प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी कल 21 नवंबर 2019 को नयी दिल्‍ली में महालेखाकारों और उपमहालेखाकारों के सम्‍मेलन को संबोधित करेंगे।संबोधन के पहले प्रधानमंत्री महालेखापरीक्षक के मुख्‍यालय में राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। वर्तमान सम्‍मेलन की थीम ट्रांसफार्मिंग ऑडिट एंड एश्‍योरेंश इन ए डिजिटल वर्ल्‍ड है। सम्‍मेलन का उद्देश्‍य अनुभवों और जानकारियों को समेकित करते हुए भारतीय लेखा परीक्षा विभाग के लिए अगले पांच वर्षों की कार्य योजना की रूपरेखा तय करना है। सम्‍मेलन में विभाग को प्रौद्योगिकी से लैस करने के उपायों पर पैनल चर्चा की जाएगी, इसमें प्रशासन के स्‍तर पर नीतियां तय करने के लिए आंकड़ों के इस्‍तेमाल के बढ़ते चलन पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

विभाग लेखा परीक्षा की प्रक्रिया के आटोमेशन का काम कर रहा है इसके लिए आईए और एडी के लिए एक प्रणाली विकसित की जा रही है। विभाग इंटरेक्टिव खातों और डिजिटल ऑडिट रिपोर्ट पेश करने के लिए ऑडिट इकाइयों का दौरा करने की आवश्यकता को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ज्ञान संसाधनों को क्यूरेट करने के लिए आईटी आधारित प्लेटफॉर्म का लाभ उठाने और कभी भी, कहीं भी सीखने और ऑडिटर्स के लिए आईटी आधारित टूलकिट विकसित करने का काम भी किया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय लेखा परीक्षा और महालेखा विभाग ने नए युग की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप का सामना करने के लिए लेखा परीक्षा के तरीकों को बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

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प्रधानमंत्री ने निस्वार्थ सेवा और करुणा की भावना को उजागर करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
May 06, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्ची मानवता है। उन्होंने उल्लेख किया कि ऐसे कार्य न सिर्फ आत्मिक खुशी प्रदान करते हैं, बल्कि समाज के कल्याण में भी योगदान देते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।

अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥”

सुभाषितम् यह संदेश देता है कि किसी भी जीव के प्रति मन, वचन और कर्म से द्वेष न रखना, सभी के प्रति करुणा भाव रखना और उदारतापूर्वक दान करना—इन्हें आचरण का सर्वोच्च रूप माना गया है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्ची मानवता है। इससे आत्मिक खुशी तो मिलती ही है, समाज का भी कल्याण होता है।

अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।

अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥”