उन्होंने वयस्क आबादी को पहली खुराक की शत-प्रतिशत कवरेज के लिए गोवा सरकार की सराहना की
उन्होंने इस अवसर पर श्री मनोहर पर्रिकर की सेवाओं को याद किया
गोवा ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का एक शानदार उदाहरण पेश किया है: प्रधानमंत्री
जन्मदिन तो बहुत आए और मैं हमेशा इन चीजों से दूर रहा हूं, लेकिन मेरी इतनी आयु में कल के दिन ने मुझे काफी भावुक कर दिया क्योंकि 2.5 करोड़ लोगों को टीके लगाए गए: प्रधानमंत्री
कल हर घंटे 15 लाख से ज्यादा खुराकें, हर मिनट 26 हजार से ज्यादा खुराकें और हर सेकेंड में 425 से ज्यादा खुराकें दी गईं: प्रधानमंत्री
‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा के प्रतीक गोवा की हर उपलब्धि मुझे अपार खुशियों से भर देती है: प्रधानमंत्री
गोवा सिर्फ इस देश का एक राज्य भर नहीं है, बल्कि यह ब्रांड इंडिया की एक मजबूत निशानी भी है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गोवा में वयस्क आबादी को पहली खुराक की शत-प्रतिशत कवरेज के लिए एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से गोवा के स्वास्थ्यकर्मियों और कोविड टीकाकरण कार्यक्रम के लाभार्थियों के साथ बातचीत की।

स्वास्थ्यकर्मियों और लाभार्थियों के साथ बातचीत

इस बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री ने गोवा मेडिकल कॉलेज के लेक्चरर डॉ. नितिन धूपदले से पूछा कि उन्होंने लोगों को कोविड के टीके लेने के लिए कैसे राजी किया। उन्होंने कोविड टीकाकरण अभियान और पहले के अभियान के बीच के अंतर के बारे में भी चर्चा की। डॉ. धूपदले ने इस विशेष अभियान के एक मिशन मोड अभियान होने की प्रशंसा की। विपक्षी दल की आलोचना करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि 2.5 करोड़ लोगों को टीका लगाने के बाद टीका लेने वाले लोगों के बजाय विपक्षी दल की ओर से प्रतिक्रिया कैसे आई। प्रधानमंत्री ने गोवा में वयस्क आबादी को पहली खुराक की शत-प्रतिशत कवरेज को पूरा करने के लिए डॉक्टरों और अन्य कोरोना योद्धाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पूरे विश्व के लिए एक प्रेरणा है।

प्रधानमंत्री ने कोविड लाभार्थी तथा कार्यकर्ता श्री नज़ीर शेख के साथ बातचीत करते हुए पूछा कि उन्‍होंने दूसरों को वैक्‍सीन लेने के लिए प्रेरित करने का निर्णय कैसे किया। उन्‍होंने श्री नज़ीर शेख से लोगों को टीकाकरण केन्‍द्रों तक ले जाने में आने वाली कठिनाइयों के बारे में पूछा। उन्‍होंने श्री नज़ीर से टीकाकरण अभियान में उनके अनुभव के बारे में भी पूछा। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री नज़ीर शेख के प्रयास की तरह ‘सबका प्रयास’ को समावेशित करना, इस अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण अभियान में परिणाम अर्जित करने का एक बड़ा कारण है। प्रधानमंत्री ने देशभर में सामाजिक रूप से जागरूक कार्यकर्ताओं की प्रशंसा की।

प्रधानमंत्री ने सुश्री सीमा फर्नांडीज़ के साथ बातचीत करते हुए पूछा कि जब लोग टीकाकरण के लिए उनके पास आए तो उन्‍होंने क्‍या पूछा। उन्‍होंने यह भी बताया कि वैक्‍सीनों के लिए किस प्रकार कोल्‍डचेन का रख-रखाव किया गया। उन्‍होंने वैक्‍सीनों की शून्‍य बर्बादी अर्जित करने के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में भी पूछा। प्रधानमंत्री ने पारिवारिक प्रतिबद्धताओं के बावजूद अपने कर्तव्‍यों को निभाने के लिए उनकी प्रशंसा की और उनके प्रयासों के लिए सभी कोरोना योद्धाओं के परिवारों को धन्‍यवाद दिया।

प्रधानमंत्री ने श्री शशिकांत भगत के साथ बातचीत करते हुए स्‍मरण किया कि किस प्रकार उन्‍होंने कल अपने जन्‍मदिन पर अपने एक पुराने परिचित के साथ बातचीत की थी। उन्‍होंने बताया कि जब उनसे उनकी उम्र के बारे में पूछा गया तो प्रधानमंत्री ने कहा, ‘अभी 30 बाकी हैं।’ श्री मोदी ने 25 वर्षीय श्री भगत को सुझाव दिया कि वह 75 वर्ष पर ध्‍यान न दें बल्कि आने वाले 25 वर्षों पर फोकस करें। उन्‍होंने उनसे टीकाकरण के दौरान उनके सामने आने वाली किसी भी प्रकार की कठिनाई के बारे में पूछा। श्री भगत ने वरिष्‍ठ नागरिकों को दी जाने वाली वरीयता पर भी संतोष व्‍यक्‍त किया। उन्‍होंने वैक्‍सीन के दुष्‍प्रभावों की आशंकाओं को भी दूर किया, क्‍योंकि वह मधुमेह रोगी हैं और उन्‍हें किसी प्रकार के दुष्‍प्रभाव का सामना नहीं करना पड़ा। प्रधानमंत्री ने सेवानिवृत्त बिक्री कर अधिकारी श्री भगत की उनकी सामाजिक सेवा के लिए प्रशंसा की और कहा कि सरकार टैक्‍सेशन के क्षेत्र सहित जीवन की सुगमता को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने सुश्री स्‍वीटी एसएम वेंगुर्लेकर से पूछा कि उन्‍होंने किस प्रकार सुदूर क्षेत्रों में टीका उत्‍सव का आयोजन किया। उन्‍होंने उस योजना के बारे में पूछा जो उत्‍सव के आयोजन के लिए बनाई गई थी। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि महामारी के दौरान इसे जहां तक संभव हो, आसान बनाने पर ध्‍यान केंद्रित किया गया। उन्‍होंने इस प्रकार के व्‍यापक प्रयोग में शामिल लॉजिस्टिक के समुचित दस्‍तावेज और प्रसार के लिए कहा।

प्रधानमंत्री ने दृष्टिबाधित लाभार्थी सुश्री सुमेरा खान से टीकाकरण के उनके अनुभव के बारे में पूछा। प्रधानमंत्री ने सुश्री खान की शिक्षा में उसकी उपलब्धियों के लिए प्रशंसा की और एक आईएएस अधिकारी बनने की उसकी आकांक्षाओं के लिए उसे शुभकामनाएं दीं। श्री मोदी ने देश के दिव्‍यांगजनों की उस प्रकार के जीवन को प्रेरित करने के लिए सराहना की जिसे वे व्‍यतीत कर रही हैं।

प्रधानमंत्री का भाषण

उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने शुभ गणेश उत्सव सीजन के दौरान अनंत सूत्र (सुरक्षा) हासिल करने के लिए गोवा के लोगों की प्रशंसा की। उन्होंने गोवा में सभी पात्र लोगों के वैक्सीन की कम से कम एक खुराक लेने के लिए खुशी व्यक्त कि। उन्होंने कहा, “कोरोना के खिलाफ लड़ाई में यह एक अहम उपलब्धि है। एक भारत-श्रेष्ठ भारत की अवधारणा के प्रतीक गोवा की हर उपलब्धि मुझे खुशी से भर देती है।”

प्रधानमंत्री ने प्रमुख उपलब्धियों वाले इस दिन पर श्री मनोहर पर्रिकर की सेवाओं को याद किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में, गोवा ने भारी बारिश, चक्रवात, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का बहादुरी के साथ सामना किया है। उन्होंने इन प्राकृतिक आपदाओं के बीच कोरोना टीकाकरण की गति बनाए रखने के लिए कोरोना योद्धाओं, स्वास्थ्य कर्मचारियों और टीम गोवा का अभिनंदन किया।

प्रधानमंत्री ने सामाजिक और भौगोलिक चुनौतियों से निपटने के लिए गोवा द्वारा दिखाए गए समन्वय की सराहना की। उन्होंने कहा, राज्य के दूर-सुदूर में बसे, केनाकोना सब डिवीजन में भी तेज गति से टीकाकरण ने बाकी राज्य के लिए एक उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा, “गोवा ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के अच्छे नतीजे प्रदर्शित किए हैं।”

प्रधानमंत्री इस अवसर कुछ भावुक भी हो गए और उन्होंने कहा, “मैंने कई जन्मदिन देखे और मैं हमेशा ही इन बातों को लेकर अलिप्त रहा हूं, इन चीजों से दूर रहा हूं लेकिन मेरे जीवन में कल का दिन मुझे बहुत भावुक करने वाला था। देश और कोरोना योद्धाओं के प्रयासों ने कल के अवसर को ज्यादा खास बना दिया था।” उन्होंने 2.5 करोड़ लोगों के टीकाकरण के लिए टीम और लोगों द्वारा दिखाई गई करुणा, सेवा और कर्तव्य की भावना की प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने कहा, “सभी ने पूरा सहयोग किया, लोगों ने इसे सेवा के साथ जोड़ा। यह उनकी करुणा और कर्तव्य ही था, जिसकी वजह से एक दिन में 2.5 करोड़ लोगों का टीकाकरण संभव हुआ है।”

प्रधानमंत्री ने मेडिकल फील्ड के लोग, जो पिछले दो साल से जुटे हुए हैं, अपनी जान की परवाह किए बिना कोरोना से लड़ने में देशवासियों की मदद कर रहे हैं, के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा, “उन्होंने कल जिस तरह से टीकाकरण का रिकॉर्ड बनाकर दिखाया है, वह बहुत बड़ी बात है। लोगों ने इसे सेवा के साथ जोड़ा है।”यह उनकी करुणा और कर्तव्य ही था, जिसकी वजह से एक दिन में 2.5 करोड़ लोगों का टीकाकरण संभव हुआ। प्रधानमंत्री ने बताया कि हिमाचल, गोवा, चंडीगढ़ और लक्षद्वीप ने पात्र आबादी को पहली खुराक लगाने का कार्य पूरा कर लिया है। सिक्किम, अंडमान निकोबार, केरल, लद्दाख, उत्तराखंड और दादरा नगर हवेली अब ज्यादा पीछे नहीं हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने अपने टीकाकरण के प्रयासों में पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दी है, हालांकि इसकी अभी तक चर्चा नहीं हुई थी। पर्यटक स्थलों को खोलने के लिए यह जरूरी था। केन्द्र सरकार ने विदेशी पर्यटकों को प्रोत्साहित करने के लिए भी हाल में कई कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत भ्रमण पर आ रहे 5 लाख पर्यटकों को मुफ्त वीजा, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों को सरकारी गारंटी के साथ 10 लाख तक का कर्ज और पंजीकृत टूरिस्ट गाइडों को 1 लाख रुपये तक का कर्ज देने का फैसला लिया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘डबल इंजन की सरकार’ गोवा के पर्यटन क्षेत्र को आकर्षक बनाने और राज्य के किसानों व मछुआरों को ज्यादा सुविधाएं देने प्रयासों को मजबूती दे रही है। मोपा ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे और 6 लेन के राजमार्ग को 12 हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ, अगले कुछ महीनों में उत्तरी और दक्षिणी गोवा को जोड़ने वाले जुआरी सेतु के उद्घाटन से राज्य में संपर्क में सुधार होगा।

श्री मोदी ने कहा कि गोवा ने अमृत काल में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए स्वयं पूर्ण गोवा का संकल्प लिया है और 50 से ज्यादा कम्पोनेंट का विनिर्माण शुरू कर दिया है। उन्होंने शौचालय कवरेज, 100 प्रतिशत विद्युतीकरण में गोवा की उपलब्धियों और ‘हर घर जल’ अभियान के लिए किए गए प्रयासों को रेखांकित किया। देश में 2 साल के भीतर 5 करोड़ घरों को नल जल से जोड़ दिया गया है और इस दिशा में गोवा के प्रयासों से राज्य की सुशासन और आसान रहन-सहन के लिए स्पष्ट प्राथमिकता का पता चलता है। प्रधानमंत्री ने गरीब परिवारों को राशन उपलब्ध कराने, मुफ्त गैस सिलेंडर, पीएम किसान सम्मान निधि का वितरण, महामारी के दौरान मिशन के रूप में किसान क्रेडिट कार्ड का मिशन के तौर पर विस्तार और रेहड़ी पटरी वालों को स्वनिधि योजना का लाभ देने में गोवा के प्रयासों को भी गिनाया। गोवा को असीम संभावनाओं वाला राज्य बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा, “गोवा देश का सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि ब्रांड इंडिया का एक मजबूत निर्माता भी है।”

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प्रधानमंत्री मोदी का ‘IANS’ के साथ इंटरव्यू
May 27, 2024

पहले तो मैं आपकी टीम को बधाई देता हूं भाई, कि इतने कम समय में आपलोगों ने अच्छी जगह बनाई है और एक प्रकार से ग्रासरूट लेवल की जो बारीक-बारीक जानकारियां हैं। वह शायद आपके माध्यम से जल्दी पहुंचती है। तो आपकी पूरी टीम बधाई की पात्र है।

Q1 - आजकल राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल को पाकिस्तान से इतना endorsement क्यों मिल रहा है ? 370 ख़त्म करने के समय से लेकर आज तक हर मौक़े पर पाकिस्तान से उनके पक्ष में आवाज़ें आती हैं ?

जवाब – देखिए, चुनाव भारत का है और भारत का लोकतंत्र बहुत ही मैच्योर है, तंदरुस्त परंपराएं हैं और भारत के मतदाता भी बाहर की किसी भी हरकतों से प्रभावित होने वाले मतदाता नहीं हैं। मैं नहीं जानता हूं कि कुछ ही लोग हैं जिनको हमारे साथ दुश्मनी रखने वाले लोग क्यों पसंद करते हैं, कुछ ही लोग हैं जिनके समर्थन में आवाज वहां से क्यों उठती है। अब ये बहुत बड़ी जांच पड़ताल का यह गंभीर विषय है। मुझे नहीं लगता है कि मुझे जिस पद पर मैं बैठा हूं वहां से ऐसे विषयों पर कोई कमेंट करना चाहिए लेकिन आपकी चिंता मैं समझ सकता हूं।

 

Q 2 - आप ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहिम तेज करने की बात कही है अगली सरकार जब आएगी तो आप क्या करने जा रहे हैं ? क्या जनता से लूटा हुआ पैसा जनता तक किसी योजना या विशेष नीति के जरिए वापस पहुंचेगा ?

जवाब – आपका सवाल बहुत ही रिलिवेंट है क्योंकि आप देखिए हिंदुस्तान का मानस क्या है, भारत के लोग भ्रष्टाचार से तंग आ चुके हैं। दीमक की तरह भ्रष्टाचार देश की सारी व्यवस्थाओं को खोखला कर रहा है। भ्रष्टाचार के लिए आवाज भी बहुत उठती है। जब मैं 2013-14 में चुनाव के समय भाषण करता था और मैं भ्रष्टाचार की बातें बताता था तो लोग अपना रोष व्यक्त करते थे। लोग चाहते थे कि हां कुछ होना चाहिए। अब हमने आकर सिस्टमैटिकली उन चीजों को करने पर बल दिया कि सिस्टम में ऐसे कौन से दोष हैं अगर देश पॉलिसी ड्रिवन है ब्लैक एंड व्हाइट में चीजें उपलब्ध हैं कि भई ये कर सकते हो ये नहीं कर सकते हो। ये आपकी लिमिट है इस लिमिट के बाहर जाना है तो आप नहीं कर सकते हो कोई और करेगा मैंने उस पर बल दिया। ये बात सही है..लेकिन ग्रे एरिया मिनिमल हो जाता है जब ब्लैक एंड व्हाइट में पॉलिसी होती है और उसके कारण डिसक्रिमिनेशन के लिए कोई संभावना नहीं होती है, तो हमने एक तो पॉलिसी ड्रिवन गवर्नेंस पर बल दिया। दूसरा हमने स्कीम्स के सैचुरेशन पर बल दिया कि भई 100% जो स्कीम जिसके लिए है उन लाभार्थियों को 100% ...जब 100% है तो लोगों को पता है मुझे मिलने ही वाला है तो वो करप्शन के लिए कोई जगह ढूंढेगा नहीं। करप्शन करने वाले भी कर नहीं सकते क्योंकि वो कैसे-कैसे कहेंगे, हां हो सकता है कि किसी को जनवरी में मिलने वाला मार्च में मिले या अप्रैल में मिले ये हो सकता है लेकिन उसको पता है कि मिलेगा और मेरे हिसाब से सैचुरेशन करप्शन फ्री गवर्नेंस की गारंटी देता है। सैचुरेशन सोशल जस्टिस की गारंटी देता है। सैचुरेशन सेकुलरिज्म की गारंटी देता है। ऐसे त्रिविध फायदे वाली हमारी दूसरी स्कीम, तीसरा मेरा प्रयास रहा कि मैक्सिमम टेक्नोलॉजी का उपयोग करना। टेक्नोलॉजी में भी..क्योंकि रिकॉर्ड मेंटेन होते हैं, ट्रांसपेरेंसी रहती है। अब डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर में 38 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हमने। अगर राजीव गांधी के जमाने की बात करें कि एक रुपया जाता है 15 पैसा पहुंचता है तो 38 लाख करोड़ तो हो सकता है 25-30 लाख करोड़ रुपया ऐसे ही गबन हो जाते तो हमने टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग किया है। जहां तक करप्शन का सवाल है देश में पहले क्या आवाज उठती थी कि भई करप्शन तो हुआ लेकिन उन्होंने किसी छोटे आदमी को सूली पर चढ़ा दिया। सामान्य रूप से मीडिया में भी चर्चा होती थी कि बड़े-बड़े मगरमच्छ तो छूट जाते हैं, छोटे-छोटे लोगों को पकड़कर आप चीजें निपटा देते हो। फिर एक कालखंड ऐसा आया कि हमें पूछा जाता था 19 के पहले कि आप तो बड़ी-बड़ी बातें करते थे क्यों कदम नहीं उठाते हो, क्यों अरेस्ट नहीं करते हो, क्यों लोगों को ये नहीं करते हो। हम कहते थे भई ये हमारा काम नहीं है, ये स्वतंत्र एजेंसी कर रही है और हम बदइरादे से कुछ नहीं करेंगे। जो भी होगा हमारी सूचना यही है जीरो टोलरेंस दूसरा तथ्यों के आधार पर ये एक्शन होना चाहिए, परसेप्शन के आधार पर नहीं होना चाहिए। तथ्य जुटाने में मेहनत करनी पड़ती है। अब अफसरों ने मेहनत भी की अब मगरमच्छ पकड़े जाने लगे हैं तो हमें सवाल पूछा जा रहा है कि मगरमच्छों को क्यों पकड़ते हो। ये समझ में नहीं आता है कि ये कौन सा गैंग है, खान मार्केट गैंग जो कुछ लोगों को बचाने के लिए इस प्रकार के नैरेटिव गढ़ती है। पहले आप ही कहते थे छोटों को पकड़ते हो बड़े छूट जाते हैं। जब सिस्टम ईमानदारी से काम करने लगा, बड़े लोग पकड़े जाने लगे तब आप चिल्लाने लगे हो। दूसरा पकड़ने का काम एक इंडिपेंडेंट एजेंसी करती है। उसको जेल में रखना कि बाहर रखना, उसके ऊपर केस ठीक है या नहीं है ये न्यायालय तय करता है उसमें मोदी का कोई रोल नहीं है, इलेक्टेड बॉडी का कोई रोल नहीं है लेकिन आजकल मैं हैरान हूं। दूसरा जो देश के लिए चिंता का विषय है वो भ्रष्ट लोगों का महिमामंडन है। हमारे देश में कभी भी भ्रष्टाचार में पकड़े गए लोग या किसी को आरोप भी लगा तो लोग 100 कदम दूर रहते थे। आजकल तो भ्रष्ट लोगों को कंधे पर बिठाकर नाचने की फैशन हो गई है। तीसरा प्रॉब्लम है जो लोग कल तक जिन बातों की वकालत करते थे आज अगर वही चीजें हो रही हैं तो वो उसका विरोध कर रहे हैं। पहले तो वही लोग कहते थे सोनिया जी को जेल में बंद कर दो, फलाने को जेल में बंद कर दो और अब वही लोग चिल्लाते हैं। इसलिए मैं मानता हूं आप जैसे मीडिया का काम है कि लोगों से पूछे कि बताइए छोटे लोग जेल जाने चाहिए या मगरमच्छ जेल जाने चाहिए। पूछो जरा पब्लिक को क्या ओपिनियन है, ओपिनियन बनाइए आप लोग।

 

Q3- नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक सबने गरीबी हटाने की बात तो की लेकिन आपने आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया, इसे लेकर कैसे रणनीति तैयार करते हैं चाहे वो पीएम स्वनिधि योजना हो, पीएम मुद्रा योजना बनाना हो या विश्वकर्मा योजना हो मतलब एकदम ग्रासरूट लेवल से काम किया ?

जवाब – देखिए हमारे देश में जो नैरेटिव गढ़ने वाले लोग हैं उन्होंने देश का इतना नुकसान किया। पहले चीजें बाहर से आती थी तो कहते थे देखिए देश को बेच रहे हैं सब बाहर से लाते हैं। आज जब देश में बन रहा है तो कहते हैं देखिए ग्लोबलाइजेशन का जमाना है और आप लोग अपने ही देश की बातें करते हैं। मैं समझ नहीं पाता हूं कि देश को इस प्रकार से गुमराह करने वाले इन ऐलिमेंट्स से देश को कैसे बचाया जाए। दूसरी बात है अगर अमेरिका में कोई कहता है Be American By American उसपर तो हम सीना तानकर गर्व करते हैं लेकिन मोदी कहता है वोकल फॉर लोकल तो लोगों को लगता है कि ये ग्लोबलाइजेशन के खिलाफ है। तो इस प्रकार से लोगों को गुमराह करने वाली ये प्रवृत्ति चलती है। जहां तक भारत जैसा देश जिसके पास मैनपावर है, स्किल्ड मैनपावर है। अब मैं ऐसी तो गलती नहीं कर सकता कि गेहूं एक्सपोर्ट करूं और ब्रेड इम्पोर्ट करूं..मैं तो चाहूंगा मेरे देश में ही गेहूं का आटा निकले, मेरे देश में ही गेहूं का ब्रेड बने। मेरे देश के लोगों को रोजगार मिले तो मेरा आत्मनिर्भर भारत का जो मिशन है उसके पीछे मेरी पहली जो प्राथमिकता है कि मेरे देश के टैलेंट को अवसर मिले। मेरे देश के युवाओं को रोजगार मिले, मेरे देश का धन बाहर न जाए, मेरे देश में जो प्राकृतिक संसाधन हैं उनका वैल्यू एडिशन हो, मेरे देश के अंदर किसान जो काम करता है उसकी जो प्रोडक्ट है उसका वैल्यू एडिशन हो वो ग्लोबल मार्केट को कैप्चर करे और इसलिए मैंने विदेश विभाग को भी कहा है कि भई आपकी सफलता को मैं तीन आधारों से देखूंगा एक भारत से कितना सामान आप..जिस देश में हैं वहां पर खरीदा जाता है, दूसरा उस देश में बेस्ट टेक्नोलॉजी कौन सी है जो अभीतक भारत में नहीं है। वो टेक्नोलॉजी भारत में कैसे आ सकती है और तीसरा उस देश में से कितने टूरिस्ट भारत भेजते हो आप, ये मेरा क्राइटेरिया रहेगा...तो मेरे हर चीज में सेंटर में मेरा नेशन, सेंटर में मेरा भारत और नेशन फर्स्ट इस मिजाज से हम काम करते हैं।

 

Q 4 - एक तरफ आप विश्वकर्माओं के बारे में सोचते हैं, नाई, लोहार, सुनार, मोची की जरूरतों को समझते हैं उनसे मिलते हैं तो वहीं दूसरी तरफ गेमर्स से मिलते हैं, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की बात करते हैं, इन्फ्लुएंसर्स से आप मिलते हैं इनकी अहमियत को भी सबके सामने रखते हैं, इतना डाइवर्सीफाई तरीके से कैसे सोच पाते हैं?

जवाब- आप देखिए, भारत विविधताओं से भरा हुआ है और कोई देश एक पिलर पर बड़ा नहीं हो सकता है। मैंने एक मिशन लिया। हर डिस्ट्रिक्ट का वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट पर बल दिया, क्यों? भारत इतना विविधता भरा देश है, हर डिस्ट्रिक्ट के पास अपनी अलग ताकत है। मैं चाहता हूं कि इसको हम लोगों के सामने लाएं और आज मैं कभी विदेश जाता हूं तो मुझे चीजें कौन सी ले जाऊंगा। वो उलझन नहीं होती है। मैं सिर्फ वन डिस्ट्रिक, वन प्रोडक्ट का कैटलॉग देखता हूं। तो मुझे लगता है यूरोप जाऊंगा तो यह लेकर जाऊंगा। अफ्रीका जाऊंगा तो यह लेकर जाऊंगा। और हर एक को लगता है एक देश में। यह एक पहलू है दूसरा हमने जी 20 समिट हिंदुस्तान के अलग-अलग हिस्से में की है। क्यों? दुनिया को पता चले कि दिल्ली, यही हिंदुस्तान नहीं है। अब आप ताजमहल देखें तो टूरिज्म पूरा नहीं होता जी मेरे देश का। मेरे देश में इतना पोटेंशियल है, मेरे देश को जानिए और समझिए और इस बार हमने जी-20 का उपयोग भारत को विश्व के अंदर भारत की पहचान बनाने के लिए किया। दुनिया की भारत के प्रति क्यूरियोसिटी बढ़े, इसमें हमने बड़ी सफलता पाई है, क्योंकि दुनिया के करीब एक लाख नीति निर्धारक ऐसे लोग जी-20 समूह की 200 से ज्यादा मीटिंग में आए। वह अलग-अलग जगह पर गए। उन्होंने इन जगहों को देखा, सुना भी नहीं था, देखा वो अपने देश के साथ कोरिलिरेट करने लगे। वो वहां जाकर बातें करने लगे। मैं देख रहा हूं जी20 के कारण लोग आजकल काफी टूरिस्टों को यहां भेज रहे हैं। जिसके कारण हमारे देश का टूरिज्म को बढ़ावा मिला।

