“ये भारत का समय है"
“दुनिया के हर विकास विशेषज्ञ समूह में चर्चा है कि कैसे 10 साल में भारत परिवर्तित चुका है"
“विश्व आज भारत पर विश्वास करता है”
“हमारे समग्र नीति निर्माण के 'प्रथम सिद्धांत' हैं- स्थिरता, सामंजस्य और निरंतरता”
“भारत एक कल्याणकारी देश है, हमने सुनिश्चित किया कि हर पात्र लाभार्थी तक सरकार खुद पहुंचे”
“हमारे प्रत्येक बजट में चार मुख्य कारक- पूंजीगत व्यय के रूप में लाभकारी व्यय, कल्याणकारी योजनाओं पर अभूतपूर्व निवेश, फिजूलखर्ची पर नियंत्रण और वित्तीय अनुशासन”
“परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना हमारी सरकार की पहचान बन गई है”
“हम 20वीं सदी की चुनौतियों से निपट रहे हैं और 21वीं सदी की आकांक्षाओं को भी पूरा कर रहे हैं”
“2014 के पहले के 10 साल में देश जिन नीतियों पर चला उनके बारे में संसद के इसी सत्र में श्वेत पत्र प्रस्तुत किया गया है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के होटल ताज पैलेस में ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट 2024 को संबोधित किया।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत ग्लोबल बिजनेस समिट 2024 द्वारा चुने गए 'विघटन, विकास और विविधीकरण' विषय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए की। प्रधानमंत्री ने विश्व में भारत के प्रति बढ़ते विश्वास पर गौर करते हुए कहा, “व्यवधान, विकास और विविधीकरण” की इस चर्चा में हर कोई इस बात पर सहमत है कि ये भारत का समय है।” दावोस में भारत के प्रति अभूतपूर्व उत्साह का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने भारत को अभूतपूर्व आर्थिक सफलता की कहानी कहे जाने, उसके डिजिटल और फिजीकल बुनियादी ढांचे के नई ऊंचाई पर होने और दुनिया के हर क्षेत्र में भारत का दबदबा होने के बारे में हुई चर्चा को याद किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा भारत की क्षमता की तुलना ‘रेजिंग बुल’ से किए जाने को भी याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के हर विकास विशेषज्ञ समूह में चर्चा है कि कैसे 10 साल में भारत परिवर्तित चुका है, यह भारत के प्रति दुनिया के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। श्री मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन - ' यही समय है, सही समय है' को याद करते हुए कहा, “भारत के सामर्थ्य और सफलता को लेकर दुनिया में ऐसी सकारात्मक भावना पहले कभी नहीं थी।”

इस बात को रेखांकित करते हुए कि किसी भी देश की विकास यात्रा में एक समय ऐसा आता है जब सभी परिस्थितियां उसके पक्ष में होती हैं, प्रधानमंत्री ने कहा कि यही वह समय होता है, जब वो देश अपने आपको, आने वाली कई-कई सदियों के लिए मजबूत बना लेता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “मैं भारत के लिए आज वही समय देख रहा हूं। यह समयावधि अभूतपूर्व है। एक तरह से, देश का पवित्र चक्र शुरू हो गया है।” उन्होंने लगातार बढ़ती विकास दर और घटते राजकोषीय घाटे, निर्यात बढ़ने और चालू खाता घाटा कम रहने, उत्पादक निवेश में रिकॉर्ड ऊंचाई और महंगाई नियंत्रण में होने, अवसर और आय दोनों के बढ़ने, घटती गरीबी, बढ़ती खपत और कॉर्पोरेट लाभप्रदता तथा बैंक एनपीए में रिकॉर्ड कमी आने का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्पादन और उत्पादकता दोनों बढ़ रहे हैं।

इस वर्ष के अंतरिम बजट को आर्थिक विशेषज्ञों और पत्रकारों द्वारा मिली प्रशंसा और उनके द्वारा इसे 'लोकलुभावन बजट' नहीं करार दिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने इस समीक्षा के लिए उन्हें धन्यवाद दिया, लेकिन साथ ही बजट के 'प्रथम सिद्धांतों' या समग्र नीति निर्माण की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया। "वे प्रथम सिद्धांत हैं - स्थिरता, सामंजस्य और निरंतरता”। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि यह बजट इन्हीं सिद्धांतों का विस्तार है।

