प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 20 अक्टूबर, 2021 को शाम 6 बजे वैश्विक तेल एवं गैस क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) और विशेषज्ञों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत करेंगे। यह ऐसी छठी वार्षिक बातचीत है, जिसकी वर्ष 2016 में शुरुआत हुई थी। यह तेल एवं गैस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों की भागीदारी का प्रतीक है। ये अग्रणी देश तेल और गैस क्षेत्र से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं और भारत के साथ सहयोग एवं निवेश के संभावित क्षेत्रों का पता लगाते हैं।

इस बातचीत का मुख्य विषय स्वच्छ विकास और स्थिरता को बढ़ावा देना है। इस बातचीत में भारत में हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में खोज और उत्पादन को प्रोत्साहन देने, ऊर्जा स्वतंत्रता, गैस आधारित अर्थव्यवस्था, स्वच्छ और ऊर्जा के मामले में सक्षम उपायों के माध्यम से उत्सर्जन घटाना, हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था, जैव ईंधन उत्पादन को बढ़ाना तथा अपशिष्ट से धन सृजन जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रमुख बहुराष्ट्रीय निगमों और शीर्ष अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सीईओ और विशेषज्ञ विचारों के इस आदान-प्रदान में शामिल होंगे।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।

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प्रधानमंत्री ने राष्ट्र की उन्नति और कल्याण के लिए सामूहिक शक्ति और संकल्प पर जोर देते हुए संस्कृत सुभाषितम् पर जोर दिया
March 11, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र की प्रगति और कल्याण के लिए सामूहिक शक्ति और संकल्प पर जोर देने वाला एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया:

“स्वस्ति पन्थामनुचरेम सूर्याचन्द्रमसाविव।

पुनर्ददाताघ्नता जानता सङ्गमेमहि॥”

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के लोगों की असीम शक्ति ही देश के विकास की धुरी है। अपने सामर्थ्य और परस्पर विश्वास से हम हर संकल्प को साकार करते आए हैं और आगे भी करते रहेंगे।

इस सुभाषितम् का संदेश है कि हम सूर्य और चंद्रमा के समान निरंतर शुभ मार्ग पर चलते रहें। हम परस्पर अहिंसा, सद्भाव और ज्ञान के साथ मिलकर आगे बढ़ें तथा एक-दूसरे के सहयोग से उन्नति और कल्याण की ओर अग्रसर हों।

प्रधानमंत्री ने एक्स(X) पर लिखा;

“भारतवासियों की असीम शक्ति ही देश के विकास की धुरी है। अपने सामर्थ्य और परस्पर विश्वास से हम हर संकल्प को साकार करते आए हैं और आगे भी करते रहेंगे।

स्वस्ति पन्थामनुचरेम सूर्याचन्द्रमसाविव।

पुनर्ददाताघ्नता जानता सङ्गमेमहि॥”