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Ties between India and Korea are not just on the basis of business contact, but it is about people-to-people contact: PM
Happy to note that the Indian community is contributing to development, research and innovation in Korea: PM
Indian community all over the world are the country’s ‘Rashtradoots’: PM Modi

नमस्‍कार।

कोरिया में बसे मेरे भारतीय भाइयो और बहनों, फिर एक बार नमस्‍ते। इस गर्मजोशी के साथ मेरा स्‍वागत करने के लिए मैं आप सभी के प्रति आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

मुझे बताया गया है कि आप बहुत देर से यहां पर इंतजार कर रहे हैं। खैर, बाहर ठंड है तो अंदर अच्‍छा लगता होगा। हर चीज में से हमने पोजिटिव देखना चाहिए। आपके इस प्‍यार के सामने मैं नतमस्‍तक हूं।

Friends, ये दूसरा मौका है मेरे लिए, जब मैं कोरिया आ करके भारतीय समुदाय से मुलाकात कर रहा हूं। भारत और कोरिया के सम्‍बन्‍धों का आधार सिर्फ business contact ही नहीं है, इसका मुख्‍य आधार है people to people contact. देश से आए या फिर यहीं रह रहे आप सभी भारतीय हमारे सम्‍बन्‍ध की बुनियाद हैं। राजदूत तो एक होता है, लेकिन राष्‍ट्रदूत अनेक होते हैं। भारत और कोरिया के बीच आत्‍मीयता का ये सम्‍पर्क नया नहीं है।

प्राचीन काल में भारत की राजकुमारी सूर्यरत्‍ना हजारों किलोमीटर की यात्रा कर-करके यहां पहुंची थी। उनका विवाह यहां के राजा से हुआ। आज भी लाखों कोरियाई अपने-आपको उनके वंशज मानते हैं; और इसलिए मैं ये कह सकता हूं कि कोरियाई समाज से एक प्रकार से हम लोगों का खून का रिश्‍ता है।

कोरियाई समाज की रगों में जो खून दौड़ रहा है उसमें भारत का भी अंश है। आज भी अयोध्‍या में राजकुमारी की मूर्ति स्‍थापित है और पिछली दिवाली पर यहां की प्रथम महिला किम जोंग सुक वहां पर साक्षी रहीं। बहुत बडा शानदार कार्यक्रम हुआ अयोध्‍या में, शायद यहां भी टीवी पर टेलीकास्‍ट हुआ होगा। शायद जिस समय भगवान राम जी वापिस आए थे और अयोध्‍या में रोशनी थी, हजारों साल के बाद वैसी रोशनी फिर से अयोध्‍या में हुई थी।

Friends, भारत और कोरिया के समबन्‍धों को बौद्ध धर्म ने भी बहुत ताकत दी बहुत सशक्‍त बनाया। एक कोरियाई बौद्ध भिक्षुक हाइचो ने 8वीं शताब्‍दी में भारत की यात्रा की थी।

Friends, ये जानकर अच्‍छा लगता है कि कोरिया के विकास में भी जिस प्रकार से पुरातन चीजें हमें प्रेरणा देती हैं, आप सबका पुरुषार्थ भी बहुत बड़ा योगदान दे रहा है। यहां पर भारतीय मेधा और कौशल का बहुत सम्‍मान है। आप कोरिया में research तथा innovation में योगदान दे रहे हैं। भारत में रहकर कोरियाई कम्‍पनियों को R & D facilities प्रदान कर रहे हैं। इसके अतिरिक्‍त Indian academics, researchers तथा post doctoral students अग्रणी कोरियाई यूनिवर्सिटियों में काम कर रहे हैं या पढ़ाई कर रहे हैं। और यहां रहने वाले भारतीय कोरिया की आर्थिक समृद्धि के साथ ही यहां की संस्‍कृति और सामाजिक जीवन में भी बढ़-चढ़ करके हिस्‍सा ले रहे हैं।

Friends, कोरिया में योग को बहुत सम्‍मान और स्‍नेह मिला है। आप लोग करते होंगे, मुझे मालूम नहीं लेकिन बाहर वाले तो पूछते होंगे जब भी मिलते होंगे, अच्‍छा भाई तुम योग का क्‍या जानते हो, तो आप कहते होगे, नाक पकड़कर बैठ जाओ।

Seoul, Busan तथा अन्‍य शहरों में दो हजार से ज्‍यादा लोगों ने अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस में बहुत ही मनोयोग से, जोश के साथ हिस्‍सा लिया था। कोरिया में आप सभी होली, दिवाली, बैसाखी- एक प्रकार से सभी भारतीय उत्‍सवों को सिर्फ मानते ही नहीं बल्कि उसमें अपने कोरियाई दोस्‍तों को शामिल भी करते हैं। अब‍ यहां के शहरों में भारतीय रेस्टोरेंट्स को जगह मिलनी शुरू हो गई है, वहीं यहां के मेन्‍यु में भारतीय डिशों को भी स्‍थान मिल रहा है। यहां के लोग भी जानने लगे हैं कि इसका मतलब क्‍या होता है।

यहां पर भारतीय फिल्‍में काफी popular होती जा रही हैं। अब कोरियाई बच्‍चों के बीच कबड्डी-कबड्डी सुनने को मिल रहा है, बोल रहे हैं ना यहां के लोग कबड्डी? साल 2018 में तो एशियन गेम्‍स में कोरिया की टीम ने Silver मैडल भी जीता है, इसके लिए मैं यहां के सब लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

Friends, मैंने पहले ही कहा कि राजदूत एक ही होता है लेकिन हर हिन्‍दुस्‍तानी जहां भी हो वो राष्‍ट्रदूत होता है। एक प्रकार से आप भारत के ambassador हैं। Thirty million overseas Indians, इनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन से दुनियाभर में देश की साख बड़ी है और मैं जिस देश में भी जाता हूं, मुझे ये सुनकर बहुत खुशी होती है कि भारतीयों की प्रतिष्‍ठा कानून मानने वाले नागरिकों के तौर पर बड़े गौरवपूर्ण रूप से उल्‍लेख होता है।

Friends, हमारे देश के लिए ये साल जरा खास है, क्‍यों? क्‍यों? इसलिए खास है कि राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधीजी की 150वीं वर्षगांठ है। एक ऐसा अवसर है जब हम उन्‍हें याद करें, उनकी शिक्षाओं, उनके दर्शन से प्रेरणा हासिल करें। और मैं चाहूंगा महात्‍मा गांधी जैसा इतना विराट व्‍यक्तित्‍व विश्‍व मानव, जिस समय दुनिया में इस महापुरुष की जिस रूप में पहचान होनी चाहिए थी, दुर्भाग्‍य से नहीं हुई।

नेल्‍सन मंडेला को दुनिया जानती है, मार्टिन लूथर किंग को जानती है, केनेडी को जानती है; दुनिया अभी भी गांधी के संबंध में कहो तो- अच्‍छा कौन है, कहां से है। क्‍या हम लोगों का दायित्‍व नहीं है कि भारत के पास इस युग की इतनी बड़ी विरासत महात्‍मा गांधी; दुनिया के हर बच्‍चे की जुबान पर गांधी का नाम होना चाहिए, ये हमारा सपना होना चाहिए।

वे विश्‍व मानव थे और आज जब दुनिया बहुत सी चुनौतियों से जूझ रही है तो महात्‍मा गांधी का दर्शन और भी प्रासंगिक हो जाता है। बापू के जीवन में प्रकृति के प्रति बड़ी, बहुत ही श्रद्धा थी, उनकी भूमिका थी। अपने जीवन में पर्यावरण से तालमेल बिठाने पर उन्‍होंने बहुत जोर दिया था। कोरिया में बापू को अनोखे ढंग से श्रद्धांजलि दी जा रही है। बापू की याद में हम सभी कोरिया में 150 पौधे लगाने जा रहे हैं।

Friends, कोरिया के साथ हर दिन हमारे सम्‍बन्‍ध मजबूत रहे हैं, बढ़ते चले जा रहे हैं और मजबूती के साथ बढ़ते जा रहे हैं। कोरिया और भारत इस पूरे क्षेत्र में शांति, स्थिरता और स्‍मृद्धि को बढ़ावा देने में कदम से कदम से कदम मिला करके आगे बढ़ रहे हैं। हमारे बीच एक स्‍पष्‍ट और सहज भागीदारी है। हम मिलकर एक-दूसरे को लाभ पहुंचा सकते हैं।

इसी साझेदारी को भारतीय कम्‍पनियों की कोरिया में मौजूदगी और मजबूत कर रही है। कोरियाई ब्रांड तो भारत के घर-घर तक का हिस्‍सा बन चुका है। एलजी, सेमसंग, हुंडई जैसे कोरियाई ब्रांड तो भारत के गांव-गावं तक पहुंच गए हैं, लोगों की बोलचाल का हिस्‍सा तक बन गए हैं।

Friends, आज पूरी दुनिया भारत की तरफ उम्‍मीद-भरी निगाहों से देख रही है। हम आज दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था हैं। हमारी economy मजबूत हुई है। 2014 के पहले हम यही सुनते थे कि भारत यानी Fragile Five में एक, हम तो डूबेंगे सनम तुम्‍हे भी ले डूबेंगे। आज बड़ी economy में दुनिया में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली economy है और अगले कुछ ही साल में भारत five trillion की अर्थव्‍यवस्‍था बनने की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहा है, five trillion की क्‍लब में हम होंगे, वो दिन दूर नहीं होगा। और जब 2014 में, मैंने जब कार्यभार संभाला था, तब दुनिया में आर्थिक दृष्टि से हम 11वें नम्‍बर पर थे; आज हम छह पर पहुंच गए हैं, और पांच होने में देर नहीं लगेगी, आप विश्‍वास कीजिए। और हमारी कोशिश ये है कि अगले डेढ़ दशक में भारत top three में जगह बना ले।

Friends, भारत में पिछले साढ़े चार साल में हम ease of living और ease of doing business सुनिश्वित करने में जुटे हैं। निरन्‍तर हो रहे आर्थिक और सामा‍जिक सुधारों के कारण हम सफलता भी प्राप्‍त कर रहे हैं। सबसे बड़ा indirect tax reform, goods and service tax, GST आज सिस्‍टम का हिस्‍सा है। सरदार वल्‍लभ भाई पटेल ने देश को एक किया था उसके बाद आर्थिक रूप से देश के एकीकरण का काम जीएसटी के द्वारा हुआ है। हमने cashless economy की तरफ दृढ़ता से कदम बढ़ाए हैं, हमने fiscal discipline को कायम रखा है। इसका नतीजा ये हुआ है कि पिछले चार वर्षों मेंease of doing business के मामले में हमने global ranking में 65 स्‍थानों की छलांग लगाई है और दुनिया को अचरज हो रहा है कि इतना बड़ा देश, इतनी विविधताओं से भरा हुआ देश, developing country, ये इतना बड़ा jump लगा सकता है क्‍या?

World Bank के चेयरमैन ने मुझे especially फोन किया था- बोले हमारे लिए बड़ा surprise है कि कोई देश determination के साथ इतना बड़ा परिणाम ला सकता है, और ये हिन्‍दुस्‍तान की ताकत है कि लाए। हम बहुत ही जल्‍द- आ गए, मतलब अब मौज करो, ये मोदी नहीं कर सकता। और मैंने जिस दिन ये परिणाम आया, इतना बड़ा jump लगाया, लोग खूशी मना रहे थे; मैंने कहा, मुझे वादा करो 50 में कैसे जाएंगे? Top Fifty में भारत कैसे अपनी जगह बनाएगा?

Friends, दुनिया में भारत को investment के लिए सबसे bright spot माना जा रहा है और इसलिए देश को पिछले चार वर्षों में रिकॉर्ड two hundred sixty three billion dollar का FDI प्राप्‍त हुआ है।

Friends, आप में से कुछ लोग अभी हाल में भारत आए होंगे, आपको अपना देश बदला हुआ दिखा होगा.... बोलो ना.. आते ही नहीं हो क्‍या? अगर आए होंगे तो जरूर बदला हुआ नजर आया होगा। पिछले चार साल में भारत में तेजी से बदलाव हो रहा है।

आज भारत में करीब-करीब हर व्‍यक्ति के पास बैंक एकाउंट है। और इसके लिए सिर्फ एक हजार दिनों में 33 करोड़ से ज्‍यादा खाते खोले गए। और एक Report ये कहता है कि दुनिया में पिछले चार साल में जितने बैंक एकाउंट खोले गए, उसके fifty percent अकेले हिन्‍दुस्‍तान में खोले गए। और खाते खोले गए इतना ही नहीं, जब गरीब लोग हैं, ये बैंक में खाता खुला है तो उनको भी saving करने का मन कर गया, इन खातों में आज 12 billion dollar जमा हैं। दुनिया इस समय भारत में financial inclusion की क्रांति बड़ी बारीकी से देख रही है।

