Your Excellency, Prime Minister मेलोनी,

दोनों देशों के delegates,

मीडिया के साथियों,

नमस्कार!

प्रधान मंत्री मेलोनी की पहली भारत यात्रा पर, मैं उनका और उनके डेलिगेशन का भारत में हार्दिक स्वागत करता हूँ। पिछले वर्ष के चुनावों में इटली के नागरिकों ने उन्हें प्रथम महिला एवं सबसे युवा प्रधान मंत्री के रूप में चुना। इस एतिहासिक उपलब्धि पर मैं उन्हें सभी भारतवासियों की ओर से बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ। उनके कार्यभार संभालने के कुछ दिनों बाद ही बाली में G20 समिट के दौरान हमारी पहली बैठक हुई थी।

Friends,

हमारी आज की चर्चाएं बहुत ही सार्थक और बहुत ही उपयोगी रहीं। इस वर्ष भारत और इटली अपने द्विपक्षीय संबंधों की 75वीं वर्षगाँठ मना रहे हैं। और इस अवसर पर हमने भारत-इटली साझेदारी को Strategic Partnership का दर्जा देने का निर्णय लिया है। हमने अपने आर्थिक संबंधों को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया। हमारे "Make in India” और "आत्मनिर्भर भारत” अभियान से भारत में निवेश के अपार अवसर खुल रहे हैं। हमने Renewable Energy, Green Hydrogen, IT, semiconductors, telecom, space जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। भारत और इटली के बीच एक Startup Bridge की स्थापना की घोषणा आज हम कर रहे हैं, जिसका हम स्वागत करते हैं।

Friends,

एक और क्षेत्र हैं जहां दोनों देश एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं, और वह है रक्षा सहयोग का। भारत में defence manufacturing sector में co-production और co-development के अवसर बन रहे हैं, जो दोनों देशों के लिए लाभदायक हो सकते हैं। हमने दोनों देशों की सेनाओं के बीच नियमित रूप से joint exercises और training courses आयोजित करने का भी निर्णय लिया। आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ लड़ाई में भारत और इटली कंधे से कंधा मिला कर चल रहे हैं। हमने इस सहयोग को और मज़बूत करने पर विस्तारपूर्वक चर्चा की।

Friends,

भारत और इटली के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और people-to-people संबंध हैं। हमने वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुसार इन संबंधों को एक नया स्वरुप और नई ऊर्जा देने पर विचार विमर्श किया। दोनों देशों के बीच Migration and Mobility Partnership Agreement पर चल रही वार्ता का विशेष महत्व है। इस समझौते के शीघ्र समापन से हमारे people to people रिश्ते और सुदृढ़ होंगे। हमने दोनों देशों के उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। भारत और इटली के संबंधों की 75वीं वर्षगाँठ मनाने के लिए हमने एक Action Plan बनाने का निर्णय लिया। इससे हम दोनों देशों की विविधता, इतिहास, science and technology, innovation, sports और अन्य क्षेत्रों में उपलब्धियों को वैश्विक पटल पर showcase कर सकेंगे।

Friends,

कोविड महामारी और यूक्रेन संघर्ष से उत्पन्न हुए food, fuel और fertilizers के crisis से सभी देश प्रभावित हुए हैं। विकासशील देशों पर इनका विशेष रूप से नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। हमने इस बारे मे अपनी साझा चिंता व्यक्त की। इन समस्याओं के समाधान के लिए हमने संयुक्त प्रयासों पर बल दिया। भारत की G20 अध्यक्षता में भी हम इस विषय को प्राथमिकता दे रहे हैं। यूक्रेन संघर्ष के शुरुआत से ही भारत ने यह स्पष्ट किया है कि इस विवाद को केवल डायलॉग और डिप्लोमेसी के ज़रिये ही सुलझाया जा सकता है। और भारत किसी भी शांति प्रक्रिया में योगदान देने के लिए पूर्ण रूप से तैयार है। हम Indo-Pacific में इटली की सक्रीय भागीदारी का भी स्वागत करते हैं। यह बहुत ख़ुशी की बात है कि इटली ने Indo-Pacific Ocean Initiative में शामिल होने का निर्णय लिया है। इससे हम Indo-Pacific में अपना सहयोग बढ़ाने के लिए ठोस विषयों की पहचान कर सकेंगे। वैश्विक वास्तविकताओं को बेहतर तरीके से दर्शाने के लिए मल्टी-लेटरल institutions में सुधार आवश्यक है। हमने इस विषय पर भी विचार विमर्श किया।

Excellency,

आज शाम आप रायसीना डायलॉग में Chief Guest के तौर पर शामिल होंगी। वहाँ आपका संबोधन सुनने के लिए हम सभी उत्सुक हैं। आपकी इस भारत यात्रा और हमारी उपयोगी चर्चा के लिए आपका, आपकी delegation का बहुत-बहुत धन्यवाद

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आज दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही है: G7 समिट में पीएम मोदी
June 16, 2026

राष्ट्रपति मैक्रों,
Your Excellencies,

नमस्कार!

G-7 समिट में हमारे गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए मैं राष्ट्रपति मैक्रों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।

Friends,

आज का विश्व पहले से कहीं अधिक inter-connected और inter-dependent है। किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती। Mobility, data, capital, technology, ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं।

ऐसे समय में Partnerships का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। लेकिन साझेदारियाँ तभी सफल होती हैं जब उनके केंद्र में विश्वास हो। आज सबसे महत्वपूर्ण Strategic Asset कोई mineral, technology या market नहीं, बल्कि आपसी विश्वास है।

विश्वास कि टेक्नॉलजी और supply chains को हथियार के रूप में नहीं, global good के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। विश्वास कि विकास के अवसर कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे। विश्वास कि वैश्विक संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे।

Friends,

पिछली सदी में मानवता को दो विश्व युद्धों से गुज़रना पड़ा। अनेक बलिदानों के बाद विश्व समुदाय ने शांति, स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए व्यवस्थाएं विकसित की। इन व्यवस्थाओं का आधार भी trust ही था।

किन्तु अनेक दशकों से, अनेक पीढ़ियों के योगदान से बनाए गए विश्वास को आज चोट पहुँच रही है। कोविड ने हमें आईना दिखाया कि trust और solidarity के दावे कितने खोखले थे।

Today the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust. And the future of our partnerships depends on building this trust.

अमेरिका के राष्ट्रपति रोनल्ड रेगन ने कहा था: Trust but Verify. यह आज के समय में भी प्रासंगिक है। भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप trusted rules based order का निर्माण करें।

Friends,

भारत ने सदैव विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है। हमारे सभी प्रयास “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” यानि, welfare and happiness for all के मूल सिद्धांत पर आधारित रहे हैं।

भारत का अनुभव दिखाता है कि विकास सबसे अधिक प्रभावी तब होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा हो। यही सिद्धांत हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का भी आधार है। इसी सोच के साथ भारत ने International Solar Alliance, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस, Mission LiFE, और “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी वैश्विक पहलों को आगे बढ़ाया है।

संकट के समय भारत ने First Responder के रूप में सभी देशों की सहायता करना अपना दायित्व समझा है। कोविड महामारी के दौरान भारत ने डेढ़ सौ से अधिक देशों को दवाइयाँ और vaccines उपलब्ध कराईं।

श्रीलंका में cyclone हो, अफगानिस्तान में भूकंप हो, मोज़ाम्बिक में floods हों, या क्यूबा और जमैका में hurricane, भारत ने सदैव "Humanity First" के सिद्धांत पर कार्य किया है। हमारी विकास साझेदारियाँ भी इसी भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। हमारे प्रयास पार्टनर देशों में capacity building और कौशल विकास पर केन्द्रित रहे हैं।

भारत का मानना है: The true test of partnership is not what we build for others, but what we enable others to build for themselves.

Friends,

आज ग्लोबल साउथ की विश्व समुदाय से बहुत उम्मीदें हैं। किन्तु उनकी अपेक्षा सहारे की नहीं, साथ की है। वे वैश्विक विकास के लाभार्थी नहीं, उसके भागीदार बनना चाहते हैं।

हमें donor–recipient की सोच से आगे बढ़कर, equal पार्टनर्स के रूप में काम करना होगा। उनके पास-पास नहीं, साथ-साथ चलना होगा। साझेदारी को dependency के बजाय, dignity से जोड़ना होगा। इन प्रयासों से हम भावी पीढ़ियों के सतत विकास की मजबूत नींव रख सकेंगे।

Friends,

अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक बन सकती हैं, जब हम साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करें। भारत का दृढ विश्वास है कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे तनावों और युद्धों का स्थायी समाधान dialogue, diplomacy और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्ग से ही संभव है।

हम west asia में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष से west asia में हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। होर्मुज़ स्ट्रेट में maritime ट्रेड में आई बाधा के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। भारत के कई civilians को जान गंवानी पड़ी। Global maritime ट्रेड के माध्यम से सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, और Seafarers बिना भय के अपना कार्य कर सकें।

Friends,

भारत इन विषयों पर सभी पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

बहुत-बहुत धन्यवाद।