राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत को एक नई दिशा देने जा रही है: प्रधानमंत्री मोदी
ऊर्जावान युवा देश के विकास के इंजन हैं; उनका विकास उनके बचपन से शुरू होना चाहिए, NEP-2020 इस पर बहुत जोर देता है: पीएम मोदी
युवाओं में अधिक से अधिक सीखने की भावना, वैज्ञानिक और तार्किक सोच, गणितीय सोच और वैज्ञानिक स्वभाव विकसित करना आवश्यक है: प्रधानमंत्री

नमस्कार!

मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी, देश के शिक्षामंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक जी, श्री संजय धोत्रे जी, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रारूप को तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष डॉ कस्तूरी रंगन जी, उनकी टीम के सम्मानित सदस्य गण, इस विशेष सम्मलेन में भाग ले रहे सभी राज्यों के विद्वान, प्राचार्यगण, शिक्षकगण, देवियों और सज्जनों, आज हम सभी एक ऐसे क्षण का हिस्सा बन रहे हैं जो हमारे देश के भविष्य निर्माण की नींव डाल रहा है। ये एक ऐसा क्षण है जिसमें नए युग के निर्माण के बीज पड़े हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 21वीं सदी के भारत को नई दिशा देने वाली है।

साथियों, पिछले तीन दशकों में दुनिया का हर क्षेत्र बदल गया। हर व्यवस्था बदल गई। इन तीन दशकों में हमारे जीवन का शायद ही कोई पक्ष हो जो पहले जैसा हो। लेकिन वो मार्ग, जिस पर चलते हुए समाज भविष्य की तरफ बढ़ता है, हमारी शिक्षा व्यवस्था, वो अब भी पुराने ढर्रे पर ही चल रही थी। पुरानी शिक्षा व्यवस्था को बदलना उतना ही आवश्यक था जितना किसी खराब हुए ब्लैकबोर्ड को बदलना आवश्यक होता है। जैसे हर स्कूल में पिन-अप बोर्ड होता है। उसमें तमाम जरूरी कागज, स्कूल के जरूरी आदेश, बच्चों की बनाई पेन्टिंग आदि आप लोग लगाते हैं। ये बोर्ड हर कुछ समय में भर भी जाता है। उस पिन-अप बोर्ड पर नई क्लास के नए बच्चों की नई पेन्टिंग्स लगाने के लिए आपको बदलाव करना ही पड़ता है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी नए भारत की, नई उम्मीदों की, नई आवश्यकताओं की पूर्ति का सशक्त माध्यम है। इसके पीछे पिछले चार-पांच वर्षों की कड़ी मेहनत है, हर क्षेत्र, हर विधा, हर भाषा के लोगों ने इस पर दिन रात काम किया है। लेकिन ये काम अभी पूरा नहीं हुआ है। बल्कि अब तो काम की असली शुरुआत हुई है। अब हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति को उतने ही प्रभावी तरीके से लागू करना है। और ये काम हम सब मिलकर करेंगे। मैं जानता हूं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति का ऐलान होने के बाद आप में से बहुत लोगों के मन में कई सवाल आ रहे हैं। ये शिक्षा नीति क्या है? ये कैसे अलग है? इससे स्कूल और कॉलेजों की व्यवस्था में क्या बदलाव आएगा? इस शिक्षा नीति में एक शिक्षक के लिए क्या है? एक छात्र के लिए क्या है? और सबसे अहम, इसे सफलता पूर्वक लागू करने के लिए क्या क्या करना है, कैसे करना है? ये सवाल जायज भी हैं, और जरूरी भी हैं। और इसीलिए ही हम सब यहां इस कार्यक्रम में इकट्ठा हुए हैं ताकि चर्चा कर सकें, आगे का रास्ता बना सकें। मुझे बताया गया है कि कल भी दिन भर आप सभी ने इन्हीं बातों पर घंटों मंथन किया है, चर्चा की है।

Teachers खुद अपने हिसाब से Learning Material तैयार करें, बच्चे अपना Toy म्यूजियम बनाएं, Parents को जोड़ने के लिए स्कूल में कम्यूनिटी लाइब्रेरी हो, तस्वीरों के साथ Multilingual Dictionary हो, स्कूल में भी किचेन गार्डन हो, ऐसे कितने ही विषयों की बात हुई है, अनेक नए Ideas दिए गए हैं। मुझे खुशी है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के इस अभियान में हमारे प्रिंसिपल्स और शिक्षक पूरे उत्साह से हिस्सा ले रहे हैं।

अभी कुछ दिन पहले शिक्षा मंत्रालय ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के बारे में देश भर के Teachers से Mygov पोर्टल पर उनके सुझाव मांगे थे। एक सप्ताह के भीतर ही 15 लाख से ज्यादा सुझाव मिले हैं। ये सुझाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति को और ज्यादा प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद करेंगे। इस विषय में और अधिक जागरूकता लाने के लिए शिक्षा मंत्रालय अनेक तरह के कार्यक्रम चला रहा है।

साथियों, किसी भी देश के विकास को गति देने में उसकी युवा पीढ़ी और युवा ऊर्जा की बड़ी भूमिका होती है। लेकिन उस युवा पीढ़ी का निर्माण बचपन से ही शुरू हो जाता है। जैसा बचपन होगा, भविष्य का जीवन काफी कुछ उसी पर निर्भर करता है। बच्चों की शिक्षा, उन्हें मिलने वाला वातावरण, काफी हद तक यही तय करता है कि भविष्य में वो as a Person, कैसा बनेगा, उसकी Personality कैसी होगी। इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बच्चों की Education पर बहुत ज्यादा जोर दिया गया है। प्री-स्कूल में तो बच्चा पहली बार माता-पिता की देखभाल और घर के आराम भरे माहौल से बाहर निकलने की शुरूआत करता है .. दूर होता है। ये वो पहला पड़ाव होता है जब बच्चे अपने Senses, अपनी Skills को ज्यादा बेहतर तरीके से समझना शुरू करते हैं। इसके लिये ऐसे स्कूल, ऐसे शिक्षकों की जरूरत है जो बच्चों को Fun Learning, Playful Learning, Activity Based Learning और Discovery Based Learning का Environment दें।

मैं जानता हूं कि आप सोच रहे होंगे कि कोरोना के इस टाइम में, ये सब कैसे होगा? ये बात सोच से ज्यादा अप्रोच की है। और वैसे भी कोरोना से बने हालात हमेशा ऐसे ही तो नहीं रहेंगे। बच्चे जैसे-जैसे क्लास में आगे बढ़ें, उनमें ज्यादा सीखने की भावना का विकास हो, बच्चों का मन, उनका मस्तिष्क वैज्ञानिक और तार्किक तरीके से सोचना शुरू करे, उनमें Mathematical Thinking और Scientific Temperament विकसित हो, ये बहुत आवश्यक है। और Mathematical Thinking का मतलब केवल यही नहीं है कि बच्चे Mathematics के प्रॉब्लम ही सॉल्व करें, बल्कि ये सोचने का एक तरीका है। ये तरीके हमें उन्हें सिखाना है। ये हर विषय को, जीवन के पहलुओं को Mathematical और Logical रूप से समझने का दृष्टिकोण है, ताकि मस्तिष्क अलग-अलग perspective में analyse कर सके। ये दृष्टिकोण, मन और मस्तिष्क का ये विकास बहुत जरूरी है, और इसलिए ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इसके तौर-तरीकों पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया गया है। आप लोगों में से बहुत से लोग, बहुत से प्रिंसिपल्स, ये सोच रहे होंगे कि हम तो अपने स्कूल में पहले से ही ऐसा करते हैं। लेकिन बहुत से स्कूल ऐसे भी तो हैं जहां ऐसा नहीं होता। एक समान भाव लाना भी तो जरूरी है। ये भी एक बड़ी वजह है जो आज आपसे मैं इतना विस्तार से, हर बारीकी पर बात कर रहा हूं।

साथियों, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पुरानी 10 Plus 2 की जगह, 5 Plus 3 Plus 3 Plus 4 की व्यवस्था बहुत सोच- समझकर की गई है। इसमें Early Childhood Care and Education को एक बुनियाद के रुप में, नींव के रूप में शामिल किया गया है। आज हम देखें तो प्री स्कूल की Playful Education शहरों में, प्राइवेट स्कूलों तक ही सीमित है। वो अब गाँवों में भी पहुंचेगी, गरीब के घर तक पहुंचेगी, अमीर, गांव-शहर, हर किसी के, हर जगह के बच्चों को मिलेगी। मूलभूत शिक्षा पर ध्यान इस नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत Foundational Literacy and Numeracy के विकास को एक राष्ट्रीय मिशन के रुप में लिया जायेगा। प्रारम्भिक भाषा का ज्ञान, संख्या का ज्ञान, बच्चों में सामान्य लेख को पढ़ने और समझने की क्षमता का विकास, ये बहुत आवश्यक होता है। बच्चा आगे जा कर Read To Learn करें, इसके लिए जरूरी है कि शुरुआत में वो Learn To Read करना सीखे। Learn To Read से Read To Learn की ये विकास यात्रा Foundational Literacy and Numeracy के माध्यम से पूरी की जायगी।

साथियों, हमें ये सुनिश्चित करना है कि जो भी बच्चा तीसरी कक्षा पार करता है, वो एक मिनट में 30 से 35 शब्द तक आसानी से पढ़ पाए। इसे आप लोग Oral Reading Fluency कहते हैं। जिस बच्चे को हम इस लेवल तक ला पाएंगे, shape कर पाएंगे, सिखा पाएंगे, तो भविष्य में उस विद्यार्थी को बाकी subjects का content समझने में और आसानी रहेगी। मैं इसके लिए आपको सुझाव देता हूं। ये जो छोटे-छोटे बच्‍चे हैं ..उनके साथ उनके 25-30 दोस्‍त भी होंगे क्‍लास में। आप उनको कहिए चलो भाई तुम कितनों के नाम जानते हो ... तुम बोलो। फिर कहो अच्‍छा तुम कितनी तेजी से नाम बता सकते हो, फिर कहिए तुम तेजी से भी बोलो और उसको वहां खड़ा भी करो। आप देखिए कितने प्रकार के talent develop होना शुरू हो जाएंगे और उसका confidence लेवल बढ़ जाएगा… बाद में लिखित रूप में साथियों के नाम रखके ..... चलो तुम इसमें से किस-किस के नाम बोलोगे, पहले फोटो दिखाके लिखा सकते हैं। अपने ही दोस्‍तों को पहचान कर सीखना ..... इसे लर्निंग की प्रक्रिया कहते हैं। इससे आगे की कक्षाओं में Students पर बोझ भी कम होगा, आप शिक्षकों पर भी burden कम होगा।

साथ ही, बेसिक गणित जैसे, Counting, Addition, Subtraction, Multiplication, Division, ये सब भी बच्चे आसानी से समझ सकेंगे। ये सब तभी होगा जब पढ़ाई किताबों और क्लास की चारदीवारियों से बाहर निकलकर वास्तविक दुनिया से जुड़ेगी, हमारे जीवन से, आस-पास के परिवेश से जुड़ेगी। आस पास की चीजों से, Real World से बच्चे कैसे सीख सकते हैं, इसका एक उदाहरण ईश्वरचंद्र विद्यासागर की एक कहानी में देखने को मिलता है। कहते हैं, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी जब आठ साल के थे, उन्हें तब तक अंग्रेजी नही पढ़ाई गयी थी। एक बार वो अपने पिता के साथ कोलकाता जा रहे थे, तो रास्ते में सड़क के किनारे उन्हें अंग्रेजी में लिखे Milestones दिखे। उन्होंने अपने पिता से पूछा कि यह क्या लिखा है? उनके पिताजी ने बताया कि इसमें कोलकाता कितनी दूर है, ये बताने के लिए इंग्लिश में गिनती लिखी है। इस उत्तर से ईश्वर चन्द्र विद्यासागर के बालमन में और जिज्ञासा बढ़ी। वो पूछते रहे और उनके पिताजी उन मील के पत्थरों पर लिखी गिनती बताते रहे। और, कोलकाता पहुँचते-पहुँचते ईश्वर चन्द्र विद्यासागर पूरी English की counting सीख गए। 1,2,3,4…7,8,9,10 ये है जिज्ञासा की पढ़ाई, जिज्ञासा से सीखने और सिखाने की शक्ति!

साथियों, जब शिक्षा को आस-पास के परिवेश से जोड़ दिया जाता है तो उसका प्रभाव विद्यार्थी के पूरे जीवन पर पड़ता है, पूरे समाज पर भी पड़ता है। जैसे कि जापान को देखिए, वहाँ Shinrin-Yoku (शिनरिन योकू) का प्रचलन है। Shinrin का अर्थ है वन या जंगल, और Yoku का मतलब है- नहाना। यानि Forest-Bathing. वहाँ स्टूडेंट्स को जंगलों में, या जहां पेड़-पौधे बहुत हो, ऐसी जगहों पर ले जाया जाता है जहाँ बच्चे प्रकृति को स्वाभाविक रूप से महसूस करें। पेड़-पौधों फूलों को सुनें, देखें, Touch, Taste, Smell करें। इससे बच्चों का प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ाव भी होता है, और उनके Hollistic तरीके से development को बढ़ावा भी मिलता है। बच्चे इसे enjoy भी करते हैं, और एक साथ कितनी सारी चीजें सीख भी रहे होते हैं। मुझे याद है, जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था.. तो एक कार्यक्रम चला था। हमने सूचना दी सभी स्‍कूलों को .... हमने कहा सभी स्कूलों के बच्‍चे अपने गांव के अंदर सबसे बड़ी उम्र का पेड़ कौन सा है ....जिस पेड़ की सबसे ज्‍यादा उम्र हो चुकी है उसे ढूढ़ो। तो उन्‍हें सब जबह जाना पडा, गांव के आसपास के सारे पेड़ देखने पड़े, टीचर को पूछा पड़ा। और सबने सहमति की कि ये पेड़ बहुत पुराना है और बाद में बच्‍चों ने स्‍कूल में आकर के उस पर गीत लिखें, निबंध लिखें…. वक्‍तत्‍व कथाएं की .... यानि उस पेड़ का महात्‍मय क्‍या है।

लेकिन उसी प्रक्रिया में उन्‍हें कई पेड़ देखने पड़े, सबसे बड़ा उम्र वाला पेड़ ढूढ़ना पड़ा। बहुत चीजें वो सीखने लग गए और मैं कह सकता हूं, ये प्रयोग बहुत सफल रहा। एक तरफ बच्चों को पर्यावरण की जानकारी मिली, साथ ही साथ उन्हें अपने गांव के विषय में ढेर सारी जानकारियां प्राप्त करने का मौका भी मिला। हमें इसी तरह के आसान और नए-नए तौर-तरीकों को बढ़ाना होगा। हमारे ये प्रयोग, New age learning का मूलमंत्र होना चाहिए- Engage, Explore, Experience, Express और Excel. यानि कि, students अपने रूचि के हिसाब से गतिविधियों में, घटनाओं में, projects में engage हों। इसे अपने हिसाब से explore करें। इन गतिविधियों, घटनाओं, projects को विभिन्न दृष्टिकोण को अपने experience से सीखें। ये उनका personal experience हो सकता है या collaborative experience हो सकता है। फिर बच्चे रचनात्मक तरीके से Express करना सीखें। इन सब को मिला कर ही फिर excel करने का रास्ता बनता है। अब जैसे कि, हम बच्चों को पहाड़ों पर, ऐतिहासिक जगहों पर, खेतों में, सुरक्षित मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स में लेकर जा सकते हैं।

अब देखिए, आप क्‍लासरूम में रेलवे का इंजन पढ़ाए .... बस पढ़ाए लेकिन कभी तय करें कि गांव के नजदीक में रेलवे स्‍टेशन है तो चलो जाएंगे ..... बच्‍चों को इंजन कैसा होता है, दिखाएंगे, फिर कभी बस स्‍टेशन ले जाएंगे, बस कैसा होता है दिखाएंगे .... वो देखकर ही सीखना शुरू कर लेते हैं। मैं जानता हूं, कई प्रिंसिपल्स और शिक्षक फिर ये सोच रहे होंगे कि वो तो अपने स्कूल या कॉलेज में ऐसा ही करते हैं। मैं मानता हूं बहुत से टीचर innovative होते हैं .... और जी-जान से लगे रहते हैं। लेकिन सब जगह ऐसा नहीं होता। और इस वजह से बहुत से छात्र practical knowledge से दूर रह जाते हैं। हम इन अच्‍छी चीजों को जितना ज्‍यादा फैलाएंगे हमारे साथी शिक्षकों को सीखने का मौका मिलेगा। टीचरों का experience जितना ज्‍यादा शेयर होगा वो बच्‍चों के लाभ में जाएगा।

साथियों, हमारे देश भर में हर क्षेत्र की अपनी कुछ न कुछ खूबी है, कोई न कोई पारंपरिक कला, कारीगरी, products हर जगह के मशहूर हैं। जैसे कि बिहार में भागलपुर की साड़ियाँ, वहाँ का सिल्क देश भर में फेमस है। स्टूडेंट्स उन करघों, हथकरघों में visit करें, देखें आखिर ये कपड़े बनते कैसे हैं? उनको सीखाया जाए जरा तुम .... उसमें जो काम कर रहे हैं, उनसे सवाल पूछो। क्‍लासरूम में सवाल सीखाकर के ले जाएं। फिर उनको कहा जाए बताओ तुमने क्‍या पूछा था ... क्‍या जवाब मिला। यही तो लर्निंग है। जब वह स्‍पेसिफिक पूछेगा – आप धागा कहां से लाते हो, धागे का रंग कैसे होता है, साड़ी पर चमक कैसी आती है। वो बच्‍चा अपनी मर्जी से पूछने लगेगा, आप देखिए उसको बहुत कुछ सीखने को मिल जाएगा।

स्कूल में भी ऐसे skilled लोगों को बुलाया जा सकता है। वहाँ उनकी प्रदर्शनी, workshop लगाई जा सकती है। मान लीजिए गांव में जो मिट्टी के बर्तन बनाने वाले लोग हैं, एक दिन उनको बुला लिया, स्‍कूल के बच्‍चे देखें, फिर उनसे सवाल-जवाब करें, आप देखिए वो आराम से सीख लेगा। विद्यार्थियों की जिज्ञासा भी बढ़ेगी और जानकारी भी, सीखने में रुचि भी बढ़ेगी। ऐसे कितने ही प्रोफेशन हैं जिनके लिए deep skills की जरूरत होती है, लेकिन हम उन्हें महत्व ही नहीं देते, कई बार तो उन्हें छोटा समझ लेते हैं। अगर students इन्हें देखेंगे जानेंगे तो एक तरह का भावनात्मक जुड़ाव होगा, skills को समझेंगे, उनकी respect करेंगे।

हो सकता है बड़े होकर इनमें से कई बच्चे ऐसे ही उद्योगों से जुड़ें, हो सकता है वही बड़े मालिक बन जाएं, बड़े उद्योगपति बन जाएं। बच्‍चों में संवेदना जगाने की बात जब आती है .... अब बच्‍चे ऑटो-रिक्‍शा में स्‍कूल आते हैं। क्‍या कभी उन बच्‍चों को पूछा कि उस ऑटो-रिक्‍शावाले का नाम क्‍या है, जो तुम्‍हें रोज ले आता है .... उसका घर कहां है .... क्‍या उसके जन्‍मदिन को कभी मनाया था क्‍या … क्‍या कभी उसके घर गए थे क्‍या ... क्‍या वह आपके मां-बाप को मिला था क्‍या। फिर बच्‍चों को कहो तुम्‍हारे जो रिक्‍शा ड्राइवर हैं.. उससे 10 सवाल पूछ करके आओ ... फिर क्‍लास में सबको बताओ कि मेरा रिक्‍शावाला ऐसा है, वो इस गांव का है, वो यहां कैसे आया। फिर बच्‍चों को उसके प्रति संवेदना प्रकट होगी। वरना उन बच्‍चों को मालूम ही नहीं, उनको लगता है मेरे पिताजी पैसे देते हैं इसलिए ऑटो-रिक्‍शावाला मुझे लेके आता है। उसे मन में वो भाव नहीं जगता है कि ऑटो-रिक्‍शा वाला मेरी जिंदगी बना रहा है। मेरे जिंदगी को बनाने के लिए वह कुछ कर रहा है, ये संवेदना पैदा होगी।

उसी प्रकार से अगर कोई दूसरा प्रोफेशन भी चुनता है, इंजीनियर भी बनता है तो उसके दिमाग में रहेगा कि फलां पेशे को बेहतर बनाने के लिए क्या इनोवेशन किया जा सकता है? इसी तरह, Hospitals की, फायर Stations की या फिर दूसरी किसी जगह की visit भी learning का हिस्सा हो सकती है। बच्‍चों को ले जाना चाहिए, दिखाना चाहिए .... उनको पता चलेगा डॉक्‍टर भी कितने प्रकार के होते हैं। Dentist क्‍या होता है .... आंख का हॉस्पिटल कैसा होता है। साधन देखेगा, आंख चेक करने का मशीन कैसा होता है .... उसको जिज्ञासा होगी, वह सीखेगा।

साथियों, राष्ट्रीय शिक्षा नीति को इसी तरह तैयार किया गया है ताकि Syllabus को कम किया जा सके और fundamental चीज़ों पर ध्यान केन्द्रित किया जा सके। लर्निंग को Integrated एवं Inter-Disciplinary, Fun based और complete experience बनाने के लिए एक National Curriculum Framework develop किया जायेगा।ये भी तय किया गया है कि 2022 में जब हम आजादी के 75 वर्ष मनाएंगे, तो हमारे Students इस नए करिकुलम के साथ ही नए भविष्य की तरफ कदम बढ़ाएंगे। ये भी forward looking, future ready और scientific curriculum होगा। इसके लिए सभी के सुझाव लिए जाएंगे, और सभी के recommendations और modern education systems को इसमें समाहित किया जायेगा।

साथियों, भविष्य की दुनिया, हमारी आज की दुनिया से काफी अलग होने वाली है। हम इसकी जरूरतों को अभी से देख सकते हैं, सेंस कर सकते हैं। ऐसे में हमें अपने Students को 21St century की skills के साथ आगे बढ़ाना है। ये 21St Century की Skills क्या होंगी? ये होंगी- -Critical Thinking -Creativity -Collaboration -Curiosity और Communication. हमारे students, sustainable future, sustainable science को समझें, उस दिशा में सोचें, ये सब आज समय की मांग है, बहुत जरूरी है। इसलिए, छात्र शुरुआत से ही कोडिंग सीखें, Artificial Intelligence को समझें, Internet of Things, Cloud Computing, Data Science और Robotics से जुड़ें, ये सब हमें देखना होगा।

साथियों, हमारी पहले की जो शिक्षा नीति रही है, उसने हमारे students को बहुत बांध भी दिया था। जैसे उदाहरण के तौर पर लें तो जो विद्यार्थी Science लेता है वो Arts या Commerce नहीं पढ़ सकता था। Arts-Commerce वालों के लिए मान लिया गया कि ये History, Geography, Accounts इसलिए पढ़ रहे हैं क्योंकि ये साइन्स नहीं पढ़ सकते। लेकिन क्या Real World में, हमारे आपके जीवन में ऐसा होता है कि केवल एक ही फील्ड की जानकारी से सारे काम हो जाएँ? हकीकत में सभी विषय एक दूसरे से जुड़े हुये हैं। हर Learning inter-related है। Students कोई एक विषय ले लेते हैं, बाद में उन्हें लगता है कि वो दूसरे किसी क्षेत्र में ज्यादा बेहतर कर सकते हैं। लेकिन वर्तमान व्यवस्था, बदलाव का, नई संभावनाओं से जुडने का अवसर ही नहीं देता। बहुत से बच्चों के ड्रॉप आउट होने का ये भी एक बड़ा कारण रहा है। इसीलिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति छात्रों को कोई भी विषय चुनने की आजादी दी गयी है। मैं इसे बहुत बड़े सुधार के तौर पर देखता हूँ। अब हमारे युवाओं को Science, Humanity या Commerce में से किसी एक ब्रैकेट में फिट नहीं होना पड़ेगा।देश के हर student को, उसकी प्रतिभाओं को अब पूरा मौका मिलेगा।

साथियों, राष्ट्रीय शिक्षा नीति एक और बहुत बड़ी समस्या को भी address करती है। यहाँ तो बड़े बड़े अनुभवी और जानकर लोग उपस्थित हैं,आपने जरूर महसूस किया होगा कि हमारे देश में learning driven education की जगह Marks और Marks-Sheet education हावी है। Learn तो बच्चे तब भी कर रहे होते हैं जब वो खेल रहे होते हैं, जब वो परिवार में बात कर रहे होते हैं, जब वो बाहर आपके साथ घूमने जाते हैं। लेकिन अक्सर माता-पिता भी बच्चों से ये नहीं पूछते कि क्या सीखा? वो भी यही पूछते हैं कि मार्क्स कितने आए? टेस्ट में नंबर कितने नंबर आए? एक टेस्ट, एक मार्क्सशीट क्या बच्चों के सीखने की, उनके मानसिक विकास की Parameter हो सकती है? आज सच्चाई ये है कि मार्क्सशीट, मानसिक प्रैशरशीट बन गई है और परिवार की प्र‍ेस्टिजशीट बन गयी है। पढ़ाई से मिल रहे इस तनाव को, मेंटल स्ट्रैस से अपने बच्चों को निकालना राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक मुख्य उद्देश्य है।

परीक्षा इस तरह होनी चाहिए कि छात्रों पर इसका बेवजह का दबाव न पड़े। और कोशिश ये है कि केवल एक परीक्षा से छात्र-छात्राओं का मूल्यांकन न किया जाए, बल्कि Self-assessment, Peer-To-Peer assessment से छात्रों के विकास के विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन हो। इसलिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मार्क्सशीट की जगह Holistic report card पे बल दिया गया है। Holistic report card विद्यार्थियों के unique potential, aptitude, attitude, talent, skills, efficiency, competency और possibilities की detailed sheet होगी। मूल्यांकन प्रणाली के संपूर्ण सुधार के लिए एक नये राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र “परख” की स्थापना भी की जाएगी।

साथियों, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आने के बाद से ये भी चर्चा काफी तेज है कि बच्चों को पढ़ाने की भाषा क्या होगी? इसमें क्या बदलाव किया जा रहा है?यहाँ हमें एक ही वैज्ञानिक बात समझने की जरूरत है कि भाषा शिक्षा का माध्यम है, भाषा ही सारी शिक्षा नहीं है। किताबी पढ़ाई में फंसे-फंसे कुछ लोग ये फर्क ही भूल जाते हैं। इसलिए, जिस भी भाषा में बच्चा आसानी से सीख सके, चीजें Learn कर सके, वही भाषा पढ़ाई की भाषा होनी चाहिए। ये देखना जरूरी है कि जब बच्चे को हम पढ़ा रहे हैं, तो जो हम बोल रहे हैं, क्या वो समझ पा रहा है? समझ रहा तो कितनी आसानी से समझ रहा है? कहीं ऐसा तो नहीं कि विषय से ज्यादा बच्चे की ऊर्जा भाषा को समझने में खप रही है? इन्हीं सब बातों को समझते हुए ज़्यादातर देशों में भी आरंभिक शिक्षा मातृभाषा में ही दी जाती है।

आप में से बहुत से लोग ये जानते होंगे कि 2018 में Programme for International Student Assessment- PISA की top ranking वाले जितने देश थे, जैसे कि Estonia, Ireland, Finland, Japan, South Korea, Poland, इन सब देशों में प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में दी जाती है। ये बात स्वाभाविक है कि जिस भाषा को सुनते हुये बच्चे पलते हैं, जो भाषा घर की भाषा होती है, उसी में बच्चों की सीखने की गति बेहतर होती है। वर्ना होता ये है कि बच्चे जब किसी दूसरी भाषा में कुछ सुनते हैं, तो पहले वो उसे अपनी भाषा में translate करते हैं, फिर उसको समझते हैं। बाल मन में ये बड़ी उलझन पैदा करती है, बहुत स्ट्रेस देने वाली बात होती है। इसका एक और पहलू है। हमारे देश में, खासकर ग्रामीण क्षेत्र में, पढ़ाई मातृभाषा से अलग होने पर ज़्यादातर parents बच्चों की पढ़ाई से जुड़ भी नहीं पाते। ऐसे में बच्चों के लिए पढ़ाई एक सहज प्रक्रिया नहीं रह जाती, बल्कि पढ़ाई स्कूल की एक duty बन जाती है। पेरेंट्स और स्कूल के बीच में एक लाइन खिच जाती है।

इसलिए, जहां तक संभव हो, कम से कम ग्रेड फाइव, कक्षा पांच तक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा, स्थानीय भाषा रखने की बात राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कही गई है। मैं देखता हूं, कुछ लोग इसे लेकर भ्रम में भी रहते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा के अलावा कोई अन्य भाषा सीखने, सिखाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। अंग्रेजी के साथ साथ जो भी विदेशी भाषाएँ अंतर्राष्ट्रीय पटल पर सहायक हैं, वो बच्चे पढ़ें, सीखें, तो अच्छा ही होगा। लेकिन साथ साथ सभी भारतीय भाषाओं को भी promote किया जाएगा, ताकि हमारे युवा देश के अलग अलग राज्यों की भाषा, वहाँ की संस्कृति से परिचित हो सकें, हर क्षेत्र का एक दूसरे से रिश्ता मजबूत हो।

साथियों, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की इस यात्रा के पथप्रदर्शक आप सभी हैं, देश के शिक्षक हैं। चाहे नए तरीके से learning हो, चाहे ‘परख’ के जरिए नई परीक्षा हो, students को इस नई यात्रा पर लेकर शिक्षकों को ही जाना है। क्योंकि, प्लेन कितना भी advance क्यों न हो, उड़ाता Pilot ही है। इसलिए, ये सभी शिक्षकों को भी काफी कुछ नया Learn करना है, काफी कुछ पुराना Unlearn भी करना है। 2022 में जब आजादी के 75 वर्ष पूरे होंगे, तब भारत का हर student, राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा तय गए दिशा-निर्देशों में पढ़े, ये हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी है। मैं सभी शिक्षकों, प्रशासकों, स्वयं सेवी संगठनों और अभिभावकों से आह्वान करता हूँ कि वे इस राष्ट्रीय मिशन में अपना सहयोग दें। मुझे पूरा विश्वास है कि आप सभी शिक्षकों के सहयोग से, देश राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सफलता पूर्वक लागू कर पाएगा।

मैं अपनी बात समाप्‍त करने से पहले शिक्षकों के माध्‍यम से एक बात आग्रह से कहना चाहूंगा कि कोरोना के काल में आप भी औरों को जिन मर्यादाओं का पालन करना है – दो गज दूरी की बात हो, मास्‍क या फेस्‍क कवर की बात हो, अपने परिवार में बुजुर्गों की पूरा ख्‍याल रखने की बात हो, स्‍वच्‍छता की बात हो, ये सब लड़ाई के लड़ने का नेतृत्‍व भी हम सबको करना है। और शिक्षक बड़ी आसानी से कर सकते हैं, बड़ी आसानी से बात घर-घर पहुंचा सकते हैं। और शिक्षक जब कोई बात करते हैं तो स्‍टूडेंट बहुत विश्‍वास के साथ मानता है। स्‍टूडेंट के सामने, प्रधानमंत्री ने ये कहा, कहोगे और मेरे शिक्षक ने ये कहा कहोगे, तो मैं दावे से कहता हूं ..... स्‍टूडेंट प्रधानमंत्री ने कहा है, उस पर चार सवाल करेगा। लेकिन शिक्षक ने कहा है, उस पर एक भी सवाल नहीं करेगा। घर जाकर बताएगा मेरे टीचर ने कहा है। यह श्रद्धा, यह विश्‍वास बालक के मन में पड़ा हुआ है। ये आपकी बहुत बड़ी पूंजी है, बहुत बड़ी शक्ति है। और इस क्षेत्र से जुड़े हुए कई पीढि़यों ने तपस्‍या करके इसको विरासत में दिया है। और जब ऐसी चीजें आपको विरासत में मिली हैं तब आपका दायित्‍व भी बहुत बढ़ जाता है।

मुझे विश्‍वास है, मेरे देश का शिक्षकगण, भारत के उज्‍ज्‍वल भविष्‍य के लिए इसको एक मिशन के रूप में लेगा, मन लगाकरके करेगा। देश का एक-एक बालक आपकी शिक्षा को ग्रहण करने के लिए तैयार होता है, आपके आदर्शों का पालन करने के लिए तैयार होता है, आपके इरादों को चरितार्थ करने के लिए तैयार होता है। वो दिन-रात मेहनत करने के लिए तैयार होता है। एक बार शिक्षक कह दे तो वो सब कुछ मानने को तैयार होता है। मैं समझता हूं कि मां-बाप, शिक्षक, शिक्षक संस्‍था, सरकारी व्‍यवस्‍था, हम सबको मिल करके इस काम को करना है। मुझे विश्‍वास है, ये जो ज्ञान यज्ञ चल रहा है, ये जो शिक्षा पर्व चल रहा है, 5 सितम्‍बर से ले करके लगातार अलग-अलग क्षेत्र के लोग इसको आगे बढ़ाने के काम में लगे हैं। ये प्रयास अच्‍छे परिणाम लाएगा ... समय से पहले परिणाम लाएगा। और सामूहिक कर्तव्‍य के भाव के कारण होगा।

इस विश्‍वास के साथ मैं एक बार फिर आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं। आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और हमेशा-हमेशा मैं टीचर को नमन करता हूं। आज वर्चुअल माध्‍यम से भी आप सबको नमन करते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं।

बहुत बहुत धन्यवाद !!!

