भारत को हम एक ज्ञान अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रयासरत हैं: प्रधानमंत्री मोदी
नई शिक्षा नीति में हमारे सही मायने में बिना दबाव के, बिना अभाव और बिना प्रभाव के सीखने के लोकतांत्रिक मूल्यों को हमारी शिक्षा व्वयस्था का हिस्सा बनाया गया है: पीएम मोदी
नई शिक्षा नीति, स्टडींग के बजाय लर्निंग पर फोकस करती है: प्रधानमंत्री

नमस्कार!

आदरणीय राष्ट्रपति जी, मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी रमेश पोखरियाल निशंक जी, संजय धोत्रे जी, इस सम्मलेन में भाग ले रहे सभी माननीय राज्यपाल, उप राज्यपाल, राज्यों के शिक्षामंत्री, राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आकार देने में मुख्य भूमिका निभाने वाले डॉक्टर कस्तूरीरंगन जी और उनकी टीम, अलग-अलग विश्विद्यालय के कुलपति, शिक्षाविद, देवियों और सज्जनों!

सर्वप्रथम, मैं माननीय राष्ट्रपति जी का आभार व्यक्त करता हूं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में, ये आयोजन बहुत ही प्रासंगिक है, बहुत महत्वपूर्ण है। शिक्षा जगत का सैकड़ों वर्षों का अनुभव, एक साथ यहां एकत्रित है। मैं सभी का स्वागत करता हूं, अभिनंदन करता हूं।

मान्‍यवर,

देश की aspirations को पूरा करने का बहुत महत्वपूर्ण माध्यम शिक्षा नीति और शिक्षा व्यवस्था होती है। शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी से केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय, सभी जुड़े होते हैं। लेकिन ये भी सही है कि शिक्षा नीति में सरकार, उसका दखल, उसका प्रभाव, कम से कम होना चाहिए। शिक्षा नीति से जितना शिक्षक जुड़े होंगे, अभिभावक जुड़े होंगे, छात्र-छात्राएं जुड़े होंगे, उतना ही उसकी प्रासंगिकता और व्यापकता, दोनों ही बढ़ती है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चार-पांच साल पहले काम शुरू हुआ था। देश के लाखों-लाख लोगों ने, शहर में रहने वाले लोगों ने, गांव में रहने वाले लोगों ने, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अनुभवी लोगों ने, इसके लिए अपना फीडबैक दिया था, अपने सुझाव दिए थे। शिक्षा नीति का जो ड्राफ्ट तैयार हुआ था, उसके अलग-अलग प्वाइंट्स पर भी 2 लाख से अधिक लोगों ने अपने सुझाव दिए थे। यानि अभिभावक, छात्र- छात्राएं, शिक्षाविद, शिक्षक, शिक्षा प्रबंधक, प्रोफेशनल्स, सभी ने इसके निर्माण में अपना योगदान दिया है। इतना गहरा, इतना व्‍यापक, इतना विविधताओं से भरा हुआ मंथन के बाद अब ये जो अमृत निकला है, इसलिए ही अब हर ओर राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वागत हो रहा है।

गांव में कोई शिक्षक हो या फिर बड़े-बड़े शिक्षाविद, सबको राष्ट्रीय शिक्षा नीति, अपनी शिक्षा शिक्षा नीति लग रही है। सभी के मन में एक भावना है कि पहले की शिक्षा नीति में यही सुधार तो मैं होते हुए देखना चाहता था। ये एक बहुत बड़ी वजह है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की स्वीकारता की, acceptance का मूल कारण यही है।

शिक्षा नीति क्या हो, कैसी हो, उसका स्वरूप क्या हो, ये तय करने के बाद अब देश एक Step और आगे बढ़ा है। अब पूरे देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर, उसके implementation को लेकर व्यापक विचार-विमर्श हो रहा है, संवाद हो रहा है। ये व्यापक विमर्श इसलिए ज़रूरी है क्योंकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-National Education Policy, सिर्फ पढ़ाई-लिखाई के तौर-तरीकों में ही बदलाव लाने के लिए नहीं है। ये पॉलिसी 21वीं सदी के भारत के सामाजिक और आर्थिक जीवन को नई दिशा देने वाली है।

ये पॉलिसी आत्मनिर्भर भारत के संकल्प और सामर्थ्य को आकार देने वाली है। ज़ाहिर है, इस बड़े संकल्प के लिए हमारी तैयारियां, हमारी जागरूकता भी उतनी ही बड़ी होनी चाहिए। आप में से अधिकांश महानुभाव, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की बारीकियों का अध्य्यन कर चुके हैं। लेकिन इतने बड़े रीफॉर्म की बारीकियों, उसके लक्ष्य पर निरंतर बात करना अभी उतना ही आवश्यक है। सारे संदेहों और सवालों को सुलझाते हुए ही देश राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सफलतापूर्वक लागू कर पाएगा।

मान्‍यवर,

आज दुनिया भविष्य में तेजी से बदलते jobs, nature of work को लेकर व्‍यापक रूप से चर्चा कर रही है। ये पॉलिसी देश के युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के मुताबिक knowledge और skills, दोनों मोर्चों पर तैयार करेगी। नई शिक्षा नीति, study के बजाय learning पर फोकस करती है और curriculum से और आगे बढ़कर critical thinking पर ज़ोर देती है। इस पॉलिसी में process से ज्यादा passion, practicality और performance पर बल दिया गया है। इसमें foundational learning और languages पर भी फोकस है। इसमें learning outcomes और teacher training पर भी फोकस है। इसमें access और assessment को लेकर भी व्यापक रिफॉर्म्स किए गए हैं। इसमें हर student को empower करने का रास्ता दिखाया गया है।

एक तरह से देखें तो ये one size fits all की approach से हमारी शिक्षा व्यवस्था को बाहर निकालने का एक मजबूत प्रयास है। और आप सभी, जो दिग्गज भी ये महसूस करते हैं कि ये प्रयास, असामान्‍य है, सामान्य नहीं है। बीते दशकों से हमारे education system में जो भी कमियां हमें दिखती थीं, जो भी समस्याएं हमको लगती थीं, उनको दूर करने के लिए विस्तार से इस पॉलिसी में चर्चा की गई है। अब जैसे, लंबे समय से ये बातें उठती रही हैं कि हमारे बच्चे बैग और बोर्ड एग्ज़ाम के बोझ तले, परिवार और समाज के दबाव तले दिनोंदिन दबे जा रहे हैं। इस पॉलिसी में इस समस्या को प्रभावी तरीके से address किया गया है। हमारे यहां तो कहा भी जाता है कि, सा विद्या या विमुक्तये। यानि knowledge वही है जो हमारे mind को liberate करे।

जब foundational stage पर ही बच्चों को उनके कल्चर, भाषा, परंपरा से जोड़ा जाएगा तो शिक्षा अपने-आप ही प्रभावी होगी, सहज होगी और बालमन उससे खुद को जुड़ा हुआ पाएगा। National Education Policy में हमारे सही मायने में बिना दबाव के, बिना अभाव के और बिना प्रभाव के सीखने के लोकतांत्रिक मूल्यों को हमारी शिक्षा व्‍यवस्‍था का हिस्सा बनाया गया है। जैसे streams को लेकर जो बच्चों पर दबाव रहता था, वो अब हटा दिया गया है।

अब हमारे युवा अपने Interest, अपने aptitude के हिसाब से पढ़ाई कर सकेंगे। वरना पहले होता ये था कि दबाव के कारण विद्यार्थी अपनी क्षमता के बाहर की कोई और ही स्ट्रीम चुन लेते थे और जब तक उनको realize होता था तब तक बहुत देर हो जाती थी। परिणाम ये होता था कि या तो विद्यार्थी थक हारकर ड्रॉप कर लेता था या फिर जैसे-तैसे वो डिग्री पूरी करता था। इससे किस प्रकार की समस्याएं हमारे देश में पैदा होती रही हैं, ये कितनी समस्याओं की जड़ है, मैं समझता हूं मुझसे ज्‍यादा आप लोग जानते हैं, भलीभांति जानते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में, ऐसी समस्याओं का समाधान तो है ही, academic bank of credit से भी छात्रों को बहुत लाभ होगा।

