“ये भारत का समय है"
“दुनिया के हर विकास विशेषज्ञ समूह में चर्चा है कि कैसे 10 साल में भारत परिवर्तित चुका है"
“विश्व आज भारत पर विश्वास करता है”
“हमारे समग्र नीति निर्माण के 'प्रथम सिद्धांत' हैं- स्थिरता, सामंजस्य और निरंतरता”
“भारत एक कल्याणकारी देश है, हमने सुनिश्चित किया कि हर पात्र लाभार्थी तक सरकार खुद पहुंचे”
“हमारे प्रत्येक बजट में चार मुख्य कारक- पूंजीगत व्यय के रूप में लाभकारी व्यय, कल्याणकारी योजनाओं पर अभूतपूर्व निवेश, फिजूलखर्ची पर नियंत्रण और वित्तीय अनुशासन”
“परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना हमारी सरकार की पहचान बन गई है”
“हम 20वीं सदी की चुनौतियों से निपट रहे हैं और 21वीं सदी की आकांक्षाओं को भी पूरा कर रहे हैं”
“2014 के पहले के 10 साल में देश जिन नीतियों पर चला उनके बारे में संसद के इसी सत्र में श्वेत पत्र प्रस्तुत किया गया है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के होटल ताज पैलेस में ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट 2024 को संबोधित किया।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत ग्लोबल बिजनेस समिट 2024 द्वारा चुने गए 'विघटन, विकास और विविधीकरण' विषय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए की। प्रधानमंत्री ने विश्व में भारत के प्रति बढ़ते विश्वास पर गौर करते हुए कहा, “व्यवधान, विकास और विविधीकरण” की इस चर्चा में हर कोई इस बात पर सहमत है कि ये भारत का समय है।” दावोस में भारत के प्रति अभूतपूर्व उत्साह का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने भारत को अभूतपूर्व आर्थिक सफलता की कहानी कहे जाने, उसके डिजिटल और फिजीकल बुनियादी ढांचे के नई ऊंचाई पर होने और दुनिया के हर क्षेत्र में भारत का दबदबा होने के बारे में हुई चर्चा को याद किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा भारत की क्षमता की तुलना ‘रेजिंग बुल’ से किए जाने को भी याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के हर विकास विशेषज्ञ समूह में चर्चा है कि कैसे 10 साल में भारत परिवर्तित चुका है, यह भारत के प्रति दुनिया के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। श्री मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन - ' यही समय है, सही समय है' को याद करते हुए कहा, “भारत के सामर्थ्य और सफलता को लेकर दुनिया में ऐसी सकारात्मक भावना पहले कभी नहीं थी।”

इस बात को रेखांकित करते हुए कि किसी भी देश की विकास यात्रा में एक समय ऐसा आता है जब सभी परिस्थितियां उसके पक्ष में होती हैं, प्रधानमंत्री ने कहा कि यही वह समय होता है, जब वो देश अपने आपको, आने वाली कई-कई सदियों के लिए मजबूत बना लेता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “मैं भारत के लिए आज वही समय देख रहा हूं। यह समयावधि अभूतपूर्व है। एक तरह से, देश का पवित्र चक्र शुरू हो गया है।” उन्होंने लगातार बढ़ती विकास दर और घटते राजकोषीय घाटे, निर्यात बढ़ने और चालू खाता घाटा कम रहने, उत्पादक निवेश में रिकॉर्ड ऊंचाई और महंगाई नियंत्रण में होने, अवसर और आय दोनों के बढ़ने, घटती गरीबी, बढ़ती खपत और कॉर्पोरेट लाभप्रदता तथा बैंक एनपीए में रिकॉर्ड कमी आने का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्पादन और उत्पादकता दोनों बढ़ रहे हैं।

इस वर्ष के अंतरिम बजट को आर्थिक विशेषज्ञों और पत्रकारों द्वारा मिली प्रशंसा और उनके द्वारा इसे 'लोकलुभावन बजट' नहीं करार दिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने इस समीक्षा के लिए उन्हें धन्यवाद दिया, लेकिन साथ ही बजट के 'प्रथम सिद्धांतों' या समग्र नीति निर्माण की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया। "वे प्रथम सिद्धांत हैं - स्थिरता, सामंजस्य और निरंतरता”। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि यह बजट इन्हीं सिद्धांतों का विस्तार है।

