भारत में, यह दौर हमारे पूरबी राज्यों का है : प्रधानमंत्री
हमारा संकल्प है कि हम भारत को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करके रहेंगे : प्रधानमंत्री
जो पिछड़े हैं, वे हमारी प्राथमिकता हैं, कैबिनेट ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को स्‍वीकृति दी है जिसके तहत कृषि की दृष्टि से सबसे पिछड़े 100 जिलों की पहचान की जाएगी : प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज बिहार के मोतिहारी में 7,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पित किया। सावन के पवित्र महीने में बाबा सोमेश्वरनाथ के चरणों में शीश झुकाते हुए प्रधानमंत्री ने बिहार के सभी निवासियों के जीवन में सुख और समृद्धि की कामना की और आशीर्वाद लिया। श्री मोदी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि यह चम्‍पारण की भूमि है, एक ऐसी धरती जिसने इतिहास रचा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान, इसी भूमि ने महात्मा गांधी को नई दिशा दी थी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इसी भूमि से मिली प्रेरणा अब बिहार के नए भविष्य को आकार देगी। उन्होंने इन विकास पहलों के लिए उपस्थित सभी व्‍यक्तियों और बिहार के लोगों को बधाई दी।

श्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी तेज़ी से वैश्विक प्रगति का साक्षी बन रही है। उन्होंने कहा कि जो प्रभुत्व कभी केवल पश्चिमी देशों का था, वह अब पूर्वी देशों द्वारा साझा किया जा रहा है, जिनकी भागीदारी और प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पूर्वी देश अब विकास की नई गति प्राप्त कर रहे हैं। इसी संदर्भ में, प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह पूर्वी देश वैश्विक स्तर पर प्रगति कर रहे हैं, उसी तरह भारत में भी पूर्वी राज्यों का युग है। उन्होंने सरकार के इस संकल्प की पुष्टि की कि आने वाले समय में पूर्व में मोतिहारी का स्‍थान पश्चिम में मुंबई की तरह ही प्रमुख स्थान बन जाएगा। श्री मोदी ने गया में गुरुग्राम जैसे समान अवसर, पटना में पुणे जैसा औद्योगिक विकास और संथाल परगना में सूरत जैसा विकास सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि जलपाईगुड़ी और जाजपुर में पर्यटन जयपुर की तरह नए कीर्तिमान स्थापित करेगा और बीरभूम के लोग बेंगलुरु के लोगों की तरह प्रगति करेंगे।

श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि पूर्वी भारत को आगे बढ़ाने के लिए, बिहार को एक विकसित राज्य में रूपांतरित होना होगा। उन्‍होंने कहा कि बिहार में आज तीव्र प्रगति संभव है, क्योंकि केंद्र और राज्य दोनों में बिहार के विकास के लिए प्रतिबद्ध सरकारें हैं। उन्होंने इस तथ्‍य के समर्थन में अंतर को दर्शाने के लिए आंकड़ों का हवाला दिया : पिछली सरकारों के 10 वर्षों के दौरान जब वे केंद्र में सत्ता में थे, बिहार को केवल लगभग 2 लाख करोड़ रुपये मिले। उन्‍होंने कहा कि यह श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार के विरूद्ध राजनीतिक प्रतिशोध का एक रूप था। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 में सत्ता में आने के बाद, उनकी सरकार ने बिहार के विरूद्ध प्रतिशोध की इस राजनीति को समाप्त कर दिया। उन्‍होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में उनके शासन में, बिहार के विकास के लिए लगभग 9 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि यह पिछली सरकार के तहत प्रदान की गई राशि से चार गुना अधिक है।

दो दशक पहले बिहार की निराशा को समझने में आज की पीढ़ी के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि पिछली सरकारों के शासन में विकास अवरुद्ध था और निर्धन वर्गों के लिए निर्धारित धन का उन तक पहुंचना लगभग असंभव था। उन्होंने तत्कालीन नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि उनका ध्यान केवल गरीबों के धन को लूटने पर केंद्रित था। प्रधानमंत्री ने बिहार के लोगों के दृढ़ निश्चय की प्रशंसा की और इसे एक ऐसी भूमि बताया जहाँ असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। उन्होंने बिहार को पिछली सरकारों की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए जनता की सराहना की, जिससे कल्याणकारी योजनाओं को गरीबों तक सीधे पहुंचाया जा सका। श्री मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले 11 वर्षों में, देश भर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4 करोड़ से अधिक घर बनाए गए हैं, जिनमें से लगभग 60 लाख अकेले बिहार में बने हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा नॉर्वे, न्यूज़ीलैंड और सिंगापुर जैसे देशों की कुल जनसंख्या से भी अधिक है। श्री मोदी ने कहा कि अकेले मोतिहारी ज़िले में ही लगभग 3 लाख परिवारों को पक्के घर मिले हैं और यह संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। इस क्षेत्र के 12,000 से अधिक परिवारों को आज उनके नए घरों की चाबियां मिल गई हैं। इसके अतिरिक्‍त, 40,000 से अधिक निर्धन परिवारों को पक्के घर बनाने के लिए उनके बैंक खातों में धनराशि प्राप्त हुई है, जिनमें से अधिकतर दलित, महादलित और पिछड़े समुदायों से हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के शासनकाल में, गरीबों के लिए ऐसे आवास प्राप्त करना अकल्पनीय था। उन्होंने याद किया कि उनके कार्यकाल के दौरान, इस चिंता में कि कहीं भूमिधारकों को निशाना न बनाया जाए, लोग अपने घरों की रंगाई-पुताई से भी डरते थे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पूर्ववर्ती सत्तारूढ़ दल के नेता लोगों को कभी भी पक्के घर नहीं दे सकते थे।

बिहार की प्रगति का श्रेय राज्‍य की माताओं और बहनों की शक्ति तथा दृढ़ संकल्प को देते हुए, श्री मोदी ने कहा कि बिहार की महिलाएं अपनी सरकार द्वारा उठाए गए हर कदम के महत्व को भली-भांति समझती हैं। उन्होंने कार्यक्रम में महिलाओं की भारी उपस्थिति की सराहना की और उन दिनों का स्‍मरण किया जब उन्हें 10 रुपए भी छुपाने पड़ते थे, बैंक खातों तक उनकी पहुंच नहीं थी और उन्हें बैंकों में प्रवेश नहीं दिया जाता था। प्रधानमंत्री ने निर्धनों के प्रति सम्मान प्रदर्शित करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने बैंकों से प्रश्‍न किया था कि वंचितों के लिए उनके दरवाजे क्यों बंद हैं। उन्होंने जन-धन खाते खोलने के लिए शुरू किए गए व्यापक अभियान का उल्लेख किया, जिससे महिलाओं को बहुत लाभ हुआ है। बिहार में अब लगभग 3.5 करोड़ महिलाओं के जन-धन खाते हैं। श्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकारी योजनाओं का धन अब सीधे इन खातों में स्थानांतरित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार ने हाल ही में बुजुर्गों, दिव्यांगों और विधवा माताओं के लिए मासिक पेंशन 400 रुपए से बढ़ाकर 1,100 रुपये कर दी है। प्रधानमंत्री ने बताया कि यह धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले डेढ़ महीने में ही बिहार में 24,000 से अधिक स्वयं सहायता समूहों को 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्राप्त हुई है, जिसका श्रेय माताओं और बहनों के जन धन खातों द्वारा प्रदान की गई वित्तीय सशक्तीकरण को दिया जा सकता है।

महिला सशक्तिकरण पहलों के प्रभावशाली परिणामों को रेखांकित करते हुए और देशभर तथा बिहार में 'लखपति दीदियों' की बढ़ती संख्या का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय लक्ष्य 3 करोड़ लखपति दीदियां बनाना है और अब तक 1.5 करोड़ महिलाओं ने यह उपलब्धि अर्जित कर ली है। उन्होंने कहा कि बिहार में 20 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, और अकेले चम्‍पारण में 80,000 से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर इस मुकाम तक पहुंची हैं। श्री मोदी ने नारी शक्ति को मज़बूत करने के उद्देश्य से सामुदायिक निवेश कोष के रूप में 400 करोड़ रुपये जारी करने की घोषणा की। उन्होंने श्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई "जीविका दीदी" योजना की प्रशंसा की, जिसने बिहार की लाखों महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने का मार्ग प्रशस्त किया है।

श्री मोदी ने अपनी पार्टी के विजन 'बिहार की प्रगति भारत की प्रगति के लिए आवश्यक है' को दोहराते हुए कहा कि बिहार तभी आगे बढ़ेगा, जब उसके युवा आगे बढ़ेंगे। उन्होंने एक समृद्ध बिहार और प्रत्येक युवा के लिए रोज़गार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में बिहार में ही रोज़गार के अवसर पैदा करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं और उन्होंने लाखों युवाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ सरकारी पदों पर नियुक्त करने के लिए श्री नीतीश कुमार की सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि बिहार के युवाओं के लिए रोज़गार बढ़ाने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री ने नए संकल्प लिए हैं और आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार इन प्रयासों में कंधे से कंधा मिलाकर पूरा सहयोग कर रही है।

प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि केंद्र सरकार ने हाल ही में निजी क्षेत्र में पहली बार रोजगार की आकांक्षा रखने वालों की सहायता के लिए एक बड़ी योजना को स्‍वीकृति दी है। इस योजना के तहत, किसी निजी कंपनी में पहली नियुक्ति पाने वाले युवाओं को केंद्र सरकार द्वारा 15,000 रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह योजना 1 अगस्त से लागू होगी और इस पर केंद्र द्वारा एक लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएँगे। उन्होंने कहा कि इस पहल से बिहार के युवाओं को अत्‍यधिक लाभ होगा। श्री मोदी ने मुद्रा योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से बिहार में स्वरोज़गार को बढ़ावा देने के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों में ही बिहार में मुद्रा योजना के तहत लाखों ऋण वितरित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि विशेष रूप से चम्‍पारण में 60,000 युवाओं को अपने स्वरोज़गार उपक्रमों को समर्थन देने के लिए मुद्रा ऋण प्राप्‍त हुए हैं।

श्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि दूसरे दलों के नेता कभी रोज़गार नहीं दे सकते, खासकर वे जो रोज़गार के नाम पर लोगों की ज़मीन हड़प लेते हैं। उन्‍होंने जनता से लालटेन के ज़माने और नई उम्मीदों से जगमगाते आज के बिहार के बीच के अंतर को याद रखने का आग्रह किया। उन्होंने बिहार की यात्रा में आए इस रूपांतरण का श्रेय गठबंधन सरकार को दिया और रेखांकित किया कि गठबंधन के प्रति बिहार का संकल्प दृढ़ और अटूट है।

प्रधानमंत्री ने हाल के वर्षों में नक्सलवाद के विरुद्ध की गई निर्णायक कार्रवाई पर प्रकाश डाला, जिससे बिहार के युवाओं को अत्‍यधिक लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि चम्‍पारण, औरंगाबाद, गया और जमुई जैसे ज़िले, जो कभी माओवादी प्रभाव से घिरे थे, अब वहां उग्रवाद में कमी दिख रही है। उन्होंने कहा कि कभी माओवादी हिंसा से घिरे इलाकों में, युवा अब बड़े सपने देख रहे हैं। उन्होंने भारत को नक्सलवाद के शिकंजे से पूरी तरह मुक्त कराने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

श्री मोदी ने कहा कि यह एक नया भारत है - एक ऐसा भारत जो शत्रुओं को दंड देने में कोई कसर नहीं छोड़ता, ज़मीन और आसमान, दोनों ओर से सैन्‍य प्रहार करता है। उन्होंने याद दिलाया कि बिहार की धरती से ही उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि आज उस ऑपरेशन की सफलता पूरी दुनिया देख रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार में न तो क्षमता की कमी है और न ही संसाधनों की और आज बिहार के संसाधन ही उसकी प्रगति के माध्यम बन रहे हैं। उन्होंने अपनी सरकार के प्रयासों के बाद मखाना की कीमतों में हुई वृद्धि का उल्‍लेख करते हुए, मखाना किसानों को बड़े बाज़ारों से जोड़ने को इसका श्रेय दिया। उन्होंने इस क्षेत्र को और अधिक सहयोग देने के लिए मखाना बोर्ड के गठन का भी उल्‍लेख किया। श्री मोदी ने बिहार की कृषि समृद्धि के उदाहरण के रूप में कई प्रमुख उत्पादों - केला, लीची, मिर्चा चावल, कतरनी चावल, ज़र्दालू आम और मघई पान - का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि ये और कई अन्य उत्पाद बिहार के किसानों और युवाओं को वैश्विक बाज़ारों से जोड़ेंगे।