मान्‍यवर,

आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए युवाओं का skillful होना बहुत ही ज़रूरी है। छोटी उम्र से ही vocational exposure मिलने से हमारा youth भविष्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार होगा। practical learning से हमारे युवा साथियों की employability देश में तो बढ़ेगी ही, global Job market में भी हमारी हिस्सेदारी ज्यादा होगी। हमारे यहां कहा गया है कि- आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः। यानि अच्छे विचार जिस दिशा से भी आएं उनको ग्रहण करना चाहिए। भारत तो प्राचीन काल से knowledge का एक global center रहा है। 21वीं सदी में भी भारत को हम एक knowledge economy बनाने के लिए प्रयासरत हैं। नई शिक्षा नीति इस संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में बड़ा कदम है।

नई राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति ने brain drain को tackle करने के लिए और सामान्य से सामान्य परिवारों के युवाओं के लिए भी best international institutions के campus भारत में स्थापित करने का रास्ता खोला है। जब देश में ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर के top campus आएंगे तो पढ़ाई के लिए बाहर जाने की प्रवृत्ति भी कम होगी और हमारे अपने यूनिवर्सिटी, कॉलेज भी ज्यादा competitive हो पाएंगे। इसका एक और पहलू online education भी है, जिससे पढ़ाई-लिखाई के लिए local हो या international, हर प्रकार की सीमाएं समाप्त हो जाती हैं।

माननीय,

जब किसी भी सिस्टम में इतने व्यापक बदलाव होते हैं, जब एक नई व्यवस्था बनाने की तरफ हम बढ़ते हैं, तो कुछ शंकाएं-आशंकाएं स्वाभाविक ही हैं। माता-पिता को लगता होगा कि अगर इतनी आज़ादी बच्चों को मिलेगी, अगर stream खत्म हो जाएंगी तो आगे कॉलेज में उनको दाखिला कैसे मिलेगा, उनके बच्चों को करियर का क्या होगा? प्रोफेसर्स, टीचर्स के मन में सवाल होंगे कि वो खुद को इस बदलाव के लिए तैयार कैसे कर पाएंगे? इस प्रकार का पाठयक्रम कैसे मैनेज हो पाएगा?

आप सभी के पास भी अनेक सवाल होंगे, जिन पर आप चर्चा भी कर रहे हैं। ये सवाल implementation से जुड़े ज्यादा हैं। जैसे इसमें curriculum design कैसे हो पाएगा? स्थानीय भाषाओं में syllabus और content कैसे तैयार हो पाएगा? libraries को लेकर, डिजिटल और ऑनलाइन कंटेंट और पढ़ाई को लेकर जो बातें इसमें रखी गई हैं, उन पर कैसे काम होगा? कहीं साधन-संसाधन के अभाव में हम अपने लक्ष्यों से चूक तो नहीं जांएगे? administration को लेकर भी अनेक प्रकार के सवाल आप सभी के मन में स्वभाविक रूप से होंगे। ये सभी सवाल महत्वपूर्ण भी हैं।

हर सवाल के समाधान के लिए हम सब मिलकर काम कर रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय की तरफ से भी लगातार संवाद जारी है। राज्यों में भी हर स्टेकहोल्डर की पूरी बात, हर राय को, फीडबैक को, खुले मन से सुना जा रहा है। आखिर हम सभी को मिलकर ही तो तमाम शंकाओं और आशंकाओं का समाधान करना है। जिस प्रकार की flexibility का विजन लेकर ये policy आई है, उसी प्रकार maximum flexibility हम सभी को भी Implementation को लेकर भी दिखानी होगी।

ये शिक्षा नीति, सरकार की शिक्षा नीति नहीं है। ये देश की शिक्षा नीति है। जैसे विदेश नीति किसी सरकार की नहीं, देश की विदेश नीति होती है, रक्षा नीति किसी सरकार की नहीं, देश की रक्षा नीति होती है, वैसे ही शिक्षा नीति भी कौन सरकार है, किसकी सरकार है, कौन बैठा है, कौन नहीं बैठा है, उसके आधार पर नहीं चलती है, शिक्षा नीति देश की ही नीति है। और इसलिए 30 साल के बाद, इसमें कई सरकारें आईं क्‍योंकि ये सरकारों के बंधनों में बंधी हुई नहीं है, ये देश के aspiration से जुड़ी हुई है।

माननीय,

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में तेजी से बदलते हुए समय को देखते हुए, भविष्य को ध्यान में रखते हुए व्यापक प्रावधान किए गए हैं। जैसे-जैसे टेक्‍नोलॉजी का विस्तार गांव-गांव तक हो रहा है, देश के गरीब से गरीब को, हर वंचित, पिछड़े, आदिवासी तक आधुनिक टेक्‍नोलॉजी पहुंचती जा रही है, वैसे-वैसे information और knowledge तक उसका access भी बढ़ रहा है।

आज मैं देखता हूं कि video blogs के माध्यम से, video streaming sites पर अनेक युवा साथी ऐसे-ऐसे चैनल्स चला रहे हैं, हर विषय की ऐसी बेहतरीन कोचिंग उपलब्ध करा रहे हैं, जिसके बारे में पहले गरीब घर का बालक या बालिका सोच भी नहीं सकते थे। टेक्‍नोलॉजी तक होने वाली इस पहुंच से क्षेत्रीय और सामाजिक असंतुलन की एक बहुत बड़ी समस्या तेज़ी से कम होती जा रही है। हमारी जिम्मेदारी ये है कि हम हर यूनिवर्सिटी, हर कॉलेज में technological solutions को ज्यादा promote करें।

मान्‍यवर,

कोई भी system, उतना ही effective और inclusive हो सकता है, जितना बेहतर उसका गवर्नेंस मॉडल होता है। यही सोच education से जुड़ी गवर्नेंस को लेकर भी ये पॉलिसी रिफ्लेक्ट करती है। कोशिश ये की जा रही है कि higher education के हर पहलू, चाहे वो academic हो, technical हो, vocational हो, हर प्रकार की शिक्षा को silos से बाहर निकाला जाए। administrative layers को कम से कम रखा जाए, उनमें अधिक समन्वय हो, ये प्रयास भी इस पॉलिसी के माध्यम से किया गया है। higher education के regulation को भी इस पॉलिसी के जरिए, और simplify, और streamline किया जाएगा।

graded autonomy के concept के पीछे भी कोशिश यही है कि हर कॉलेज, हर यूनिवर्सिटी के बीच healthy competition को encourage किया जाए और जो संस्थान बेहतर perform करते हैं उनको Reward किया जाए। अब हम सभी का ये सामूहिक दायित्व है कि National Education Policy (NEP-2020) की इस भावना को हम letter and spirit में लागू कर सकें। मेरा आप सभी से विशेष आग्रह है कि 25 सितंबर से पहले अपने राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों की universities में ज्यादा से ज्यादा इस प्रकार के virtual conference आयोजित किए जाएं। प्रयास यही है कि National Education Policy को लेकर समझ निरंतर हम समझते चलें, हमारी समझ बेहतर हो सके, इसके लिए प्रयास हो। एक बार फिर आप सभी को अपना समय निकालने के लिए बहुत-बहुत आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

मैं आदरणीय राष्ट्रपति जी का पुन: आभार व्यक्त करता हूं। आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद !!!

 

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June 18, 2026

नमस्ते!

बों जू!

ऐसा लग रहा है, आप सब छुट्टी के मूड में हैं।

साथियों,

ये पेरिस शहर, Lights का शहर है, रंगों का शहर है, यहां Art है, Ideas हैं, और innovation की प्रेरणा भी है। इस शहर को भारत के अलग-अलग राज्यों से आए आप सभी लोग और भी खूबसूरत बना देते हैं। नए नए रंगों से भर देते हैं।

कोई तमिल है, कोई पंजाबी है, कोई गुजराती है, तो कोई मराठी है, और कोई बंगाली है। भारत के हर कोने का प्रतिनिधित्व यहां दिखाई देता है।

साथियों,

मैं जब 14 जून को नीस पहुंचा था तो सबसे पहले भारत इनोवेट्स कार्यक्रम में शामिल हुआ था। आज जब मैं फ्रांस से वापसी की तैयारी में हूं तो लग रहा है जैसे भारत कनेक्ट्स कार्यक्रम में आ गया हूं।

फ्रांस में रहने वाले आप लोगों ने 21वीं सदी के भारत-फ्रांस रिश्तों को जिस तरह कनेक्ट किया है, वो हमारी Strategic Partnership की बहुत बड़ी ताकत बन रही है। मैं आप सभी के लिए भारत से 140 करोड़ देशवासियों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं। इस आत्मीय स्वागत के लिए, मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

आज मैं ऐसे समय में फ्रांस आया हूं जब कुछ ही दिन पहले हमारी सरकार के 12 वर्ष पूरे हुए हैं। चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप निरंतर 12 साल तक देश की सेवा करना मेरे जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य रहा है। यह भारत के लोकतंत्र की शक्ति है जिसने एक चायवाले को यहां तक पहुंचा दिया।

साथियों,

बीते 12 वर्ष, 140 करोड़ भारतीयों के अद्भुत सामर्थ्य के रहे हैं। 12 साल के इस कालखंड में भारत का GDP दोगुना हुआ है। Airports की संख्या दोगुनी हुई है। Universities की संख्या भी दोगुनी हो गई है। Highway Construction की स्पीड तीन गुना बढ़ गई। और Metro Network, चार गुणा बड़ा हो गया है।

मैं आपको कुछ और फैक्ट्स दूंगा, उससे आप अंदाजा लगा पाएंगे कि भारत किस स्पीड और कितने बड़े स्केल पर काम कर रहा है। पिछले 12 वर्षों में भारत का Defence Export 35 गुणा यानि Thirty Five Times बढ़ गया है।

औऱ एक फैक्ट सुनिए भारत में मोबाइल मैन्यूफैक्टरिंग यूनिट्स में, 100 गुणा की बढ़ोतरी हुई है। 100 times. भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा mobile phone manufacturer है। इसी गति, इसी प्रगति का नतीजा है कि आज भारत दुनिया की Fastest Growing Major Economy है।

साथियों,

आज भारत की कहानी सिर्फ Economic Progress की कहानी नहीं है। सिर्फ यहाँ अटक नहीं जाती है। ये Social Transformation की भी कहानी है।

पिछले 12 साल में देश में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। यानि एक ऐसी प्रगति जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। फ्रांस में जितने घर हैं, उससे भी अधिक पक्के घर बीते 12 वर्ष में हमने जरूरतमंदों के लिए बनाए हैं।

अब हर परिवार के पास, गरीब से गरीब क्यों न हो, Bank Account है। Financial Inclusion एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का अभियान बना है।

साथियों,

इन 12 वर्षों की उपलब्धियों में, एक उपलब्धि ऐसी भी है जिसे किसी आंकड़े से, या अंकों से, नहीं मापा जा सकता। वह है 140 करोड़ भारतीयों का आत्मविश्वास।

आज का भारत और आज के भारत का युवा बहुत बड़े सपने देख रहा है। भारत का किसान नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत की महिलाएं नए नेतृत्व का परिचय दे रही हैं। इसलिए ये सिर्फ Achievements के 12 साल नहीं हैं, ये भारत की एस्पिरेशन्स को नई बुलंदी देने का कालखंड रहा है।

साथियों,

एक समय था जब दूर-दराज के गांवों तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचाना वाकई बहुत मुश्किल भरा था। आज उन्हीं गांवों में बिजली भी है, इंटरनेट भी है, और डिजिटल सेवाओं की पूरी दुनिया भी है। आज एक क्लिक पर, कभी भी, कहीं भी बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हैं।

आज मोबाइल फोन, भारत के नागरिकों को अनेक सुविधाओं से कनेक्ट कर रहा है। हमारे किसान, हमारे मछुआरे, हमारे dairy farmers, हमारी महिलाएं, हमारे स्टूडेंट्स, सभी टेक्नोलॉजी के माध्यम से सशक्त हो रहे हैं, और अपने लिए नए अवसर बना रहे हैं।

साथियों,

आपने 125 करोड़ से अधिक Aadhaar IDs के बारे में सुना है। लेकिन आज भारत सिर्फ पहचान को डिजिटल नहीं बना रहा। आज करीब 90 करोड़ भारतीयों की Unique Digital Health IDs बनाई जा चुकी हैं। जिससे मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित और accessible बन गए हैं। इससे हेल्थकेयर डिलीवरी और अधिक आसान और efficient हो रही है।

