नया अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और भूमिगत मेट्रो, मुंबई में यात्रा और परिवहन-संपर्क को बदलने के लिए तैयार हैं: प्रधानमंत्री
एक विकसित भारत वह है, जहाँ गति और प्रगति दोनों हों, जहाँ जन कल्याण सर्वोपरि हो और सरकारी योजनाएं प्रत्येक नागरिक के जीवन को आसान बनाती हों: प्रधानमंत्री
उड़ान योजना का धन्यवाद, पिछले दशक में लाखों लोगों ने अपने सपनों को साकार करते हुए पहली बार हवाई यात्रा की है: प्रधानमंत्री
नए हवाई अड्डों और उड़ान योजना ने हवाई यात्रा को आसान बनाया है और भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बना दिया है: प्रधानमंत्री
आज, भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, हमारी ताकत हमारे युवाओं में निहित है: प्रधानमंत्री
हमारे लिए, हमारे देश और इसके नागरिकों की सुरक्षा व संरक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज महाराष्ट्र के मुंबई में नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन किया और विभिन्न विकास परियोजनाओं का शुभारंभ और लोकार्पण किया। सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए, श्री मोदी ने सभी उपस्थित लोगों का हार्दिक अभिनंदन किया। उन्होंने हाल ही में मनाये गये विजयादशमी और कोजागरी पूर्णिमा के उत्सव का उल्लेख किया और आगामी दिवाली उत्सव के लिए अपनी शुभकामनाएँ दीं। 

मुंबई शहर को अपना दूसरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा मिलने के साथ ही मुंबई का लंबा इंतज़ार खत्म होने को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह हवाई अड्डा इस क्षेत्र को एशिया के सबसे बड़े परिवहन-संपर्क केंद्रों में से एक के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई को अब पूरी तरह से भूमिगत मेट्रो मिल गई है, जिससे यात्रा आसान होगी और यात्रियों का समय बचेगा। श्री मोदी ने भूमिगत मेट्रो को विकासशील भारत का जीवंत प्रतीक बताया और कहा कि मुंबई जैसे व्यस्त शहर में, ऐतिहासिक इमारतों को संरक्षित करते हुए इस उल्लेखनीय मेट्रो का निर्माण भूमिगत रूप से किया गया है। उन्होंने इस परियोजना में शामिल श्रमिकों और इंजीनियरों को बधाई दी। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपने युवाओं के लिए अनगिनत अवसर प्रदान करता है, उन्होंने हाल ही में शुरू की गई 60,000 करोड़ रुपये की पीएम सेतु योजना का ज़िक्र किया, जिसका उद्देश्य देश भर के विभिन्न आईटीआई को उद्योग जगत से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि आज से, महाराष्ट्र सरकार ने सैकड़ों आईटीआई और तकनीकी स्कूलों में नए कार्यक्रम शुरू किए हैं। श्री मोदी ने कहा कि इन पहलों के ज़रिए छात्रों को ड्रोन, रोबोटिक्स, विद्युत-चालित वाहन, सौर ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसी उभरती तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा। उन्होंने महाराष्ट्र के युवाओं को शुभकामनाएँ दीं।

श्री मोदी ने महाराष्ट्र के सपूत, लोकनेता श्री डी. बी. पाटिल को श्रद्धांजलि अर्पित की और समाज और किसानों के प्रति उनकी समर्पित सेवा को याद किया। उन्होंने कहा कि श्री पाटिल की सेवा भावना सभी के लिए प्रेरणा है और उनका जीवन सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले लोगों को प्रेरित करता रहेगा।

श्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा, "आज पूरा देश एक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है—एक ऐसा भारत जो गति और प्रगति दोनों से परिभाषित होता हो, जहाँ जन कल्याण सर्वोपरि हो और सरकारी योजनाएं नागरिकों के जीवन को आसान बनाती हों।" उन्होंने कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में इसी भावना ने देश के हर कोने में विकास प्रयासों का मार्गदर्शन किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वंदे भारत सेमी हाई-स्पीड ट्रेनें पटरियों पर दौड़ती हैं, जब बुलेट ट्रेन परियोजनाओं को गति मिलती है, जब चौड़े राजमार्ग और एक्सप्रेसवे नए शहरों को जोड़ते हैं, जब पहाड़ों को चीरकर लंबी सुरंगें बनाई जाती हैं और जब ऊँचे समुद्री पुल दूर के तटों को जोड़ते हैं, तो भारत की गति और प्रगति स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रगति भारत के युवाओं की आकांक्षाओं को नए पंख देती है।

श्री मोदी ने कहा कि आज के कार्यक्रम ने भारत की विकास यात्रा की गति को जारी रखा है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा एक ऐसी परियोजना है जो एक विकसित भारत के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है। छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि पर निर्मित, इस हवाई अड्डे का आकार कमल के फूल जैसा है, जो संस्कृति और समृद्धि का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह नया हवाई अड्डा महाराष्ट्र के किसानों को यूरोप और मध्य पूर्व के सुपरमार्केट से जोड़ेगा, जिससे ताज़ा उपज, फल, सब्जियां और मत्स्य उत्पाद तेज़ी से वैश्विक बाजारों तक पहुँच सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह हवाई अड्डा आस-पास के लघु और मध्यम उद्योगों की निर्यात लागत को कम करेगा, निवेश को बढ़ावा देगा और नए उद्यमों की स्थापना को प्रोत्साहित करेगा। उन्होंने नए हवाई अड्डे के लिए महाराष्ट्र और मुंबई के लोगों को हार्दिक बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब सपनों को साकार करने का संकल्प हो और नागरिकों को तेज़ी से विकास प्रदान करने की दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो परिणाम अवश्यंभावी होते हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत का विमानन क्षेत्र इस प्रगति का एक प्रमुख प्रमाण है। पदभार ग्रहण करने के बाद 2014 में दिए गए अपने संबोधन को याद करते हुए, श्री मोदी ने अपना विज़न दोहराया कि हवाई चप्पल पहनने वाले भी हवाई यात्रा करने में सक्षम होने चाहिए। इस सपने को साकार करने के लिए, देश भर में नए हवाई अड्डों का निर्माण आवश्यक था। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मिशन को गंभीरता से लिया है और पिछले ग्यारह वर्षों में एक के बाद एक नए हवाई अड्डों का निर्माण किया गया है। 2014 में, भारत में केवल 74 हवाई अड्डे थे; आज यह संख्या 160 को पार कर गई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटे शहरों में हवाई अड्डों के निर्माण ने निवासियों को हवाई यात्रा के नए विकल्प प्रदान किए हैं। वित्तीय बाधाओं को दूर करने के लिए, सरकार ने उड़ान योजना शुरू की, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों के लिए हवाई टिकट को किफ़ायती बनाना है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि पिछले एक दशक में, लाखों लोगों ने इस योजना के तहत पहली बार हवाई यात्रा की है, जिससे उनके लंबे समय से चले आ रहे सपने पूरे हुए हैं।