मुद्रा योजना के तहत hundred and twenty eight million लोगों को ninety billion dollar से अधिक का micro credit दिया गया है, और आपको जान करके खुशी होगी, इनमें से 74 percent ऋण लेने वाली महिलाएं हैं और अधिकतम first time हैं, बैंक का दरवाजा पहली बार देखा, बैंक से पैसा पहली बार लिया; यानी ये कितना बड़ा revolution है, आप अंदाज लगा सकते हैं।

सामाजिक सुरक्षा के लिए आज affordable pensions और insurance की ऐसी स्‍कीम हैं जिसमें 90 पैसे लेकर, यानी 90 पैसे से ले करके एक रुपये तक प्रीमियम है। 90 पैसे कुछ नहीं होता है जी। इतने से प्रीमियम से गरीब व्‍यक्ति का दो-दो लाख रुपये का इंश्‍योरेंस पक्‍का हो रहा है। आज दुनिया की सबसे बड़ी health insurance scheme, आयुष्‍मान भारत, लोग इसे मोदीकेयर के नाम से जानते हैं। 50 करोड़ लोगों को मुफ्त इलाज मिल रहा है। यानी 50 करोड़ लोगों का मतलब-अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको इनकी total population से ज्‍यादा। और ये हिन्‍दुस्‍तान कर रहा है।

दुनिया की सबसे बड़ी ऊंची मूर्ति statue of unity, आज भारत का नाम लिया जाता है। ऐसे बहुत से काम हैं जिनसे देश की प्रतिष्‍ठा को शक्ति मिली है।

Digital India से भारत के लोगों के जीवन में तेजी से बदलाव आया है। आज करीब-करीब हर भारतीय के पास biometric identity है। देश के सवा लाख गांवों में optical fiber पहुंचा है।

Friends, आज कई मामलों में भारत दुनिया के world leaders की पंक्ति में खड़ा है। विश्‍व में TB के खात्‍मे के लिए दुनिया ने 2030 target बनाया है, भारत ने ये टारगेट 2025 रखा है। और 130 करोड़ भारतीयों की तरफ से मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि हम 2025 में ये goal achieve करके रहेंगे।

आज clean energy के मामले में हम दुनिया को रास्‍ता दिखा रहे हैं। International solar alliance की स्‍थापना और गति देने की हमारी पहलों से भारत global leadership से green economy, दोनों की तरफ तेजी से बढ़ रहा है।

आज हमारा देश दुनिया में renewable energy का छठा सबसे बड़ा उत्‍पादक बन गया है। आज दुनियाभर में भारत की प्रतिष्‍ठा बढ़ी है, आप अनुभव करते हैं, नहीं करते हैं? लोग हाथ मिलाते हैं तो छोड़़ते हैं क्‍या? India! पकड़ कर रखते हैं कि नहीं, हैं? ये बदलाव आया है।

Friends, मैं आपसे ये भी आग्रह करता हूं कि आप भारत के सकारात्‍मक विकास की जानकारियों को अपने कोरियाई मित्रों के साथ साझा करें। Make in India आज Global brand बन चुका है। कोरिया जैसे मित्र देशों के साथ मिलकर हम electronics manufacturing का बहुत बड़ा hub बनना चाहते हैं।

Friends, आज भारत में एक नई ऊर्जा दिखाई पड़ रही है। इसी ऊर्जा के प्रतिनिधि के रूप में कल मुझे Seoul Peace Prize का सम्‍मान दिया जाएगा। ये पुरस्‍कार मेरा नहीं है, मैं तो बस 130 करोड़ भारतीयों की तरफ से और तीन करोड़ प्रवासी भारतीयों की तरफ से, सिर्फ उसको स्‍वीकार करने के लिए आया हूं। ये पुरस्‍कार हर भारतीय के पुरुषार्थ का सम्‍मान है, हर हिन्‍दुस्‍तानी नागरिक के पुरुषार्थ का सम्‍मान है। ये पुरस्‍कार उस मेहनत को मान्‍यता देता है जो पिछले चार साल में भारतीयों ने लगातार, दिन-रात की है।

मैं एक बार फिर से अपने देश का मान बढाने के लिए आप सभी का आभार व्‍यक्‍त करता हूं और इस देश में आपकी तरक्‍की और उपलब्धियों के लिए मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

हमारे यहां कुंभ का मेला नया नहीं है। नई पीढ़ी के लोग जाते होंगे कि नहीं जाते होंगे, मुझे मालूम नहीं है, लेकिन आपके यहां जो पुरानी पीढ़ी के लोग होंगे, उनका मन करता है कि जरूर कुम्‍भ के मेले में जाएं। हमारे देश के त्‍योहार, इस प्रकार के मेले, वो- उसका चित्र मन में आते ही एक निश्चित प्रकार की छवि उभर करके आती है। लेकिन आपको जान करके खुशी होगी कि भारत- हालांकि कुंभ का मेला छोटा नहीं होता है जी- हर दिन गंगा के तट पर यूरोप का एक देश daily इकट्ठा होता है वहां, और पूरे कुंभ के मेले के दरम्‍यान गंगा में डुबकी लगाने वालों की संख्‍या चार कोरिया से ज्‍यादा होगी। यहां की जनसंख्‍या से चार गुना लोग उस गंगा में स्‍नान करेंगे- जब ये कार्यक्रम पुरा होगा तो। इतनी बड़ी ताकत, और पहली बार ये ध्‍यान में आया है कि जो भी कुंभ के मेले में गए हैं, उन्‍होंने मेले की व्‍यवस्‍था और मेले की स्‍वच्‍छता- इसकी चर्चा व्‍यापक रूप से की है। वरना हमारा स्‍वभाव था, ऐसी चीजों की तरफ हमारा ध्‍यान नहीं था, हमको आदत हो गई, अरे चलता है, चलो यार। पहली बार न्‍यूयार्क टाइम्‍स ने कुंभ मेले की चर्चा करते हुए कुंभ मेले की स्‍वच्‍छता का विशेष रूप से उल्‍लेख किया है। ये, ये देश अगर ठान ले- क्‍या कर सकता है, इस बात का जीता-जागता सबूत‍ इस बार का कुंभ का मेला है।

दोस्‍ता, देश बहुत तेजी से बदला है, देश बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। टूरिज्‍म विकास के लिए बहुत बड़ी ताकत है। और मैं जहां भी जाता हूं, भारतीय समुदाय से मुफ्त में मिलता नहीं हूं, बदले में कुछ मांगता हूं- देंगे? सब कह देते हैं- मोदी कहां दोबारा आने वाला है, पूछने के लिए हैं और आज वो चला गया, अब चार साल के बाद, तीन साल के बाद आएगा, कौन याद रखेगा। मैं ऐसा नहीं हूं, मैं तो पूछूंगा, मांगू- आवाज ढीली हो जाती है। सचमुच में मांगूं? क्‍या आज हमारा हर हिन्‍दुस्‍तानी, जो दुनिया में रहता है- कहीं आप पढ़ते होंगे, कहीं फैक्‍टरी में काम करते होंगे, कहीं management में काम करते होंगे- तो लोकल लोगों से आपका संपर्क आता ही होगा- स्‍वाभाविक होता होगा। क्‍या आपने मन में ठानी है कि हर वर्ष कम से कम पांच non-Indian families को हिन्‍दुस्‍तान देखने के लिए धक्‍का मारूंगा? इतना कर सकते हो क्‍या? अगर सिर्फ विश्‍व में फैले हुए हिन्‍दुस्‍तानी ये तय कर लें कि मैं देश में जा करके investment करूं, हरेक के पास कहां पैसे हैं भाई, वो अपनी जिंदगी गुजारा कर लेता है, थोड़ा-बहुत बचा लेता है।

लेकिन देश सेवा में एक काम जरूर कर सकता है कि मैं एक साल में कम से कम पांच non- Indian families को भारत देखने के लिए प्रेरित करूंगा, प्रोत्‍साहित करूंगा, जाने में मदद करूंगा। आप कल्‍पना कर सकते हैं भारत का टूरिज्‍म कितना बढ़ सकता है, कितनी बड़ी सेवा आप कर सकते हैं।द्य

तो मैंने आपसे मांगा है, मैं पूछूंगा हमारे Embassy को कि कितनों ने वीजा मांगा भई, बताओ। और मेरा मत है कि हिन्‍दुस्‍तान वादा करता है तो निभाता है। लो मैं आपकी तारीफ कर रहा हूं, आप ही हंस रहे हो।

मैं आऊंगा, मैं आऊंगा, बार-बार आऊंगा, आप चिंता मत कीजिए। लेकिन जब मैं आऊंगा तब‍ फिर से पूछंगा ये। देखिए- देश की बहुत बड़ी सेवा होगी।

मैं फिर एक बार- वैसे ठंड के माहौल में भी आप यहां आए, आपने मुझे आ करके आशीर्वाद दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

धन्‍यवाद।

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प्रधानमंत्री 4 दिसंबर को देहरादून में लगभग 18,000 करोड़ रुपये की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे
December 01, 2021
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प्रधानमंत्री की परिकल्पना के अनुरूप यह परियोजनाएं उन क्षेत्रों तक सम्पर्क को बढ़ावा देने और पहुंच बढ़ाने के लिए हैं, जिन्हें कभी दुर्गम क्षेत्र माना जाता था
दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा यात्रा के समय को घटाकर 2.5 घंटे कर देगा; वन्यजीवों के लिए अवरोध रहित आवागमन के लिए यह एशिया का सबसे बड़ा एलीवेटेड वन्यजीव गलियारा होगा
उद्घाटन की जाने वाली सड़क परियोजनाओं से चारधाम सहित क्षेत्र में आसान संपर्क उपलब्ध होगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
लामबगड़ भूस्खलन शमन परियोजना गम्भीर भूस्खलन क्षेत्र में यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाएगी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 4 दिसंबर, 2021 को दोपहर बाद 1 बजे देहरादून का दौरा करेंगे और लगभग 18,000 करोड़ रुपये लागत की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण ध्यान सड़क के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए परियोजनाओं पर होगा, जो यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाएगा, और इस क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ाएगा। प्रधानमंत्री की परिकल्पना के अनुरूप यह परियोजनाएं उन क्षेत्रों में सम्पर्क को बढ़ावा देने के लिए है, जिन्हें किसी समय दुर्गम इलाका माना जाता था।

प्रधानमंत्री 11 विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इसमें दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा (ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जंक्शन से देहरादून तक) शामिल है, जिसे लगभग 8300 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। यह दिल्ली से देहरादून के बीच यात्रा के समय को छह घंटे से घटाकर लगभग 2.5 घंटे कर देगा। इसमें हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, शामली, यमुनानगर, बागपत, मेरठ और बड़ौत से सम्पर्क के लिए सात प्रमुख इंटरचेंज होंगे। इसमें वन्यजीवों के लिए बिना रोक-टोक आवागमन के लिए एशिया का सबसे बड़ा वन्यजीव एलीवेटेड गलियारा (12 किलोमीटर) होगा। साथ ही, देहरादून में दत काली मंदिर के पास 340 मीटर लंबी सुरंग वन्यजीवों पर होने वाले प्रभाव को कम करने में मदद करेगी। इसके अलावा, गणेशपुर-देहरादून खंड में वाहनों को जंगली जानवरों से टक्कर से बचने के लिए जानवरों के लिए कई रास्ते बनाए गए हैं। दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे में 500 मीटर के अंतराल पर वर्षा जल संचयन और 400 से अधिक पानी के रिचार्ज प्वाइंट की व्यवस्था भी होगी।

दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे से ग्रीनफील्ड संरेखण परियोजना, सहारनपुर के हलगोआ से हरिद्वार के भद्राबाद को जोड़ने वाली परियोजना का निर्माण 2000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया जाएगा। यह परियोजना दिल्ली से हरिद्वार तक निर्बाध सम्पर्क प्रदान करेगी और यात्रा के समय को भी कम करेगी। 1600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाली मनोहरपुर से कांगड़ी तक हरिद्वार रिंग रोड परियोजना, हरिद्वार शहर के लोगों को, विशेष रूप से भारी पर्यटक मौसम के दौरान यातायात के जाम से राहत प्रदान करेगी और कुमाऊं क्षेत्र के साथ सम्पर्क में भी सुधार करेगी।

लगभग 1700 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली देहरादून-पोंटा साहिब (हिमाचल प्रदेश) सड़क परियोजना, यात्रा के समय को कम करेगी और दोनों स्थानों के बीच निर्बाध संपर्क प्रदान करेगी। इससे अंतर्राज्यीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। नाजिमाबाद-कोटद्वार सड़क चौड़ी करने की परियोजना, यात्रा के समय को कम करेगी और लैंसडाउन से सम्पर्क में भी सुधार करेगी।

लक्ष्मण झूले के निकट गंगा नदी पर एक पुल भी बनाया जाएगा। विश्व प्रसिद्ध लक्ष्मण झूले का निर्माण 1929 में किया गया था, लेकिन अब इसे कम भार वहन क्षमता के कारण बंद कर दिया गया है। बनने वाले पुल पर पैदल चलने वाले लोगों के लिए कांच के डेक का प्रावधान होगा, साथ ही हल्के वजन के वाहनों को भी पार करने की अनुमति होगी।

प्रधानमंत्री इस दौरे पर देहरादून में बच्चों की यात्रा के लिए सड़कों को सुरक्षित बनाकर शहर को बाल हितैषी बनाने के लिए चाइल्ड फ्रेंडली सिटी प्रोजेक्ट, देहरादून की आधारशिला भी रखेंगे। देहरादून में 700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से जलापूर्ति, सड़क और जल निकासी व्यवस्था के विकास से संबंधित परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया जाएगा।

प्रधानमंत्री की परिकल्पना के अनुरूप स्मार्ट आध्यात्मिक कस्बों के विकास और पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे को उन्नत करने के लिए श्री बद्रीनाथ धाम और गंगोत्री-यमुनोत्री धाम में बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों की आधारशिला रखी जाएगी। इसके साथ ही हरिद्वार में 500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से नया चिकित्सा महाविद्यालय भी बनाया जाएगा।

प्रधानमंत्री सात परियोजनाओं का भी उद्घाटन करेंगे, जिनमें क्षेत्र में गम्भीर भूस्खलन की समस्या से निपटने के लिए यात्रा को सुरक्षित बनाने पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है। इन परियोजनाओं में लामबगड़ (जो बद्रीनाथ धाम के रास्ते में है) में भूस्खलन शमन परियोजना और एनएच-58 पर शकनिधर, श्रीनगर और देवप्रयाग में गम्भीर भूस्खलन समस्या का निवारण शामिल हैं। गम्भीर भूस्खलन क्षेत्र में लामबगड़ भूस्खलन शमन परियोजना में वर्षा से बचाने वाली दीवार और रॉकफॉल बाधाओं का निर्माण शामिल है। परियोजना का स्थान इसके सामरिक महत्व को और बढ़ाता है।

चारधाम सड़क संपर्क परियोजना के तहत देवप्रयाग से श्रीकोट तक और एनएच-58 पर ब्रह्मपुरी से कोडियाला तक सड़क चौड़ी करने की परियोजना का भी उद्घाटन किया जा रहा है।

1700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से यमुना नदी पर निर्मित 120 मेगावाट की व्यासी जलविद्युत परियोजना का भी उद्घाटन देहरादून में हिमालय संस्कृति केंद्र के साथ किया जाएगा। हिमालयन संस्कृति केंद्र में एक राज्य स्तरीय संग्रहालय होगा, 800 सीट वाला कला सभागार, पुस्तकालय, सम्मेलन कक्ष, आदि जो लोगों को सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होने के साथ-साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत की सराहना करने में मदद करेंगे।

प्रधानमंत्री देहरादून में अत्याधुनिक इत्र और सुगंध प्रयोगशाला (सुगंधित पौधों के लिए केंद्र) का भी उद्घाटन करेंगे। यहां किया गया शोध इत्र, साबुन, सैनिटाइजर, एयर फ्रेशनर, अगरबत्ती आदि सहित विभिन्न उत्पादों को बनाने के लिए उपयोगी साबित होगा और इससे क्षेत्र में संबंधित उद्योगों की स्थापना भी होगी। यह सुगंधित पौधों की अधिक उपज देने वाली उन्नत किस्मों के विकास पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।