साथियों,

इन उपलब्धियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें से अधिकांश चीजें कुछ वर्ष पहले तक कल्पना जैसी लगती थीं। कौन सोच सकता था कि गांव-गांव तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचेगा ? कौन सोच सकता था कि दूर-सुदूर के गांवों में भी QR code जीवन का हिस्सा बन जायेगा ? गांव में कोई बहन, ड्रोन से खेती करने में मदद करेगी, ये भी असंभव लगता था।

लेकिन आज यह सब, भारत के करोड़ों लोगों के जीवन का सामान्य हिस्सा बनता जा रहा है। और आपको गर्व होगा साथियों, यही नए भारत की पहचान है।

जो कभी सपना था, वह आज सच्चाई है। जो कभी नामुमकिन लगता था, वो आज मुमकिन हुआ है, औऱ ये करने के पीछे सबसे बड़ी ताकत क्या है? किसकी वजह से ये सब संभव हुआ है? यह मोदी के कारण नहीं, वो ताकत है- भारत का लोकतंत्र, भारत की डेमोक्रेसी। इस डेमोक्रेसी में सबका साथ है, सबका विकास है।

साथियों,

आज से 50 या 100 साल बाद जब भारत के इस कालखंड की समीक्षा होगी, तो ये बात उभरकर सामने आएगी कि इस कालखंड को भारत की Aspirations ने ड्राइव किया। यह भारत के एस्पिरेशन्स का नया युग है।

जहां बिजली पहुंची है, वहां लोग सिर्फ बिजली नहीं चाहते, वे Smart Living चाहते हैं। जहां ट्रेन पहुंची है, वहां लोग High-Speed Connectivity चाहते हैं। जहां हाईवे बने हैं, वहां लोग World-Class Expressways चाहते हैं। जहां इंटरनेट पहुंचा है, वहां लोग AI और Digital Innovation में नेतृत्व चाहते हैं।

यानि आज भारत के लोग अपने जीवन को भी Next Level पर ले जाना चाहते हैं, और भारत को भी Next Level पर ले जाना उनका मकसद है, उनका संकल्प है, उनके सपने है।

और साथियों,

यही Aspirations आज भारत की विकास यात्रा की सबसे बड़ी शक्ति हैं। मैं आपको भारत की Space Journey का उदाहरण दूंगा।

भारत ने चंद्रयान को चंद्रमा के South Pole पर उतारा। दुनिया ने इसे एक बहुत बड़ी उपलब्धि माना। लेकिन भारत इसे अपनी मंजिल मानकर रुका नहीं। आज देश गगनयान की तैयारी कर रहा है। भारत अंतरिक्ष में अपना Space Station बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

हमारे Space Startups Global Space Economy में अपनी जगह बनाने के लिए पुरजोश काम कर रहे हैं, आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

Green Energy के क्षेत्र में भी भारत की यही एस्पिरेशंस दिखाई देती है। Solar Power में भारत की उपलब्धियों की दुनिया भर में लगातार चर्चा हो रही हैं। लेकिन भारत अगली छलांग की तैयारी कर रहा है।

Green Hydrogen में बड़े निवेश हो रहे हैं। Advanced Nuclear Energy पर तेजी से काम हो रहा है। आपने भारत के Fast Breeder nuclear Reactor से जुड़ी प्रोग्रेस के बारे में भी सुना ज़रूर होगा। ये भारत के न्यूक्लियर एनर्जी लैंडस्केप में क्रांतिकारी परिवर्तन करने का बहुत बड़ा अचीवमेंट हमारे सीसेन्टिस्टों ने किया है।

साथियों,

आज का भारत भविष्य का पूरा Ecosystem बना रहा है। भारत एक साथ हर उस क्षेत्र में निवेश कर रहा है, जो आने वाले दशकों की दिशा तय करेगा।

अभी आपने कुछ दिन पहले ही देखा है नीस में भारत इनोवेट्स का एक आयोजन किया। ये इवेंट भारत के डीप टेक सामर्थ्य को दुनिया तक पहुंचाने का एक और माध्यम था। इसमें भारत के 120 Deep-Tech Startups उपस्थित थे। Bharat Innovates में करीब एक हजार चार सौ B2B Meetings हुईं है। कई Startups के लिए Investment Commitments आगे बढ़ीं, Commercial Orders के लिए रास्ते खुले। French और European Universities तथा Incubators के साथ Engagements बढ़ रही हैं।

Student Exchanges, Joint Research, और Innovation Support के नए रास्ते बने। इसलिए Bharat Innovates सिर्फ एक Summit नहीं रहा। यह Innovation Diplomacy का एक नया मॉडल बना है।

और आज ही पेरिस में VivaTech इवेंट के जरिए, इस यात्रा को हमने और आगे बढ़ाया। नीस में हमने Ideas को Capital से जोड़ा और पेरिस में Indian Innovation को Global Scale से जोड़ा। आज दुनिया देख रही है भारत केवल भविष्य के लिए तैयार नहीं हो रहा है। भारत भविष्य को आकार दे रहा है।

साथियों,

एक समय था, जब देशों के बीच रिश्ते केवल व्यापार से तय होते थे। आज व्यापार के साथ-साथ Trust यानि भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।

हर देश Reliable Supply Chains चाहता है। हर देश Stable Partnerships चाहता है। हर देश ऐसे साथियों की तलाश में है, जिन पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके। और ऐसे समय में, भारत विश्व में एक Trusted Partner के रूप में उभर रहा है।

एवियां में G7 बैठक के दौरान मैंने trust based partnerships बनाने पर ज़ोर दिया। ग्लोबल साउथ के देशों के साथ equal पार्टनर्स के रूप में आगे बढ़ने का आह्वान किया। भारत का G7 समिट में संदेश था Global Governance तभी प्रभावी होगी जब वह Inclusive होगी। Global Growth तभी Sustainable होगी जब वह शेयर्ड होगी। और Global Technology तभी मानवता के लिए उपयोगी होगी जब वह Trusted होगी।

साथियों,

भारत और दुनिया के बीच व्यापारिक रिश्तों में नई ऊर्जा नज़र आ रही है। फ्रांस के साथ भारत का ट्रेड लगतार बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दुनिया के अनेक देशों के साथ Free Trade Agreements किए हैं। यूरोपियन यूनियन हो, यूनाइटेड किंगडम हो दुनिया के हर देश, हर रीजन के साथ भारत समझौते कर रहा है।

अगले महीने से भारत और UK के बीच ट्रेड एग्रीमेंट भी लागू हो जाएगा। यह एग्रीमेंट भारत के farmers, workers और innovators को अनेक नए अवसर प्रदान करेगा।

साथियों,

आज दुनिया Uncertainty और Disruption के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत और फ्रांस की साझेदारी विश्वास, स्थिरता और सहयोग का एक मजबूत स्तंभ बन रहा है।

इस वर्ष हमने भारत और फ्रांस के संबंधों को Special Global Strategic Partnership का दर्जा दिया था। नीस में मेरे मित्र President Macron और मैंने हमारे संबंधों को force for global good बनाने पर चर्चा की। Defence से लेकर space और नुक्लियर तक AI और क्रिटीकल मिनरल्स से लेकर high speed railway तक, हर क्षेत्र में हम मिलकर आगे बढ़ेंगे।

साथियों,

Solar energy हो, या AI के क्षेत्र में सहयोग हो, भारत और फ्रांस मिलकर ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं जो पूरी मानवता के हित में हैं। पिछले वर्ष पेरिस में और इस वर्ष दिल्ली में हमने AI Summit को Co-chair किया।

अब हम साथ मिलकर अगले वर्ष “तृष्णा” satellite को लॉन्च करने जा रहें हैं। यह “तृष्णा” satellite जो विश्व में फूड और वाटर सिक्युरिटी सुनिश्चित करने में योगदान देगा।

और साथियों,

यह सभी गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट पहलो में आप सभी का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। ये आप हैं जो भारत और यूरोप के बीच सबसे मजबूत सेतु हैं। आप दोनों समाजों को समझते हैं। दोनों बाजारों को समझते हैं। आने वाले समय में Talent, Trade, Technology, Tourism और Investment के नए अवसरों को आगे बढ़ाने में आपकी भूमिका लगातार बढ़ने वाली हैं।