इसी तरह आपने देखा होगा कि मैंने स्टार्टअप वालों के साथ मीटिंग की थी, मैं वार्कशॉप करता था। आज से मैं 7-8 साल पहले, 10 साल पहले शुरू- शुरू में यानी मैं 14 में आया। उसके 15-16 के भीतर-भीतर मैंने जो नए स्टार्टअप की दुनिया शुरू हुई, उनकी मैंने ऐसे वर्कशॉप की है तो मैं अलग-अलग कभी मैंने स्पोर्ट्स पर्सन्स के की, कभी मैंने कोचों के साथ की कि इतना ही नहीं मैंने फिल्म दुनिया वालों के साथ भी ऐसी मीटिंग की।

मैं जानता हूं कि वह बिरादरी हमारे विचारों से काफी दूर है। मेरी सरकार से भी दूर है, लेकिन मेरा काम था उनकी समस्याओं को समझो क्योंकि बॉलीवुड अगर ग्लोबल मार्केट में मुझे उपयोगी होता है, अगर मेरी तेलुगू फिल्में दुनिया में पॉपुलर हो सकती है, मेरी तमिल फिल्म दुनिया पॉपुलर हो सकती है। मुझे तो ग्लोबल मार्केट लेना था मेरे देश की हर चीज का। आज यूट्यूब की दुनिया पैदा हुई तो मैंने उनको बुलाया। आप देश की क्या मदद कर सकते हैं। इंफ्लुएंसर को बुलाया, क्रिएटिव वर्ल्ड, गेमिंम अब देखिए दुनिया का इतना बड़ा गेमिंग मार्केट। भारत के लोग इन्वेस्ट कर रहे हैं, पैसा लगा रहे हैं और गेमिंग की दुनिया में कमाई कोई और करता है तो मैंने सारे गेमिंग के एक्सपर्ट को बुलाया। पहले उनकी समस्याएं समझी। मैंने देश को कहा, मेरी सरकार को मुझे गेमिंग में भारतीय लीडरशिप पक्की करनी है।

इतना बड़ा फ्यूचर मार्केट है, अब तो ओलंपिक में गेमिंग आया है तो मैं उसमें जोड़ना चाहता हूं। ऐसे सभी विषयों में एक साथ काम करने के पक्ष में मैं हूं। उसी प्रकार से देश की जो मूलभूत व्यवस्थाएं हैं, आप उसको नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। हमें गांव का एक मोची होगा, सोनार होगा, कपड़े सिलने वाला होगा। वो भी मेरे देश की बहुत बड़ी शक्ति है। मुझे उसको भी उतना ही तवज्जो देना होगा। और इसलिए मेरी सरकार का इंटीग्रेटेड अप्रोच होता है। कॉम्प्रिहेंसिव अप्रोच होता है, होलिस्टिक अप्रोच होता है।

 

Q 5 - डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया उसका विपक्ष ने मजाक भी उड़ाया था, आज ये आपकी सरकार की खास पहचान बन गए हैं और दुनिया भी इस बात का संज्ञान ले रही है, इसका एक उदहारण यूपीआई भी है।

जवाब – यह बात सही है कि हमारे देश में जो डिजिटल इंडिया मूवमेंट मैंने शुरू किया तो शुरू में आरोप क्या लगाए इन्होंने? उन्होंने लगाई कि ये जो सर्विस प्रोवाइडर हैं, उनकी भलाई के लिए हो रहा है। इनको समझ नहीं आया कि यह क्षेत्र कितना बड़ा है और 21वीं सदी एक टेक्नॉलॉजी ड्रिवन सेंचुरी है। टेक्नोलॉजी आईटी ड्रिवन है। आईटी इन्फोर्स बाय एआई। बहुत बड़े प्रभावी क्षेत्र बदलते जा रहे हैं। हमें फ्यूचरस्टीक चीजों को देखना चाहिए। आज अगर यूपीआई न होता तो कोई मुझे बताए कोविड की लड़ाई हम कैसे लड़ते? दुनिया के समृद्ध देश भी अपने लोगों को पैसे होने के बावजूद भी नहीं दे पाए। हम आराम से दे सकते हैं। आज हम 11 करोड़ किसानों को 30 सेकंड के अंदर पैसा भेज सकते हैं। अब यूपीआई अब इतनी यूजर फ्रेंडली है तो क्योंकि यह टैलेंट हमारे देश के नौजवानों में है। वो ऐसे प्रोडक्ट बना करके देते हैं कि कोई भी कॉमन मैन इसका उपयोग कर सकता है। आज मैंने ऐसे कितने लोग देखे हैं जो अपना सोशल मीडिया अनुभव कर रहे हैं। हमने छह मित्रों ने तय किया कि छह महीने तक जेब में 1 पैसा नहीं रखेंगे। अब देखते हैं क्या होता है। छह महीने पहले बिना पैसे पूरी दुनिया में हम अपना काम, कारोबार करके आ गए। हमें कोई तकलीफ नहीं हुई तो हर कसौटी पर खरा उतर रहा है। तो यूपीआई ने एक प्रकार से फिनटेक की दुनिया में बहुत बड़ा रोल प्ले किया है और इसके कारण इन दिनों भारत के साथ जुड़े हुए कई देश यूपीआई से जुड़ने को तैयार हैं क्योंकि अब फिनटेक का युग है। फिनटेक में भारत अब लीड कर रहा है और इसलिए दुर्भाग्य तो इस बात का है कि जब मैं इस विषय को चर्चा कर रहा था तब देश के बड़े-बड़े विद्वान जो पार्लियामेंट में बैठे हैं वह इसका मखौल उड़ाते थे, मजाक उड़ाते थे, उनको भारत के पोटेंशियल का अंदाजा नहीं था और टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य का भी अंदाज नहीं था।

 

Q 6 - देश के युवा भारत का इतिहास लिखेंगे ऐसा आप कई बार बोल चुके हैं, फर्स्ट टाइम वोटर्स का पीएम मोदी से कनेक्ट के पीछे का क्या कारण है?

एक मैं उनके एस्पिरेशन को समझ पाता हूं। जो पुरानी सोच है कि वह घर में अपने पहले पांच थे तो अब 7 में जाएगा सात से नौ, ऐसा नहीं है। वह पांच से भी सीधा 100 पर जाना चाहता है। आज का यूथ हर, क्षेत्र में वह बड़ा जंप लगाना चाहता है। हमें वह लॉन्चिंग पैड क्रिएट करना चाहिए, ताकि हमारे यूथ के एस्पिरेशन को हम फुलफिल कर सकें। इसलिए यूथ को समझना चाहिए। मैं परीक्षा पर चर्चा करता हूं और मैंने देखा है कि मुझे लाखों युवकों से ऐसी बात करने का मौका मिलता है जो परीक्षा पर चर्चा की चर्चा चल रही है। लेकिन वह मेरे साथ 10 साल के बाद की बात करता है। मतलब वह एक नई जनरेशन है। अगर सरकार और सरकार की लीडरशिप इस नई जनरेशन के एस्पिरेशन को समझने में विफल हो गई तो बहुत बड़ी गैप हो जाएगी। आपने देखा होगा कोविड में मैं बार-बार चिंतित था कि मेरे यह फर्स्ट टाइम वोटर जो अभी हैं, वह कोविड के समय में 14-15 साल के थे अगर यह चार दीवारों में फंसे रहेंगे तो इनका बचपन मर जाएगा। उनकी जवानी आएगी नहीं। वह बचपन से सीधे बुढ़ापे में चला जाएगा। यह गैप कौन भरेगा? तो मैं उसके लिए चिंतित था। मैं उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंस से बात करता था। मैं उनको समझाता था का आप यह करिए। और इसलिए हमने डेटा एकदम सस्ता कर दिया। उस समय मेरा डेटा सस्ता करने के पीछे लॉजिक था। वह ईजिली इंटरनेट का उपयोग करते हुए नई दुनिया की तरफ मुड़े और वह हुआ। उसका हमें बेनिफिट हुआ है। भारत ने कोविड की मुसीबतों को अवसर में पलटने में बहुत बड़ा रोल किया है और आज जो डिजिटल रिवॉल्यूशन आया है, फिनटेक का जो रिवॉल्यूशन आया है, वह हमने आपत्ति को अवसर में पलटा उसके कारण आया है तो मैं टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को समझता हूं। मैं टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना चाहता हूं।

प्रधानमंत्री जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपने हमें समय दिया।

नमस्कार भैया, मेरी भी आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं, आप भी बहुत प्रगति करें और देश को सही जानकारियां देते रहें।