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एग्रीकल्चर सेक्टर में R&D को लेकर ज्यादातर योगदान पब्लिक सेक्टर का ही है,अब समय आ गया है कि इसमें प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़े : प्रधानमंत्री
छोटे किसानों का सशक्तीकरण सरकार के विजन के केंद्र में है : प्रधानमंत्री मोदी
हमें देश के एग्रीकल्चर सेक्टर का, प्रोसेस्ड फूड के वैश्विक मार्केट में विस्तार करना ही होगा : प्रधानमंत्री

नमस्कार !!

आपके सुझावों की इस वर्ष के बजट में बहुत अहम भूमिका रही है। और आपने भी जब बजट देखा होगा तो आप सबके ध्‍यान में आया होगा कि आपको सुझावों को, आपके विचारों को इसमें समाहित करने का भरसक प्रयास किया गया है। वो काम तो हो गया अब जो आज का ये संवाद है... ये संवाद कृषि सुधारों और बजट के प्रावधानों को हम आगे बढ़ाएं , तेजी से आगे बढ़ाएं, last mile delivery तक पहुंचे, निश्चित समयसीमा में करें। और बड़ी efficiency के साथ करें और फिर भी सबको जोड़ करके करें। Public-Private Partnership का perfect नमूना। centre or state coordination का perfect नमूना... ऐसा हम आज की चर्चा से निकालना चाहते हैं।

इस वेबिनार में एग्रीकल्चर, डेयरी, फिशरीज़ जैसे भांति-भांति के सेक्टर के एक्सपर्ट्स भी हैं, Public, Private और Cooperative सेक्टर के साथी भी.... आज हमें उनके विचारों का भी लाभ मिलने वाला है। और देश की Rural Economy को फंड करने वाले बैंकों के प्रतिनिधि भी हैं।

आप सभी आत्मनिर्भर भारत के लिए ज़रूरी आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण Stake-holders हैं। मैंने कुछ समय पहले संसद में इस बात को विस्तार से रखा था कि कैसे देश के छोटे किसानों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बीते वर्षों में अनेक महत्‍वपूर्ण निर्णय़ लिए हैं। इन छोटे किसानों की संख्या 12 करोड़ के करीब है और इनका सशक्तिकरण, इन छोटे किसानों का Empowerment ही भारतीय कृषि को अनेक परेशानियों से मुक्ति दिलाने में बहुत मदद करेगा। इतना ही नहीं ग्रामीण economy का driving force भी वही बनेगा।

मैं अपनी बात आगे बढ़ाने से पहले, बजट में कृषि के लिए जो किया गया है, उसकी कुछ हाईलाइट्स आपके सामने दोहराना चाहता हूं। मैं जानता हूं आप इन सभी बातों से परिचित हैं। सरकार ने इस बार Agriculture Credit Target को बढ़ाकर 16 लाख 50 हजार करोड़ रुपया कर दिया है। इसमें भी पशुपालन, डेयरी और फिशरीज सेक्टर को प्राथमिकता दी गई है। Rural Infrastructure Fund को भी बढ़ाकर 40 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है। माइक्रो इरिगेशन फंड की भी राशि बढ़ाकर दोगुनी कर दी गई है। Operation Green स्कीम का दायरा बढ़ाकर अब 22 Perishable Products तक उसको कर दिया गया है। देश की 1000 और मंडियों को e-NAM से जोड़ने का फैसला लिया गया है। इन सारे ही निर्णयों में सरकार की सोच झलकती है, सरकार का इरादा महसूस होता है और साथ-साथ सरकार के विजन का पता चलता है। और ये सारी बाते आप सबके के साथ चर्चा में से उभरी हुई हैं। जिसको हमने आगे बढ़ाया है। लगातार बढ़ते हुए कृषि उत्पादन के बीच, 21वीं सदी में भारत को Post Harvest क्रांति या फिर Food Processing क्रांति और Value Addition की आवश्यकता है। देश के लिए बहुत अच्छा होता अगर ये काम दो-तीन दशक पहले ही कर लिया गया होता। अब हमें जो समय बीत गया है, उसकी भरपाई तो करनी ही करनी है, आने वाले दिनों के लिए भी अपनी तैयारी और अपनी तेजी को बढ़ाना है।

