प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लोकमान्य तिलक को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। श्री मोदी ने कहा है कि वे एक अग्रणी नेता थे जिन्होंने अटूट विश्वास के साथ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की भावना को प्रज्वलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा:

"लोकमान्य तिलक को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। वे एक अग्रणी नेता थे जिन्होंने अटूट विश्वास के साथ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की भावना को प्रज्वलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे एक उत्कृष्ट विचारक भी थे जो ज्ञान की शक्ति और दूसरों की सेवा में विश्वास करते थे।"

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प्रधानमंत्री ने ज्ञान के सार को आत्मसात करने पर केंद्रित संस्कृत सुभाषित साझा किया
January 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जो ज्ञान की विशालता के बीच केवल उसके सार पर ध्यान केंद्रित करने की शाश्वत बुद्धिमत्ता पर जोर देता है।

संस्कृत श्लोक-

अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च।
यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥

यह सुभाषित इस भाव को व्यक्त करता है कि यद्यपि ज्ञान प्राप्ति के लिए असंख्य शास्त्र और विविध विद्याएँ उपलब्ध हैं, किंतु मानव जीवन समय की सीमाओं और अनेक बाधाओं से बंधा हुआ है। अतः, मनुष्य को उस हंस के समान बनना चाहिए जो दूध और पानी के मिश्रण में से केवल दूध को अलग करने की क्षमता रखता है अर्थात, हमें भी अनंत सूचनाओं के बीच से केवल उनके सार—उस परम सत्य को पहचानना और ग्रहण करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा:

“अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च।

यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥”