"जनरल बिपिन रावत जी का जाना हर भारतप्रेमी के लिए, हर राष्ट्रभक्त के लिए बहुत बड़ी क्षति है"
"देश उन वीरों के परिवारों के साथ है जिन्हें हमने खो दिया है"
"सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना का पूरा होना इस बात का सबूत है कि जब सोच ईमानदार होती है, तो काम भी दमदार होता है"
"सरयू नहर परियोजना में जितना काम 5 दशक में हो पाया था, उससे ज्यादा काम हमने 5 साल से पहले करके दिखाया है। यही डबल इंजन की सरकार है। यही डबल इंजन की सरकार के काम की रफ्तार है"

 

 
भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

हम येह पावन धरती का बारम्बार प्रणाम करित है। आज हम्मै आदि शक्ति माँ पाटेश्वरी की पावन धरती, औ छोटी काशी कै नाम से विख्यात बलरामपुर की धरती पा फिर आवे कै मौका मिला। आपसे हम्मै खूब आशीर्वाद मिला है।

यूपी की राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन, यूपी के ऊर्जावान, कर्मठ, लोकप्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, उप मुख्यमंत्री श्रीमान केशव प्रसाद मौर्या जी, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत जी, कौशल किशोर जी, राज्य सरकार में मंत्री महेंद्र सिंह जी, रमापति शास्त्री जी, मुकुट बिहारी वर्मा जी, ब्रजेश पाठक जी, आशुतोष टंडन जी, बलदेव ओलाख जी, श्री पलटू राम जी, मंच पर उपस्थित सभी संसद के मेरे साथीगण, सभी आदरणीय विधायकगण, जिला पंचायतों के सदस्य, और मेरे प्यारे भाइयों और बहनों, क्रांतिकारियों की इस धरती ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपना अमूल्य योगदान दिया है। राजा देवी बख्श सिंह, राजा कृष्ण दत्त राम, और पृथ्वी पाल सिंह जैसे पराक्रमियों ने अंग्रेजी शासन से लोहा लेने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी। अयोध्या में बन रहे प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर की जब-जब बात होगी बलरामपुर रियासत के महाराजा पाटेश्वरी प्रसाद सिंह के योगदान का उल्लेख जरुर होगा। बलरामपुर के लोग तो इतने पारखी हैं कि उन्होंने नाना जी देशमुख और अटल बिहारी वाजपेयी के रूप में दो-दो भारत रत्नों को गढ़ा है, उन्हें संवारा है।

साथियों,

राष्ट्र निर्माताओं और राष्ट्र रक्षकों की इस धरती से मैं आज देश के उन सभी वीर योद्धाओं को भी श्रद्धांजलि दे रहा हूं जिनका 8 दिसंबर को हुए हेलीकॉप्टर हादसे में निधन हो गया। भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, जनरल बिपिन रावत जी का जाना हर भारतप्रेमी के लिए, हर राष्ट्रभक्त के लिए बहुत बड़ी क्षति है। जनरल बिपिन रावत जी जितने जांबांज थे, देश की सेनाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जितनी मेहनत करते थे, पूरा देश उसका साक्षी रहा है। एक सैनिक, सिर्फ उसी समय तक सैनिक नहीं रहता जितने दिन वो सेना में रहता है। उसका पूरा जीवन एक योद्धा की तरह होता है, अनुशासन, देश की आन-बान-शान के लिए वो हर पल समर्पित होता है। गीता में कहा गया है- नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। ना शस्त्र उसे छिन्न भिन्न कर सकते हैं ना अग्नि उसे जला सकती है। जनरल बिपिन रावत, आने वाले दिनों में, अपने भारत को नए संकल्पों के साथ वे जहां होंगे वहां से भारत को आगे बढ़ते हुए देखेंगे। देश की सीमाओं की सुरक्षा बढ़ाने का काम, बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का काम, देश की सेनाओं को आत्मनिर्भर बनाने का अभियान, तीनों सेनाओं में तालमेल सुदृढ़ करने का अभियान, ऐसे अनेक काम तेजी से आगे बढ़ता रहेगा। भारत दुख में है लेकिन दर्द सहते हुए भी हम ना अपनी गति रोकते हैं और ना ही हमारी प्रगति। भारत रुकेगा नहीं, भारत थमेगा नहीं। हम भारतीय मिलकर और मेहनत करेंगे, देश के भीतर और देश के बाहर बैठी हर चुनौती का मुकाबला करेंगे, भारत को और शक्तिशाली और समृद्ध बनाएंगे।

साथियों,

यूपी के सपूत, देवरिया के रहने वाले ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह जी का जीवन बचाने के लिए डॉक्टर जी-जान से लगे हुए हैं। मैं मां पाटेश्वरी से उनके जीवन की रक्षा की प्रार्थना करता हूं। देश आज वरुण सिंह जी के परिवार के साथ है, जिन वीरों को हमने खोया है, उनके परिवारों के साथ है।

भाइयों और बहनों,

राष्ट्र प्रथम की भावना को सर्वोपरि रखते हुए, देश आज हर वो काम कर रहा है, जो 21वीं सदी में हमें नई ऊंचाई पर ले जाए। देश के विकास के लिए ये भी बहुत जरूरी है कि पानी की कमी कभी बाधा ना बने। इसलिए देश की नदियों के जल के सदुपयोग हो, किसानों के खेत तक पर्याप्त पानी पहुंचे, ये सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना का पूरा होना इस बात का सबूत है कि जब सोच ईमानदार होती है, तो काम भी दमदार होता है। दशकों से आप इसके पूरा होने का इंतजार कर रहे थे। घाघरा, सरयू, राप्ती, बाणगंगा और रोहिणी की जलशक्ति अब इस क्षेत्र में समृद्धि का नया दौर लेकर आने वाली है। बलरामपुर के साथ-साथ बहराइच, गोंडा, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, बस्ती, गोरखपुर, महराजगंज और कुशीनगर के सभी साथियों को, लाखों मेरे किसान भाइयों - बहनों को आज हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं। बारिश के मौसम में इस क्षेत्र में जो परेशानियां आती हैं, उनका हल निकालने में इससे मदद मिलेगी। और मैं जानता हूं, मेरे प्यारे भाइयों – बहनों, हमारे यहां तो इतिहास गवाह है अगर किसी ने प्यासे को एक प्याला भर पानी पिला दिया होता है तो वो इंसान जीवन भर कभी उस ऋण को भुलता नहीं है, जीवन भर उस इंसान को भुलता नहीं है। और आज लाखों किसानों के प्यासे खेत जब पानी प्राप्त करेंगे। मुझे पक्का भरोसा है आपके आर्शीवाद जीवन भर हमें काम करने की ताकत देंगे। आपके आर्शीवाद हमें नई ऊर्जा देंगे।

भाइयो – बहनों,

आज मैं यह भी कहना चाहूँगा, विशेष रूप से वो किसान, जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि है, उनके लिए सिंचाई की ये व्यवस्था जीवन बदलने वाली होती है। जैसे कोई व्यक्ति मृत्यु शैया पर पड़ा हो। उसको बल्ड की जरूरत हो, लहु की जरूरत हो, रक्त की आवश्यकता हो और जैसे ही डॉक्टर रक्त लाकर के उसको चढ़ाएं और उसका जीवन बच जाता है। इस पूरे क्षेत्र के खेतों को ऐसी ही नई जिंदगी मिलने वाली है।

साथियों,

बलरामपुर की मसूर दाल का स्वाद तो बीते सालों में देशभर में फैला ही है। अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ इन क्षेत्रों के किसान, अधिक दाम देने वाली, अधिक आय देने वाली दूसरी फसलों की खेती भी व्यापक रूप से कर पाएंगे।

साथियों,

सार्वजनिक जीवन में मुझे एक लंबे समय से काम करने का सौभाग्य मिला है। मैंने, पहले की कितनी ही सरकारें देखी हैं, उनका कामकाज भी देखा है। इस लंबे कालखंड में जो मुझे सबसे अधिक अखरा, जिससे मुझे सबसे ज्यादा पीड़ा हुई है। वो है देश के धन, देश के समय और देश के संसाधनों का दुरुपयोग, उसका अपमान। सरकारी पैसा है तो मुझे क्या, मेरा क्या, ये तो सरकारी है। ये सोच देश के संतुलित और संपूर्ण विकास में सबसे बड़ी रुकावट बन गई है। इसी सोच ने सरयू नहर परियोजना को लटकाया भी, भटकाया भी। आज से करीब 50 साल पहले इस पर काम शुरु हुआ था। आप सोचिये 50 साल के बाद आज इसका काम पूरा हो रहा है। जब इस परियोजना पर काम शुरू हुआ था। ये सिर्फ यहां के नागरिक नहीं, देश के नागरिक भी इस बात को समझें, हिन्दुस्तान का हर नागरिक समझे, हिन्दुस्तान को मेरा नौजवान समझे, जो अपने उज्जवल भविष्य की कामना करता है वो मेरा देश का हर नौजवान समझे।

साथियों,

जब इस परियोजना पर काम शुरू हुआ था, तो इसकी लागत 100 करोड़ रुपए से भी कम थी। जरा आप बोलेंगे, कितनी लगात थी उस समय जब शुरू होना था तब - 100 करोड़ , कितनी थी - 100 करोड़, कितनी थी - 100 करोड़। और आज कहां पहुंचा मालुम है। आज ये लगभग 10 हज़ार करोड़ रुपए खर्च करने के बाद पूरी हुई है। 10 हज़ार करोड़, कितना - 10 हज़ार करोड़, कितना- 10 हज़ार करोड़। पहले होना था 100 करोड़ में, आज हुआ 10 हजार करोड़ में। ये पैसा किसका था भाइयों, ये पैसा किसका था, ये धन किसका था, आपका था कि नहीं था? इसके मालिक आप कि नहीं थे? आपके मेहनत का एक-एक रुपया सही समय पर सही काम के लिए उपयोग होना चाहिए था कि नहीं होना चाहिए था? जिन्होंने ये नहीं किया वे आपके गुनहगार है कि नहीं हैं? आपके गुनहगार है कि नहीं हैं? ऐसे लोगों को आप सजा देंगे के नहीं देंगे? पक्का देंगे?


मेरे प्यारे भाइयों-बहनों,

पहले की सरकारों की लापरवाही की 100 गुना ज्यादा कीमत इस देश को चुकानी पड़ी है। हमारे इस क्षेत्र के लाखों किसानों को भी अगर सिंचाई का यही पानी, अगर बीस साल – तीस साल पहले मिला होता, आप कल्पना कर सकते थे। अगर मेरे किसान के पास पानी होता, पिछले 25-30 साल में पानी उसके पास पहुंचा होता, तो वो सोना पैदा करता कि नहीं करता? देश का खजाना भर देता कि नहीं भर देता? अपने बच्चों की शिक्षा-दिक्षा अच्छी कर पाता के नहीं कर पाता।

भाइयों – बहनों,

दशकों की इस देरी की वजह से, मेरे यहां के किसान भाइयों – बहनों का भी अरबों-खरबों रुपयों का नुकसान हुआ है।

वैसे साथियों,

जब मैं आज दिल्ली से चला, तो सुबह से मैं इंतजार कर रहा था कि कब कोई आएगा, कहेगा कि मोदी जी इस योजना का फीता तो हमने काटा था, ये योजना तो हमने शुरू की थी। कुछ लोग हैं जिनकी आदत है ऐसा कहने की। हो सकता है, बचपन में इस योजना का फीता भी उन्होंने ही काटा हो।

साथियों,

कुछ लोगों की प्राथमिकता फीता काटना है, हम लोगों की प्राथमिकता, योजनाओं को समय पर पूरा करना है। 2014 में जब मैं सरकार में आया था, तो ये देखकर हैरान था कि देश में सिंचाई की 99 बड़ी परियोजनाएं हैं जो देश के अलग – अलग कोनों में दशकों से अधूरी पड़ी हैं। हमने देखा कि सरयू नहर परियोजना में कितनी ही जगहों पर नहरें आपस में जुड़ी ही नहीं थीं, पानी आखिरी छोर तक पहुंचाने की व्यवस्था ही नहीं थी। सरयू नहर परियोजना में जितना काम 5 दशक में हो पाया था, उससे ज्यादा काम हमने 5 साल से पहले करके दिखाया है। साथियों, यही तो डबल इंजन की सरकार है, यही तो डबल इंजन सरकार के काम का रफ्तार है। और आप याद रखिए, योगी जी के आने के बाद हमने बाणसागर परियोजना का लोकार्पण किया। कुछ दिन पहले ही अर्जुन सहायक नहर परियोजना का लोकार्पण किया। इसी हफ्ते गोरखपुर में जो फर्टिलाइज़र कारखाने और एम्स का लोकार्पण किया गया, उनका भी बरसों से इंतजार हो रहा था। कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की भी फाइलें बरसों से चल रही थी। लेकिन इस एयरपोर्ट को भी शुरू करवाने का काम डबल इंजन की सरकार ने ही किया है।

साथियों,

हमारी सरकार किस तरह बरसों पुराने सपनों को साकार कर रही है इसका एक और उदाहरण केन-बेतबा लिंक परियोजना भी है। सालों से इस परियोजना की मांग हो रही थी। अभी दो-तीन दिन पहले ही कैबिनेट ने इस परियोजना को स्वीकृति दे दी है और इस पर 45 हज़ार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। ये उत्तर प्रदेश को इतनी बड़ी सौगात मिल रही है, 45 हज़ार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। ये परियोजना बुंदेलखंड को जल संकट से मुक्ति दिलाने में बड़ी भूमिका निभाएगी।

भाइयों और बहनों,

आज देश में आजादी के बाद पहली ऐसी सरकार है, जो छोटे किसानों की सुध ले रही है। पहली बार 2 हेक्टेयर से कम भूमि वाले छोटे किसानों को सरकारी लाभ से, सरकारी सुविधा से जोड़ा गया है। बीज से लेकर बाजार तक, खेत से लेकर खलिहान तक, उनकी हर तरह से मदद की जा रही है। इन छोटे किसानों के बैंक खातों में पीएम किसान सम्मान निधि के हज़ारों करोड़ रुपए सीधे भेजे जा रहे हैं। उनकी आय बढ़ाने के लिए उन्हें खेती से जुड़े अन्य विकल्पों की तरफ भी प्रेरित किया जा रहा है। ऐसे विकल्प जिसमें बहुत बड़ी जमीन की उतनी जरूरत नहीं पड़ती, उन्हें इसका मार्ग दिखाया जा रहा है। इसी सोच के साथ, पशुपालन हो, मधुमक्खी पालन हो या फिर मछली पालन इनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर नई योजनाएं शुरू की गई है। आज भारत दूध उत्पादन के मामले में दुनिया में अग्रणी है ही, लेकिन आपको जानकर के खुशी होगी आज हम शहद, हनी, मधु निर्यातक के रूप में भी विश्व में अपना स्थान बना रहे हैं। हमारी सरकार के प्रयासों की वजह से, बीते सात वर्षों में शहद का निर्यात बढ़कर, करीब-करीब दोगुना हो गया है और इससे किसानों की 700 करोड़ से ज्यादा की कमाई हुई है।


भाइयों और बहनों,

किसान की आय बढ़ाने का एक और विकल्प बायोफ्यूल भी है। हम खाड़ी के तेल से चलाते थे अब हम झाड़ी का तेल भी लेकर के आ रहे हैं। बायोफ्यूल की अनेक फैक्ट्रियां यूपी में बनाई जा रही हैं। बदायूं और गोरखपुर में बायोफ्यूल के बड़े कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं। यहां पास में, गोंडा में भी इथेनॉल का एक बड़ा प्लांट बन रहा है। इसका लाभ इस क्षेत्र के बहुत से किसानों को होगा। गन्ने से इथेनॉल बनाने के अभियान में भी यूपी अग्रणी भूमिका की ओर बढ़ रहा है। बीते साढ़े 4 साल में लगभग 12 हज़ार करोड़ रुपए का इथेनॉल यूपी से खरीदा गया है। योगी जी की सरकार जब से आई है, तब से गन्ने के भुगतान में भी बहुत तेज़ी आई है। एक समय 2017 से पहले का भी था जब गन्ना किसान, सालों-साल बकाया मिलने के लिए इंतज़ार करते थे। पिछली सरकारों के दौरान जहां 20 से अधिक चीनी मिलों में ताला लग गया, वहीं योगी जी की सरकार ने इतनी ही चीनी मिलों का विस्तार और आधुनिकीकरण किया है। मैं आज बलरामपुर से, देश भर के किसानों को एक विशेष निमंत्रण भी देना चाहता हूं। और मैं चाहुंगा सिर्फ उत्तर प्रदेश के नहीं, देश भर के किसान मेरे इस निमंत्रण को स्वीकार करें और मेरे साथ जुड़ें। मेरा निमंत्रण किस बात का है? इसी महीने 5 दिन के बाद 16 तारीख को, 16 दिसम्बर को सरकार, प्राकृतिक खेती पर, natural farming पर एक बहुत बड़ा आयोजन करने जा रही है। हमारे पद्म पुरस्कार विजेता सुभाष जी करके हैं महाराष्ट्र के, उन्होंने जीरो बजट खेती का एक विचार विकसित किया है। ये वो प्राकृतिक खेती वाला विषय है, इससे हमारी धरती मां भी बचती है, हमारा पानी भी बचता है और फसल भी अच्छी और पहले से ज्यादा होती है। मेरा आप सभी किसान साथियों को, देश भर के किसान साथियों को आग्रह है कि आप 16 दिसम्बर को टीवी के माध्यम से या कृषि विज्ञान केन्द्र के माध्यम से जरूर इस कार्यक्रम में जुड़िये आप सारी बात को समझेंगे, मुझे पक्का विश्वास है आप उसको अपने खेत में लागू करेंगे। ये आपको बहुत लाभकारी होने वाला है।

साथियों,

आपकी हर जरूरत को ध्यान में रखते हुए, आपका जीवन आसान बनाने के लिए हम दिन रात मेहनत कर रहे हैं। इसकी छाप आपको प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे गरीब के पक्के घर में भी दिखेगी। पीएम आवास के तहत मिल रहे घरों में, इज्जत घर यानि शौचालय है, उज्जवला की गैस है, सौभाग्य योजना का बिजली कनेक्शन है, उजाला का LED बल्ब है, हर घर जल योजना के तहत मिल रहा पानी का कनेक्शन है। और मुझे तो खुशी तब होती है क्योंकि मैं इस क्षेत्र में भी दौरा कर चुका हूं, मुझे मालूम है। जब यहां मेरे थारू जनजाति के भाई-बहनों को भी इन योजनाओं का लाभ मिल रहा है, तो हमे खुशी भी ज्यादा होती है और हमे आर्शीवाद भी ज्यादा मिलता है।

साथियों,

हमारे यहां सदियों से एक तौर-तरीका चला आ रहा है कि घर होगा, मेरी माताएं –बहनें मेरी बात जरूर समझें और मेरे पुरुष भाई भी अपने घर में बताएं। हमारे यहां एक मान्यता चली, परंपरा चली, व्यवस्था चली। वो क्या, घर होगा तो पुरुष के नाम, दुकान होगी, तो पुरुष के नाम, गाड़ी होगी, तो पुरुष के नाम, खेत होगा तो पुरुष के नाम। महिलाओं के नाम पर कुछ भी नहीं, कुछ होता है क्या महिलाओं के नाम पर? नहीं होता है ना। ये मैं आपकी पीड़ाएं जानता हूं बराबर माताओं बहनों और इसलिए हमने क्या किया? मुझे खुशी है हमने क्या किया पीएम आवास योजना के तहत जो घर बन रहे है ना ज्यादातर घरों का मालिकाना हक हमने हमारी माताओं – बहनों, बेटियों को दे दिया है। इस वजह से देश में ऐसी बहनों की संख्या में बहुत अधिक वृद्धि हुई है, जिनके अपने नाम पर कम से कम एक प्रॉपर्टी तो है। डबल इंजन की सरकार के प्रयासों से यूपी के 30 लाख से अधिक गरीब परिवारों को पक्का घर मिल चुका है। आने वाले दिनों में, और भी ज्यादा नए घर बनाने के लिए अभी हमारी सरकार ने 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किया है। यानि जिनकों अभी तक पक्के घर नहीं मिले, उन्हें आने वाले समय में भी जरूर मिलेंगे।

साथियों,

जब सरकार संवेदनशील हो, गरीबों की सुनती हो, उनका दुख-दर्द समझती हो, तो फर्क आता ही है। आता है कि नहीं आता है - आता है, फर्क आता है कि नहीं आता है- आता है। अभी देश, सौ साल में आई सबसे बड़ी महामारी से लड़ रहा है। कोरोना आने के बाद, हर कोई यही सोच रहा था कि क्या होगा, कैसे होगा। हर किसी ने कम-अधिक मात्रा में कोरोना की वजह से कष्ट सहा।

लेकिन साथियों, इस कोरोना काल में हमने पूरी ईमानदारी से प्रयास किया है कि कोई गरीब भूखा ना सोए। अभी इसलिए पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मिल रहे मुफ्त राशन के अभियान को होली से आगे तक बढ़ा दिया गया है। गरीबों के मुफ्त राशन पर सरकार 2 लाख 60 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा खर्च कर रही है।

भाइयों और बहनों,

पहले जो सरकार में थे- आप जानते हैं ना, अच्छी तरह जानते हैं ना, पहले जो सरकार में थे, वो माफिया को संरक्षण देते थे। आज योगी जी की सरकार, माफिया की सफाई में जुटी है। तभी तो यूपी के लोग कहते हैं- फर्क साफ है। पहले जो सरकार में थे- वो बाहुबलियों को बढ़ाते थे। आज योगी जी की सरकार गरीब, दलित, पिछड़े और आदिवासी, सभी को सशक्त करने में जुटी है। तभी तो यूपी के लोग कहते हैं- फर्क साफ है। पहले जो सरकार में थे, वो यहां जमीनों पर अवैध कब्जे करवाते थे। आज ऐसे माफियाओं पर जुर्माना लग रहा है, बुलडोजर चल रहा है। तभी तो यूपी के लोग कहते हैं- फर्क साफ है। पहले यूपी की बेटियां घर से निकलने से पहले 100 बार सोचने के लिए मजबूर थीं। आज अपराधी गलत काम से पहले 100 बार सोचता है। तभी तो यूपी के लोग कहते हैं- फर्क साफ है। पहले बेटियां घर में दुबक कर रहने को मजबूर थीं, अब यूपी के अपराधी जेल में दुबकते हैं। तभी तो कहते हैं- फर्क साफ है।

साथियों,

आज मैं एक और योजना के बारे में जरूर बताना चाहता हूं जो यूपी के लोगों की बहुत मदद करने वाली है। और ये योजना है- स्वामित्व योजना। स्वामित्व योजना के तहत आज गांवों में प्रॉपर्टी की मैपिंग करा कर, घरों के, खेतों के मालिकाना हक के कागज लोगों को दिए जा रहे हैं। ये अभियान कुछ ही समय में यूपी के हर गांव तक पहुंचने वाला है। इससे आपको अवैध कब्जे के डर से मुक्ति मिलेगी और बैंकों से मदद लेना भी आपके लिए आसान हो जाएगा। अब गांव के युवाओं को बैंक से अपने काम के लिए पैसा जुटाने में दिक्कत भी नहीं आएगी।

साथियों,

हम सभी को मिलकर उत्तर प्रदेश को नई ऊंचाई पर ले जाना है, उत्तर प्रदेश की नई पहचान देनी है। उत्तर प्रदेश को दशकों पीछे धकेलने वाले लोगों से आपको निरंतर सतर्क रहना है। भाइयों – बहनों, एक बार फिर से आप सभी को सरयू नहर परियोजना के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरे साथ दोनों हाथ उपर के पुरी ताकत से बोलिये, भारत माता की – जय। भारत माता की – जय। भारत माता की – जय।

बहुत-बहुत धन्यवाद !
Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India records highest-ever startup surge with 55,200 recognised in FY26

Media Coverage

India records highest-ever startup surge with 55,200 recognised in FY26
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में ₹24,815 करोड़ की दो रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी
April 18, 2026

The Cabinet Committee on Economic Affairs, chaired by the Prime Minister Shri Narendra Modi, today has approved 02 (Two) projects of Ministry of Railways with total cost of Rs. 24,815 crore (approx.). These projects include:

Name of Project

Route Length (in km)

Track Length (in km)

Completion Cost (Rs. in Cr.)

Ghaziabad – Sitapur 3rd and 4th Line

403

859

14,926

Rajahmundry (Nidadavolu) – Visakhapatnam (Duvvada) 3rd and 4th Line

 

198

 

458

 

9,889

Total

601

1,317

24,815

The increased line capacity will significantly enhance mobility, resulting in improved operational efficiency and service reliability for Indian Railways. These multi-tracking proposals are poised to streamline operations and alleviate congestion. The projects are in line with the Prime Minister Shri Narendra Modiji’s Vision of a New India which will make people of the region “Atmanirbhar” by way of comprehensive development in the area which will enhance their employment/ self-employment opportunities.

The projects are planned on PM-Gati Shakti National Master Plan with focus on enhancing multi-modal connectivity & logistic efficiency through integrated planning and stakeholder consultations. These projects will provide seamless connectivity for movement of people, goods, and services.

The 02 (Two) projects covering 15 Districts across the states of Uttar Pradesh and Andhra Pradesh will increase the existing network of Indian Railways by about 601 Kms.

The proposed capacity enhancement will improve rail connectivity to several prominent tourist destinations across the country, including Dudheshwarnath Temple, Garhmukteshwar Ganga Ghat, Dargah Shah Wilayat Jama Masjid (Amroha), Naimisharanya (Sitapur), Annavaram, Antarvedi, Draksharamam, etc.

The proposed projects are essential routes for transportation of commodities such as coal, foodgrains, cement, POL, iron and steel, container, fertilizers, sugar, chemical salts, limestone, etc. The Railways being environment friendly and energy efficient mode of transportation, will help both in achieving climate goals and minimizing logistics cost of the country lowering CO2 emissions (180.31Crore Kg) which is equivalent to plantation of 7.33 Crore trees.

Ghaziabad – Sitapur 3rd and 4th Line (403 Km)

  • Ghaziabad – Sitapur is an existing double line section forming a key part of Delhi- Guwahati High Density Network (HDN 4).
  • The project is crucial for improving connectivity between the Northern and Eastern region of the country.
  • The existing line capacity utilization of the section is up to 168% and is projected to be up to 207% in case the project is not taken up.
  • Transverses through Ghaziabad, Hapur, Amroha, Moradabad, Rampur, Bareilly, Sahjahanpur, Lakhimpur Kheri and Sitapur districts of Uttar Pradesh.
  • The project route passes through major industrial centres - Ghaziabad (machinery, electronics, pharmaceuticals), Moradabad (brassware and handicrafts), Bareilly (furniture, textiles, engineering), Shahjahanpur (carpets and cement-related industries), and Roza (thermal power plant).
  • For seamless transportation, the project alignment is planned to bypass congested stations of Hapur, Simbhaoli, Moradabad, Rampur, Bareilly, Shahjahanpur, and Sitapur and accordingly, six new stations are proposed on the bypassing sections.
  • Key tourist/religious places along/near to the project section are Dudheshwarnath Temple, Garhmukteshwar Ganga Ghat, Dargah Shah Wilayat Jama Masjid (Amroha), and Naimisharanya (Sitapur) among others.
  • Anticipated additional freight traffic of 35.72 MTPA consisting of Coal, Foodgrains, Chemical Manures, Finished Steel, etc.
  • Estimated Cost: Rs.14,926 crore (approx.)
  • Employment generation: 274 lakh human-days.
  • CO2 emissions saved: About 128.77 crore Kg CO2 equivalent to 5.15 Cr trees.

  • Logistic cost saving: Rs. 2,877.46 crore every year vis-a vis road transportation.

Ghaziabad – Sitapur 3rd and 4th Line (403 Km)

Rajahmundry (Nidadavolu) – Visakhapatnam (Duvvada) 3rd and 4th Line (198 Km)

  • Rajahmundry (Nidadavolu) – Visakhapatnam (Duvvada) section forms part of the Howrah – Chennai High Density Network (HDN).
  • The proposed project is part of quadrupling initiative of Howrah – Chennai High Density Network (HDN) route.
  • The project traverses through East Godavari, Konaseema, Kakinada, Anakapalle and Vishakapatnam districts of Andhra Pradesh.
  • Visakhapatnam is identified as an Aspirational District in the Aspirational Districts Programme.
  • It provides connectivity to major ports along the East Coast such as Visakhapatnam, Gangavaram, Machilipatnam and Kakinada.
  • The project route runs along the eastern coastline and is among the busiest, predominantly freight-oriented sections of the East Coast Rail Corridor.
  • The line capacity utilization of the section has already reached up to 130%, leading to frequent congestion and operational delays. The line capacity is expected to increase further due to proposed expansion of ports and industries in the region.
  • Project section includes 4.3 km rail bridge over Godavari River, 2.67 km viaduct, 3 bypasses and the new alignment is around 8 km shorter than the existing route, improving connectivity and operational efficiency.
  • The proposed section will also boost tourism by improving access to key destinations such as Annavaram, Antarvedi and Draksharamam etc.
  • Anticipated additional freight traffic of 29.04 MTPA consisting of Coal, Cement, Chemical Manures, Iron and Steel, Foodgrains, Containers, Bauxite, Gypsum, Limestone, etc.
  • Estimated Cost: Rs.9,889 crore (approx.)
  • Employment generation: 135 lakh human-days.
  • CO2 emissions saved: About 51.49 crore Kg CO2 equivalent to 2.06 Cr trees.

  • Logistic cost saving: Rs. 1,150.56 crore every year vis-a vis road transportation.

 

आर्थिक सशक्तिकरण:

Aspirational districts - Visakhapatnam district will get improved connectivity

Additional economic opportunities in the region through tourism & industries.

Better healthcare and education for the citizens due to enhanced rail connectivity.


Rajahmundry (Nidadavolu) – Visakhapatnam (Duvvada) 3rd and 4th Line (198 Km)

Prime Minister’s focus on railways:

  • Record budget allocation of Rs. 2,65,000 crore for FY 26-27.
  • Manufacturing more than 1600 locomotives- surpassed US and Europe in manufacturing of locomotive production
  • In FY 26, Indian Railways is expected to rank among the top three freight carriers globally, moving 1.6 billion tonnes of cargo.

  • India starts exporting metro coaches to Australia and bogie to United Kingdom, Saudi Arabia, France and Australia.