छत्तीसगढ़ में 34,400 करोड़ रुपये से भी अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, राष्ट्र को समर्पित और शिलान्यास किया
ये परियोजनाएं सड़क, रेलवे, कोयला, बिजली और सौर ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंधित हैं
एनटीपीसी के लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट चरण-I को राष्ट्र को समर्पित किया और एनटीपीसी के लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट चरण-II की आधारशिला रखी
‘छत्तीसगढ़ का विकास और जन-जन का कल्याण ही डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता है’
‘विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण, गरीब, किसान, युवा और नारीशक्ति के सशक्तिकरण से होगा’
‘सरकार उपभोक्ताओं का बिजली बिल जीरो करने का प्रयास कर रही है’
‘मोदी के लिए आप ही उनका परिवार हैं और आपके सपने उनके संकल्प हैं’
‘आने वाले 5 वर्षों में जब भारत दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक ताकत बनेगा, तो छत्तीसगढ़ भी विकास की नई बुलंदी पर होगा’
‘जब भ्रष्टाचार समाप्त होता है, तो विकास शुरू होता है और रोजगार के अपार अवसर सृजित होते हैं’

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘विकसित भारत विकसित छत्तीसगढ़’ कार्यक्रम को संबोधित किया। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने 34,400 करोड़ रुपये से भी अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया, राष्ट्र को समर्पित किया और शिलान्यास किया। ये परियोजनाएं सड़क, रेलवे, कोयला, बिजली और सौर ऊर्जा सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंधित हैं।

इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के समस्‍त विधानसभा क्षेत्रों की ओर से इस कार्यक्रम से जुड़े लाखों परिवारों को शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि युवाओं, महिलाओं, गरीबों और किसानों के सशक्तिकरण से विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण होगा और आधुनिक अवसंरचना से विकसित छत्तीसगढ़ की नींव मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि आज जिन परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास किया जा रहा है, वे छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए नए अवसर सृजित करेंगे।

प्रधानमंत्री ने आज एनटीपीसी के सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट को राष्ट्र को समर्पित करने और 1600 मेगावाट क्षमता वाले इसके चरण-2 का शिलान्यास करने का जिक्र करते हुए कहा कि अब नागरिकों को कम खर्च पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ को सौर ऊर्जा का केंद्र बनाने के सरकार के प्रयास पर भी प्रकाश डाला और राजनंदगांव एवं भिलाई में सौर ऊर्जा संयंत्र राष्‍ट्र को समर्पित करने का उल्लेख किया, जो यहां तक कि रात के समय भी आसपास के क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति करने की क्षमता रखते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, जिसमें वर्तमान में देश भर में 1 करोड़ घर शामिल हैं, के बारे में जानकारी देते हुए कहा, ‘सरकार उपभोक्ताओं के बिजली बिल को जीरो करने का प्रयास कर रही है’। उन्होंने बताया कि सरकार घरों की छतों पर सौर पैनल स्थापित करने के लिए सीधे बैंक खातों में वित्तीय सहायता प्रदान करेगी, जिसके तहत 300 यूनिट बिजली मुफ्त की जाएगी और उत्पादित अतिरिक्त बिजली सरकार द्वारा वापस खरीदी जाएगी, जिससे नागरिकों को हजारों रुपये की अतिरिक्त आय होगी। उन्होंने बंजर कृषि भूमि पर छोटे पैमाने पर सौर संयंत्र स्थापित करने में किसानों की सहायता करके अन्नदाता को ऊर्जादाता में बदलने पर सरकार के विशेष जोर का भी उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ में डबल इंजन सरकार द्वारा गारंटी पूरा करने की सराहना की। उन्होंने बताया कि राज्य के लाखों किसानों को दो साल से लंबित बोनस मिल चुका है। डबल इंजन सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों का पारिश्रमिक बढ़ाने की चुनावी गारंटी भी पूरी कर दी है। उन्होंने कहा कि पीएम आवास और हर घर नल से जल जैसी योजनाओं ने नई रफ्तार पकड़ ली है। विभिन्न परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं की जांच की जा रही है और प्रधानमंत्री ने महतारी वंदन योजना के लिए राज्य की महिलाओं को बधाई दी।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मेहनती किसान, प्रतिभाशाली युवा और प्राकृतिक खजाना है, यानी वह सब कुछ है जो ‘विकसित’ होने के लिए अत्‍यंत आवश्यक है। उन्होंने इस राज्य में कम प्रगति होने के लिए पिछली सरकारों की अदूरदर्शी और स्वार्थी वंशवादी राजनीति की आलोचना की। उन्होंने कहा, '’मोदी के लिए आप ही उनका परिवार हैं और आपके सपने उनके संकल्प हैं। इसलिए मैं आज विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ की बात कर रहा हूं।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘140 करोड़ भारतीयों में से प्रत्येक को इस सेवक ने अपनी प्रतिबद्धता और कड़ी मेहनत की गारंटी दी है’’ और उन्‍होंने दुनिया में भारत की छवि पर प्रत्येक भारतीय को गर्व करने की अपनी 2014 की गारंटी को स्‍मरण किया। इसी तरह गरीब जनता का पैसा लूटने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस पैसे का इस्तेमाल गरीबों के कल्याण की योजना में किया जा रहा है. उन्होंने गरीबों के लिए मुफ्त राशन, मुफ्त इलाज, सस्ती दवाएं, आवास, पाइप से जल, गैस कनेक्शन और शौचालय का जिक्र किया। विकसित भारत संकल्प यात्रा में मोदी की गारंटी वाली गाड़ी गांव-गांव तक गई।

