आईएमसी 2025: एशिया का सबसे बड़ा दूरसंचार और प्रौद्योगिकी कार्यक्रम 8 से 11 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा
विषय: "परिवर्तन के लिए नवाचार"- डिजिटल परिवर्तन में भारत के नेतृत्व को प्रदर्शित करना
केंद्रित क्षेत्र: 6 जी, क्वांटम संचार, सेमीकंडक्टर, ऑप्टिकल नेटवर्क और साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम
आईएमसी 2025 में 400 से अधिक कंपनियां, लगभग 7,000 वैश्विक प्रतिनिधि और 150 से अधिक देशों के लगभग 1.5 लाख आगंतुक शामिल होंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 8 अक्टूबर 2025 को प्रातः लगभग 9:45 बजे यशोभूमि, नई दिल्ली में एशिया के सबसे बड़े दूरसंचार, मीडिया और प्रौद्योगिकी कार्यक्रम, इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2025 के 9वें संस्करण का उद्घाटन करेंगे।

दूरसंचार विभाग (डीओटी) और सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित आईएमसी 2025 का आयोजन 8 से 11 अक्टूबर तक "इनोवेट टू ट्रांसफॉर्म" विषय के अंतर्गत किया जाएगा, जिसमें डिजिटल परिवर्तन और सामाजिक प्रगति के लिए नवाचार का लाभ उठाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया जाएगा।

आईएमसी 2025 दूरसंचार और उभरती प्रौद्योगिकियों में नवीनतम प्रगति को प्रदर्शित करेगा और वैश्विक प्रमुखों, नीति निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों और नवप्रवर्तकों को एक साथ एक मंच पर लाएगा। यह कार्यक्रम ऑप्टिकल संचार, दूरसंचार में सेमीकंडक्टर, क्वांटम संचार, 6जी और धोखाधड़ी जोखिम संकेतक जैसे प्रमुख विषयों पर केंद्रित होगा, जो अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी, डिजिटल संप्रभुता, साइबर धोखाधड़ी रोकथाम और वैश्विक प्रौद्योगिकी नेतृत्व में भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

इस कार्यक्रम में 150 से ज़्यादा देशों से 1.5 लाख से ज़्यादा आगंतुकों, 7,000 से ज़्यादा वैश्विक प्रतिनिधियों और 400 से ज़्यादा कंपनियों के भाग लेने की आशा है। 5जी/6जी, एआई, स्मार्ट मोबिलिटी, साइबर सुरक्षा, क्वांटम कंप्यूटिंग और हरित प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में 1,600 से ज़्यादा नए उपयोग-मामलों को 100 से ज़्यादा सत्रों और 800 से ज़्यादा वक्ताओं के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।

आईएमसी 2025 अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर भी बल देता है, जिसमें जापान, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, रूस, आयरलैंड और ऑस्ट्रिया के प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहे हैं।

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प्रधानमंत्री ने निस्वार्थ सेवा और करुणा की भावना को उजागर करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
May 06, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्ची मानवता है। उन्होंने उल्लेख किया कि ऐसे कार्य न सिर्फ आत्मिक खुशी प्रदान करते हैं, बल्कि समाज के कल्याण में भी योगदान देते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।

अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥”

सुभाषितम् यह संदेश देता है कि किसी भी जीव के प्रति मन, वचन और कर्म से द्वेष न रखना, सभी के प्रति करुणा भाव रखना और उदारतापूर्वक दान करना—इन्हें आचरण का सर्वोच्च रूप माना गया है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्ची मानवता है। इससे आत्मिक खुशी तो मिलती ही है, समाज का भी कल्याण होता है।

अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।

अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥”