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सिंधु भवन, अहमदाबाद

१६ दिसंबर, २०११

 

मुझे अच्छा लगा कि आप सब के दर्शन करने का सौभाग्य मिला। मित्रों, मैं मन से आप लोगों का बहुत आदर करता हूँ, आप लोगों का बहुत सम्मान करता हूँ और मनोमन मेरे मन में, मेरे दिल में, एक पूज्य भाव आप लोगों के लिये है। और वह इसलिए नहीं है कि मैं मुख्यमंत्री हूँ इसलिए ऐसा कहना पड़ता है, ऐसा नहीं है। इसके पीछे एक तर्क है, एक हकीकत है। पूरी मानवजात की सांस्कृतिक विकास यात्रा की ओर जब नजर करते हैं और इसके मूल की तरफ़ जब जाते हैं तो एक जगह पर आ करके रूकते हैं, जहाँ से मानव संस्कृति की विकास की यात्रा का आरम्भ हुआ था। वो जगह वो है जहाँ आपके पूर्वजों ने पराक्रम किया था। आप उस महान विरासत के अंश हैं। आपके पूर्वजों ने वे महान काम किये हैं और इसके कारण मेरे दिल में उस परंपरा के प्रति पूज्य भाव है और आप उसके प्रतिनिधि हैं तो सहज रूप से उसका प्रकटीकरण आपकी ओर होता है।

सिंधु ओर सरस्वती के किनारे पर पूरे मानवजात के कल्याण के लिये हमेशा हमेशा सोचा गया। मैं जब विद्यार्थी काल में धोलावीरा देखने गया था। हड़प्पन संस्कृति, मोहें-जो-दरो... और वहाँ की बारीकीयों को वहाँ के लोग मुझे समझा रहे थे, तो मन में इतना बड़ा गर्व होता था कि हमारे पूर्वज कितना लंबा सोचते थे। वहाँ की एक एक ईंट, एक एक पथ्थर इन सिंधु संस्कृति की परंपरा के उन महान सपूतों के पराक्रम की गाथा कहता है। आज दुनिया में ओलिंपिक गेम्स की चर्चा होती है और बड़े बड़े खेल के मैदान, बड़े बड़े स्टेडियम की चर्चा होती है। आप में से यहाँ बैठे हुए कई लोग होंगे जिनको आप ही के पूर्वजों के उस पराक्रम की ओर देखने का शायद सौभाग्य नहीं मिला होगा। अगर आप धोलावीरा जायेंगे तो वहाँ पायेंगे कि वहाँ ५००० साल पहले कितना बड़ा स्टेडियम था और खेलकूद के कितने बड़े समारोह होते थे, उसके सारे चिह्न आज भी वहाँ मौजूद हैं। यानि इन्हें क्या विशालता से देखते होंगे..! आज पूरी दुनिया मे साइनेज की कल्पना है भाई, गली इस तरफ जाती है तो वहाँ लिखा होता है गली का नाम, एरो करके लिखा होता है, साइनेजीस होते है। और साइनेजीस की किसके लिये जरूरत होती है? आप किसी छोटे गाँव में जाओ, तो वहाँ साइनेजीस नहीं होते कि भाई, यहाँ जाओ तो यहाँ पटेलों का मोहल्ला है, यहाँ बनिये का महोल्ला है... ऐसा कुछ लिखा नहीं होता है। क्योंकि गाँव छोटा होता है, सबको पता होता है, क्या कुछ है, इसलिए कोई बोर्ड लगाने की जरूरत नहीं पडती। ५००० साल पहले धोलावीरा दुनिया का पहला शहर था जहाँ साइनेजीस थे, आज भी मौजूद हैं। क्या कारण होगा? कारण दो होंगे, एक, वो एक बहुत बड़ा शहर होगा और दुसरा, वहाँ पर देश-विदेश के लोग आते-जाते होंगे, और तभी तो इन चीज़ों की जरूरत पडी होंगी। ५००० साल पहले ऐसी विरासत, आप कल्पना कर सकते हैं, भाईयों। क्या कभी आप को फील होता है? और मैं चाहूँगा की जब हम इस प्रकार का समारोह कर रहे हैं और इस महान परंपरा के गौरव गान गाते हुए हम इकठ्ठे हुए हैं, तो हमारी नयी पीढ़ी को उस इतिहास और संस्कृति का परिचय कराने के लिये कुछ कार्यक्रम हो तो शायद नयी पीढ़ी तक ये बात पहुंचेगी।

मित्रों, मेरा यहाँ मुख्यमंत्री के नाम पे कम, आप के अपने एक साथी के नाम पर बात करने का मेरा मूड़ करता है। मुझे बहुत बार लगता है कि मैं... क्यूंकि यहाँ अहमदाबाद में आधे से अधिक सिंधी परिवार होंगे जिसके घर मैंने रोटी खाई होगी। क्योंकि मैं ३५ साल तक उसी प्रकार का जीवन जीता था, अनेक परिवारों मे मेरा जाना और उन्हीं की रोटी खाना, ये मेरा... और इसलिए मैंने काफी निकटता से इन सब चीज़ों को देखा है। लेकिन आज कभी सिंधी परिवार में जाता हूँ तो बच्चे पास्ता और पिज़्ज़ा के आसपास चलते हैं तो मेरे मन में होता है की मीठा लोल्ला, तीखा लोल्ला, पकवान कौन खिलायेगा? आप सोचिये, ये अब चला जा रहा है। मेरे सिंधी परिवारो में से ये सब चीजे नष्ट हो रही है। क्या ये हमारी जिम्मेवारी नहीं हैं कि हम इन विरासत को बचायें? मैं कई बार मेरे मित्रों से कहता हूँ कि भईया, अहमदबाद में कभी तो सिंधी फूड फेस्टीवल करो। ये नरेन्द्र सारी दुनिया को खिलाता है लेकिन वो सिंधी खाना नहीं खिलाता है। मैंने कहा न कि मुख्यमंत्री के नाम पर नहीं, अपनों के नाते आप के बीच बातें कर रहा हूँ। क्योंकि मैं इतना मिलजुल कर के आप लोगों के बीच पला बड़ा हूँ, इसलिए मुझे पता है। आप युवा पीढ़ी को जा के कहिये, उसे पूछिये कि सिंधी परंपरा का पहनाव क्या था? क्या पहनते थे? दुनिया बदली है, काफी वेस्टर्नाइज़ेशन आप के अन्दर घुस गया हे, मुझे क्षमाँ करना। सिंधी भाषा मे बोलनेवाले परिवार कम होते जा रहे है। माँ-बेटा भी अंग्रेज़ी में बोल रहे हैं। मित्रों, दुनिया के अंदर अपनी मातृभाषा, अपना रहन-सहन, अपना पहेनाव इसको जो संभालता है, वो उसमें फिर से एक बार जान भरने की ताकत रखता है। और एक समाज के नाते जो आप भटके हुए हैं, तो मेरी एक प्रार्थना होगी कि एक बार संकल्प करके जायें कि हमारे घर में हम सिंधी क्यों न बोलें। हम अमरीका में हों, हम हाँगकाँग में रहते हों, हम चाइना गये हों, कहीं पर भी गये हों... क्यों न बोलें? और सिंधी भाषा की, अपनी भाषा की इक ताकत होती है। मुझे अडवाणीजी एक बार सुना रहे थे, बेनजीर भुट्टो यहाँ आई थी, तो उनकी फॉर्मल मीटिंग थी, सारे प्रोटोकॉल होते हैं, लेकिन जैसे ही अडवाणीजी को देखा, बेनजीर सिंधी में चालू हो गई और पूरे माहोल में उन दोनों के बीच में इतना अपनापन था, इतनी खुल कर के बातें हो रही थी... अब देखिये, ये भाषा की कितनी ताकत होती है अगर हम उसको खो देंगे... व्यवसाय के लिये अंग्रेजी की जरूरत होंगी तो ज़रूर इस्तेमाल किजिये, ओर दस भाषायें सीखें, कौन मना करता है? सीखनी भी चाहिये, ये हमारे सुरेशजी के साथ आप बैठिये, वो गुजराती बोलेंगे तो पता नहीं चलता कि वो एक सिंधी भाषा भी जानते होंगे, इतनी बढ़िया गुजराती बोलते हैं। बहुत अच्छी गुजराती बोलते हैं वो, एक शब्द इधर उधर नहीं होगा। मैं प्रसन्न हूँ इस बात से। लेकिन ये मेरे मन में है, यहाँ देखिये ये सिंधी सम्मेलन है, किसी के भी शरीर पर सिंधी कपडे नहीं हैं। इसे आप आलोचना मत समझिये, भईया, इसे आप आलोचना मत समझिये। ये आप की विरासत है, आप की ताकत है, आप इसको क्यों खो रहे हो? मुझे दर्द हो रहा है। और इसलिए मैं कहता हूँ कि कभी तो ऐसा हो कि सब सिंधी पहनावे में आयें। देखिये, मॉरिशस में १५०-२०० साल पहले हमारे लोग गये थे। मजदूर के नाते गये थे, मजदूर भी नहीं गुलाम के नाते गये थे। उनको हथकड़ियाँ पहना करके जहाजों मे डाल डाल के ले गये थे। लेकिन वो जाते समय अपने साथ रामायण ले गये, तुलसीकृत रामायण, और उनके पास कुछ नहीं था। मॉरिशस में गये, दुनिया के कई देश ऐसे हैं जहाँ वो गये, यह एक सहारा था उनके पास। आज २०० साल के बाद भी आप जायें, बहुत सारी चीज़ों का बदलाव आया होगा तो भी एक उस रामायण अपने पास होने के कारण इस मिट्टी के साथ उनका नाता वैसा का वैसा रहा है। उन्होनें अपने नाम नहीं बदले हैं, उन्होनें रामायण की चौपाई का गान अविरत चालू रखा है और उसी के कारण उनका नाता... वरना २०० साल में कितनी पीढ़ीयां बदल जाती हैं। यहाँ तो वो लोग मौजूद हैं जिसने वह सिंधु संस्कृति को भी देखा है और बाद मे वह बुरे दिन भी देखे हैं और बाद में हिंदुस्तान में आकर अपना नसीब अजमाया, पूरी पीढ़ी मौजूद है। लेकिन ५० साल के बाद कौन होगा? कौन कहेगा कि तुम्हारे पूर्वजों के पराक्रम वहाँ हुआ करते थे, कौन कहेगा? और इसलिए भाईयों-बहनों, मेरा मत है, वो समाज, वो जाति, वो देश जो इतिहास को भूल जाता है, वो कभी भी इतिहास का निर्माण नहीं कर सकता है। इतिहास वही बना सकते हैं जो इतिहास को जीना जानते हो। जो इतिहास को दफना देते है, वो सिर्फ चादर औढाने से ज्यादा जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते। और इसलिए एक ऐसी महान विरासत जिसके आप संतान हैं, उसको बचाइये, इसको प्यार किजिये। और अगर हम अपनी विरासत को प्यार न करें तो हम कैसे चाहेंगे कि हमारा पडोसी हमारी विरासत को प्यार करे? और ये जजबा किसी के खिलाफ नहीं होता है। हम अपनी अच्छाइयों पर गर्व करें इसका मतलब किसी के लिये दु:ख होने का और किसी का बुरा दिखाने का कोई कारण नहीं होता है। हमें गर्व होना चाहिये, कितना उज्जवल इतिहास है..!

