वह दिन दूर नहीं जब दुनिया कहेगी: भारत में डिज़ाइन, भारत में निर्मित, दुनिया द्वारा विश्वसनीय: प्रधानमंत्री
चिप डिजिटल हीरे हैं: प्रधानमंत्री
कागजी कार्रवाई जितनी कम होगी, वेफर का कार्य उतनी ही शीघ्रता से शुरू हो सकता है: प्रधानमंत्री
भारत की सबसे छोटी चिप बहुत जल्द दुनिया को सबसे बड़े बदलाव की ओर ले जाएगी: प्रधानमंत्री
वह दिन दूर नहीं जब भारत में डिज़ाइन किए गए, भारत में निर्मित को दुनिया द्वारा विश्वसनीय कहा जाएगा : प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित यशोभूमि में भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्‍टम को गति प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित 'सेमीकॉन इंडिया-2025' का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देश-विदेश के सेमीकंडक्टर उद्योग के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और उनके सहयोगियों की उपस्थिति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विभिन्न देशों से आए विशिष्ट अतिथियों, स्टार्ट-अप से जुड़े उद्यमियों और देश भर के विभिन्न राज्यों से आए युवा छात्रों का स्वागत किया।

श्री मोदी ने कहा कि वे कल रात ही जापान और चीन की अपनी यात्रा से लौटे हैं और आज आकांक्षाओं और आत्मविश्वास से परिपूर्ण यशोभूमि के इस परिसर में दर्शकों के बीच उपस्थित हैं। हमेशा से स्वाभाविक और सर्वविदित प्रौद्योगिकी के प्रति अपने जुनून का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल ही में अपनी जापान यात्रा के दौरान, उन्हें जापानी प्रधानमंत्री श्री शिगेरु इशिबा के साथ टोक्यो इलेक्ट्रॉन कारखाने का दौरा करने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि उस कंपनी के सीईओ आज दर्शकों के बीच उपस्थित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी के प्रति उनका झुकाव उन्हें बार-बार ऐसे लोगों के बीच लाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दर्शकों के बीच उपस्थित होकर उन्हें अत्‍यंत प्रसन्‍नता का अनुभव हो रहा है।

दुनिया भर के 40 से 50 देशों के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विशेषज्ञों की उपस्थिति को देखते हुए, श्री मोदी ने कहा कि भारत की नवाचार और युवा शक्ति भी इस कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से उपस्थित है। उन्होंने कहा कि यह अनूठा संयोजन एक स्पष्ट संदेश देता है कि दुनिया भारत पर भरोसा करती है, दुनिया भारत में विश्वास करती है और दुनिया भारत के साथ सेमीकंडक्टर का भविष्य बनाने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री ने सेमीकॉन इंडिया में उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि वे एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा में महत्वपूर्ण भागीदार हैं।

हाल ही में जारी इस वर्ष की पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों का उल्‍लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि एक बार फिर, भारत ने हर आशा, हर अनुमान और हर पूर्वानुमान को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि जहां दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक निज स्वार्थ से प्रेरित चिंताओं और चुनौतियों का सामना कर रही हैं, वहीं भारत ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है। श्री मोदी ने कहा कि यह वृद्धि सभी क्षेत्रों—विनिर्माण, सेवा, कृषि और निर्माण—में दिखाई दे रही है और हर क्षेत्र में उत्साह साफ़ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि भारत का त्‍वरित विकास सभी उद्योगों और प्रत्येक नागरिक में नई ऊर्जा का संचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि विकास की यह गति भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेज़ी से अग्रसर कर रही है।

सेमीकंडक्टर की दुनिया में अक्सर कहा जाता है कि 'तेल काला सोना था, लेकिन चिप डिजिटल हीरे हैं', इस कथन पर अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तेल ने पिछली सदी को आकार दिया और दुनिया का भाग्य तेल के कुओं से तय होता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव इस बात पर निर्भर करता था कि इन कुओं से कितना पेट्रोलियम निकाला गया। हालांकि, 21वीं सदी की शक्ति अब छोटी चिप में केंद्रित है। आकार में छोटे होने के बावजूद, ये चिप वैश्विक प्रगति को तेज़ी से बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। श्री मोदी ने कहा कि वैश्विक सेमीकंडक्टर बाज़ार पहले ही 600 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और आने वाले वर्षों में इसके 1 ट्रिलियन डॉलर को पार करने की आशा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिस गति से भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए इस 1 ट्रिलियन डॉलर के बाज़ार में भारत की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी होगी।

भारत की त्‍वरित गति से प्रगति का उल्‍लेख करते हुए श्री मोदी ने याद दिलाया कि वर्ष 2021 में सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम शुभारंभ किया गया था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 तक, भारत का पहला सेमीकंडक्टर संयंत्र स्वीकृत हो चुका है। वर्ष 2024 में कई और संयंत्रों को स्‍वीकृति मिल गई है और वर्ष 2025 में पांच अतिरिक्त परियोजनाओं को स्‍वीकृति मिल गई है। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर, दस सेमीकंडक्टर परियोजनाएं वर्तमान में जारी हैं, जिनमें अठारह अरब डॉलर से अधिक यानी 1.5 लाख करोड़ रूपये से ज़्यादा का निवेश शामिल है। प्रधानमंत्री ने बल देते कहा कि यह भारत में बढ़ते वैश्विक विश्वास को दर्शाता है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में गति के महत्व पर ज़ोर देते हुए श्री मोदी ने कहा कि फ़ाइल से फ़ैक्टरी तक का समय जितना कम होगा और कागजी प्रक्रिया जितनी कम होंगी, वेफ़र का काम उतनी ही जल्दी शुरू हो सकेगा। उन्होंने कहा कि सरकार इसी दृष्टिकोण से कार्य कर रही है। राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली लागू की गई है, जिससे केंद्र और राज्य दोनों से सभी स्वीकृतियां एक ही स्‍थान पर प्राप्त की जा सकेंगी। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप, निवेशकों को लंबी कागजी प्रक्रिया से मुक्ति मिल गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश भर में प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल के तहत सेमीकंडक्टर पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जो भूमि, बिजली आपूर्ति, बंदरगाह और हवाई अड्डे की कनेक्टिविटी और कुशल श्रमिकों के एक समूह तक पहुंच जैसी सुविधाएं प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि जब इस तरह के बुनियादी ढांचे को प्रोत्साहनों के साथ जोड़ा जाता है, तो औद्योगिक विकास अवश्यंभावी है। चाहे पीएलआई प्रोत्साहनों के माध्यम से हो या डिज़ाइन लिंक्ड अनुदानों के माध्यम से, भारत शुरूआत से अंत तक क्षमताएं प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि निवेश का प्रवाह जारी है। भारत बैकएंड ऑपरेशन से आगे बढ़कर एक पूर्ण-स्टेक सेमीकंडक्टर राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर के दृष्टिकोण पर विचार व्‍यक्‍त करते हुए श्री मोदी ने दोहराया कि वह दिन दूर नहीं जब भारत की सबसे छोटी चिप दुनिया के सबसे बड़े बदलाव की आधारशिला रखेगी। उन्होंने कहा कि हमारी यात्रा देर से शुरू हुई, लेकिन अब हमें कोई नहीं रोक सकता। प्रधानमंत्री ने बताया कि सीजी पावर के पायलट प्लांट ने 28 अगस्त को, यानी सिर्फ़ 4-5 दिन पहले, परिचालन शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि केनेस का पायलट प्लांट भी जल्द ही शुरू होने वाला है। माइक्रोन और टाटा के परीक्षण चिप पहले से ही उत्पादन में हैं। उन्होंने दोहराया कि इस वर्ष वाणिज्यिक चिप उत्पादन शुरू हो जाएगा, जो सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की तेज़ प्रगति को दर्शाता है।

श्री मोदी ने कहा कि भारत की सेमीकंडक्टर सफलता की गाथा किसी एक कार्यक्षेत्र या किसी एक तकनीक तक सीमित नहीं है। भारत एक व्यापक इकोसिस्‍टम का निर्माण कर रहा है- जिसमें डिज़ाइनिंग, निर्माण, पैकेजिंग और उच्च तकनीक वाले उपकरण, सभी देश के भीतर शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेमीकंडक्टर मिशन केवल एक फ़ैब स्थापित करने या एक चिप बनाने तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक मज़बूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्‍टम का निर्माण कर रहा है जो देश को आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।

भारत के सेमीकंडक्टर मिशन की एक अन्य प्रमुख विशेषता को रेखांकित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि देश इस क्षेत्र में दुनिया की सबसे उन्नत तकनीकों के साथ-साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का ध्यान घरेलू स्तर पर निर्मित चिप के माध्यम से उभरती तकनीकों को सशक्त बनाने पर है। प्रधानमंत्री ने बताया कि नोएडा और बेंगलुरु में विकसित किए जा रहे डिज़ाइन केंद्र दुनिया के कुछ सबसे उन्नत चिप पर काम कर रहे हैं—जो अरबों ट्रांजिस्टर संग्रहीत करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि ये चिप 21वीं सदी की व्यापक तकनीकों को शक्ति प्रदान करेंगे। वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने पुष्टि की कि भारत इन चुनौतियों से निपटने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि शहरों में ऊंची इमारतें और प्रभावशाली भौतिक अवसंरचनाएं दिखाई देती हैं, लेकिन उनका आधार स्टील पर टिका है। इसी प्रकार, भारत के डिजिटल अवसंरचना की नींव महत्वपूर्ण खनिजों पर टिकी है। श्री मोदी ने कहा कि भारत वर्तमान में राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन पर काम कर रहा है और दुर्लभ खनिजों की अपनी मांग को घरेलू स्तर पर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में, महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं पर उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास में सरकार द्वारा स्टार्ट-अप्स और एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिका की परिकल्पना को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने उल्‍लेख किया कि भारत दुनिया की सेमीकंडक्टर डिज़ाइन प्रतिभा का 20 प्रतिशत योगदान देता है और देश के युवा सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए सबसे बड़े मानव श्रम पूंजी कारखाने का प्रतिनिधित्व करते हैं। युवा उद्यमियों, नवप्रवर्तकों और स्टार्ट-अप्स को संबोधित करते हुए, श्री मोदी ने उनसे आगे आने का आग्रह करते हुए आश्वासन दिया कि सरकार उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने कहा कि डिज़ाइन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना और चिप-टू-स्टार्टअप कार्यक्रम विशेष रूप से उनके लिए डिज़ाइन किए गए हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि डिज़ाइन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना को उसके उद्देश्यों की बेहतर पूर्ति के लिए पुनर्गठित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार इस क्षेत्र में भारतीय बौद्धिक संपदा (आईपी) के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हाल ही में शुरू किया गया राष्ट्रीय अनुसंधान कोष भी रणनीतिक गठजोड़ के माध्यम से इस प्रयास का समर्थन करेगा। कई राज्यों की सेमीकंडक्टर मिशन में सक्रिय रूप से भागीदारी और इस क्षेत्र के लिए विशेष रूप से तैयार की गई नीतियों को देखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ये राज्य समर्पित बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने सभी राज्यों से सेमीकंडक्टर इकोसिस्‍टम बनाने और अपने क्षेत्रों में निवेश के वातावरण को बढ़ाने के लिए एक-दूसरे के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा में शामिल होने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने पुष्टि की कि भारत सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन के मंत्र पर चलकर इस मुकाम तक पहुंचा है। अगली पीढ़ी के सुधारों का एक नया चरण जल्द ही शुरू किया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन के अगले चरण पर काम चल रहा है। उपस्थित सभी निवेशकों को संबोधित करते हुए, उन्होंने खुले दिल से उनका स्वागत करने की भारत की तत्परता व्यक्त करते हुए कहा कि डिज़ाइन तैयार है। मास्क संरेखित है। अब सटीक निष्पादन और बड़े स्‍तर पर वितरण का समय है। उन्होंने कहा कि भारत की नीतियां अल्पकालिक संकेत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक प्रतिबद्धताएं हैं और आश्वासन दिया कि प्रत्येक निवेशक की ज़रूरतें पूरी की जाएंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब दुनिया कहेगी: भारत में डिज़ाइन, भारत में निर्मित, दुनिया द्वारा विश्वसनीय। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन इस कामना के साथ किया कि भारत के प्रयासों का हर हिस्सा सफल हो, हर बाइट नवाचार से भरी हो, और यह यात्रा त्रुटि-मुक्त और उच्च-प्रदर्शन वाली बनी रहे।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव, श्री जितिन प्रसाद, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

सेमीकॉन इंडिया- 2025, 2 से 4 सितंबर तक चलने वाला तीन दिवसीय सम्मेलन है। यह भारत में एक मज़बूत, उदार और दीर्घकालिक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने पर केंद्रित होगा। इसमें सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम की प्रगति, सेमीकंडक्टर फ़ैब और उन्नत पैकेजिंग परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे की तैयारी, स्मार्ट विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में नवाचार, निवेश के अवसर, राज्य-स्तरीय नीति कार्यान्वयन आदि पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, इस कार्यक्रम में डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना के अंतर्गत पहलों, स्टार्टअप इकोसिस्टम के विकास, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के भविष्य के प्रारूप का भी उल्‍लेख किया जाएगा।

इसमें 20,750 से ज़्यादा प्रतिभागी भाग लेंगे, जिनमें 48 से ज़्यादा देशों के 2,500 से ज़्यादा प्रतिनिधि, 50 से ज़्यादा वैश्विक नेताओं सहित 150 से ज़्यादा वक्ता और 350 से ज़्यादा प्रदर्शक शामिल होंगे। इसमें 6 देशों की गोलमेज चर्चाएं, देश-स्तरीय मंडप और कार्यबल विकास एवं स्टार्ट-अप के लिए समर्पित मंडप भी शामिल होंगे।

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सरकार कृषि में 'टेक्नोलॉजी कल्चर' लाने पर विशेष जोर दे रही है: पीएम मोदी
March 06, 2026
इस वर्ष के केंद्रीय बजट ने कृषि और ग्रामीण परिवर्तन को नई दिशा प्रदान की है: प्रधानमंत्री
सरकार ने कृषि क्षेत्र को लगातार मजबूत किया है, प्रमुख प्रयासों से किसानों के जोखिम कम हुए हैं और उन्हें बुनियादी आर्थिक सुरक्षा मिली है: प्रधानमंत्री
यदि हम उच्च मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा दें, तो यह कृषि को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदल देगा: प्रधानमंत्री
निर्यात-उन्मुख उत्पादन बढ़ने से प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित होगा: प्रधानमंत्री
मत्स्य पालन ग्रामीण समृद्धि के लिए एक उच्च मूल्य और उच्च प्रभाव वाला क्षेत्र और निर्यात वृद्धि का एक प्रमुख आधार बन सकता है: प्रधानमंत्री
सरकार एग्रीस्टैक के माध्यम से कृषि के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना विकसित कर रही है: प्रधानमंत्री
प्रौद्योगिकी तभी परिणाम देती है जब सिस्टम इसे अपनाएं हैं, संस्थान इसे एकीकृत करें हैं और उद्यमी इस पर नवाचार करें: प्रधानमंत्री

नमस्कार !

बजट वेबिनार सीरीज के तीसरे वेबिनार में, मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं। इससे पहले, टेक्नोलॉजी, रिफॉर्म्स और इकोनॉमिक ग्रोथ जैसे अहम विषयों पर दो वेबिनार हो चुके हैं। आज, Rural Economy और Agriculture जैसे अहम सेक्टर पर चर्चा हो रही है। आप सभी ने बजट निर्माण में अपने मूल्यवान सुझावों से बहुत सहयोग दिया, और आपने देखा होगा बजट में आप सबके सुझाव रिफ्लेक्ट हो रहे हैं, बहुत काम आए हैं। लेकिन अब बजट आ चुका है, अब बजट के बाद उसके full potential का लाभ देश को मिले, इस दिशा में भी आपका अनुभव, आपके सुझाव और सरल तरीके से बजट का सर्वाधिक लोगों को लाभ हो। बजट का पाई-पाई पैसा जिस हेतु से दिया गया है, उसको परिपूर्ण कैसे करें? जल्द से जल्द कैसे करें? आपके सुझाव ये वेबिनार के लिए बहुत अहम है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, कृषि, एग्रीकल्चर, विश्वकर्मा, ये सब हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। एग्रीकल्चर, भारत की लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट जर्नी का Strategic Pillar भी है, और इसी सोच के साथ हमारी सरकार ने कृषि सेक्टर को लगातार मजबूत किया है। करीब 10 करोड़ किसानों को 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पीएम किसान सम्मान निधि मिली है। MSP में हुए Reforms से अब किसानों को डेढ़ गुना तक रिटर्न मिल रहा है। इंस्टिट्यूशनल क्रेडिट कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। पीएम फसल बीमा योजना के तहत लगभग 2 लाख करोड़ रुपए के क्लेम सेटल किए गए हैं। ऐसे अनेक प्रयासों से किसानों का रिस्क बहुत कम हुआ है, और उन्हें एक बेसिक इकोनॉमिक सिक्योरिटी मिली है। इससे कृषि क्षेत्र का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज खाद्यान्न और दालों से लेकर तिलहन तक देश रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा है। लेकिन अब, जब 21वीं सदी का दूसरा क्वार्टर शुरू हो चुका है, 25 साल बीत चुके हैं, तब कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा से भरना भी उतना ही आवश्यक है। इस साल के बजट में इस दिशा में नए प्रयास हुए हैं। मुझे विश्वास है, इस वेबिनार में आप सभी के बीच हुई चर्चा, इससे निकले सुझाव, बजट प्रावधानों को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने में मदद करेंगे।

साथियों,

आज दुनिया के बाजार खुल रहे हैं, ग्लोबल डिमांड बदल रही है। इस वेबिनार में अपनी खेती को एक्सपोर्ट ओरिएंटेड बनाने पर भी ज्यादा से ज्यादा चर्चा आवश्य़क है। हमारे पास Diverse Climate है, हमें इसका पूरा फायदा उठाना है। एग्रो क्लाइमेटिक जोन, उस विषय में हम बहुत समृद्ध है। इस साल का बजट इन सब बातों के लिए अनगिनत नए अवसर देने वाला बजट है। प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की दिशा तय करता है, और एक्सपोर्ट स्ट्रेंथ को बढ़ावा देता है। बजट में हमने high value agriculture पर फोकस किया है। नारियल, काजू, कोको, चंदन, ऐसे उत्पादों के regional-specific promotion की बात कही है, और आपको मालूम है, दक्षिण के हमारे जो राज्य हैं खासकर केरल है, तमिलनाडु है, नारियल की पैदावार बहुत करते हैं। लेकिन अब वो क्रॉप, वो सारे पेड़ इतने पुराने हो चुके हैं कि उसकी वो क्षमता नहीं रही है। केरल के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो, तमिलनाडु के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो। इसलिए इस बार कोकोनट पर एक विशेष बल दिया गया है, जिसका फायदा आने वाले दिनों में हमारे इन किसानों को मिलेगा।

साथियों,

नॉर्थ ईस्ट की तरफ देखें, अगरवुड बहुत कम लोगों को मालूम है, जो ये अगरबत्ती शब्द है ना, वो अगरवुड से आया हुआ है। अब हिमालयन राज्यों में टेम्परेट नट क्रॉप्स, और इन्हें बढ़ावा देने का प्रस्ताव बजट में रखा गया है। जब एक्सपोर्ट ओरिएंटेड प्रोडक्शन बढ़ेगा, तो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए रोजगार सृजन होगा। इस दिशा में एक coordinated action कैसे हो, आप सभी स्टेकहोल्डर्स मिलकर जरूर मंथन करें। अगर हम मिलकर High Value Agriculture को स्केल करते हैं, तो ये एग्रीकल्चर को ग्लोबली कंपेटिटिव सेक्टर में बदल सकता है। एग्री experts, इंडस्ट्री और किसान एक साथ कैसे आएं, किसानों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने के लिए किस तरह से गोल्स सेट किए जाएं, क्वालिटी, ब्रांडिंग और स्टैंडर्ड्स, ऐसे हर पहलू, इन सबको कैसे प्रमोट किया जाए, इन सारे विषयों पर चर्चा, इस वेबिनार को, इसके महत्व को बढ़ाएंगे। मैं एक और बात आपसे कहना चाहूंगा। आज दुनिया हेल्थ के संबंध में ज्यादा कॉनशियस है। होलिस्टिक हेल्थ केयर और उसमें ऑर्गेनिक डाइट, ऑर्गेनिक फूड, इस पर बहुत रुचि है। भारत में हमें केमिकल फ्री खेती पर बल देना ही होगा, हमें नेचुरल फार्मिंग पर बल देना होगा। नेचुरल फार्मिंग से, केमिकल फ्री प्रोडक्ट से दुनिया के बाजार तक पहुंचने में हमारे लिए एक राजमार्ग बन जाता है। उसके लिए सर्टिफिकेशन, लेबोरेटरी ये सारी व्यवस्थाएं सरकार सोच रही है। लेकिन आप लोग इसमें भी जरूर अपने विचार रखिए।

साथियों,

एक्सपोर्ट बढ़ाने में एक बहुत बड़ा फैक्टर फिशरीज सेक्टर का पोटेंशियल भी है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश भी है। आज हमारे अलग-अलग तरह के जलाशय, तालाब, ये सब मिलाकर लगभग 4 लाख टन मछली उत्पादन होता है। जबकि इसमें 20 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन की संभावना मौजूद है। अब विचार कीजिए आप, 4 लाख टन से हम अतिरिक्त 20 लाख टन जोड़ दें, तो हमारे गरीब मछुआरे भाई-बहन हैं, उनकी जिंदगी कैसी बदल जाएगी। हमारे पास Rural Income को डायवर्सिफाई करने का अवसर है। फिशरीज एक्सपोर्ट ग्रोथ का बड़ा प्लेटफॉर्म बन सकता है, दुनिया में इसकी मांग है। इस वेबिनार से अगर बहुत ही प्रैक्टिकल सुझाव निकलते हैं, तो कैसे रिज़रवॉयर, उसकी पोटेंशियल की सटीक मैपिंग की जाए, कैसे क्लस्टर प्लानिंग की जाए, कैसे फिशरीज डिपार्टमेंट और लोकल कम्युनिटी के बीच मजबूत कोऑर्डिनेशन हो, तो बहुत ही उत्तम होगा। हैचरी, फीड, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, एक्सपोर्ट, उसके लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स, हर स्तर पर हमें नए बिजनेस मॉडल विकसित करने ही होंगे। ये Rural Prosperity, ग्रामीण समृद्धि के लिए, वहां की हाई वैल्यू, हाई इम्पैक्ट सेक्टर के रूप में परिवर्तित करने का एक अवसर है हमारे लिए, और इस दिशा में भी हम सबको मिलकर काम करना है, और आप आज जो मंथन करेंगे, उसके लिए, उस कार्य के लिए रास्ता बनेगा।

साथियों,

पशुपालन सेक्टर, ग्रामीण इकोनॉमी का हाई ग्रोथ पिलर है। भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा मिल्क प्रोड्यूसर है, Egg प्रोडक्शन में हम दूसरे स्थान पर है। हमें इसे और आगे ले जाने के लिए ब्रीडिंग क्वालिटी, डिजीज प्रिवेंशन और साइंटिफिक मैनेजमेंट पर फोकस करना होगा। एक और अहम विषय पशुधन के स्वास्थ्य का भी है। मैं जब One Earth One Health की बात करता हूं, तो उसमें पौधा हो या पशु, सबके स्वास्थ्य की बात शामिल है। भारत अब वैक्सीन उत्पादन में आत्मनिर्भर है। फुट एंड माउथ डिजीज, उससे पशुओं को बचाने के लिए सवा सौ करोड़ से अधिक डोज पशुओं को लगाई जा चुकी है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत टेक्नोलॉजी का विस्तार किया जा रहा है। हमारी सरकार में अब पशुपालन क्षेत्र के किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड का भी लाभ मिल रहा है। निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एनिमल हसबेंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड की शुरुआत भी की गई है, और आपको ये पता है हम लोगों ने गोबरधन योजना लागू की है। गांव के पशुओं के निकलने वाला मलमूत्र है, गांव का जो वेस्ट है, कूड़ा-कचरा है। हम गोबरधन योजना में इसका उपयोग करके गांव भी स्वच्छ रख सकते हैं, दूध से आय होती है, तो गोबर से भी आय हो सकती है, और एनर्जी सिक्योरिटी की दिशा में गैस सप्लाई में भी ये गोबरधन बहुत बड़ा योगदान दे सकता है। ये मल्टीपर्पज बेनिफिट वाला काम है, और गांव के लिए बहुत उपयोगी है। मैं चाहूंगा कि सभी राज्य सरकारें इसको प्राथमिकता दें, इसको आगे बढ़ाएं।

साथियों,

हमने पिछले अनुभवों से समझा है कि केवल एक ही फसल पर टिके रहना किसान के लिए जोखिम भरा है। इससे आय के विकल्प भी सीमित हो जाते हैं। इसलिए, हम crop diversification पर फोकस कर रहे हैं। इसके अलावा, National Mission on Edible Oils And Pulses, National Mission on Natural Farming, ये सभी एग्रीकल्चर सेक्टर की ताकत बढ़ा रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं एग्रीकल्चर स्टेट सब्जेक्ट है, राज्यों का भी एक बड़ा एग्रीकल्चर बजट होता है, हमें राज्यों को भी निरंतर प्रेरित करना है कि वो अपना दायित्व निभाने में, हम उनको कैसे मदद दें, हमारे सुझाव उनको कैसे काम आएं। राज्य का भी एक-एक पैसा जो गांव के लिए, किसान के लिए तय हुआ है, वो सही उपयोग हो। हमें बजट प्रावधानों को जिला स्तर तक मजबूत करना होगा। तभी नई पॉलिसीज का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जा सकता है।

साथियों,

ये टेक्नोलॉजी की सदी है और सरकार का बहुत जोर एग्रीकल्चर में टेक्नोलॉजी कल्चर लाने पर भी है। आज e-NAM के माध्यम से मार्केट एक्सेस का डेमोक्रेटाइजेशन हुआ है। सरकार एग्रीस्टैक के जरिए, एग्रीकल्चर के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है। इसके तहत डिजिटल पहचान, यानी किसान आईडी बनाई जा रही है। अब तक लगभग 9 करोड़ किसानों की किसान आईडी बन चुकी है, और लगभग 30 करोड़ भूमि पार्सलों का डिजिटल सर्वे किया गया है। भारत-विस्तार जैसे AI आधारित प्लेटफॉर्म, रिसर्च इंस्टीट्यूशंस और किसानों के बीच की दूरी कम कर रहे हैं।

लेकिन साथियों,

टेक्नोलॉजी तभी परिणाम देती है, जब सिस्टम उसे अपनाएं, संस्थाएं उसे इंटीग्रेट करें और एंटरप्रेन्योर्स उस पर इनोवेशन खड़ा करें। इस वेबिनार में आपको इससे जुड़े सुझावों को मजबूती से सामने लाना होगा। हम टेक्नोलॉजी को कैसे सही तरीके से इंटीग्रेट करें, इस दिशा में इस वेबिनार से निकले सुझावों की बहुत बड़ी भूमिका होगी।

साथियों,

हमारी सरकार ग्रामीण समृद्धि के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वामित्व योजना, पीएम ग्रामीण सड़क योजना, स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मदद, इसने रूरल इकोनॉमी को निरंतर मजबूत किया है। लखपति दीदी अभियान की सफलता को भी हमें नई ऊंचाई देनी है। अभी तक गांव की 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में हम सफल हो चुके हैं। अब 2029 तक, 2029 तक 3 करोड़ में और 3 करोड़ जोड़ना है, और 3 करोड़ और लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। ये लक्ष्य और तेजी से कैसे प्राप्त किया जाए, इसे लेकर भी आपके सुझाव महत्वपूर्ण होंगे।

साथियों,

देश में स्टोरेज का बहुत बड़ा अभियान चल रहा है। लाखों गोदाम बनाए जा रहे हैं। स्टोरेज के अलावा एग्री एंटरप्रेन्योर्स प्रोसेसिंग, सप्लाई चैन, एग्री-टेक, एग्री-फिनटेक, एक्सपोर्ट, इन सब में इनोवेशन और निवेश बढ़ाना आज समय की मांग है। मुझे विश्वास है आज जो आप मंथन करेंगे, उससे निकले अमृत से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। आप सबको इस वेबिनार के लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं, और मुझे पूरा विश्वास है कि जमीन से जुड़े हुए विचार, जड़ों से जुड़े हुए विचार, इस बजट को सफल बनाने के लिए, गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए बहुत काम आएंगे। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।