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पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा पर भारत-नीदरलैंड का जॉइंट स्टेटमेंट
May 17, 2026

नीदरलैंड के प्रधानमंत्री श्री रॉब जेटेन के निमंत्रण पर, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 16-17 मई 2026 को नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा की। यह प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड की दूसरी यात्रा थी।

16 मई की सुबह, नीदरलैंड के महामहिम राजा विलेम अलेक्जेंडर और महारानी मैक्सिमा ने हेग स्थित रॉयल पैलेस हुइस टेन बॉश में प्रधानमंत्री मोदी का द्विपक्षीय बैठक के लिए स्वागत किया। महामहिम ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए दोपहर के भोजन का भी आयोजन किया।

प्रधानमंत्री जेटन और प्रधानमंत्री मोदी ने प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की, जिसके बाद 16 मई की शाम को रात्रिभोज का आयोजन किया गया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक और ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों, गहरे जन-संबंधों और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को याद किया और इन बहुआयामी संबंधों को और अधिक गहरा करने की इच्छा व्यक्त की। इस बावत, दोनों नेताओं ने नियमित बातचीत के ज़रिए, जिसमें उच्चतम राजनीतिक स्तर पर हुई बातचीत और 2023 में भारत की जी20 की अध्यक्षता और फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुए सार्थक सहयोग के ज़रिए विभिन्न सहयोग कार्यक्रमों में हाल के वर्षों में हासिल की गई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों और बढ़ती समानताओं को देखते हुए, दोनों नेताओं ने भारत और नीदरलैंड के संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया। इस संदर्भ में, उन्होंने एक रणनीतिक साझेदारी रोडमैप को अपनाने का स्वागत किया, जिसके तहत दोनों पक्ष राजनीतिक, व्यापार और निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, एआई और क्वांटम सिस्टम सहित महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों, विज्ञान एवं नवाचार, स्थिरता, स्वास्थ्य, सतत् कृषि एवं खाद्य प्रणालियों, जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन एवं ऊर्जा संक्रमण, सतत् परिवहन, समुद्री विकास, शिक्षा, संस्कृति एवं दोनों देशों की जनता के बीच संबंधों सहित सभी क्षेत्रों में नियमित और सुनियोजित सहयोग के ज़रिए कार्य करने पर सहमत हुए। दोनों पक्षों ने नीति नियोजन के क्षेत्र में आदान-प्रदान की संभावनाओं का पता लगाने पर भी सहमति जताई।

दोनों नेताओं ने इस संबंध में दिसंबर 2025 में विभिन्न प्राथमिकता वाले क्षेत्रों, जैसे रक्षा, सेमीकंडक्टर और संबंधित उभरती प्रौद्योगिकियों, डिजिटल और साइबरस्पेस में सहयोग बढ़ाने, दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों में सहयोग, संयुक्त व्यापार और निवेश समिति की स्थापना, साथ ही लोथल और एम्स्टर्डम के समुद्री संग्रहालयों के बीच सहयोग पर हुए समझौतों का स्वागत किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भविष्य के लिए समझौते का उल्लेख किया और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के अनुरूप लोकतंत्र, मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा तथा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था सहित साझा मूल्यों और सिद्धांतों को बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता ज़ाहिर की। दोनों सरकारों ने समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी सदस्यता श्रेणियों के विस्तार सहित बहुपक्षीय प्रणाली को मजबूत और सुधारने की अपनी प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया और एक निश्चित समय सीमा के भीतर लिखित वार्ता का आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने एक सुधारित और विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए भारत की स्थायी सदस्यता के लिए निरंतर मिले डच समर्थन के लिए प्रधानमंत्री जेटन को धन्यवाद दिया।

दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई और इस संबंध में इस साल जनवरी में पारस्परिक रूप से लाभकारी भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के लिए वार्ता के सफल समापन का स्वागत किया। उन्होंने सहमति जताई कि यह मुक्त व्यापार समझौता, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के दौर में दुनिया की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा और आर्थिक खुलेपन और नियम-आधारित व्यापार के प्रति संयुक्त प्रतिबद्धता को उजागर करेगा। दोनों नेताओं ने सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर एक साथ हस्ताक्षर का भी स्वागत किया, जो सुरक्षा और रक्षा पर यूरोपीय संघ और भारत के संवाद और सहयोग को मजबूत करेगा और समुद्री सुरक्षा, साइबर, आतंकवाद-विरोधी और रक्षा औद्योगिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में ठोस परिणाम देगा।

दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान, नौवहन की स्वतंत्रता और दवाब तथा संघर्षों से परे एक स्वतंत्र, खुले, सुरक्षित और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्व पर सहमति व्यक्त की। इंडो-पैसिफिक पर यूरोपीय संघ की रणनीति का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री जेटन ने इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) में नीदरलैंड्स के शामिल होने और जर्मनी तथा यूरोपीय संघ के साथ क्षमता निर्माण एवं संसाधन साझाकरण का सह-नेतृत्व करने के निर्णय की घोषणा की।

यूक्रेन के मुद्दे पर, दोनों पक्षों ने जारी युद्ध पर चिंता जताई, जिसमें भारी तादाद में लोगों को कष्ट झेलने पड़ रहे हैं और जिसके वैश्विक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों पर आधारित संवाद और कूटनीति के माध्यम से यूक्रेन में व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति प्राप्त करने के प्रयासों का समर्थन जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।

दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व की स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई और क्षेत्र तथा व्यापक विश्व पर इसके गंभीर प्रभावों का उल्लेख किया, जिनमें भारी मानवीय पीड़ा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार नेटवर्क में व्यवधान शामिल हैं। दोनों नेताओं ने 8 अप्रैल 2026 को घोषित युद्धविराम का स्वागत किया। उन्होंने तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के महत्व पर बल दिया और पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व में स्थायी शांति की उम्मीद जताई। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से निर्बाध नौवहन और वैश्विक व्यापार प्रवाह का आह्वान किया और किसी भी प्रतिबंधात्मक उपाय का विरोध करते हुए इस संबंध में चल रहे प्रयासों और पहलों के प्रति अपना समर्थन दोहराया।

आर्थिक सहयोग, व्यापार एवं निवेश

दोनों नेताओं ने कहा कि नीदरलैंड-भारत आर्थिक साझेदारी, सहयोग का एक आदर्श उदाहरण है, जो स्थिरता, नवाचार और दीर्घकालिक विकास जैसी साझा प्राथमिकताओं से प्रेरित है और दोनों देशों के लिए पारस्परिक समृद्धि का सृजन करती है। उन्होंने कुशल आपूर्ति श्रृंखलाओं और खुले बाजारों के प्रति साझा प्रतिबद्धता द्वारा समर्थित दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि का स्वागत किया। विश्व स्तरीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क वाला नीदरलैंड, रॉटरडैम बंदरगाह सहित अन्य मार्गों से, भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोप का एक रणनीतिक प्रवेश द्वार है। वहीं, भारत डच कंपनियों के लिए एक विशाल और गतिशील बाजार प्रदान करता है, जिन्हें विस्तार के अवसरों, व्यापार-अनुकूल वातावरण और भारत में उपलब्ध कुशल प्रतिभाओं के विशाल भंडार से काफी लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, भारतीय व्यवसाय जल प्रबंधन, सतत् कृषि और स्मार्ट शहरों के क्षेत्र में डच विशेषज्ञता का लाभ उठा सकते हैं।

दोनों देशों के बीच मौजूदा आर्थिक सहयोग पर संतोष व्यक्त करते हुए, नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से उत्पन्न अवसरों को लेकर, विशेष रूप से आगे की वृद्धि की अपार संभावनाओं पर बल दिया। नीदरलैंड भारत के प्रमुख व्यापार और निवेश साझेदारों में से एक बना हुआ है, जो द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों की गहराई और मजबूती को दर्शाता है।

व्यापार और निवेश को और सुगम बनाने के लिए, प्रधानमंत्रियों ने सीमा शुल्क मामलों में पारस्परिक प्रशासनिक सहायता समझौते पर हस्ताक्षर का स्वागत किया, जिससे दोनों देशों के सीमा शुल्क अधिकारियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान संभव हो सकेगा और इस प्रकार सीमा शुल्क प्रवर्तन को बढ़ावा मिलेगा तथा भारत और नीदरलैंड के बीच वैध व्यापार को सुगम बनाया जा सकेगा।

दोनों नेताओं ने भारत-नीदरलैंड संयुक्त व्यापार और निवेश समिति और फास्ट ट्रैक तंत्र जैसे अन्य माध्यमों से द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को और आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने सतत् विकास, रोजगार सृजन और सुदृढ़ मूल्य श्रृंखलाओं को समर्थन देने के लिए निवेश सुगमता बढ़ाने और नवाचार तंत्र को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने पर सहमति जताई।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने स्टार्टअप और नवाचार में सहयोग की प्रबल संभावनाओं पर ज़ोर देते हुए कहा कि भारत और नीदरलैंड में विकसित समाधानों को वैश्विक स्तर पर, जिनमें भारतीय और यूरोपीय संघ के बाजार भी शामिल हैं, लागू किया जा सकता है। उन्होंने दोनों देशों की स्टार्टअप व्यवस्थाओं को और अधिक जोड़ने, आदान-प्रदान को सुगम बनाने और डिजिटल सॉफ्ट-लैंडिंग कार्यक्रमों के साथ-साथ व्यापार मिशनों, नवाचार मिशनों और प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलनों में भागीदारी बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग

दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग को लेकर आशय पत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया और संबंधित रक्षा मंत्रालयों के बीच नियमित बातचीत और स्टाफ स्तर की वार्ताओं के ज़रिए दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को गहरा करने के महत्व पर बल दिया, ताकि सूचनाओं के आदान-प्रदान, यात्राओं, अनुसंधान, नवाचार और प्रशिक्षण गतिविधियों का बेहतर ढंग से समन्वय किया जा सके। उन्होंने दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग के दायरे को और अधिक विस्तारित करने की दिशा में आगे बढ़ने पर भी सहमति व्यक्त की।

दोनों नेता यूरोपीय संघ के तंत्रों और अन्य साझेदारों के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी एकमत हुए और साथ ही उन्होंने एक रक्षा औद्योगिक रोडमैप स्थापित करने की संभावनाओं का पता लगाने पर भी सहमति जताई, जिसमें दोनों देशों के सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सह-विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सह-उत्पादन के लिए संयुक्त उद्यमों की स्थापना के ज़रिए रक्षा उपकरण, प्रणालियों, घटकों और अन्य प्रमुख क्षमताओं के निर्माण हेतु रक्षा औद्योगिक सहयोग को निर्धारित किया गया है।

दोनों नेताओं ने सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी उपायों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के अन्य पारस्परिक रूप से सहमत मामलों सहित पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा मुद्दों पर दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्रों के बीच नियमित आदान-प्रदान शामिल है।

दोनों नेताओं ने वार्षिक द्विपक्षीय साइबर परामर्शों पर संतोष व्यक्त किया और साथ ही ऑनलाइन साइबर स्कूल के 8वें सत्र के आयोजन को एक खुले, स्वतंत्र और सुरक्षित साइबरस्पेस को सुनिश्चित करने के लिए, दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने का साधन बताया। इस संदर्भ में, नेताओं ने साइबरस्पेस में सहयोग बढ़ाने के लिए आशय पत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया, जिसमें बहुपक्षीय मंचों में घनिष्ठ समन्वय और क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान के ज़रिए साइबर खतरों और साइबर अपराध का मुकाबला करने के लिए संयुक्त प्रयास शामिल हैं।

दोनों नेताओं ने एक खुले, स्वतंत्र, सुरक्षित, स्थिर, सुलभ और शांतिपूर्ण सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) वातावरण के महत्व पर जोर दिया, जिसे नवाचार और आर्थिक विकास का प्रवर्तक माना जाता है। इस संबंध में प्रधानमंत्री मोदी ने 19 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में नीदरलैंड की रचनात्मक भागीदारी के लिए उसे धन्यवाद दिया।

प्रधानमंत्री जेटन ने अप्रैल 2025 में भारत के जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में नागरिकों पर हुए जघन्य और घृणित आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद, जिसमें सीमा पार आतंकवाद भी शामिल है, के खिलाफ लड़ाई में भारत के प्रति नीदरलैंड की एकजुटता और अटूट समर्थन व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने दोषियों को जवाबदेह ठहराने का आह्वान किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की साफ तौर पर निंदा की। उन्होंने आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता का दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया और आतंकवाद का मुकाबला करने में दोहरे मापदंडों को भी अस्वीकार किया।

दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र और एफएटीएफ सहित द्विपक्षीय और बहुपक्षीय तंत्रों के ज़रिए व्यापक और सतत् तरीके से आतंकवाद का मुकाबला करने की ज़रुरत पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा प्रतिबंधित समूहों और उनके प्रतिनिधियों, सहयोगियों, प्रायोजकों, समर्थकों और वित्तपोषकों सहित सभी आतंकवादियों और आतंकवादी समूहों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया। दोनों पक्षों ने सभी देशों से आतंकवादी सुरक्षित ठिकानों और बुनियादी ढांचे को समाप्त करने, आतंकवादी नेटवर्क और उनके वित्तपोषण को बाधित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार आतंकवाद के अपराधियों को शीघ्रता से न्याय के कटघरे में लाने की दिशा में काम जारी रखने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री जेटन ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र व्यापक सम्मेलन (सीसीआईटी) स्थापित करने के भारत के प्रयासों के प्रति समर्थन व्यक्त किया।

दोनों नेताओं ने मानवरहित विमान प्रणालियों, आतंकवादियों द्वारा आभासी संपत्तियों के उपयोग, आतंकवादी संगठनों और सूचना तथा संचार प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग से बढ़ते खतरों पर भी चिंता जताई।

आतंकवाद से निपटने और इस संबंध में वैश्विक सहयोग के ढांचे को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को स्वीकार करते हुए, दोनों नेताओं ने सभी देशों द्वारा धन शोधन विरोधी और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।

उभरती प्रौद्योगिकियां, नवाचार, विज्ञान और शिक्षा

दोनों नेताओं ने सेमीकंडक्टर और संबंधित उभरती प्रौद्योगिकी पर साझेदारी के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया, जो निवेश, अनुसंधान और प्रतिभाओं के आदान-प्रदान सहित सेमीकंडक्टर क्षेत्र में गहन सहयोग के लिए ढांचा प्रदान करता है।

दोनों नेताओं ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में जारी सहयोग का भी स्वागत किया, जिसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी शुरू करने और सरकारों, व्यवसायों और ज्ञान संस्थानों की विशेषज्ञता को जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह सहयोग विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पर पहले से सक्रिय संयुक्त कार्य समूह के ज़रिए संयुक्त अनुसंधान और विकास परियोजनाओं, प्रतिभा गतिशीलता और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सुगम बनाता है। दोनों नेताओं ने पिछले वर्षों में संयुक्त रूप से शुरू किए गए लगभग पचास बड़े अनुसंधान और नवाचार कार्यक्रमों पर विचार किया और साझा समाधानों के साथ सामान्य सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के मकसद से प्रमुख सहायक प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में निरंतर सहयोग के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया।

दोनों नेताओं ने डच सेमीकंडक्टर कॉम्पिटेंस सेंटर को भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) से जोड़ने की पहल का भी स्वागत किया, जिसका मकसद सहयोग, प्रौद्योगिकी और प्रतिभा विकास के ज़रिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र, खास तौर पर उद्योगों, स्टार्टअप्स, स्केल-अप्स, एसएमई और उनके आपूर्तिकर्ताओं को समर्थन देना और मज़बूत करना है। इसके अलावा, दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-डच सेमीकंडक्टर ऑनलाइन स्कूल और इसके अगले चरण के लिए सराहना की।

दोनों नेताओं ने आइंडहोवेन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और यूनिवर्सिटी ऑफ ट्वेंटे तथा छह प्रमुख भारतीय तकनीकी संस्थानों (आईआईएससी बैंगलोर, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी गुवाहाटी और आईआईटी मद्रास) के बीच सेमीकंडक्टर और संबंधित प्रौद्योगिकियों में ब्रेन ब्रिज के लिए सहयोग ज्ञापन को अपनाने का स्वागत किया, जिसमें NXP, ASML, TATA और CG Semi की औद्योगिक भागीदारी है। इससे दोनों पक्षों की अकादमिक और उद्योग भागीदारी के साथ अनुसंधान विकास तथा प्रतिभा विकास को गति मिलेगी।

सतत् नवाचार के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के रणनीतिक महत्व और मज़बूत एवं टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता को पहचानते हुए, दोनों नेताओं ने अन्वेषण, अनुसंधान एवं नवाचार, मूल्य श्रृंखलाओं के एकीकरण, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, चक्रीय प्रक्रिया और ईएसजी मानकों तथा संबंधित आकलन सहित महत्वपूर्ण खनिजों की मूल्य श्रृंखला में सहयोग को और मज़बूत करने में अपनी पारस्परिक रुचि व्यक्त की। इस संदर्भ में, नेताओं ने महत्वपूर्ण खनिजों पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने भारत के शिक्षा मंत्रालय और नीदरलैंड के शिक्षा, संस्कृति और विज्ञान मंत्रालय के बीच उच्च शिक्षा पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। इस समझौता ज्ञापन का मकसद दोनों देशों के उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच उनकी संबंधित शैक्षणिक प्राथमिकताओं और ज़रुरतों के मुताबिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

दोनों नेताओं ने डच और भारतीय विश्वविद्यालयों के बीच चल रहे संस्थागत सहयोग पर भी संतोष जताया, जिसमें हाल ही में हुए सहयोग शामिल हैं, जैसे कि ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय और नालंदा विश्वविद्यालय; डेल्फ़्ट प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और मुंबई महानगर क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण; सर्वे ऑफ इंडिया और आईटीसी, ट्वेंटे विश्वविद्यालय; व्रीजे यूनिवर्सिटेट एम्स्टर्डम और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की और कई अन्य। दोनों नेताओं ने माना कि भारत-डच शिक्षा एवं अकादमिक नेटवर्क जैसे मंच शैक्षिक और वैज्ञानिक सहयोग को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

दोनों नेताओं ने भारत और नीदरलैंड के बीच खास तौर पर जलवायु परिवर्तन, जल समस्या, खाद्य सुरक्षा और वायु गुणवत्ता जैसी सामाजिक चुनौतियों के समाधान में अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों के उपयोग पर जारी अंतरिक्ष साझेदारी और इसे और अधिक मज़बूत करने की संभावना को स्वीकार किया।

ऊर्जा सुरक्षा और परिवर्तन / चक्रीय अर्थव्यवस्था

जैव ईंधन और जैव रसायन के क्षेत्र में सक्रिय द्विपक्षीय सहयोग को देखते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने जी20 की भारत की अध्यक्षता के दौरान शुरू किए गए वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन में नीदरलैंड के शामिल होने का स्वागत किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने जैव अर्थव्यवस्था पर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया और भारत और नीदरलैंड द्वारा सह-अध्यक्षता में चलाए गए जैव रिफाइनरी मिशन इनोवेशन प्रोग्राम की सफलता पर विचार-विमर्श किया।

'अपशिष्ट से मूल्य' पर जारी सहयोग को स्वीकार करते हुए, दोनों नेताओं ने कहा कि डच राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था कार्यक्रम 2023-2030 का 2025 का अद्यतन और विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (WCEF) 2026 की भारतीय अध्यक्षता, नए क्षेत्रों में साझेदारी के विस्तार का अवसर प्रदान करेगी। इसमें औद्योगिक चक्रीयता, सतत् और जलवायु-परिवर्तनीय शहरी प्रणालियों के लिए ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन, पायलट और स्केलेबल परियोजनाओं में प्रौद्योगिकी तैनाती, नवाचार की शुरुआत और व्यापार और निवेश प्रोत्साहन के अवसर शामिल हैं, जैसे कि बी2बी साझेदारी के माध्यम से, जिसके लिए डच कंपनियों को संसाधन दक्षता और चक्रीय अर्थव्यवस्था उद्योग गठबंधन (RECEIC) में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था। सतत् गतिशीलता के क्षेत्र में, स्मार्ट और अंतर-संचालनीय चार्जिंग अवसंरचना, बैटरी प्रौद्योगिकी और सिस्टम एकीकरण, मानकीकरण और खुले प्रोटोकॉल, भारी और मध्यम-भारी शून्य-उत्सर्जन वाहन, स्मार्ट शहरी गतिशीलता प्रणाली और बहुमॉडल एकीकरण और वैकल्पिक ईंधन और सक्रिय गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा किया जा सकता है।

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और नीदरलैंड के बीच साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से, दोनों नेताओं ने नवीकरणीय ऊर्जा पर समझौता ज्ञापन के तहत एक संयुक्त कार्य समूह की स्थापना का स्वागत किया। यह समझौता ज्ञापन नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग के विविध एजेंडे के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करता है, जिसमें नवोन्मेषी सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, भंडारण और ऊर्जा परिवर्तन को सुगम बनाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश शामिल हैं।

नवीकरणीय ऊर्जा पर सहयोग और द्विपक्षीय निवेश को और मजबूत करने के लिए, दोनों नेताओं ने हरित हाइड्रोजन विकास पर महत्वाकांक्षी भारत-नीदरलैंड रोडमैप का शुभारंभ किया। नेताओं ने सहमति जताई कि यह रोडमैप हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए भारत की महत्वाकांक्षा, विशाल क्षमता और प्रतिस्पर्धी लाभों का समर्थन करने में सहायक होगा, साथ ही दोनों देशों में ऊर्जा के एक स्थायी स्रोत के रूप में हरित हाइड्रोजन को तेजी से अपनाने में योगदान देगा।

इसके अतिरिक्त, नीति आयोग और नीदरलैंड के बीच ऊर्जा परिवर्तन के लिए क्षमता निर्माण पर संयुक्त आशय वक्तव्य का नवीनीकरण ऊर्जा सुरक्षा और परिवर्तन क्षेत्रों में निरंतर सहयोग सुनिश्चित करेगा।

दोनों नेताओं ने अकादमिक सहयोग को मजबूत करने के लिए ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय (आरयूजी) और 19 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन का स्वागत किया। उन्होंने भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और आरयूजी के बीच हाइड्रोजन पर पीएचडी फैलोशिप कार्यक्रम की स्थापना का भी स्वागत किया।

जल प्रबंधन

दोनों नेताओं ने भारत की जल संबंधी आवश्यकताओं और नीदरलैंड की विशेषज्ञता एवं अनुभव के बीच तालमेल को और बेहतर करने के लिए जल संबंधी रणनीतिक साझेदारी के तहत हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने जल एवं नदी प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे संयुक्त प्रयासों की सराहना की, जिनमें नमामि गंगा मिशन में साझेदारी, जलवायु परिवर्तन के दौरान शहरी नदी प्रबंधन योजनाओं के ज़रिए 'जल का लाभ उठाना', डेल्टा प्रबंधन, जल गुणवत्ता प्रबंधन, अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग और नई जल प्रौद्योगिकियों का परिचय शामिल है। दोनों नेताओं ने सुरक्षित स्वच्छता प्रबंधन और स्वच्छ जल तक समावेशी पहुंच के महत्व पर जोर दिया और स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों के अनुरूप, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जल संरक्षण और स्वच्छता संबंधी विकासात्मक परियोजनाओं के लिए सतत् वित्तपोषण में नीदरलैंड के योगदान को स्वीकार किया।

दोनों नेताओं ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड सरकार के अवसंरचना एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के सहयोग से जल उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना का स्वागत किया। नेताओं ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल राज्यों में चल रहे विभिन्न संयुक्त कार्यक्रमों के तहत हुई प्रगति पर भी ग़ौर किया।

दोनों नेताओं ने गुजरात के कल्पसर परियोजना पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की, जहां परियोजना में डच विशेषज्ञता और तकनीकी सहायता जल पर रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने में सहायक हो सकती है।

दोनों नेताओं ने भारत के नेतृत्व वाले वैश्विक आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) के शहरी जल अवसंरचना सशक्तिकरण कार्यक्रम में अब तक हुई प्रगति पर भी गौर किया, जिसके ज़रिए नीदरलैंड अपनी सदस्यता के तहत अपनी विशेषज्ञता साझा करता है। दोनों नेता राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के साथ भारतीय शहरों में और वैश्विक स्तर पर 50 से अधिक CDRI सदस्य देशों में विकसित प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

समुद्री विकास

दोनों प्रधानमंत्रियों ने समुद्री सहयोग पर हाल ही में नवीनीकृत समझौता ज्ञापन का ज़िक्र किया और भारत और नीदरलैंड के बीच अक्टूबर 2025 में हस्ताक्षरित आशय पत्र में उल्लिखित रणनीतिक 'हरित और डिजिटल समुद्री गलियारे' के विकास में सहयोग करते हुए, सुरक्षित, संरक्षित और टिकाऊ समुद्री क्षेत्र की दिशा में निरंतर सहयोग के महत्व पर बल दिया। इस संदर्भ में, उन्होंने बंदरगाहों और अंतर्देशीय जलमार्गों के स्मार्ट और टिकाऊ विकास, आपूर्ति श्रृंखला अनुकूलन और हरित बंदरगाहों और जहाजरानी के क्षेत्रों में अपनी साझेदारी को और गहरा और व्यापक बनाने पर सहमति जताई। अगले कदम के रूप में, दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक व्यापक 'हरित और डिजिटल समुद्री गलियारे पर रणनीतिक रोडमैप' विकसित करने की संभावनाओं पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की, जिसका मकसद भारत और नीदरलैंड के बीच पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ, डिजिटल रूप से एकीकृत और आर्थिक रूप से कुशल भविष्य के लिए तैयार समुद्री गलियारे की दिशा में काम करना है।

वैश्विक और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में, साझा हितों को देखते हुए, दोनों प्रधानमंत्रियों ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, जिसमें बंदरगाहों और अंतर्देशीय जलमार्गों में साइबर सुरक्षा और विविध एवं मज़बूत आपूर्ति श्रृंखलाओं (महत्वपूर्ण कच्चे माल, दवा और खाद्य पदार्थ सहित) को बढ़ावा देना शामिल है, के क्षेत्र में संबंधित सरकारी संस्थाओं, व्यवसायों और ज्ञान संस्थानों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान पर सहमति व्यक्त की।

स्वास्थ्य क्षेत्र

दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के महत्व पर बल दिया, विशेष रूप से संक्रामक रोगों और रोगाणुरोधी प्रतिरोध जैसे वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों के साथ-साथ गैर-संक्रामक रोगों के बढ़ते प्रभाव से निपटने के लिए। दोनों नेताओं ने डिजिटल स्वास्थ्य (एआई और साइबर सुरक्षा सहित) और क्षमता निर्माण में और अधिक सहयोग को प्रोत्साहित करने पर भी सहमति जताई। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर समझौता ज्ञापन के नवीनीकरण और महिला स्वास्थ्य, जलवायु और स्वास्थ्य तैयारियों के लिए क्षमता विकास और दोनों देशों में टिकाऊ स्वास्थ्य प्रणालियों पर ज्ञान के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में नई सहयोग पहलों पर विचार करने का स्वागत किया। इस नवीनीकृत समझौता ज्ञापन के आलोक में दोनों नेताओं ने डच राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संस्थान (RIVM) और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित आशय पत्र का भी स्वागत किया, जिसमें संक्रामक रोगों, वेक्टर जनित रोगों, एक स्वास्थ्य और रोग निगरानी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

दोनों नेताओं ने इस बात पर भी बल दिया कि भारत-नीदरलैंड रणनीतिक साझेदारी के ढांचे के तहत उच्च गुणवत्ता वाली, सुलभ, सुरक्षित और टिकाऊ स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 2026 में, नव हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के तहत पहली संयुक्त कार्य समूह की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें समझौता ज्ञापन और इसकी कार्य योजना के कार्यान्वयन और आगे के विकास पर चर्चा की जाएगी और शैक्षणिक सहयोग, नियामक सहयोग, व्यावसायिक जुड़ाव और बाजार पहुंच पर ज्ञान के आदान-प्रदान सहित सहयोग के प्रमुख अवसरों की पहचान की जाएगी।

कृषि एवं खाद्य प्रणालियाँ

दोनों नेताओं ने कृषि, खाद्य प्रणालियों और जिम्मेदार मूल्य श्रृंखलाओं के क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड के निरंतर सहयोग पर संतोष व्यक्त किया, जिसमें कृषि पर संयुक्त कार्य समूह के ज़रिए ज्ञान का आदान-प्रदान और अनुभव साझा करना शामिल है। नेताओं ने संरक्षित खेती, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी और मुर्गी पालन के क्षेत्र में भारत में डच कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति का स्वागत किया। नेताओं ने कृषि क्षेत्र, जिसमें कृषि-तकनीक भी शामिल है, से संबंधित भारतीय और डच कंपनियों के बीच सहयोग के अवसरों का लाभ उठाने के महत्व पर जोर दिया।

दोनों नेताओं ने डच विशेषज्ञता के साथ भारत में कृषि संबंधी क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना में हुई प्रगति की समीक्षा की। ये केंद्र उच्च-तकनीकी ग्रीनहाउस कृषि उत्पादन में प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दे रहे हैं, साथ ही छोटे किसानों के लिए बेहतर कृषि उपज और क्षमता निर्माण कर रहे हैं, जिससे अधिक टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता/उत्पादकता प्राप्त हो रही है और पानी और कृषि रसायनों का उपयोग कम हो रहा है।

दोनों नेताओं ने निरंतर सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान के ज़रिए केंद्रों के प्रभाव और प्रभावशीलता को और बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने खाद्य प्रणालियों के विभिन्न पहलुओं में व्यावसायिक शिक्षा में विस्तारित सहयोग की संभावनाओं पर भी सहमति जताई।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय तथा नीदरलैंड के कृषि, मत्स्य पालन, खाद्य सुरक्षा और प्रकृति मंत्रालय के बीच संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। साथ ही, बेंगलुरु स्थित पशुपालन उत्कृष्टता केंद्र (CEAH) में दुग्ध उत्पादन प्रशिक्षण के लिए एक भारत-डच उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना का भी स्वागत किया गया। दोनों पक्षों ने खाद्य प्रसंस्करण सहित दुग्ध उत्पादन और अन्य संबद्ध कृषि क्षेत्रों में सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई।

दोनों नेताओं ने भारत में जारी स्वच्छ पौधे कार्यक्रम के तहत स्वच्छ पौधा केंद्रों (सीपीसी) की स्थापना हेतु बागवानी क्षेत्र में भारत-डच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। इसका मकसद उच्च मूल्य वाली बागवानी और फलों की फसलों के रोगमुक्त, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की उपलब्धता को बढ़ावा देना है, ताकि भारतीय बागवानी क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और बेहतर हो सके। इस संदर्भ में, नेताओं ने भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड और नक्तुइनबाउ के बीच क्षमता निर्माण एवं समर्थन पर हुए समझौता ज्ञापन का स्वागत किया।

खाद्य सुरक्षा एवं संरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए, दोनों नेताओं ने नीदरलैंड खाद्य एवं उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा प्राधिकरण (NVWA) और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के बीच हुए समझौता ज्ञापन का स्वागत किया।

जनसंपर्क एवं संस्कृति

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-नीदरलैंड संबंधों के मजबूत स्तंभ माने जाने वाले आपसी संबंधों की प्रगाढ़ता को भी स्वीकार किया। प्रधानमंत्री जेटन ने नीदरलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय द्वारा डच समाज में किए गए योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने विशेष रूप से युवा, शिक्षाविद, पेशेवर कार्यबल, खेल और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के ज़रिए दोनों देशों के बीच आपसी संपर्क को और बढ़ावा देने के अपने संकल्प को दोहराया।

दोनों देशों के बीच निष्पक्ष प्रवासन और आवागमन को सुगम बनाने के महत्व को देखते हुए, दोनों नेताओं ने प्रवासन और आवागमन पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया।

दोनों पक्षों ने अवैध प्रवासन और मानव तस्करी को रोकने और उससे निपटने तथा उच्च कुशल पेशेवरों के निष्पक्ष आवागमन को प्रोत्साहित करने के लिए सहयोग को और मजबूत करने पर भी सहमति जताई। यह दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय मानकों द्वारा निर्देशित है, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रवासी श्रमिकों के साथ गरिमा और सम्मान के साथ व्यवहार किया जाए, जिसमें निष्पक्ष आवागमन, पारदर्शी वीजा प्रक्रिया और श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा शामिल है।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने डिजाइन, प्रदर्शन कला, दृश्य कला, संग्रहालय और विरासत सहयोग जैसे क्षेत्रों में आपसी ज्ञान को बढ़ाने के लिए प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक पहलों को बढ़ावा देने सहित, उन्नत सांस्कृतिक सहयोग के ज़रिए दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करने पर सहमति व्यक्त की और सांस्कृतिक सहयोग पर एक संयुक्त कार्य समूह की संभावित स्थापना पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

आपसी सांस्कृतिक सम्मान के महत्व पर जोर देते हुए, दोनों नेताओं ने ड्रेन्ट्स संग्रहालय और राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा के बीच हुए समझौता ज्ञापन के तहत ड्रेन्ट्स संग्रहालय में अमृता शेर-गिल की कलाकृतियों की प्रदर्शनी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा में वैन गॉग की एक कलाकृति और अन्य डच कलाकृतियों की वापसी प्रदर्शनी की भी उम्मीद जताई।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने सांस्कृतिक कलाकृतियों की वापसी और पुनर्स्थापन में सहयोग के महत्व पर बल दिया और इस संबंध में लीडेन विश्वविद्यालय से चोल काल की तांबे की प्लेटों की भारतीय अधिकारियों को वापसी का स्वागत किया।

भारत और नीदरलैंड के बीच सदियों पुराने द्विपक्षीय समुद्री इतिहास को याद करते हुए, दोनों नेताओं ने एम्स्टर्डम के राष्ट्रीय समुद्री संग्रहालय और भारत के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के बीच लोथल (गुजरात) में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) के विकास में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया।

वार्ता सौहार्दपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई और इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के और विकास तथा भारत-नीदरलैंड रणनीतिक साझेदारी रोडमैप के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में बहुआयामी सहयोग की अपार संभावनाओं पर विश्वास व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री जेटन को उनके गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया और उन्हें यथाशीघ्र भारत आने का निमंत्रण दिया।