किसानों की उपज और आय बढ़ाने को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए श्री मोदी ने कहा कि पीएम-किसान सम्मान निधि योजना के तहत, देश भर के किसानों को लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि अकेले मोतिहारी में ही 5 लाख से ज़्यादा किसानों को इस योजना के माध्‍यम से 1,500 करोड़ रुपये से अधिक राशि प्राप्‍त हुई।

प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि सरकार नारों या वादों तक सीमित नहीं है, बल्कि काम करके दिखाती है। उन्होंने कहा कि जब उनकी सरकार पिछड़े और अति पिछड़े समुदायों के लिए काम करने की बात कहती है, तो यह प्रतिबद्धता उसकी नीतियों और निर्णयों में भी प्रदर्शित होती है। उन्होंने कहा कि उनका मिशन स्पष्ट है : हर पिछड़े व्यक्ति को प्राथमिकता, चाहे वह पिछड़ा क्षेत्र हो या पिछड़ा वर्ग, वे सरकार की प्राथमिकताओं के केंद्र में हैं। श्री मोदी ने बताया कि दशकों से 110 से अधिक ज़िलों को पिछड़ा और उपेक्षित माना जाता रहा है और उनकी सरकार ने इन ज़िलों को आकांक्षी ज़िलों का दर्जा और उनके विकास को गति देकर उन्हें प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के सीमावर्ती गांवों को भी लंबे समय तक "अंतिम गांव" माना जाता रहा और उन्हें विकास के मामले में पीछे छोड़ दिया गया, लेकिन सरकार ने उन्हें "प्रथम गांव" के रूप में पुनर्परिभाषित किया और उनके विकास को प्राथमिकता दी। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ओबीसी समुदाय लंबे समय से ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने की मांग कर रहा था—इस मांग को उनकी गठबंधन सरकार ने पूरा किया। श्री मोदी ने जनजातीय समुदायों में सबसे हाशिए पर पड़े लोगों के लिए जनमन योजना शुरू करने का ज़िक्र किया, जिसके तहत उनके विकास के लिए 25,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने इसी विजन के साथ जुड़ी एक नई प्रमुख पहल की घोषणा की: प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, जिसे हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंज़ूरी दी है। इस योजना के तहत, कृषि की दृष्टि से समृद्ध लेकिन उत्पादकता और किसान आय में पिछड़े 100 ज़िलों की पहचान की जाएगी और उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इन ज़िलों के किसानों को इस योजना के तहत लक्षित सहायता मिलेगी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इससे देश भर के लगभग 1.75 करोड़ किसानों को प्रत्‍यक्ष लाभ होगा, जिनमें बिहार का एक बड़ा हिस्सा शामिल है।

श्री मोदी ने हज़ारों करोड़ रुपये की रेल और सड़क परियोजनाओं के और शिलान्यास का उल्‍लेख करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से बिहार के लोगों की सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने देश भर में चार अलग-अलग मार्गों पर अमृत भारत एक्सप्रेस को भी झंडी दिखाई। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि अमृत भारत एक्सप्रेस अब मोतिहारी-बापूधाम से सीधे दिल्ली के आनंद विहार तक चलेगी। उन्होंने बताया कि मोतिहारी रेलवे स्टेशन का आधुनिक सुविधाओं और नए रूप के साथ पुनर्विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दरभंगा-नरकटियागंज रेल लाइन के दोहरीकरण से इस मार्ग पर यात्रा सुविधा में अत्‍यधिक सुधार होगा।

भारत की आस्था और सांस्कृतिक विरासत के साथ चम्‍पारण के गहरे जुड़ाव पर ज़ोर देते हुए, श्री मोदी ने कहा कि राम-जानकी पथ मोतिहारी के सत्तरघाट, केसरिया, चकिया और मधुबन से होकर गुज़रेगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सीतामढ़ी से अयोध्या तक विकसित की जा रही नई रेल लाइन चंपारण के श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए अयोध्या आने में सक्षम बनाएगी। उन्होंने कहा कि इन पहलों से बिहार में कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और क्षेत्र में रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे।

प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि वे लंबे समय से गरीबों, दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के नाम पर राजनीति करती रही हैं और कहा कि वे न केवल समान अधिकारों से वंचित करती हैं, बल्कि अपने परिवार से बाहर के लोगों के प्रति सम्मान भी नहीं दिखातीं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बिहार आज उनके अहंकार को स्‍पष्‍ट दिख रहा है। बिहार को उनके दुर्भावनापूर्ण इरादों से बचाने का आह्वान करते हुए, श्री मोदी ने वर्तमान बिहार सरकार के समर्पित प्रयासों की सराहना की और सभी से सामूहिक रूप से बिहार के विकास को गति देने और एक उज्जवल भविष्य की ओर बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने एक नए बिहार के निर्माण के लिए साझा संकल्प का आह्वान करते हुए समापन किया और आज उद्घाटन की गई विकास परियोजनाओं के लिए लोगों को बधाई दी।

इस कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान, बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री श्री जीतन राम मांझी, श्री गिरिराज सिंह, श्री राजीव रंजन सिंह, श्री चिराग पासवान, श्री रामनाथ ठाकुर, श्री नित्यानंद राय, श्री सतीश चंद्र दुबे, डॉ. राज भूषण चौधरी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने रेल, सड़क, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सेक्‍टरों से संबंधित विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पित किया।

कनेक्टिविटी और अवसरंचना को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को कई रेल परियोजनाएं समर्पित कीं। इसमें समस्तीपुर-बछवाड़ा रेल लाइन के बीच स्वचालित सिग्नलिंग भी शामिल है, जिससे इस खंड पर कुशल रेल संचालन संभव होगा। दरभंगा-थलवारा और समस्तीपुर-रामभद्रपुर रेल लाइनों का दोहरीकरण, 580 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली दरभंगा-समस्तीपुर दोहरीकरण परियोजना का हिस्सा है, जिससे रेल संचालन की क्षमता बढ़ेगी और देरी कम होगी।

प्रधानमंत्री ने कई रेल परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया। रेल परियोजनाओं में पाटलिपुत्र में वंदे भारत ट्रेनों के रखरखाव हेतु बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है। भटनी-छपरा ग्रामीण रेल लाइन (114 किमी) पर स्वचालित सिग्नलिंग से सुव्यवस्थित रेल संचालन संभव होगा। भटनी-छपरा ग्रामीण खंड में ट्रैक्‍शन प्रणाली का उन्नयन, ट्रैक्‍शन प्रणाली के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाकर और ऊर्जा दक्षता को अनुकूलित करके ट्रेनों की गति बढ़ाई जाएगी। लगभग 4,080 करोड़ रुपये की लागत वाली दरभंगा-नरकटियागंज रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना से सेक्शनल क्षमता बढ़ेगी, अधिक यात्री और मालगाड़ियों का संचालन संभव होगा और उत्तर बिहार और देश के बाकी हिस्सों के बीच संपर्क मज़बूत होगा।

इस क्षेत्र में सड़क अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ने एनएच-319 के आरा बाईपास के चार-लेन निर्माण की आधारशिला रखी, जो आरा-मोहनिया एनएच-319 और पटना-बक्सर एनएच-922 को जोड़ेगा, जिससे निर्बाध संपर्क सुनिश्चित होगा और यात्रा का समय कम होगा।

प्रधानमंत्री ने 820 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से एनएच-319 के परारिया से मोहनिया तक चार-लेन खंड का भी उद्घाटन किया। यह एनएच-319 का वह हिस्सा है जो आरा शहर को एनएच-02 (स्वर्णिम चतुर्भुज) से जोड़ता है। इससे माल और यात्री आवागमन में सुधार होगा। इसके अतिरिक्‍त, एनएच-333सी पर सरवन से चकाई तक पक्की सड़क के साथ दो-लेन का निर्माण भी किया गया है, जो माल और लोगों की आवाजाही को सुगम बनाएगा और बिहार और झारखंड के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करेगा।

प्रधानमंत्री ने आईटी/आईटीईएस/ईएसडीएम उद्योग और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए दरभंगा में नए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) और पटना में एसटीपीआई की अत्याधुनिक इनक्यूबेशन सुविधा का उद्घाटन किया। ये सुविधाएं आईटी सॉफ्टवेयर और सेवा निर्यात को बढ़ावा देने में मदद करेंगी। यह नवोदित उद्यमियों के लिए तकनीकी स्टार्टअप इकोसिस्‍टम का पोषण भी करेगी और नवोन्‍मेषण, आईपीआर और उत्पाद विकास को प्रोत्साहित करेगी।

बिहार में मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत स्वीकृत मत्स्य विकास परियोजनाओं की एक श्रृंखला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर बिहार के विभिन्न ज़िलों में नई मत्स्य पालन हैचरी, बायोफ्लोक इकाइयां, सजावटी मछली पालन, एकीकृत जलीय कृषि इकाइयां और मछली चारा मिलों सहित आधुनिक मत्स्य पालन अवसंरचना का शुभारंभ होगा। जलीय कृषि परियोजनाएं रोज़गार के अवसर पैदा करने, मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, उद्यमिता को बढ़ावा देने और बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने में मदद करेंगी।

भविष्य के लिए तैयार रेलवे नेटवर्क के अपने विजन के अनुरूप, प्रधानमंत्री ने राजेंद्र नगर टर्मिनल (पटना) से नई दिल्ली, बापूधाम मोतिहारी से दिल्ली (आनंद विहार टर्मिनल), दरभंगा से लखनऊ (गोमती नगर) और मालदा टाउन से लखनऊ (गोमती नगर) के बीच भागलपुर के रास्ते चार नई अमृत भारत ट्रेनों को झंडी दिखाई, जिससे क्षेत्र में कनेक्टिविटी में सुधार होगा।

प्रधानमंत्री ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के अंतर्गत बिहार में लगभग 61,500 स्वयं सहायता समूहों को 400 करोड़ रुपये भी जारी किए। महिला केन्द्रित विकास पर विशेष ध्यान देते हुए, 10 करोड़ से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जोड़ा गया है।

प्रधानमंत्री ने 12,000 लाभार्थियों को गृह प्रवेश के तहत चाबियां सौंपीं तथा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 40,000 लाभार्थियों को 160 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की।

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प्रधानमंत्री ने सेवा तीर्थ में AI और डीपटेक स्टार्टअप्स के CEO के साथ राउंडटेबल बैठक की
February 20, 2026
CEOs and Founders of 16 AI and deeptech Startups present their ideas and work
These Start-ups are working in diverse sectors like Healthcare, Agriculture, Cybersecurity, Space and Social Empowerment to Drive Population-Scale Impact
PM praises innovators for building impactful solutions and urges development of solutions tailored to India’s needs
PM discusses the potential of harnessing AI technology in various sectors like agriculture, environmental protection, promoting higher education in mother tongue, among others
Startups laud India AI Impact Summit, describing it as a reflection of the country’s growing stature in shaping the global conversations around AI

Prime Minister Shri Narendra Modi held a roundtable with CEOs of AI and deeptech startups at Seva Teerth earlier today.

The startups participating in the roundtable are tackling population-scale challenges across key sectors. In healthcare, they use AI for advanced diagnostics, gene therapy, and efficient patient record management to extend quality care to the last mile. In agriculture, they leverage geospatial and underwater intelligence to boost productivity and help manage climate risks. The group also includes ventures focused on cybersecurity, ethical AI, space, social empowerment through vernacular access to justice and education, and modernising legacy systems to strengthen enterprise productivity. Together, they reflect an ecosystem addressing local needs while building global leadership in AI-driven innovation.

The AI startups praised India’s sustained push to strengthen its artificial intelligence ecosystem. They highlighted the sector’s rapid expansion and immense untapped potential, noting that the global momentum of AI innovation and deployment is increasingly shifting toward India. They said the country now offers a supportive and dynamic environment for AI advancement, firmly establishing its presence on the global AI landscape. They also lauded the India AI Impact Summit, describing it as a reflection of the country’s growing stature in shaping the global conversations around AI.

Prime Minister congratulated innovators for taking bold risks and building impactful solutions. He discussed the potential of harnessing AI technology in various sectors like in agriculture and environmental protection, including monitoring crop productivity and fertilizer usage to safeguard soil health. Stressing the importance of promoting Indian languages and culture, he called for expanding our AI tools for higher education in mother tongue.

The Prime Minister underscored the need for strong data governance, cautioned against misinformation, and urged the development of solutions tailored to India’s needs. Referring to UPI as a model of simple and scalable digital innovation, he expressed confidence in Indian companies and encouraged trust in domestic products. He also spoke about expanding private participation in the space sector and noted strong investor interest in Indian startups.

The meeting was attended by CEOs and Founders of Abridge, Adalat AI, BrainSightAI, Credo AI, Eka Care, Glean, Innogle, Invideo, Miko, Origin, Prophaze, Rasen, Rubrik, SatSure, Supernova and Sypha AI. Principal Secretary, Shri P K Mishra, Principal Secretary-2, Shri Shaktikanta Das and Minister of State, Shri Jitin Prasada were also present during the meeting.