प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी आगामी 23 नवम्बर, 2020 को सुबह 11 बजे सांसदों के लिए निर्मित बहुमंजिला आवासों का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उद्धाटन करेंगे। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला भी उपस्थित रहेंगे।

यह आवास नई दिल्ली स्थित डॉ. बी.डी. मार्ग पर अवस्थित हैं। करीब 80 साल से ज्यादा पुराने आठ बंगलों की भूमि को पुन: विकसित कर ये 76 आवास बनाए गए हैं। इन आवासों के निर्माण पर स्वीकृत कुल राशि का 14 प्रतिशत कम धन खर्च हुआ है और कोविड-19 महामारी के बावजूद काफी कम समय में यह कार्य पूर्ण हुआ है।

इन आवासों के निर्माण के दौरान विभिन्न हरित निर्माण पहलों का ध्यान रखा गया है। इसके तहत फ्लाई ऐश और निर्माण तथा ढहाई गई इमारतों से निकले कचरे से निर्मित ईंटों का इस्तेमाल करने के साथ-साथ थर्मल इन्सूलेशन के लिए दोहरी ग्लेज्ड खिड़कियां और ऊर्जा की बचत करने वाली एलईडी लाइट फिटिंग्स, लाइट कंट्रोल के लिए सेंसर, कम बिजली खपत सु‍निश्चित करने के लिए वीआरवी सिस्टम से लैस एयर कंडीशनर, पानी की बचत करने वाली कम बहाव वाली टोटियां, वर्षा जल संचयन व्यवस्था और इमारतों की छतों पर सौर संयंत्र लगाए गए हैं।

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प्रधानमंत्री ने सुव्यवस्थित मानकों से मानवीय आचरण के मार्गदर्शन को दर्शाने वाले एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया
May 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसका अभिप्राय है कि श्रेष्ठ आचरण एक दीपक की तरह है जो न केवल एक व्यक्ति को बल्कि पूरे समाज को आलोकित करता है। श्री मोदी ने कहा कि इसी आदर्श को अपनाकर हमारे देश के लोग आज पूरे संयम, क्षमता और कर्तव्य परायणता के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा:

"श्रेष्ठ आचरण वह दीपक है, जिससे व्यक्ति के साथ-साथ समाज भी आलोकित होता है। इसी आदर्श को अपनाते हुए हमारे देशवासी आज पूरे संयम, सामर्थ्य और कर्तव्यनिष्ठा से राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।”

तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ।

ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि।।"

क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इसका निर्धारण व्यक्तिपरक राय या क्षणिक आवेग पर नहीं, बल्कि शास्त्र आधारित एक सुव्यवस्थित मानक के अनुसार होना चाहिए, जो आचरण को दिशा और अनुशासन प्रदान करता है। इसलिए, व्यक्ति को स्थापित मानकों की उस प्रणाली के अनुसार कार्य करना चाहिए, ताकि उसका आचरण संतुलित, मान्य और सार्थक हो सके।