प्रधानमंत्री ने गुजरात सरकार के जी-सफल और जी-मैत्री कार्यक्रमों का शुरूआत की
महिलाओं का आशीर्वाद मेरी शक्ति, पूंजी और सुरक्षा कवच है: प्रधानमंत्री
भारत अब महिला-नेतृत्व वाले विकास मार्ग पर चल रहा है: प्रधानमंत्री
हमारी सरकार महिलाओं के लिए ‘सम्मान’ और ‘सुविधा’ को सर्वोच्च महत्व देती है: प्रधानमंत्री
ग्रामीण भारत की आत्मा ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण में निहित है: प्रधानमंत्री
नारी शक्ति हर भय और शंका को पार करते हुए आगे बढ़ रही है: प्रधानमंत्री
पिछले एक दशक में हमने महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के नवसारी में विभिन्न विकास कार्यों का शुभारंभ किया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने बड़ी संख्या में उपस्थित माताओं, बहनों और बेटियों के प्यार, स्नेह और आशीर्वाद के लिए आभार व्यक्त किया और देश की सभी महिलाओं को इस विशेष दिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में उन्हें मां गंगा का आशीर्वाद मिला था, जबकि आज मातृशक्ति के महाकुंभ में उन्हें आशीर्वाद मिला। प्रधानमंत्री ने आज गुजरात में दो योजनाओं, जी-सफल (आजीविका बढ़ाने के लिए अंत्योदय परिवारों के लिए गुजरात योजना) और जी-मैत्री (ग्रामीण आय में परिवर्तन के लिए व्यक्तियों की गुजरात मेंटरशिप और एक्सिलारेशन योजना) के शुभारंभ पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विभिन्न योजनाओं के धन को सीधे महिलाओं के बैंक खातों में डाला गया है और इस उपलब्धि के लिए सभी को बधाई दी।

श्री मोदी ने कहा कि आज का दिन महिलाओं को समर्पित है और उन्होंने सभी का आभार व्यक्त किया तथा गर्व के साथ कहा कि वे स्वयं को दुनिया का सबसे धनी व्यक्ति मानते हैं, पैसों के मामले में नहीं, बल्कि करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों के आशीर्वाद के कारण। उन्होंने जोर देकर कहा, "ये आशीर्वाद मेरी सबसे बड़ी ताकत, पूंजी और सुरक्षा कवच हैं।"

महिलाओं के सम्मान के महत्व पर जोर देते हुए, क्योंकि यह समाज और राष्ट्र के विकास की दिशा में पहला कदम है, प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डालते हुए कहा, “भारत अब देश की तीव्र प्रगति के लिए महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के मार्ग पर चल रहा है।” उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के जीवन में सम्मान और सुविधा दोनों को प्राथमिकता देती है। उन्होंने करोड़ों महिलाओं के लिए शौचालयों के निर्माण का उल्लेख किया, जिन्हें ‘इज्जत घर’ या “सम्मान का घर” भी कहा जाता है, जिससे उनकी गरिमा बढ़ी है और करोड़ों महिलाओं के लिए बैंक खाते खोले गए हैं, जिससे उन्हें बैंकिंग प्रणाली में एकीकृत किया गया है। उन्होंने महिलाओं को धुएं के कारण होने वाली कठिनाइयों से बचाने के लिए उज्ज्वला सिलेंडर के प्रावधान पर भी प्रकाश डाला। श्री मोदी ने कहा कि सरकार ने कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया है। उन्होंने मुस्लिम बहनों की ओर से तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने की मांग को स्वीकार किया और कहा कि सरकार ने लाखों मुस्लिम बहनों के जीवन की रक्षा के लिए एक सख्त कानून बनाया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जब जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू था, तब महिलाओं को कई अधिकारों से वंचित रखा जाता था। अगर वे राज्य के बाहर किसी से शादी करती थीं, तो वे पैतृक संपत्ति पर अपना अधिकार खो देती थीं और अनुच्छेद 370 हटने के साथ ही जम्मू-कश्मीर में महिलाओं को अब अपने अधिकार मिल गए हैं।

समाज, सरकार और बड़े संस्थानों के विभिन्न स्तरों पर महिलाओं के लिए बढ़ते अवसरों को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा, “महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, चाहे वह राजनीति हो, खेल हो, न्यायपालिका हो या पुलिस हो”। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से, महत्वपूर्ण पदों पर महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, उन्होंने उल्लेख किया कि केंद्र सरकार में सबसे अधिक महिला मंत्री हैं और संसद में महिलाओं की उपस्थिति भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि 2019 में, 78 महिला सांसद चुनी गईं, और 18वीं लोकसभा में, 74 महिला सांसद सदन का हिस्सा हैं। न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करते हुए, श्री मोदी ने कहा जिला न्यायालयों में उनकी उपस्थिति 35 प्रतिशत से अधिक है। कई राज्यों में, सिविल जजों के रूप में 50 प्रतिशत से अधिक नई भर्तियों में महिलाएँ हैं। श्री मोदी ने प्रकाश डाला, “भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है, जिसमें लगभग आधे स्टार्टअप में नेतृत्व की भूमिका में महिलाएँ हैं।” उन्होंने प्रमुख अंतरिक्ष मिशनों का नेतृत्व करने वाली महिला वैज्ञानिकों के महत्वपूर्ण योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि भारत में दुनिया में सबसे ज़्यादा महिला पायलट हैं। उन्होंने नवसारी में कार्यक्रम के आयोजन और सुरक्षा में महिलाओं की भूमिका को भी स्वीकार किया, जिसमें महिला पुलिस अधिकारियों और अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का प्रबंधन किया। प्रधानमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के साथ अपनी पिछली बातचीत को साझा किया, जिसमें उन्होंने भारत की महिलाओं की ताकत के प्रमाण के रूप में उनके उत्साह और आत्मविश्वास को देखा। उन्होंने अपना विश्वास दोहराया कि विकसित भारत का संकल्प पूरा होगा और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महिलाएँ सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।

गुजरात को महिला-नेतृत्व वाले विकास का एक बेहतरीन उदाहरण बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसने देश को महिलाओं की कड़ी मेहनत और ताकत से विकसित एक सफल सहकारी मॉडल प्रदान किया है। उन्होंने अमूल की वैश्विक मान्यता को रेखांकित किया और बताया कि कैसे गुजरात के गांवों की लाखों महिलाओं ने दूध उत्पादन को एक क्रांति में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि गुजराती महिलाओं ने न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया है। उन्होंने गुजराती महिलाओं द्वारा शुरू किए गए लिज्जत पापड़ की सफलता पर भी रोशनी डाली, जो अब सैकड़ों करोड़ रुपये का ब्रांड बन गया है।

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए, जिसके दौरान सरकार ने महिलाओं और लड़कियों के कल्याण के लिए कई पहलों को लागू किया, जैसे कि चिरंजीवी योजना, बेटी बचाओ अभियान, ममता दिवस, कन्या केलवणी रथ यात्रा, कुंवरबाई नू मामेरु, सात फेरा समूह लगना योजना और अभयम हेल्पलाइन, श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि गुजरात ने पूरे देश को दिखाया है कि सही नीतियों के जरिए महिलाओं की ताकत को कैसे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने डेयरी कार्य में शामिल महिलाओं के खातों में सीधे धन हस्तांतरण का उल्लेख किया, एक ऐसा तरीका जो गुजरात में शुरू हुआ और अब पूरे देश में लाखों लाभार्थियों तक पहुँच गया है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) ने हजारों करोड़ रुपये के घोटालों पर लगाम लगाई है और गरीबों को सहायता प्रदान की है।

भुज भूकंप के बाद पुनर्निर्माण के दौरान महिलाओं के नाम पर घर उपलब्ध कराकर उन्हें सशक्त बनाने के सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने उल्लेख किया कि पीएम-आवास योजना में भी यही दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है, जिसके तहत 2014 से अब तक लगभग 3 करोड़ महिलाएं घर की मालकिन बन चुकी हैं। उन्होंने जल जीवन मिशन की वैश्विक मान्यता पर टिप्पणी की, जिसने देश भर के गांवों में पानी पहुंचाया है। पिछले पांच वर्षों में, हजारों गांवों में 15.5 करोड़ घरों तक पाइप से पानी पहुंचा है और इस मिशन की सफलता में महिला जल समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल गुजरात में शुरू हुआ और अब यह देश भर में जल संकट का समाधान कर रहा है।

जल संकट के मुद्दे को संबोधित करते हुए और जल संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल के नेतृत्व में राष्ट्रव्यापी अभियान "कैच द रेन" पर रोशनी डाली, जिसका उद्देश्य वर्षा जल को जहाँ गिरता है, वहाँ संरक्षित करके उसे बर्बाद होने से रोकना है। उन्होंने नवसारी की महिलाओं के प्रयासों की प्रशंसा की, जिन्होंने वर्षा जल को बचाने के लिए तालाब, चेक डैम, बोरवेल रिचार्ज और सामुदायिक सोख गड्ढे सहित 5,000 से अधिक परियोजनाएँ पूरी की हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि नवसारी में अभी भी सैकड़ों जल संरक्षण परियोजनाएँ चल रही हैं, जिनका लक्ष्य एक ही दिन में 1,000 परकोलेशन पिट बनाना है। श्री मोदी ने नवसारी जिले को वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण के लिए गुजरात के अग्रणी जिलों में से एक माना और इस क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों के लिए नवसारी की माताओं, बहनों और बेटियों को विशेष बधाई दी।

श्री मोदी ने कहा, "गुजरात की महिलाओं की ताकत और उनका योगदान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है और गुजरात के पंचायत चुनावों में 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।" उन्होंने कहा कि जब उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में दिल्ली भेजा गया था, तो वे देश के लिए भी यही अनुभव और प्रतिबद्धता लेकर आए थे। उन्होंने कहा कि नई संसद में पारित पहला विधेयक महिला सशक्तिकरण के लिए था, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप में जाना जाता है और गर्व के साथ उल्लेख किया कि इस विधेयक को राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित किया गया, जो एक साधारण आदिवासी पृष्ठभूमि से आती हैं। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि वह दिन दूर नहीं, जब यहां उपस्थित महिलाओं में से कोई भी एक सांसद या विधायक बनेगीं और ऐसे मंच पर बैठेंगी।

महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की आत्मा ग्रामीण भारत में बसती है और उन्होंने आगे कहा, "ग्रामीण भारत की आत्मा ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण में निहित है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने महिलाओं के अधिकारों और अवसरों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, जिसकी आर्थिक प्रगति की नींव यहां मौजूद लाखों महिलाओं ने रखी है। उन्होंने इस उपलब्धि में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। श्री मोदी ने कहा कि देश भर में 10 करोड़ से अधिक महिलाएं 90 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह चला रही हैं, जिनमें से 3 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह अकेले गुजरात में संचालित हैं। उन्होंने इन लाखों महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया, जिसका लक्ष्य उन्हें "लखपति दीदी" बनाना है। उन्होंने कहा कि लगभग 1.5 करोड़ महिलाएं पहले ही "लखपति दीदी" बन चुकी हैं और सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में कुल 3 करोड़ महिलाओं को "लखपति दीदी" बनाना है।

श्री मोदी ने कहा कि जब कोई बहन लखपति दीदी बन जाती है, तब पूरे परिवार की किस्मत बदल जाती है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने काम में गांव की अन्य महिलाओं को शामिल करती हैं और धीरे-धीरे घर से किए जाने वाले काम को एक आर्थिक आंदोलन में बदल देती हैं। स्वयं सहायता समूहों की क्षमता को बढ़ाने के लिए सरकार ने पिछले एक दशक में उनके बजट में पांच गुना वृद्धि की है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इन स्वयं सहायता समूहों को 20 लाख रुपये तक का बिना किसी गारंटी के ऋण दिया जा रहा है। इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को नए कौशल सीखने और नई पौद्योगिकियों से जुड़ने के अवसर दिए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर रोशनी डाली कि देश की महिलाएं हर संदेह और डर को दूर करके आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि जब "ड्रोन दीदी" योजना शुरू की गई थी, तो कई लोगों को ग्रामीण महिलाओं के साथ ड्रोन जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकी की अनुकूलता पर संदेह था। हालांकि, उन्होंने अपनी बहनों और बेटियों की प्रतिभा और समर्पण पर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि आज "नमो ड्रोन दीदी" अभियान कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नई क्रांति ला रहा है, जिससे इस बदलाव का नेतृत्व करने वाली महिलाओं को अच्छी खासी आय हो रही है। श्री मोदी ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि "बैंक सखी" और "बीमा सखी" जैसी योजनाओं ने गांवों की महिलाओं को नए अवसर प्रदान किए हैं। ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए "कृषि सखी" और "पशु सखी" जैसे अभियान शुरू किए गए हैं, जिससे लाखों महिलाओं को जोड़ा जा रहा है और उनकी आय में वृद्धि हो रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार के प्रयासों से गुजरात की अधिक से अधिक महिलाओं को लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने श्री भूपेंद्रभाई पटेल और गुजरात सरकार को 10 लाख और महिलाओं को "लखपति दीदी" बनाने का अभियान शुरू करने के लिए बधाई दी।

प्रधानमंत्री के रूप में लाल किले से अपने पहले संबोधन को दोहराते हुए, श्री मोदी ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने और एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए सिर्फ बेटियों ही नहीं, बल्कि बेटों से भी आग्रह करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में, सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, उनके खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए कानूनों को सख्त बनाया है। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों के लिए त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना पर प्रकाश डाला, देश भर में लगभग 800 अदालतों को मंजूरी दी गई, जिनमें से अधिकांश अब चालू हैं। इन अदालतों ने बलात्कार और पौक्सो (पीओसीएसओ) से संबंधित लगभग तीन लाख मामलों के समाधान में तेजी लाई है। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि सरकार ने बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान किया है। उन्होंने 24x7 महिला हेल्पलाइन को मजबूत करने और महिलाओं के लिए वन-स्टॉप सेंटर की स्थापना पर भी प्रकाश डाला, देश भर में अब लगभग 800 ऐसे सेंटर चालू हैं, जो 10 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान कर रहे हैं

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, "नए लागू किए गए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) ने औपनिवेशिक कानूनों को खत्म कर दिया है और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को और मजबूत किया है।" उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को संबोधित करने के लिए एक अलग अध्याय जोड़ा गया है। उन्होंने आम शिकायत को स्वीकार किया कि पीड़ितों को अक्सर न्याय में देरी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसे संबोधित करने के लिए, भारतीय दंड संहिता अब अनिवार्य करती है कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के लिए 60 दिनों के भीतर आरोप तय किए जाएं और 45 दिनों के भीतर फैसला सुनाया जाए। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि नए कानून कहीं से भी ई-एफआईआर दर्ज करने की अनुमति देते हैं, जिससे पुलिस के लिए तत्काल कार्रवाई करना आसान हो जाता है। जीरो एफआईआर के प्रावधान के तहत, कोई भी महिला अत्याचार का सामना करने पर किसी भी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करा सकती है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने इस बात पर रोशनी डाली कि पुलिस अब ऑडियो-वीडियो के जरिए बलात्कार पीड़ितों के बयान दर्ज कर सकती है, जिसे कानूनी रूप से मान्यता दी गई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि डॉक्टरों द्वारा मेडिकल रिपोर्ट भेजने का समय 7 दिन निर्धारित किया गया है, जिससे पीड़ितों को काफी सहायता मिलेगी।

इस बात को रेखांकित करते हुए कि बीएनएस में नए प्रावधान पहले से ही परिणाम दिखा रहे हैं, श्री मोदी ने पिछले अक्टूबर में सूरत जिले में हुई एक दुखद घटना को याद किया, जहां एक सामूहिक बलात्कार के मामले में 15 दिनों के भीतर आरोप तय किए गए और कुछ हफ्तों के भीतर दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि बीएनएस के कार्यान्वयन से देश भर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की सुनवाई में तेजी आई है। उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक अदालत ने नाबालिग के बलात्कारी को 20 साल जेल की सजा सुनाई, जो आरोप पत्र दाखिल करने के 30 दिनों के भीतर बीएनएस के तहत पहली सजा थी। कोलकाता में एक अदालत ने सात महीने की बच्ची के साथ बलात्कार के लिए एक दोषी को मौत की सजा सुनाई, जिसमें अपराध के 80 दिनों के भीतर फैसला सुनाया गया। प्रधानमंत्री ने विभिन्न राज्यों के इन उदाहरणों का उल्लेख किया और दिखाया कि कैसे बीएनएस और अन्य सरकारी फैसलों ने महिलाओं की सुरक्षा को बढ़ाया है और त्वरित न्याय सुनिश्चित किया है।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि वे उनके सपनों को पूरा करने में किसी भी बाधा को आने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह एक बेटा अपनी मां की सेवा करता है, उसी तरह वह भारत माता तथा भारत की माताओं और बेटियों की भी सेवा कर रहा है। उन्होंने अपने भाषण के अंत में दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि लोगों की कड़ी मेहनत, समर्पण और आशीर्वाद 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेंगे और उन्होंने एक बार फिर देश की हर मां, बहन और बेटी को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

इस कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्रभाई पटेल और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

महिला सशक्तिकरण सरकार द्वारा किए गए कार्यों का आधार रहा है। प्रधानमंत्री के विजन से प्रेरित होकर सरकार उनके सर्वांगीण विकास की दिशा में कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध रही है। इसी दृष्टिकोण को सामने रखकर 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने नवसारी जिले के वानसी बोरसी गांव में लखपति दीदी कार्यक्रम में भाग लिया और लखपति दीदियों से बातचीत की। उन्होंने 5 लखपति दीदियों को लखपति दीदी प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया।

जी-मैत्री योजना उन स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता और सहयोग प्रदान करेगी, जो ग्रामीण आजीविका के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाने के लिए काम कर रहे हैं।

जी-सफल योजना गुजरात के दो आकांक्षी जिलों और तेरह आकांक्षी ब्लॉकों में अंत्योदय परिवारों की स्वयं सहायता समूह महिलाओं को वित्तीय सहायता और उद्यम संबंधी प्रशिक्षण मुहैया करायेगी।

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Chief Minister of Maharashtra meets Prime Minister
May 28, 2026

Chief Minister of Maharashtra, Shri Devendra Fadnavis met Prime Minister, Shri Narendra Modi in New Delhi today.

The Prime Minister’s Office posted on X;

“Chief Minister of Maharashtra, Shri @Dev_Fadnavis had a meeting with Prime Minister @narendramodi today.

@CMOMaharashtra”