नए हवाई अड्डों के निर्माण और उड़ान योजना से नागरिकों को मिली सुविधाओं का उल्लेख करते हुए, श्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाज़ार बन गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय एयरलाइंस कंपनियां लगातार विस्तार कर रही हैं और सैकड़ों नए विमानों के ऑर्डर दे रही हैं। यह वृद्धि पायलटों, केबिन क्रू, इंजीनियरों और जमीन पर काम करने वालों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।

इस बात का उल्लेख करते हुए कि जैसे-जैसे विमानों की संख्या बढ़ती है, रखरखाव और मरम्मत कार्यों की माँग भी बढ़ती है, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत इस ज़रूरत को पूरा करने के लिए घरेलू स्तर पर नई सुविधाएँ विकसित कर रहा है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस दशक के अंत तक भारत को एक प्रमुख एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और पूरी तरह से बदलाव (ओवरहाल)) केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत के युवाओं के लिए रोज़गार के कई नए अवसर भी पैदा कर रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और इसकी ताकत इसके युवाओं में निहित है।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हर सरकारी नीति युवाओं के लिए रोज़गार के अधिकतम अवसर पैदा करने पर केंद्रित है। उन्होंने 76,000 करोड़ रुपये की वधावन पत्तन परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि अवसंरचना में निवेश बढ़ने से रोज़गार सृजन होता है। उन्होंने आगे कहा कि जब व्यापार का विस्तार होता है और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को गति मिलती है, तो रोज़गार का सृजन होता है।

श्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत ऐसे मूल्यों में पला-बढ़ा है जहाँ राष्ट्रीय नीति राजनीति का आधार बनती है। सरकार के लिए, अवसंरचना पर खर्च किया गया प्रत्येक रुपया नागरिकों की सुविधा और क्षमता बढ़ाने का एक साधन है। उन्होंने इसकी तुलना देश की उस राजनीतिक धारा से की, जो जनकल्याण से ज़्यादा सत्ता को प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग विकास कार्यों में बाधा डालते हैं और घोटालों व भ्रष्टाचार के ज़रिए परियोजनाओं को पटरी से उतार देते हैं, और देश दशकों से इस तरह के कुशासन का गवाह रहा है।

यह उल्लेख करते हुए कि आज मेट्रो लाइन का उद्घाटन हुआ है, लेकिन यह मेट्रो कुछ पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यों की याद दिलाती है, श्री मोदी ने इसके शिलान्यास समारोह में अपनी भागीदारी को याद किया, जिसने मुंबई के लाखों परिवारों में मुश्किलें कम होने की उम्मीद जगाई थी। उन्होंने टिप्पणी की कि बाद की सरकार ने इस परियोजना को रोक दिया, जिससे देश को हज़ारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और कई वर्षों तक असुविधा का सामना करना पड़ा। प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस मेट्रो लाइन के पूरा होने से दो से ढाई घंटे का सफ़र अब सिर्फ़ 30 से 40 मिनट में पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि मुंबई जैसे शहर में, जहाँ हर मिनट मायने रखता है, नागरिकों को तीन-चार साल तक इस सुविधा से वंचित रखा गया, उन्होंने इसे घोर अन्याय बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा, "पिछले ग्यारह वर्षों से, सरकार नागरिकों के जीवन को आसान बनाने पर ज़ोर दे रही है।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि रेलवे, सड़क, हवाई अड्डे, मेट्रो और इलेक्ट्रिक बसों जैसी सुविधाओं में अभूतपूर्व निवेश किया जा रहा है। उन्होंने इस विकास के उदाहरण के रूप में अटल सेतु और तटीय सड़क कोस्टल रोड जैसी परियोजनाओं का हवाला दिया।

श्री मोदी ने आगे कहा कि निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करने के लिए परिवहन के सभी साधनों को एकीकृत करने के प्रयास चल रहे हैं, जिससे यात्रियों को साधन बदलने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत एक राष्ट्र, एक गतिशीलता के दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मुंबई वन ऐप इस दिशा में एक और कदम है, जो नागरिकों को टिकटों के लिए लंबी कतारों से बचने में सक्षम बनाता है। इस ऐप के ज़रिए, लोकल ट्रेनों, बसों, मेट्रो और टैक्सियों में एक ही टिकट का उपयोग किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की आर्थिक राजधानी और सबसे जीवंत शहरों में से एक, मुंबई, को 2008 के हमलों में आतंकवादियों ने निशाना बनाया था। उन्होंने कहा कि उस समय सत्ता में रही सरकार ने कमज़ोरी का संदेश दिया और आतंकवाद के आगे घुटने टेक दिए। श्री मोदी ने विपक्षी दल के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री द्वारा हाल ही में किए गए एक खुलासे का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मुंबई हमलों के बाद, भारत के सशस्त्र बल पाकिस्तान पर हमला करने के लिए तैयार थे। उन्होंने कहा कि पूरा देश इस कार्रवाई का समर्थन करता है। हालाँकि, विपक्षी नेता के अनुसार, सरकार ने एक विदेशी दबाव के कारण सैन्य कार्रवाई रोक दी। प्रधानमंत्री ने विपक्षी दल से यह स्पष्ट करने की माँग की कि इस निर्णय को किसने प्रभावित किया, उन्होंने कहा कि इस निर्णय ने मुंबई और राष्ट्र की भावनाओं को ठेस पहुँचाई। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि विपक्षी दल की कमज़ोरी ने आतंकवादियों को बढ़ावा दिया और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया, जिसकी कीमत देश को निर्दोष लोगों की जान देकर चुकानी पड़ी।

प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारी सरकार के लिए, राष्ट्र और उसके नागरिकों की सुरक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं है।" उन्होंने कहा कि आज का भारत पूरी ताकत से जवाब देता है और दुश्मन की ज़मीन पर हमला करता है, जैसा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया भर में देखा और स्वीकार किया गया था।

श्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि गरीबों, नव-मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग को सशक्त बनाना राष्ट्रीय प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जब इन परिवारों को सुविधाएँ और सम्मान मिलता है, तो उनकी क्षमताएँ बढ़ती हैं और नागरिकों की सामूहिक शक्ति राष्ट्र को और मज़बूत बनाती है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जीएसटी में हाल ही में किए गए अगली पीढ़ी के सुधारों ने कई वस्तुओं को और अधिक किफ़ायती बना दिया है, जिससे लोगों की क्रय शक्ति और बढ़ी है। बाज़ार के आँकड़ों का हवाला देते हुए, उन्होंने बताया कि इस नवरात्रि मौसम ने कई सालों के बिक्री रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जहाँ रिकॉर्ड संख्या में लोगों ने स्कूटर, बाइक, टेलीविज़न, रेफ्रिजरेटर और वाशिंग मशीन ख़रीदे हैं।

यह कहते हुए कि सरकार नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने और राष्ट्र को मज़बूत बनाने के लिए कदम उठाना जारी रखेगी, श्री मोदी ने सभी से स्वदेशी अपनाने और गर्व से इस बात को कहने का आग्रह किया, "यह स्वदेशी है" - एक ऐसा मंत्र जो हर घर और बाज़ार में गूंजना चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जब हर नागरिक स्वदेशी कपड़े और जूते खरीदता है, स्वदेशी उत्पाद घर लाता है और स्वदेशी उपहार देता है, तो देश की संपत्ति देश में ही रहती है। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय कामगारों के लिए रोज़गार पैदा होगा और युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर पैदा होंगे। प्रधानमंत्री ने लोगों को यह कल्पना करने के लिए प्रोत्साहित किया कि जब पूरा देश स्वदेशी अपनाएगा तो भारत को कितनी बड़ी ताकत मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने यह कहते हुए अपने संबोधन का समापन किया कि भारत के विकास को गति देने में महाराष्ट्र हमेशा से सबसे आगे रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की उनकी सरकारें महाराष्ट्र के प्रत्येक शहर और गांव की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अथक प्रयास करती रहेंगी। उन्होंने विकास पहल के लिए सभी को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री श्री रामदास अठावले, श्री राममोहन नायडू किंजरापु, श्री मुरलीधर मोहोल, भारत में जापान के राजदूत श्री केइची ओनो तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

भारत को एक वैश्विक विमानन केंद्र बनाने के अपने विज़न के अनुरूप, प्रधानमंत्री ने लगभग 19,650 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (एनएमआईए) के पहले चरण का उद्घाटन किया।

नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजना है, जिसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत विकसित किया गया है। मुंबई महानगर क्षेत्र के दूसरे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में, एनएमआईए, छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (सीएसएमआईए) के साथ मिलकर काम करेगा ताकि भीड़भाड़ कम हो और मुंबई को वैश्विक बहु-हवाई अड्डा प्रणालियों की श्रेणी में शामिल किया जा सके। 1160 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले इस हवाई अड्डे को दुनिया के सबसे कुशल हवाई अड्डों में से एक के रूप में डिज़ाइन किया गया है और यह सालाना 9 करोड़ यात्रियों (एमपीपीए) को संभालने में और 3.25 मिलियन मीट्रिक टन माल की ढुलाई करने में सक्षम होगा।

इसकी अनूठी सुविधाओं में एक स्वचालित पीपल मूवर (एपीएम) शामिल है, एक ऐसी परिवहन प्रणाली, जो सभी चार यात्री टर्मिनलों को निर्बाध अंतर-टर्मिनल स्थानांतरण के लिए आपस में जोड़ेगी, इसके साथ ही एक लैंडसाइड एपीएम भी शहरी अवसंरचना को एकीकृत करेगा। सतत प्रथाओं के अनुरूप, हवाई अड्डे में स्थायी विमानन ईंधन (एसएएफ) के लिए समर्पित भंडारण होगा, लगभग 47 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा और पूरे शहर में सार्वजनिक संपर्क के लिए ईवी बस सेवाएँ उपलब्ध होंगी। एनएमआईए देश का पहला हवाई अड्डा होगा, जो वाटर टैक्सी से जुड़ा होगा।

प्रधानमंत्री ने आचार्य अत्रे चौक से कफ परेड तक फैले मुंबई मेट्रो लाइन-3 के चरण 2बी का उद्घाटन किया, जिसका निर्माण लगभग 12,200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया गया है। इसके साथ ही, वे 37,270 करोड़ रुपये से अधिक की कुल लागत वाली पूरी मुंबई मेट्रो लाइन 3 (एक्वा लाइन) राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जो शहर के शहरी परिवहन परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।

मुंबई की पहली और एकमात्र पूर्णतः भूमिगत मेट्रो लाइन के रूप में, यह परियोजना मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में आवागमन को नया स्वरुप देगी और लाखों निवासियों के लिए एक तेज़, अधिक कुशल और आधुनिक परिवहन समाधान प्रदान करेगी।

कफ परेड से आरे जेवीएलआर तक 33.5 किलोमीटर लंबी 27 स्टेशनों वाली मुंबई मेट्रो लाइन-3, प्रतिदिन 13 लाख यात्रियों को सेवा प्रदान करेगी। परियोजना का अंतिम चरण 2बी दक्षिण मुंबई के विरासत और सांस्कृतिक जिलों जैसे फोर्ट, काला घोड़ा और मरीन ड्राइव को निर्बाध परिवहन-संपर्क प्रदान करेगा, साथ ही बॉम्बे उच्च न्यायालय, मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नरीमन पॉइंट सहित प्रमुख प्रशासनिक और वित्तीय केंद्रों तक सीधी पहुँच प्रदान करेगा।

मेट्रो लाइन-3 को रेलवे, हवाई अड्डों, अन्य मेट्रो लाइनों और मोनोरेल सेवाओं सहित परिवहन के अन्य साधनों के साथ कुशल एकीकरण सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे अंतिम स्थान तक परिवहन-संपर्क सुविधा में सुधार होगा और महानगरीय क्षेत्र में भीड़भाड़ कम होगी।

प्रधानमंत्री ने मेट्रो, मोनोरेल, उपनगरीय रेलवे और बस पीटीओ के 11 सार्वजनिक परिवहन ऑपरेटरों (पीटीओ) के लिए एकीकृत कॉमन मोबिलिटी ऐप "मुंबई वन" भी लॉन्च किया। इनमें मुंबई मेट्रो लाइन 2ए और 7, मुंबई मेट्रो लाइन 3, मुंबई मेट्रो लाइन 1, मुंबई मोनोरेल, नवी मुंबई मेट्रो, मुंबई उपनगरीय रेलवे, बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति और परिवहन (बेस्ट), ठाणे नगर परिवहन, मीरा भयंदर नगर परिवहन, कल्याण डोंबिवली नगर परिवहन और नवी मुंबई नगर परिवहन शामिल हैं।

मुंबई वन ऐप यात्रियों को कई लाभ प्रदान करता है, जिसमें शामिल हैं, कई सार्वजनिक परिवहन ऑपरेटरों के लिए एकीकृत मोबाइल टिकट व्यवस्था, डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देकर कतारों से मुक्ति, और कई परिवहन साधनों वाली यात्राओं के लिए एकल डायनामिक टिकट के माध्यम से निर्बाध मल्टीमॉडल परिवहन-संपर्क सुविधा। यह देरी, वैकल्पिक मार्गों और अनुमानित आगमन समय के बारे में वास्तविक समय का अपडेट भी प्रदान करता है, साथ ही यह आस-पास के स्टेशनों, आकर्षणों और दर्शनीय स्थलों की मानचित्र-आधारित जानकारी देता है और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक एसओएस सुविधा भी प्रदान करता है। ये सभी सुविधाएँ मिलकर सुविधा, दक्षता और सुरक्षा को बढ़ाती हैं और पूरे मुंबई में सार्वजनिक परिवहन के अनुभव को बदल देती हैं।

प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार विभाग की एक अग्रणी पहल, अल्पकालिक रोजगार योग्यता कार्यक्रम (एसटीईपी) का भी उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम 400 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और 150 सरकारी तकनीकी उच्च विद्यालयों में लागू किया जाएगा, जो रोजगार योग्यता बढ़ाने के लिए कौशल विकास को उद्योग की आवश्यकताओं के साथ जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। एसटीईपी के तहत 2,500 नए प्रशिक्षण बैच स्थापित किए जाएँगे, जिनमें महिलाओं के लिए 364 विशेष बैच और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), सौर ऊर्जा और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रमों के लिए 408 बैच शामिल हैं। 

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आप सभी को नमस्कार।

यहां हिंदुस्तान टाइम्स समिट में देश-विदेश से अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित हैं। मैं आयोजकों और जितने साथियों ने अपने विचार रखें, आप सभी का अभिनंदन करता हूं। अभी शोभना जी ने दो बातें बताई, जिसको मैंने नोटिस किया, एक तो उन्होंने कहा कि मोदी जी पिछली बार आए थे, तो ये सुझाव दिया था। इस देश में मीडिया हाउस को काम बताने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता। लेकिन मैंने की थी, और मेरे लिए खुशी की बात है कि शोभना जी और उनकी टीम ने बड़े चाव से इस काम को किया। और देश को, जब मैं अभी प्रदर्शनी देखके आया, मैं सबसे आग्रह करूंगा कि इसको जरूर देखिए। इन फोटोग्राफर साथियों ने इस, पल को ऐसे पकड़ा है कि पल को अमर बना दिया है। दूसरी बात उन्होंने कही और वो भी जरा मैं शब्दों को जैसे मैं समझ रहा हूं, उन्होंने कहा कि आप आगे भी, एक तो ये कह सकती थी, कि आप आगे भी देश की सेवा करते रहिए, लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स ये कहे, आप आगे भी ऐसे ही सेवा करते रहिए, मैं इसके लिए भी विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

इस बार समिट की थीम है- Transforming Tomorrow. मैं समझता हूं जिस हिंदुस्तान अखबार का 101 साल का इतिहास है, जिस अखबार पर महात्मा गांधी जी, मदन मोहन मालवीय जी, घनश्यामदास बिड़ला जी, ऐसे अनगिनत महापुरूषों का आशीर्वाद रहा, वो अखबार जब Transforming Tomorrow की चर्चा करता है, तो देश को ये भरोसा मिलता है कि भारत में हो रहा परिवर्तन केवल संभावनाओं की बात नहीं है, बल्कि ये बदलते हुए जीवन, बदलती हुई सोच और बदलती हुई दिशा की सच्ची गाथा है।

साथियों,

आज हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस भी है। मैं सभी भारतीयों की तरफ से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

Friends,

आज हम उस मुकाम पर खड़े हैं, जब 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। इन 25 सालों में दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। फाइनेंशियल क्राइसिस देखी हैं, ग्लोबल पेंडेमिक देखी हैं, टेक्नोलॉजी से जुड़े डिसरप्शन्स देखे हैं, हमने बिखरती हुई दुनिया भी देखी है, Wars भी देख रहे हैं। ये सारी स्थितियां किसी न किसी रूप में दुनिया को चैलेंज कर रही हैं। आज दुनिया अनिश्चितताओं से भरी हुई है। लेकिन अनिश्चितताओं से भरे इस दौर में हमारा भारत एक अलग ही लीग में दिख रहा है, भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। जब दुनिया में slowdown की बात होती है, तब भारत growth की कहानी लिखता है। जब दुनिया में trust का crisis दिखता है, तब भारत trust का pillar बन रहा है। जब दुनिया fragmentation की तरफ जा रही है, तब भारत bridge-builder बन रहा है।

साथियों,

अभी कुछ दिन पहले भारत में Quarter-2 के जीडीपी फिगर्स आए हैं। Eight परसेंट से ज्यादा की ग्रोथ रेट हमारी प्रगति की नई गति का प्रतिबिंब है।

साथियों,

ये एक सिर्फ नंबर नहीं है, ये strong macro-economic signal है। ये संदेश है कि भारत आज ग्लोबल इकोनॉमी का ग्रोथ ड्राइवर बन रहा है। और हमारे ये आंकड़े तब हैं, जब ग्लोबल ग्रोथ 3 प्रतिशत के आसपास है। G-7 की इकोनमीज औसतन डेढ़ परसेंट के आसपास हैं, 1.5 परसेंट। इन परिस्थितियों में भारत high growth और low inflation का मॉडल बना हुआ है। एक समय था, जब हमारे देश में खास करके इकोनॉमिस्ट high Inflation को लेकर चिंता जताते थे। आज वही Inflation Low होने की बात करते हैं।

साथियों,

भारत की ये उपलब्धियां सामान्य बात नहीं है। ये सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, ये एक फंडामेंटल चेंज है, जो बीते दशक में भारत लेकर आया है। ये फंडामेंटल चेंज रज़ीलियन्स का है, ये चेंज समस्याओं के समाधान की प्रवृत्ति का है, ये चेंज आशंकाओं के बादलों को हटाकर, आकांक्षाओं के विस्तार का है, और इसी वजह से आज का भारत खुद भी ट्रांसफॉर्म हो रहा है, और आने वाले कल को भी ट्रांसफॉर्म कर रहा है।

साथियों,

आज जब हम यहां transforming tomorrow की चर्चा कर रहे हैं, हमें ये भी समझना होगा कि ट्रांसफॉर्मेशन का जो विश्वास पैदा हुआ है, उसका आधार वर्तमान में हो रहे कार्यों की, आज हो रहे कार्यों की एक मजबूत नींव है। आज के Reform और आज की Performance, हमारे कल के Transformation का रास्ता बना रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण दूंगा कि हम किस सोच के साथ काम कर रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं कि भारत के सामर्थ्य का एक बड़ा हिस्सा एक लंबे समय तक untapped रहा है। जब देश के इस untapped potential को ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेंगे, जब वो पूरी ऊर्जा के साथ, बिना किसी रुकावट के देश के विकास में भागीदार बनेंगे, तो देश का कायाकल्प होना तय है। आप सोचिए, हमारा पूर्वी भारत, हमारा नॉर्थ ईस्ट, हमारे गांव, हमारे टीयर टू और टीय़र थ्री सिटीज, हमारे देश की नारीशक्ति, भारत की इनोवेटिव यूथ पावर, भारत की सामुद्रिक शक्ति, ब्लू इकोनॉमी, भारत का स्पेस सेक्टर, कितना कुछ है, जिसके फुल पोटेंशियल का इस्तेमाल पहले के दशकों में हो ही नहीं पाया। अब आज भारत इन Untapped पोटेंशियल को Tap करने के विजन के साथ आगे बढ़ रहा है। आज पूर्वी भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और इंडस्ट्री पर अभूतपूर्व निवेश हो रहा है। आज हमारे गांव, हमारे छोटे शहर भी आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे हैं। हमारे छोटे शहर, Startups और MSMEs के नए केंद्र बन रहे हैं। हमारे गाँवों में किसान FPO बनाकर सीधे market से जुड़ें, और कुछ तो FPO’s ग्लोबल मार्केट से जुड़ रहे हैं।

साथियों,

भारत की नारीशक्ति तो आज कमाल कर रही हैं। हमारी बेटियां आज हर फील्ड में छा रही हैं। ये ट्रांसफॉर्मेशन अब सिर्फ महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, ये समाज की सोच और सामर्थ्य, दोनों को transform कर रहा है।

साथियों,

जब नए अवसर बनते हैं, जब रुकावटें हटती हैं, तो आसमान में उड़ने के लिए नए पंख भी लग जाते हैं। इसका एक उदाहरण भारत का स्पेस सेक्टर भी है। पहले स्पेस सेक्टर सरकारी नियंत्रण में ही था। लेकिन हमने स्पेस सेक्टर में रिफॉर्म किया, उसे प्राइवेट सेक्टर के लिए Open किया, और इसके नतीजे आज देश देख रहा है। अभी 10-11 दिन पहले मैंने हैदराबाद में Skyroot के Infinity Campus का उद्घाटन किया है। Skyroot भारत की प्राइवेट स्पेस कंपनी है। ये कंपनी हर महीने एक रॉकेट बनाने की क्षमता पर काम कर रही है। ये कंपनी, flight-ready विक्रम-वन बना रही है। सरकार ने प्लेटफॉर्म दिया, और भारत का नौजवान उस पर नया भविष्य बना रहा है, और यही तो असली ट्रांसफॉर्मेशन है।

साथियों,

भारत में आए एक और बदलाव की चर्चा मैं यहां करना ज़रूरी समझता हूं। एक समय था, जब भारत में रिफॉर्म्स, रिएक्शनरी होते थे। यानि बड़े निर्णयों के पीछे या तो कोई राजनीतिक स्वार्थ होता था या फिर किसी क्राइसिस को मैनेज करना होता था। लेकिन आज नेशनल गोल्स को देखते हुए रिफॉर्म्स होते हैं, टारगेट तय है। आप देखिए, देश के हर सेक्टर में कुछ ना कुछ बेहतर हो रहा है, हमारी गति Constant है, हमारी Direction Consistent है, और हमारा intent, Nation First का है। 2025 का तो ये पूरा साल ऐसे ही रिफॉर्म्स का साल रहा है। सबसे बड़ा रिफॉर्म नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी का था। और इन रिफॉर्म्स का असर क्या हुआ, वो सारे देश ने देखा है। इसी साल डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में भी बहुत बड़ा रिफॉर्म हुआ है। 12 लाख रुपए तक की इनकम पर ज़ीरो टैक्स, ये एक ऐसा कदम रहा, जिसके बारे में एक दशक पहले तक सोचना भी असंभव था।

साथियों,

Reform के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, अभी तीन-चार दिन पहले ही Small Company की डेफिनीशन में बदलाव किया गया है। इससे हजारों कंपनियाँ अब आसान नियमों, तेज़ प्रक्रियाओं और बेहतर सुविधाओं के दायरे में आ गई हैं। हमने करीब 200 प्रोडक्ट कैटगरीज़ को mandatory क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर से बाहर भी कर दिया गया है।

साथियों,

आज के भारत की ये यात्रा, सिर्फ विकास की नहीं है। ये सोच में बदलाव की भी यात्रा है, ये मनोवैज्ञानिक पुनर्जागरण, साइकोलॉजिकल रेनसां की भी यात्रा है। आप भी जानते हैं, कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आगे नहीं बढ़ सकता। दुर्भाग्य से लंबी गुलामी ने भारत के इसी आत्मविश्वास को हिला दिया था। और इसकी वजह थी, गुलामी की मानसिकता। गुलामी की ये मानसिकता, विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में एक बहुत बड़ी रुकावट है। और इसलिए, आज का भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाने के लिए काम कर रहा है।

साथियों,

अंग्रेज़ों को अच्छी तरह से पता था कि भारत पर लंबे समय तक राज करना है, तो उन्हें भारतीयों से उनके आत्मविश्वास को छीनना होगा, भारतीयों में हीन भावना का संचार करना होगा। और उस दौर में अंग्रेजों ने यही किया भी। इसलिए, भारतीय पारिवारिक संरचना को दकियानूसी बताया गया, भारतीय पोशाक को Unprofessional करार दिया गया, भारतीय त्योहार-संस्कृति को Irrational कहा गया, योग-आयुर्वेद को Unscientific बता दिया गया, भारतीय अविष्कारों का उपहास उड़ाया गया और ये बातें कई-कई दशकों तक लगातार दोहराई गई, पीढ़ी दर पीढ़ी ये चलता गया, वही पढ़ा, वही पढ़ाया गया। और ऐसे ही भारतीयों का आत्मविश्वास चकनाचूर हो गया।

साथियों,

गुलामी की इस मानसिकता का कितना व्यापक असर हुआ है, मैं इसके कुछ उदाहरण आपको देना चाहता हूं। आज भारत, दुनिया की सबसे तेज़ी से ग्रो करने वाली मेजर इकॉनॉमी है, कोई भारत को ग्लोबल ग्रोथ इंजन बताता है, कोई, Global powerhouse कहता है, एक से बढ़कर एक बातें आज हो रही हैं।

लेकिन साथियों,

आज भारत की जो तेज़ ग्रोथ हो रही है, क्या कहीं पर आपने पढ़ा? क्या कहीं पर आपने सुना? इसको कोई, हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कहता है क्या? दुनिया की तेज इकॉनमी, तेज ग्रोथ, कोई कहता है क्या? हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कब कहा गया? जब भारत, दो-तीन परसेंट की ग्रोथ के लिए तरस गया था। आपको क्या लगता है, किसी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को उसमें रहने वाले लोगों की आस्था से जोड़ना, उनकी पहचान से जोड़ना, क्या ये अनायास ही हुआ होगा क्या? जी नहीं, ये गुलामी की मानसिकता का प्रतिबिंब था। एक पूरे समाज, एक पूरी परंपरा को, अन-प्रोडक्टिविटी का, गरीबी का पर्याय बना दिया गया। यानी ये सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि, भारत की धीमी विकास दर का कारण, हमारी हिंदू सभ्यता और हिंदू संस्कृति है। और हद देखिए, आज जो तथाकथित बुद्धिजीवी हर चीज में, हर बात में सांप्रदायिकता खोजते रहते हैं, उनको हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ में सांप्रदायिकता नज़र नहीं आई। ये टर्म, उनके दौर में किताबों का, रिसर्च पेपर्स का हिस्सा बना दिया गया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने भारत में मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम को कैसे तबाह कर दिया, और हम इसको कैसे रिवाइव कर रहे हैं, मैं इसके भी कुछ उदाहरण दूंगा। भारत गुलामी के कालखंड में भी अस्त्र-शस्त्र का एक बड़ा निर्माता था। हमारे यहां ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज़ का एक सशक्त नेटवर्क था। भारत से हथियार निर्यात होते थे। विश्व युद्धों में भी भारत में बने हथियारों का बोल-बाला था। लेकिन आज़ादी के बाद, हमारा डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम तबाह कर दिया गया। गुलामी की मानसिकता ऐसी हावी हुई कि सरकार में बैठे लोग भारत में बने हथियारों को कमजोर आंकने लगे, और इस मानसिकता ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस importers के रूप में से एक बना दिया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के साथ भी यही किया। भारत सदियों तक शिप बिल्डिंग का एक बड़ा सेंटर था। यहां तक कि 5-6 दशक पहले तक, यानी 50-60 साल पहले, भारत का फोर्टी परसेंट ट्रेड, भारतीय जहाजों पर होता था। लेकिन गुलामी की मानसिकता ने विदेशी जहाज़ों को प्राथमिकता देनी शुरु की। नतीजा सबके सामने है, जो देश कभी समुद्री ताकत था, वो अपने Ninety five परसेंट व्यापार के लिए विदेशी जहाज़ों पर निर्भर हो गया है। और इस वजह से आज भारत हर साल करीब 75 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 6 लाख करोड़ रुपए विदेशी शिपिंग कंपनियों को दे रहा है।

साथियों,

शिप बिल्डिंग हो, डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग हो, आज हर सेक्टर में गुलामी की मानसिकता को पीछे छोड़कर नए गौरव को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने एक बहुत बड़ा नुकसान, भारत में गवर्नेंस की अप्रोच को भी किया है। लंबे समय तक सरकारी सिस्टम का अपने नागरिकों पर अविश्वास रहा। आपको याद होगा, पहले अपने ही डॉक्यूमेंट्स को किसी सरकारी अधिकारी से अटेस्ट कराना पड़ता था। जब तक वो ठप्पा नहीं मारता है, सब झूठ माना जाता था। आपका परिश्रम किया हुआ सर्टिफिकेट। हमने ये अविश्वास का भाव तोड़ा और सेल्फ एटेस्टेशन को ही पर्याप्त माना। मेरे देश का नागरिक कहता है कि भई ये मैं कह रहा हूं, मैं उस पर भरोसा करता हूं।

साथियों,

हमारे देश में ऐसे-ऐसे प्रावधान चल रहे थे, जहां ज़रा-जरा सी गलतियों को भी गंभीर अपराध माना जाता था। हम जन-विश्वास कानून लेकर आए, और ऐसे सैकड़ों प्रावधानों को डी-क्रिमिनलाइज किया है।

साथियों,

पहले बैंक से हजार रुपए का भी लोन लेना होता था, तो बैंक गारंटी मांगता था, क्योंकि अविश्वास बहुत अधिक था। हमने मुद्रा योजना से अविश्वास के इस कुचक्र को तोड़ा। इसके तहत अभी तक 37 lakh crore, 37 लाख करोड़ रुपए की गारंटी फ्री लोन हम दे चुके हैं देशवासियों को। इस पैसे से, उन परिवारों के नौजवानों को भी आंत्रप्रन्योर बनने का विश्वास मिला है। आज रेहड़ी-पटरी वालों को भी, ठेले वाले को भी बिना गारंटी बैंक से पैसा दिया जा रहा है।

साथियों,

हमारे देश में हमेशा से ये माना गया कि सरकार को अगर कुछ दे दिया, तो फिर वहां तो वन वे ट्रैफिक है, एक बार दिया तो दिया, फिर वापस नहीं आता है, गया, गया, यही सबका अनुभव है। लेकिन जब सरकार और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है, तो काम कैसे होता है? अगर कल अच्छी करनी है ना, तो मन आज अच्छा करना पड़ता है। अगर मन अच्छा है तो कल भी अच्छा होता है। और इसलिए हम एक और अभियान लेकर आए, आपको सुनकर के ताज्जुब होगा और अभी अखबारों में उसकी, अखबारों वालों की नजर नहीं गई है उस पर, मुझे पता नहीं जाएगी की नहीं जाएगी, आज के बाद हो सकता है चली जाए।

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि आज देश के बैंकों में, हमारे ही देश के नागरिकों का 78 thousand crore रुपया, 78 हजार करोड़ रुपए Unclaimed पड़ा है बैंको में, पता नहीं कौन है, किसका है, कहां है। इस पैसे को कोई पूछने वाला नहीं है। इसी तरह इन्श्योरेंश कंपनियों के पास करीब 14 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास करीब 3 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। 9 हजार करोड़ रुपए डिविडेंड का पड़ा है। और ये सब Unclaimed पड़ा हुआ है, कोई मालिक नहीं उसका। ये पैसा, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का है, और इसलिए, जिसके हैं वो तो भूल चुका है। हमारी सरकार अब उनको ढूंढ रही है देशभर में, अरे भई बताओ, तुम्हारा तो पैसा नहीं था, तुम्हारे मां बाप का तो नहीं था, कोई छोड़कर तो नहीं चला गया, हम जा रहे हैं। हमारी सरकार उसके हकदार तक पहुंचने में जुटी है। और इसके लिए सरकार ने स्पेशल कैंप लगाना शुरू किया है, लोगों को समझा रहे हैं, कि भई देखिए कोई है तो अता पता। आपके पैसे कहीं हैं क्या, गए हैं क्या? अब तक करीब 500 districts में हम ऐसे कैंप लगाकर हजारों करोड़ रुपए असली हकदारों को दे चुके हैं जी। पैसे पड़े थे, कोई पूछने वाला नहीं था, लेकिन ये मोदी है, ढूंढ रहा है, अरे यार तेरा है ले जा।

साथियों,

ये सिर्फ asset की वापसी का मामला नहीं है, ये विश्वास का मामला है। ये जनता के विश्वास को निरंतर हासिल करने की प्रतिबद्धता है और जनता का विश्वास, यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। अगर गुलामी की मानसिकता होती तो सरकारी मानसी साहबी होता और ऐसे अभियान कभी नहीं चलते हैं।

साथियों,

हमें अपने देश को पूरी तरह से, हर क्षेत्र में गुलामी की मानसिकता से पूर्ण रूप से मुक्त करना है। अभी कुछ दिन पहले मैंने देश से एक अपील की है। मैं आने वाले 10 साल का एक टाइम-फ्रेम लेकर, देशवासियों को मेरे साथ, मेरी बातों को ये कुछ करने के लिए प्यार से आग्रह कर रहा हूं, हाथ जोड़कर विनती कर रहा हूं। 140 करोड़ देशवसियों की मदद के बिना ये मैं कर नहीं पाऊंगा, और इसलिए मैं देशवासियों से बार-बार हाथ जोड़कर कह रहा हूं, और 10 साल के इस टाइम फ्रैम में मैं क्या मांग रहा हूं? मैकाले की जिस नीति ने भारत में मानसिक गुलामी के बीज बोए थे, उसको 2035 में 200 साल पूरे हो रहे हैं, Two hundred year हो रहे हैं। यानी 10 साल बाकी हैं। और इसलिए, इन्हीं दस वर्षों में हम सभी को मिलकर के, अपने देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहना चाहिए।

साथियों,

मैं अक्सर कहता हूं, हम लीक पकड़कर चलने वाले लोग नहीं हैं। बेहतर कल के लिए, हमें अपनी लकीर बड़ी करनी ही होगी। हमें देश की भविष्य की आवश्यकताओं को समझते हुए, वर्तमान में उसके हल तलाशने होंगे। आजकल आप देखते हैं कि मैं मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान पर लगातार चर्चा करता हूं। शोभना जी ने भी अपने भाषण में उसका उल्लेख किया। अगर ऐसे अभियान 4-5 दशक पहले शुरू हो गए होते, तो आज भारत की तस्वीर कुछ और होती। लेकिन तब जो सरकारें थीं उनकी प्राथमिकताएं कुछ और थीं। आपको वो सेमीकंडक्टर वाला किस्सा भी पता ही है, करीब 50-60 साल पहले, 5-6 दशक पहले एक कंपनी, भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने के लिए आई थी, लेकिन यहां उसको तवज्जो नहीं दी गई, और देश सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में इतना पिछड़ गया।

साथियों,

यही हाल एनर्जी सेक्टर की भी है। आज भारत हर साल करीब-करीब 125 लाख करोड़ रुपए के पेट्रोल-डीजल-गैस का इंपोर्ट करता है, 125 लाख करोड़ रुपया। हमारे देश में सूर्य भगवान की इतनी बड़ी कृपा है, लेकिन फिर भी 2014 तक भारत में सोलर एनर्जी जनरेशन कपैसिटी सिर्फ 3 गीगावॉट थी, 3 गीगावॉट थी। 2014 तक की मैं बात कर रहा हूं, जब तक की आपने मुझे यहां लाकर के बिठाया नहीं। 3 गीगावॉट, पिछले 10 वर्षों में अब ये बढ़कर 130 गीगावॉट के आसपास पहुंच चुकी है। और इसमें भी भारत ने twenty two गीगावॉट कैपेसिटी, सिर्फ और सिर्फ rooftop solar से ही जोड़ी है। 22 गीगावाट एनर्जी रूफटॉप सोलर से।

साथियों,

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने, एनर्जी सिक्योरिटी के इस अभियान में देश के लोगों को सीधी भागीदारी करने का मौका दे दिया है। मैं काशी का सांसद हूं, प्रधानमंत्री के नाते जो काम है, लेकिन सांसद के नाते भी कुछ काम करने होते हैं। मैं जरा काशी के सांसद के नाते आपको कुछ बताना चाहता हूं। और आपके हिंदी अखबार की तो ताकत है, तो उसको तो जरूर काम आएगा। काशी में 26 हजार से ज्यादा घरों में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के सोलर प्लांट लगे हैं। इससे हर रोज, डेली तीन लाख यूनिट से अधिक बिजली पैदा हो रही है, और लोगों के करीब पांच करोड़ रुपए हर महीने बच रहे हैं। यानी साल भर के साठ करोड़ रुपये।

साथियों,

इतनी सोलर पावर बनने से, हर साल करीब नब्बे हज़ार, ninety thousand मीट्रिक टन कार्बन एमिशन कम हो रहा है। इतने कार्बन एमिशन को खपाने के लिए, हमें चालीस लाख से ज्यादा पेड़ लगाने पड़ते। और मैं फिर कहूंगा, ये जो मैंने आंकडे दिए हैं ना, ये सिर्फ काशी के हैं, बनारस के हैं, मैं देश की बात नहीं बता रहा हूं आपको। आप कल्पना कर सकते हैं कि, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, ये देश को कितना बड़ा फायदा हो रहा है। आज की एक योजना, भविष्य को Transform करने की कितनी ताकत रखती है, ये उसका Example है।

वैसे साथियों,

अभी आपने मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग के भी आंकड़े देखे होंगे। 2014 से पहले तक हम अपनी ज़रूरत के 75 परसेंट मोबाइल फोन इंपोर्ट करते थे, 75 परसेंट। और अब, भारत का मोबाइल फोन इंपोर्ट लगभग ज़ीरो हो गया है। अब हम बहुत बड़े मोबाइल फोन एक्सपोर्टर बन रहे हैं। 2014 के बाद हमने एक reform किया, देश ने Perform किया और उसके Transformative नतीजे आज दुनिया देख रही है।

साथियों,

Transforming tomorrow की ये यात्रा, ऐसी ही अनेक योजनाओं, अनेक नीतियों, अनेक निर्णयों, जनआकांक्षाओं और जनभागीदारी की यात्रा है। ये निरंतरता की यात्रा है। ये सिर्फ एक समिट की चर्चा तक सीमित नहीं है, भारत के लिए तो ये राष्ट्रीय संकल्प है। इस संकल्प में सबका साथ जरूरी है, सबका प्रयास जरूरी है। सामूहिक प्रयास हमें परिवर्तन की इस ऊंचाई को छूने के लिए अवसर देंगे ही देंगे।

साथियों,

एक बार फिर, मैं शोभना जी का, हिन्दुस्तान टाइम्स का बहुत आभारी हूं, कि आपने मुझे अवसर दिया आपके बीच आने का और जो बातें कभी-कभी बताई उसको आपने किया और मैं तो मानता हूं शायद देश के फोटोग्राफरों के लिए एक नई ताकत बनेगा ये। इसी प्रकार से अनेक नए कार्यक्रम भी आप आगे के लिए सोच सकते हैं। मेरी मदद लगे तो जरूर मुझे बताना, आईडिया देने का मैं कोई रॉयल्टी नहीं लेता हूं। मुफ्त का कारोबार है और मारवाड़ी परिवार है, तो मौका छोड़ेगा ही नहीं। बहुत-बहुत धन्यवाद आप सबका, नमस्कार।