प्रधानमंत्री ने 10 साल पूर्व घोषित मोदी की गारंटी की याद दिलाते हुए हमारे पूर्वजों के सपनों और आकांक्षाओं का भारत बनाने का जिक्र किया और बताया कि आज ऐसा विकसित भारत उभर रहा है। उन्होंने डिजिटल इंडिया पहल के बारे में चर्चा की और तत्क्षण भुगतान, बैंकिंग प्रणाली और प्राप्त भुगतान के लिए सूचनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि यह आज एक वास्तविकता बन गई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से देश के लोगों के बैंक खातों में 34 लाख करोड़ रुपये से अधिक ट्रांसफर किये हैं, मुद्रा योजना के तहत युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के लिए 28 लाख करोड़ रुपये, पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 2.75 लाख करोड़ रुपये की सहायता दी गयी है। उन्होंने पारदर्शिता की कमी के कारण पिछली सरकारों के दौरान धन हस्तांतरण में होने वाले रिसाव की ओर भी इशारा किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सुशासन के परिणामस्वरूप स्वास्थ्य सुविधाओं और शिक्षा के बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ नई सड़कों और रेल लाइनों के निर्माण पर प्रकाश डालते हुए कहा, "जब भ्रष्टाचार समाप्त होता है, तो विकास शुरू होता है और रोजगार के कई अवसर पैदा होते हैं।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे कार्यों से विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण होगा और अगले 5 वर्षों में जब भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरेगा, तो छत्तीसगढ़ भी विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा। प्रधानमंत्री ने अंत में कहा, “खासकर पहली बार के मतदाताओं और स्कूल एवं कॉलेज में पढ़ने वाले युवाओं के लिए यह एक बड़ा अवसर है। विकसित छत्तीसगढ़ उनके सपनों को पूरा करेगा।”

 

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने एनटीपीसी के लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट, स्टेज- I (2x800 मेगावाट) को राष्ट्र को समर्पित किया और छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एनटीपीसी के लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट, स्टेज- II (2x800 मेगावाट) की आधारशिला रखी। जबकि स्टेशन का चरण-I लगभग 15,800 करोड़ रुपये के निवेश से बनाया गया है, परियोजना के चरण-II का निर्माण चरण-I परिसर की उपलब्ध भूमि पर किया जाएगा, इस प्रकार विस्तार के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं होगी, और इसमें 15,530 करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी। अत्यधिक कुशल सुपर क्रिटिकल तकनीक (स्टेज-I के लिए) और अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक (स्टेज-II के लिए) से सुसज्जित, यह परियोजना कम मात्रा में विशिष्ट कोयले की खपत और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन सुनिश्चित करेगी। जबकि स्टेज- I और II दोनों से 50 प्रतिशत बिजली छत्तीसगढ़ राज्य को आवंटित की जाती है, यह परियोजना गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, दमन और दीव, दादरा और नगर हवेली सहित अन्य जैसे कई अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में बिजली परिदृश्य में सुधार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

प्रधानमंत्री ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की तीन प्रमुख फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिनकी कुल लागत 600 करोड़ रुपये से अधिक है। वे कोयले की तेज, पर्यावरण-अनुकूल और कुशल मशीनीकृत निकासी में मदद करेंगे। इन परियोजनाओं में एसईसीएल के दीपका क्षेत्र और छाल में दीपका ओसीपी कोल हैंडलिंग प्लांट और एसईसीएल के रायगढ़ क्षेत्र में बरौद ओसीपी कोल हैंडलिंग प्लांट शामिल हैं। एफएमसी परियोजनाएं पिथेड से साइलो, बंकर और कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से तेजी से लोडिंग सिस्टम से सुसज्जित कोयला हैंडलिंग संयंत्रों तक कोयले की मशीनीकृत आवाजाही सुनिश्चित करती हैं। सड़क के माध्यम से कोयले के परिवहन को कम करके, ये परियोजनाएं कोयला खदानों के आसपास यातायात की भीड़, सड़क दुर्घटनाओं और पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव को कम करके कोयला खदानों के आसपास रहने वाले लोगों के जीवन को आसान बनाने में मदद करेंगी। इससे पिट हेड से रेलवे साइडिंग तक कोयला ले जाने वाले ट्रकों द्वारा डीजल की खपत को कम करके परिवहन लागत में भी बचत हो रही है।

क्षेत्र में अक्षय ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक कदम उठाते हुए, प्रधानमंत्री ने राजनांदगांव में लगभग 900 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सौर पीवी परियोजना का उद्घाटन किया। यह परियोजना सालाना अनुमानित 243.53 मिलियन यूनिट ऊर्जा उत्पन्न करेगी और 25 वर्षों में लगभग 4.87 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करेगी, जो उसी अवधि में लगभग 8.86 मिलियन पेड़ों द्वारा एकत्रित कार्बन के बराबर है।

क्षेत्र में रेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करते हुए, प्रधानमंत्री ने लगभग 300 करोड़ रु. की लागत से बनने वाले बिलासपुर-उसलापुर फ्लाईओवर का लोकार्पण किया। इससे यातायात की भारी भीड़ कम हो जाएगी और बिलासपुर से कटनी की ओर जाने वाला कोयला यातायात की रुकावट दूर हो जाएगी। प्रधानमंत्री ने भिलाई में 50 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र का भी लोकार्पण किया। इससे ट्रेनों के परिचालन में सौर ऊर्जा के उपयोग में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने एनएच-49 के 55.65 किमी लंबे खंड के पक्की हिस्सों वाले दो लेन के पुनर्निर्माण और उन्नयन के कार्य को राष्ट्र को समर्पित किया। यह परियोजना दो महत्वपूर्ण शहरों बिलासपुर और रायगढ़ के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में मदद करेगी। प्रधानमंत्री ने एनएच-130 के 52.40 किमी लंबे खंड को पक्के हिस्सों के साथ दो लेन में पुनर्निर्माण और उन्नयन के कार्य को भी राष्ट्र को समर्पित किया। यह परियोजना अंबिकापुर शहर की रायपुर और कोरबा शहर के साथ कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में मदद करेगी और क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देगी।

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Text of PM’s address at the News18 Rising Bharat Summit
February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।