184 टाइप-VII बहुमंजिला फ्लैटों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है और वे आधुनिक सुविधाओं की पूरी श्रृंखला से सुसज्जित हैं
प्रधानमंत्री आवासीय परिसर में सिंदूर का पौधा लगाएंगे और श्रमजीवियों के साथ बातचीत करेंगे
प्रधानमंत्री जनसमूह को भी संबोधित करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 11 अगस्त 2025 को सुबह लगभग 10 बजे बाबा खड़क सिंह मार्ग, नई दिल्ली में संसद सदस्यों के लिए नवनिर्मित 184 टाइप-VII बहुमंजिला फ्लैटों का उद्घाटन करेंगे।

इस अवसर पर, प्रधानमंत्री अपने आवास परिसर में सिंदूर का एक पौधा लगाएंगे। प्रधानमंत्री इस अवसर पर श्रमजीवियों को संबोधित करेंगे। वे उपस्थित जनसमूह से भी बातचीत करेंगे।

इस परिसर को आत्मनिर्भर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है और यह संसद सदस्यों की कार्यात्मक जरूरतों को पूरा करने के लिए आधुनिक सुविधाओं की पूरी श्रृंखला से सुसज्जित है। हरित प्रौद्योगिकी को सम्मिलित करते हुए, यह परियोजना जीआरआईएचए 3-स्टार रेटिंग के मानकों का पालन करती है और राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) 2016 का अनुपालन करती है। इन पर्यावरणीय रूप से स्थायी विशेषताओं से ऊर्जा संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन में योगदान मिलने की आशा है। उन्नत निर्माण तकनीक—विशेष रूप से, एल्युमीनियम शटरिंग के साथ मोनोलिथिक कंक्रीट—के उपयोग ने संरचनात्मक स्थायित्व सुनिश्चित करते हुए परियोजना को समय पर पूरा करना संभव बनाया। यह परिसर दिव्यांगजनों के अनुकूल भी है, जो समावेशी डिज़ाइन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

संसद सदस्यों के लिए अनुकूल आवास की कमी के कारण इस परियोजना का विकास आवश्यक हो गया था। भूमि की सीमित उपलब्धता के कारण, भूमि उपयोग को अनुकूलित करने और रखरखाव लागत को न्यूनतम करने के ध्येय से ऊर्ध्वाधर आवास विकास पर लगातार बल दिया गया है।

प्रत्येक आवासीय इकाई में लगभग 5,000 वर्ग फुट का कार्पेट क्षेत्र है, जो आवासीय और आधिकारिक दोनों कार्यों के लिए पर्याप्त जगह प्रदान करता है। कार्यालयों, कर्मचारियों के आवास और एक सामुदायिक केंद्र के लिए समर्पित क्षेत्रों को शामिल करने से संसद सदस्यों को जन प्रतिनिधि के रूप में अपनी उत्तरदायित्‍वों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

परिसर के सभी भवनों का निर्माण आधुनिक संरचनात्मक डिज़ाइन मानदंडों के अनुरूप भूकंपरोधी बनाया गया है। सभी निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक और सुदृढ़ सुरक्षा तंत्र कार्यान्वित किया गया है।

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कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।