सम्मेलन का विषय: सदाबहार क्रांति, जैव-खुशहाली का मार्ग
प्रधानमंत्री खाद्य और शांति के लिए पहला एमएस स्वामीनाथन पुरस्कार प्रदान करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 7 अगस्त को सवेरे लगभग 9 बजे नई दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) पूसा में एमएस स्वामीनाथन शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। श्री मोदी इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को भी संबोधित करेंगे।

सम्मेलन का विषय "सदाबहार क्रांति, जैव-खुशहाली का मार्ग" प्रो. स्वामीनाथन के सभी के लिए भोजन सुनिश्चित करने के प्रति आजीवन समर्पण को प्रदर्शित करता है। यह सम्मेलन वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, विकास पेशेवरों और अन्य हितधारकों को 'सदाबहार क्रांति' के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने पर चर्चा और विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करेगा। प्रमुख विषयों में जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों का टिकाऊ प्रबंधन; खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए सतत कृषि; जलवायु परिवर्तन के अनुकूल होकर जलवायु अनुकूलन मजबूत करना; सतत और समतामूलक आजीविका के लिए उपयुक्त तकनीकों का उपयोग; और युवाओं, महिलाओं तथा कमजोर समुदायों को विकासात्मक चर्चाओं में शामिल करना सम्मिलित हैं।

उनकी विरासत का सम्मान करने के लिए, एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (एमएसएसआरएफ) और विश्व विज्ञान अकादमी (टीडब्ल्यूएएस) मिलकर एमएस स्वामीनाथन खाद्य एवं शांति पुरस्कार की शुरुआत करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री इस पुरस्कार के प्राप्तकर्ता को पहला पुरस्कार भी प्रदान करेंगे। यह अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विकासशील देशों के उन व्यक्तियों को सम्मानित करेगा जिन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान, नीति विकास, जमीनी स्तर पर सहभागिता या स्थानीय क्षमता निर्माण के माध्यम से खाद्य सुरक्षा में सुधार और कमजोर तथा हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए जलवायु न्याय, समानता और शांति को आगे बढ़ाने में उत्कृष्ट योगदान दिया है।

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प्रधानमंत्री ने सत्य की विजय पर जोर देते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
March 12, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने उन सभी महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने वर्ष 1930 में आज ही के दिन शुरू हुए दांडी मार्च में भाग लिया था।

प्रधानमंत्री ने सत्य की विजय पर बल देने वाले एक संस्कृत सुभाषितम् को भी साझा किया:

“सत्यमेव जयति नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।

येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत्सत्यस्य परमं निधानम्॥”

सुभाषितम् का संदेश है कि सत्य की सदैव विजय होती है और असत्य अंततः नष्ट हो जाता है। इसलिए, उसी मार्ग का अनुसरण करना चाहिए जिस पर चलकर ऋषियों ने परमानंद प्राप्त किया और परम सत्य को जाना।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्‍ट में लिखा;

“सन् 1930 में आज ही के दिन दांडी मार्च की शुरुआत हुई थी। इसमें शामिल सभी विभूतियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण!

सत्यमेव जयति नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।

येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत्सत्यस्य परमं निधानम्॥”