प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कल, 29 अगस्त को बिहार के ऐतिहासिक शहर राजगीर में शुरू होने वाले पुरुष हॉकी एशिया कप 2025 की पूर्व संध्या पर सभी प्रतिभागी टीमों, खिलाड़ियों, अधिकारियों और एशिया भर के समर्थकों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। श्री मोदी ने बिहार की सराहना की, जिसने हाल के दिनों में एक जीवंत खेल केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई है और खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025, एशिया रग्बी अंडर-20 सेवन्स चैंपियनशिप 2025, आईएसटीएएफ सेपकटकरा विश्व कप 2024 और महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2024 जैसे प्रमुख टूर्नामेंटों की मेजबानी की है।

आज एक्स पर एक थ्रेड पोस्ट में, प्रधानमंत्री ने कहा,

“कल, 29 अगस्त (जो राष्ट्रीय खेल दिवस और मेजर ध्यानचंद की जयंती भी है), को पुरुष हॉकी एशिया कप 2025 बिहार के ऐतिहासिक शहर राजगीर में शुरू हो रहा है। मैं भाग लेने वाली सभी टीमों, खिलाड़ियों, अधिकारियों और एशिया भर के समर्थकों को अपनी शुभकामनाएं देता हूँ।”

“भारत और एशिया भर के लाखों लोगों के दिलों में हॉकी का हमेशा एक विशेष स्थान रहा है। मुझे विश्वास है कि यह टूर्नामेंट रोमांचक मैचों, असाधारण प्रतिभा के प्रदर्शन और यादगार पलों से भरपूर होगा, जो खेल प्रेमियों की भावी पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।”

"यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि बिहार पुरुष हॉकी एशिया कप 2025 की मेज़बानी कर रहा है। हाल के दिनों में, बिहार ने एक जीवंत खेल केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई है, जहाँ खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025, एशिया रग्बी अंडर-20 सेवन्स चैंपियनशिप 2025, आईएसटीएएफ सेपकटकरा विश्व कप 2024 और महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2024 जैसे प्रमुख टूर्नामेंटों का आयोजन हुआ है। यह निरंतर गति बिहार की बढ़ती अवसंरचना, जमीनी स्तर पर उत्साह और विविध खेल विधाओं में प्रतिभाओं को निखारने की प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करती है।"

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कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।