यह शिखर सम्मेलन महर्षि दयानंद सरस्वती जी की 200वीं जयंती और आर्य समाज द्वारा 150 वर्षों की समाज सेवा के उपलक्ष्य में आयोजित ज्ञान ज्योति महोत्सव का हिस्सा है
इस शिखर सम्मेलन में भारत और विदेशों में आर्य समाज की इकाइयों के प्रतिनिधि भाग लेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 31 अक्टूबर को दोपहर लगभग 2:45 बजे रोहिणी, नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय आर्यन सम्मेलन 2025 में भाग लेंगे। यह कार्यक्रम महर्षि दयानंद सरस्वती जी की 200वीं जयंती और आर्य समाज की 150 वर्षों की समाज सेवा के उपलक्ष्य में आयोजित ज्ञान ज्योति महोत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री उपस्थित जनसमूह को संबोधित भी करेंगे।

यह शिखर सम्मेलन भारत और विदेशों में आर्य समाज की इकाइयों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाएगा, जो महर्षि दयानंद के सुधारवादी आदर्शों और संगठन की वैश्विक पहुंच की सार्वभौमिक प्रासंगिकता को दर्शाता है। इसमें "सेवा के 150 स्वर्णिम वर्ष" शीर्षक से एक प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जो शिक्षा, सामाजिक सुधार और आध्यात्मिक उत्थान में आर्य समाज के योगदान के माध्यम से उसकी परिवर्तनकारी यात्रा को प्रदर्शित करेगी।

शिखर सम्मेलन का उद्देश्य महर्षि दयानंद सरस्वती की सुधारवादी और शैक्षिक विरासत का सम्मान करना, शिक्षा, सामाजिक सुधार और राष्ट्र निर्माण में आर्य समाज की 150 वर्षों की सेवा का जश्न मनाना और विकसित भारत 2047 के अनुरूप वैदिक सिद्धांतों और स्वदेशी मूल्यों के बारे में वैश्विक जागरूकता को प्रेरित करना है।

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प्रधानमंत्री ने डॉ. भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की
September 08, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने महान गायक-संगीतकार और गीतकार डॉक्टर भूपेन हजारिका को उनकी 100वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है।

प्रधानमंत्री ने कहा है कि डॉ. भूपेन हजारिका के सुरों ने असम की आत्मा और पूर्वोत्तर की भावना को पूरे देश तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि डॉ. हजारिका ने अपने संगीत के माध्यम से अनगिनत लोगों के विचारों और भावनाओं को अत्यंत खूबसूरती से व्यक्त किया और लोगों को करीब लाये।

श्री मोदी ने विगत वर्ष गुवाहाटी में डॉ. हजारिका की जन्म शताब्दी समारोह के शुभारंभ में भाग लेने की यादें भी ताजा कीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भूपेन दा का जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा;

“मैं प्रसिद्ध व्यक्तित्व डॉ. भूपेन हजारिका जी को उनकी 100वीं जयंती पर याद कर रहा हूं।”

उनकी आवाज ने असम की आत्मा और पूर्वोत्तर की भावना को पूरे देश तक पहुंचाया।

अपने संगीत के माध्यम से उन्होंने अनगिनत लोगों के विचारों और भावनाओं को खूबसूरती से व्यक्त किया। उनके गीतों लोगों को करीब लाये।

मैं पिछले वर्ष गुवाहाटी में उनके जन्म शताब्दी समारोह के शुभारंभ में शामिल हुआ था। उसकी यादें मेरे मन में बनी हुई हैं। भूपेन दा का जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।