Ties between India and Korea are not just on the basis of business contact, but it is about people-to-people contact: PM
Happy to note that the Indian community is contributing to development, research and innovation in Korea: PM
Indian community all over the world are the country’s ‘Rashtradoots’: PM Modi

नमस्‍कार।

कोरिया में बसे मेरे भारतीय भाइयो और बहनों, फिर एक बार नमस्‍ते। इस गर्मजोशी के साथ मेरा स्‍वागत करने के लिए मैं आप सभी के प्रति आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

मुझे बताया गया है कि आप बहुत देर से यहां पर इंतजार कर रहे हैं। खैर, बाहर ठंड है तो अंदर अच्‍छा लगता होगा। हर चीज में से हमने पोजिटिव देखना चाहिए। आपके इस प्‍यार के सामने मैं नतमस्‍तक हूं।

Friends, ये दूसरा मौका है मेरे लिए, जब मैं कोरिया आ करके भारतीय समुदाय से मुलाकात कर रहा हूं। भारत और कोरिया के सम्‍बन्‍धों का आधार सिर्फ business contact ही नहीं है, इसका मुख्‍य आधार है people to people contact. देश से आए या फिर यहीं रह रहे आप सभी भारतीय हमारे सम्‍बन्‍ध की बुनियाद हैं। राजदूत तो एक होता है, लेकिन राष्‍ट्रदूत अनेक होते हैं। भारत और कोरिया के बीच आत्‍मीयता का ये सम्‍पर्क नया नहीं है।

प्राचीन काल में भारत की राजकुमारी सूर्यरत्‍ना हजारों किलोमीटर की यात्रा कर-करके यहां पहुंची थी। उनका विवाह यहां के राजा से हुआ। आज भी लाखों कोरियाई अपने-आपको उनके वंशज मानते हैं; और इसलिए मैं ये कह सकता हूं कि कोरियाई समाज से एक प्रकार से हम लोगों का खून का रिश्‍ता है।

कोरियाई समाज की रगों में जो खून दौड़ रहा है उसमें भारत का भी अंश है। आज भी अयोध्‍या में राजकुमारी की मूर्ति स्‍थापित है और पिछली दिवाली पर यहां की प्रथम महिला किम जोंग सुक वहां पर साक्षी रहीं। बहुत बडा शानदार कार्यक्रम हुआ अयोध्‍या में, शायद यहां भी टीवी पर टेलीकास्‍ट हुआ होगा। शायद जिस समय भगवान राम जी वापिस आए थे और अयोध्‍या में रोशनी थी, हजारों साल के बाद वैसी रोशनी फिर से अयोध्‍या में हुई थी।

Friends, भारत और कोरिया के समबन्‍धों को बौद्ध धर्म ने भी बहुत ताकत दी बहुत सशक्‍त बनाया। एक कोरियाई बौद्ध भिक्षुक हाइचो ने 8वीं शताब्‍दी में भारत की यात्रा की थी।

Friends, ये जानकर अच्‍छा लगता है कि कोरिया के विकास में भी जिस प्रकार से पुरातन चीजें हमें प्रेरणा देती हैं, आप सबका पुरुषार्थ भी बहुत बड़ा योगदान दे रहा है। यहां पर भारतीय मेधा और कौशल का बहुत सम्‍मान है। आप कोरिया में research तथा innovation में योगदान दे रहे हैं। भारत में रहकर कोरियाई कम्‍पनियों को R & D facilities प्रदान कर रहे हैं। इसके अतिरिक्‍त Indian academics, researchers तथा post doctoral students अग्रणी कोरियाई यूनिवर्सिटियों में काम कर रहे हैं या पढ़ाई कर रहे हैं। और यहां रहने वाले भारतीय कोरिया की आर्थिक समृद्धि के साथ ही यहां की संस्‍कृति और सामाजिक जीवन में भी बढ़-चढ़ करके हिस्‍सा ले रहे हैं।

Friends, कोरिया में योग को बहुत सम्‍मान और स्‍नेह मिला है। आप लोग करते होंगे, मुझे मालूम नहीं लेकिन बाहर वाले तो पूछते होंगे जब भी मिलते होंगे, अच्‍छा भाई तुम योग का क्‍या जानते हो, तो आप कहते होगे, नाक पकड़कर बैठ जाओ।

Seoul, Busan तथा अन्‍य शहरों में दो हजार से ज्‍यादा लोगों ने अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस में बहुत ही मनोयोग से, जोश के साथ हिस्‍सा लिया था। कोरिया में आप सभी होली, दिवाली, बैसाखी- एक प्रकार से सभी भारतीय उत्‍सवों को सिर्फ मानते ही नहीं बल्कि उसमें अपने कोरियाई दोस्‍तों को शामिल भी करते हैं। अब‍ यहां के शहरों में भारतीय रेस्टोरेंट्स को जगह मिलनी शुरू हो गई है, वहीं यहां के मेन्‍यु में भारतीय डिशों को भी स्‍थान मिल रहा है। यहां के लोग भी जानने लगे हैं कि इसका मतलब क्‍या होता है।