कोरोना वायरस महामारी को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उसके बाद का पूरा कालखंड भी, पूरे विश्व में सरकारों के लिए एक बड़ी परीक्षा बनकर आया था, जहां किसी को कोई अंदाजा नहीं था कि स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था की इस दोहरी चुनौती से निपटा कैसे जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस दौरान भारत ने जान बचाने को प्राथमिकता दी। उन्होंने "जान है तो जहान है” का उल्लेख करते हुए जीवन रक्षक संसाधनों को इकट्ठा करने और लोगों को खतरों के बारे में जागरूक करने के सरकार के प्रयासो पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार ने गरीबों के लिए मुफ्त राशन उपलब्ध कराने का फैसला किया, मेड इन इंडिया टीकों पर ध्यान केंद्रित किया और टीकों की त्वरित उपलब्धता भी सुनिश्चित की। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने महिलाओं के बैंक खातों में सीधे पैसे भेजने, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे उद्योगपतियों को वित्तीय सहायता देने और खेती से संबंधित मुद्दों से निपटने के उपायों का उल्लेख करते हुए कहा, "सरकार ने स्वास्थ्य और आजीविका दोनों मांगों को हल किया।" उन्होंने कहा कि सरकार ने आपदा को अवसर में बदलने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री ने मांग बढ़ाने और बड़े व्यवसायों की मदद के लिए अधिक पैसा छापने की उस समय की विशेषज्ञों की राय को याद करते हुए कहा कि दुनिया की कई सरकारों ने यह रास्ता अपनाया लेकिन इस कदम के परिणामस्वरूप वहां महंगाई का स्तर बढ़ गया। प्रधानमंत्री ने कहा, “हम पर भी दबाव बनाने के बहुत प्रयास हुए थे, लेकिन हम जमीनी सच्चाइयों को जानते थे और समझते थे। हमने अनुभव के आधार पर अपने विवेक से कुछ निर्णय किए।” प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारत की आज की मजबूत अर्थव्यवस्था का श्रेय उन नीतियों को दिया, जिन पर कभी सवाल उठाए गए थे, लेकिन वे सही साबित हुई हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत एक कल्याणकारी देश है। सरकार की प्राथमिकता सामान्य नागरिकों के जीवन को आसान बनाना और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है।”उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि एक तरफ नई योजनाएं बनाई गईं, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने सुनिश्चित किया कि योजना का लाभ हर पात्र लाभार्थी तक पहुंचे। उन्होंने कहा, "हमने सिर्फ वर्तमान पर ही नहीं बल्कि देश के भविष्य पर भी निवेश किया। है।” प्रधानमंत्री ने प्रत्येक बजट में चार मुख्य कारकों पर प्रकाश डाला और- पूंजीगत व्यय के रूप में रिकॉर्ड लाभकारी व्यय, कल्याणकारी योजनाओं पर अभूतपूर्व निवेश, फिजूलखर्ची पर नियंत्रण और वित्तीय अनुशासन का उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इनमें संतुलन बनाए रखा गया और इन चारों विषयों में ही निर्धारित लक्ष्य हासिल किए गए। वांछित लक्ष्यों को प्राप्त करने में “एक पैसा बचाना, एक पैसा कमाना है” के मंत्र को श्रेय देते हुए, प्रधानमंत्री ने परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का उल्लेख किया। विलम्ब के कारण परियोजना की लागत बढ़ने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 2008 में शुरू की गई ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना का उदाहरण देते हुए बताया कि पिछले साल पूरा होने पर परियोजना की लागत 16,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 50,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। उन्होंने 1998 में शुरु किए गए असम के बोगीबील ब्रिज का भी उल्लेख किया, जिस परियोजना के 2018 में पूरा होने पर उसकी लागत 1100 करोड़ रुपये से बढ़कर 5,000 करोड़ रुपये हो गई।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और प्रौद्योगिकी के उपयोग के जरिए देश के पैसे बचाने के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने 10 करोड़ फर्जी लाभार्थियों से छुटकारा पाने का उल्लेख किया, जो केवल कागजों पर मौजूद थे, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के जरिए धन की लीकेज रोकी गई, जिसकी बदौलत 3.25 लाख करोड़ रुपये की राशि को गलत हाथों में जाने से रोका जा सका। सरकारी सामान की खरीद के लिए जीईएम पोर्टल से 65,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकी और तेल खरीद के विविधीकरण से 25,000 करोड़ रुपये की बचत हुई । उन्होंने कहा, “पिछले साल हमने सिर्फ पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर 24,000 करोड़ रुपये बचाए।” उन्होंने स्वच्छता अभियान का भी उल्लेख किया जहां सरकारी भवनों में पड़े कार्यालय के कबाड़ को बेचकर सरकार ने 1100 करोड़ रुपये कमाए।

प्रधानमंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि सरकारी योजनाएं इस तरह बनाई गईं , जिनसे नागरिकों का पैसा बच सके । उन्होंने जल जीवन मिशन का जिक्र किया, जिसकी वजह से गरीबों को पीने का शुद्ध पानी मिलना संभव हुआ। जिससे जलजनित बीमारियों पर होने वाला उनका खर्च कम हुआ है। आयुष्मान भारत का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि इसने देश के गरीब के 1 लाख करोड़ रुपए खर्च होने से बचाए हैं, वहीं प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर 80 फीसदी सस्ती दवाओं से 30,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है।

श्री मोदी ने दोहराया कि वह वर्तमान पीढ़ी के साथ ही आने वाली अनेकों पीढ़ियों के प्रति भी जवाबदेह हैं। इसलिए नीतियों और निर्णयों में वित्तीय प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

प्रधानमंत्री ने बिजली का उदाहरण देते हुए एक करोड़ घरों के लिए रूफटॉप सोलर स्‍कीम का जिक्र किया, जहां लोग बिजली उत्पादित करके अपना बिजली बिल शून्य कर सकते हैं और अतिरिक्त बिजली बेचकर पैसा भी कमा सकते हैं। उन्होंने उजाला योजना के तहत प्रदान किए गए एलईडी बल्बों का भी उल्लेख किया जिससे बिजली बिल में 20,000 करोड़ रुपये बचाने में मदद मिली।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सात दशक पहले से हमारे यहां गरीबी हटाओ के नारे दिन-रात दिए जाते रहे हैं। लेकिन वे किसी तरह का प्रभाव डालने में विफल रहे और वातानुकूलित कमरों से सुझाव देने वाले लोग करोड़पति बन गए, जबकि गरीब, गरीब ही बने रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद चौतरफा काम शुरू हुआ जिसके परिणामस्वरूप पिछले 10 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आ गए। उन्होंने इसका श्रेय अपनी सरकार की नीतियों को दिया। श्री मोदी ने कहा, “मैं गरीबी से निकलकर यहां पहुंचा हूं इसलिए मुझे पता है कि गरीबी से लड़ाई कैसे लड़ी जाती है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए हम देश की गरीबी कम करेंगे, अपने देश को विकसित बनाएंगे।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत का गवर्नेंस मॉडल दो धाराओं पर एक साथ आगे बढ़ रहा है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक तरफ 20वीं सदी की चुनौतियों से निपटा जा रहा है, तो दूसरी तरफ, सरकार 21वीं सदी की आकांक्षाओं को पूरा करने में जुटी हुई है । विकास मापदंडों की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने 11 करोड़ शौचालयों के निर्माण और अंतरिक्ष क्षेत्र में नई संभावनाएं बनाने, 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब विकसित करने के साथ-साथ गरीबों को 4 करोड़ घर उपलब्ध कराने, 300 से अधिक मेडिकल कॉलेजों की स्थापना करने, फ्रेट कॉरिडोर और डिफेंस कॉरिडोर काम करने, वंदे भारत ट्रेनों के साथ-साथ दिल्ली समेत कई शहरों में करीब 10,000 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने डिजिटल इंडिया और फिनटेक के जरिए करोड़ों भारतीयों को बैंकिंग क्षेत्र से जोड़ने और कई सुविधाएं तैयार करने का भी जिक्र किया

“कर्स ऑफ इंक्रीमेन्टल थिंकिंग” का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सोच दायरे को बांध देती है और किसी को अपनी गति से आगे बढ़ने नहीं देती। उन्होंने बताया कि जब वर्तमान सरकार सत्ता में आई तो नौकरशाही में भी इसी तरह की सोच में फंसी हुई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलाव लाने के लिए उन्होंने पिछली सरकारों की तुलना में बहुत बड़े पैमाने पर और अधिक गति से काम करने का फैसला किया। 2014 तक किए गए कार्यों की पिछले 10 वर्षों के कार्यों के साथ तुलना पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने रेलवे लाइनों के विद्युतीकरण को लगभग 20,000 किमी से बढ़ाकर 40,000 किमी से अधिक करने, चार-लेन के राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण को 18,000 किमी से बढ़ाकर लगभग 30,000 किमी करने, 250 किमी से कम मेट्रो रेल नेटवर्क का 650 किमी से अधिक तक विस्तार करने का उल्लेख किया । प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 तक सात दशकों में भारत में 3.5 करोड़ नल से जल के कनेक्शन थे, जबकि जल जीवन मिशन के तहत 2019 से, महज पिछले 5 वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में 10 करोड़ घरों को नल से जल के कनेक्शन मिले।

प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 के पहले के 10 साल में देश जिन नीतियों पर चला, वो वाकई देश को कंगाली की राह पर लेकर जा रही थीं। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि इस संबंध में संसद के बजट सत्र में एक श्वेत पत्र भी प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने घोटालों और नीतिगत पंगुता के कारण दुनिया भर के निवेशकों में भारी निराशा की ओर इशारा किया, जिससे निवेशकों का विश्वास खोने का बड़ा खतरा पैदा हो गया था। उन्होंने रेखांकित किया कि अब जब भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है, सरकार ने श्वेत पत्र के रूप में देश के सामने पूरी सच्चाई रखी है।

प्रधानमंत्री ने सभी को आश्वस्त करते हुए कहा, “भारत उन्नति की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।" देश दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि वर्तमान सरकार के तीसरे कार्यकाल में बड़े फैसले होंगे और भारत के विकास को नई गति देते हुए गरीबी मिटाने के लिए नई योजनाओं की तैयारी पहले से ही चल रही है। उन्होंने बताया कि 15 लाख से अधिक लोगों के सुझावों पर विचार किया गया है। अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “नया भारत सुपर स्पीड से काम करेगा। ये मोदी की गारंटी है।”

 

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उत्तर प्रदेश अब देश में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल एयरपोर्ट वाले राज्यों में शामिल: जेवर में पीएम मोदी
March 28, 2026
नोएडा अंतरराष्ट्रीय विमान पत्तन के प्रथम चरण का उद्घाटन उत्तर प्रदेश की विकास गाथा और भारत के विमानन भविष्य में एक महत्वपूर्ण कदम है: प्रधानमंत्री
उत्तर प्रदेश अब भारत में सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय विमान पत्तनों वाले राज्यों में से एक बन गया है: प्रधानमंत्री
विमान पत्तन किसी भी देश में केवल बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, वे प्रगति को उड़ान देते हैं: प्रधानमंत्री
हमारी सरकार एक विकसित भारत के निर्माण के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व निवेश कर रही है: प्रधानमंत्री

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

उद्धघाटन हो गया? उद्धघाटन हो गया? नहीं, अभी आधा काम हुआ है। मैंने सिर्फ वो पर्दा हटाया है, लेकिन मैं आज चाहता हूं इस एयरपोर्ट का उद्धघाटन यहां जो भी उपस्थित हैं, आप सब करें, और इसलिए आप अपना मोबाइल फोन निकालिये, अपने मोबाइल फोन का फ्लैश लाईट कीजिए और आपका इसका उद्धघाटन कर रहे हैं। आप दीया जलाकर के यहां उपस्थित हर व्यक्ति, आज इस एयरपोर्ट का उद्धघाटन कर रहा है। ये आपकी अमानत है, ये आपका भविष्य है, ये आपका पुरूषार्थ है और इसलिए इसका उद्धघाटन भी आपके हाथों से हो रहा है, आप अपने भारत माता की जय बोलकर के, हाथ ऊपर करके, फ्लैश लाईट पूरी तरह से दिखाइये। भारत माता जी जय। भारत माता जी जय। भारत माता जी जय। बहुत-बहुत धन्यवाद। अब उद्धघाटन हो गया।

उत्तरप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, यहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या, ब्रजेश पाठक, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री राममोहन नायडू जी, पंकज चौधरी जी, ज्यूरिक एयरपोर्ट के चेयरमैन जोसेफ फेल्डर जी, अन्य मंत्रिगण, सांसद, विधायक, अन्य महानुभाव और मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

मैं देख रहा हूं, आज जहां भी मेरी नजर पड़ रही है, सारे युवा मुझे नजर आ रहे हैं, उत्साह से भरे युवा हैं, जोश से भरे हुए युवा हैं, क्योंकि इन युवाओं को पता है, ये जो काम हो रहा है ना, ये नौजवानों के भविष्य को नई उड़ान देने वाला काम हो रहा है। आज हम विकसित यूपी-विकसित भारत अभियान का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं। देश का सबसे बड़ा प्रदेश, आज देश के सबसे अधिक इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स वाले राज्यों में से एक हो गया है। और आज मेरे लिए गर्व और प्रसन्नता के दो कारण हैं। एक तो ये है कि इस एयरपोर्ट का शिलान्यास भी करने का सौभाग्य आप सबने मुझे दिया था और आप सबने इस एयरपोर्ट के उद्धघाटन का सौभाग्य भी मुझे दिया, लेकिन मैंने उस सौभाग्य को आपके साथ बांट दिया और आपके हाथों से उद्धघाटन करवा दिया। दूसरा, जिस उत्तर प्रदेश ने मुझे अपना प्रतिनिधि चुना, जिस उत्तर प्रदेश ने मुझे सांसद बनाया, उसकी पहचान के साथ, उस उत्तर प्रदेश की पहचान के साथ इस भव्य एयरपोर्ट का नाम भी जुड़ गया है।

साथियों,

नोएडा का ये एयरपोर्ट, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, इटावा, बुलंदशहर, फरीदाबाद, इस पूरे क्षेत्र को बहुत बड़ा लाभ होने वाला है। हिन्दुस्तान को और उत्तर प्रदेश को तो होना ही होना है। ये एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, छोटे और लघु उद्योगों, यहां के नौजवानों के लिए, अनेक नए अवसर लेकर आने वाला है। यहां से दुनिया के लिए विमान तो उड़ेंगे ही, साथ ही, ये विकसित उत्तर प्रदेश की उड़ान का भी प्रतीक बनेगा। मैं उत्तर प्रदेश को, विशेष रूप से पश्चिम उत्तर प्रदेश की जनता को इस भव्य एयरपोर्ट के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज का ये कार्यक्रम, भारत के नए मिज़ाज का प्रतीक है। आप सभी देख रहे हैं कि आज पूरा विश्व कितना चिंतित है। पश्चिम एशिया में एक महीने से युद्ध चल रहा है। युद्ध की वजह से कई सारे देशों में खाने-पीने के सामान, पेट्रोल-डीज़ल-गैस, खाद, ऐसी कई ज़रूरी चीज़ों का चारो तरफ संकट पैदा हो गया है। हर देश इस संकट का सामना करने के लिए कुछ न कुछ कोशिश कर रहा है, प्रयास कर रहा है। और हमारा भारत भी इस संकट का पूरी शक्ति से मुकाबला कर रहा है, देशवासियों की ताकत के भरोसे कर रहा है। भारत तो बहुत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस, ये जहां युद्ध चल रह है ना, इस युद्ध से प्रभावित इलाके से मंगाता रहा है। इसलिए सरकार हर वो कदम उठा रही है, जिससे सामान्य परिवारों पर, हमारे किसान भाई-बहनों पर, इस संकट का बोझ न पड़े।

साथियों,

संकट के इस समय में भी, भारत ने अपने तेज़ विकास को निरंतर जारी रखा है। मैं सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ही बात करुं, तो पिछले कुछ सप्ताह में ही, ये चौथा बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसका शिलान्यास या लोकार्पण हुआ है। इन कुछ ही सप्ताह में, इस दौरान नोएडा में बहुत बड़ी सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का शिलान्यास हुआ, इसी कालखड में देश की पहली दिल्ली-मेरठ नमो-भारत ट्रेन ने गति पकड़ी, इसी कालखंड में मेरठ मेट्रो का विस्तार किया गया, और इतने कम समय में आज नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का आप सबके हाथों से उद्धघाटन भी हो गया।

साथियों,

ये सारे प्रोजेक्ट्स, यूपी के विकास के लिए, डबल इंजन सरकार के प्रयासों का शानदार उदाहरण हैं। सेमीकंडक्टर फैक्ट्री, भारत को टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बना रही है। मेरठ मेट्रो और नमो भारत रेल, तेज और स्मार्ट कनेक्टिविटी दे रही है। और ये हमारा जेवर एयरपोर्ट, पूरे उत्तर भारत को दुनिया से जोड़ रहा है। और आपने अभी वीडियो में देखा, ये ऐसा एयरपोर्ट बन रहा है, हर दो मिनट में एक जहाज उड़ेगा, हर दो मिनट में एक जहाज उड़ेगा। पहले सपा वालों ने नोएडा को अपनी लूट का ATM बना लिया था। लेकिन आज भाजपा सरकार में वही नोएडा, यूपी के विकास का सशक्त इंजन बन रहा है।

साथियों,

जेवर का ये एयरपोर्ट, डबल इंजन सरकार की कार्यसंस्कृति का भी बहुत अच्छा उदाहरण है। अब आप सोचिये, इस एयरपोर्ट को अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने 2003 में ही फाइल में मंजूरी दे दी थी। 2003 में, आपमें से बहुत होंगे जिसका जन्म नहीं हुआ होगा, बहुत वो लोग होंगे जो उस समय 25-30 साल के 35 साल के हुए होंगे और आज रिटायर भी हो गए, लेकिन एयरपोर्ट नहीं बना। लेकिन केंद्र में कांग्रेस और यहां की पहले की सरकारों ने सालों तक इस एयरपोर्ट की नींव तक नहीं पड़ने दी। 2004 से 2014 तक ये एयरपोर्ट फाइलों में ही दबा रहा। जब हमारी सरकार बनी तो यूपी में सपा की सरकार थी। शुरु के दो-तीन सालों में सपा वालों ने इस पर काम नहीं होने दिया। लेकिन जैसे ही यहां भाजपा-NDA की सरकार बनी, दिल्ली में भाजपा-एनडीए की सरकार बनी, तो जेवर एयरपोर्ट की नींव भी पड़ी, निर्माण भी हुआ और अब ये शुरु भी हो गया है।

साथियों,

एयरपोर्ट के अलावा ये क्षेत्र देश के दो बड़े फ्रेट कॉरिडोर्स का भी हब बन रहा है। ये फ्रेट कॉरिडोर मालगाड़ियों के लिए बिछाई गई स्पेशल पटरियां हैं। इससे उत्तर भारत की बंगाल और गुजरात के समंदर से कनेक्टिविटी बेहतर हो गई है। और दादरी वो स्थान है जहां ये दोनों कॉरिडोर्स आपस में मिलते हैं। यानी यहां किसान जो उगाते हैं, यहां उद्योग जो कुछ बनाते हैं, वो जमीन से, हवाई मार्ग से, दुनिया के कोने-कोने तक तेज़ी से जा पाएगा। ऐसी मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के कारण, यूपी दुनियाभर के निवेशकों के लिए बहुत बड़ा आकर्षण बन रहा है।

साथियों,

जिस नोएडा को पहले अंधविश्वास के कारण अपने हाल पर छोड़ दिया गया था, कुर्सी जाने के डर से पहले के सत्ताधारी यहां आने से डरते थे, मुझे याद है यहां की सपा सरकार थी और मैंने नोएडा आने का कार्यक्रम बनाया, तो मुख्यमंत्री इतने डरे हुए थे कि वो उस कार्यक्रम में नहीं आए और मुझे भी डराने की लोगों ने कोशिश की, कि नोएडा मत जाओ मोदी जी, अभी-अभी प्रधानमंत्री बने हो। मैंने कहा इस धरती का आशीर्वाद लेने जा रहा हूं, जो मुझे लंबे अर्से तक सेवा करने का मौका देगा। अब वही इलाका पूरी दुनिया का स्वागत करने के लिए तैयार है। ये पूरा क्षेत्र, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त कर रहा है।

साथियों,

इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में, खेती-किसानी का बहुत महत्व है। मैं आज उन मेरे किसान भाई-बहनों का विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए अपनी जमीनें दी है। उन किसानों के लिए जोरदार तालियां बजाइये दोस्तों, मेरे किसान भाई-बहनों के लिए जोरदार तालियां बजाइये। मेरे किसान भाई-बहन, आपके इस योगदान से ही, इस पूरे क्षेत्र में विकास का एक नया दौर शुरु होने जा रहा है। आधुनिक कनेक्टिविटी का जो विस्तार यहां हो रहा है, उससे पश्चिमी यूपी में फूड प्रोसेसिंग की संभावनाओं को और बल मिलेगा। अब यहां के कृषि उत्पाद दुनिया के बाज़ारों में और बेहतर तरीके से जा पाएंगे।

साथियों,

यहां मैं अपने किसान साथियों का एक और बात के लिए भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं। आपके गन्ने से जो इथेनॉल बनाया गया है, उससे कच्चे तेल, कच्चे तेल पर देश की निर्भरता कम हुई है। अगर इथेनॉल का उत्पादन ना बढ़ता, पेट्रोल में उसकी ब्लेंडिंग ना बढ़ती, तो देश को हर वर्ष साढ़े चार करोड़ बैरल, साढ़े चार करोड़ बैरल यानी लगभग 700 करोड़ लीटर कच्चा तेल विदेशों से मंगवाना पड़ता। किसानों के परिश्रम ने देश को इस संकट के समय में इतनी बड़ी राहत दी है।

साथियों,

इथेनॉल से देश को तो फायदा हुआ ही है, किसानों को भी बहुत बड़ा लाभ हुआ है। इससे करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा बची है। यानी इथेनॉल न बनाते तो ये पैसा विदेश जाना जय था। बीते वर्षों में इतना सारा पैसा, देश के किसानों को मिला है, गन्ना किसानों को मिला है।

