधिक सुविधा मिल रही है। कुछ हफ्ते पहले, Indian Nationals के लिए French Airports पर Visa-free Transit की व्यवस्था शुरू हो गई है।

Students और Professionals की Mobility बढ़ाना हो, या Educational Qualifications की Mutual Recognition की बात हो, या फिर French Universities के भारत में Campus खोलना हो, इन सभी पर हम मिलकर आगे बढ़ रहें हैं।

अब फ्रांस में UPI के उपयोग का दायरा भी और बढ़ने जा रहा है। यानि भारत-फ्रांस कनेक्ट भी Instant और आपसी Payment भी Instant!

साथियों,

इन सभी पहलों से, हम भारत और फ़्रांस को और करीब ला रहें हैं। और मैं फिर कहूंगा इस साझेदारी की नींव, इस रिश्ते की असली ताकत आप सभी हैं। आप सब मेरे देशवासी हैं।

आज जब भारत तेज़ी से विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तो मैं आप सभी से भारत के साथ और गहराई से जुडने का आग्रह करूंगा। इससे भारत की विकास यात्रा को नई शक्ति मिलेगी, और आपको अपनी पुरखों की धरती की सेवा करने का अवसर भी मिलेगा।

इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी के प्रेम आपके उत्साह और इस आत्मीय स्वागत के लिए मैं एक बार फिर आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं।

भारत माता की जय!

बहुत बहुत धन्यवाद।