21 जून को देश और दुनिया भर में करोड़ों लोगों ने ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ में हिस्सा लिया: पीएम मोदी
विशाखापत्तनम के समुद्र तट पर तीन लाख लोगों ने एक साथ योग किया और दो हजार से अधिक आदिवासी छात्रों ने 108 मिनट तक 108 सूर्य नमस्कार किए: पीएम मोदी
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 64% से अधिक आबादी अब किसी न किसी सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ उठा रही है: पीएम मोदी
आपातकाल लगाने वालों ने न केवल हमारे संविधान की हत्या की, बल्कि उनकी मंशा न्यायपालिका को भी अपना गुलाम बनाए रखने की थी: पीएम मोदी
हमें उन सभी लोगों को हमेशा याद रखना चाहिए जिन्होंने आपातकाल का डटकर मुकाबला किया। यह हमें अपने संविधान को मजबूत और स्थायी बनाए रखने के लिए निरंतर सतर्क रहने की प्रेरणा देता है: पीएम मोदी
बोडोलैंड आज देश में एक नए चेहरे, नई पहचान के साथ खड़ा है। बोडोलैंड अब देश के खेल मानचित्र पर अपनी चमक बिखेर रहा है: पीएम मोदी
मेघालय की महिलाएं अब स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से Eri Silk हेरिटेज को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ा रही हैं: पीएम मोदी

मेरे प्यारे देशवासियो,

नमस्कार | ‘मन की बात’ में आप सबका स्वागत है, अभिनंदन है | आप सब इस समय योग की ऊर्जा और ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ की स्मृतियों से भरे होंगे | इस बार भी 21 जून को देश-दुनिया के करोड़ों लोगों ने ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ में हिस्सा लिया | आपको याद है, 10 साल पहले इसका प्रारंभ हुआ | अब 10 साल में ये सिलसिला हर साल पहले से भी ज्यादा भव्य बनता जा रहा है | ये इस बात का भी संकेत है कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपने दैनिक जीवन में योग को अपना रहे हैं | हमने इस बार ‘योग दिवस’ की कितनी ही आकर्षक तस्वीरें देखी हैं | विशाखापत्तनम के समुद्र तट पर तीन लाख लोगों ने एक साथ योग किया | विशाखापत्तनम से ही एक और अद्भुत दृश्य सामने आया, दो हजार से ज्यादा आदिवासी छात्रों ने 108 मिनट तक 108 सूर्य नमस्कार किए | सोचिए, कितना अनुशासन, कितना समर्पण रहा होगा | हमारे नौसेना के जहाजों पर भी योग की भव्य झलक दिखी | तेलंगाना में तीन हजार दिव्यांग साथियों ने एक साथ योग शिविर में भाग लिया | उन्होंने दिखाया कि योग किस तरह सशक्तिकरण का माध्यम भी है | दिल्ली के लोगों ने योग को स्वच्छ यमुना के संकल्प से जोड़ा और यमुना तट पर जाकर योग किया | जम्मू-कश्मीर में चिनाब ब्रिज, जो दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे ब्रिज है, वहाँ भी लोगों ने योग किया | हिमालय की बर्फीली चोटियाँ और ITBP के जवान, वहाँ भी योग दिखा, साहस और साधना साथ-साथ चले | गुजरात के लोगों ने भी एक नया इतिहास रचा | वडनगर में 2121 (इक्कीस सौ इक्कीस) लोगों ने एक साथ भुजंगासन किया और नया रिकॉर्ड बना दिया | न्यूयॉर्क, लंदन, टोक्यो, पेरिस, दुनिया के हर बड़े शहर से योग की तस्वीरें आई और हर तस्वीर में एक बात खास रही, शांति, स्थिरता और संतुलन | इस बार की theme भी बहुत विशेष थी, ‘Yoga for One Earth, One Health, यानि, ‘एक पृथ्वी - एक स्वास्थ्य’ | ये सिर्फ एक नारा नहीं है, ये एक दिशा है जो हमें ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का अहसास कराती है | मुझे विश्वास है, इस बार के योग दिवस की भव्यता ज्यादा से ज्यादा लोगों को योग को अपनाने के लिए जरूर प्रेरित करेगी |