साथियों,

यहां के गन्ना किसानों ने तो पहले के वो दिन भी देखे हैं, जब कई-कई सालों तक गन्ने का बकाया लटका रहता था। लेकिन आज भाजपा की डबल इंजन सरकार के प्रयासों से गन्ना किसानों की स्थिति बेहतर हुई है।

साथियों,

किसी भी देश में एयरपोर्ट सिर्फ एक सामान्य सुविधा नहीं होता। ये एयरपोर्ट प्रगति को भी उड़ान देते हैं। साल 2014 से पहले, देश में सिर्फ 74 एयरपोर्ट थे। आज 160 से अधिक एयरपोर्ट्स देश में हैं। अब महानगरों के अलावा, देश के छोटे-छोटे शहरों में भी हवाई कनेक्टिविटी पहुंच रही है। पहले जो सरकारें रही हैं, वे मानती थीं कि हवाई यात्रा सिर्फ अमीरों के लिए ही होनी चाहिए। लेकिन भाजपा सरकार ने, सामान्य भारतीय के लिए हवाई यात्रा को आसान बना दिया है। हमारी सरकार ने उत्तर प्रदेश में हवाई अड्डों के नेटवर्क का तेज़ी से विस्तार करते हुए उनकी संख्या बढ़ाकर सत्रह कर दी है।

साथियों,

भाजपा सरकार का निंरतर प्रयास रहा है कि एयरपोर्ट भी बने और किराया-भाड़ा भी सामान्य परिवारों की पहुंच में रहे। इसलिए, हमने उड़ान योजना शुरु की थी। इस स्कीम के कारण, बीते कुछ सालों में एक करोड़ साठ लाख से अधिक देशवासियों ने उड़ान योजना से टिकट लेकर सस्ती दरों पर हवाई यात्रा की है। और मैं आपको एक और जानकारी देना चाहता हूं। हाल में ही केंद्र सरकार ने उड़ान योजना को और विस्तार दिया है। इसके लिए लगभग 29 हज़ार करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। आने वाले वर्षों में इसके तहत, छोटे-छोटे शहरों में 100 नए एयरपोर्ट और 200 नए हेलीपैड बनाने की योजना है। यूपी को भी इससे बहुत अधिक लाभ होगा।

साथियों,

भारत का एविएशन सेक्टर, बहुत तेज़ से गति और विकास कर रहा है। जैसे-जैसे भारत में नए-नए एयरपोर्ट बन रहे हैं, वैसे-वैसे नए हवाई जहाज़ों की ज़रूरत भी बढ़ती जा रही है। इसलिए देश की अलग-अलग एयरलाइन्स ने सैकड़ों नए जहाजों के ऑर्डर दिए हैं। ये जो नई सुविधाएं हैं, नए जहाज आ रहे हैं, इनको उड़ाने वाले, इनमें सर्विस देने वाले, मेंटनेस से जुड़े, ऐसे हर काम के लिए बहुत बड़ी संख्या में वर्कफोर्स की ज़रूरत रहेगी। ये युवाओं के लिए बहुत बड़ा अवसर है। इसलिए हमारी सरकार, एविएशन सेक्टर में ट्रेनिंग की सुविधाओं का भी विस्तार कर रही है।

साथियों,

आप जब अपनी कोई गाड़ी खरीदते हैं, तो ये जरूर देखते हैं कि उस गाड़ी बनाने वाली कंपनी का सर्विसिंग सेंटर आसपास है या नहीं है। आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि हमारे देश में हवाई जहाजों की सर्विसिंग, यानी उनके मैंटनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल की पुख्ता व्यवस्थाएं ही नहीं थीं। भारत के 85 एयरपोर्ट, 85 परसेंट हवाई जहाजों को आज भी मैंटनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल यानी MRO के लिए, इस काम के लिए विदेश भेजना पड़ता है। इसलिए हमारी सरकार ने ठाना है कि MRO सेक्टर में भी भारत को आत्मनिर्भर बनाएंगे। अब भारत में ही, बहुत बड़े पैमाने पर MRO सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। आज यहां जेवर में भी MRO सुविधा का शिलान्यास हुआ है। ये सुविधा जब तैयार हो जाएगी, तो ये देश-विदेश के विमानों को सेवा देगी। इससे देश को कमाई भी होगी, हमारा पैसा भी देश में ही रहेगा, और युवाओं को अनेक रोजगार भी मिलेंगे।

साथियों,

आज हमारी सरकार की प्राथमिकता देश के नागरिकों की सुविधा है। देश के नागरिक का समय बचे और उसकी जेब पर ज्यादा बोझ भी न पड़े, ये हमारा लक्ष्य है। मेट्रो और वंदे भारत जैसी आधुनिक रेल सेवाओं का इसी भाव से ही विस्तार किया जा रहा है। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रेल, इसका कितना फायदा हो रहा है, ये भी हम सब देख रहे हें। अभी तक नमो भारत, ढाई करोड़ से अधिक लोग सफर कर चुके हैं। दिल्ली-मेरठ के जिस सफर में पहले घंटों लग जाते थे, अब वो सफर मिनटों में ही पूरा हो रहा है।

साथियों,

विकसित भारत के विकसित आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमारी सरकार अभूतपूर्व निवेश कर रही है। बीते 11 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर का बजट छह गुणा से अधिक बढ़ाया गया है। इन वर्षों में 17 लाख करोड़ रुपये हाईवे और एक्सप्रेसवे पर खर्च किए गए हैं, एक लाख किलोमीटर से अधिक के हाईवे का निर्माण किया गया है। 2014 तक रेलवे में सिर्फ 20 हजार किलोमीटर रूट का बिजलीकरण हुआ था। जबकि 2014 के बाद से 40 हजार किलोमीटर से ज्यादा रेलवे ट्रैक का बिजलीकरण किया गया है। आज ब्रॉडगेज नेटवर्क का लगभग शत-प्रतिशत बिजलीकरण हो चुका है। आज कश्मीर घाटी हो या नॉर्थ ईस्ट की राजधानियां, ये पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ रही हैं। पोर्ट यानी बंदरगाहों की क्षमता, बीते दशक में दोगुने से अधिक हुई है। देश में नदी जलमार्गों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। विकसित भारत के निर्माण के लिए जरूरी हर क्षेत्र में भारत तेज़ी से काम कर रहा है।

साथियों,

विकसित भारत बनाने के लिए सबका प्रयास बहुत ज़रूरी है। ये आवश्यक है कि 140 करोड़ देशवासी कड़े से कड़ा परिश्रम करे, और वैश्विक संकटों का एकजुट होकर सामना करें। अभी जो युद्ध चल रहा है, इससे पैदा हुए संकटों का सामना कैसे करना है, इसके बारे में मैंने संसद में भी विस्तार से बताया है। मेरी कल देश के सभी मुख्यमंत्रियों से भी लंबी चर्चा हुई है और बड़ी सकारात्मक चर्चा हुई है। मैं आज आप सभी जनता-जनार्दन से फिर कहूंगा, मैं देशवासियों से फिर से कहूंगा। हमें शांत मन से, धैर्य के साथ, एकजुटता के साथ, मिल जुलकर के, इस संकट का सामना करना है। ये पूरे विश्व में परेशानी पैदा करने वाला संकट है। हमें अपने देश की सबसे ज्यादा चिंता करनी है। और यही हम भारतीयों की सबसे बड़ी ताकत है। मैं यूपी के, देश के सभी राजनीतिक दलों से भी आग्रहपूर्वक कहना चाहता हूं, विनती पूर्वक कहना चाहता हूं, इस प्रकार के संकट में ऐसी बातें करने से बचें, जो देश के लिए नुकसानदायक हैं। जो भारतीयों के हक में है, जो भारत के हित में है, वही भारत सरकार की नीति और रणनीति है। राजनीति के लिए गलत बयानबाज़ी करने वाले, राजनीतिक बहस में तो कुछ नंबर पा लेंगे, लेकिन देश को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतों को देश की जनता कभी माफ नहीं करती। कोरोना के महासंकट के दौरान भी, कुछ लोगों ने अफवाहें फैलाईं, वैक्सीन को लेकर झूठ बोले, ताकि सरकार का काम मुश्किल हो, देश को नुकसान हो। परिणाम क्या हुआ? जनता ने चुनावों के दौरान ऐसी राजनीति को नकार दिया, ठुकरा दिया। मुझे पूरा भरोसा है, कि देश के सभी राजनीतिक दल भी इससे सबक सीखेंगे और देश के एकजुट प्रयासों को वो बल देंगे, ताकत देंगे। इसी आग्रह के साथ, एक बार फिर से उत्तर प्रदेश को इस शानदार एयरपोर्ट के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

मेरे साथ बोलिये-

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

बहुत-बहुत धन्यवाद।