स्विस कन्फेडरेशन के अध्‍यक्ष एआई इम्पैक्ट समिट, 2026 में हिस्सा लेने के लिए 19-20 फरवरी 2026 को दो दिन के भारत दौरे पर हैं।

दोनों नेताओं ने भारत और स्विट्जरलैंड के बीच दोस्ताना और विभिन्न रिश्तों को मजबूत किया। उन्होंने व्‍यापार और निवेश, विज्ञान और टेक्नोलॉजी, नवोन्‍मेष, कौशल विकास, सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संबंधों सहित दोनों देशों के रिश्तों के दायरे की समीक्षा की। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए।

दोनों नेताओं ने आर्थिक रिश्तों के गहरे होने का स्वागत किया और हाल ही में हुए ऐतिहासिक इंडिया-यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (ईएफटीए) के बीच संपन्‍न व्‍यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) को लागू करने से उत्‍पन्‍न सकारात्‍मक रफ़्तार पर ज़ोर दिया। स्विट्जरलैंड इसका एक अहम सदस्य है। टीईपीए में दोनों देशों के बीच व्‍यापार और निवेश प्रवाह बढ़ाए जाने की अपार संभावना है।

दोनों पक्ष नवोन्‍मेष से होने वाली वृद्धि, संयुक्‍त अनुसंधान, सर्वश्रेष्‍ठ कार्य प्रणाली को साझा करने और प्रशिक्षण एवं कौशल विकास पहल के ज़रिए क्षमता निर्माण में सहयोग को और मज़बूत करने पर सहमत हुए। बैठक भारत-स्विट्ज़रलैंड साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की समान कल्‍पना के साथ संपन्‍न हुई।

प्रधानमंत्री ने अगले एआई समिट की मेजबानी के लिए स्विट्ज़रलैंड की पहल का स्वागत किया, जिसके बाद संयुक्‍त अरब अमीरात इसकी मेजबानी करेगा।

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प्रधानमंत्री ने मातृभूमि की पवित्र विरासत और विश्व कल्याण की प्रार्थना पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
May 21, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत में एक सुभाषितम् साझा करते हुए कहा कि हमारी मातृभूमि आध्यात्मिक साधना और उपासना के साथ-साथ साहस, शक्ति और सर्वकल्याण की पवित्र भूमि रही है। श्री मोदी ने कामना की कि महान विरासत और प्राचीन संस्कृति की यह पवित्र भूमि सदा सभी को सुख और समृद्धि से परिपूर्ण रखे।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया:

"हमारी मातृभूमि साधना और उपासना के साथ-साथ साहस, शक्ति और सर्व-कल्याण की पुण्यभूमि रही है। महान विरासत और प्राचीन संस्कृति की यह पावन धरती हर किसी को सदैव सुख-समृद्धि से परिपूर्ण रखे, यही कामना है।

यस्यां पूर्वे पूर्वजना विचक्रिरे यस्यां देवा असुरानभ्यवर्तयन्।

गवामश्वानां वयसश्च विष्ठा भगं वर्चः पृथिवी नो दधातु।।"

जिस भूमि पर हमारे पूर्वजों ने महान और कल्याणकारी कार्य किए और जिस भूमि पर देवताओं ने अन्यायपूर्ण शक्तियों को पराजित किया, वह पशुधन और शक्ति से परिपूर्ण मातृभूमि हमें विशाल स्थान और समृद्धि प्रदान करे।