“हमने अमृत काल का नाम 'कर्तव्य काल' रखा है। प्रतिज्ञाओं में हमारे आध्यात्मिक मूल्यों के मार्गदर्शन के साथ-साथ भविष्य के संकल्प भी शामिल हैं"
"आज एक ओर देश में आध्यात्मिक केन्द्रों का पुनरोद्धार हो रहा है, वहीं भारत प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था में भी अग्रणी है"
"देश में देखा गया परिवर्तन प्रत्येक सामाजिक वर्ग के योगदानों का परिणाम है"
"हमारे संतों ने हजारों वर्षों से 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना का पोषण किया है"
“भारत जैसे देश में धार्मिक और आध्यात्मिक संस्थाएं हमेशा सामाजिक कल्याण के केन्द्र में रही हैं"
"हमें सत्य साईं जिले को पूरी तरह से डिजिटल बनाने का संकल्प लेना चाहिए''
"सत्य साईं ट्रस्ट जैसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संस्थानों की पर्यावरण और टिकाऊ जीवन शैली जैसे क्षेत्रों में भारत के उभरते नेतृत्व के ऐसे सभी प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका है"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में साईं हीरा ग्लोबल कन्वेंशन सेंटर का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह में दुनिया भर के प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों और भक्तों की उपस्थिति देखी गई।

प्रधानमंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए सभी को इस कार्यक्रम के लिए बधाई दी, जहां आवश्यक व्यस्तताओं के कारण वह शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हो सके। "श्री सत्य साईं का आशीर्वाद और प्रेरणा आज हमारे साथ है," श्री मोदी ने टिप्पणी की और खुशी व्यक्त की कि आज उनके मिशन का विस्तार हो रहा है और देश को साईं हीरा ग्लोबल कन्वेंशन सेंटर के नाम से एक नया प्रमुख सम्मेलन केन्द्र मिल रहा है। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि नया केन्द्र आध्यात्मिकता और आधुनिकता के वैभव का अनुभव कराएगा। उन्होंने कहा कि केन्द्र में सांस्कृतिक विविधता और वैचारिक भव्यता शामिल है और यह आध्यात्मिकता और शैक्षणिक कार्यक्रमों पर चर्चा का केन्द्र बिंदु बन जाएगा जहां विद्वान और विशेषज्ञ एक साथ मिलेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी विचार तब सबसे प्रभावी होता है, जब वह कार्य के रूप में आगे बढ़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज साईं हीरा ग्लोबल कन्वेंशन सेंटर को समर्पित करने के अलावा, श्री सत्य साईं ग्लोबल काउंसिल के नेताओं का सम्मेलन भी होगा। प्रधानमंत्री ने आयोजन के विषय 'अभ्यास और प्रेरणा' की सराहना की और इसे प्रभावी और प्रासंगिक बताया। श्री मोदी ने समाज के नेताओं द्वारा अच्छे आचरण के महत्व पर जोर दिया, क्योंकि समाज उनका अनुसरण करता है। उन्होंने कहा कि श्री सत्य साईं का जीवन इसका जीवंत उदाहरण है। “आज भारत भी अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ रहा है। आजादी की सदी की ओर बढ़ते हुए हमने अमृत काल को 'कर्तव्य काल' का नाम दिया है। इन प्रतिज्ञाओं में हमारे आध्यात्मिक मूल्यों के मार्गदर्शन के साथ-साथ भविष्य के संकल्प भी शामिल हैं। इसमें विकास भी है और विरासत भी।)”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, जहां आध्यात्मिक महत्व के स्थानों का कायाकल्प हो रहा है, वहीं भारत प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था में भी अग्रणी है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत अब दुनिया की शीर्ष 5 अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है जो दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप ईको-सिस्टम में सहयोग कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत डिजिटल

टेक्नोलॉजी और 5जी जैसे क्षेत्रों में दुनिया के अग्रणी देशों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया में होने वाले वास्तविक समय के 40 प्रतिशत ऑनलाइन लेनदेन भारत में हो रहे हैं और भक्तों से पूरे पुट्टपर्थी जिले को डिजिटल अर्थव्यवस्था में बदलने का आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सभी मिलकर इस संकल्प को पूरा करें तो श्री सत्य साईं बाबा की अगली जयंती तक पूरा जिला डिजिटल हो जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, "देश में देखा गया परिवर्तन प्रत्येक सामाजिक वर्ग के योगदानों का परिणाम है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्लोबल काउंसिल जैसे संगठन भारत के बारे में अधिक जानने और दुनिया से जुड़ने का एक प्रभावी माध्यम हैं। प्राचीन हस्तलिपियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संतों को बहते पानी की तरह माना जाता है क्योंकि वे अपने विचारों को कभी नहीं छोड़ते और अपने व्यवहार से कभी नहीं थकते। श्री मोदी ने कहा, "संतों का जीवन निरंतर परिवर्तन और उनके प्रयासों से परिभाषित होता है।" उन्होंने कहा कि किसी संत का जन्मस्थान उसके अनुयायियों का निर्धारण नहीं करता है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा, भक्तों के लिए, उनमें से कोई एक सच्चा संत बन जाता है और वह उनकी मान्यताओं और संस्कृतियों का प्रतिनिधि बन जाता है। उन्होंने कहा कि सभी संतों ने भारत में हजारों वर्षों से 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को पोषित किया है। भले ही श्री सत्य साईं बाबा का जन्म पुट्टपर्थी में हुआ था, उनके अनुयायी दुनिया भर में पाए जा सकते हैं और भारत के हर राज्य में उनके संस्थानों और आश्रमों तक पहुंचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि भाषा और संस्कृति से परे सभी भक्त प्रशांति निलयम से जुड़े हुए हैं और यही इच्छा भारत को एक सूत्र में पिरोकर इसे अमर बनाती है।

प्रधानमंत्री ने सेवा की शक्ति पर सत्य साईं को उद्धृत किया। प्रधानमंत्री ने उनके साथ बातचीत करने और सत्य साईं के आशीर्वाद की शरण में रहने के अवसर को कृतज्ञतापूर्वक याद किया। श्री मोदी ने उनके उस सहज भाव को याद किया, जिसके साथ श्री सत्य साईं गहरे संदेश देते थे। उन्होंने 'सभी से प्रेम करो, सभी की सेवा करो'; 'हमेशा मदद करो, कभी चोट नहीं पहुंचाओ'; 'बातें कम, काम ज़्यादा,' 'प्रत्येक अनुभव एक सबक है- प्रत्येक हानि एक लाभ है'। जैसी कालजयी शिक्षाओं को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा, "इन शिक्षाओं में संवेदनशीलता के साथ-साथ जीवन का गहरा दर्शन भी है।" प्रधानमंत्री ने गुजरात में आए भूकंप के दौरान उनके मार्गदर्शन और मदद को याद किया। श्री मोदी ने श्री सत्य साईं के अत्यंत करुणामय आशीर्वाद को याद किया और कहा कि उनके लिए मानवता की सेवा ही ईश्वर की सेवा थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जैसे देश में धार्मिक और आध्यात्मिक संस्थाएं हमेशा सामाजिक कल्याण के केन्द्र में रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब हम अमृत काल के संकल्पों के साथ विकास और विरासत को गति दे रहे हैं, तो सत्य साईं ट्रस्ट जैसी संस्थाओं को उसमें बहुत बड़ी भूमिका निभानी है।

उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि सत्य साईं ट्रस्ट की आध्यात्मिक शाखा बाल विकास जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी के भीतर सांस्कृतिक भारत का निर्माण कर रही है। राष्ट्र निर्माण और समाज के सशक्तिकरण में सत्य साईं ट्रस्ट के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने प्रशांति निलयम में हाई-टेक अस्पताल और वर्षों से मुफ्त शिक्षा के लिए चलाए जा रहे स्कूलों और कॉलेजों का उल्लेख किया। उन्होंने सत्य साईं से जुड़े उन संगठनों का भी जिक्र किया जो समर्पण भाव से काम कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि सत्य साईं सेंट्रल ट्रस्ट दूरदराज के गांवों में निशुल्क पानी उपलब्ध कराने के मानवीय कार्य में भागीदार बन गया है क्योंकि देश 'जल जीवन मिशन' के तहत हर गांव को स्वच्छ जल आपूर्ति से जोड़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने मिशन लाइफ जैसी जलवायु पहलों की वैश्विक स्वीकृति और जी-20 की प्रतिष्ठित अध्यक्षता का उल्लेख किया। उन्होंने एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य विषय पर प्रकाश डाला। भारत में बढ़ती वैश्विक रुचि का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में बनाए गए विश्व रिकॉर्ड के बारे में बात की जहां योग के लिए सबसे अधिक संख्या में विभिन्न देशों के नागरिक एक साथ आए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि योग के साथ-साथ लोग भारत से आयुर्वेद और स्थायी जीवन शैली प्रथाओं को अपना रहे हैं। उन्होंने हाल के दिनों में चोरी हुई कलाकृतियों की वापसी पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत के इन प्रयासों और नेतृत्व के पीछे, हमारी सांस्कृतिक सोच ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए, सत्य साईं ट्रस्ट जैसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संस्थानों के ऐसे सभी प्रयासों में एक महान भूमिका है।”

प्रधानमंत्री ने 'प्रेम तरु' पहल पर प्रकाश डाला जहां अगले 2 वर्षों में 1 करोड़ पेड़ लगाने का संकल्प लिया गया है। श्री मोदी ने सभी से ऐसी पहलों का समर्थन करने के लिए आगे आने का आग्रह किया, चाहे वह वृक्षारोपण हो या प्लास्टिक मुक्त भारत का संकल्प हो। उन्होंने लोगों से सौर ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों से प्रेरित होने का भी आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने आंध्र के लगभग 40 लाख छात्रों को श्री अन्न रागी-जावा से बना भोजन उपलब्ध कराने की सत्य साईं सेंट्रल ट्रस्ट की पहल की सराहना की। श्री अन्न के स्वास्थ्य लाभों को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि अन्य राज्य भी इस तरह की पहल से जुड़ेंगे तो देश को काफी लाभ होगा। “श्री अन्न में स्वास्थ्य भी है, संभावनाएं भी हैं। हमारे सभी प्रयासों से वैश्विक स्तर पर भारत की क्षमता बढ़ेगी और भारत की पहचान मजबूत होगी।''

प्रधानमंत्री ने अंत में कहा, “सत्य साईं का आशीर्वाद हम सभी के साथ है। इस शक्ति के साथ, हम एक विकसित भारत का निर्माण करेंगे और पूरी दुनिया की सेवा करने के अपने संकल्प को पूरा करेंगे।”

पृष्ठभूमि

श्री सत्य साईं सेंट्रल ट्रस्ट ने प्रशांति निलयम, पुट्टपर्थी में एक नई सुविधा, साईं हीरा ग्लोबल कन्वेंशन सेंटर का निर्माण किया है। प्रशांति निलयम श्री सत्य साईं बाबा का मुख्य आश्रम है। परोपकारी श्री रयुको हीरा द्वारा दान किया गया कन्वेंशन सेंटर सांस्कृतिक आदान-प्रदान, आध्यात्मिकता और वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देने की कल्पना का साक्षी है। यह विविध पृष्ठभूमि के लोगों को एकजुट होने, आपस में जुड़ने और श्री सत्य साईं बाबा की शिक्षाओं को खोजने के लिए एक विकसित वातावरण प्रदान करता है। इसकी विश्वस्तरीय सुविधाएं और बुनियादी ढांचा सम्मेलनों, सेमिनारों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सुविधा प्रदान करेगा, जिससे जीवन के सभी क्षेत्रों के व्यक्तियों के बीच संवाद और समझ को बढ़ावा मिलेगा। विशाल परिसर में ध्यान कक्ष, शांत उद्यान और आवास की सुविधाएं भी हैं।

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जब दो लोकतंत्र साथ खड़े होते हैं, तो शांति की आवाज और भी सशक्त हो जाती है: भारत-कनाडा जॉइंट प्रेस मीट में पीएम मोदी
March 02, 2026

   

The Right Honourable Prime Minister मार्क कार्नी,

दोनों देशों के delegates,

मीडिया के साथी,

नमस्कार!

प्रधानमंत्री कार्नी का भारत में स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनकी पहली भारत यात्रा है। हम इसे एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन के रूप में देखते हैं।

पिछले वर्ष कैनेडा में आयोजित G7 बैठक में उन्होंने मेरा और मेरे डेलीगेशन का गर्मजोशी से स्वागत किया था। आज उसी आत्मीयता से उनका स्वागत करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। दुनिया में बहुत कम लोग हैं जिनके CV में दो देशों की central banking लीडर्शिप लिखी हो।

हमारी पहली बैठक से ही हमारे संबंधों में एक नई ऊर्जा, परस्पर विश्वास और सकारात्मकता आई है। सहयोग के हर क्षेत्र में बढ़ते momentum का श्रेय मैं अपने मित्र प्रधानमंत्री कार्नी को देता हूँ।

Friends,

भारत और कैनेडा लोकतान्त्रिक मूल्यों में अटूट विश्वास रखते हैं। हम diversity को celebrate करते हैं। मानवता की भलाई हमारा साझा vision है। यही vision हमें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। आज हमने इस vision को Next Level Partnership में transform करने पर चर्चा की।

हमारा लक्ष्य है कि 2030 तक हमारा व्यापार 50 बिलियन डॉलर तक पहुँचे। आर्थिक सहयोग का पूरा potential unlock करना हमारी प्राथमिकता है। इसलिए हमने Comprehensive Economic Partnership Agreement को जल्द ही finalise करने का निर्णय लिया है। इससे दोनों देशों में निवेश और रोज़गार के नए अवसर बनेंगे।

कैनेडा के pension funds ने भारत में 100 बिलियन डॉलर का निवेश किया है। यह भारत की growth story में उनके गहरे विश्वास का प्रतीक है।

आज हमें दोनों देशों के business लीडर्स से भी मिलेंगे। उनके सुझाव हमारी आर्थिक साझेदारी का रोडमैप तय करेंगे।

Friends,

टेक्नॉलॉजी और इनोवेशन में हम natural partners हैं। With Canada and India innovation partnership, we will turn ideas into global solutions.

पिछले महीने भारत में हुई AI Impact Summit की सफलता में कैनेडा के बहुमूल्य योगदान के लिए मैं प्रधानमंत्री कार्नी का आभार व्यक्त करता हूँ। हम AI के साथ-साथ, quantum, supercomputing, और सेमीकंडक्टर्स में सहयोग बढ़ाएंगे।

Critical Minerals पर आज हुआ MOU रिज़िल्यन्ट supply chains को मजबूती देगा। Space sector में हम दोनों देशों के startups और इंडस्ट्रीज़ को जोड़ेंगे।

Friends,

प्रधानमंत्री कार्नी के लिए एनवायरमेंट कोई अलग एजेंडा नहीं, बल्कि economic stability का हिस्सा रहा है। ऊर्जा के क्षेत्र में हम Next Generation Partnership बना रहे हैं, जिसमें हाइड्रोकार्बन के साथ-साथ renewable energy, green hydrogen, और energy storage पर विशेष बल दिया जाएगा।

हमें ख़ुशी है कि कैनेडा ने International Solar Alliance और Global Biofuel Alliance से जुड़ने का निर्णय लिया है। हमारे साझा प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए हम इस वर्ष India-Canada Renewable Energy and Storage Summit आयोजित करेंगे।

Civil Nuclear Energy में हमने long term uranium supply की लैंडमार्क deal की है। हम Small Modular Reactors और एडवांस्ड reactors पर भी मिलकर काम करेंगे।

कृषि में value addition, agri-technology और खाद्य सुरक्षा हमारी साझा प्राथमिकताएं हैं। इस दिशा में भारत में India-Canada Pulse Protein Centre of Excellence स्थापित किया जाएगा।

Friends,

रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ता सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास और संबंधों की maturity का प्रतीक है। हम defence industries, maritime domain awareness, और मिलिट्री exchanges बढ़ाने पर काम करेंगे। इसी उद्देश्य से आज हमने India-Canada Defence Dialogue की स्थापना करने का निर्णय लिया है।

Friends,

People-to-People ties हमारे संबंधों की असली ताकत हैं। आज हमने इन्हें और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। AI, healthcare, agriculture, और innovation में आज कई universities के बीच नई partnerships की घोषणा हो रही है। हम कैनेडा की universities द्वारा भारत में campus खोलने पर भी सहमत हुए।

इंडीजीनस और tribal communities हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों के बीच आज MOU किया गया है।

Friends,

भारत के लिए कैनेडा इंडो-पैसिफ़िक में महत्वपूर्ण साझेदार है। Indian Ocean Rim Association में Dialogue Partner बनने में उनकी रुचि का हम स्वागत करते हैं। इससे हमारे मेरीटाइम सहयोग को नई गहराई मिलेगी।

हम सहमत हैं कि,Terrorism, Extremism और Radicalisation दोनों देशों के लिए ही नहीं, पूरी मानवता के लिए साझा और गंभीर चुनौतियाँ हैं। इनके विरुद्ध हमारा करीबी सहयोग वैश्विक शान्ति और स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विश्व में चल रहे अनेक तनावों को लेकर भारत की सोच स्पष्ट रही है। हमने सदैव शांति और स्थिरता बनाए रखना का आह्वान किया है। और जब दो लोकतंत्र साथ खड़े होते हैं, तो शांति की आवाज और भी सशक्त हो जाती है।

पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति हमारे लिए गहरी चिंता का विषय है। भारत dialogue और diplomacy के माध्यम से सभी विवादों के समाधान का समर्थन करता है। इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए हम सभी देशों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे।

Excellency,

आपकी यात्रा से हमारे सहयोग के हर क्षेत्र को एक नई ताकत मिली है। भारत के प्रति आपकी गहरी प्रतिबद्धता और दूरदर्शिता के लिए मैं एक बार फिर आपका हार्दिक अभिनंदन करता हूँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद।