कन्या केळवणी और शाला प्रवेश महोत्सव : 2012 .

जनअभियान के प्रारंभ पर वीडियो कॉन्फ्रेस के जरिए मुखातिब हुए श्री मोदी .

गांव के मंदिर जितना ही महत्व प्राथमिक स्कूल का है : मुख्यमंत्री

गांधीनगर, गुरुवार: मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार से शुरू हुए तीन दिवसीय कन्या केळवणी और शाला प्रवेश महोत्सव के दसवें अभियान के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पालक समाज से प्रेरक अपील करते हुए कहा कि गांव के मंदिर जितना ही महत्व प्राथमिक स्कूल का है। लिहाजा हमारा दायित्व है कि हमारे बच्चों का बालपन स्कूल की चारदीवारी के भीतर जीवंत रहे।

श्री मोदी ने कहा कि यह जनअभियान 15 वर्ष बाद के सुशिक्षित गुजरात की नींव साबित होगा। राज्य के मुख्यमंत्री से लेकर समूची सरकार और जनप्रतिनिधी गांव-गांव जाकर बेटे-बेटियों को पढ़ाने की अपील कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पूरा गांव सुशिक्षित होने पर व गांव के बेटे-बेटियों के डॉक्टर-इंजीनियर बनने पर गांव गौरवांवित होता है, यही शिक्षा के महत्व को इंगित करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब बालक को शिक्षित करने के लिए उनकी सरकार ने पिछले दस वर्षों में अनेक कदम उठाए हैं। बच्चे के स्कूल में दाखिले के साथ ही सरकार ने विद्यादीप योजना के तहत उसका जीवन बीमा करवाया। स्कूल के हरेक बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण और बीमारी के उपचार की जिम्मेदारी इस सरकार ने उठाई है। शिक्षा-संस्कार के उत्तम दायित्व का निर्वहन करने वाले राज्य सरकार के तमाम अधिकारियों के योगदान की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कई अधिकारियों ने आंगनबाड़ी दत्तक ली है। यह एक ऐसा अवसर है जब शिक्षा के लिए समूची सरकार इस हद तक संवेदनशील बनी है।

श्री मोदी ने कहा कि गुणोत्सव के जरिए दो लाख शिक्षकों में नई चेतना का संचार हुआ है। ऐसे में जरूरी है कि पूरा गांव भी संवेदना के साथ स्कूल में उत्तम शिक्षा के लिए प्रयास करे। इस सरकार की दस वर्षों की तपस्या और भूतकाल की सरकारों द्वारा प्राथमिक शिक्षा को अनदेखा किये जाने की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने सभी 34,000 स्कूलों में कक्षाएं, शिक्षक, सेनीटेशन यूनिट, बिजली, कंप्यूटर प्रयोगशाला, मध्याह्न भोजन, पोषक आहार, वांचे गुजरात अभियान और पुस्तक लाइब्रेरी, खेलकूद का मैदान समेत सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं।

श्री मोदी ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे कंप्यूटर का ज्ञान अनिवार्यत: हासिल करें। स्कूल के प्रति समाज की संवेदना जागृत करने को तिथि भोजन के लिए भी उन्होंने प्रेरक अपील की। उन्होंने कक्षा सातवीं के बाद बेटियों को माध्यमिक स्कूल में आगे की पढ़ाई करवाने का अनुरोध भी किया। आंगनबाड़ी के शिशुओं के लिए जनभागीदारी से लाखों की संख्या में खिलौनों की भेंट देने की समाज की सत्वशक्ति को उन्होंने गुजरात के उज्जवल भविष्य का संकेत बताया। गांव की स्कूल को च्एज् ग्रेड की श्रेणी में लाने का संकल्प करने का उन्होंने आह्वान किया

इस अवसर पर प्राथमिक शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती संगीता सिंह और प्राथमिक शिक्षा निदेशक आर.सी. रावल भी मौजूद थे।

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प्रधानमंत्री ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी
June 26, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज महान बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उन्हें साहित्य की एक महान हस्ती के रूप में याद किया, जिनकी रचनाओं ने भारतीयों की कई पीढ़ियों में देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव की भावना जगाई।

इस साल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने कहा कि भारत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' के ज़रिए बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और देश को प्रेरणा का एक ऐसा स्रोत दिया, जो हमेशा बना रहेगा।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:

महान बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि।

साहित्य की एक महान हस्ती, जिनकी रचनाओं ने भारतीयों की कई पीढ़ियों में देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव की भावना जगाई। उनका समृद्ध साहित्यिक कार्य लोगों के विचारों को रोशन करता है और राष्ट्र-निर्माण के प्रति हमारे सामूहिक संकल्प को मज़बूत करता है।

यह वह समय है, जब हम 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। 'वंदे मातरम' के ज़रिए उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन और हमारे देश को प्रेरणा का एक ऐसा स्रोत दिया, जो हमेशा बना रहेगा।

মহান বঙ্কিম চন্দ্র চট্টোপাধ্যায়ের জয়ন্তীতে তাঁর প্রতি শ্রদ্ধাঞ্জলি।

এক সুবিশাল সাহিত্যিক আলোকবর্তিকা হিসেবে, তাঁর লেখা প্রজন্মান্তরের ভারতীয়দের মধ্যে দেশপ্রেম এবং সাংস্কৃতিক গৌরবের চেতনা জাগ্রত করেছিল। তাঁর সমৃদ্ধ সাহিত্যকর্ম মনকে উদ্ভাসিত করে চলেছে এবং জাতি গঠনের প্রতি আমাদের সম্মিলিত সংকল্পকে শক্তিশালী করছে।

এখন আমরা বন্দে মাতরমের ১৫০তম বার্ষিকী উদযাপন করছি। বন্দে মাতরমের মাধ্যমে, তিনি স্বাধীনতা আন্দোলন এবং আমাদের জাতিকে অন্যতম দীর্ঘস্থায়ী অনুপ্রেরণা উপহার দিয়েছিলেন।