इंडोनेशिया के माननीय राष्ट्रपति जी,
उप-राष्ट्रपति जी,
माननीय Speakers,
पार्लियामेंट के सम्मानित सदस्य
Excellencies,
इंडोनेशिया के मेरे प्रिय भाइयों और बहनों,

आप सबको नमस्कार।
सलामत सियांग!

अपने ‘सहाबत सेजाती’ के बीच आकर मैं बहुत ही आनंदित हूं।

आपके बीच आना मेरे लिए बहुत सौभाग्य का विषय है। मैं 140 करोड़ भारतवासियों के प्रतिनिधि के रूप में मदर ऑफ डेमोक्रेसी के एक भाग्यशाली नागरिक के रूप में आपको सभी भारतीयों की तरफ से शुभकामनाएं देता हूं।

Hon’ble members,

इंडोनेशिया के लोगों ने, यहाँ के बच्चों ने, युवाओं और महिलाओं ने, आज के दिन को मेरे जीवन के सबसे यादगार दिनों में से एक बना दिया है। आज की सुबह जिस तरह इंडोनेशिया के लोगों ने मुझे अपना प्रेम दिखाया है, जिस तरह स्वागत किया है, वह मैं कभी भूल नहीं सकता। आज सुबह President Prabowo ने copyright की बात कही थी। मैं उन्हें यही कहूंगा की इस प्रेम पर, इस स्नेह पर, इस दोस्ती पर, इस आदरभाव पर, किसी का copyright हो ही नहीं सकता। President Prabowo से मेरी मित्रता copyright की सारी सीमाओं से परे हैं।

साथियों,

आज सुबह मुझे इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान पाने का भी सौभाग्य मिला। मैं कोटि कोटि भारतीयों के प्रति इंडोनेशिया के लोगों के स्नेह को, ह्रदय से, नमृता से, स्वीकार करता हूँ। यह सम्मान, हम दोनों देशों के डेमोक्रेटिक वैल्यूज का है, साझी विरासत का है, और दोनों देशों के मज़बूत होते रिश्तों का है। मैं आप सभी साथियों का, President Prabowo ji का, इंडोनेशिया की सरकार, और यहाँ की जनता का, ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूँ।

Honourable Members,

आज भारत और इंडोनेशिया, इतिहास के एक अहम पड़ाव पर एक साथ खड़े हैं। इस सदी का पहला क्वार्टर बीत चुका है, और अब आने वाले 25 वर्ष हम दोनों देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। आज इंडोनेशिया की इस महान धरती पर मैं आपके समक्ष दोनों देशों के साझा विकास का विश्वास लेकर के आय़ा हूं। मैं ये संकल्प लेकर आया हूं कि भारत और इंडोनेशिया मिलकर पूरी मानवता को एक नई ऊर्जा से भर सकते हैं।

जब भारत के 140 करोड़ नागरिक, इंडोनेशिया के 29 करोड़ नागरिक, साझा प्रयासों से मिलकर आगे बढ़ेंगे, तो दुनिया एक नया इतिहास रचते हुए देखेगी।

भारत दुनिया का वो देश है, जो विस्तारवाद नहीं, विकासवाद की नीति पर चलता है और इसलिए हम भारत में कहते हैं- सबका साथ-सबका विकास : Together with all, development for all.

आज मैं यही मंत्र, यही भावना लेकर, इंडोनेशिया के आप सभी संसद सदस्यों के बीच आया हूं।

Honourable Members,

हमारी राजधानियां भले ही हजारों किलोमीटर दूर हों, लेकिन, समुद्र में हमारे बीच केवल 150 किलोमीटर की ही दूरी है। दूसरे देशों में समुद्र भले ही सीमाओं और दूरियों का कारण रहा हो, लेकिन, भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्र दूरी का प्रतीक नहीं रहा। समुद्र हमारे बीच एक सेतु है। ये हमारे साझा भविष्य का केंद्र है।

India, Indonesia और Indian Ocean…. ये नाम हमारे आपसी जुड़ाव की गवाही देते हैं। हजारों वर्षों तक हमारे पोर्ट्स दुनिया को जोड़ते रहे। हमारे जहाज़, व्यापार और संस्कृति को दूर-दूर तक लेकर गए। हमारे पास समुद्र से जुड़ी भविष्य की अनेक संभावनाएं हैं। इसलिए मैं आज समुद्र की इसी विशालता को आधार बनाकर, आपसे भारत-इंडोनेशिया के संबंधों को नई उंचाई देने का आग्रह करूंगा।

Honourable Members,

इंडिया और इंडोनेशिया सिर्फ समुद्र ही शेयर नहीं करते, हमारी history भी shared है। हमारा संबंध रामायण और महाभारत की विरासत है। हमारा संबंध, सदियों पहले नालंदा के ज्ञान से है। हमारा संबंध, वायांग, नृत्य और संगीत से है।

हम बोरोबुदुर और प्रम्बानन जैसी अद्भुत स्मारकों के जरिए जुड़े हैं। हम इंडोनेशिया के राष्ट्रीय प्रतीक गरुडा से जुड़े हैं। हम बाली जात्रा के उत्सव और उसके उल्लास से जुड़े हैं। और, जब हम स्वाद की बात करते हैं तो, क्रुपुक और पापड़ में कौन ज्यादा crunchy है, ये कहना कठिन हो जाता है। लेकिन ये बात तो तय है मसाला और बुम्बु, दोनों हमारे जीवन में फ्लेवर लाते हैं।

साथियों,

भारत के पश्चिमी छोर पर स्थित गुजरात मेरा गृह राज्य है। कहा जाता है कि सदियों पहले गुजरात से कुछ व्यापारी और सूफी संत समुद्र के रास्ते ही इंडोनेशिया आए थे। वे अपने साथ इस्लाम के विचार और इस्लाम के जीवन-मूल्य भी लेकर यहाँ आए। आज भी गुजरात के पटोला वस्त्र यहाँ सम्मान और प्रतिष्ठा के प्रतीक हैं। आज भी इंडोनेशिया की बाटिक कला में उनकी छाप दिखाई देती है।

और इसीलिए ही राष्ट्रपति सुकर्णो ने भी कहा था- “इंडोनेशिया और भारत के लोग रक्त और संस्कृति के संबंधों से जुड़े हैं।”

साथियों,

ऐसा कितना कुछ है, जो हमारे पूर्वजों ने साथ-साथ जिया है। हम लोगों ने लंबे समय तक विदेशी शासन का सामना किया। हम दोनों ही राष्ट्र लगभग एक ही समय स्वतंत्र हुये। इंडोनेशिया 1945 में, और भारत 1947 में! और, जब स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर संप्रभुता की बात आई तो भारत संयुक्त राष्ट्र में इंडोनेशिया के स्वतंत्रता आंदोलन की मजबूत आवाज़ बना।

उस दौर में,

आदरणीय बीजू पटनायक जी ने जो भूमिका निभाई जिस तरह उन्होंने प्रधानमंत्री सुतान शहरिर और उपराष्ट्रपति मोहम्मद हट्टा को सुरक्षित भारत पहुंचाया, वो घटना दोनों ही देशों को और करीब ले आई।

Honourable Members,

एक और बात जो हमें एक दूसरे के करीब लाती है वो है हमारा मजबूत लोकतंत्र और लोकतंत्र में विविधता। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतन्त्र है, Mother of Democracy है। और, इंडोनेशिया दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी डेमोक्रेसी है।

भारत में सैकड़ों भाषाएँ और अनेक परंपराएँ हैं, तो इंडोनेशिया में भी सैकड़ों भाषाएँ और अनेक परंपराएं हैं। भारत में वसुधैव कुटुम्बकम् का मंत्र है तो इंडोनेशिया में भिन्नेका तुंग्गल ईका का विचार है। हम दोनों ने अपने लोकतंत्र में इस विविधता को ही अपनी एकता की नींव बना लिया है।

Honourable Members,

1950 में जब भारत ने अपना पहला गणतंत्र दिवस मनाया था उस समारोह के मुख्य अतिथि भी राष्ट्रपति सुकर्णो ही थे, जिसका उल्लेख आदरणीय स्पीकर महोदय ने किया। और उस दौर में बांडुंग सम्मेलन में राष्ट्रपति सुकर्णो और प्रधानमंत्री नेहरू ने दुनिया को ये स्पष्ट संदेश दिया कि स्वतंत्र देशों को अपने निर्णय स्वयं लेने का अधिकार है।

Honourable Members,

लोकतन्त्र की ताकत क्या होती है इंडोनेशिया ने ये रेफॉर्मासी के जरिए दुनिया को दिखाया है। पिछले दो दशकों में इंडोनेशिया की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ी है और करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए हैं।

भारत का लोकतांत्रिक अनुभव भी यही कहता है। आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। और हमारे यहां भी पिछले एक दशक में 25 करोड़ से ज्यादा भारतीय, गरीबी से बाहर आए हैं।

और इसलिए मित्रों,

जब भारत और इंडोनेशिया साथ खड़े होते हैं, तो दुनिया का ये विश्वास मजबूत होता है कि लोकतंत्र अवसर देता है, लोकतंत्र विश्वास देता है,

और लोकतंत्र भविष्य बनाता है। और मुझे अटूट विश्वास है हमारे ये लोकतांत्रिक मूल्य और साझा आकांक्षाएँ भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँगी।

Honourable Members,

एक साथ आजाद देशों के तौर पर हमने जो सफर शुरू किया था अब उस आजादी के सौ वर्ष भी हम एक साथ पूरे करने जा रहे हैं। यहाँ इंडोनेशिया में आप एमास 2045 के महत्वाकांक्षी विज़न पर चल रहे हैं। और भारत में हम ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं। अपने इन लक्ष्यों को हासिल करने में हम एक दूसरे के पूरक बन सकते हैं।

हम दुनिया की सबसे यूथफुल सोसायटीज हैं। हम दुनिया की सबसे तेज़ी से आगे बढ़ रही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में हैं। हम दोनों major maritime powers हैं। हम ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज़ हैं। हम प्राचीन सभ्यताएं भी हैं, और भविष्य के लिए नैचुरल पार्टनर्स भी हैं।

इस यात्रा में हम एक दूसरे के पार्टनर्स भी बनें, और स्ट्रेंथ भी बनें। इसी विज़न को लेकर आज राष्ट्रपति प्रबोवो से मेरी विस्तृत चर्चा भी हुई है। हमारे उद्देश्य बहुत स्पष्ट है। भारत और इंडोनेशिया के बीच जो सद्भाव और विश्वास है, हमें उसे अपने नागरिकों के लिए नए अवसरों में बदलना है।

पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 25 अरब डॉलर तक पहुंचा है। भारत की सौ से अधिक कंपनियां इंडोनेशिया में काम कर रही हैं। निश्चित तौर पर हम साथ मिलकर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन, आगे अभी और भी असीमित संभावनाएं हमारा इंतज़ार कर रही हैं।

Honourable Members,

Futuristic सेक्टर्स में भारत और इंडोनेशिया के बीच अनंत आकाश को छूने का सामर्थ्य है। उदाहरण के तौर पर, स्पेस टेक्नालजी। आज पूरी दुनिया स्पेस में भारत की क्षमता का लोहा मान रही है। और, भारत, इसमें इंडोनेशिया को अपना natural पार्टनर मानता है।

बियाक में सैटेलाइट ट्रैकिंग सुविधाएँ, लंबे समय से भारत के स्पेस प्रोग्राम को सहयोग देती रही हैं। भारत ने भी इंडोनेशिया के कई सैटेलाइट लॉन्च किए हैं, और, capacity building में अपना योगदान दिया है। अब इस सहयोग को और आगे ले जाने का समय है। सैटेलाइट एप्लिकेशन्स में हम साथ काम कर सकते हैं। भारत, इंडोनेशिया में सैटेलाइट लॉन्च सुविधा विकसित करने में भी सहयोग देने के लिए तत्पर है।

साथियों,

हमारी समुद्री विरासत को सहेजने के लिए हम 5 हजार साल पुराने पोर्ट सिटी लोथल में नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स बना रहे हैं।

मैं चाहूंगा कि इंडोनेशिया भी इस प्रोजेक्ट के साथ जुड़े।

Honourable Members,

आतंकवाद जैसे विषयों पर भारत और इंडोनेशिया, दोनों की एक राय रही है। पिछले वर्ष पहलगाम में जब जघन्य आतंकवादी हमला हुआ, इंडोनेशिया तब भारत के साथ मजबूती से खड़ा रहा। मैं इसके लिए, राष्ट्रपति प्रबोवो और आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं।

हमारे दोनों देश काउंटर-टेररिज्म पर जॉइंट वर्किंग ग्रुप के माध्यम से साथ काम कर रहे हैं। इंटेलिजेंस, साइबर थ्रेट्स, आतंकी फंडिंग और डी-रेडिकलाइज़ेशन इन क्षेत्रों में हम और सहयोग बढ़ाकर, दुनिया में शांतिवादी ताकतों को मजबूती दे सकते हैं।

Honourable Members,

आज ग्लोबल ऑर्डर तेजी से बदल रहा है, और ऐसे में हम जैसे विकासशील देश समान भागीदारी और अपनी बड़ी भूमिका मांग रहे हैं। इस वैश्विक परिदेश में, भारत का स्पष्ट मानना है यूएन सेक्योरिटी काउंसिल में रिफॉर्म को और टाला नहीं जा सकता।

2022 में इंडोनेशिया की जी-20 अध्यक्षता और, 2023 में भारत की जी-20 अध्यक्षता, दोनों ने विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को वैश्विक चर्चा के केंद्र में लाने का प्रयास किया।

इंडोनेशिया की बेबास-आक्टिफ की परंपरा और भारत का strategic autonomy के लिए कमिटमेंट वैश्विक विषयों पर हमें साथ खड़े होने के लिए मजबूत आधार देते हैं।

भारत free, open और inclusive Indo-Pacific का प्रबल समर्थक है। भारत इंडो-पैसिफिक में freedom of navigation की बात करता है। इसके लिए हमने आसियान को केंद्र में रखा है। हमारी एक्ट ईस्ट पॉलिसी भी आसियान सेंट्रिक है। भारत और आसियान की कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप लगातार आगे बढ़ रही है। इसलिए बहुत आवश्यक है कि भारत और इंडोनेशिया इस दिशा में निरंतर काम करते रहें।

Honourable Members,

हमारे सामने एक और बड़ा अवसर है। पिछले वर्ष इंडोनेशिया ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बना है। इस वर्ष भारत ही ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। ब्रिक्स का ये मंच और अधिक व्यवहारिक हो, अधिक संतुलित हो, ग्लोबल साउथ की ज़रूरतों के प्रति और अधिक संवेदनशील हो,

हम इसके लिए साथ मिलकर काम कर सकते हैं।

Honourable Members,

आज, इंडोनेशिया के सभी पार्लियामेंट मेंबर्स के सामने, मैं भारत-इंडोनेशिया साझेदारी के एक नए युग का आह्वान करता हूं। गंगा और महाकाम की धाराओं की तरह, हमारी सभ्यताओं ने सदियों से विचारों, आस्था, व्यापार और संस्कृति को जोड़ा है। आज, उसी ऐतिहासिक प्रवाह को भविष्य की नई ऊर्जा देने के लिए, मैं आप सभी के समक्ष Ganga–महाकाम Vision प्रस्तुत करना चाहता हूं।

यह vision हमारी साझेदारी को केवल वर्तमान की आवश्यकताओं तक सीमित नहीं रखता। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए शांति, समृद्धि, सुरक्षा और shared progress का मार्ग प्रशस्त करता है।

पहला… Civilizational Connect

हम अपने सभ्यतागत जुड़ाव को नई पीढ़ियों की चेतना से जोड़ेंगे। रामायण से बोरोबुदुर तक, समुद्री यात्राओं से सांस्कृतिक संवाद तक —हम अपने साझा इतिहास को भविष्य की शक्ति बनाएंगे। इसके लिए हमें भारत-इंडोनेशिया Civilizational Dialogue शुरू करना चाहिए।

दूसरा… Shared Development

विकसित राष्ट्र बनने की अपनी-अपनी यात्राओं में भारत और इंडोनेशिया अटल साझेदार रहेंगे। इंडोनेशिया का “एमास” Vision और भारत का विकसित भारत संकल्प — एक-दूसरे को गति देंगे, एक-दूसरे को शक्ति देंगे, और हमारे लोगों के लिए नई opportunities का निर्माण करेंगे।

तीसरा… Security and Strategic Trust

हम defence और security cooperation को नई ऊंचाई देंगे। हम अपनी national capacities को मजबूत करेंगे, आतंकवाद, साइबर threats, समुद्री चुनौतियों और emerging security risks का हम मिलकर सामना करेंगे। भारत और इंडोनेशिया का strategic trust, Indo-Pacific में stability का मजबूत आधार बनेगा।

चौथा… Maritime Prosperity

दो महान समुद्री राष्ट्रों के रूप में, हम अपनी shared maritime geography को shared prosperity में बदलेंगे। साबांग से Great Nicobar तक, मलक्का gateway से Indo-Pacific तक — हम connectivity, logistics, blue economy, maritime security और trade resilience में नए अवसर पैदा करेंगे।

पांचवां… Voice of the Global South

हम Global South की आकांक्षाओं को और मजबूत आवाज़ देंगे। हम ऐसे world order के लिए काम करेंगे, जहां development inclusive हो, technology accessible हो, और global governance अधिक न्यायपूर्ण और representative हो।

साथियों,

भारत और इंडोनेशिया मिलकर मानवता के पांचवें हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। हमारी साझेदारी केवल दो देशों का संबंध नहीं है, यह Indo-Pacific की stability, Global South की शक्ति, और विश्व के shared future में विश्वास का संकल्प है। आइए, अपनी ऐतिहासिक मित्रता को नए दौर में ले जाएं। आइए, Ganga–महाकम Vision को मिलकर साकार करें।

Honourable Members,

भारत में तुलसीदास जी ने लिखा था...

जानें बिनु न होइ परतीती।
जानें बिनु न होइ परतीती।
बिनु परतीति होइ नहिं प्रीती॥

यानि, जब तक लोग एक-दूसरे को जानेंगे नहीं, तब तक उनके बीच अपनापन नहीं बढ़ेगा। मुझे बताया गया है, इंडोनेशिया में एक कहावत हैं और इसका अर्थ भी यही है।

" ताक केनाल माका ताक सायांग"

इसलिए,

हमने तय किया है, हम एक दूसरे से मिलने जुलने का सिलसिला और तेज करेंगे। आज शाम मैं और राष्ट्रपति प्रबोवो यहाँ रह रहे भारतीयों से मिलेंगे। कल राष्ट्रपति प्रबोवो और मैं प्रम्बानन भी जाएंगे। हम इस वर्ल्ड हेरिटेज साइट के कंजर्वेशन और रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट की शुरुआत करेंगे। भारत और इंडोनेशिया उस विरासत को सहेजने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, जिसे इतिहास ने हमें सौंपा है।

Honourable Members,

मैं आज आप सभी सदस्यों को भारत आने के लिए भी विशेष निमंत्रण भी दे रहा हूं। आप जरूर भारत आएं, अपने परिवार और दोस्तों के साथ आएं, भारत के लोगों को आपका स्वागत करते हुए बहुत अच्छा लगेगा।

मुझे विश्वास है हम मित्रा सेलामान्या, Partners forever बनकर काम करेंगे। हम मिलकर भारत और इंडोनेशिया के लोगों के लिए साझा समृद्धि का भविष्य बनाएंगे। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

दीर्घायु इंडोनेशिया!
भारत माता की जय!
धन्यवाद

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दुनिया भारत को ग्रोथ और उम्मीद की नई किरण के रूप में देख रही है: इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2026 में पीएम मोदी
August 21, 2026
The world sees India as a bright spot for growth and hope: PM
Today, India is implementing next-generation reforms at the policy level and undertaking reforms at governance level: PM
Increasing production was met with punishment earlier but today, our government is providing incentives for boosting production
India has political stability and continuity in its policies: PM
Earlier, the approach of regulations was, 'prohibited unless permitted’; We are changing this approach and taking it towards 'permitted unless prohibited’: PM
The relationship between the government and citizens should be based on trust, not suspicion: PM
Today, we are shaping policies that are pro-people, pro-growth and pro-development: PM

World Leaders Forum का ये प्रतिष्ठित मंच, Business और Industry की दुनिया के सभी जाने माने दिग्गज, पॉलिसी मेकर्स, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

आप सबके बीच आकर के खुश होना बहुत स्वाभाविक भी है। इस साल समिट का फोकस Shared Future पर है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। और इन अनुभवों ने एक बात बहुत स्पष्ट कर दी है, कोई चाहे या ना चाहे, हर देश का भविष्य, उसका फ्यूचर, एक-दूसरे से जुड़ा हुआ ही है, Isolation में कुछ संभव नहीं है। इसीलिए Shared Futures की ये theme, आज और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। और भारत तो हमेशा से इसी भावना को लेकर चला है। जी-20 की अध्यक्षता में इसलिए ही भारत का मंत्र रहा, One Earth, One Family, One Future. Shared Future की ये भावना और इसके साथ जुड़ा दायित्वबोध, 21वीं सदी के इस विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान देता है।

साथियों,

आज दुनिया में growth को लेकर के कई तरह की चिंताएं हैं। दुनिया ने बड़ा भयंकर एक रूप देखा है इन दिनों। Resources का वेपनाइजेशन हो रहा है। अविश्वास का वातावरण विश्व के लिए अनेक नई चुनौतियां लेकर के आ रहा है। लेकिन ऐसे समय में भी, दुनिया भारत को growth और hope के bright spot के रूप में देख रही है। भारत ने पिछले 10-12 साल में अपनी 25 करोड़ आबादी को गरीबी से बाहर निकाला है। इतना ही नहीं, अगर आने वाले दिनों की चर्चा करें, तो IMF का forecast है कि भारत दुनिया की fastest growing major economy बना रहेगा। और भारत निरंतर वो कदम उठा रहा है, जो उसके विकास को गति दे रहे हैं।

Friends,

अभी पिछले हफ्ते ही, 15 अगस्त को मैंने लाल किले से सप्त-धारा की सप्त-शक्तियों की बात की है। मैन्यूफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, फूड प्रोसेसिंग, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी समेत, मैंने ऐसे सात सेक्टर्स की बात की है, जिन पर भारत का आज बहुत ज्यादा फोकस है। और इसलिए भारत आज, Policy level पर, नेक्स्ट जनरेशन reforms कर रहा है, ताकि हमारा future सुरक्षित हो। Governance पर reforms कर रहा है, Ease of Living के लिए reforms कर रहा है। पिछली बार जब मैं इसी मंच के माध्यम से आपसे जुड़ा था, तब भी मैंने कहा था, ये Reforms हमारे लिए Compulsion नहीं है। ये हमारा commitment है, ये हमारा conviction है।

साथियों,

2014 में, जब हमारी सरकार बनी, तो उसके बाद से ही रिफॉर्म्स ने कैसे देश की दिशा और दशा बदली है, मैं इसका एक बहुत दिलचस्प उदाहरण आपको देना चाहता हूं। यहां मौजूद शायद ही किसी को PLP के बारे में पता होगा, कोई है, जिसको PLP के बारे में पता है? अपना हाथ उठाएं। यहां इतने मीडिया के दिग्गज बैठे हैं, PLP आपको पता है? और आप सुनकर के हैरान हो जाएंगे। PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट, इसके बारे में किसी को पता नहीं है। और एक दूसरा टर्म आपने जरूर सुना है PLI, ये ज्यादातर लोगों को पता होगा। PLI- यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव।

साथियों,

ये दोनों टर्म, भारत के दो अलग-अलग Time Period को डिफाइन करते हैं। आजकल Explainer का जमाना है, तो मैं आपको Explain करता हूं।

साथियों,

आज की युवा पीढ़ी को ये सुनकर हैरानी होगी, कि हमारे देश में एक समय ऐसा भी था, कि अगर कोई कंपनी तय लिमिट से ज्यादा प्रॉडक्शन कर दे, तो उसे पनिशमेंट दिया जाता था। ये पहले की लाइसेंस राज वाली सरकारों का, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल था। ऐसे भी उदाहरण रहे हैं कि अगर किसी फैक्ट्री ने ज्यादा डिमांड देखते हुए ज्यादा प्रॉडक्शन कर दिया, तो उसे नोटिस भेज दिया जाता था। मजबूरी में वो कंपनी अपना प्रॉडक्ट मार्केट में बेचने के बजाय, उसे खुद ही नष्ट कर देती थी।

साथियों,

आज जो लोग Make In India और आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजाक उड़ाते हैं, उनके पुरखों की सोच यही थी, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट। ऐसा करने के पीछे एक विशेष तरह की विकृत मानसिकता काम करती थी। ऐसी मानसिकता वाले लोग हमेशा चाहते थे कि जरूरी चीजों की किल्लत बनी रहे। देश के नागरिकों को अभाव में रखना उनकी पॉलिसी थी। वो चाहते थे कि जनता उनके सामने हाथ जोड़े, हाथ फैलाए, आप समझ गए मैं किन लोगों की बात कर रहा हूं। लोगों से हाथ जुड़वाने के बाद उपकार करना, उन सरकारों का तरीका था, इसलिए वो प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल पर चलते थे। आप कल्पना कर सकते हैं, ऐसे करके उन लोगों ने Employment Generation के बेसिक principal का गला घोंट दिया था। और हैरानी ये, इन लोगों के दरबारियों ने again I repeat, इन लोगों के दरबारियों ने, कभी इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई।

साथियों,

हर reform की शुरुआत सबसे पहले, आपके सोचने के तरीके, आपके मानसिक, किस रेंज में आप काम कर रहे हैं, इस सोच के reform से ही होती है। जहां पहले production बढ़ाने पर पनिशमेंट मिलता था, वहीं आज हमारी सरकार production बढ़ाने पर incentive दे रही है। और आज PLI स्कीम की सक्सेस दुनिया देख रही है। सिर्फ इस एक योजना की वजह से, मैं सारी योजनाओं की बात नहीं करता हूं, एक की बात करता हूं, करीब ढाई लाख करोड़ रुपए का actual investment हुआ है। 22 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का production और sales हुई है। 15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का exports हुआ है, और 14 लाख से ज्यादा direct और indirect jobs बनी हैं। और मैं फिर याद दिलाउंगा, ये आंकड़े सिर्फ एक स्कीम के हैं। आप सोचिए, पहले का लाइसेंस राज वाली सरकार का पनिशमेंट मॉडल जहां बेरोजगारी बढ़ाता था, वहीं आज का हमारा incentive मॉडल लाखों नई जॉब्स क्रिएट कर रहा है।

साथियों,

आज भारत में ये तेज विकास, ये तेज रिफॉर्म इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि भारत में और जिसका अभी सत्य ने उल्लेख किया, political stability है, हमारी policy में continuity है। पहले देश में रिफॉर्म्स की बात करने वाले घोषणा तो कर देते थे, बाद में भूल जाते थे। लेकिन हमने रिफॉर्म्स को लेकर एक क्लियर रोडमैप बनाया। इस रोडमैप की प्रमुख दिशा रही है- गवर्नेंस लेवेल के रिफॉर्म्स हों! इसके लिए, आज 21वीं सदी के भारत में, हम सिर्फ regulations नहीं बदल रहे हैं, हम regulation की पूरी philosophy बदल रहे हैं। पहले regulations की अप्रोच थी- “Prohibited unless permitted.” यानी जब तक सरकार इजाजत ना दे, तब तक आप वो काम नहीं कर सकते। हम इस approach को बदलकर, “Permitted unless prohibited” की तरफ ले जा रहे हैं। यानी, जो काम कानून ने स्पष्ट रूप से मना नहीं किया है, उसके लिए हर कदम पर permission की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए। और इसके पीछे सोच बहुत सीधी है, सरकार और नागरिक के रिश्ते का आधार, Suspicion नहीं, trust होना चाहिए।

साथियों,

यही सोच आपको Jan Vishwas बिल में भी दिखाई देती है। मैं मानता हूं, हर procedural गलती को criminal offence मान लेना ठीक नहीं है। इसीलिए अनेक offences को decriminalise किया गया है। कई मामलों में जेल की जगह केवल आर्थिक penalty का प्रावधान किया गया है। Government और enterprise के रिश्ते में, हम इसी reform mindset को आगे बढ़ा रहे हैं। बीते वर्षों में 40 हजार से ज्यादा compliances हटाए गए हैं, 40 thousand. डेढ़ हजार से ज्यादा, 15 hundred, डेढ़ हजार से ज्यादा, पुराने और बेकार हो चुके कानून हमने खत्म किए, और जब इन सारे reforms को एक साथ देखते हैं, तो अंदाजा होता है, हमारी industries और businesses के कंधों से कितना बड़ा बोझ कम हुआ है।

साथियों,

गवर्नेंस रिफॉर्म्स की इस प्रक्रिया, उस पर हम निरंतर काम कर रहे है। अभी संसद के मॉनसून सत्र में हमने ‘बैंकर्स बुक एविडेंस बिल’ पारित किया है। और वो भी तब जब विपक्ष ने संसद में लगातार गतिरोध बनाया हुआ था। हमने देश की सेवा करने का काम रूकने नहीं दिया। अब इस कानून ने 19वीं सदी के अंग्रेजी कानून को रिप्लेस किया है। अब बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड्स की स्वीकार्यता को कानूनी मान्यता दी गई है। इससे कानूनी उलझनें कम होंगी, सिस्टम में पारदर्शिता होगी, Ease of Doing Business बढ़ेगा।

साथियों,

गवर्नेंस में रिफॉर्म का एक मतलब ये भी है कि सिस्टम ऐसे बनें, जिसमें एक-एक मानव जीवन और उसके समय के प्रति संवेदनशीलता हो। मैं रेलवे का उदाहरण देता हूं। हमारी रेलवेज में भी इसी अप्रोच के साथ काम हुआ है। आज साढ़े 6 हजार से ज्यादा रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था है। 10 हजार से ज्यादा लेवल क्रॉसिंग गेट्स को भी इंटरलॉकिंग से जोड़ा जा चुका है। इससे ह्यूमन एरर से होने वाले हादसों की आशंका बहुत कम हुई है।

साथियों,

जब 2014 में हमारी सरकार आई, तो करीब 9 हजार फाटक ऐसे थे जो Un-Manned थे। इन्हें हटाना कोई रॉकेट साइंस नहीं था। Un-Manned क्रॉसिंग्स की वजह से हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन पहले की सरकारों को इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता था। हमने मिशन मोड में, गत दस वर्ष में, इन Un-Manned क्रॉसिंग्स को समाप्त कर दिया। हमने रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज बनाने की गति भी कई गुना बढ़ा दी। और इसी का नतीजा है कि 2014 के पहले के मुकाबले ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या में Ninety Percent तक की कमी आई है, 90, Ninety Percent. 12 साल पहले जहां एक साल में करीब डेढ़ सौ रेल दुर्घटनाएं होती थीं, वहीं अब इनकी संख्या घटकर 15-20 रह गई है। और हम इसे और कम से कम करने का प्रयास लगातार कर रहे हैं।

साथियों,

Railways में स्वच्छता भी गवर्नेंस रिफॉर्म का एक बड़ा उदाहरण है। एक समय था, जब रेल पटरियों पर गंदगी और human waste एक बड़ी समस्या हुआ करती थी। आज स्थिति पूरी तरह बदल गई है। 2014 से पहले हमारी ट्रेनों में जहां लगभग 12 हजार बायो-टॉयलेट्स लगाए गए थे, वहीं 2014 के बाद ट्रेनों में 3 लाख 60 हजार से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स लगाए गए हैं। यानी, 97 प्रतिशत से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स पिछले 12 वर्षों में लगे हैं। ये बदलाव सिर्फ सफाई का नहीं, यात्रियों की गरिमा, स्वच्छता और आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में गवर्नेंस का एक नया मॉडल है। ये करोड़ों यात्रियों को बेहतर अनुभव देने का अभियान भी है।

साथियों,

गवर्नेंस की क्वालिटी का एक और पैमाना, और वो पैमाना है - समय। जो प्रोजेक्ट शुरू हो, वो समय पर पूरा हो। और जो सर्विस लोगों को मिले, वो भी समय की कसौटी पर खरी उतरे। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल सिस्टम इसका बहुत अच्छा उदाहरण है। इस कॉरिडोर पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चल रही हैं। ये हमारे देश में पहले कभी सोचा नहीं जा सकता था। अब तक 4 करोड़ से ज्यादा यात्री इसमें ट्रैवल कर चुके हैं। और इसका एक और अहम फैक्टर है, जिसकी चर्चा नहीं होती है। दिल्ली मेरठ नमो भारत रैपिड रेल की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। वरना हम तो हर चीज में कहते हैं, लेट हो तो कहते थे, ये तो इंडियन टाइम है। वक्त बदला है, ये मैं छोटी-छोटी चीजें इसलिए बताता हूं, कि हमें अंदाज आए कि कितने बड़े व्यापक स्तर पर काम हो रहा है। इसी तरह, Delhi Metro की पंक्चुअलिटी। Delhi Metro की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। और ये punctuality, New York, Hong Kong और Paris जैसे शहरों की Metro से करीब-करीब बराबर हो चुकी है। ये सिर्फ समय पर चलती हुई Metro और नमो रेपिड रेल की कहानी नहीं है, ये समय के साथ बदलते हुए भारत की पहचान है। मैं जानता हूं कि अभी भी, और र्मैं कोई इतने से संतोष मानकर बैठने वाला व्यक्ति नहीं हूं, अभी भी इस दिशा में हमें बहुत कुछ करना है, बहुत कुछ बाकी है, लेकिन हम लगातार कर रहे हैं। लेकिन एक शुरूआत तो हुई है और ये शुरुआत सराहनीय है।

साथियों,

हमारे रिफॉर्म्स रोडमैप का एक और बड़ा आयाम है- पॉलिसी लेवल पर होने वाले रिफॉर्म्स! आज हम ऐसी policies बना रहे हैं, जो pro-people हों, Pro-growth हों, pro development हों! पॉलिसीज़ देश और देश के लोगों की जरूरत के हिसाब से होनी चाहिए न कि पॉलिसीज़ बनाकर देश को उनके हिसाब से चलने को मजबूर होना पड़े! मैं आपको एक और Interesting उदाहरण देना चाहता हूं। कुछ साल पहले तक हमारे यहाँ देश का नक्शा बनाना भी गैर-कानूनी था, मैप बनाए तो गैर कानूनी था, आप जेल चले जाएंगे। बिना परमिशन के आप देश में मैपिंग का काम भी नहीं कर सकते थे। आप सोचिए, विदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए भारत के किसी भी कोने को मैप कर सकती थी, लेकिन भारत में भारतीयों पर भारत का मैप बनाने पर पाबंदी लगी हुई थी।

साथियों,

आज टेक्नोलॉजी के इस दौर में, इस एक पाबंदी से कितने स्टार्टअप्स की हत्या हो सकती थी! कितने ideas implement होने से वंचित रह सकते थे! हमने इस व्यवस्था को भी बदला। हमने Geospatial डेटा का Deregulation किया और आज Geospatial डेटा कितने ही स्टार्टअप्स का आधार बन रहा है।

साथियों,

आज आप लगातार ड्रोन्स की उपयोगिता बढ़ते हुए देख रहे हैं। एग्रीकल्चर में, डिफेंस में, डिलिवरी में, शूटिंग में, कंटेंट क्रिएशन में, ये सब संभव ही नहीं होता, अगर सरकार ने इससे जुड़े नियमों में Reform नहीं किए होते। पहले देश में ड्रोन फ्लाइंग पूरी तरह नियमों में, बंधनों में जकड़ी हुई थी। हमने उसे बंधनों से आजाद किया, और आज भारत की ड्रोन इंडस्ट्री, एक अभूतपूर्व उड़ान के साथ आगे बढ़ रही है।

साथियों,

पहले border areas को लेकर सरकारों की सोच थी कि बॉर्डर पर roads और infrastructure बढ़ेगा, तो उसका फायदा दुश्मन भी उठा सकता है। हमने इस सोच को बदला। हमने कहा, Border infrastructure कमजोरी नहीं, देश की ताकत है। और इसीलिए आज border areas में roads, bridges और tunnels का network तेजी से बढ़ रहा है। सिर्फ 2024 और 2025 में ही, BRO के 250 infrastructure projects देश को समर्पित किए गए हैं। सोच बदली, तो border infrastructure की तस्वीर भी बदल गई।

साथियों,

एक उदाहरण न्यूक्लियर रिफॉर्म्स का भी है। एक ऐसे समय में, जब विकास पूरी तरह से energy dependent है, बंदिशों और प्रतिबंधों के कारण, देश अपने न्यूक्लियर potential का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था। हमने शांति बिल के जरिए इसमें भी बड़ा रिफॉर्म किया है। आज भारत में न्यूक्लियर एनर्जी में प्राइवेट सेक्टर के लिए रास्ता खुल चुका है। इसी तरह, हमने एक बड़ा पॉलिसी रिफॉर्म डिफेंस सेक्टर में भी किया। 200 साल के पहले जो व्यवस्था चली आ रही थी, उसे बदलकर हमने 40 से ज्यादा ordnance फैक्ट्रीज़ को मर्ज करके 7 फैक्ट्रीज़ बना दी। और उसका परिणाम हमें देखने को मिल रहा है। आज भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भी आत्मनिर्भर बन रहा है, और 2014 की तुलना में, हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट 55 गुना बढ़ा है। और इसलिए, कई बार रिफॉर्म्स हमारे जीवन में इस तरह घुल-मिल जाते हैं कि हमारा उनकी तरफ ध्यान ही नहीं जाता। आप सोचिए, आपका कोई सामान्य दिन आज कैसे बीतता है। आप सुबह उठते हैं, फोन पर घर का सामान ऑर्डर कर देते हैं, और जब तक ऑफिस के लिए रेडी होते हैं, वो सारा सामान आपके घर आकर के पहुंच जाता है। आपकी गली के स्ट्रीट वेंडर से लेकर, आपकी गाड़ी के शो रूम तक, आपकी सारी पेमेंट्स, सिर्फ एक क्यूआर कोड स्कैन करके हो जाती है। अगर आपकी बेटी, किसी दूसरे शहर में पढ़ती है, तो आप फोन से उसे पैसे भेज सकते हैं, और वो पैसा, कुछ सेकंड्स में उसके पास भी पहुंच जाता है। कई बार तो बिटिया क्यूआर ही शेयर कर देती है कि ‘पापा-मां मैंने ये ड्रेस ले ली है, इसकी पेमेंट कर दीजिए, और आप उसकी शॉपिंग अपने घर बैठे-बैठे करवा देते हैं। ये चीजें Remarkable हैं, लेकिन अब ये कोई भारत के लोगों को कम से कम हैरानी नहीं होती, बाहर के लोग आते हैं, उनको आश्चर्य होता है, अच्छा ऐसे होता है। भारत के लोगों का रूटीन हो गया है। ये भारत के सामान्य मानवी के जीवन का हिस्सा बन चुका है। आप सोचिए, 2014 से पहले ऐसी कितनी ही बातें क्या पॉसिबल थीं?

साथियों,

भारत ने बीते 10-12 सालों में Ease of Living से जुड़े जो रिफॉर्म्स किए हैं, उसकी वजह से लोगों का, खासतौर पर हमारे मिडिल क्लास का जो जीवन बदला है, वो दुनिया के कई विकसित देशों में आज भी एक सपना ही है।

साथियों,

आज दुनिया का सबसे सस्ता डेटा भारत में है, हम सस्ते और अच्छे स्मार्टफोन्स बना रहे हैं। अभी सत्या ने उसका वर्णन किया। भारत दुनिया के fastest 5G rollouts करने वाले देशों में से एक है। हमने आधार को बैंकिंग, मोबाइल कनेक्टिविटी और सर्विसेज से जोड़कर, ई-के.वाई.सी और Digital Authentication जैसी सर्विसेज को पॉसिबल किया है। आज आपको अगर बैंक अकाउंट खोलना है, तो उसके लिए बैंक जाने तक की जरूरत नहीं है। सरकार ने बैंक को ही, आपके पास पहुंचा दिया है। आज चाहे कोई बिल जमा करना हो, कोई टिकट करानी हो, किसी सरकारी दफ्तर में जाने की जरूरत नहीं पड़ती, ये सारा काम ऑनलाइन हो जाता है। इनकम टैक्स की फाइलिंग का काम आसान हुआ है। ऐसी व्यवस्था बनी है कि फॉर्म में मैक्सिमम जानकारियां पहले से भरी होती हैं। आप ये इन्फॉर्मेशन वेरिफाई करते हैं, कुछ जोड़ना है तो जोड़ देते हैं, और सबमिट करते हैं, आपका काम पूरा हो जाता है। पहले जो रिफंड आने में महीनों लगते थे, अब वो भी कुछ ही दिनों में आ जाता है।

साथियों,

आज ई-संजीवनी की मदद से, शायद इसकी चर्चा अभी बहुत कम होती है, ई-संजीवनी की मदद से, गांव के दूर दराज के लोग भी, कहीं से भी डॉक्टर्स के साथ सीधी अपनी चर्चा करके अपने उपचार का रास्ता लेते हैं। और इससे जिन लोगों को अस्पताल जाने के लिए कई किलोमीटर का सफर करना पड़ता था, आज डॉक्टर उनके घर पर, उनकी स्क्रीन पर उपलब्ध है। अब तक ये आंकड़ा भी आपको जरूर आश्चर्य करेगा। यानी भारत ने टेक्नोलॉजी को किस प्रकार से अडाप्ट किया है, सामान्य मानवीय के जीवन को कैसे सरल किया है। अब तक ईं-संजीवनी के तहत करीब-करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशंस हो चुकी हैं।

साथियों,

आज भारत में Travel Experience बदल रहा है, भारत के नागरिकों की यात्राएं पूरी तरह बदल गई हैं। यहां इस हॉल में ऐसा व्यक्ति खोजना मुश्किल होगा, जिसने एयरपोर्ट पर डिजी यात्रा का इस्तेमाल ना किया हो। ऐसे ही आजकल बहुत सारा काम Seamless तरीके से हो रहा है। हाइवे पर फास्ट टैग चल रहे हैं, ताकि आप बिना रुके टोल देकर आगे बढ़ सकें। Ease of Living का सही अर्थ यही है। समय की बचत हो रही है, जीवन आसान हो रहा है, और करोड़ों लोग अपनी प्रगति पर फोकस कर पा रहे हैं।

साथियों,

Politics में अक्सर वही फैसले headlines बनते हैं, जिनका असर आज दिखाई दे, यानी उसकी उमर 24 घंटे हो। पहले की सरकारों ने इलेक्शन सामने देख कर भी घोषणाएं करने का फॉर्मूला अपनाया। लेकिन ऐसी घोषणाओं से देश नहीं बदला। देश बदलने वाले फैसले वो होते हैं, जिनका प्रभाव जमीन पर दिखे, जो वर्तमान और भविष्य, दोनों को ध्यान में रखकर के लिए गए होने चाहिए।

साथियों,

पीएम कुसुम योजना और पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना इसका बहुत बड़ा यूनीक Example है। कुसुम योजना से किसानों को बिजली की चिंता से मुक्ति मिली है। और सूर्यघर योजना से मिडिल क्लास को बहुत फायदा हुआ है।

साथियों,

मैं ये जानता हूं कि अगर मैंने ये अनाउंस कर दिया होता कि आज से लाखों-लाख परिवारों के लिए बिजली मुफ्त है, तो सारा मीडिया, सारी स्क्रीन्स, सारे न्यूजपेपर्स, बड़ी-बड़ी हेडलाइन बनाकर के खबर दे देते कि मोदी जी ने आज अनाउंस कर दिया है। लेकिन हमने कुछ दूसरे अप्रोच से काम शुरू किया। हमने हर घर की छत पर एक सूरज उगाने की ठान ली, और आज देश के 50 लाख से ज्यादा परिवार, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े हैं। सरकार ने 22 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा इन परिवारों को दिए हैं, ये सोलर सिस्टम लगाने के लिए, ताकि उनकी छत पर सोलर प्लांट लगाकर सोलर पावर पैदा की जा सके। अब ये परिवार, एक्स्ट्रा बिजली को, बिजली ग्रिड में बेचकर, पैसे भी कमा रहे हैं। खुद का बिल तो जीरो हुआ, कमाई भी होने लगी। इस योजना से लोगों के सपनों को भी विस्तार मिल रहा है। बिजली बिल कम हुआ है, तो अब घर में फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन, टीवी जैसी चीजें लोग खरीदकर रखने लगे हैं। अब ये डर नहीं होता कि बिजली कटौती की वजह से दूध फट जाएगा, अब चिंता नहीं रहती है। अब स्कूल जाने वाले बच्चे रातभर चैन से सो पाते हैं। मैं फिर कहता हूं- इलेक्शन हो या ना हो, लेकिन ये सूर्यघर और उसकी रोशनी बनी रहेगी, इस प्लांट का फायदा, सालों तक देश के परिवारों को होता रहेगा।

साथियों,

आने वाले समय में Ease of Living और Ease of Doing Business का और विस्तार होगा। देश के Youth के लिए, नारीशक्ति के लिए, Farmers के लिए, गरीब और Middle Class के लिए, हमारी सरकार लगातार काम करती रहेगी, हमारी Reform Express और अधिक गति से आगे बढ़ने वाली है। विकसित भारत का लक्ष्य पूरा करने के लिए, हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहेंगे। और मैं, मेरे लिए भारत का future अगर सुनिश्चित हो गया ना, तो दुनिया के future में भी स्थिरता लाने का बहुत बड़ा काम इसी धरती से होने वाला है। इस आत्मविश्वास के साथ भारत जितना स्टेबल होगा, भारत का future जितना सुरक्षित होगा, विश्व को सुरक्षत्व का एहसास देने की ताकत यहीं से पैदा होने वाली है। इस सामर्थ्य के साथ, इसी संकल्प के साथ, मैं एक बार फिर, आज के इस कार्यक्रम में मुझे आमंत्रित करने के लिए, Economic Times की पूरी टीम का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। वन्दे मातरम् !