"बेंगलुरु भारत की स्टार्टअप भावना का प्रतिनिधित्व करता है और यही वो भावना है जो हमारे देश को दुनिया के बाकी हिस्सों से अलग करती है"
"वंदे भारत एक्सप्रेस इस बात का प्रतीक है कि भारत ने अब जड़ता के दिनों को पीछे छोड़ दिया है"
"हवाई अड्डे अब व्यवसायों के विस्तार के लिए नए अवसर उपलब्ध करा रहे हैं, साथ ही देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहे हैं"
“भारत ने डिजिटल भुगतान प्रणाली में जो प्रगति की है, उसकी प्रशंसा सारी दुनिया कर रही है”
"कर्नाटक देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करने में अग्रणी है"
"चाहे गवर्नेंस हो या फिजिकल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, भारत एक अलग ही स्तर पर कार्य कर रहा है"
"पहले स्पीड को लग्जरी और स्केल को रिस्क माना जाता था"
"हमारी विरासत सांस्कृतिक होने के साथ-साथ आध्यात्मिक भी है"
"बेंगलुरु का विकास नाडप्रभु केम्पेगौडा की कल्पना के अनुसार किया जाना चाहिए"

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

 

कर्नाटकदा समस्थ जनतगे,

नन्ना कोटि-कोटि नमस्कारगलु!

 

मंच पर विराजमान पूज्य स्वामी जी, कर्नाटका के गवर्नर श्री थावरचंद गहलोत जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री बसवराज बोम्मई जी, पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमान येदियुरप्पा जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगीगण, राज्य सरकार के मंत्री, सांसदगण, विधायकगण, अन्य सभी महानुभाव और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

ये मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे बेंगलुरू में एक बहुत विशेष दिन पर आने का अवसर मिला है। आज कर्नाटका की, देश की 2 महान संतानों की जन्मजयंति है। संत कनकदास जी ने हमारे समाज को मार्गदर्शन दिया, तो ओनके ओबव्वा जी ने हमारे गौरव, हमारी संस्कृति की सुरक्षा के लिए योगदान किया। मैं इन दोनों विभूतियों को पुन: एक बार नमन करता हूं।

साथियों,

आज इन महान विभूतियों को सम्मान देते हुए हम बेंगलुरू के, कर्नाटका के विकास और विरासत दोनों को सशक्त कर रहे हैं। आज कर्नाटका को पहली मेड इन इंडिया वंदे भारत ट्रेन मिली। ये ट्रेन चेन्नई, देश की स्टार्ट-अप कैपिटल बेंगलुरू और धरोहरों के शहर मैसुरू को आपस में जोड़ती है। कर्नाटका के लोगों को अयोध्या, प्रयागराज और काशी के दर्शन कराने वाली भारत गौरव काशी दर्शन ट्रेन की भी आज शुरुआत हुई है। आज केंपेगौडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के दूसरे टर्मिनल का भी उद्घाटन हुआ है। मैंने सोशल मीडिया पर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल की कुछ तस्वीरें पोस्ट की थीं। और आज वहां जाकर लगा कि नया टर्मिनल, तस्वीरों में जितना सुदंर दिख रहा है, उससे भी ज्यादा भव्य है, आधुनिक है। ये बेंगलुरू के लोगों की बहुत पुरानी मांग थी जो अब हमारी सरकार पूरा कर रही हैं।

साथियों,

मुझे नाडप्रभु केम्पेगौडा जी की 108 फीट की प्रतिमा के अनावरण और उनके जलाभिषेक का भी अवसर मिला। नाडप्रभु केम्पेगौडा की ये विशाल प्रतिमा, हमें भविष्य के बेंगलुरू, भविष्य के भारत के लिए निरंतर, समर्पित भाव से मेहनत करने की प्रेरणा देगी।

भाइयों और बहनों,

ये मेरा सौभाग्य है कि आज पूज्य स्वामी जी ने जिस प्रकार से आशीर्वाद दिये, जिस प्रकार से भावना प्रकट की मैं ह्दय से उनका आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

आज पूरी दुनिया में भारत की पहचान स्टार्ट अप्स के लिए है। और भारत की इस पहचान को सशक्त करने में बहुत बड़ी भूमिका हमारे बेंगलुरू की है। स्टार्ट अप्स सिर्फ एक कंपनी भर नहीं होता। स्टार्ट अप एक जज्बा होता है। कुछ नया करने का जज्बा, कुछ हटकर के सोचने का जज्बा। स्टार्ट अप एक विश्वास होता है, हर उस चुनौती के समाधान का, जो देश के सामने है। इसलिए बेंगलुरु एक स्टार्ट अप स्पिरिट का प्रतिनिधित्व करता है। यही स्टार्ट अप स्पिरिट आज दुनिया में भारत को एक अलग लीग में खड़ा करती है।

भाइयों और बहनों,

आज यहां जो कार्यक्रम हो रहा है, ये भी बेंगलुरू की इसी युवा स्पिरिट का प्रतिबिंब है। आज शुरू हुई वंदे भारत एक्सप्रेस भी सिर्फ एक नई ट्रेन नहीं है, बल्कि ये नए भारत की नई पहचान है। 21वीं सदी में भारत की रेलवे कैसी होगी, ये उसकी झलक है। वंदे भारत एक्सप्रेस, इस बात का प्रतीक है कि भारत अब रुक-रुक चलने वाले दिनों को पीछे छोड़ चुका है। भारत अब तेज दौड़ना चाहता है और इसके लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।

साथियों,

आने वाले 8-10 सालों में हम भारतीय रेल के कायाकल्प का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। 400 से ज्यादा नई वंदे भारत ट्रेनें, विस्टा डोम कोचेस, भारतीय रेलवे की नई पहचान बनने वाले हैं। मालगाड़ियों के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, ट्रांसपोर्टेशन की गति बढ़ाएंगे और समय भी बचाएंगे। तेजी से हो रहा ब्रॉडगेज परिवर्तन का काम, नए-नए क्षेत्रों को रेलवे के मैप पर लेकर आ रहा है। और इन सबके बीच, आज देश अपने रेलवे स्टेशनों को भी आधुनिक बना रहा हैं। आज आप बेंगलुरू के ‘सर एम विश्वेश्वरैया जी’ के रेलवे स्टेशन जाते हैं तो एक अलग ही दुनिया का अनुभव होता है। हमारा लक्ष्य देश के बड़े रेलवे स्टेशनों को इसी प्रकार आधुनिक बनाने का है। इसी सोच के साथ यहां कर्नाटका में भी बेंगलुरू कैंटोनमेंट, यशवंतपुर, रेलवे स्टेशनों का भी कायाकल्प किया जा रहा है।

साथियों,

विकसित भारत के निर्माण में हमारे शहरों के बीच कनेक्टिविटी की भी बड़ी भूमिका होगी। देश में एयर कनेक्टिविटी का ज्यादा से ज्यादा विस्तार हो, हमारे एयरपोर्ट्स का विस्तार हो, ये आज समय की मांग है। बेंगलुरू एयरपोर्ट का नया टर्मिनल, इसका उपयोग करने वाले पैसेंजर्स के लिए नई सुविधा लेकर आएगा। आज भारत दुनिया में एयर ट्रैवल के सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले मार्केट में से एक है। जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है, उसी तरह एयरपोर्ट्स पर पैसेंजर्स की संख्या भी बढ़ रही है। इसलिए हमारी सरकार देश में नए एयरपोर्ट्स का भी निर्माण करा रही है। 2014 से पहले देश में 70 के आसपास एयरपोर्ट्स थे। अब इनकी संख्या 140 से ज्यादा हो गई हैं डबल। बढ़ते हुए ये एयरपोर्ट्स, हमारे शहरों का बिजनेस पोटेंशियल बढ़ा रहे हैं, नौजवानों के लिए नए अवसर भी बना रहे हैं।

साथियों,

आज पूरी दुनिया में भारत में निवेश के लिए जो अभूतपूर्व विश्वास बना है, उसका बहुत बड़ा लाभ कर्नाटका को भी मिल रहा है। आप कल्पना कीजिए, बीते 3 वर्ष जब पूरी दुनिया कोविड से प्रभावित रही, तब कर्नाटका में लगभग 4 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ। पिछले वर्ष FDI को आकर्षित करने में कर्नाटका देश में अग्रणी रहा है। और ये जो निवेश हो रहा है, ये सिर्फ आईटी सेक्टर तक सीमित नहीं है। बल्कि बायोटेक्नॉलॉजी से लेकर डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग तक, हर सेक्टर का यहां विस्तार हो रहा है। देश में एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट इंडस्ट्री में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी ये हमारे कर्नाटका की है। देश की सेना के लिए जो एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर हम बना रहे हैं, उसमें से लगभग 70 प्रतिशत यहीं बनते हैं। देश में इलेक्ट्रिक वेहिकल मैन्युफेक्चरिंग में भी कर्नाटका बहुत आगे है। आज फॉर्च्यून 500 कंपनियों में से 400 से अधिक कंपनियां कर्नाटका में काम कर रही हैं। और ये लिस्ट लगातार बढ़ रही है। ये सबकुछ इसलिए हो रहा है क्योंकि आज कर्नाटका डबल इंजन की ताकत से चल रहा है।

भाइयों और बहनों,

आज बात चाहे गवर्नेंस की हो या फिर फिज़िकल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की, भारत एक अलग ही लेवल पर काम कर रहा है। आज पूरी दुनिया हैरान होती है, जब भारत के डिजिटल पेमेंट BHIM UPI के बारे में सुनती है। क्या 8 वर्ष पहले ये कल्पना करना भी संभव था? मेड इन इंडिया 5G टेक्नॉलॉजी, क्या ये सोचा भी जा सकता था? इन सबमें बेंगलुरू के युवाओं की, यहां के प्रोफेशनल्स की बहुत बड़ी भूमिका है। 2014 से पहले के भारत में ये चीजें कल्पना से परे थीं। इसका कारण ये है कि तब जो सरकारें थी, उनकी सोच ही पुरानी थी। पहले की सरकारें, स्पीड को लग्जरी, तो स्केल को रिस्क मानती थी। हमने ये धारणा बदल दी है। हम स्पीड को भारत की आकांक्षा मानते हैं और स्केल को भारत की ताकत। इसलिए, आज भारत पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रहा है। हम सभी साक्षी हैं कि कैसे अतीत में इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में सबसे बड़ी समस्या तालमेल की रहती थी। जितने ज्यादा विभाग, जितनी ज्यादा एजेंसियां, उतनी ही देरी निर्माण में होती थी। इसलिए हमने तय किया कि सबको एक प्लेटफॉर्म पर लाया जाए। आज पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत 1500 से ज्यादा लेयर्स में डेटा विभिन्न एजेंसियों को सीधे उपलब्ध हो रहा है। आज केंद्र और राज्य सरकारों के दर्जनों मंत्रालय, दर्जनों विभाग इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। आज देश नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन के तहत इंफ्रा पर लगभग 110 लाख करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य लेकर चल रहा है। देश में ट्रांसपोर्ट के हर माध्यम एक दूसरे से जुड़ें, एक दूसरे को सपोर्ट करें, इसके लिए देश का बल, पूरी ताकत मल्टीमोडल इंफ्रास्ट्रक्चर पर है। कुछ समय पहले ही देश ने नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी भी लॉन्च की है। ये पॉलिसी, देश में ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम करने, ट्रांसपोर्टेशन को इनोवेटिव बनाने में मदद करेगी।

साथियों,

भारत को विकसित बनाने के लिए फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही देश के सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर का भी मजबूत होना उतना ही आवश्यक है। मुझे खुशी है कि कर्नाटका की डबल इंजन सरकार, सोशल इंफ्रा पर भी उतना ही ध्यान दे रही है। बीते आठ वर्षों में देश में गरीबों के लिए साढ़े तीन करोड़ घर बनाए गए हैं। यहां कर्नाटका में भी गरीबों के लिए 8 लाख से ज्यादा पक्के घरों को स्वीकृति दी गई है। ‘जल जीवन मिशन’ के तहत सिर्फ तीन वर्षों में ही देश में 7 करोड़ से अधिक घरों में पाइप से पानी की सुविधा पहुंचाई गई है। कर्नाटका के भी 30 लाख से ज्यादा ग्रामीण परिवारों तक पहली बार पाइप से पानी पहुंचा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत देश के 4 करोड़ गरीबों को अस्पताल में मुफ्त इलाज मिला है। कर्नाटका के भी 30 लाख से अधिक गरीब मरीज़ों ने ये योजना का लाभ लिया है। मुझे खुशी है कि इन सुविधाओं की सबसे अधिक लाभार्थी हमारी माताऐं हैं, हमारी बहनें हैं, हमारी बेटियां हैं।

भाइयों और बहनों,

आज देश में छोटे किसान हों, छोटे व्यापारी हों, फिशरमैन हों, रेहड़ी-पटरी-ठेले वाले हों, ऐसे करोड़ों लोग पहली बार देश के विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ के तहत देश के 10 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में लगभग सवा 2 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए हैं। कर्नाटका के भी 55 लाख से ज्यादा छोटे किसानों को लगभग 11 हज़ार करोड़ रुपए मिल चुके हैं। पीएम स्वनिधि के तहत देश के 40 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी-ठेले वाले भाई-बहनों को आर्थिक मदद मिली है। इसका लाभ कर्नाटका के भी 2 लाख से ज्यादा स्ट्रीट वेंडर्स को हुआ है।

साथियों,

इस बार 15 अगस्त को लाल किले से मैंने अपने देश की विरासत पर गर्व की बात कही थी। हमारी ये विरासत सांस्कृतिक भी है, अध्यात्मिक भी है। आज भारत गौरव रेल देश के आस्था और अध्यात्म के स्थलों को जोड़ने के साथ ही ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को भी मजबूत कर रही है। इस वर्ष अब तक देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए इस ट्रेन की 9 यात्राएं पूरी हो चुकी हैं। शिरडी मंदिर हो, श्री रामायण यात्रा हो, दिव्य काशी यात्रा हो, ऐसी सभी ट्रेनों का यात्रियों को बहुत सुखद अनुभव रहा। आज कर्नाटका से काशी, अयोध्या और प्रयागराज के लिए यात्रा शुरु हुई है। इससे कर्नाटका के लोगों को काशी अयोध्या के दर्शन करने में मदद मिलेगी।

भाइयों और बहनों,

भगवत-भक्ति और सामाजिक-शक्ति से कैसे समाज को जोड़ा जा सकता है, इसकी प्रेरणा हमें संत कनकदास जी से भी मिलती है। एक तरफ उन्होंने कृष्ण-भक्ति का रास्ता चुना, और दूसरी तरफ ‘कुल-कुल-कुल वेंदु होडेदाड़दिरी’, कहकर उन्होंने जाति के आधार पर भेदभाव को खत्म करने का संदेश दिया। आज पूरी दुनिया में millets यानि मोटे अनाज के महत्व को लेकर के चर्चा हो रही है। संत कनकदास जी ने उस दौर में ही millets का महत्व स्थापित कर दिया था। उनकी रचना थी - राम धान्य चरिते। उन्होंने कर्नाटका में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले millet रागी का उदाहरण देते हुए सामाजिक समानता का संदेश दिया था।

भाइयों और बहनों,

आज हमारा प्रयास है कि बेंगलुरू शहर का विकास वैसे ही हो जैसे, नाडप्रभु केम्पेगौडा जी ने कल्पना की थी। इस शहर की बसावट, यहां के लोगों को केम्पेगौडा जी की महान देन है। इस बसावट में उन्होंने जिन बारीकियों का ख्याल रखा है, वो अद्भुत है, अद्वितीय है। सदियों पहले उन्होंने बेंगलुरू के लोगों के लिए commerce, culture और convenience की योजना तैयार कर दी थी। उनकी दूरदृष्टि का फायदा आज भी बेंगलुरू के लोगों को मिल रहा है। आज व्यापार-कारोबार उसके रूप-रंग भले ही बदल गये हो, लेकिन ‘पेटे’ आज भी बेंगलुरू की commercial lifeline बना हुआ है। नाडप्रभु केम्पेगौडा जी का बेंगलुरू की संस्कृति को भी समृद्ध करने में अहम योगदान है। यहां का मशहूर गवि-गंगाधरेश्वर मंदिर हो या बसवनगुडी इलाके के मंदिर। इनके जरिए केम्पेगौडा जी ने बेंगलुरू की सांस्कृतिक चेतना को हमेशा के लिए जीवंत बना दिया। बेंगलुरू शहर के लोग इस शहर की ऐसी बेमिसाल बसावट के लिए केम्पेगौडा जी के हमेशा आभारी रहेंगे।

साथियों,

बेंगलुरू अंतर्राष्ट्रीय शहर है। इसे हमें अपनी विरासत को संवारते हुए, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से समृद्ध करना है। ये सबका प्रयास से ही संभव है। एक बार फिर आप सभी को नए प्रोजेक्ट्स के लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं। पूज्य संतगण ने आकर के आशीर्वाद दिये मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं और इतनी बड़ी तादाद में उमंग और उत्साह से भरे हुए कर्नाटका के नौजवान, कर्नाटक की माताऐं, बहनें, यहां का किसान हमें आशीर्वाद दे रहे हैं। मैं ह्दय से आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

धन्यवाद !

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June 20, 2026
I extend my heartfelt birthday greetings to President Smt. Droupadi Murmu Ji, I wish her long life and excellent health: PM
Pahadpur village will now be rapidly developed as a solar village, that is, solar power will be ensured in every home here: PM
The vision of the Central Government is the development of India through the development of Eastern India: PM
To uplift tribal society, we are connecting tribal youth with opportunities for education and employment: PM
These children should get better facilities for studies; for this, around 500 Eklavya Model Schools have been opened across the country: PM

जॉय जगन्नाथ! जॉय मां किचकेश्वरी! मोर सबू भाई,भौणी,मां,मौसी मानंकु मोर नमोस्कार।

माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, राज्यपाल श्री हरि बाबु जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जी, उप मुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव जी, प्रवती परीदा जी, ओडिशा के मंत्री गणेश सिंह खूंटिया जी, कृष्ण चंद्र महापात्र जी, सांसद नबा चरण माझी जी, मनमोहन सामल जी, बैजयंत पांडा जी, अन्य महानुभाव, भाइयों और बहनों।

हमारा ओडिशा इन दिनों उत्सवों के आनंद में डूबा हुआ है। यहाँ का गणपर्व रज, पिछले हफ्ते ही धूमधाम से मनाया गया है। महाप्रभु जगन्नाथ जी की रथ यात्रा की तैयारियां भी पुरजोश चल रही है। मयूरभंज के बारीपदा रथ यात्रा को लेकर भी उत्साह का माहौल है। और, इस सबके बीच ही लोकतन्त्र का विकास का उत्सव भी चल रहा है। ओडिशा की बीजेपी सरकार ने अपने 2 साल भी पूर्ण किए हैं। इस मौके पर, आप सबके बीच आना, मयूरभंज आने का ये सौभाग्य, और इतनी बड़ी संख्या में आप सबकी उपस्थिति, ये अवसर मेरे लिए बहुत खास है। आपका अपनापन मुझे बार-बार यहां खींच लाता है। मैं आप सभी का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूँ। और ओडिशा की जनता को डबल इंजन सरकार में विकास यात्रा की भी बधाई देता हूँ, शुभकामनाएं देता हूं। साथ ही, इस अवसर पर मैं पंडित रघुनाथ मुर्मू जी, डॉ. दमयंती बेश्रा जी, और श्री चरण हेम्ब्रम जी जैसी विभूतियों को भी नमन करता हूँ। रघुनाथ मुर्मू जी ने संथाली भाषा के लिए ओल चिकी लिपि का निर्माण किया था। हमारी सरकार ने संथाली भाषा में भारत के संविधान को प्रस्तुत किया है। ओडिशा की संतानों को पद्म सम्मान देकर सम्मानित किया है। पिछले 2 वर्षों में ओडिशा सरकार भी इन सभी विभूतियों के सपनों को पूरा करने में दिन रात पुरुषार्थ कर रही है।

साथियों,

आज का ये अवसर इसलिए भी विशेष है, क्योंकि मयूरभंज की धरती पर पली-बढ़ीं, ओडिशा की बेटी, माननीय राष्ट्रपति जी हमारे बीच उपस्थित हैं। आज उनका जन्मदिन भी है। मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकमानाएं देता हूं, मैं उनके दीर्घायु होने और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। जनगन्नाथ जी भगवान के श्री चरणों में प्रार्थना करता हूं। ओडिशा की बेटी आज देश के इतने बड़े पद पर पहुंची हैं, हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं, ये हम सभी के लिए बहुत गौरव की बात है। राष्ट्रपति जी का व्यक्तित्व, उनका उदार और सहृदय स्वभाव, राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए उनका अटल समर्पण, उन्होंने मयूरभंज ही नहीं, पूरे ओडिशा की पहचान सशस्त की है। मैं इस अवसर पर, उनका विशेष रूप से अभिनंदन करता हूँ।

साथियों,

ये कार्यक्रम जब बना, तो इसमें मूल कारण तो लॉजिस्टिक था, लंबे अर्से से यहां आने के लिए चर्चा चल रही थी, लेकिन कोई तालमेल नहीं बैठता था। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस कोलकाता में तय हुआ, तो फिर मैंने कहा अच्छा है, आज बंग दिवस भी है, तो क्यों न मैं सुबह मयूरभंज होकर के शाम को फिर कोलकाता के कार्यक्रम में जाऊं। और इसके कारण ये 20 जून तय हुई। लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिसकी मंगल कामनाएं ईश्वरआधीन होती हैं, और इसलिए आज एक शुभ मंगल हो गया, कि राष्ट्रपति का जन्मदिन भी, मुझे आज उनके गांव में जाकर के, उनको शुभकामनाएं देने का अवसर मिला।

साथियों,

आज मैं राष्ट्रपति जी के साथ पहाड़पुर भी गया था। मैं इस क्षेत्र के बच्चों के लिए उनके द्वारा बनवाए गए स्कूल भी गया। बच्चों के साथ कुछ यादगार समय बिताने का अवसर मुझे मिला। मैं देख रहा था, बच्चों के चेहरों की चमक, राष्ट्रपति जी की उपस्थिति और आत्मीयता, वहां मुझे ऐसा कुछ भी नहीं लगा, किसी बच्चे को ये लगा हो कि राष्ट्रपति जी आई हैं, हर बच्चे को लगता था उनकी मां आई है। वे बच्चे भी बहुत भाग्यवान हैं, कैसे इस क्षेत्र के गरीब, वंचित और आदिवसी समाज के बच्चों को प्रेरणा मिल रही है, उन्हें देश के लिए कुछ बड़ा करने का आत्मविश्वास मिल रहा है। मैं राष्ट्रपति जी का आभारी हूं कि उन्होंने इन अनुभवों से गुजरने का आज मुझे अवसर दिया। ये मेरा दिन, एक प्रकार से मेरी शिक्षा का दिवस था, कुछ सीखने का अवसर था मेरे लिए।

साथियों,

मैं आपको सरकार का ये निर्णय भी बताना चाहता हूं कि पहाड़पुर गांव को, अब तेजी से सुर्यग्राम, सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। यानी यहां हर घर में सोलर बिजली बने, इसे सुनिश्चित किया जाएगा। और हम तो बड़ा गर्व के साथ कह सकते हैं कि यही ओडिशा है, जहां कोणार्क में सुर्य मंदिर की एक पहचान है, वैसे ही पहाड़पुर सुर्यग्राम की पहचान बन जाएगा। सुर्यग्राम, से पूरा गांव सोलर विलेज के रूप में पहचाना जाए, इस दिशा में काम तुरंत शुरू हो ऐसा मेरा प्रयास रहेगा। इस अभियान से, पहाड़पुर के लोगों को मुफ्त सोलर बिजली भी मिलेगी और जो ज्यादा बिजली होगी, वो उनकी आय भी बढ़ाएगी।

साथियों,

ओडिशा में डबल इंजन सरकार के 2 साल कई मायनों में ऐतिहासिक रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जी के नेतृत्व में, आज ओडिशा तेज गति से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। आज यहां गरीब कल्याण की योजनाओं से सामान्य मानवी का जीवन बदल रहा है। ओडिशा में आर्थिक गतिविधियाँ निवेश और उद्योगों को आकर्षित करने का सामर्थ्य आज नज़र आ रहा है। यहाँ रोजगार के नए अवसरों के लिए तेजी से काम हो रहा है।

साथियों,

केंद्र सरकार का विज़न है- पूर्वी भारत के विकास से भारत का विकास। इसीलिए, हम पूर्वोदय की नीति पर काम कर रहे हैं। जिस पूर्वी भारत को काँग्रेस के दौर में पिछड़ेपन का पर्याय बना दिया गया था, आज वो प्रगति का प्रवेश द्वार बन रहा है। आज ओडिशा खुद इस बदलाव का साक्षी बन रहा है।

साथियों,

ओडिशा के पास समुद्र है, खनिज संपदा है, कृषि की शक्ति है और सबसे सामर्थ्यवान यहां युवा प्रतिभा है। इस सामर्थ्य का पूरा उपयोग करने के लिए हम मिलकर काम कर रहे हैं। इसीलिए, आज ओडिशा में रेलवे इनफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश हो रहा है। नई सड़कें और आर्थिक कॉरिडोर बन रहे हैं। पोर्ट्स का विस्तार हो रहा है। ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक उद्योगों में निवेश आ रहा है। आज भी यहां ओडिशा के विकास से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। इन परियोजनाओं पर लगभग 47 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बिजली, सड़क, रेलवे, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी इन परियोजनाओं से, आप सभी लोगों को बहुत सुविधा होने वाली है। मैं इन परियोजनाओं के लिए ओडिशा के लोगों को बहुत बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारी सरकार ओडिशा के संसाधनों को, ओडिशा की संभावनाओं में बदल रही है। ओडिशा में बड़ा निवेश आए, यहाँ नए उद्योग लगें, इसके लिए उत्कर्ष ओडिशा जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत, अब तक करीब 20 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। साढ़े 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की अनेक मेगा परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण बने, इसके लिए ओडिशा के समग्र विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। पावर सेक्टर में 6 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश हो रहा है। समृद्ध शहर योजना के तहत शहरी विकास को गति दी जा रही है। आने वाले वर्षों में इन प्रयासों का परिणाम हमें देखने को मिलने वाला है।

साथियों,

डबल इंजन सरकार की बड़ी विशेषता ये है कि वो खुद जनता तक पहुँचती है। हमारा प्रयास है कि सामान्य नागरिक को किसी समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़े। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि युवाओं, महिलाओं, किसानों और आम लोगों की अपेक्षाएँ आज पूरी हो रही हैं। आप देखिए, धान खरीद में किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल देने का निर्णय लिया गया। सुभद्रा योजना के माध्यम से एक करोड़ से अधिक माताओं और बहनों तक आर्थिक सहायता पहुंचाई गई। आयुष्मान भारत को लागू करके ओडिशा के परिवारों के लिए देशभर के अस्पतालों में इलाज का रास्ता खोला गया। आदिवासी विद्यार्थियों की पढ़ाई बीच में न छूटे, इसके लिए माधो सिंह हाथ-खर्चा योजना शुरू की गई। महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी के भक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए श्रीमंदिर के श्रद्धालुओं के लिए सारे द्वार खोल दिए गए, चारों-चार द्वार खोल दिए गए। डबल इंजन की ताकत मिलने से आज यहां चारों दिशाओं में विकास सुनिश्चित हो रहा है।

साथियों,

यहां बीते दिनों स्वच्छता को लेकर जो विशेष अभियान चला है, उसकी भी मुझे जानकारी मिली है। और मैं देख रहा था सोशल मीडिया में तो सफाई अभियान छाया हुआ है, यानी स्वच्छता से स्वागत, मैं ओडिशा की इस पहल के लिए, यहां के नगारिको का, सरकार का, मुख्यमंत्री जी का, इस प्रशंसनीय पहल के लिए बहुत ही प्रशंसा करता हूं, संतोष व्यक्त करता हूं।

साथियों,

स्वच्छता हमारे जीवन शैली का हिस्सा होनी चाहिए, हर रोज की आदत होनी चाहिए। मैं यहां स्वच्छता अभियान से जुड़े सभी लोगों का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

मैंने अपने जीवन का कुछ महत्वपूर्ण कालखंड जनजातीय क्षेत्रों में एक वालंटियर के रूप में काम करते हुए बिताया है। माननीय राष्ट्रपति जी तो बरसों तक ऐसे क्षेत्रों में चुनौतियां का सामना करती रही हैं। आप और हम जानते हैं कि जनजातीय क्षेत्रों में जीवन की सुविधाएं आसानी से नहीं पहुंचती थीं। इसलिए, हमारी सरकार ने जनजातीय विकास को बहुत प्राथमिकता दी है। हमने ऐसे इलाकों को सुविधाओं से जोड़ने के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान शुरू किया। इसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, आवास से जुड़े विभाग मिलकर के सर्वागीण विकास के लिए काम कर रहे हैं। ताकि वहां रहने वाले लोगों की कठिनाइयां दूर हो सकें। इसी तरह, पीएम जनमन अभियान तो राष्ट्रपति जी के साथ हुई चर्चाओं का, उनके मार्गदर्शन का ही परिणाम है। ये विशेष रूप से देश के ऐसे जनजातीय समूहों के लिए है, जो जनजातीय समुदाय में भी सबसे पीछे रह गए हैं। ऐसे जनजातीय समुदायों तक अब सरकार स्वयं चलकर उनके गांव, उनके दरवाजे तक पहुंच रही है।

साथियों,

आदिवासी समाज के उत्थान के लिए हम आदिवासी युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोड़ रहे हैं। इन बच्चों को पढ़ाई की बेहतर सुविधा मिले, इसके लिए देश में करीब 500 एकलव्य मॉडल स्कूल खोले गए हैं। करीब साढ़े सात सौ एकलव्य स्कूल स्वीकृत किए गए हैं। प्री-मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक लेवल पर, डेढ़ करोड़ से अधिक आदिवासी बच्चों को सैकड़ों करोड़ रुपए की स्कॉलर्शिप दी गई है। मुझे ये बताते हुए भी खुशी है कि यहां मयूरभंज में एक और नवोदय विद्यालय बनाने के लिए भी स्वीकृति दे दी गई है।

साथियों,

दूर-दराज इलाकों में रहने के कारण, जनजातीय समाज स्वास्थ्य से जुड़ी कठिनाइयों का भी शिकार रहा है। सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियाँ एक बहुत बड़ी चुनौती रही हैं। हमने इनके खिलाफ देश भर में अभियान चलाया, चार करोड़ से ज्यादा हेल्थ कार्ड बांटे, मुफ्त इलाज के लिए करोड़ों आदिवासी लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड दिये। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर साफ पानी पहुंचाया जा रहा है। इन प्रयासों का परिणाम आज हमें दिख रहा है। आदिवासी समाज दशकों पुरानी कठिनाइयों से बाहर आ रहा है, और, विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन रहा है।

साथियों,

आने वाले समय में हमारे सामने दो महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। 2036 में ओडिशा के गठन के 100 वर्ष पूरे होंगे। और, 2047 में भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने वाले हैं। यानी, ओडिशा और देश का लक्ष्य एक ही दिशा में है। ओडिशा की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, तो भारत मजबूत होगा। मुझे ओडिशा के सामर्थ्य पर भरोसा है। हमें मिलकर ओडिशा को विकास की बुलंदियों पर पहुंचाना है।

साथियों,

कल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जाना है। ज्ञान और योग की धरती ओडिशा, योग यहाँ के संस्कारों का हिस्सा रहा है। मैं ओडिशा की धरती से पूरे देश से, पूरी दुनिया के लोगों से आह्वान करता हूँ, आप सब ज्यादा से ज्यादा संख्या में योग दिवस में हिस्सा लें। मैं एक बार फिर आप सभी को आज के अवसर, और विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं माननीय राष्ट्रपति जी का विशेष रूप से आभार प्रकट करता हूं, कि मुझे उनके साथ उनकी कर्मभूमि को देखने का मौका मिला। एक बार फिर उन्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय जगन्नथ।

जय जगन्नथ।

जय जगन्नथ।