कोरोना वायरस महामारी को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उसके बाद का पूरा कालखंड भी, पूरे विश्व में सरकारों के लिए एक बड़ी परीक्षा बनकर आया था, जहां किसी को कोई अंदाजा नहीं था कि स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था की इस दोहरी चुनौती से निपटा कैसे जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस दौरान भारत ने जान बचाने को प्राथमिकता दी। उन्होंने "जान है तो जहान है” का उल्लेख करते हुए जीवन रक्षक संसाधनों को इकट्ठा करने और लोगों को खतरों के बारे में जागरूक करने के सरकार के प्रयासो पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार ने गरीबों के लिए मुफ्त राशन उपलब्ध कराने का फैसला किया, मेड इन इंडिया टीकों पर ध्यान केंद्रित किया और टीकों की त्वरित उपलब्धता भी सुनिश्चित की। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने महिलाओं के बैंक खातों में सीधे पैसे भेजने, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे उद्योगपतियों को वित्तीय सहायता देने और खेती से संबंधित मुद्दों से निपटने के उपायों का उल्लेख करते हुए कहा, "सरकार ने स्वास्थ्य और आजीविका दोनों मांगों को हल किया।" उन्होंने कहा कि सरकार ने आपदा को अवसर में बदलने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री ने मांग बढ़ाने और बड़े व्यवसायों की मदद के लिए अधिक पैसा छापने की उस समय की विशेषज्ञों की राय को याद करते हुए कहा कि दुनिया की कई सरकारों ने यह रास्ता अपनाया लेकिन इस कदम के परिणामस्वरूप वहां महंगाई का स्तर बढ़ गया। प्रधानमंत्री ने कहा, “हम पर भी दबाव बनाने के बहुत प्रयास हुए थे, लेकिन हम जमीनी सच्चाइयों को जानते थे और समझते थे। हमने अनुभव के आधार पर अपने विवेक से कुछ निर्णय किए।” प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारत की आज की मजबूत अर्थव्यवस्था का श्रेय उन नीतियों को दिया, जिन पर कभी सवाल उठाए गए थे, लेकिन वे सही साबित हुई हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत एक कल्याणकारी देश है। सरकार की प्राथमिकता सामान्य नागरिकों के जीवन को आसान बनाना और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है।”उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि एक तरफ नई योजनाएं बनाई गईं, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने सुनिश्चित किया कि योजना का लाभ हर पात्र लाभार्थी तक पहुंचे। उन्होंने कहा, "हमने सिर्फ वर्तमान पर ही नहीं बल्कि देश के भविष्य पर भी निवेश किया। है।” प्रधानमंत्री ने प्रत्येक बजट में चार मुख्य कारकों पर प्रकाश डाला और- पूंजीगत व्यय के रूप में रिकॉर्ड लाभकारी व्यय, कल्याणकारी योजनाओं पर अभूतपूर्व निवेश, फिजूलखर्ची पर नियंत्रण और वित्तीय अनुशासन का उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इनमें संतुलन बनाए रखा गया और इन चारों विषयों में ही निर्धारित लक्ष्य हासिल किए गए। वांछित लक्ष्यों को प्राप्त करने में “एक पैसा बचाना, एक पैसा कमाना है” के मंत्र को श्रेय देते हुए, प्रधानमंत्री ने परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का उल्लेख किया। विलम्ब के कारण परियोजना की लागत बढ़ने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 2008 में शुरू की गई ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना का उदाहरण देते हुए बताया कि पिछले साल पूरा होने पर परियोजना की लागत 16,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 50,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। उन्होंने 1998 में शुरु किए गए असम के बोगीबील ब्रिज का भी उल्लेख किया, जिस परियोजना के 2018 में पूरा होने पर उसकी लागत 1100 करोड़ रुपये से बढ़कर 5,000 करोड़ रुपये हो गई।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और प्रौद्योगिकी के उपयोग के जरिए देश के पैसे बचाने के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने 10 करोड़ फर्जी लाभार्थियों से छुटकारा पाने का उल्लेख किया, जो केवल कागजों पर मौजूद थे, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के जरिए धन की लीकेज रोकी गई, जिसकी बदौलत 3.25 लाख करोड़ रुपये की राशि को गलत हाथों में जाने से रोका जा सका। सरकारी सामान की खरीद के लिए जीईएम पोर्टल से 65,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकी और तेल खरीद के विविधीकरण से 25,000 करोड़ रुपये की बचत हुई । उन्होंने कहा, “पिछले साल हमने सिर्फ पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर 24,000 करोड़ रुपये बचाए।” उन्होंने स्वच्छता अभियान का भी उल्लेख किया जहां सरकारी भवनों में पड़े कार्यालय के कबाड़ को बेचकर सरकार ने 1100 करोड़ रुपये कमाए।

प्रधानमंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि सरकारी योजनाएं इस तरह बनाई गईं , जिनसे नागरिकों का पैसा बच सके । उन्होंने जल जीवन मिशन का जिक्र किया, जिसकी वजह से गरीबों को पीने का शुद्ध पानी मिलना संभव हुआ। जिससे जलजनित बीमारियों पर होने वाला उनका खर्च कम हुआ है। आयुष्मान भारत का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि इसने देश के गरीब के 1 लाख करोड़ रुपए खर्च होने से बचाए हैं, वहीं प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर 80 फीसदी सस्ती दवाओं से 30,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है।

श्री मोदी ने दोहराया कि वह वर्तमान पीढ़ी के साथ ही आने वाली अनेकों पीढ़ियों के प्रति भी जवाबदेह हैं। इसलिए नीतियों और निर्णयों में वित्तीय प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

प्रधानमंत्री ने बिजली का उदाहरण देते हुए एक करोड़ घरों के लिए रूफटॉप सोलर स्‍कीम का जिक्र किया, जहां लोग बिजली उत्पादित करके अपना बिजली बिल शून्य कर सकते हैं और अतिरिक्त बिजली बेचकर पैसा भी कमा सकते हैं। उन्होंने उजाला योजना के तहत प्रदान किए गए एलईडी बल्बों का भी उल्लेख किया जिससे बिजली बिल में 20,000 करोड़ रुपये बचाने में मदद मिली।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सात दशक पहले से हमारे यहां गरीबी हटाओ के नारे दिन-रात दिए जाते रहे हैं। लेकिन वे किसी तरह का प्रभाव डालने में विफल रहे और वातानुकूलित कमरों से सुझाव देने वाले लोग करोड़पति बन गए, जबकि गरीब, गरीब ही बने रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद चौतरफा काम शुरू हुआ जिसके परिणामस्वरूप पिछले 10 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आ गए। उन्होंने इसका श्रेय अपनी सरकार की नीतियों को दिया। श्री मोदी ने कहा, “मैं गरीबी से निकलकर यहां पहुंचा हूं इसलिए मुझे पता है कि गरीबी से लड़ाई कैसे लड़ी जाती है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए हम देश की गरीबी कम करेंगे, अपने देश को विकसित बनाएंगे।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत का गवर्नेंस मॉडल दो धाराओं पर एक साथ आगे बढ़ रहा है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक तरफ 20वीं सदी की चुनौतियों से निपटा जा रहा है, तो दूसरी तरफ, सरकार 21वीं सदी की आकांक्षाओं को पूरा करने में जुटी हुई है । विकास मापदंडों की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने 11 करोड़ शौचालयों के निर्माण और अंतरिक्ष क्षेत्र में नई संभावनाएं बनाने, 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब विकसित करने के साथ-साथ गरीबों को 4 करोड़ घर उपलब्ध कराने, 300 से अधिक मेडिकल कॉलेजों की स्थापना करने, फ्रेट कॉरिडोर और डिफेंस कॉरिडोर काम करने, वंदे भारत ट्रेनों के साथ-साथ दिल्ली समेत कई शहरों में करीब 10,000 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने डिजिटल इंडिया और फिनटेक के जरिए करोड़ों भारतीयों को बैंकिंग क्षेत्र से जोड़ने और कई सुविधाएं तैयार करने का भी जिक्र किया

“कर्स ऑफ इंक्रीमेन्टल थिंकिंग” का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सोच दायरे को बांध देती है और किसी को अपनी गति से आगे बढ़ने नहीं देती। उन्होंने बताया कि जब वर्तमान सरकार सत्ता में आई तो नौकरशाही में भी इसी तरह की सोच में फंसी हुई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलाव लाने के लिए उन्होंने पिछली सरकारों की तुलना में बहुत बड़े पैमाने पर और अधिक गति से काम करने का फैसला किया। 2014 तक किए गए कार्यों की पिछले 10 वर्षों के कार्यों के साथ तुलना पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने रेलवे लाइनों के विद्युतीकरण को लगभग 20,000 किमी से बढ़ाकर 40,000 किमी से अधिक करने, चार-लेन के राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण को 18,000 किमी से बढ़ाकर लगभग 30,000 किमी करने, 250 किमी से कम मेट्रो रेल नेटवर्क का 650 किमी से अधिक तक विस्तार करने का उल्लेख किया । प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 तक सात दशकों में भारत में 3.5 करोड़ नल से जल के कनेक्शन थे, जबकि जल जीवन मिशन के तहत 2019 से, महज पिछले 5 वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में 10 करोड़ घरों को नल से जल के कनेक्शन मिले।

प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 के पहले के 10 साल में देश जिन नीतियों पर चला, वो वाकई देश को कंगाली की राह पर लेकर जा रही थीं। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि इस संबंध में संसद के बजट सत्र में एक श्वेत पत्र भी प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने घोटालों और नीतिगत पंगुता के कारण दुनिया भर के निवेशकों में भारी निराशा की ओर इशारा किया, जिससे निवेशकों का विश्वास खोने का बड़ा खतरा पैदा हो गया था। उन्होंने रेखांकित किया कि अब जब भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है, सरकार ने श्वेत पत्र के रूप में देश के सामने पूरी सच्चाई रखी है।

प्रधानमंत्री ने सभी को आश्वस्त करते हुए कहा, “भारत उन्नति की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।" देश दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि वर्तमान सरकार के तीसरे कार्यकाल में बड़े फैसले होंगे और भारत के विकास को नई गति देते हुए गरीबी मिटाने के लिए नई योजनाओं की तैयारी पहले से ही चल रही है। उन्होंने बताया कि 15 लाख से अधिक लोगों के सुझावों पर विचार किया गया है। अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “नया भारत सुपर स्पीड से काम करेगा। ये मोदी की गारंटी है।”

 

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June 18, 2026

नमस्ते!

बों जू!

ऐसा लग रहा है, आप सब छुट्टी के मूड में हैं।

साथियों,

ये पेरिस शहर, Lights का शहर है, रंगों का शहर है, यहां Art है, Ideas हैं, और innovation की प्रेरणा भी है। इस शहर को भारत के अलग-अलग राज्यों से आए आप सभी लोग और भी खूबसूरत बना देते हैं। नए नए रंगों से भर देते हैं।

कोई तमिल है, कोई पंजाबी है, कोई गुजराती है, तो कोई मराठी है, और कोई बंगाली है। भारत के हर कोने का प्रतिनिधित्व यहां दिखाई देता है।

साथियों,

मैं जब 14 जून को नीस पहुंचा था तो सबसे पहले भारत इनोवेट्स कार्यक्रम में शामिल हुआ था। आज जब मैं फ्रांस से वापसी की तैयारी में हूं तो लग रहा है जैसे भारत कनेक्ट्स कार्यक्रम में आ गया हूं।

फ्रांस में रहने वाले आप लोगों ने 21वीं सदी के भारत-फ्रांस रिश्तों को जिस तरह कनेक्ट किया है, वो हमारी Strategic Partnership की बहुत बड़ी ताकत बन रही है। मैं आप सभी के लिए भारत से 140 करोड़ देशवासियों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं। इस आत्मीय स्वागत के लिए, मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

आज मैं ऐसे समय में फ्रांस आया हूं जब कुछ ही दिन पहले हमारी सरकार के 12 वर्ष पूरे हुए हैं। चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप निरंतर 12 साल तक देश की सेवा करना मेरे जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य रहा है। यह भारत के लोकतंत्र की शक्ति है जिसने एक चायवाले को यहां तक पहुंचा दिया।

साथियों,

बीते 12 वर्ष, 140 करोड़ भारतीयों के अद्भुत सामर्थ्य के रहे हैं। 12 साल के इस कालखंड में भारत का GDP दोगुना हुआ है। Airports की संख्या दोगुनी हुई है। Universities की संख्या भी दोगुनी हो गई है। Highway Construction की स्पीड तीन गुना बढ़ गई। और Metro Network, चार गुणा बड़ा हो गया है।

मैं आपको कुछ और फैक्ट्स दूंगा, उससे आप अंदाजा लगा पाएंगे कि भारत किस स्पीड और कितने बड़े स्केल पर काम कर रहा है। पिछले 12 वर्षों में भारत का Defence Export 35 गुणा यानि Thirty Five Times बढ़ गया है।

औऱ एक फैक्ट सुनिए भारत में मोबाइल मैन्यूफैक्टरिंग यूनिट्स में, 100 गुणा की बढ़ोतरी हुई है। 100 times. भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा mobile phone manufacturer है। इसी गति, इसी प्रगति का नतीजा है कि आज भारत दुनिया की Fastest Growing Major Economy है।

साथियों,

आज भारत की कहानी सिर्फ Economic Progress की कहानी नहीं है। सिर्फ यहाँ अटक नहीं जाती है। ये Social Transformation की भी कहानी है।

पिछले 12 साल में देश में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। यानि एक ऐसी प्रगति जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। फ्रांस में जितने घर हैं, उससे भी अधिक पक्के घर बीते 12 वर्ष में हमने जरूरतमंदों के लिए बनाए हैं।

अब हर परिवार के पास, गरीब से गरीब क्यों न हो, Bank Account है। Financial Inclusion एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का अभियान बना है।

साथियों,

इन 12 वर्षों की उपलब्धियों में, एक उपलब्धि ऐसी भी है जिसे किसी आंकड़े से, या अंकों से, नहीं मापा जा सकता। वह है 140 करोड़ भारतीयों का आत्मविश्वास।

आज का भारत और आज के भारत का युवा बहुत बड़े सपने देख रहा है। भारत का किसान नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत की महिलाएं नए नेतृत्व का परिचय दे रही हैं। इसलिए ये सिर्फ Achievements के 12 साल नहीं हैं, ये भारत की एस्पिरेशन्स को नई बुलंदी देने का कालखंड रहा है।

साथियों,

एक समय था जब दूर-दराज के गांवों तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचाना वाकई बहुत मुश्किल भरा था। आज उन्हीं गांवों में बिजली भी है, इंटरनेट भी है, और डिजिटल सेवाओं की पूरी दुनिया भी है। आज एक क्लिक पर, कभी भी, कहीं भी बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हैं।

आज मोबाइल फोन, भारत के नागरिकों को अनेक सुविधाओं से कनेक्ट कर रहा है। हमारे किसान, हमारे मछुआरे, हमारे dairy farmers, हमारी महिलाएं, हमारे स्टूडेंट्स, सभी टेक्नोलॉजी के माध्यम से सशक्त हो रहे हैं, और अपने लिए नए अवसर बना रहे हैं।

साथियों,

आपने 125 करोड़ से अधिक Aadhaar IDs के बारे में सुना है। लेकिन आज भारत सिर्फ पहचान को डिजिटल नहीं बना रहा। आज करीब 90 करोड़ भारतीयों की Unique Digital Health IDs बनाई जा चुकी हैं। जिससे मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित और accessible बन गए हैं। इससे हेल्थकेयर डिलीवरी और अधिक आसान और efficient हो रही है।

साथियों,

इन उपलब्धियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें से अधिकांश चीजें कुछ वर्ष पहले तक कल्पना जैसी लगती थीं। कौन सोच सकता था कि गांव-गांव तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचेगा ? कौन सोच सकता था कि दूर-सुदूर के गांवों में भी QR code जीवन का हिस्सा बन जायेगा ? गांव में कोई बहन, ड्रोन से खेती करने में मदद करेगी, ये भी असंभव लगता था।

लेकिन आज यह सब, भारत के करोड़ों लोगों के जीवन का सामान्य हिस्सा बनता जा रहा है। और आपको गर्व होगा साथियों, यही नए भारत की पहचान है।

जो कभी सपना था, वह आज सच्चाई है। जो कभी नामुमकिन लगता था, वो आज मुमकिन हुआ है, औऱ ये करने के पीछे सबसे बड़ी ताकत क्या है? किसकी वजह से ये सब संभव हुआ है? यह मोदी के कारण नहीं, वो ताकत है- भारत का लोकतंत्र, भारत की डेमोक्रेसी। इस डेमोक्रेसी में सबका साथ है, सबका विकास है।

साथियों,

आज से 50 या 100 साल बाद जब भारत के इस कालखंड की समीक्षा होगी, तो ये बात उभरकर सामने आएगी कि इस कालखंड को भारत की Aspirations ने ड्राइव किया। यह भारत के एस्पिरेशन्स का नया युग है।

जहां बिजली पहुंची है, वहां लोग सिर्फ बिजली नहीं चाहते, वे Smart Living चाहते हैं। जहां ट्रेन पहुंची है, वहां लोग High-Speed Connectivity चाहते हैं। जहां हाईवे बने हैं, वहां लोग World-Class Expressways चाहते हैं। जहां इंटरनेट पहुंचा है, वहां लोग AI और Digital Innovation में नेतृत्व चाहते हैं।

यानि आज भारत के लोग अपने जीवन को भी Next Level पर ले जाना चाहते हैं, और भारत को भी Next Level पर ले जाना उनका मकसद है, उनका संकल्प है, उनके सपने है।

और साथियों,

यही Aspirations आज भारत की विकास यात्रा की सबसे बड़ी शक्ति हैं। मैं आपको भारत की Space Journey का उदाहरण दूंगा।

भारत ने चंद्रयान को चंद्रमा के South Pole पर उतारा। दुनिया ने इसे एक बहुत बड़ी उपलब्धि माना। लेकिन भारत इसे अपनी मंजिल मानकर रुका नहीं। आज देश गगनयान की तैयारी कर रहा है। भारत अंतरिक्ष में अपना Space Station बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

हमारे Space Startups Global Space Economy में अपनी जगह बनाने के लिए पुरजोश काम कर रहे हैं, आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

Green Energy के क्षेत्र में भी भारत की यही एस्पिरेशंस दिखाई देती है। Solar Power में भारत की उपलब्धियों की दुनिया भर में लगातार चर्चा हो रही हैं। लेकिन भारत अगली छलांग की तैयारी कर रहा है।

Green Hydrogen में बड़े निवेश हो रहे हैं। Advanced Nuclear Energy पर तेजी से काम हो रहा है। आपने भारत के Fast Breeder nuclear Reactor से जुड़ी प्रोग्रेस के बारे में भी सुना ज़रूर होगा। ये भारत के न्यूक्लियर एनर्जी लैंडस्केप में क्रांतिकारी परिवर्तन करने का बहुत बड़ा अचीवमेंट हमारे सीसेन्टिस्टों ने किया है।

साथियों,

आज का भारत भविष्य का पूरा Ecosystem बना रहा है। भारत एक साथ हर उस क्षेत्र में निवेश कर रहा है, जो आने वाले दशकों की दिशा तय करेगा।

अभी आपने कुछ दिन पहले ही देखा है नीस में भारत इनोवेट्स का एक आयोजन किया। ये इवेंट भारत के डीप टेक सामर्थ्य को दुनिया तक पहुंचाने का एक और माध्यम था। इसमें भारत के 120 Deep-Tech Startups उपस्थित थे। Bharat Innovates में करीब एक हजार चार सौ B2B Meetings हुईं है। कई Startups के लिए Investment Commitments आगे बढ़ीं, Commercial Orders के लिए रास्ते खुले। French और European Universities तथा Incubators के साथ Engagements बढ़ रही हैं।

Student Exchanges, Joint Research, और Innovation Support के नए रास्ते बने। इसलिए Bharat Innovates सिर्फ एक Summit नहीं रहा। यह Innovation Diplomacy का एक नया मॉडल बना है।

और आज ही पेरिस में VivaTech इवेंट के जरिए, इस यात्रा को हमने और आगे बढ़ाया। नीस में हमने Ideas को Capital से जोड़ा और पेरिस में Indian Innovation को Global Scale से जोड़ा। आज दुनिया देख रही है भारत केवल भविष्य के लिए तैयार नहीं हो रहा है। भारत भविष्य को आकार दे रहा है।

साथियों,

एक समय था, जब देशों के बीच रिश्ते केवल व्यापार से तय होते थे। आज व्यापार के साथ-साथ Trust यानि भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।

हर देश Reliable Supply Chains चाहता है। हर देश Stable Partnerships चाहता है। हर देश ऐसे साथियों की तलाश में है, जिन पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके। और ऐसे समय में, भारत विश्व में एक Trusted Partner के रूप में उभर रहा है।

एवियां में G7 बैठक के दौरान मैंने trust based partnerships बनाने पर ज़ोर दिया। ग्लोबल साउथ के देशों के साथ equal पार्टनर्स के रूप में आगे बढ़ने का आह्वान किया। भारत का G7 समिट में संदेश था Global Governance तभी प्रभावी होगी जब वह Inclusive होगी। Global Growth तभी Sustainable होगी जब वह शेयर्ड होगी। और Global Technology तभी मानवता के लिए उपयोगी होगी जब वह Trusted होगी।

साथियों,

भारत और दुनिया के बीच व्यापारिक रिश्तों में नई ऊर्जा नज़र आ रही है। फ्रांस के साथ भारत का ट्रेड लगतार बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दुनिया के अनेक देशों के साथ Free Trade Agreements किए हैं। यूरोपियन यूनियन हो, यूनाइटेड किंगडम हो दुनिया के हर देश, हर रीजन के साथ भारत समझौते कर रहा है।

अगले महीने से भारत और UK के बीच ट्रेड एग्रीमेंट भी लागू हो जाएगा। यह एग्रीमेंट भारत के farmers, workers और innovators को अनेक नए अवसर प्रदान करेगा।

साथियों,

आज दुनिया Uncertainty और Disruption के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत और फ्रांस की साझेदारी विश्वास, स्थिरता और सहयोग का एक मजबूत स्तंभ बन रहा है।

इस वर्ष हमने भारत और फ्रांस के संबंधों को Special Global Strategic Partnership का दर्जा दिया था। नीस में मेरे मित्र President Macron और मैंने हमारे संबंधों को force for global good बनाने पर चर्चा की। Defence से लेकर space और नुक्लियर तक AI और क्रिटीकल मिनरल्स से लेकर high speed railway तक, हर क्षेत्र में हम मिलकर आगे बढ़ेंगे।

साथियों,

Solar energy हो, या AI के क्षेत्र में सहयोग हो, भारत और फ्रांस मिलकर ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं जो पूरी मानवता के हित में हैं। पिछले वर्ष पेरिस में और इस वर्ष दिल्ली में हमने AI Summit को Co-chair किया।

अब हम साथ मिलकर अगले वर्ष “तृष्णा” satellite को लॉन्च करने जा रहें हैं। यह “तृष्णा” satellite जो विश्व में फूड और वाटर सिक्युरिटी सुनिश्चित करने में योगदान देगा।

और साथियों,

यह सभी गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट पहलो में आप सभी का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। ये आप हैं जो भारत और यूरोप के बीच सबसे मजबूत सेतु हैं। आप दोनों समाजों को समझते हैं। दोनों बाजारों को समझते हैं। आने वाले समय में Talent, Trade, Technology, Tourism और Investment के नए अवसरों को आगे बढ़ाने में आपकी भूमिका लगातार बढ़ने वाली हैं।

साथियों,

भारत और फ्रांस के रिश्तों को साझा इतिहास, साझा मूल्यों और साझा विश्वास ने आगे बढ़ाया है। विश्व युद्धों के दौरान फ्रांस की धरती पर बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों की स्मृतियां आज भी हमें जोड़ती हैं।

मुझे पहले नव शापेल में श्रद्धांजलि देने का अवसर मिला, पिछले वर्ष प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मार्सेय के वॉर मेमोरियल जाने का अवसर भी मिला। ये हमारी साझा विरासत है।

फ्रांस, भारतीयों के योगदान को संजोता भी है और सराहता भी है। भारतीय मूल की नूर इनायत खान हों, जिन्होंने फ्रांस की Resistance के लिए अपना जीवन बलिदान किया, या महाराजा रणजीत सिंह के साथ काम करने वाले जनरल जां फ्रांस्वा अलार हों ये सभी भारत और फ्रांस की साझा विरासत के प्रतीक हैं।

भारत के राज्य पुडुचेरी में भी फ्रेंच विरासत की झलक दिखाई देती है। वहां का Architecture, वहां की कला-संस्कृति और खान-पान सभी में हमारे संबंधों की महेक है।

साथियों,

इस समय फ्रांस समेत पूरी दुनिया में International Yoga Day की तैयारी भी चल रही है। इस अवसर पर मैं, फ्रांस में योग को आगे बढ़ाने वाले श्रीमान महेश घाट्राड्याल जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धांजलि देता हूं। मैं पद्म पुरस्कार से सम्मानित, शार्लोत शोपां जी को भी प्रणाम करता हूं। जिन्होंने सौ वर्ष की आयु में भी, योग के माध्यम से फ़्रांस को भारत की विरासत से जोड़ा है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है: Yoga does not add years to life, it adds life to years.

साथियों,

मैं फ्रेद नेग्री जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धापूर्वक याद करता हूं। भारतीय विरासत को संरक्षित करने में उनका योगदान अतुल्य रहा है।

साथियों,

भारत और फ्रांस को कनेक्ट करने वाली एक और चीज है, और वो है फुटबॉल। इस वक्त यहां फुटबॉल फीवर पूरे जोर पर है। फ्रांस में इसकी दीवानगी, चप्पे-चप्पे पर दिखती है। लेकिन भारत में भी फुटबॉल का क्रेज़ सिर चढ़कर बोलता है।

खासतौर पर फ्रांस की टीम के फैन्स भारत में बहुत अधिक हैं। फ़्रांस ने इस वर्ल्ड कप की शुरुआत एक जोरदार जीत से शुरू की है। मैं फ्रांस की टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

जाने से पहले, आप सभी के लिए कुछ और अच्छी खबरें भी लेकर के आया हूँ। वो आपके लिए हैं। पिछले वर्ष, मार्सेय में कॉन्सुलेट खोला गया, इससे काफी अधिक सुविधा मिल रही है। कुछ हफ्ते पहले, Indian Nationals के लिए French Airports पर Visa-free Transit की व्यवस्था शुरू हो गई है।

Students और Professionals की Mobility बढ़ाना हो, या Educational Qualifications की Mutual Recognition की बात हो, या फिर French Universities के भारत में Campus खोलना हो, इन सभी पर हम मिलकर आगे बढ़ रहें हैं।

अब फ्रांस में UPI के उपयोग का दायरा भी और बढ़ने जा रहा है। यानि भारत-फ्रांस कनेक्ट भी Instant और आपसी Payment भी Instant!

साथियों,

इन सभी पहलों से, हम भारत और फ़्रांस को और करीब ला रहें हैं। और मैं फिर कहूंगा इस साझेदारी की नींव, इस रिश्ते की असली ताकत आप सभी हैं। आप सब मेरे देशवासी हैं।

आज जब भारत तेज़ी से विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तो मैं आप सभी से भारत के साथ और गहराई से जुडने का आग्रह करूंगा। इससे भारत की विकास यात्रा को नई शक्ति मिलेगी, और आपको अपनी पुरखों की धरती की सेवा करने का अवसर भी मिलेगा।

इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी के प्रेम आपके उत्साह और इस आत्मीय स्वागत के लिए मैं एक बार फिर आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं।

भारत माता की जय!

बहुत बहुत धन्यवाद।