प लोगों को कच्छ में जाने का अवसर मिले तो जरूर जाइये। आपने कथा सुनी होंगी, कच्छ के अंदर ४०० साल पहले एक मेकण दादा करके हुआ करते थे। हिंगलाज माता के दर्शन के लिये लोग जाते थे और रण के अंदर पानी के अभाव के कारण कभी कभी रण में ही मर जाते थे। और यात्री भी बड़ा कष्ट उठा कर के रण को पार करत्ते हुए हिंगलाज माता के दर्शन के लिये सिंध की ओर जाते थे। तो वो अपने पास एक गधा और एक कुत्ता रखते थे और वो ऐसे ट्रेइन्ड थे की वो रण में देखते थे कि कहीं कोइ मनुष्य़ परेशान तो नहीं है। वो गधा और कुत्ता रण में जा करके पानी पहुंचाते थे और जरूरत पडी तो उसको उठा करके वहाँ ले आते थे। और वो नसीबवाले थे कि उस रेगिस्तान के किनारे पर उनके पास एक कुंआ था जिसमें शुध्ध मीठा पानी रहता था, आज भी मौजूद है, कभी जाएं तो आप। भूकंप में वो जगह खत्म हो गई थी, हमने फिर से उसको दुबारा बनाया है, दुबारा उसको बनाया है। ४०० साल पहले मेकण दादा ने जो लिखा था वो आज भी उपलब्ध है, उसने एक बात लिखी थी कि एक दिन ऐसा आयेगा... एक इन्सान ४०० साल पहले लिख के गया है, सिंध और गुजरात की सीमा पर बैठा हुआ चौकीदार था, वो मेकण दादा लिखकर गये हैं कि एक दिन ऐसा आयेगा जब सिंधु, सरस्वती और नर्मदा तीनो एक होंगे। तब किसने सोचा था की नर्मदा पर सरदार सरोवर डेम बनेगा और सरदार सरोवर से नर्मदा का पानी सिंध के किनारे तक पहुंचेगा, किसने सोचा था? और आप लोगों को जानकारी होगी, सिंधु नदी में अब बाढ़ आती है तो पाकिस्तान के उस छोर पर समुद्र के पहले एक डेम बना हुआ है, तो सिंधु का पानी ओवरफ्लो होता है और ओवरफ्लो होता है तो अधिकतम पानी हमारे रेगिस्तान में, हिंदुस्तान में गुजरात की तरफ आता है। और वो जगह आप देखें तो मीलों चौड़ा पट है, जहाँ ये पानी आता है लेकिन दुर्भाग्य ये है की वो खारा, नमकीन एकदम समुद्र जैसा पानी हो जाता है, काम में नहीं आता है। लेकिन मैं रेगिस्तान में जहाँ वो पानी आता है, उस जगह के दर्शन करने के लिये गया था और बाद में मैंने भारत सरकार को चिठ्ठी लिखी थी की क्या पाकिस्तान से बात नहीं हो सकती है? कि जो ये फ्ल्ड वोटर है, जो ये समुद्र में जाता है उसको अगर केनाल से इस तरफ ले आयें तो मेरे मेकण दादा का जो सपना था, सिंधु, सरस्वती, नर्मदा को इकठ्ठा करना, हम कर के दिखायेंगे। मित्रों, ये विरासत है जिस पर हमें गर्व होना चाहिये, और हमें उसके साथ जुडना चाहिये।

भाईयों-बहनों, मैं इस समाज का आदर करता हूँ इसका एक कारण और भी है। आप कल्पना कर सकते हो कि १९४७ के वो दिन कैसे होंगे, जब देश का विभाजन हुआ, सब कुछ उजड गया, सब कुछ तबाह हो गया और ईश्वर के भरोसे आप यहाँ आये थे। क्यों आये थे? आप यहाँ क्यों आये थे, मित्रों? कुछ लेने के लिये, कुछ पाने के लिये? क्या नहीं था आपके पास? आप इसलिए आये की इस मिट्टी को आप प्यार करते थे, इस महान विरासत को आप प्यार करते थे। आप आपके पूर्वजों की इस महान संस्कृति छोडने को तैयार नहीं थे, इसलिए आपने कष्ट झेले हैं। क्या ये स्पिरिट आपके बच्चों में पर्कोलेट हो रहा है? अगर नहीं होता है तो कमी हमारे पूर्वजो की नहीं है, कमी हमारी वर्तमान पीढ़ी की है और इसलिए गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है। मित्रों, मैं बचपन में मेरे गाँव में एक सिंधी सज्जन को देखा करता था। उस समय उनकी आयु में तो छोटा था, उस समय उनकी आयु करीब ६०-६५ साल होंगी। आर्थिक स्थिति बड़ी खराब थी उनकी... पूरा चेहरा मुझे आज भी बराबर याद है। एकदम दुबला पतला शरीर, कपडों का कोई ठिकाना नहीं, वो बस स्टेशन पर हमेशा दिखते थे और अपने हाथ में पापड या चोकलेट या बिस्कीट पैसेन्जर को एक ट्रे जैसा रखते थे और बेचते थे। मैं जब तक मेरे गाँव में रहा तब तक वो जिंदा थे और मैंने हमेशा उनको यही काम करते देखा। वो एक द्रश्य मेरे मन को आज भी छूता है। कितनी गरीबी थी उनकी, इतनी कंगालियत से जीवन गुजारते थे, शरीर भी साथ नहीं देता था। मेरा गाँव छोटा था, वहाँ बिस्किट कौन खायेगा? चोकलेट कौन खायेगा? कौन खर्चा करेगा? लेकिन उसके बावजूद भी अपने व्यावसायिक स्पिरिट के साथ बस स्टेशन पे जा के खडे हो जाते थे, कुछ बेचकर के कुछ कमाने की कोशिश करते थे लेकिन मैने कभी भी उनको भीख मांगते हुए देखा नहीं। बहुत कम समाज होते हैं जिसमे ये ताकत होती है। और सिंधी समाज के अंदर जीनेटिक्स सिस्टम मे ताकत पडी है, स्वाभिमान की। वो कभी भीख नहीं माँगते..! आप उस विरासत के धनी हैं। ये परंपरा अपने बच्चों पर कैसे पहुंचे, उन लोगों को हम कैसे तैयार करें?

मित्रों, व्यावसायिक क्षमता। हमारे गोपालदास भोजवानी यहाँ बैठे हैं, जब मैं छोटा था तो हम कभी कभी उनकी दुकान पर जा कर बैठा करते थे। तो एक बात हमारे ध्यान में आई थी, आज वो परंपरा है कि नहीं वो मुझे मालूम नहीं। लेकिन मैं
सोश्यो-इकनॉमिक द्रष्टि से कई लोगों के सामने अपने विषय को रख चुका हूँ, कई जगह पर बोला हूँ। अब वो परंपरा है कि नहीं, मुझे मालूम नहीं पर उस समय तो मैंने अपनी आंखो से देखा है। कोई भी सिंधी युवक या कोई व्यक्ति अपना नया व्यवसाय जब शरू करता था तो यार, दोस्त, रिश्तेदार सब उदघाटन के समय आते थे, उसको एक लिफाफा देते थे। उस लिफाफे पर कुछ लिखा हुआ नहीं होता था, लेकिन उसमें कुछ न कुछ धन हुआ करता था, पैसे होते थे। और जो भी आता था उसको देता था। मैने जरा बड़ी बारीकी से पूछा कि ये क्या चल रहा है? तो मेरे ध्यान मे आया की ये परंपरा है समाज में, कि कोई भी एसा नया व्यवसाय करता है तो समाज के लोग मिलने आते हैं और उनको कुछ न कुछ पैसे देते हैं, जो उनको बिजनेस करने के लिए पूंजी के रूप में काम आते हैं। और बाद में कहीं ऐसा अवसर हो तो खुद भी अपने तरीके से जाकर के देके आता है। लेकिन देनेवाले का नाम नहीं होता है। मित्रों, ये जो परंपरा मैने देखी है, अपने ही स्वजन को, अपने ही जाति के व्यक्ति को व्यावसायिक क्षेत्र में अपने पैरो पर खड़ा करने के लिये कितना बढिया सोशल इकोनोमी का कन्सेप्ट था। ये अपने आप में शायद दुनिया में बहुत रेरेस्ट है। हमारे यहाँ शादियों मे होता है, कि शादियों मे इस प्रकार से देते हैं तो शादी के समय खर्च होता है तो चलो, उस परिवार को मदद हो जायेगी, उनका काम निकल जायेगा। लेकिन व्यवसाय मे ये परंपरा मैं सिंधी परिवारो की दुकानों के उदघाटन में जब जाया करता था तब देखता था। और उसमे मुझे लगता है की सोशल इकोनोमी की कितनी बढिया थिंकिंग हमारे पूर्वजों ने बढ़ा कर के हमको दी है..! कोई भी, कोई भी डूबेगा नहीं, हर कोई उसे हाथ पकडकर के उपर लाने की कोशिश करेगा, ऐसी महान परंपरा रही है।

मैं अभी श्रीचंदजी को पूछ रहा था की सिंधी टी.वी. चेनल है क्या कोई? मुझे तो मालूम है, मैंने उनको क्यूं पूछा होगा वो आप को मालूम होना चाहिये ना? मुझे तो मालूम है... नहीं, छोटा मोटा कार्यक्रम होना अलग बात है, वो पूरी चेनल नहीं है, छोटे कार्यक्रम चलते हैं। नहीं, मैने सही जगह पर सवाल पूछ लिया था। अब उन्होंने कहा है कि जमीन दीजिये। वो व्यापारी आदमी है, ये हमारा डिवैल्यूऐशन क्यों कर रहे हो, हिन्दूजाजी? पूरा गुजरात आपका है, मेरे भाईयों-बहनों, पूरा गुजरात आपका है। पूरा गुजरात आपके हवाले है, मौज किजिये..! लेकिन मुंबई से हमारे कुछ बंधु, शायद यहाँ आये होंगे तो, नारायण सरोवर के पास एक ऐसा ही सिंधु सस्कृति परंपरा का कल्चरल सेन्टर बनाने के लिये मुंबई के ही हमारे कुछ मित्र आगे आये हैं और उनको हमने जमीन दी है, बहुत बड़ी मात्रा में। और नारायण सरोवर, यानि एक प्रकार से आज के भारत का वो आखरी छोर है और पाकिस्तान की सीमा के पास पडता है, वहाँ एक काफी अच्छा एक कल्चरल सेन्टर बनेगा, उस दिशा मे काम चल रहा है, उसका लाभ होगा, बहुत बड़ा काम उसके कारण होनेवाला है। जी हाँ, बैठे हैं यहाँ पर... वो काम काफ़ी अच्छा होगा, मुझे विश्वास है।

प लोग गुजरात के विषय में भलीभांति इस बात को जानते हैं कि गुजरात ने काफ़ी तरक्की की है, प्रगति की है। सब को भोजन करना होगा न, कि गुजरात की कथा सुनाएं..? आवाज़ नहीं आ रही है। हाँ, सिंधी बहुत देर से खाना खाते हैं, मैं भी कभी जब दिन भर काम करता था और देर हो जाये तो आप के ही वहाँ खाना खाता था, मैं सिंधी घर में जाता था, कुछ न कुछ मिल जाता था। नहीं, आज की डेट में तो जरूर खा लीजिये। देखिये, बाइ ऐन्ड लार्ज गुजरात की छवि ये रही है कि हम एक ट्रेडर्स स्टेट थे और ट्रेडर्स स्टेट के नाते` हम लोग क्या करते थे? एक जगह से माल लेते थे, दुसरी जगह पे देते थे, और बीच में मलाई निकाल लेते थे। यही था, व्यापारी लोग क्या करेंगे? उसमें से उसका ट्रान्सफोर्मेशन हुआ। आज गुजरात इन्डस्ट्रीअल स्टेट बना है। और इस इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में गुजरात ने जो प्रगति की ऊंचाईयों को पार किया है, अगर कोई गुजरात को एक सैम्पल के रूप में देखें तो उसको विश्वास हो जायेगा कि अगर गुजरात में हो सकता है तो पूरे हिंदुस्तान मे भी हो सकता है और हमारा देश महान बन सकता है। क्योंकि हम वो ही लोग हैं, हिंदुस्तान के कोने कोने में हम एक ही प्रकार के लोग हैं। वो ही कानून है, वो ही व्यवस्था है। तरक्की हो सकती है और प्रगति कर सकते हैं, ये गुजरात ने उदाहरण दिया है।

क समय था, हमारे १६०० कि.मी. के समुद्र किनारे को हम बोझ मानते थे। हम मानते थे अरे भाई, यहाँ क्या होगा? ये पानी, ये खारा पानी, पीने के लिये पानी नहीं... गाँव छोड छोड करके, कच्छ और सौराष्ट्र के लोग गाँव छोड छोड करके चले जाते थे। गाँव के गाँव खाली होते थे। हमने उसे बोझ माना था। मित्रों, हमने आज उस समुंदर को ओपर्च्युनिटी में कन्वर्ट कर दिया है। कभी जो बोझ लगता था उस को हमने अवसर में पलटा और १६०० कि.मी. के समुद्र किनारे पर ४० से अधिक बंदर, एक पूरा नेट्वर्क खड़ा किया है। और पूरे हिंदुस्तान का टोटल जो कार्गो है, प्राइवेट कार्गो, उसका ८५% कार्गो हेन्डलिंग गुजरात के समुद्र किनारे पर होता है।

च्छ। २००१ में भयानक भूकंप आया, ऐसा लगता था की अब गुजरात खत्म हो जायेगा। और वो भीषण भूकंप था, १३,००० से अधिक लोग मारे गये थे, लाखों मकान ध्वस्त हो गये थे, सारा इन्फ्रास्ट्रक्चर खत्म हो चुका था। स्कूल, कोलेज कुछ नहीं, अस्पताल तक नहीं बचे थे। ईश्वर ऐसा रूठा था जिसकी हम कल्पना नहीं कर सकते। एक प्रकार से गुजरात मौत की चादर ओढ़ कर के सोया था और सारा देश मानता था कि अब गुजरात खड़ा नहीं होगा। मित्रों, वर्ल्ड बैंक का रिकॉर्ड कहता है की समृद्ध देश को भी भूकंप जैसी आपदा के बाद बहार निकलना है तो ७ साल लग जाते हैं, मिनिमम ७ साल। मित्रों, गुजरात ३ साल के भीतर भीतर दौडने लग गया। एक समय था जब कच्छ का ग्रोथ नेगेटिव था, ईवन पोप्युलेशन भी। लोग बाहर चले जाते थे, जनसंख्या कम होती जा रही थी। आज कच्छ जो २००१ में मौत की चादर ओढ़ के सोया था, वो आज हिंदुस्तान का फास्टेस्ट ग्रोइंग डिस्ट्रिक्ट है, फास्टेस्ट ग्रोइंग इन दस साल में कच्छ के अंदर २० कि.मी. के रेडियस में, मुंद्रा के आसपास २० कि.मी. के रेडियस में, ८००० मेगावॉट बिजली का उत्पादन का काम शरू हो चूका है, यानि बिजली पैदा होना शुरु हो गई है। विदिन २० कि.मी. रेडियस। हिंदुस्तान के कई राज्य होंगे की पूरे राज्य के पास ८००० मेगावॉट बिजली नहीं होंगी। यहाँ २० कि.मी. के रेडियस में ८००० मेगावॉट बिजली का उत्पादन..! अंजार के पास १५ कि.मी. रेडियस में स्टील पाइप का उत्पादन होता है और दुनियाँ की सबसे ज्यादा स्टील पाइप मॅन्युफेक्चरिंग इस १५ कि.मी. रेडियस में अंजार में होगा।

मित्रों, गुजरात एक ऐसा प्रदेश है जिसके पास रॉ मटिरियल नहीं है, माइन्स और मिनरल्स हमारे पास नहीं है, आयर्न ऑर हमारे पास नहीं है... लेकिन स्टील का सबसे ज्यादा उत्पादन हम करते हैं। हमारे पास डाइमंड के खदान नहीं है, लेकिन दुनिया के अंदर १० में से ९ डाइमंड हमारे यहाँ तैयार होते हैं। दुनिया की कोई नटी ऐसी नहीं होगी जिसके शरीर पर डायमंड हो और मेरे गुजराती का हाथ न लगा हो। ईश्वर ने हमें नहीं दिया, हमें वो सौभाग्य नहीं मिला, हमारे पास नहीं है। हमारे पास कोयला नहीं है, हमारे पास पानी नहीं है, उसके बाद भी हिंदुस्तान में गुजरात एक अकेला ऐसा राज्य है जो २४ अवर्स, २४x७ बिजली घर घर पहुंचाता है, २४ घंटे बीजली मिलती है। मेरे यहाँ कभी ५ मिनट भी बिजली चली जाये न, तो बहुत बड़ी खबर बन जाती है कि मोदी के राज्य में आज ५ मिनट अंधेरा हो गया..! हिंदुस्तान के और राज्य ऐसे है की जहाँ बिजली आये तो खबर बनती है कि मंगल को बिजली आयी थी..! मित्रों, विकास के पैमाने में इतना बड़ा फर्क है।

फार्मास्युटीकल दुनिया में, करीब ४५% दवाईयों का उत्पादन गुजरात मे होता है। दुनिया के हर देश में हम उसे एक्सपॉर्ट करते हैं। अब हम केमिकल की दुनियाँ में थे, आप लोगों को कभी दहेज जाने का अवसर मिले, हिंदुस्तान का एकमात्र लिक्विड केमिकल का पोर्ट है हमारे पास और एक नया एस.आई.आर. जहाँ बना है हमारा, दहेज में। शंघाई की बराबरी कर रहा है, उसकी तुलना होती है, शंघाई जैसे दहेज के केमिकल पोर्ट हैं हमारे और एस.आई.आर. अब वहाँ बन रहा है। तो हमारी गुजरात की पहचान ज्यादातर केमिकल के प्रोडक्शन की दुनिया में थी, अब उसमें से हम इंजीनीयरिंग फिल्ड मे गये हैं। और जब ‘नैनो’ यहाँ आयी तो दुनिया को पहली बार पता चला कि गुजरात नाम की भी कोई जगह है, वरना कोई जानता नहीं था। और मित्रों, नैनो तो अभी अभी आई है और परिणाम ये हुआ है की शायद गाड़ियों की कंपनीयों के जितने जाने-माने नाम हैं, वो सारी की सारी गुजरात मे आ रही हैं। आनेवाले दिनों में हम ५ मिलियन कार्स बनायेंगे गुजरात में, ५ मिलियन कार्स। आप कल्पना कर सकते हैं कि यहाँ ईकोनोमी किस प्रकार से काम करती होगी, किस तेजी से हम लोग आगे बढ़ते होंगे..! औद्योगिक विकास के अंदर हमने एक और क्षेत्र में पदार्पण किया है।

पूरा विश्व ग्लोबल वॉर्मिंग की चर्चा कर रहा है, क्लाइमेट चेन्ज की चर्चा कर रहा है। दुनिया मे चार सरकार ऐसी है जिसका अपना क्लाइमेट चेन्ज डिपार्टमेन्ट है और सरकार उस हिसाब से काम करती है। पूरे विश्व मे चार, उस चार में एक सरकार है, गुजरात की सरकार। हमारा अलग क्लाइमेट चेन्ज डिपार्टमेन्ट है और हम एन्वायरमेन्ट फ्रेन्ड्ली डेवलपमेन्ट पर बल दे रहे हैं, क्योंकि हम जानते हैं कि गुजरात जिस प्रकार से तरक्की कर रहा है, तो मानव जीवन की भी रक्षा होनी चाहिए और दोनों का मेल होना चाहिये। और उसमे हमने इनिश्येटीव लिया है, सोलार एनर्जी का। मित्रों, मैं बड़े गर्व के साथ कहता हूँ कि आज गुजरात दुनिया का सोलार कैपिटल’ बन गया है, वी आर दी वर्ल्ड कैपिटल ऑफ सोलार एनर्जी। आनेवाले दिनों में सोलार एनर्जी के क्षेत्र में, सोलार एनर्जी इक्वीपमेन्ट मेन्युफेक्चरिंग के क्षेत्र में, हमारा रुतबा रहने वाला है और भविष्य में हम इसको और आगे बढ़ाने वाले हैं। रूफ-टॉप सोलार सिस्टम के लिये हम पोलिसी ला रहे हैं। जो भी मकान बनायेगा, उस के छत पे सोलार सिस्टम होगी, सरकार उसके साथ बिजली खरीदने के लिये तय करेगी क्योंकि दुनिया मे जिस प्रकार से पेट्रोलियम के दाम और कोयले के दाम बढ़ते जा रहे हैं, तो बिजली का बहुत बड़ा संकट पैदा हो सकता है। और मित्रों, मैं विश्वास से कहता हूँ, कितना ही संकट क्यों न आये, गुजरात इस संकट से बच जायेगा। और एनर्जी के बिना विकास रूक जायेगा, जहाँ भी ये संकट होगा, विकास रूक जायेगा। लेकिन हमने इसके लिये काफी सोच कर काम किया है। हम बायोफ्युअल में बहुत काम कर रहे हैं इन दिनों। और मित्रों, बायोफ्युअल में काम कर रहे हैं तो एक दिन ऐसा आयेगा कि आज हम खाड़ी के तेल पर जिंदगी गुजार रहे हैं, एक दिन ऐसा आयेगा कि झाड़ी के तेल से हमारा काम चल जायेगा। बायोफ्युअल होगा तो खेत में तेल पैदा होगा। हम उस दिशा में बहुत बड़ी मात्रा में काम कर रहे हैं और एक मंत्र ले कर के चल रहे हैं कि अब खाड़ी का तेल नहीं झाड़ी का तेल चाहिये। उस दिशा में हम काम कर रहे हैं, उससे बहुत बड़ा बदलाव आने वाला है, ऐसी स्थिति बनने वाली है।

मित्रों, एक जमाना ऐसा था की हमारे ४००० गाँव ऐसे थे कि जहाँ फरवरी महिने के बाद करीब ६ महिने तक टैंकर से पानी जाता था। जब तक टैंकर गाँव मे नहीं आता था, पीने का पानी उपलब्ध नहीं होता था। ये हालत गुजरात की इस इक्कीसवीं सदी में २००१-०२ मे थी। हमने नर्मदा योजना की पाइप लाइन से पीने का पानी गाँव मे पहुंचाने की योजना बनाई और १४०० कि.मी. पाइप लाइन हमने ७०० दिनों में लगा दी, ७०० दिनों में १४०० कि.मी. पाइप लाइन। हमारे देश मे आदत ऐसी है की एक शहर के अंदर २ इंच की पाइप लगाते है तो भी ३-३ साल तक, ४-४ साल तक काम चलता है और गढ्ढे वैसे के वैसे होते हैं। क्यों? तो बोले पानी की पाइप लाइन लगानी है। हमने ७०० दिनों में १४०० कि.मी. पाइप लाइन लगाई और पाइप की साइज़ ऐसी है कि आप परिवार के साथ मारूती कार में बैठ कर उस पाइप में से गुजर सकते हैं, उस साइज की पाइप है। ७०० दिनों में १४०० कि.मी. पाइप लाइन। गुजरात अकेला राज्य है देश मे जहाँ २२०० कि.मी. का गैस ग्रिड है। मेरे यहाँ घरों में किचन में टेप से गैस मिलता है, बोटल, सिलिन्डर की जरूरत नहीं पडती। कई शहरों में हुआ है, और भी अनेक शहरों में आगे बढ़ने वाला है। यानि हमने इन्फ़्रास्ट्रक्चर के नये रूप को पकडा है। पहले इन्फ़्रास्ट्रक्चर का रूप होता था कि कोई रोड बन जाये, बस स्टोप बन जाये, धीरे धीरे आया कि रेल्वे स्टेशन हो जाये, थोडा आगे आये तो एअरपोर्ट हो जाये... हमारे इन्फ़्रास्ट्रक्चर की सोच इक्कीसवीं सदी को ध्यान मे रखते हुए गैस ग्रिड, पानी की ग्रिड... उस दिशा में है। और दूसरा एक काम हमने जो किया है, वो है ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क। हम दुनिया मे ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क की लैंथ के संबंध में दुनिया में नं. १ पर हैं। और मित्रों, मानव संस्कृति की विकास यात्रा जो रही है इसमे बहुत बड़ा बदलाव आया है। एक जमाना था, जहाँ नदी होती थी, वहाँ मानव संस्कृति का विकास होता था। फिर एक बदलाव आया, जहाँ से हाईवेज गुजरते थे उसके बगल में मानव संस्कृति विकास करने लग जाती थी। अब तो लोग मंदिर भी बनाते हैं तो हाईवे के पास बनाते हैं, ताकि क्लायन्ट को तकलीफ न हो। लेकिन वक्त बदल रहा है मित्रों, अब जहाँ से ऑप्टिकल फायबर गुजरता होगा, वहीं पर मानव वस्ती रहने वाली है। और गुजरात एक ऐसा स्टेट है जहाँ दुनिया में लैंथ वाइज़ सब से बड़ा ऑप्टिकल फायबर नेटवर्क है। पिछले बजट के अंदर, २०११-१२ के बजट में, भारत सरकार ने अपने बजट में कहा कि वे हिंदुस्तान में ३००० गाँव में ब्रॉड बैंड कनेक्टिविटी का पायलट प्रोजेक्ट करेंगे। ये दिल्ली की भारत सरकार थी, यहाँ कोई किसी दल से जुड़े मित्र हों तो मुझे क्षमा करना, मैं किसी दल की आलोचना नहीं करता हूँ। लेकिन भारत सरकार ने ये घोषणा की थी बजेट के समय कि ३००० गाँव मे ब्रॉड बैंड कनेक्टिविटी का पायलट प्रोजेक्ट करेंगे। भाईयों-बहनों, आपको ये जानकर आनन्द होगा कि गुजरात के १८,००० गाँव में तीन साल से ब्रॉड बैंड कनेक्टिविटी है और उसके कारण आज मैं मेरे गांधीनगर से किसी भी गाँव में वीडियो कॉन्फरन्स से बात कर सकता हूँ, हम गाँव के दूर सूदूर स्कूलों के अंदर लॉंग डिस्टन्स एज्युकेशन से पढ़ा सकते हैं, एक अच्छा टीचर गांधीनगर में बैठ कर के ५०० कि.मी. की दूरी के गाँव की स्कूल के बच्चों को पढ़ा सकता है, ये नेटवर्क गुजरात में है..!

म तौर पर राज्य केन्द्र से कुछ न कुछ माँगते रहते हैं। हमेशा अखबार में आता रहता है कि रोड के लिये माँग की, फलाने के लिये माँग की, अस्पताल के लिये पैसे माँगे, गेहूँ ज्यादा माँगे, कहीं आता है कि नमक हम को दो, ये भी आता है... तो ये है हमारे देश में। लेकिन गुजरात क्या माँगता है? गुजरात का माँगने का दायरा ही कुछ और है। मैंने एक साल पहले प्रधानमंत्री को चिठ्ठी लिखी थी। मैंने कहा साहब, हमारे सेटलाइट इतने हैं, मुझे ये सेटलाइट का उपयोग करने का अधिकार दिजिये, ये चिठ्ठी लिखी थी मैंने। क्योंकि मेरे यहाँ टेक्नोलोजी का इतना उपयोग हो रहा है कि मुझे इस नेटवर्क की आवश्यकता है। और मित्रों, मुझे खुशी है कि तीन दिन पहले भारत सरकार ने हमें सेटलाइट में से एक ट्रांसपोंडर, यानि ३६ मेगा हर्ट्ज़, इतनी यूटिलिटी का हमें अधिकार दिया है। आज मेरे यहाँ लॉंग डिस्टन्स के लिये एक चेनल चला पाता हूँ, अब मैं चौदह चेनल चला पाउंगा, चौदह। आप कल्पना कर सकते हैं कि विकास को किस ऊँचाइयों और किस दायरे पर मैं ले जा रहा हूँ..! हमारे यहाँ कितने बड़े कैन्वस पर काम हो रहा है। मैंने कुछ ही चीज़ों की आप को थोड़ी झलक दी है।

मित्रों, हम कुछ काम ऐसे करते हैं जिनको सुनकर के आप को हैरानी होगी। इस दस साल में गुजरात में मिल्क प्रोडक्शन में ६०% ग्रोथ है, केन यू इमेजिन? ६०% ग्रोथ है। और उसके पीछे जो मेहनत की इसका परिणाम आया है। हमारे यहाँ पशु आरोग्य मेला हम करते हैं। और किसी पशु को ३ कि.मी. से ज्यादा जाना न पडे, क्योंकि जब बीमार पशु को उस से ज्यादा ले जाना क्राइम है, ईश्वर का अपराध है। तो हम करीब ३०००-३५०० केटल कैम्प लगाते हैं, उनकी हेल्थ के चेक-अप के लिये। और ये हम लगातार करते हैं पिछले सात साल से। और वेक्सीनेशन, दवाईयां, उसकी देखभाल... इसका परिणाम यह हुआ है कि आम तौर पर जैसे ठंड ज्यादा हो गयी तो हमें ज़ुकाम हो जाता है, बारिश ज्यादा हो गयी तो हमें ज़ुकाम हो जाता है, वैसे पशु को भी होता है। कुछ डिज़ीज़ ऐसे होते हैं कि थोडा सा भी वेदर चेन्ज होगा तो पशु को भी हो जाता है। लेकिन रेग्युलर देखभाल के कारण मेरे राज्य में से ११२ डिज़ीज़ ऐसे थे, वो आज टोटली इरेडिकेट हो गये, खत्म हो गये मेरे राज्य से और इसका पशु की हेल्थ पर बहुत बड़ा प्रभाव हुआ। इतना ही नहीं, हम पशु की केयर कैसी करते हैं..? हमारे यहाँ मोतीया बिंदु का ऑपरेशन होता है, कैटरेक्ट का ऑपरेशन होता है और कुछ गरीब इलाक़ों में तो लोग चेरिटी के नाते नेत्र यज्ञ करते हैं और गरीब लोगों को मुफ्त में नेत्रमणि लगाने का काम करते हैं। हम सब ने सुना है कैटरेक्ट ऑपरेशन का, नेत्रबिंदु के ऑपरेशन, नेत्रमणि का ऑपरेशन सुना है... आज पहली बार मैं आप को सुना रहा हूँ कि सारे विश्व के अंदर गुजरात अकेला राज्य ऐसा है जहाँ मैं केटल के कैटरेक्ट का ऑपरेशन करता हूँ। पशु के नेत्रमणि के ऑपरेशन मेरे राज्य मे होते हैं, मेरे राज्य मे पशु की डेन्टल ट्रीटमेन्ट होती है, इतनी बारीकी से केयर करने के कारण आज मिल्क प्रोड्क्शन मे हम यहाँ पहुंचे हैं। और मित्रों, जो यहाँ सिंगापुर से आये होंगे उन्हें मैं विश्वास से कहता हूँ कि आज अगर आप सिंगापुर में इंडियन स्टाइल की चाय पीते होंगे, तो लिख करके रखिये, दूध मेरे गुजरात का होगा। मित्रों, हमने एग्रीकल्चर सेक्टर में जो काम किया है, आज दुनिया के किसी भी देश में अगर भिंडी की सब्जी खाते हो, आप लिख कर रखना वो भिंडी मेरे बारडोली से आयी होगी। मित्रों, एक जमाना था जब गीर की केसर प्रसिद्ध थी। आज कच्छ की केसर, कच्छ जो रेगिस्तान था... कच्छ के अंदर मैंगो का उत्पादन होता है और आज मेरी कच्छ की केसर दुनिया के देशों मे एक्सपोर्ट होती है।

मित्रों, दस साल के भीतर भीतर क्या किया जा सकता है इसका सिर्फ एक छोटा सा सैम्पल मैने दिखाया है आप को, पूरी फिल्म देखनी होगी तो महीने भर की कथा लगानी पडेगी। सभी क्षेत्रों मे विकास हुआ है और विकास यहीं एक मंत्र है। और भाईयों-बहनों, सारी समस्याओं का समाधान विकास है, सारे संकटो का समाधान विकास है, उसी एक मंत्र को ले करके हम चल रहे हैं।

मुझे आप सब के बीच आने का अवसर मिला, मैं आप का आभारी हूँ। शुरू में जो मैंने बातें बतायी थीं, सिर्फ आपके प्रति अतिशय प्रेम होने के कारण, आपके प्रति मेरे मन मे भीतर से आदरभाव है उसी के चलते मेरी आप सब से फिर एक बार प्रार्थना है, इस महान परंपरा को नष्ट मत होने देना, इस संस्कृति को नष्ट मत होने देना। आप बच्चों में ये भाषा, ये संस्कार, ये खान-पान इस को जीवित रखने की कोई न कोई योजना हो जाये तो मैं मानता हूँ कि देश की बहुत बड़ी सेवा होगी।

 

हुत बहुत धन्यवाद..!

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मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | आज आपसे ‘मन की बात’, एक ऐसे समय कर रहा हूँ जब कोरोना, हम सभी के धैर्य, हम सभी के दुःख बर्दाश्त करने की सीमा की परीक्षा ले रहा है | बहुत से अपने, हमें, असमय, छोड़ कर चले गए हैं | कोरोना की पहली वेव का सफलतापूर्वक मुकाबला करने के बाद देश हौंसले से भरा हुआ था, आत्मविश्वास से भरा हुआ था, लेकिन इस तूफ़ान ने देश को झकझोर दिया है |

साथियो, बीते दिनों इस संकट से निपटने के लिए, मेरी, अलग-अलग sectors के expert के साथ, विशेषज्ञों के साथ लम्बी चर्चा हुई है | हमारी farma- industry के लोग हों, vaccine manufacturers हों oxygen के production से जुड़े लोग हों या फिर medical field के जानकार, उन्होंने, अपने महत्वपूर्ण सुझाव सरकार को दिए हैं | इस समय, हमें इस लड़ाई को जीतने के लिए, experts और वैज्ञानिक सलाह को प्राथमिकता देनी है | राज्य सरकार के प्रयत्नों को आगे बढ़ाने में भारत सरकार पूरी शक्ति से जुटी हुई है | राज्य सरकारें भी अपना दायित्व निभाने की पूरी कोशिश कर रही हैं |

साथियो, कोरोना के खिलाफ इस समय बहुत बड़ी लड़ाई देश के डॉक्टर और health workers लड़ रहे हैं | पिछले एक साल में उन्हें इस बीमारी को लेकर हर तरह के अनुभव भी हुए हैं | हमारे साथ, इस समय, मुम्बई से प्रसिद्द डॉक्टर शशांक जोशी जी जुड़ रहे हैं |

डॉक्टर शशांक जी को कोरोना के इलाज और इससे जुड़ी research का बहुत जमीनी अनुभव है, वो, Indian College of Physicians के Dean भी रह चुके हैं | आइए बात करते हैं डॉक्टर शशांक से :-

मोदी जी - नमस्कार डॉ० शशांक जी

डॉ० शशांक – नमस्कार सर |

मोदी जी - अभी कुछ दिन पहले ही आपसे बात करने का अवसर मिला था | आपके विचारों की स्पष्टता मुझे बहुत अच्छी लगी थी | मुझे लगा देश के सभी नागरिको को आपके विचार जानने चाहिए | जो बातें सुनने में आती उसकी को मैं एक सवाल के रूप में आपके सामने प्रस्तुत हूँ | डॉ० शशांक – आप लोग इस समय दिन रात जीवन रक्षा के काम में लगे हुए हैं, सबसे पहले तो मैं चाहूँगा कि आप second wave के बारे में लोगों को बताएं | medically ये कैसे अलग है और क्या-क्या सावधानी जरूरी है |

डॉ० शशांक – धन्यवाद सर, ये जो दूसरी बाढ़ (wave) आई है | ये तेजी से आई है, तो जितनी पहली बाढ़ (wave) थी उससे ये virus ज्यादा तेज चल रहा है, लेकिन अच्छी बात ये है कि उससे ज्यादा रफ़्तार से recovery भी है और मृत्यु दर काफी कम हैं | इसमें दो- तीन फर्क है, पहली तो ये युवाओं में और बच्चो में भी थोड़ा दिखाई दे रहा है | उसके जो लक्षण है, पहले जैसे लक्षण थे साँस चढ़ना, सूखा खाँसी आना, बुखार आना ये तो सब है ही और उसके साथ थोड़ा गंध जाना, स्वाद चला जाना ये भी है | और लोग थोड़े भयभीत हुए हैं | भयभीत होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है | 80-90 प्रतिशत लोगों में इसमें कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, ये mutation-Mutation जो बोलते हैं, घबराने की बात नहीं है | ये mutation होते रहते हैं जैसे हम कपड़े बदलते हैं वैसे virus भी अपना रंग बदल रहा है और इसलिए बिलकुल डरने की बात नहीं है और ये wave को हम पार कर देंगे | wave आती जाती है, और ये virus आते जाते रहता है तो यही अलग-अलग लक्षण है और medically हमको सतर्क रहना चाहिए | एक 14 से 21 दिन का ये covid का time table है इसमें वैद्य (डॉक्टर) की सलाह लेना चाहिये |

मोदी जी - डॉ० शशांक मेरे लिए भी आपने जो analysis बताया, बड़ा interesting है, मुझे कई चिट्ठियाँ मिली हैं, जिसमें treatment के बारे में भी लोगों की बहुत सी आशंकाए हैं, कुछ दवाओं की मांग बहुत ज्यादा है, इसलिए मैं चाहता हूँ कि covid के treatment के बारे में भी आप लोगों को जरुर बताएँ |

डॉ० शशांक – हां सर, clinical treatment लोग बहुत देरी से चालू करते हैं और अपने आप बीमारी से दब जायेंगी, ये भरोसे पर रहते हैं, और, मोबाईल पर आने वाली बातों पर भरोसा रखते हैं, और, अगर सरकारी दी गयी सूचना का पालन करें तो ये कठनाई का सामना नहीं आता है | तो covid में clinic treatment protocol है उसमें तीन प्रकार की तीव्रता है हल्का या mild covid, मध्यम या moderate covid और तीव्र covid जो severe covid बोलते हैं, इसके लिए है | तो जो हल्का covid है उसके लिए तो हम oxygen का monitoring करते हैं, pulse का monitoring करते है, बुखार का monitoring करते हैं, बुखार बढ़ जाता है तो कभी-कभी Paracetamol जैसी दवाई का इस्तेमाल करते हैं और अपने डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिये जो moderate covid होता है, मध्यम covid होता है या तीव्र covid होता है तो वैद्य के अपने डॉक्टर के साथ सम्पर्क करना बहुत जरूरी है | सही और सस्ती दवाईया available है | इसमें steroids जो है, ये, जान बचा सकती है, जो inhalers दे सकते हैं, tablet हम और दे सकते हैं हम, और, उसके साथ ही प्राण-वायु जो oxygen है वो देना पड़ता है और इसके लिए छोटे-छोटे इलाज़ है लेकिन अक्सर क्या हो रहा है कि एक नई experimental दवाई है, जिसका नाम है Remdesivir. ये दवाई से एक चीज़ जरुर होती है कि अस्पताल में दो–तीन दिन कम रहना पड़ता है और clinical recovery में थोड़ी सी उसकी aid होती है | ये भी दवाई कब काम करती है, जब, पहले 9-10 दिन में दी जाती है और ये पाँच ही दिन देनी पड़ती है, तो ये लोग जो दौड़ रहे हैं Remdesivir के पीछे ये बिलकुल दौड़ना नहीं चाहिए | ये दवाई का थोडा काम है, जिनको oxygen लगता है, प्राण वायु oxygen लगता है, जो अस्पताल में भर्ती होते हैं और डॉक्टर जब बताते हैं तभी लेना चाहिए | तो ये बहुत जरूरी है सब लोगों को समझना | हम प्राणायाम करेंगे, हमारे शरीर के जो lungs हैं उसको थोड़ा expand करेंगें और जो हमारी खून पतला करने वाली जो injection आती है जिसको हम heparin बोलते हैं | ये छोटी-छोटी दवाईया देंगे तो 98% लोग ठीक हो जाते हैं तो positive रहना बहुत जरूरी है | treatment protocol वैद्य की सलाह से लेना बहुत जरूरी है | और ये जो महंगी-महंगी दवाई है, उसके पीछे दौड़ने की कोई जरूरत नहीं है sir, अपने पास अच्छे इलाज चालू है प्राण-वायु oxygen है, ventilator की भी सुविधा है, सब-कुछ है सर, और, कभी-कभी ये दवाई यदि मिल जाती है तो योग्य लोगो में ही देनी चाहिए तो इसके लिए बहुत भ्रम फैला हुआ है और इसलिए ये स्पष्टीकरण देना चाहता हूँ sir कि अपने पास world की सबसे Best treatment available है आप देखेंगे कि भारत में सबसे अच्छा recovery rate है | आप यदि compare करेंगे यूरोप के लिए, अमेरिका वही से हमारे यहाँ के treatment protocol से मरीज ठीक हो रहे है सर |

