सूरत के विकास को गति देने के लिए आज सड़क, बिजली और इंडस्ट्रियल सेक्टर से जुड़े प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है जो विकास को गति देंगे और लोगों के लिए 'ईज ऑफ लिविंग' को अधिक सुविधाजनक और बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे: प्रधानमंत्री
 प्रधानमंत्री जी ने कहा कि आज भारत 'प्रकृति के साथ सामंजस्य में प्रगति' के सिद्धांत से निर्देशित होकर विकास की ओर अग्रसर है
बीते 12 वर्षों से देश में चल रहा 'वेस्ट टू वेल्थ' जन आंदोलन शहरों की स्वच्छता में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है और हमारे शहरी क्षेत्रों को ग्रीन और क्लीन बनाए रखने में मदद कर रहा है: प्रधानमंत्री
अभूतपूर्व वैश्विक चुनौतियों के बीच भी देश 140 करोड़ भारतीयों के साझा प्रयासों और सहभागिता के बल पर लगातार आगे बढ़ रहा है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज गुजरात के सूरत में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री ने एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए गुजरात की जनता को उनके अटूट समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों के बाद मैं पहली बार सूरत आया हूं। सूरत से मैं पूरे गुजरात की जनता को सलाम करता हूं और बधाई देता हूं।

कार्यक्रम में उपस्थित सूरत और नवसारी के अनेक निर्वाचित प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने सभी हितधारकों को याद दिलाया कि गुजरात की जनता ने सेवा भावना का समर्थन किया है। इस विशाल विजय को सेवा के मिशन को और आगे बढ़ाने का जनादेश बताते हुए उन्होंने सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों से और भी अधिक मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने इस दृष्टिकोण को साकार करने में सभी निर्वाचित जन प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। श्री मोदी ने कहा कि हमारा संकल्प एक विकसित गुजरात और एक विकसित भारत का निर्माण करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संकल्प देश के प्रत्येक गांव, प्रत्येक जिले, प्रत्येक शहर के विकास से ही पूरा होगा।

पर्यावरण दिवस के अवसर पर इस कार्यक्रम के शुभ संयोग की ओर ध्यान दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने आज 5 जून को देश के सबसे स्वच्छ शहरों में से एक सूरत में उपस्थित होने पर गर्व व्यक्त किया। एक समय प्लेग महामारी से प्रभावित शहर से आज स्वच्छता के लिए पहचाने जाने वाले सूरत के बदलाव को याद करते हुए उन्होंने नागरिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और जन प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों द्वारा पिछले ढाई दशकों में किए गए निरंतर प्रयासों की सराहना की। श्री मोदी ने कहा कि ेयह अत्यंत गर्व की बात है कि प्लेग महामारी से प्रभावित यही सूरत आज स्वच्छता के लिए पहचाना जा रहा है

 

हरित भविष्य की ओर वैश्विक बदलाव में गुजरात की अग्रणी भूमिका का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक चारंका सोलर पार्क के साथ-साथ 2009 में भारत के पहले जलवायु परिवर्तन विभाग की स्थापना में राज्य की दूरदर्शिता को याद किया। उन्होंने विस्तार से बताया कि सूरत किस प्रकार अपनी नवोन्मेषी 'चक्रीय जल अर्थव्यवस्था', औद्योगिक उपयोग के लिए अपशिष्ट जल के उपचार और पिछले बारह वर्षों के राष्ट्रव्यापी 'अपशिष्ट से धन' आंदोलन के माध्यम से प्रकृति के साथ प्रगति के संतुलन के राष्ट्रीय मंत्र का पूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है। भविष्य में पेयजल और जल निकासी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्होंने तापी बैराज परियोजना की मंजूरी का उल्लेख किया और साथ ही सूरत के तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में विस्तार, बढ़ते मेट्रो नेटवर्क और हजीरा औद्योगिक क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होने वाले आगामी हरित इस्पात उत्पादन की भविष्यवाणी की। श्री मोदी ने कहा कि हमारी बसों को इलेक्ट्रिक बनाने से लेकर हरित ऊर्जा का उपयोग करके इस्पात उत्पादन तक, ये सभी कदम सूरत को एक सच्चे हरित शहर के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान को और मजबूत करेंगे।

प्रधानमंत्री ने महामारी, वैश्विक संघर्षों और अस्थिर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं सहित अभूतपूर्व चुनौतियों को संबोधित करते हुए, जिसे उन्होंने 'आपदाओं का दशक' कहा, 140 करोड़ भारतीयों की इन विशाल वैश्विक झटकों का दृढ़ता से सामना करने के लिए प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता में गुजरात के भारी योगदान की सराहना करते हुए कहा कि राज्य देश की 250 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का पांचवां हिस्सा (50 गीगावाट) उत्पादन करता है और हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया जैसे उभरते क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। पिछले बारह वर्षों में निर्मित ऊर्जा क्षमताओं के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने सौर ऊर्जा, इथेनॉल मिश्रण, रेलवे विद्युतीकरण, परमाणु ऊर्जा, आधुनिक विद्युत पारेषण नेटवर्क और गैस पाइपलाइनों और बंदरगाह भंडारण क्षमताओं के व्यापक विस्तार में किए गए ऐतिहासिक निवेशों का उल्लेख किया। श्री मोदी ने कहा कि जारी वैश्विक संकट दर्शाता है कि ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता कितनी आवश्यक है और पिछले बारह वर्षों में देश द्वारा निर्मित विशाल क्षमता आज अत्यंत महत्वपूर्ण है।"

कार्यक्रम से पहले हजीरा की अपनी यात्रा पर विचार करते हुए प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र को केवल एक औद्योगिक क्षेत्र नहीं बल्कि ऊर्जा, इस्पात, रक्षा उत्पादन और वैश्विक समुद्री व्यापार को समाहित करने वाले एक व्यापक, समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में वर्णित किया। उन्होंने इस समुद्री-औद्योगिक केंद्र को 'आत्मनिर्भर भारत' पहल का जीवंत प्रमाण बताया और देश के उन निराशावादी गुटों की कड़ी निंदा की जो आत्मनिर्भरता अभियान का उपहास करते हैं और जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से देश को विदेशी संस्थाओं पर निर्भर रखा है। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा कि जो लोग लगातार देश के संकल्प को कमतर आंकते हैं वे यह भूल जाते हैं कि दूसरों पर निर्भर देश कभी भी विकास की उन ऊंचाइयों को प्राप्त नहीं कर सकता जिनका वह हकदार है। 

आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक कनेक्टिविटी पर सरकार के रुख को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने समर्पित माल गलियारा, बुलेट ट्रेन और वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के नव-उद्घाटित खंड जैसी मेगा परियोजनाओं को औद्योगिक और व्यापारिक विकास के लिए महत्वपूर्ण उत्प्रेरक बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह अवसंरचना अभियान समावेशी है, जो दाहोद-बोदेली-वापी गलियारे जैसी पहलों के माध्यम से पहले से उपेक्षित आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। छोटा उदेपुर, नर्मदा, भरूच और तापी के आदिवासी क्षेत्रों में चार लेन के राजमार्ग बनाकर, सरकार यात्रा के समय और माल ढुलाई लागत को कम कर रही है तथा साथ ही स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और सपूतारा जैसे स्थलों पर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और पर्यटन तक अभूतपूर्व पहुंच प्रदान कर रही है। श्री मोदी ने कहा कि हमारे आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक कनेक्टिविटी लाकर, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उन्हें शिक्षा, चिकित्सा और बेहतर आय के अवसरों के लिए उत्कृष्ट सुविधाएं प्राप्त हों। 

सूरत में आधुनिक ईएसआईसी अस्पताल का उद्घाटन करते हुए, जो अन्य राज्यों से आए श्रमिकों और प्रवासी परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करेगा, प्रधानमंत्री ने इन विकास उपलब्धियों को सरकार पर राष्ट्र के अटूट चुनावी विश्वास से जोड़ा। अपने संबोधन का समापन करते हुए उन्होंने भारतीय नागरिकों के असीम आशावाद की सराहना की और एक पूर्ण विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए जनता की सामूहिक शक्ति पर पूर्ण विश्वास व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा कि भारत अविश्वसनीय आकांक्षाओं और असीम आशावाद से परिपूर्ण देश है और जब राष्ट्र की पूरी शक्ति पूरी तरह से दृढ़ संकल्पित होती है, तो ऐसा कोई लक्ष्य नहीं है जिसे हम प्राप्त नहीं कर सकते। 

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प्रधानमंत्री ने सिक्किम के नामची में सुरंग ढहने से हुई जानमाल की हानि पर दुख व्यक्त किया
July 21, 2026
प्रधानमंत्री ने पीएमएनआरएफ से अनुग्रह राशि की घोषणा की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सिक्किम के नामची में निर्माणाधीन सुरंग के ढहने से हुई जानमाल की हानि पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि प्रत्येक मृतक के परिजनों को पीएमएनआरएफ से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। श्री मोदी ने कहा कि घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में साझा किया:

सिक्किम के नामची में निर्माणाधीन सुरंग के ढहने से हुई जानमाल की हानि से मैं व्यथित हूं। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। मैं कामना करता हूं कि घायल व्यक्ति शीघ्र स्वस्थ हों।

"प्रत्येक मृतक के परिजनों को पीएमएनआरएफ से 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगीः पीएम @narendramodi"