यहां पर भारतीय फिल्‍में काफी popular होती जा रही हैं। अब कोरियाई बच्‍चों के बीच कबड्डी-कबड्डी सुनने को मिल रहा है, बोल रहे हैं ना यहां के लोग कबड्डी? साल 2018 में तो एशियन गेम्‍स में कोरिया की टीम ने Silver मैडल भी जीता है, इसके लिए मैं यहां के सब लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

Friends, मैंने पहले ही कहा कि राजदूत एक ही होता है लेकिन हर हिन्‍दुस्‍तानी जहां भी हो वो राष्‍ट्रदूत होता है। एक प्रकार से आप भारत के ambassador हैं। Thirty million overseas Indians, इनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन से दुनियाभर में देश की साख बड़ी है और मैं जिस देश में भी जाता हूं, मुझे ये सुनकर बहुत खुशी होती है कि भारतीयों की प्रतिष्‍ठा कानून मानने वाले नागरिकों के तौर पर बड़े गौरवपूर्ण रूप से उल्‍लेख होता है।

Friends, हमारे देश के लिए ये साल जरा खास है, क्‍यों? क्‍यों? इसलिए खास है कि राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधीजी की 150वीं वर्षगांठ है। एक ऐसा अवसर है जब हम उन्‍हें याद करें, उनकी शिक्षाओं, उनके दर्शन से प्रेरणा हासिल करें। और मैं चाहूंगा महात्‍मा गांधी जैसा इतना विराट व्‍यक्तित्‍व विश्‍व मानव, जिस समय दुनिया में इस महापुरुष की जिस रूप में पहचान होनी चाहिए थी, दुर्भाग्‍य से नहीं हुई।

नेल्‍सन मंडेला को दुनिया जानती है, मार्टिन लूथर किंग को जानती है, केनेडी को जानती है; दुनिया अभी भी गांधी के संबंध में कहो तो- अच्‍छा कौन है, कहां से है। क्‍या हम लोगों का दायित्‍व नहीं है कि भारत के पास इस युग की इतनी बड़ी विरासत महात्‍मा गांधी; दुनिया के हर बच्‍चे की जुबान पर गांधी का नाम होना चाहिए, ये हमारा सपना होना चाहिए।

वे विश्‍व मानव थे और आज जब दुनिया बहुत सी चुनौतियों से जूझ रही है तो महात्‍मा गांधी का दर्शन और भी प्रासंगिक हो जाता है। बापू के जीवन में प्रकृति के प्रति बड़ी, बहुत ही श्रद्धा थी, उनकी भूमिका थी। अपने जीवन में पर्यावरण से तालमेल बिठाने पर उन्‍होंने बहुत जोर दिया था। कोरिया में बापू को अनोखे ढंग से श्रद्धांजलि दी जा रही है। बापू की याद में हम सभी कोरिया में 150 पौधे लगाने जा रहे हैं।

Friends, कोरिया के साथ हर दिन हमारे सम्‍बन्‍ध मजबूत रहे हैं, बढ़ते चले जा रहे हैं और मजबूती के साथ बढ़ते जा रहे हैं। कोरिया और भारत इस पूरे क्षेत्र में शांति, स्थिरता और स्‍मृद्धि को बढ़ावा देने में कदम से कदम से कदम मिला करके आगे बढ़ रहे हैं। हमारे बीच एक स्‍पष्‍ट और सहज भागीदारी है। हम मिलकर एक-दूसरे को लाभ पहुंचा सकते हैं।

इसी साझेदारी को भारतीय कम्‍पनियों की कोरिया में मौजूदगी और मजबूत कर रही है। कोरियाई ब्रांड तो भारत के घर-घर तक का हिस्‍सा बन चुका है। एलजी, सेमसंग, हुंडई जैसे कोरियाई ब्रांड तो भारत के गांव-गावं तक पहुंच गए हैं, लोगों की बोलचाल का हिस्‍सा तक बन गए हैं।

Friends, आज पूरी दुनिया भारत की तरफ उम्‍मीद-भरी निगाहों से देख रही है। हम आज दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था हैं। हमारी economy मजबूत हुई है। 2014 के पहले हम यही सुनते थे कि भारत यानी Fragile Five में एक, हम तो डूबेंगे सनम तुम्‍हे भी ले डूबेंगे। आज बड़ी economy में दुनिया में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली economy है और अगले कुछ ही साल में भारत five trillion की अर्थव्‍यवस्‍था बनने की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहा है, five trillion की क्‍लब में हम होंगे, वो दिन दूर नहीं होगा। और जब 2014 में, मैंने जब कार्यभार संभाला था, तब दुनिया में आर्थिक दृष्टि से हम 11वें नम्‍बर पर थे; आज हम छह पर पहुंच गए हैं, और पांच होने में देर नहीं लगेगी, आप विश्‍वास कीजिए। और हमारी कोशिश ये है कि अगले डेढ़ दशक में भारत top three में जगह बना ले।

Friends, भारत में पिछले साढ़े चार साल में हम ease of living और ease of doing business सुनिश्वित करने में जुटे हैं। निरन्‍तर हो रहे आर्थिक और सामा‍जिक सुधारों के कारण हम सफलता भी प्राप्‍त कर रहे हैं। सबसे बड़ा indirect tax reform, goods and service tax, GST आज सिस्‍टम का हिस्‍सा है। सरदार वल्‍लभ भाई पटेल ने देश को एक किया था उसके बाद आर्थिक रूप से देश के एकीकरण का काम जीएसटी के द्वारा हुआ है। हमने cashless economy की तरफ दृढ़ता से कदम बढ़ाए हैं, हमने fiscal discipline को कायम रखा है। इसका नतीजा ये हुआ है कि पिछले चार वर्षों मेंease of doing business के मामले में हमने global ranking में 65 स्‍थानों की छलांग लगाई है और दुनिया को अचरज हो रहा है कि इतना बड़ा देश, इतनी विविधताओं से भरा हुआ देश, developing country, ये इतना बड़ा jump लगा सकता है क्‍या?

World Bank के चेयरमैन ने मुझे especially फोन किया था- बोले हमारे लिए बड़ा surprise है कि कोई देश determination के साथ इतना बड़ा परिणाम ला सकता है, और ये हिन्‍दुस्‍तान की ताकत है कि लाए। हम बहुत ही जल्‍द- आ गए, मतलब अब मौज करो, ये मोदी नहीं कर सकता। और मैंने जिस दिन ये परिणाम आया, इतना बड़ा jump लगाया, लोग खूशी मना रहे थे; मैंने कहा, मुझे वादा करो 50 में कैसे जाएंगे? Top Fifty में भारत कैसे अपनी जगह बनाएगा?

Friends, दुनिया में भारत को investment के लिए सबसे bright spot माना जा रहा है और इसलिए देश को पिछले चार वर्षों में रिकॉर्ड two hundred sixty three billion dollar का FDI प्राप्‍त हुआ है।

Friends, आप में से कुछ लोग अभी हाल में भारत आए होंगे, आपको अपना देश बदला हुआ दिखा होगा.... बोलो ना.. आते ही नहीं हो क्‍या? अगर आए होंगे तो जरूर बदला हुआ नजर आया होगा। पिछले चार साल में भारत में तेजी से बदलाव हो रहा है।

आज भारत में करीब-करीब हर व्‍यक्ति के पास बैंक एकाउंट है। और इसके लिए सिर्फ एक हजार दिनों में 33 करोड़ से ज्‍यादा खाते खोले गए। और एक Report ये कहता है कि दुनिया में पिछले चार साल में जितने बैंक एकाउंट खोले गए, उसके fifty percent अकेले हिन्‍दुस्‍तान में खोले गए। और खाते खोले गए इतना ही नहीं, जब गरीब लोग हैं, ये बैंक में खाता खुला है तो उनको भी saving करने का मन कर गया, इन खातों में आज 12 billion dollar जमा हैं। दुनिया इस समय भारत में financial inclusion की क्रांति बड़ी बारीकी से देख रही है।

मुद्रा योजना के तहत hundred and twenty eight million लोगों को ninety billion dollar से अधिक का micro credit दिया गया है, और आपको जान करके खुशी होगी, इनमें से 74 percent ऋण लेने वाली महिलाएं हैं और अधिकतम first time हैं, बैंक का दरवाजा पहली बार देखा, बैंक से पैसा पहली बार लिया; यानी ये कितना बड़ा revolution है, आप अंदाज लगा सकते हैं।

सामाजिक सुरक्षा के लिए आज affordable pensions और insurance की ऐसी स्‍कीम हैं जिसमें 90 पैसे लेकर, यानी 90 पैसे से ले करके एक रुपये तक प्रीमियम है। 90 पैसे कुछ नहीं होता है जी। इतने से प्रीमियम से गरीब व्‍यक्ति का दो-दो लाख रुपये का इंश्‍योरेंस पक्‍का हो रहा है। आज दुनिया की सबसे बड़ी health insurance scheme, आयुष्‍मान भारत, लोग इसे मोदीकेयर के नाम से जानते हैं। 50 करोड़ लोगों को मुफ्त इलाज मिल रहा है। यानी 50 करोड़ लोगों का मतलब-अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको इनकी total population से ज्‍यादा। और ये हिन्‍दुस्‍तान कर रहा है।

दुनिया की सबसे बड़ी ऊंची मूर्ति statue of unity, आज भारत का नाम लिया जाता है। ऐसे बहुत से काम हैं जिनसे देश की प्रतिष्‍ठा को शक्ति मिली है।

Digital India से भारत के लोगों के जीवन में तेजी से बदलाव आया है। आज करीब-करीब हर भारतीय के पास biometric identity है। देश के सवा लाख गांवों में optical fiber पहुंचा है।

Friends, आज कई मामलों में भारत दुनिया के world leaders की पंक्ति में खड़ा है। विश्‍व में TB के खात्‍मे के लिए दुनिया ने 2030 target बनाया है, भारत ने ये टारगेट 2025 रखा है। और 130 करोड़ भारतीयों की तरफ से मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि हम 2025 में ये goal achieve करके रहेंगे।

आज clean energy के मामले में हम दुनिया को रास्‍ता दिखा रहे हैं। International solar alliance की स्‍थापना और गति देने की हमारी पहलों से भारत global leadership से green economy, दोनों की तरफ तेजी से बढ़ रहा है।

आज हमारा देश दुनिया में renewable energy का छठा सबसे बड़ा उत्‍पादक बन गया है। आज दुनियाभर में भारत की प्रतिष्‍ठा बढ़ी है, आप अनुभव करते हैं, नहीं करते हैं? लोग हाथ मिलाते हैं तो छोड़़ते हैं क्‍या? India! पकड़ कर रखते हैं कि नहीं, हैं? ये बदलाव आया है।

Friends, मैं आपसे ये भी आग्रह करता हूं कि आप भारत के सकारात्‍मक विकास की जानकारियों को अपने कोरियाई मित्रों के साथ साझा करें। Make in India आज Global brand बन चुका है। कोरिया जैसे मित्र देशों के साथ मिलकर हम electronics manufacturing का बहुत बड़ा hub बनना चाहते हैं।

Friends, आज भारत में एक नई ऊर्जा दिखाई पड़ रही है। इसी ऊर्जा के प्रतिनिधि के रूप में कल मुझे Seoul Peace Prize का सम्‍मान दिया जाएगा। ये पुरस्‍कार मेरा नहीं है, मैं तो बस 130 करोड़ भारतीयों की तरफ से और तीन करोड़ प्रवासी भारतीयों की तरफ से, सिर्फ उसको स्‍वीकार करने के लिए आया हूं। ये पुरस्‍कार हर भारतीय के पुरुषार्थ का सम्‍मान है, हर हिन्‍दुस्‍तानी नागरिक के पुरुषार्थ का सम्‍मान है। ये पुरस्‍कार उस मेहनत को मान्‍यता देता है जो पिछले चार साल में भारतीयों ने लगातार, दिन-रात की है।

मैं एक बार फिर से अपने देश का मान बढाने के लिए आप सभी का आभार व्‍यक्‍त करता हूं और इस देश में आपकी तरक्‍की और उपलब्धियों के लिए मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

हमारे यहां कुंभ का मेला नया नहीं है। नई पीढ़ी के लोग जाते होंगे कि नहीं जाते होंगे, मुझे मालूम नहीं है, लेकिन आपके यहां जो पुरानी पीढ़ी के लोग होंगे, उनका मन करता है कि जरूर कुम्‍भ के मेले में जाएं। हमारे देश के त्‍योहार, इस प्रकार के मेले, वो- उसका चित्र मन में आते ही एक निश्चित प्रकार की छवि उभर करके आती है। लेकिन आपको जान करके खुशी होगी कि भारत- हालांकि कुंभ का मेला छोटा नहीं होता है जी- हर दिन गंगा के तट पर यूरोप का एक देश daily इकट्ठा होता है वहां, और पूरे कुंभ के मेले के दरम्‍यान गंगा में डुबकी लगाने वालों की संख्‍या चार कोरिया से ज्‍यादा होगी। यहां की जनसंख्‍या से चार गुना लोग उस गंगा में स्‍नान करेंगे- जब ये कार्यक्रम पुरा होगा तो। इतनी बड़ी ताकत, और पहली बार ये ध्‍यान में आया है कि जो भी कुंभ के मेले में गए हैं, उन्‍होंने मेले की व्‍यवस्‍था और मेले की स्‍वच्‍छता- इसकी चर्चा व्‍यापक रूप से की है। वरना हमारा स्‍वभाव था, ऐसी चीजों की तरफ हमारा ध्‍यान नहीं था, हमको आदत हो गई, अरे चलता है, चलो यार। पहली बार न्‍यूयार्क टाइम्‍स ने कुंभ मेले की चर्चा करते हुए कुंभ मेले की स्‍वच्‍छता का विशेष रूप से उल्‍लेख किया है। ये, ये देश अगर ठान ले- क्‍या कर सकता है, इस बात का जीता-जागता सबूत‍ इस बार का कुंभ का मेला है।

दोस्‍ता, देश बहुत तेजी से बदला है, देश बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। टूरिज्‍म विकास के लिए बहुत बड़ी ताकत है। और मैं जहां भी जाता हूं, भारतीय समुदाय से मुफ्त में मिलता नहीं हूं, बदले में कुछ मांगता हूं- देंगे? सब कह देते हैं- मोदी कहां दोबारा आने वाला है, पूछने के लिए हैं और आज वो चला गया, अब चार साल के बाद, तीन साल के बाद आएगा, कौन याद रखेगा। मैं ऐसा नहीं हूं, मैं तो पूछूंगा, मांगू- आवाज ढीली हो जाती है। सचमुच में मांगूं? क्‍या आज हमारा हर हिन्‍दुस्‍तानी, जो दुनिया में रहता है- कहीं आप पढ़ते होंगे, कहीं फैक्‍टरी में काम करते होंगे, कहीं management में काम करते होंगे- तो लोकल लोगों से आपका संपर्क आता ही होगा- स्‍वाभाविक होता होगा। क्‍या आपने मन में ठानी है कि हर वर्ष कम से कम पांच non-Indian families को हिन्‍दुस्‍तान देखने के लिए धक्‍का मारूंगा? इतना कर सकते हो क्‍या? अगर सिर्फ विश्‍व में फैले हुए हिन्‍दुस्‍तानी ये तय कर लें कि मैं देश में जा करके investment करूं, हरेक के पास कहां पैसे हैं भाई, वो अपनी जिंदगी गुजारा कर लेता है, थोड़ा-बहुत बचा लेता है।

लेकिन देश सेवा में एक काम जरूर कर सकता है कि मैं एक साल में कम से कम पांच non- Indian families को भारत देखने के लिए प्रेरित करूंगा, प्रोत्‍साहित करूंगा, जाने में मदद करूंगा। आप कल्‍पना कर सकते हैं भारत का टूरिज्‍म कितना बढ़ सकता है, कितनी बड़ी सेवा आप कर सकते हैं।द्य

तो मैंने आपसे मांगा है, मैं पूछूंगा हमारे Embassy को कि कितनों ने वीजा मांगा भई, बताओ। और मेरा मत है कि हिन्‍दुस्‍तान वादा करता है तो निभाता है। लो मैं आपकी तारीफ कर रहा हूं, आप ही हंस रहे हो।

मैं आऊंगा, मैं आऊंगा, बार-बार आऊंगा, आप चिंता मत कीजिए। लेकिन जब मैं आऊंगा तब‍ फिर से पूछंगा ये। देखिए- देश की बहुत बड़ी सेवा होगी।

मैं फिर एक बार- वैसे ठंड के माहौल में भी आप यहां आए, आपने मुझे आ करके आशीर्वाद दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

धन्‍यवाद।

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पूर्वी भारत में विकास और समृद्धि का प्रवेश द्वार बनकर उभर रहा ओडिशा: पहाड़पुर में पीएम मोदी
June 20, 2026
I extend my heartfelt birthday greetings to President Smt. Droupadi Murmu Ji, I wish her long life and excellent health: PM
Pahadpur village will now be rapidly developed as a solar village, that is, solar power will be ensured in every home here: PM
The vision of the Central Government is the development of India through the development of Eastern India: PM
To uplift tribal society, we are connecting tribal youth with opportunities for education and employment: PM
These children should get better facilities for studies; for this, around 500 Eklavya Model Schools have been opened across the country: PM

जॉय जगन्नाथ! जॉय मां किचकेश्वरी! मोर सबू भाई,भौणी,मां,मौसी मानंकु मोर नमोस्कार।

माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, राज्यपाल श्री हरि बाबु जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जी, उप मुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव जी, प्रवती परीदा जी, ओडिशा के मंत्री गणेश सिंह खूंटिया जी, कृष्ण चंद्र महापात्र जी, सांसद नबा चरण माझी जी, मनमोहन सामल जी, बैजयंत पांडा जी, अन्य महानुभाव, भाइयों और बहनों।

हमारा ओडिशा इन दिनों उत्सवों के आनंद में डूबा हुआ है। यहाँ का गणपर्व रज, पिछले हफ्ते ही धूमधाम से मनाया गया है। महाप्रभु जगन्नाथ जी की रथ यात्रा की तैयारियां भी पुरजोश चल रही है। मयूरभंज के बारीपदा रथ यात्रा को लेकर भी उत्साह का माहौल है। और, इस सबके बीच ही लोकतन्त्र का विकास का उत्सव भी चल रहा है। ओडिशा की बीजेपी सरकार ने अपने 2 साल भी पूर्ण किए हैं। इस मौके पर, आप सबके बीच आना, मयूरभंज आने का ये सौभाग्य, और इतनी बड़ी संख्या में आप सबकी उपस्थिति, ये अवसर मेरे लिए बहुत खास है। आपका अपनापन मुझे बार-बार यहां खींच लाता है। मैं आप सभी का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूँ। और ओडिशा की जनता को डबल इंजन सरकार में विकास यात्रा की भी बधाई देता हूँ, शुभकामनाएं देता हूं। साथ ही, इस अवसर पर मैं पंडित रघुनाथ मुर्मू जी, डॉ. दमयंती बेश्रा जी, और श्री चरण हेम्ब्रम जी जैसी विभूतियों को भी नमन करता हूँ। रघुनाथ मुर्मू जी ने संथाली भाषा के लिए ओल चिकी लिपि का निर्माण किया था। हमारी सरकार ने संथाली भाषा में भारत के संविधान को प्रस्तुत किया है। ओडिशा की संतानों को पद्म सम्मान देकर सम्मानित किया है। पिछले 2 वर्षों में ओडिशा सरकार भी इन सभी विभूतियों के सपनों को पूरा करने में दिन रात पुरुषार्थ कर रही है।

साथियों,

आज का ये अवसर इसलिए भी विशेष है, क्योंकि मयूरभंज की धरती पर पली-बढ़ीं, ओडिशा की बेटी, माननीय राष्ट्रपति जी हमारे बीच उपस्थित हैं। आज उनका जन्मदिन भी है। मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकमानाएं देता हूं, मैं उनके दीर्घायु होने और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। जनगन्नाथ जी भगवान के श्री चरणों में प्रार्थना करता हूं। ओडिशा की बेटी आज देश के इतने बड़े पद पर पहुंची हैं, हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं, ये हम सभी के लिए बहुत गौरव की बात है। राष्ट्रपति जी का व्यक्तित्व, उनका उदार और सहृदय स्वभाव, राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए उनका अटल समर्पण, उन्होंने मयूरभंज ही नहीं, पूरे ओडिशा की पहचान सशस्त की है। मैं इस अवसर पर, उनका विशेष रूप से अभिनंदन करता हूँ।

साथियों,

ये कार्यक्रम जब बना, तो इसमें मूल कारण तो लॉजिस्टिक था, लंबे अर्से से यहां आने के लिए चर्चा चल रही थी, लेकिन कोई तालमेल नहीं बैठता था। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस कोलकाता में तय हुआ, तो फिर मैंने कहा अच्छा है, आज बंग दिवस भी है, तो क्यों न मैं सुबह मयूरभंज होकर के शाम को फिर कोलकाता के कार्यक्रम में जाऊं। और इसके कारण ये 20 जून तय हुई। लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिसकी मंगल कामनाएं ईश्वरआधीन होती हैं, और इसलिए आज एक शुभ मंगल हो गया, कि राष्ट्रपति का जन्मदिन भी, मुझे आज उनके गांव में जाकर के, उनको शुभकामनाएं देने का अवसर मिला।

साथियों,

आज मैं राष्ट्रपति जी के साथ पहाड़पुर भी गया था। मैं इस क्षेत्र के बच्चों के लिए उनके द्वारा बनवाए गए स्कूल भी गया। बच्चों के साथ कुछ यादगार समय बिताने का अवसर मुझे मिला। मैं देख रहा था, बच्चों के चेहरों की चमक, राष्ट्रपति जी की उपस्थिति और आत्मीयता, वहां मुझे ऐसा कुछ भी नहीं लगा, किसी बच्चे को ये लगा हो कि राष्ट्रपति जी आई हैं, हर बच्चे को लगता था उनकी मां आई है। वे बच्चे भी बहुत भाग्यवान हैं, कैसे इस क्षेत्र के गरीब, वंचित और आदिवसी समाज के बच्चों को प्रेरणा मिल रही है, उन्हें देश के लिए कुछ बड़ा करने का आत्मविश्वास मिल रहा है। मैं राष्ट्रपति जी का आभारी हूं कि उन्होंने इन अनुभवों से गुजरने का आज मुझे अवसर दिया। ये मेरा दिन, एक प्रकार से मेरी शिक्षा का दिवस था, कुछ सीखने का अवसर था मेरे लिए।

साथियों,

मैं आपको सरकार का ये निर्णय भी बताना चाहता हूं कि पहाड़पुर गांव को, अब तेजी से सुर्यग्राम, सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। यानी यहां हर घर में सोलर बिजली बने, इसे सुनिश्चित किया जाएगा। और हम तो बड़ा गर्व के साथ कह सकते हैं कि यही ओडिशा है, जहां कोणार्क में सुर्य मंदिर की एक पहचान है, वैसे ही पहाड़पुर सुर्यग्राम की पहचान बन जाएगा। सुर्यग्राम, से पूरा गांव सोलर विलेज के रूप में पहचाना जाए, इस दिशा में काम तुरंत शुरू हो ऐसा मेरा प्रयास रहेगा। इस अभियान से, पहाड़पुर के लोगों को मुफ्त सोलर बिजली भी मिलेगी और जो ज्यादा बिजली होगी, वो उनकी आय भी बढ़ाएगी।

साथियों,

ओडिशा में डबल इंजन सरकार के 2 साल कई मायनों में ऐतिहासिक रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जी के नेतृत्व में, आज ओडिशा तेज गति से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। आज यहां गरीब कल्याण की योजनाओं से सामान्य मानवी का जीवन बदल रहा है। ओडिशा में आर्थिक गतिविधियाँ निवेश और उद्योगों को आकर्षित करने का सामर्थ्य आज नज़र आ रहा है। यहाँ रोजगार के नए अवसरों के लिए तेजी से काम हो रहा है।

साथियों,

केंद्र सरकार का विज़न है- पूर्वी भारत के विकास से भारत का विकास। इसीलिए, हम पूर्वोदय की नीति पर काम कर रहे हैं। जिस पूर्वी भारत को काँग्रेस के दौर में पिछड़ेपन का पर्याय बना दिया गया था, आज वो प्रगति का प्रवेश द्वार बन रहा है। आज ओडिशा खुद इस बदलाव का साक्षी बन रहा है।

साथियों,

ओडिशा के पास समुद्र है, खनिज संपदा है, कृषि की शक्ति है और सबसे सामर्थ्यवान यहां युवा प्रतिभा है। इस सामर्थ्य का पूरा उपयोग करने के लिए हम मिलकर काम कर रहे हैं। इसीलिए, आज ओडिशा में रेलवे इनफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश हो रहा है। नई सड़कें और आर्थिक कॉरिडोर बन रहे हैं। पोर्ट्स का विस्तार हो रहा है। ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक उद्योगों में निवेश आ रहा है। आज भी यहां ओडिशा के विकास से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। इन परियोजनाओं पर लगभग 47 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बिजली, सड़क, रेलवे, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी इन परियोजनाओं से, आप सभी लोगों को बहुत सुविधा होने वाली है। मैं इन परियोजनाओं के लिए ओडिशा के लोगों को बहुत बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारी सरकार ओडिशा के संसाधनों को, ओडिशा की संभावनाओं में बदल रही है। ओडिशा में बड़ा निवेश आए, यहाँ नए उद्योग लगें, इसके लिए उत्कर्ष ओडिशा जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत, अब तक करीब 20 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। साढ़े 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की अनेक मेगा परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण बने, इसके लिए ओडिशा के समग्र विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। पावर सेक्टर में 6 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश हो रहा है। समृद्ध शहर योजना के तहत शहरी विकास को गति दी जा रही है। आने वाले वर्षों में इन प्रयासों का परिणाम हमें देखने को मिलने वाला है।

साथियों,

डबल इंजन सरकार की बड़ी विशेषता ये है कि वो खुद जनता तक पहुँचती है। हमारा प्रयास है कि सामान्य नागरिक को किसी समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़े। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि युवाओं, महिलाओं, किसानों और आम लोगों की अपेक्षाएँ आज पूरी हो रही हैं। आप देखिए, धान खरीद में किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल देने का निर्णय लिया गया। सुभद्रा योजना के माध्यम से एक करोड़ से अधिक माताओं और बहनों तक आर्थिक सहायता पहुंचाई गई। आयुष्मान भारत को लागू करके ओडिशा के परिवारों के लिए देशभर के अस्पतालों में इलाज का रास्ता खोला गया। आदिवासी विद्यार्थियों की पढ़ाई बीच में न छूटे, इसके लिए माधो सिंह हाथ-खर्चा योजना शुरू की गई। महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी के भक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए श्रीमंदिर के श्रद्धालुओं के लिए सारे द्वार खोल दिए गए, चारों-चार द्वार खोल दिए गए। डबल इंजन की ताकत मिलने से आज यहां चारों दिशाओं में विकास सुनिश्चित हो रहा है।

साथियों,

यहां बीते दिनों स्वच्छता को लेकर जो विशेष अभियान चला है, उसकी भी मुझे जानकारी मिली है। और मैं देख रहा था सोशल मीडिया में तो सफाई अभियान छाया हुआ है, यानी स्वच्छता से स्वागत, मैं ओडिशा की इस पहल के लिए, यहां के नगारिको का, सरकार का, मुख्यमंत्री जी का, इस प्रशंसनीय पहल के लिए बहुत ही प्रशंसा करता हूं, संतोष व्यक्त करता हूं।

साथियों,

स्वच्छता हमारे जीवन शैली का हिस्सा होनी चाहिए, हर रोज की आदत होनी चाहिए। मैं यहां स्वच्छता अभियान से जुड़े सभी लोगों का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

मैंने अपने जीवन का कुछ महत्वपूर्ण कालखंड जनजातीय क्षेत्रों में एक वालंटियर के रूप में काम करते हुए बिताया है। माननीय राष्ट्रपति जी तो बरसों तक ऐसे क्षेत्रों में चुनौतियां का सामना करती रही हैं। आप और हम जानते हैं कि जनजातीय क्षेत्रों में जीवन की सुविधाएं आसानी से नहीं पहुंचती थीं। इसलिए, हमारी सरकार ने जनजातीय विकास को बहुत प्राथमिकता दी है। हमने ऐसे इलाकों को सुविधाओं से जोड़ने के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान शुरू किया। इसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, आवास से जुड़े विभाग मिलकर के सर्वागीण विकास के लिए काम कर रहे हैं। ताकि वहां रहने वाले लोगों की कठिनाइयां दूर हो सकें। इसी तरह, पीएम जनमन अभियान तो राष्ट्रपति जी के साथ हुई चर्चाओं का, उनके मार्गदर्शन का ही परिणाम है। ये विशेष रूप से देश के ऐसे जनजातीय समूहों के लिए है, जो जनजातीय समुदाय में भी सबसे पीछे रह गए हैं। ऐसे जनजातीय समुदायों तक अब सरकार स्वयं चलकर उनके गांव, उनके दरवाजे तक पहुंच रही है।

साथियों,

आदिवासी समाज के उत्थान के लिए हम आदिवासी युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोड़ रहे हैं। इन बच्चों को पढ़ाई की बेहतर सुविधा मिले, इसके लिए देश में करीब 500 एकलव्य मॉडल स्कूल खोले गए हैं। करीब साढ़े सात सौ एकलव्य स्कूल स्वीकृत किए गए हैं। प्री-मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक लेवल पर, डेढ़ करोड़ से अधिक आदिवासी बच्चों को सैकड़ों करोड़ रुपए की स्कॉलर्शिप दी गई है। मुझे ये बताते हुए भी खुशी है कि यहां मयूरभंज में एक और नवोदय विद्यालय बनाने के लिए भी स्वीकृति दे दी गई है।

साथियों,

दूर-दराज इलाकों में रहने के कारण, जनजातीय समाज स्वास्थ्य से जुड़ी कठिनाइयों का भी शिकार रहा है। सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियाँ एक बहुत बड़ी चुनौती रही हैं। हमने इनके खिलाफ देश भर में अभियान चलाया, चार करोड़ से ज्यादा हेल्थ कार्ड बांटे, मुफ्त इलाज के लिए करोड़ों आदिवासी लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड दिये। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर साफ पानी पहुंचाया जा रहा है। इन प्रयासों का परिणाम आज हमें दिख रहा है। आदिवासी समाज दशकों पुरानी कठिनाइयों से बाहर आ रहा है, और, विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन रहा है।

साथियों,

आने वाले समय में हमारे सामने दो महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। 2036 में ओडिशा के गठन के 100 वर्ष पूरे होंगे। और, 2047 में भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने वाले हैं। यानी, ओडिशा और देश का लक्ष्य एक ही दिशा में है। ओडिशा की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, तो भारत मजबूत होगा। मुझे ओडिशा के सामर्थ्य पर भरोसा है। हमें मिलकर ओडिशा को विकास की बुलंदियों पर पहुंचाना है।

साथियों,

कल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जाना है। ज्ञान और योग की धरती ओडिशा, योग यहाँ के संस्कारों का हिस्सा रहा है। मैं ओडिशा की धरती से पूरे देश से, पूरी दुनिया के लोगों से आह्वान करता हूँ, आप सब ज्यादा से ज्यादा संख्या में योग दिवस में हिस्सा लें। मैं एक बार फिर आप सभी को आज के अवसर, और विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं माननीय राष्ट्रपति जी का विशेष रूप से आभार प्रकट करता हूं, कि मुझे उनके साथ उनकी कर्मभूमि को देखने का मौका मिला। एक बार फिर उन्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय जगन्नथ।

जय जगन्नथ।

जय जगन्नथ।