मोदी जी - डॉ० शशांक आपका बहुत बहुत धन्यवाद | डॉक्टर शशांक ने जो जानकारियाँ हमें दीं, वो बहुत जरुरी हैं और हम सबके काम आएँगी |

साथियो, मैं आप सबसे आग्रह करता हूँ, आपको अगर कोई भी जानकारी चाहिए हो, कोई और आशंका हो, तो सही source से ही जानकारी लें | आपके जो family doctor हों, आस-पास के जो डॉक्टर्स हों, आप उनसे फ़ोन से संपर्क करके सलाह लीजिये | मैं देख रहा हूँ कि हमारे बहुत से डॉक्टर खुद भी ये जिम्मेदारी उठा रहे हैं | कई Doctors social media के जरिए लोगों को जानकारी दे रहे हैं | फ़ोन पर, whatsapp पर भी counseling कर रहे हैं | कई हॉस्पिटल की वेबसाइटें हैं, जहां जानकारियाँ भी उपलब्ध हैं, और वहां आप डॉक्टर्स से, परामर्श भी ले सकते हैं | ये बहुत सराहनीय है |

मेरे साथ श्रीनगर से डॉक्टर नावीद नजीर शाह जुड़ रहे हैं | डॉक्टर नावीद श्रीनगर के एक Government medical College में प्रोफेसर हैं | नावीद जी अपनी देखरेख में अनेकों कोरोना patients को ठीक कर चुके हैं और रमजान के इस पवित्र माह में डॉ नावीद अपना कार्य भी निभा रहे हैं, और, उन्होंने हमसे बातचीत के लिए समय भी निकाला है | आइये उन्हीं से बात करते हैं |

मोदी जी – नावीद जी नमस्कार |

डॉ० नावीद – नमस्कार सर |
डॉक्टर नावीद ‘मन की बात’ के हमारे श्रोताओं ने इस मुश्किल समय में panic management का सवाल उठाया है | आप अपने अनुभव से उन्हें क्या जवाब देंगें ?

डॉ० नावीद- देखिए जब कोरोना शुरू हुआ तो कश्मीर में जो सबसे पहला hospital designate हुआ As Covid hospital वो हमारा city hospital था | जो medical college के under में आता है तो उस टाइम एक खौफ़ का माहौल था | लोगो में तो था ही वो समझते थे शायद covid का infection अगर किसी को हो जाता है तो death sentence माना जायेगा ये, और ऐसे में हमारे हस्पताल में डॉक्टर साहिबान या para-medical staff काम करते थे, उनमें भी एक खौफ़ का माहौल था कि हम इन patient को कैसे face करेंगे हमें infection होने का ख़तरा तो नहीं है | लेकिन जो टाइम गुजरा हमने भी देखा कि अगर पूरी तरीके से हम जो protective gear पहने एतिहादी तदवीर जो है, उन पर अमल करें तो हम भी safe रह सकते हैं और हमारा जो बाकी staff है वो भी safe रह सकता है और आगे-आगे हम देखते गये मरीज या कुछ लोग बीमार थे जो asymptomatic, जिनमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे | हमने देखा करीब करीब 90-95% से ज्यादा जो मरीज हैं वो without in medication भी ठीक हो जाते हैं तो वक्त जैसे गुजरता गया लोगों में जो कोरोना का एक डर था वो बहुत कम हो गया | आज की बात जो ये second wave जो इस टाइम हमारी आयी है इस कोरोना में इस टाइम भी हमें panic होने की जरूरत नहीं है | इस मौके पर भी जो protective measures है, जो SOPs है अगर उन पर हम अमल करेंगें जैसे मास्क पहनना, hand sanitizer का use करना, उसके अलावा physical distance maintain करना या social gathering avoid करे तो हम अपना रोजमर्रा का काम भी बखूबी निभा सकते हैं और इस बीमारी से protection भी पा सकते हैं |

मोदी जी - डॉ० नावीद vaccine को लेकर भी लोगो के कई सारे सवाल है, जैसे कि vaccine से कितनी सुरक्षा मिलेगी, vaccine के बाद कितना आश्वस्त रह सकते हैं ? आप कुछ बात इसमें बतायें श्रोताओं को बहुत लाभ होगा |

डॉ० नावीद – जब हम कोरोना का infection सामने आया तब से आज तक हमारे पास covid 19 के लिए कोई effective treatment available नहीं है, तो हम इस बीमारी को fight, दो ही चीजों से कर सकते हैं एक तो protective major और हम पहले से ही कह रहे थे कि अगर कोई effective vaccine हमारे पास आए तो वो हमें इस बीमारी से निजाद दिला सकता है और हमारे मुल्क में दो vaccine इस टाइम available है, Covaxin and Covishield है जो यहीं पर बना हुआ vaccine है | और companies भी जो अपनी trials की है तो उसमे भी देखा गया है कि इसकी efficacy जो है वो 60% से ज्यादा है, और अगर हम, जम्मू कश्मीर की बात करें तो हमारी UT में अभी तक 15 से 16 लाख तक लोगों ने अभी ये vaccine लगाया है | हां social media में काफी इसके जो misconception या myths हैं, इसमें आये थे कि ये-ये side effect हैं, अभी तक हमारे जो भी यहाँ पर vaccine लगे हैं कोई side effect उनमें नहीं पाया गया है | सिर्फ, जो, आम हर किसी vaccine के साथ, associated होता है, किसी को बुखार आना, पूरे बदन में दर्द या local site जहाँ पर injection लगता है वहा पर pain होना ऐसे ही side effects हमने हर मरीज में देखे हैं जो कोई gross हमने कोई adverse effect हमने नहीं देखा है | और हां दूसरी बात लोगो में ये भी आशंका थी कि कुछ लोग after vaccination यानि vaccine टीकाकरण के बाद positive हो गये इसमें companies से ही guidelines है कि उसमें अगर किसी को टीका लगा है | उसके बाद उसमें infection हो सकता है वो positive हो सकता है | लेकिन जो बीमारी की severity है, यानि बीमारी की सिद्दत्त जो है, उन मरीज में, उतनी नहीं होगी यानि की वो positive हो सकते हैं लेकिन जो बीमारी है वो एक जानलेवा बीमारी उनमें साबित नहीं हो सकती, इसलिए जो भी ये misconception हैं vaccine के बारे में वो हमें दिमाग से निकालने चाहिए और जिस-जिस की बारी आयी क्योंकि 1 मई से हमारे पूरे मुल्क में जो भी 18 साल से ज्यादा की उम्र है उनको vaccine लगाने का कार्यक्रम शुरू होगा तो लोगों से अपील यही करेंगे आप आए vaccine लगवाए और अपने आप को भी protect करें और overall हमारी society और हमारी community इससे protect हो जायगी Covid 19 के infection से |

मोदी जी - डॉ० नावीद आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, और आपको रमजान के पवित्र महीने की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ |

डॉ० नावीद – बहुत-बहुत शुक्रिया |

मोदी जी : साथियो, कोरोना के इस संकट काल में Vaccine की अहमियत सभी को पता चल रही है, इसलिए, मेरा आग्रह है कि Vaccine को लेकर किसी भी अफ़वाह में न आयें | आप सभी को मालूम भी होगा कि भारत सरकार की तरफ से सभी राज्य सरकारों को free vaccine भेजी गई है जिसका लाभ 45 साल की उम्र के ऊपर के लोग ले सकते हैं | अब तो 1 मई से देश में 18 साल के ऊपर के हर व्यक्ति के लिए Vaccine उपलब्ध होने वाली है | अब देश का Corporate Sector, कम्पनियाँ भी अपने कर्मचारियों को Vaccine लगाने के अभियान में भागीदारी निभा पायेगी | मुझे ये भी कहना है कि भारत सरकार की तरफ से मुफ़्त Vaccine का जो कार्यक्रम अभी चल रहा है, वो, आगे भी चलता रहेगा | मेरा राज्यों से भी आग्रह है, कि, वो भारत सरकार के इस मुफ़्त Vaccine अभियान का लाभ अपने राज्य के ज्यादा-से-ज्यादा लोगों तक पहुँचाएँ |

साथियो, हम सब जानते हैं कि बीमारी में हमारे लिए अपनी, अपने परिवार की देखभाल करना, मानसिक तौर पर कितना मुश्किल होता है, लेकिन, हमारे अस्पतालों के Nursing Staff को तो, यही काम, लगातार, कितने ही मरीजों के लिए एक साथ करना होता है| ये सेवा-भाव हमारे समाज की बहुत बड़ी ताकत है | Nursing Staff द्वारा की जा रही सेवा, और परिश्रम के बारे में, सबसे अच्छे से तो कोई Nurse ही बता सकती है | इसलिए मैंने रायपुर के डॉक्टर बी.आर. अम्बेडकर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में अपनी सेवाएँ दे रहीं sister भावना ध्रुव जी को ‘मन की बात’ में आमंत्रित किया है, वो, अनेकों कोरोना मरीजों की देखभाल कर रही हैं | आइये ! उन्हीं से बात करते हैं –

मोदी जी:- नमस्कार भावना जी !

भावना:- आदरणीय प्रधानमंत्री जी, नमस्कार !

मोदी जी:- भावना जी...

भावना:- Yes sir

मोदी जी:- ‘मन की बात’ सुनने वालों को आप जरुर ये बताइए कि आपके परिवार में इतनी सारी जिम्मेवारियाँ इतने सारे यानी multitask और उसके बाद भी आप कोरोना के मरीजों के साथ काम कर रही हैं | कोरोना के मरीजों के साथ आपका जो अनुभव रहा, वो जरुर देशवासी सुनना चाहेंगे क्योंकि sister जो होती है, nurses जो होती हैं patient के सबसे निकट होती हैं और सबसे लम्बे समय तक होती हैं तो वो हर चीज़ को बड़ी बारीकी से समझ सकती हैं जी बताइए |

भावना:- जी सर, मेरा total experience COVID में सर, 2 month का है सर | हम 14 days duty करते हैं और 14 days के बाद हमें rest दिया जाता है | फिर 2 महीने बाद हमारी ये COVID duties repeat होता है सर | जब सबसे पहले मेरी COVID duty लगी तो सबसे पहले मैं अपने family members को ये COVID duty की बात share करी | ये मई की बात है और मैं, ये, जैसे ही मैंने share किया सब के सब डर गए, घबरा गए मुझसे, कहने लगे कि बेटा ठीक से काम करना, एक emotional situation था सर | बीच में जब, मेरी बेटी मुझसे पूछी, mumma आप COVID duty जा रहे हो तो उस समय बहुत ही ज्यादा मेरे लिए emotional moment था, लेकिन, जब मैं COVID patient के पास गयी तो मैं एक जिम्मेदारी घर में छोड़ कर गई और जब मैं COVID patient से मिली सर, तो वो उनसे और ज्यादा घबराये हुए थे, COVID के नाम से सारे patient इतना डरे हुए थे सर, कि, उनको समझ में ही नहीं आ रहा था कि उनके साथ क्या हो रहा है, हम आगे क्या करेंगे | हम उनके डर को दूर करने के लिए उनसे बहुत अच्छे से healthy environment दिए सर उन्हें | हमें जब ये COVID duty करने को कहा गया तो सर सबसे पहले हमको PPE Kit पहनने के लिए कहा गया सर, जो कि बहुत ही कठिन है, PPE Kit को पहन करके duty करना | सर ये बहुत tough था हमारे लिए, मैंने 2 month की duty में हर जगह 14-14 दिन duty की ward में, ICU में, Isolation में सर |

मोदी:- यानी कुल मिला कर तो आप एक साल से इसी काम को कर रही हैं |

भावना:- Yes sir, वहाँ जाने से पहले मुझे नहीं पता था कि मेरे colleagues कौन है | हम एक team member की तरह काम किये सर, उनका जो भी problem थे, उनको share किये, हम जाने patient के बारे में और उनका stigma दूर किये सर, कई लोग ऐसे थे सर कि जो COVID के नाम से ही डरते थे | वो सारे symptoms उनमें आते थे जब हम history लेते थे उनसे, लेकिन वो डर के कारण, वो अपना टेस्ट नहीं करवा पाते थे, तो हम उनको समझाते थे, और सर, जब severity बढ़ जाती थी तब उनका lungs already infected हो चुका रहता था तब उनको ICU की जरुरत रहती थी तब वो आते थे और साथ में उनकी पूरी family आती थी | तो ऐसा 1-2 case हमनें देखा सर और ऐसा भी नहीं कि हर एक age group के साथ काम किया सर हमने | जिसमें छोटे बच्चे थे, महिला, पुरुष, बुजुर्ग, सारे तरह के patient थे सर | उन सबसे हमने बात करी तो सब ने कहा कि हम डर की वजह से नहीं आ पाए, सबका यही हमें answer मिला सर | तो हम उनको समझाए सर, कि, डर कुछ नहीं होता है आप हमारा साथ दीजिये हम आपका साथ देंगे बस आप जो भी protocols है उसे follow कीजिये बस हम इतना उनसे कर पाए सर |

मोदी जी:- भावना जी, मुझे बहुत अच्छा लगा आपसे बात कर करके, आपने काफी अच्छी जानकारियाँ दी हैं | अपने स्वयं के अनुभव से दी हैं, तो जरुर देशवासियों को, इससे एक, positivity का message जाएगा | आपका बहुत-बहुत धन्यवाद भावना जी !

भावना:- Thank you so much sir... Thank you so much... जय हिन्द सर |

मोदी जी:- जय हिन्द !

भावना जी और Nursing Staff के आप जैसे हजारों-लाखों भाई-बहन बखूबी अपना कर्त्तव्य निभा रहे हैं | ये हम सभी के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है | आप अपने स्वास्थ्य पर भी खूब ध्यान दीजिये | अपने परिवार का भी ध्यान रखिये |
साथियो, हमारे साथ, इस समय बेंगलुरु से Sister सुरेखा जी भी जुड़ी हुई हैं | सुरेखा जी K.C. General Hospital में Senior Nursing Officer हैं | आइये ! उनके अनुभव भी जानते हैं –

मोदी जी:- नमस्ते सुरेखा जी !

सुरेखा:- I am really proud and honoured sir to speak to Prime Minister of our country.

Modi ji:-Surekha ji, you along with all fellow nurses and hospital staff are doing excellent work. India is thankful to you all. What is your message for the citizens in this fight against COVID-19.

Surekha:- Yes sir... Being a responsible citizen I would really like to tell something like please be humble to your neighbors and early testing and proper tracking help us to reduce the mortality rate and moreover please if you find any symptoms isolate yourself and consult nearby doctors and get treated as early as possible. So, community need to know awareness about this disease and be positive, don’t be panic and don’t be stressed out. It worsens the condition of the patient. We are thankful to our Government proud to have a vaccine also and I am already vaccinated with my own experience I wanted to tell the citizens of India, no vaccine provides 100% protection immediately. It takes time to build immunity. Please don’t be scared to get vaccinated. Please vaccinate yourself; there is a minimal side effects and I want to deliver the message like, stay at home, stay healthy, avoid contact with the people who are sick and avoid touching the nose, eyes and mouth unnecessarily. Please practice physically distancing, wear mask properly, wash your hands regularly and home remedies you can practice in the house. Please drink Ayurvedic Kadha (आयुर्वेदिक काढ़ा), take steam inhalation and mouth gargling everyday and breathing exercise also you can do it. And one more thing last and not the least please have a sympathy towards frontline workers and professionals. We need your support and co-operation. We will fight together. We will get through with the pandemic. This is what my message to the people sir.

Modi ji:- Thank you Surekha ji.

Surekha:- Thank you sir.

सुरेखा जी, वाकई, आप बहुत कठिन समय में मोर्चा संभाले हुए हैं | आप अपना ध्यान रखिये ! आपके परिवार को भी मेरी बहुत-बहुत शुभकामनायें हैं | मैं, देश के लोगों से भी आग्रह करूँगा कि जैसा भावना जी, सुरेखा जी ने, अपने अनुभव से बताया है | कोरोना से लड़ने के लिए Positive Spirit बहुत ज्यादा जरुरी है और देशवासियों को इसे बनाए रखना है |

साथियो, Doctors और Nursing Staff के साथ-साथ इस समय Lab-Technicians और Ambulance Drivers जैसे Frontline Workers भी भगवान की तरह ही काम कर रहे हैं | जब कोई Ambulance किसी मरीज तक पहुँचती हैं तो उन्हें Ambulance Driver देवदूत जैसा ही लगता है | इन सबकी सेवाओं के बारे में, इनके अनुभव के बारे में, देश को जरुर जानना चाहिए | मेरे साथ अभी ऐसे ही एक सज्जन हैं – श्रीमान प्रेम वर्मा जी, जो कि एक Ambulance Driver हैं, जैसा कि इनके नाम से ही पता चलता है | प्रेम वर्मा जी अपने काम को, अपने कर्तव्य को, पूरे प्रेम और लगन से करते हैं | आइये ! उनसे बात करते हैं –

मोदी जी – नमस्ते प्रेम जी |

प्रेम जी – नमस्ते सर जी |

मोदी जी – भाई ! प्रेम |

प्रेम जी – हाँ जी सर |

मोदी जी – आप अपने कार्य के बारे में |

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – जरा विस्तार से बताइये | आपका जो अनुभव है, वो भी बताइये |

प्रेम जी – मैं CATS Ambulance में driver की post पर हूँ और जैसे ही Control हमें एक tab पर call देता है | 102 से जो call आती है हम move करते हैं patient के पास | हम patient को जाते हैं, उनके पास, तो दो साल से हम continue कर रहे हैं ये काम | अपना kit पहन कर, अपने gloves, mask पहन कर patient को, जहाँ वो drop करने के लिए कहते हैं, जो भी hospital में, हम जल्दी से जल्दी उनको drop करते हैं |

मोदी जी – आपको तो vaccine की दोनों dose लग गई होंगी |
प्रेम जी – बिल्कुल सर |

मोदी जी – तो दूसरे लोगों को vaccine लगवायें | इसके लिए आपका क्या सन्देश है ?

प्रेम जी – सर बिल्कुल | सभी को ये dose लगवाना चाहिए और अच्छी ही है family के लिए भी | अब मुझे मेरी mummy कहती हैं ये नौकरी छोड़ दो | मैंने बोला, मम्मी, अगर मैं भी नौकरी छोड़ कर बैठ जाऊंगा तो सब और patient को कैसे कौन छोड़ने जाएगा ? क्योंकि सब इस कोरोना काल में सब भाग रहे हैं | सब नौकरी छोड़-छोड़ कर जा रहे हैं | mummy भी मुझे बोलती हैं कि बेटा वो नौकरी छोड़ दे | मैंने बोला नहीं mummy मैं नौकरी नहीं छोडूंगा |

मोदी जी – प्रेम जी माँ को दुखी मत करना | माँ को समझाना |

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – लेकिन ये जो आपने माँ वाली बात बताई न

प्रेम जी – हाँ जी |

मोदी जी – ये बहुत ही छूने वाली है |

प्रेम जी – हाँ जी |

मोदी जी – आपकी माता जी को भी |

प्रेम जी – हाँ जी |

मोदी जी – मेरा प्रणाम कहियेगा |

प्रेम जी – बिलकुल

मोदी जी – हाँ

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – और प्रेम जी मैं आपके माध्यम से

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – ये ambulance चलाने वाले हमारे driver भी

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – कितना बड़ा risk लेकर के काम कर रहे हैं |

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – और हर एक की माँ क्या सोचती है ?

प्रेम जी – बिलकुल सर

मोदी जी – ये बात जब श्रोताओं तक पहुचेगी

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – मैं जरुर मानता हूँ कि उनको भी दिल को छू जाएगी |

प्रेम जी – हाँ जी

मोदी जी – प्रेम जी बहुत-बहुत धन्यवाद | आप एक प्रकार से प्रेम की गंगा बहा रहे हैं |

प्रेम जी – धन्यवाद सर जी

मोदी जी – धन्यवाद भैया

प्रेम जी – धन्यवाद |

साथियो, प्रेम वर्मा जी और इन जैसे हजारों लोग, आज अपना जीवन दाव पर लगाकर, लोगों की सेवा कर रहे हैं | कोरोना के खिलाफ़ इस लड़ाई में जितने भी जीवन बच रहे हैं उसमें Ambulance Drivers का भी बहुत बड़ा योगदान है | प्रेम जी आपको और देशभर में आपके सभी साथियों को मैं बहुत-बहुत साधुवाद देता हूँ | आप समय पर पहुँचते रहिये, जीवन बचाते रहिये |

मेरे प्यारे देशवासियो, ये सही है कि, कोरोना से बहुत लोग संक्रमित हो रहे हैं, लेकिन, कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की संख्या भी उतनी ही ज्यादा है | गुरुग्राम की प्रीती चतुर्वेदी जी ने भी हाल ही में कोरोना को हराया है| प्रीती जी ‘मन की बात’ में हमारे साथ जुड़ रही हैं| उनके अनुभव हम सब के काफ़ी काम आयेंगें |

मोदी जी – प्रीति जी नमस्ते

प्रीति – नमस्ते सर | कैसे है आप ?

मोदी जी – मैं ठीक हूँ जी | सबसे पहले तो मैं आपकी covid-19 से

प्रीति – जी

मोदी जी – सफलतापूर्वक लड़ने के लिए

प्रीति – जी

मोदी जी – सराहना करूँगा

प्रीति – Thank you so much sir

मोदी जी – मेरी कामना है आपका स्वास्थ्य और तेजी से बेहतर हो |

प्रीति – जी शुक्रिया सर

मोदी जी – प्रीति जी

प्रीति –हाँ जी सर

मोदी जी – ये सिर्फ आपके पूरे wave में आप ही का नंबर लगा है कि परिवार के और सदस्य भी इसमें फंस गए है |

प्रीति – नहीं-नहीं सर मैं अकेली ही हुई थी |

मोदी जी – चलिये भगवान की कृपा रही | अच्छा मैं चाहूँगा

प्रीति – हाँजी सर |

मोदी जी – कि आप अपने इस पीड़ा की अवस्था के कुछ अनुभव अगर सांझा करें तो शायद जो श्रोता है उनको भी ऐसे समय कैसे अपने आप को संभालना चाहिए इसका मार्गदर्शन मिलेगा |

प्रीति – जी सर, जरूर | सर initially stage में मेरे को बहुत ज्यादा lethargy, मतलब बहुत सुस्ती-सुस्ती आया और उसके बाद ना मेरे गले में थोड़ी सी खराश होने लगी | तो उसके बाद ना मेरा थोड़ा सा मुझे लगा कि ये symptoms है तो मैंने test कराने के लिए test कराया | दूसरे दिन report आते ही जैसे ही मुझे positive हुआ, मैंने अपने आप को quarantine कर लिया | एक Room में isolate करके doctors के साथ consult करा, मैंने, उनसे | उनकी medication start कर दी |

मोदी जी – तो आपका परिवार बच गया आपके quick action के कारण |

प्रीति – जी सर | वो बाकी सबका भी बाद में कराया था | बाकी सब negative थे | मैं ही positive थी | उससे पहले मैंने अपने आप को isolate कर लिया था एक room के अन्दर | अपनी जरुरत का सारा सामान रख कर उसको मैं अपने आप अन्दर कमरे में बंद हो गई थी | और उसके साथ-साथ मैंने फिर doctor के साथ medication start कर दी | सर मैंने medication के साथ-साथ ना मैंने, योगा, आयुर्वेदिक, और, मैं ये सब start किया और साथ में ना, मैंने, काढ़ा भी लेना शुरू कर दिया था | Immunity boost करने के लिए और सर मैं दिन में मतलब जब भी अपना भोजन लेती थी उसमे मैंने healthy food जो कि protein rich diet थी, वो लिया मैंने | मैंने बहुत सारा fluid लिया मैंने steam लिया gargle किया और hot water लिया | मैंने दिन भर में इन सब चीज़ों को ही अपने जीवन में लेती आई daily | और सर इन दिनों में ना, सबसे बड़ी बात में बोलना चाहूंगी घबराना तो बिलकुल नहीं है | बहुत mentally strong करना है जिसके लिए मुझे योगा ने बहुत ज्यादा, breathing exercise करती थी अच्छा लगता था उसको करने से मुझे |

मोदी जी – हाँ | अच्छा प्रीति जी जब अब आपका process पूरा हो गया | आप संकट से बाहर निकल आई |

प्रीति – हाँ जी

मोदी जी – अब आपका test भी negative आ गया है |

प्रीति – हाँ जी सर

मोदी जी – तो फिर आप अपने स्वास्थ्य के लिए इसकी देखभाल के लिए अभी क्या कर रही हैं ?

प्रीति – सर मैंने एक तो योग बंद नहीं किया है |

मोदी जी – हाँ

प्रीति – ठीक है मैंने काढ़ा अभी भी ले रही हूँ और अपनी immunity boost रखने के लिए मैं अच्छा healthy food खा रही हूँ अभी |

मोदी जी – हाँ

प्रीति – जो कि मैं बहुत अपने आप को neglect कर लेती थी उस पर बहुत ध्यान दे रही हूँ मैं |

मोदी जी – धन्यवाद प्रीति जी |

प्रीति – Thank you so much sir. 

मोदी जी - आपने जो जानकारी दी मुझे लगता है ये बहुत सारे लोगों के काम आयेगी | आप स्वस्थ रहें, आपके परिवार के लोग स्वस्थ रहें, मेरी आपको बहुत-बहुत शुभकामनायें |

मेरे प्यारे देशवासियो, जैसे आज हमारे Medical Field के लोग, Frontline Workers दिन-रात सेवा कार्यों में लगे हैं | वैसे ही समाज के अन्य लोग भी, इस समय, पीछे नहीं हैं | देश एक बार फिर एकजुट होकर कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई लड़ रहा है | इन दिनों मैं देख रहा हूँ कोई Quarantine में रह रहे परिवारों के लिए दवा पहुँचा रहा है, कोई, सब्जियाँ, दूध, फल आदि पहुँचा रहा है | कोई Ambulance की मुफ़्त सेवाएँ मरीजों को दे रहा है | देश के अलग-अलग कोने में इस चुनौतीपूर्ण समय में भी स्वयं सेवी संगठन आगे आकर दूसरों की मदद के लिए जो भी कर सकते हैं वो करने का प्रयास कर रहे हैं | इस बार, गाँवों में भी नई जागरूकता देखी जा रही है | कोविड नियमों का सख्ती से पालन करते हुए लोग अपने गाँव की कोरोना से रक्षा कर रहे हैं, जो लोग, बाहर से आ रहे हैं उनके लिए सही व्यवस्थायें भी बनाई जा रही हैं | शहरों में भी कई नौजवान सामने आये हैं, जो अपने क्षेत्र में, कोरोना के case न बढ़े, इसके लिए, स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर प्रयास कर रहे हैं, यानि एक तरफ देश, दिन-रात अस्पतालों, Ventilators और दवाईयों के लिए काम कर रहा है, तो दूसरी ओर, देशवासी भी, जी-जान से कोरोना की चुनौती का मुकाबला कर रहें हैं | ये भावना हमें कितनी ताकत देती है, कितना विश्वास देती है | ये जो भी प्रयास हो रहे हैं, समाज की बहुत बड़ी सेवा है | ये समाज की शक्ति बढ़ाते हैं |

मेरे प्यारे देशवासियो, आज ‘मन की बात’ की पूरी चर्चा को हमने कोरोना महामारी पर ही रखा, क्योंकि, आज, हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है, इस बीमारी को हराना | आज भगवान महावीर जयंती भी है | इस अवसर पर मैं सभी देशवासियों को शुभकामनायें देता हूँ | भगवान महावीर के सन्देश, हमें, तप और आत्म संयम की प्रेरणा देते हैं | अभी रमजान का पवित्र महीना भी चल रहा है | आगे बुद्ध पूर्णिमा भी है | गुरु तेगबहादुर जी का 400वाँ प्रकाश पर्व भी है | एक महत्वपूर्ण दिन पोचिशे बोइशाक - टैगोर जयंती का है | ये सभी हमें प्रेरणा देते हैं अपने कर्तव्यों को निभाने की | एक नागरिक के तौर पर हम अपने जीवन में जितनी कुशलता से अपने कर्तव्यों को निभायेंगे | संकट से मुक्त होकर भविष्य के रास्ते पर उतनी ही तेजी से आगे बढ़ेंगे | इसी कामना के साथ मैं आप सभी से एक बार फिर आग्रह करता हूँ कि Vaccine हम सब को लगवाना है और पूरी सावधानी भी रखनी है | ‘दवाई भी - कड़ाई भी’ | इस मंत्र को कभी भी नहीं भूलना है | हम जल्द ही साथ मिलकर इस आपदा से बाहर आयेंगे | इसी विश्वास के साथ आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद | नमस्कार |