एनसीसी ने निरंतर भारत के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा दी है: प्रधानमंत्री
भारत के युवा वैश्विक कल्याण की एक शक्ति हैं: प्रधानमंत्री
पिछले 10 वर्षों में हमने भारत में युवाओं के सामने आने वाली कई बाधाओं को दूर करने का काम किया है, इससे भारत के युवाओं का सामर्थ्य बढ़ा है: प्रधानमंत्री
इस अमृत काल में हमें एक ही लक्ष्य ध्यान में रखना है- विकसित भारत, हमारे हर निर्णय एवं हमारे हर कार्य की कसौटी विकसित भारत ही होनी चाहिए: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज दिल्ली के करियप्पा परेड ग्राउंड में वार्षिक राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) पीएम रैली को संबोधित किया। श्री मोदी ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का अवलोकन किया और सर्वश्रेष्ठ कैडेट पुरस्कार प्रदान किये। एनसीसी दिवस के अवसर पर उपस्थित लोगों को बधाई देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि 18 मित्र देशों के लगभग 150 कैडेट यहां उपस्थित हैं और उन्होंने उनका स्वागत किया। उन्होंने मेरा युवा भारत (माई भारत) पोर्टल के माध्यम से वर्चुअली जुड़ने वाले देश भर के युवाओं को बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने कैडेटों को संबोधित करते हुए कहा, “गणतंत्र दिवस परेड के लिए चुना जाना अपने आप में एक उपलब्धि है।” उन्होंने कहा कि इस वर्ष का गणतंत्र दिवस विशेष है क्योंकि एक गणतंत्र के रूप में भारत ने 75 वर्ष पूरे कर लिये हैं। उन्होंने आगे कहा कि ये यादें जीवन भर साथ रहेंगी और कैडेट इस महत्वपूर्ण अवसर का हिस्सा बनने पर गर्व महसूस करेंगे। उन्होंने पुरस्कार जीतने वाले कैडेटों को बधाई दी। यह बताते हुए कि आज उन्हें एनसीसी के कई अभियानों को हरी झंडी दिखाने का अवसर मिला, प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे अभियान भारत की विरासत को युवाओं की आकांक्षाओं से जोड़ते हैं। उन्होंने इन अभियानों में शामिल सभी कैडेटों को शुभकामनाएं दीं।

श्री मोदी ने कहा कि एनसीसी की स्थापना लगभग भारत की आजादी के समय ही हुई थी। उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि एनसीसी की यात्रा देश के संविधान से भी पहले शुरू हो गयी थी। श्री मोदी ने कहा कि गणतंत्र के 75 वर्षों की अवधि में, संविधान ने लोकतंत्र को प्रेरित किया है और नागरिक कर्तव्यों के महत्व पर जोर दिया है। इसी तरह, एनसीसी ने भी भारत के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा दी है और उन्हें अनुशासन का महत्व सिखाया है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि सरकार ने हाल के वर्षों में एनसीसी के दायरे और जिम्मेदारियों का विस्तार करने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। उन्होंने कहा कि एनसीसी का विस्तार सीमावर्ती क्षेत्रों और तटीय जिलों तक कर दिया गया है और 170 से अधिक सीमावर्ती तालुकाओं तथा लगभग 100 तटीय तालुकाओं में अब एनसीसी की उपस्थिति है। श्री मोदी ने इन जिलों में युवा एनसीसी कैडेटों को विशेष रूप से प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी लेने के लिए तीनों सशस्त्र बलों को बधाई दी। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस पहल से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले हजारों युवाओं को लाभ हुआ है। यह बताते हुए कि एनसीसी में किए गये सुधारों का प्रभाव कैडेटों की बढ़ी हुई संख्या से स्पष्ट है, श्री मोदी ने कहा कि 2014 में लगभग 14 लाख एनसीसी कैडेट थे और आज यह संख्या 20 लाख तक पहुंच गई है। इनमें बालिका कैडेटों की संख्या 8 लाख से अधिक है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि एनसीसी कैडेट आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और खेल की दुनिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि एनसीसी दुनिया का सबसे बड़ा वर्दीधारी युवा संगठन है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के युवा 21वीं सदी में देश और दुनिया के विकास का निर्धारण करेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि “भारत के युवा सिर्फ भारत के विकास में ही योगदान नहीं दे रहे हैं, बल्कि वे वैश्विक कल्याण की एक शक्ति भी हैं”। समाचार पत्रों में हाल ही में प्रकाशित इस आशय की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कि पिछले दशक में भारतीय युवाओं ने 1.5 लाख स्टार्टअप और 100 से अधिक यूनिकॉर्न बनाए हैं, प्रधानमंत्री ने कहा कि 200 से अधिक उन प्रमुख वैश्विक कंपनियों का नेतृत्व भारतीय मूल के लोग कर रहे हैं, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में खरबों रुपये का योगदान दे रहीं हैं और लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद कर रहीं हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय वैज्ञानिक, शोधकर्ता और शिक्षक वैश्विक प्रगति को गति दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में, भारत के युवाओं की प्रतिभा एवं उनके सामर्थ्य के बिना दुनिया के भविष्य की कल्पना करना कठिन है और यही कारण है कि वह उन्हें ‘वैश्विक कल्याण की एक शक्ति' के रूप में संदर्भित करते हैं।

इस तथ्य को रेखांकित करते हुए कि किसी व्यक्ति या देश की ताकत तभी बढ़ती है जब अनावश्यक बाधाएं दूर होती हैं, प्रधानमंत्री ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि पिछले 10 वर्षों में, भारत में युवाओं के सामने आने वाली कई बाधाएं दूर की गईं हैं, जिससे युवाओं और देश, दोनों की क्षमताओं में वृद्धि हुई है।. उन्होंने कहा कि 2014 में, कई युवा लगभग 10-12 वर्ष के रहे होंगे और उन्हें अपने परिवार से उस समय की स्थितियों के बारे में पूछना चाहिए। प्रधानमंत्री ने दस्तावेज़ सत्यापन का एक उदाहरण दिया, जहां पहले प्रवेश, परीक्षा और भर्तियों के लिए दस्तावेज़ों को एक राजपत्रित अधिकारी द्वारा सत्यापित करना पड़ता था, जिससे काफी परेशानी होती थी। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार ने अब दस्तावेजों के स्व-सत्यापन की अनुमति देकर इस समस्या का हल कर दिया है। उन्होंने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने एवं उसे हासिल करने में युवाओं के सामने आने वाली कठिनाइयों और छात्रवृत्ति निधि के वितरण में आने वाली कई समस्याओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि एकल-खिड़की प्रणाली की शुरूआत ने इन पुरानी समस्याओं को समाप्त कर दिया है। विषय चयन से संबंधित एक अन्य प्रमुख समस्या की ओर इशारा करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि पहले बोर्ड परीक्षा के बाद एक बार विषय चुन लेने के बाद उसे बदलना कठिन होता था, लेकिन अब नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने विद्यार्थियों को अपनी पसंद के अनुसार विषय बदलने की सुविधा प्रदान की है।

यह बताते हुए कि एक दशक पहले युवाओं के लिए बैंक से आसानी से ऋण प्राप्त करना कठिन था क्योंकि बैंक ऋण देने से पहले गारंटी मांगते थे, श्री मोदी ने कहा कि जब वह 2014 में प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने इस बात का आश्वासन दिया कि वह देश के युवाओं के लिए इसकी जिम्मेदारी लेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने मुद्रा योजना शुरू की, जो बिना बैंक गारंटी के ऋण प्रदान करती है। इस योजना के बारे में विस्तार से बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि शुरुआत में, 10 लाख रुपये तक का ऋण बिना गारंटी के दिया जाता था और सरकार के तीसरे कार्यकाल में, यह सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछले 10 वर्षों में, मुद्रा योजना के तहत 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की गई है, जिससे लाखों युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद मिली है।

युवाओं के भविष्य के लिए चुनावी प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने कहा कि दो दिन पहले राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया गया और कई युवा पहली बार मतदाता बने। उन्होंने कहा कि मतदाता दिवस का उद्देश्य मतदाताओं की अधिकतम भागीदारी को प्रोत्साहित करना है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत में दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव कराया जाता है, लेकिन हर कुछ महीनों में होने वाले निरंतर चुनाव चुनौतियां पैदा करते हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होते थे, लेकिन यह पैटर्न बदल गया, जिससे देश के लिए महत्वपूर्ण समस्याएं पैदा हो गईं। श्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि लगातार चुनावों के लिए मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की आवश्यकता होती है और इसमें कई कार्य शामिल होते हैं, जिससे अक्सर शिक्षकों के कर्तव्य, पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनावों से शासन संबंधी कठिनाइयां भी पैदा होती हैं और इसलिए, देश में वर्तमान में “एक राष्ट्र, एक चुनाव” की अवधारणा को लेकर बहस चल रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के युवाओं से इस बहस में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया, क्योंकि इसका सीधा प्रभाव उनके भविष्य पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में नई सरकार बनाने की तारीख नियत होती है और हर चार साल में चुनाव होते हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह कॉलेजों या स्कूलों में छात्र परिषद के चुनाव एक ही बार में पूरे हो जाते हैं। उन्होंने युवाओं को हर कुछ महीनों में होने वाले चुनाव से उनकी पढ़ाई पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में सोचने और “एक राष्ट्र, एक चुनाव” को लेकर चल रही बहस में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया।

यह बताते हुए कि 21वीं सदी की दुनिया तेजी से बदल रही है और इस बदलाव के साथ सामंजस्य बनाए रखना आवश्यक है, श्री मोदी ने इस परिवर्तन में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में, चाहे वह कला हो, अनुसंधान हो या फिर नवाचार, युवाओं को अपने अभिनव विचारों एवं रचनात्मकता के माध्यम से नई ऊर्जा का समावेश करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने एक अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में राजनीति के महत्व पर प्रकाश डाला और युवाओं को नए सुझावों एवं नवीन विचारों के साथ राजनीति में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यह समय की मांग है। उन्होंने लाल किले से एक लाख युवाओं को राजनीति में शामिल होने के अपने आह्वान को दोहराया। प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं की शक्ति का उल्लेख किया, जैसा कि "विकसित भारत: युवा नेता संवाद" के दौरान देखा गया। उन्होंने कहा कि देश भर के लाखों युवाओं ने विकसित भारत के निर्माण के संबंध में बहुमूल्य सुझाव दिए हैं और अपने विचार व्यक्त किए हैं।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, हर पेशे के लोगों का एक ही लक्ष्य था - भारत की आजादी। उन्होंने कहा कि इसी तरह इस अमृत काल में ‘विकसित भारत’ ही हमारा एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर निर्णय एवं कार्य को इस लक्ष्य की कसौटी पर कसना चाहिए। प्रधानमंत्री ने पंच प्रण को याद रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। ये प्रण हैं: विकसित भारत का निर्माण करना, गुलामी की मानसिकता से खुद को मुक्त करना, अपनी विरासत पर गर्व करना, भारत की एकता के लिए काम करना और अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाना। उन्होंने कहा कि ये पांच प्रण हर भारतीय का मार्गदर्शन करेंगे और उन्हें प्रेरणा देंगे। श्री मोदी ने इस कार्यक्रम के दौरान पेश की गई सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की प्रशंसा की और कहा कि ये प्रस्तुतियां “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को दर्शाती हैं, जो देश की एक महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने प्रयाग में चल रहे महाकुंभ को “एकता का कुंभ” बताते हुए कहा कि यह भी देश की एकता का प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की प्रगति के लिए यह एकता आवश्यक है।

अपने कर्तव्यों को सदैव याद रखने के महत्व पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि एक भव्य एवं दिव्य विकसित भारत की नींव कर्तव्यों के आधार पर ही रखी जायेगी। अपने संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने देश के कैडेटों एवं युवाओं को प्रेरित करने के लिए अपनी लिखी कुछ पंक्तियों को याद किया और सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर, केन्द्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय रक्षा राज्यमंत्री श्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह, चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल गुरबीरपाल सिंह और रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

इस वर्ष गणतंत्र दिवस शिविर में कुल 2361 एनसीसी कैडेटों ने भाग लिया, जिसमें 917 बालिका कैडेट शामिल थीं। यह बालिका कैडेटों की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी थी। पीएम रैली में इन कैडेटों की भागीदारी नई दिल्ली में एक महीने तक चलने वाले एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर 2025 के सफल समापन का प्रतीक है। इस वर्ष की एनसीसी पीएम रैली की थीम ‘युवा शक्ति, विकसित भारत’ थी।

इस दिन 800 से अधिक कैडेटों द्वारा राष्ट्र निर्माण के प्रति एनसीसी की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने वाला एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। 18 मित्र देशों के 144 युवा कैडेटों की भागीदारी ने इस वर्ष की रैली से संबंधित उत्साह में वृद्धि की।

एनसीसी पीएम रैली में देश भर से मेरा युवा (माई) भारत, शिक्षा मंत्रालय और जनजातीय कार्य के 650 से अधिक स्वयंसेवक भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।

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Prime Minister Condoles the Passing of Shri Maroof Raza Ji
February 26, 2026

Prime Minister Narendra Modi has expressed grief over the passing of Shri Maroof Raza Ji, honoring his legacy in the fields of journalism.

The Prime Minister stated that Shri Maroof Raza Ji made a rich contribution to the world of journalism. He noted that Shri Raza enriched public discourse through his nuanced understanding of defence, national security, and strategic affairs.

Expressing his sorrow, the Prime Minister said he is pained by his passing and extended his condolences to his family and friends.
The Prime Minister shared on X:

“Shri Maroof Raza Ji made a rich contribution to the world of journalism. He enriched public discourse with his nuanced understanding of defence, national security as well as strategic affairs. Pained by his passing. Condolences to his family and friends”