मेरे प्यारे देशवासियो,

जब कोई तीर्थयात्रा पर निकलता है, तो एक ही भाव सबसे पहले मन में आता है, “चलो, बुलावा आया है” | यही भाव हमारे धार्मिक यात्राओं की आत्मा है | ये यात्राएं शरीर के अनुशासन का, मन की शुद्धि का, आपसी प्रेम और भाईचारे का, प्रभु से जुड़ने का माध्यम है | इनके अलावा, इन यात्राओं का एक और बड़ा पक्ष होता है | ये धार्मिक यात्राएं सेवा के अवसरों का एक महाअनुष्ठान भी होती है | जब कोई भी यात्रा होती है तो जितने लोग यात्रा पर जाते हैं उससे ज्यादा लोग तीर्थयात्रियों की सेवा के काम में जुटते हैं | जगह-जगह भंडारे और लंगर लगते हैं | लोग सड़कों के किनारे प्याऊ लगवाते हैं | सेवा-भाव से ही Medical Camp और सुविधाओं की व्यवस्था की जाती है | कितने ही लोग अपने खर्च से तीर्थयात्रियों के लिए धर्मशालाओं की, और, रहने की व्यवस्था करते हैं |

साथियो,

लंबे समय के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा का फिर से शुभारंभ हुआ है | कैलाश मानसरोवर यानी भगवान शिव का धाम | हिन्दू, बौद्ध, जैन, हर परंपरा में कैलाश को श्रद्धा और भक्ति का केंद्र माना गया है | साथियो, 3 जुलाई से पवित्र अमरनाथ यात्रा शुरू होने जा रही है और सावन का पवित्र महीना भी कुछ ही दिन दूर है | अभी कुछ दिन पहले हमने भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा भी देखी है | ओडिशा हो, गुजरात हो, या देश का कोई और कोना, लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं | उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम, ये यात्राएं ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के भाव का प्रतिबिंब है | जब हम श्रद्धा भाव से, पूरे समर्पण से और पूरे अनुशासन से अपनी धार्मिक यात्रा सम्पन्न करते हैं तो उसका फल भी मिलता है | मैं यात्राओं पर जा रहे सभी सौभाग्यशाली श्रद्धालुओं को अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ | जो लोग सेवा भावना से इन यात्राओं को सफल और सुरक्षित बनाने में जुटे हैं, उन्हें भी साधुवाद देता हूँ |

मेरे प्यारे देशवासियो,

अब मैं आपको देश की दो ऐसी उपलब्धियों के बारे में बताना चाहता हूँ, जो आपको गर्व से भर देंगी | इन उपलब्धियों की चर्चा वैश्विक संस्थाएं कर रही हैं | WHO यानी ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ और ILO यानी International Labour Organization ने देश की इन उपलब्धियों की भरपूर सराहना की है | पहली उपलब्धि तो हमारे स्वास्थ्य से जुड़ी है | आप में से बहुत से लोगों ने आँखों की एक बीमारी के बारे में सुना होगा – Trachoma | ये बीमारी Bacteria से फैलती है | एक समय था जब ये बीमारी देश के कई हिस्सों में आम थी | ध्यान नहीं दिया जाए, तो इस बीमारी से धीरे-धीरे आँखों की रोशनी तक चली जाती थी | हमने संकल्प लिया कि Trachoma को जड़ से खत्म करेंगे | और मुझे आपको ये बताते हुए बहुत खुशी है कि – ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ यानी WHO ने भारत को Trachoma free घोषित कर दिया है | अब भारत Trachoma मुक्त देश बन चुका है | ये उन लाखों लोगों की मेहनत का फल है, जिन्होंने बिना थके, बिना रुके, इस बीमारी से लड़ाई लड़ी | ये सफलता हमारे health workers की है | ‘स्वच्छ भारत अभियान’ से भी इसे मिटाने में बड़ी मदद मिली | ‘जल जीवन Mission’ का भी इस सफलता में बड़ा योगदान रहा | आज जब घर-घर नल से साफ पानी पहुँच रहा है, तो ऐसी बीमारियों का खतरा कम हो गया है | ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ WHO ने भी इस बात की सराहना की है कि भारत ने बीमारी से निपटने के साथ-साथ उसके मूल कारणों को भी दूर किया है |

साथियो,

आज भारत में ज्यादातर आबादी किसी-ना-किसी social Protection benefit का फायदा उठा रही है और अभी हाल ही में International Labour Organization – ILO की बड़ी अहम Report आई है | इस Report में कहा गया है कि भारत की 64% (sixty four percent) से ज्यादा आबादी को अब कोई-ना-कोई Social Protection Benefit जरूर मिल रहा है | सामाजिक सुरक्षा - ये दुनिया की सबसे बड़ी coverage में से एक है | आज देश के लगभग 95 करोड़ (ninety-five crore) लोग किसी-न-किसी social security योजना का लाभ पा रहे हैं, जबकि, 2015 तक 25 करोड़ से भी कम लोगों तक सरकारी योजनाएं पहुँच पाती थी |

साथियो,

भारत में स्वास्थ्य से लेकर सामाजिक सुरक्षा तक, हर क्षेत्र में देश saturation की भावना से आगे बढ़ रहा है | ये सामाजिक न्याय की भी उत्तम तस्वीर है | इन सफलताओं ने एक विश्वास जगाया है, कि आने वाला समय और बेहतर होगा, हर कदम पर भारत और भी सशक्त होगा |

मेरे प्यारे देशवासियो,

जन-भागीदारी की शक्ति से, बड़े-बड़े संकटों का मुकाबला किया जा सकता है | मैं आपको एक audio सुनाता हूँ, इस audio में आपको उस संकट की भयावहता का अंदाजा लगेगा | वो संकट कितना बड़ा था, पहले वो सुनिए, समझिए |
Audio…. मोरारजी भाई देसाई

[आखिर ये जो ज़ुल्म हुआ दो साल तक, जुल्म तो 5-7 साल से शुरू हो गया था | मगर वो शिखर पर पहुँच गया है दो साल में, जब emergency लोगों पर थोप दी और अमानुषीय बर्ताव लोगों के साथ किया गया | लोगों के स्वतंत्रता के हक छीन लिए गए, अखबारों को कोई स्वतंत्रता न रही | न्यायालय बिल्कुल निर्बल बना दिए गए | और जिस ढंग से एक लाख से ज्यादा लोगों को jail में बंद कर दिये, और फिर अपने मनमानी राज की ओर से होती रही | उसकी मिसाल दुनिया के इतिहास में भी मिलना मुश्किल है ]

साथियो,

ये आवाज देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमान मोरारजी भाई देसाई की है | उन्होंने संक्षेप में, लेकिन बहुत ही स्पष्ट तरीके से Emergency के बारे में बताया | आप कल्पना कर सकते हैं, वो दौर कैसा था! Emergency लगाने वालों ने ना सिर्फ हमारे संविधान की हत्या की बल्कि उनका इरादा न्यायपालिका को भी अपना गुलाम बनाए रखने का था | इस दौरान लोगों को बड़े पैमाने पर प्रताड़ित किया गया था | इसके ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जिन्हें कभी भी भुलाया नहीं जा सकता | George Fernandez साहब को जंजीरों में बांधा गया था | अनेक लोगों को कठोर यातनाएं दी गई | ‘मीसा’ (MISA) के तहत किसी को भी ऐसे ही गिरफ्तार कर लिया जाता था | Students को भी परेशान किया गया | अभिव्यक्ति की आजादी का भी गला घोंट दिया गया |

साथियो,

उस दौर में जो हजारों लोग गिरफ्तार किए गए, उन पर ऐसे ही अमानवीय अत्याचार हुए | लेकिन ये भारत की जनता का सामर्थ्य है, वो झुकी नहीं, टूटी नहीं और लोकतंत्र के साथ कोई समझौता उसने स्वीकार नहीं किया | आखिरकार, जनता-जनार्दन की जीत हुई – आपातकाल हटा लिया गया और आपातकाल थोपने वाले हार गए | बाबू जगजीवन राम जी ने इस बारे में बहुत ही सशक्त तरीके से अपनी बातें रखी थी |

बहनों और भाइयो,

पिछला चुनाव, चुनाव नहीं था | भारत की जनता का एक महान अभियान था | उस समय की परिस्थितियों को बदल देने का तानाशाही की धारा को मोड़ देने का और भारत में प्रजातंत्र के बुनियाद को मजबूत कर देने का]
अटल जी ने भी तब अपने ही अंदाज में जो कुछ कहा था, वो भी हमें जरूर सुनना चाहिए –

[बहनों और भाइयो,

देश में जो कुछ हुआ, उसे केवल चुनाव नहीं कह सकते | एक शांतिपूर्ण क्रांति हुई है | लोकशक्ति की लहर ने लोकतंत्र की हत्या करने वालों को इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिया है]

साथियो,

देश पर Emergency थोपे जाने के 50 वर्ष कुछ दिन पहले ही पूरे हुए हैं | हम देशवासियों ने ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाया है | हमें हमेशा उन सभी लोगों को याद करना चाहिए, जिन्होंने Emergency का डटकर मुकाबला किया था | इससे हमें अपने संविधान को सशक्त बनाए रखने के लिए निरंतर सजग रहने की प्रेरणा मिलती है |

मेरे प्यारे देशवासियो,

आप एक तस्वीर की कल्पना कीजिए | सुबह की धूप पहाड़ियों को छू रही है, धीरे-धीरे उजाला मैदानों की ओर बढ़ रहा है, और उसी रौशनी के साथ बढ़ रही है फुटबॉल प्रेमियों की टोली | सीटी बजती है और कुछ ही पलों में मैदान तालियों और नारों से गूंज उठता है | हर Pass, हर Goal के साथ लोगों का उत्साह बढ़ रहा है | आप सोच रहे होंगे कि ये कौन सी खूबसूरत दुनिया है? साथियो, ये तस्वीर असम के एक प्रमुख क्षेत्र बोडोलैंड की वास्तविकता है | बोडोलैंड आज अपने एक नए रूप के साथ देश के सामने खड़ा है | यहां के युवाओं में जो ऊर्जा है, जो आत्मविश्वास है, वो फुटबॉल के मैदान में सबसे ज्यादा दिखता है | बोडो Territorial Area में, बोडोलैंड CEM Cup का आयोजन हो रहा है | ये सिर्फ एक Tournament नहीं है, ये एकता और उम्मीद का उत्सव बन गया है | 3 हज़ार 700 से ज़्यादा टीमें, करीब 70 हज़ार खिलाड़ी, और उनमें भी बड़ी संख्या में हमारी बेटियों की भागीदारी | ये आँकड़े बोडोलैंड में बड़े बदलाव की गाथा सुना रहे हैं | बोडोलैंड अब देश के खेल नक्शे पर, Sports के map पर, अपनी चमक और बढ़ा रहा है|

साथियो,

एक समय था जब संघर्ष ही यहाँ की पहचान थी | तब यहाँ के युवाओं के लिए रास्ते सीमित थे | लेकिन आज उनकी आँखों में नए सपने हैं और दिलों में आत्मनिर्भरता का हौंसला है | यहाँ से निकले फुटबॉल खिलाड़ी अब बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं | हालीचरण नारजारी, दुर्गा बोरो, अपूर्वा नारजारी, मनबीर बसुमतारी - ये सिर्फ फुटबॉल खिलाड़ियों के नाम नहीं हैं - ये उस नई पीढ़ी की पहचान है जिन्होंने बोडोलैंड को मैदान से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया | इनमें से कई ने सीमित संसाधनों में अभ्यास किया, कई ने कठिन परिस्थितियों में अपने रास्ते बनाए, और आज इनका नाम लेकर देश के कितने ही नन्हें बच्चे अपने सपनों की शुरुआत करते हैं |

साथियो,

अगर हमें अपने सामर्थ्य का विस्तार करना है तो सबसे पहले हमें अपनी Fitness और Wellbeing पर ध्यान देना होगा | वैसे साथियो, Fitness के लिए, Obesity कम करने के लिए मेरा एक सुझाव आपको याद है ना ! खाने में 10% तेल कम करो, मोटापा घटाओ | जब आप Fit होंगे, तो जीवन में और ज्यादा Super Hit होंगे |

मेरे प्यारे देशवासियो,

हमारा भारत जिस तरह अपनी क्षेत्रीय, भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है उसी तरह, कला, शिल्प और कौशल की विविधता भी हमारे देश की एक बड़ी खूबी है | आप जिस क्षेत्र में जाएंगे, वहाँ की कुछ-न-कुछ खास और local चीज के बारे में आपको पता चलेगा । हम अक्सर ‘मन की बात’ में देश के ऐसे unique products के बारे में बात करते हैं | ऐसा ही एक product है मेघालय का एरी सिल्क (Eri Silk) | इसे कुछ दिन पहले ही GI Tag मिला है | एरी सिल्क(Eri Silk) मेघालय के लिए एक धरोहर की तरह है | यहाँ की जनजातियों ने, खासकर ख़ासी (Khasi) समाज के लोगों ने पीढ़ियों से इसे सहेजा भी है, और अपने कौशल से समृद्ध भी किया है | इस सिल्क की कई ऐसी खूबियाँ हैं, जो इसे बाकी fabric से अलग बनाती हैं | इसकी सबसे खास बात है इसे बनाने का तरीका, इस सिल्क को जो रेशम के कीड़े बनाते हैं, उसे हासिल करने के लिए कीड़ों को मारा नहीं जाता है, इसलिए इसे, अहिंसा सिल्क भी कहते हैं | आजकल दुनिया में ऐसे products की demand तेजी से बढ़ रही है, जिनमें हिंसा न हो, और प्रकृति पर उनका कोई दुष्प्रभाव न पड़े, इसलिए, मेघालय का एरी सिल्क (Eri Silk) global market के लिए एक perfect product है | इसकी एक और खास बात है, ये सिल्क (Silk) सर्दी में गरम करता है, और गर्मियों में ठंडक देता है | इसकी ये खूबी इसे ज़्यादातर जगहों के लिए अनुकूल बना देती है | मेघालय की महिलाएं अब Self Help Group के जरिए अपनी इस धरोहर को और बड़े scale पर आगे बढ़ा रही हैं | मैं मेघालय के लोगों को एरी सिल्क (Eri Silk) को G। Tag मिलने पर बधाई देता हूँ | मैं आप सबसे भी appeal करूंगा, आप भी एरी सिल्क(Eri Silk) से बने कपड़ों को जरूर try करें और हाँ - खादी, handloom handicraft, Vocal for Local, इन्हें भी आपको हमेशा याद रखना है | ग्राहक भारत में बने product ही खरीदें, और व्यापारी भारत में बने product ही बेचें तो ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को नई ऊर्जा मिलेगी |

मेरे प्यारे देशवासियो,

Women Led Development का मंत्र भारत का नया भविष्य गढ़ने के लिए तैयार है | हमारी माताएं, बहनें, बेटियां आज सिर्फ अपने लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए नई दिशा बना रही हैं | आप तेलंगाना के भद्राचलम की महिलाओं की सफलता के बारे में जानेंगे तो आपको भी अच्छा लगेगा | ये महिलाएं कभी खेतों में मजदूरी करती थीं | रोज़ी रोटी के लिए दिन-भर मेहनत करती थीं | आज वही महिलाएं, millets, श्रीअन्न से biscuit बना रही हैं | 'भद्राद्री मिलेट मैजिक' नाम से ये बिस्किट हैदराबाद से लंदन तक जा रहे हैं | भद्राचलम की इन महिलाओं ने Self Help Group से जुड़कर ट्रेनिंग ली |

साथियो,

इन महिलाओं ने एक और सराहनीय काम किया है। इन्होंने 'गिरी सैनिटरी पैड्स' बनाना शुरू किया | सिर्फ तीन महीने में 40,000 पैड्स तैयार किए और उन्हें स्कूलों और आसपास के ऑफिसों में पहुँचाया - वो भी बहुत ही सस्ती कीमत पर |

साथियो,

कर्नाटका के कलबुर्गी की महिलाओं की उपलब्धि भी बेहतरीन है | इन्होंने ज्वार की रोटी को एक ब्रांड बना दिया है | इन्होंने जो कॉपरेटिव बनाई है, उसमें हर रोज तीन हजार से ज्यादा रोटियाँ बन रही हैं | इन रोटियों की खुशबू अब सिर्फ गाँव तक सीमित नहीं है | बेंगलुरु में Special Counter खुल चुका है | Online Food Platforms पर order आ रहे हैं | कलबुर्गी की रोटी अब बड़े शहरों के किचन तक पहुँच रही है | इसका बहुत शानदार असर इन महिलाओं पर पड़ा है, उनकी आय बढ़ रही है |

साथियो,

अलग-अलग राज्यों की इन गाथाओं में अलग-अलग चेहरे हैं। लेकिन उनकी चमक एक जैसी है | ये चमक है आत्मविश्वास की, आत्मनिर्भरता की | ऐसा ही एक चेहरा है, मध्यप्रदेश की सुमा उइके, सुमा जी का प्रयास बहुत सराहनीय है | उन्होंने बालाघाट ज़िले के कटंगी ब्लॉक में, Self Help Group से जुड़कर मशरूम की खेती और पशुपालन की training ली | इससे उन्हें आत्मनिर्भरता की राह मिल गई | सुमा उइके की आय बढ़ी तो उन्होंने अपने काम का विस्तार भी किया | छोटे से प्रयास से शुरू हुआ ये सफर अब 'दीदी कैंटीन' और 'Thermal Therapy Centre' तक पहुँच चुका है | देश के कोने-कोने में ऐसी ही अनगिनत महिलाएं, अपना और देश का भाग्य बदल रही हैं |

मेरे प्यारे देशवासियो,

पिछले दिनों मुझे वियतनाम के बहुत से लोगों ने विभिन्न माध्यमों से अपने संदेश भेजे | इन संदेशों की हर पंक्ति में श्रद्धा थी, आत्मीयता थी | उनकी भावनाएं मन को छूने वाली थीं | वो लोग भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों ‘Relics’ के दर्शन कराने के लिए भारत के प्रति अपना आभार प्रकट कर रहे थे | उनके शब्दों में जो भाव थे, वो किसी औपचारिक धन्यवाद से बढ़कर थे |

साथियो,

मूल रूप से भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों की खोज आंध्र प्रदेश में पालनाडू जिले के नागार्जुनकोंडा में हुई थी | इस जगह का बौद्ध धर्म से गहरा नाता रहा है | कहा जाता है कि कभी इस स्थान पर श्रीलंका और चीन सहित दूर–दूर के लोग आते थे |

साथियो,

पिछले महीने भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों को भारत से वियतनाम ले जाया गया था | वहाँ के 9 अलग–अलग स्थानों पर इन्हें जनता के दर्शन के लिए रखा गया | भारत की ये पहल एक तरह से वियतनाम के लिए राष्ट्रीय उत्सव बन गई | आप कल्पना कर सकते हैं, करीब 10 करोड़ लोगों की आबादी वाले वियतनाम में डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों ने भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन किए | social media पर जो तस्वीरें और video मैंने देखे, उन्होंने ये एहसास कराया कि श्रद्धा की कोई सीमा नहीं होती | बारिश हो, तेज धूप हो, लोग घंटों कतारों में खड़े रहे | बच्चे, बुजुर्ग, दिव्यांगजन सभी भाव-विभोर थे | वियतनाम के राष्ट्रपति, उप-प्रधानमंत्री, वरिष्ठ मंत्री, हर कोई नत-मस्तक था | इस यात्रा के प्रति वहाँ के लोगों में सम्मान का भाव इतना गहरा था कि वियतनाम सरकार ने इसे 12 दिन के लिए और आगे बढ़ाने का आग्रह किया था और इसे भारत ने सहर्ष स्वीकार कर लिया |

साथियो,

भगवान बुद्ध के विचारों में वो शक्ति है, जो देशों, संस्कृतियों और लोगों को एक सूत्र में बांधती है | इससे पहले भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष थाईलैंड और मंगोलिया ले जाए गए थे, और वहाँ भी श्रद्धा का यही भाव देखा गया | मेरा आप सभी से भी आग्रह है कि अपने राज्य के बौद्ध स्थलों की यात्रा अवश्य करें | ये एक आध्यात्मिक अनुभव होगा, साथ ही हमारी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का एक सुंदर अवसर भी बनेगा |

मेरे प्यारे देशवासियो,

इस महीने हम सबने ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ मनाया | मुझे आपके हजारों संदेश मिले | कई लोगों ने अपने आस-पास के उन साथियों के बारे में बताया जो अकेले ही पर्यावरण बचाने के लिए निकल पड़े थे और फिर उनके साथ पूरा समाज जुड़ गया | सबका यही योगदान, हमारी धरती के लिए बड़ी ताकत बन रहा है | पुणे के श्री रमेश खरमाले जी, उनके कार्यों को जानकर, आपको बहुत प्रेरणा मिलेगी | जब हफ्ते के अंत में लोग आराम करते हैं, तो रमेश जी और उनका परिवार कुदाल और फावड़ा लेकर निकल पड़ते हैं | जानते हैं कहाँ ? जुन्नर की पहाड़ियों की ओर | धूप हो या ऊंची चढ़ाई, उनके कदम रुकते नहीं | वो झाड़ियाँ साफ करते हैं, पानी रोकने के लिए trench खोदते हैं और बीज बोते हैं | उन्होंने सिर्फ दो महीनों में 70 trench बना डाले | रमेश जी ने कई सारे छोटे तालाब बनाए हैं, सैकड़ों पेड़ लगाए हैं | वो एक Oxygen Park भी बनवा रहे हैं | नतीजा ये हुआ कि यहाँ अब पक्षी लौटने लगे हैं, वन्य जीवन को नई सांसें मिल रही हैं |

साथियो,

पर्यावरण के लिए एक और सुंदर पहल देखने को मिली है, गुजरात के अहमदाबाद शहर में | यहाँ नगर निगम ने ‘Mission for Million Trees’ अभियान शुरू किया है | लक्ष्य है - लाखों पेड़ लगाना | इस अभियान की एक खास बात है ‘सिंदूर वन’ | यह वन Operation Sindoor के वीरों को समर्पित है | सिंदूर के पौधे उन बहादुरों की याद में लगाए जा रहे हैं, जिन्होंने देश के लिए सब कुछ समर्पित कर दिया | यहाँ एक और अभियान को नई गति दी जा रही है ‘एक पेड़ माँ के नाम’ इस अभियान के तहत देश में करोड़ों पेड़ लगाए जा चुके हैं | आप भी अपने आपके गाँव या शहर में चल रहे ऐसे अभियान में जरूर हिस्सा लीजिए | पेड़ लगाइए, पानी बचाइए, धरती की सेवा कीजिए, क्योंकि जब हम प्रकृति को बचाते हैं, तो असल में हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित करते हैं |

साथियो,

महाराष्ट्र के एक गाँव ने भी बड़ी शानदार मिसाल पेश की है | छत्रपति संभाजी नगर ज़िले की ग्राम पंचायत है ‘पाटोदा’ | ये Carbon Neutral गाँव पंचायत है | इस गाँव में कोई अपने घर के बाहर कचरा नहीं फेंकता | हर घर से कचरा इकट्ठा करने की पूरी व्यवस्था है | यहाँ गंदे पानी का Treatment भी होता है | बिना साफ किए कोई पानी नदी में नहीं जाता | यहाँ उपलों से अंतिम संस्कार होता है और उस राख से दिवंगत के नाम पर पौधा लगाया जाता है | इस गाँव में साफ-सफाई भी देखते ही बनती है | छोटी-छोटी आदतें जब सामूहिक संकल्प बन जाती हैं, तो बड़ा बदलाव तय हो जाता है |

मेरे प्यारे साथियो,

इस समय सबकी निगाहें International Space Centre पर भी है | भारत ने एक नया इतिहास रचा है | मेरी कल Group Captain शुभांशु शुक्ला से बात भी हुई है | आपने भी शुभांशु से मेरी बातचीत को जरूर सुना होगा | अभी, शुभांशु को कुछ और दिन International Space Centre रहना है | हम इस Mission के बारे में और बातें करेंगे, लेकिन, ‘मन की बात’ के अगले Episode में |अब समय है, इस Episode में आपसे विदा लेने का | लेकिन साथियो, जाते-जाते मैं आपको एक खास दिन की याद दिलाना चाहता हूँ | 1 जुलाई, परसों यानि 1 जुलाई को हम दो बेहद महत्वपूर्ण Professions का सम्मान करते हैं, Doctors और CA | ये दोनों ही समाज के ऐसे स्तम्भ हैं, जो हमारी जिंदगी को बेहतर बनाते हैं | Doctor हमारे स्वास्थ्य के रक्षक हैं और CA (Chartered Accountant) आर्थिक जीवन के मार्गदर्शक हैं | मेरी सभी Doctors और Chartered Accountants को ढ़ेर सारी शुभकामनाएं |

साथियो,

आपके सुझावों का मुझे हमेशा इंतज़ार रहता है | ‘मन की बात’ का अगला Episode आपके इन्हीं सुझावों से और समृद्ध होगा | फिर मुलाकात होगी, नई बातों के साथ, नई प्रेरणाओं के साथ, देशवासियों की नई उपलब्धियों के साथ | बहुत-बहुत धन्यवाद, नमस्कार|

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Text of PM’s address at the News18 Rising Bharat Summit
February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।