साथियों,

अगर हम अपने डेयरी सेक्टर को ही देखें तो आज वो इतना मजबूत इसलिए है क्योंकि इतने दशकों में उसने Processing का बहुत विस्तार किया है। आज हमें एग्रीकल्चर के हर सेक्टर में, हर खाद्यान्न, हर सब्जी, फल, फिशरीज, सभी में Processing पर सबसे ज्यादा फोकस करना है और Processing की व्यवस्था... उसे सुधारने के लिए जरूरी है- किसानों को अपने गांव के पास ही स्टोरेज की आधुनिक सुविधा मिले, खेत से Processing Unit तक पहुंचने की व्यवस्था सुधारनी ही होगी, Processing unit की हैंड होल्डिंग, Farmer Producer Organisations मिलकर करें। और हम सब ये जानते हैं कि Food Processing क्रांति के लिए देश के किसानों के साथ ही देश के पब्लिक-प्राइवेट-कॉपरेटिव सेक्टर को भी पूरी ताकत से आगे सही दिशा में आगे आना होगा।

साथियों,

आज ये समय की मांग है कि देश के किसान की उपज को बाज़ार में ज्यादा से ज्यादा विकल्प मिले। सिर्फ Raw Product, या फिर सिर्फ उपज तक किसान को सीमित रखने का नुकसान देश देख रहा है। हमें देश के एग्रीकल्चर सेक्टर का, Processed Food के वैश्विक मार्केट में विस्तार करना ही होगा। हमें गांव के पास ही Agro-Industries Clusters की संख्या बढ़ानी ही होगी ताकि गांव के लोगों को गांव में ही खेती से जुड़े रोज़गार मिल सकें। Organic Clusters, Export Clusters इसकी भी इसमें बड़ी भूमिका होगी। गांव से एग्रोबेस्ड प्रोडक्ट्स शहरों की तरफ जाएं और शहरों से दूसरे इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स गांव पहुंचें, ऐसी स्थिति की तरफ हमें बढ़ना होगा। अभी भी लाखों Micro Food Processing Units देश में चल रही हैं। लेकिन उनका विस्तार करना, उनके सामर्थ्य को बढ़ाना... ये आज समय की मांग है, बहुत ज़रूरी है। One District, One Product, इस योजना, कैसे हमारे उत्पादों को विश्व बाजार तक लेकर जाए, इसके लिए हमें पूरी ताकत से जुटना होगा।

साथियों,

सिर्फ खेती ही नहीं, यहां तक कि फिशरीज सेक्टर में Processing का भी एक बहुत बड़ा स्कोप हमारे यहां है। भले ही हम दुनिया के बड़े Fish Producers और Exporters में से एक हैं, लेकिन Processed Fish के इंटरनेशनल मार्केट में हमारी उपस्थिति बहुत सीमित है। भारत की Fish, East Asia से होते हुए Processed Form में विदेशी मार्केट तक पहुंचती है। ये स्थिति हमें बदलनी ही होगी।

साथियों, इसके लिए ज़रूरी रिफॉर्म्स के अलावा करीब 11 हज़ार करोड़ रुपए की Production Linked Incentives की योजना भी सरकार ने बनाई है, जिसका लाभ इंडस्ट्री उठा सकती है। Ready to Eat, Ready to Cook फल-सब्जियां हों, Sea Food हों, मोज़्जारेला चीज़ हो, ऐसे अनेक उत्पादों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कोविड के बाद देश और विदेश में ऐसे बेहतरीन प्रोडक्ट्स की डिमांड कितनी बढ़ गई है, ये आप मुझसे बेहतर जानते हैं।

साथियों,

ऑपरेशन ग्रीन्स योजना के तहत किसान रेल के लिए सभी फलों और सब्जियों के परिवहन पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। किसान रेल भी आज देश के कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क का सशक्त माध्यम बनी है। ये किसान रेल, छोटे किसानों, मछुआरों को बड़े बाज़ार और ज्यादा डिमांड वाले बाज़ार से जोड़ने में सफल हो रही है। बीते 6 महीने में ही करीब पौने 3 सौ किसान रेलें चलाई जा चुकीं हैं और इनके ज़रिए करीब-करीब 1 लाख मीट्रिक टन फल और सब्जियां ट्रांसपोर्ट की जा चुकी हैं। ये छोटे किसानों के लिए बहुत बड़ा माध्यम तो है ही, कंज्यूमर और इंडस्ट्री को भी इसका लाभ हो रहा है।

साथियों, देश भर के जिलों के बीच में वहां पैदा होने वाले फल-सब्जियों की प्रोसेसिंग के लिए क्लस्टर्स बनाने पर बल दिया जा रहा है। इसी तरह आत्म निर्भर अभियान के तहत, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन स्कीम के तहत लाखों छोटी Food and Processing Units को मदद दी जा रही है। इसके लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर यूनिट्स लगाने तक आपकी भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है।

साथियों,

फूड प्रोसेसिंग के साथ-साथ हमें इस बात पर भी फोकस करना है कि छोटे से छोटे किसान को भी आधुनिक टेक्नॉलॉजी का लाभ कैसे मिल पाए। देश के छोटे किसान, ट्रैक्टर, पराली वाली मशीनें या फिर

दूसरी मशीनें अफोर्ड नहीं कर सकते। क्या ट्रैक्टर और दूसरी मशीनों को शेयर करने का एक संस्थागत,

सस्ता और प्रभावी विकल्प किसानों को दिया जा सकता है? आज जब हवाई जहाज़ तक एयरलाइंस को

घंटों के आधार पर किराए पर मिल जाते हैं, तो किसानों के लिए भी ऐसी व्यवस्थाओं का विस्तार देश में किया जा सकता है।

किसान की उपज मंडी तक पहुंचाने के लिए ट्रक एग्रीगेटर्स का प्रयोग तो कोरोना काल में कुछ हद तक किया भी गया था। और लोगों को अच्‍छा लगा था। इसका विस्तार खेत से मंडी या फैक्ट्रियों तक, खेत से किसान रेल तक ये कैसे हो सके, इस पर हमें काम करना होगा। खेती से जुड़ा एक और अहम पहलू सॉयल टेस्टिंग का है। बीते वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा करोड़ों किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड दिए गए हैं। अब हमें देश में सॉयल हेल्थ कार्ड की टेस्टिंग की सुविधा, गांव-गांव तक पहुंचानी है। जैसे ब्लड टेस्टिंग की लैब्स होती हैं, उनका एक नेटवर्क होता है, वैसे ही हमें सॉयल टेस्टिंग के लिए भी करना है। और उसमें private party बहुत बड़ी मात्रा में जुड़ सकती है। और एक बार सॉयल टेस्टिंग का नेटवर्क बन जाए और किसान को सॉयल टेस्टिंग की आदत हो जाए। उसके अपने खेत की जमीन की सेहत कैसी है, उस जमीन के प्रति उसके अंदर जागरूकता आएगी तो उसके सारे निर्णयों में बहुत बड़ा बदलाव आएगा। देश के किसान को जितना ज्यादा अपनी मिट्टी की सेहत के बारे में पता रहेगा, उतना ही अच्छा, अच्‍छे तरीके से वो फसल के उत्पादन पर प्रभाव पैदा करेगा।

साथियों,

एग्रीकल्चर सेक्टर में R&D को लेकर ज्यादातर योगदान पब्लिक सेक्टर का ही है। अब समय आ गया है कि इसमें प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़े। R&D की जब बात आती है तो सिर्फ बीज तक ही सीमित नहीं बल्कि मैं एक फसल से जुड़े पूरे साइंटिफिक इकोसिस्टम की बात कर रहा हूं। होलिस्टिक एप्रोच चाहिए, पूरा साइकिल होना चाहिए। हमें अब किसानों को ऐसे विकल्प देने हैं जिसमें वो गेहूं-चावल उगाने तक ही सीमित न रहे। ऑर्गेनिक फूड से लेकर सलाद से जुड़ी सब्जियों तक, ऐसी अनेक फसलें हैं, जो हम आज़मा सकते हैं। इसी तरह, मैं आपको Millets के नए मार्केट को भी Tap करने का सुझाव दूंगा। मोटे अनाज के लिए भारत की एक बड़ी ज़मीन बहुत उपयोगी है। ये कम पानी में भी बेहतरीन उपज देते हैं। Millets की डिमांड पहले ही दुनिया में बहुत अधिक थी, अब कोरोना के बाद तो ये इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में बहुत popular हो चुका है। इस तरफ किसानों को प्रोत्साहित करना भी फूड इंडस्ट्री के साथियों की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।

साथियों,

Sea Weed और Bee Wax, आज हनी का हमारे यहां धीरे-धीरे फैलाव हो रहा है। और किसान भी honey bee की दिशा में काम कर रहे हैं। ऐसे में समुद्री तट पर see weed और बाकी क्षेत्रों में honey bee और फिर bee wax इसके मार्केट को Tap करना भी समय की ज़रूरत है। Sea Weed की Farming के लिए देश में बहुत संभावनाएं हैं, क्योंकि एक बहुत बड़ी Coastline हमारे पास है। Sea Weed से हमारे मछुआरों को आमदनी का एक बड़ा माध्यम मिलेगा। इसी तरह हम शहद के व्यापार में तो बेहतर कर रहे हैं, हमें Bee Wax को लेकर भी अपनी भागीदारी और बढ़ानी है। इसमें आपका ज्यादा से ज्यादा कंट्रीब्यूशन कैसे हो सकता है, इस पर भी ... आज जब दिन भर आप चर्चा करेंगे, विचार-विमर्श करेंगे तो जरूर अच्‍छी-अच्‍छी बाते उभर कर आएंगी।

जब प्राइवेट सेक्टर की ये भागीदारी बढ़ेगी तो स्वाभाविक रूप से किसान का भरोसा भी बढ़ेगा। हमारे यहां

Contract Farming, लंबे समय से किसी ना किसी रूप में की जा रही है। हमारी कोशिश ये होनी चाहिए कि Contract Farming सिर्फ एक व्यापार बनकर ना रहे, बल्कि उस ज़मीन के प्रति हमारी ज़िम्मेदारी को भी हम निभाएं। हमें किसानों को ऐसी टेक्नॉलॉजी, ऐसे बीज उपलब्ध कराने हैं, जो ज़मीन के लिए भी Healthy हों और Nutrition की मात्रा भी उनमें अधिक हो।

साथियों,

देश की खेती में सिंचाई से लेकर बुआई, कटाई और कमाई तक, टेक्नॉलॉजी का एक संपूर्ण समाधान मिले इसके लिए हमें एकुजट प्रयास करने हैं। हमें एग्रीकल्चर सेक्टर से जुड़े स्टार्ट अप्स को बढ़ावा देना होगा, युवाओं को जोड़ना होगा। कोरोना के समय में, हमने देखा है कि कैसे अनेकों स्टार्ट-अप्स ने फलों और सब्जियों को लोगों के घर तक पहुंचाया। और ये खुशी की बात है कि ज्यादातर स्टार्ट-अप्स, देश के नौजवानों द्वारा ही शुरू किए गए हैं। हमें इन्हें लगातार प्रोत्साहित करना होगा। ये आप सभी साथियों की सक्रिय भागीदारी के बिना संभव नहीं है। किसानों को ऋण, बीज, खाद और बाज़ार, ये किसान की प्राथमिक ज़रूरतें होती हैं, जो उसे समय पर चाहिए।

बीते वर्षों में किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा हमने छोटे से छोटे किसान तक, पशुपालक और मछुआरों तक उसको बढ़ाया है, उसका विस्‍तार किया है। हमने अभियान चलाकर पिछले एक साल में 1 करोड़ 80 लाख से ज्यादा किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड दिए हैं। क्रेडिट का प्रावधान भी 6-7 साल पहले की तुलना में दोगुने से ज्यादा किया गया है। ये क्रेडिट किसानों तक समय पर पहुंचे, ये बहुत ज़रूरी है। इसी तरह ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर की फंडिंग में भी आपकी भूमिका अहम है। एक लाख करोड़ रुपए के Infra Fund का implementation भी उत्साहवर्धक है। इस कदम से खरीद से लेकर स्टोरेज तक की पूरी चेन के आधुनिकीकरण को प्रोत्साहन मिलेगा। इस बजट में तो देशभर के APMCs को भी इस फंड का लाभ देने का फैसला किया गया है। देश में जो 10 हज़ार FPOs बनाए जा रहे हैं, इससे एक बहुत ही सशक्त Co-operatives की व्यवस्था बन रही है।

साथियों,

इन संगठित प्रयासों को हम आगे कैसे बढ़ा सकते हैं, इससे जुड़े आपके सुझाव बहुत अहम हैं। इस क्षेत्र में आपका एक अनुभव है, आपका एक विजन है। सरकार की सोच, सरकार का विजन, सरकार की व्‍यवस्‍था, आपकी शक्ति... ये हमने मिला करके देश के कृषि क्षेत्र में बदलाव लाना है। इस संवाद के दौरान आप जो भी सुझाव भारत की कृषि के लिए, भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए आपकी तरफ से जो भी विचार आएंगे, उनसे सरकार को बहुत मदद मिलेगी।

आपके क्या प्लान हैं, सरकार और आप सभी साथ मिलकर कैसे चलेंगे, इस पर आप सभी खुले मन से चर्चा करें, आपके मन में जो विचार हैं, जरूर दीजिए। हां.... आपको लगता है कि बजट में ऐसा न होता तो अच्‍छा होता, ये होता तो अच्‍छा होता तो ये कोई आखिरी बजट नहीं है इसके बाद भी हम कई बजट लेकर के आने ही वाले हैं, आप लोगों ने हमे सेवा करने का मौका दिया है तो हम करते रहेंगे। इस बार जो बजट में आया है उसको आने वाले एक साल में कैसे लागू करना, जल्‍दी से जल्‍दी लागू करना, ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों तक लाभ पहुंचाना... इसी पर आज का संवाद फोकस रहेगा, केंद्रित रहेगा, बहुत लाभ होगा । मैं चाहता हूं कि आप ये खुले मन की चर्चा हमारे खेतों को, हमारे किसान को, हमारे एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर को, हमारे blue economy के क्षेत्र को, हमारे white revolution के क्षेत्र को बहुत बड़ी ताकत देगी। फिर एक बार मैं आपका बहुत-बहुत आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

धन्‍यवाद

 

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PM to interact with healthcare workers and beneficiaries of Covid vaccination programme in Goa on 18th September
September 17, 2021
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Prime Minister Shri Narendra Modi will interact with healthcare workers and beneficiaries of Covid vaccination programme, on completion of 100% first dose coverage for the adult population in Goa, on 18th September, 2021 at 10:30 AM via video conferencing.

The efforts undertaken by the state government that resulted in successful vaccination coverage include organisation of successive TikaUtasvs for community mobilization and grassroot outreach, targeted vaccination for priority groups such as vaccination at workplaces, old age homes, divyangjans etc. and continuous community engagement to remove doubts and apprehensions, among others. The state also overcame challenges like Cyclone Tauktae to ensure rapid vaccination coverage.

Chief Minister of Goa will also be present on the occasion.