Your Excellency, प्रधानमंत्री मित्सो-ताकिस,
दोनों देशों के delegates,
मीडिया के साथियों,

नमस्कार!

प्रधानमंत्री मित्सो-ताकिस और उनके डेलिगेशन का भारत में स्वागत करते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है। पिछले वर्ष मेरी ग्रीस यात्रा के बाद उनकी यह भारत यात्रा दोनों देशों के बीच मजबूत होती स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप का संकेत है।और सोलह वर्षों के बाद, इतना बड़ा अंतराल के बाद ग्रीस के प्रधानमंत्री का भारत आना, अपने आप में एक ऐतिहासिक अवसर है।

Friends,

हमारी आज की चर्चाएँ बहुत ही सार्थक और उपयोगी रहीं।यह प्रसन्नता का विषय है कि हम 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य की ओर तेज़ी से अग्रसर हैं। हमने अपने सहयोग को नई ऊर्जा और दिशा देने के लिए कई नए अवसरों की पहचान की। कृषि के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच करीबी सहयोग की संभावनाएं अनेक हैं। और मुझे ख़ुशी है कि पिछले वर्ष इस क्षेत्र में किए गए समझौते के कार्यान्वयन के लिए दोनों पक्ष कदम उठा रहे हैं। हमने फार्मा, Medical Devices, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, Skill Development, और Space जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया।

हमने दोनों देशों के start-ups को भी आपस में जोड़ने पर चर्चा की। Shipping और Connectivity दोनों देशों के लिए उच्च प्राथमिकता के विषय हैं। हमने इन क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ाने पर विचार विमर्श किया।

Friends,

Defence और Security में बढ़ता सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास को दर्शाता है। इस क्षेत्र में Working Group के गठन से हम defence, cyber security, counter-terrorism, maritime security जैसी साझा चुनौतियों पर आपसी समन्वय बढ़ा सकेंगे।

भारत में defence manufacturing में co-production और co-development के नए अवसर बन रहे हैं, जो दोनों देशों के लिए लाभदायक हो सकते हैं। हमने दोनों देशों के रक्षा उद्योगों को आपस में जोड़ने पर सहमति जताई हैं। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत और ग्रीस की चिंताएं और प्राथमिकताएं समान हैं। हमने इस क्षेत्र में अपने सहयोग को और अधिक मज़बूत करने पर विस्तारपूर्वक चर्चा की।

Friends,

दो प्राचीन और महान सभ्यताओं के रूप में भारत और ग्रीस के बीच गहरे सांस्कृतिक और people-to-people संबंधों का लम्बा इतिहास है। लगभग ढाई हज़ार वर्षों से दोनों देशों के लोग व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों के साथ-साथ विचारों का भी आदान प्रदान करते रहे हैं।

आज हमने इन संबंधों को एक आधुनिक स्वरूप देने के लिए कई नए initiatives की पहचान की। हमने दोनों देशों के बीच Migration and Mobility Partnership Agreement को जल्द से जल्द संपन्न करने पर चर्चा की। इससे हमारे people-to-people संबंध और सुदृढ़ होंगे।

हमने दोनों देशों के उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। अगले वर्ष भारत और ग्रीस के डिप्लोमेटिक संबंधों की 75वीं वर्षगाँठ मनाने के लिए हमने एक Action Plan बनाने का निर्णय लिया। इससे हम दोनों देशों की साझा धरोहर, science and technology, innovation, sports और अन्य क्षेत्रों में उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर दर्शा सकेंगे।

Friends,

आज की बैठक में हमने कई क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की। हम सहमत हैं कि सभी विवादों और तनावों का समाधान dialogue और diplomacy के माध्यम से किया जाना चाहिए।हम Indo-Pacific में ग्रीस की सक्रीय भागीदारी और सकारात्मक भूमिका का स्वागत करते हैं। यह ख़ुशी का विषय है कि ग्रीस ने Indo-Pacific Oceans Initiative से जुड़ने का निर्णय लिया है। पूर्वी Mediterranean क्षेत्र में भी सहयोग के लिए सहमति बनी है। भारत की G-20 अध्यक्षता के दौरान Launch किया गया आई-मैक कॉरिडोर लम्बे समय तक मानवता के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

इस पहल में ग्रीस भी एक अहम भागीदार बन सकता है।हम UN तथा अन्य वैश्विक संस्थानों के reform के लिए सहमत हैं, ताकि इन्हें समकालीन बनाया जा सके। भारत और ग्रीस वैश्विक शांति और स्थिरता में योगदान देने के लिए अपने प्रयास जारी रखेंगे।

Excellency,

आज शाम आप रायसीना डायलॉग में Chief Guest के तौर पर शामिल होंगे। वहाँ आपका संबोधन सुनने के लिए हम सभी उत्सुक हैं। आपकी भारत यात्रा और हमारी उपयोगी चर्चा के लिए मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।

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प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के अपमान और संथाल संस्कृति के अनादर की निंदा की
March 07, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा राष्ट्रपति जी के अपमान और संथाल संस्कृति के साथ किए गए लापरवाही भरे व्यवहार की कड़ी निंदा की है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह घटना शर्मनाक है और ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जो भी लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास करता है, वो इस घटना से बहुत निराश है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति जी खुद आदिवासी समुदाय से हैं, और उन्होंने जो दर्द और पीड़ा व्यक्त की है उसने भारत के लोगों को बहुत दुःखी किया है।

श्री मोदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं और राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन जिम्मेदार है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय के साथ पश्चिम बंगाल सरकार इतना लापरवाही भरा व्यवहार कर रही है।

राष्ट्रपति के कार्यालय को राजनीति से ऊपर बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कार्यालय की पवित्रता का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की कि पश्चिम बंगाल सरकार और टीएमसी को सद्बुद्धि आएगी।

प्रधानमंत्री ने X पर लिखा;

“यह शर्मनाक और अभूतपूर्व है। जो भी लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास करता है, वो निराश है।

राष्ट्रपति जी खुद आदिवासी समुदाय से हैं, उन्होंने जो दर्द और पीड़ा ज़ाहिर की है, उससे भारत के लोग बहुत दुःखी हैं।

पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने सच में सारी हदें पार कर दी हैं। राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन ज़िम्मेदार है।

यह भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय के साथ पश्चिम बंगाल सरकार इतनी लापरवाही से पेश आती है।

राष्ट्रपति का कार्यालय राजनीति से ऊपर है और इस कार्यालय की पवित्रता का सदैव सम्मान किया जाना चाहिए। आशा है कि पश्चिम बंगाल सरकार और टीएमसी को सद्बुद्धि आएगी।”