साथियों,

भारत और फ्रांस के रिश्तों को साझा इतिहास, साझा मूल्यों और साझा विश्वास ने आगे बढ़ाया है। विश्व युद्धों के दौरान फ्रांस की धरती पर बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों की स्मृतियां आज भी हमें जोड़ती हैं।

मुझे पहले नव शापेल में श्रद्धांजलि देने का अवसर मिला, पिछले वर्ष प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मार्सेय के वॉर मेमोरियल जाने का अवसर भी मिला। ये हमारी साझा विरासत है।

फ्रांस, भारतीयों के योगदान को संजोता भी है और सराहता भी है। भारतीय मूल की नूर इनायत खान हों, जिन्होंने फ्रांस की Resistance के लिए अपना जीवन बलिदान किया, या महाराजा रणजीत सिंह के साथ काम करने वाले जनरल जां फ्रांस्वा अलार हों ये सभी भारत और फ्रांस की साझा विरासत के प्रतीक हैं।

भारत के राज्य पुडुचेरी में भी फ्रेंच विरासत की झलक दिखाई देती है। वहां का Architecture, वहां की कला-संस्कृति और खान-पान सभी में हमारे संबंधों की महेक है।

साथियों,

इस समय फ्रांस समेत पूरी दुनिया में International Yoga Day की तैयारी भी चल रही है। इस अवसर पर मैं, फ्रांस में योग को आगे बढ़ाने वाले श्रीमान महेश घाट्राड्याल जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धांजलि देता हूं। मैं पद्म पुरस्कार से सम्मानित, शार्लोत शोपां जी को भी प्रणाम करता हूं। जिन्होंने सौ वर्ष की आयु में भी, योग के माध्यम से फ़्रांस को भारत की विरासत से जोड़ा है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है: Yoga does not add years to life, it adds life to years.

साथियों,

मैं फ्रेद नेग्री जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धापूर्वक याद करता हूं। भारतीय विरासत को संरक्षित करने में उनका योगदान अतुल्य रहा है।

साथियों,

भारत और फ्रांस को कनेक्ट करने वाली एक और चीज है, और वो है फुटबॉल। इस वक्त यहां फुटबॉल फीवर पूरे जोर पर है। फ्रांस में इसकी दीवानगी, चप्पे-चप्पे पर दिखती है। लेकिन भारत में भी फुटबॉल का क्रेज़ सिर चढ़कर बोलता है।

खासतौर पर फ्रांस की टीम के फैन्स भारत में बहुत अधिक हैं। फ़्रांस ने इस वर्ल्ड कप की शुरुआत एक जोरदार जीत से शुरू की है। मैं फ्रांस की टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

जाने से पहले, आप सभी के लिए कुछ और अच्छी खबरें भी लेकर के आया हूँ। वो आपके लिए हैं। पिछले वर्ष, मार्सेय में कॉन्सुलेट खोला गया, इससे काफी अधिक सुविधा मिल रही है। कुछ हफ्ते पहले, Indian Nationals के लिए French Airports पर Visa-free Transit की व्यवस्था शुरू हो गई है।

Students और Professionals की Mobility बढ़ाना हो, या Educational Qualifications की Mutual Recognition की बात हो, या फिर French Universities के भारत में Campus खोलना हो, इन सभी पर हम मिलकर आगे बढ़ रहें हैं।

अब फ्रांस में UPI के उपयोग का दायरा भी और बढ़ने जा रहा है। यानि भारत-फ्रांस कनेक्ट भी Instant और आपसी Payment भी Instant!

साथियों,

इन सभी पहलों से, हम भारत और फ़्रांस को और करीब ला रहें हैं। और मैं फिर कहूंगा इस साझेदारी की नींव, इस रिश्ते की असली ताकत आप सभी हैं। आप सब मेरे देशवासी हैं।

आज जब भारत तेज़ी से विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तो मैं आप सभी से भारत के साथ और गहराई से जुडने का आग्रह करूंगा। इससे भारत की विकास यात्रा को नई शक्ति मिलेगी, और आपको अपनी पुरखों की धरती की सेवा करने का अवसर भी मिलेगा।

इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी के प्रेम आपके उत्साह और इस आत्मीय स्वागत के लिए मैं एक बार फिर आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं।

भारत माता की जय!

बहुत बहुत धन्यवाद।