प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी सचिवों से कहा- 'ईज ऑफ लिविंग' को बनाएं पहली प्राथमिकता
लोगों के जीवन को किस तरह से अच्छा बनाया जा सकता है, इस पर काम करें: सरकारी सचिवों से पीएम मोदी
लोकसभा चुनाव का जनादेश यथा स्थिति को बदलने और अपने लिए बेहतर जीवन की इच्छा की लोगों की आकांक्षा को दर्शाता है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने आवास पर भारत सरकार के सभी सचिवों के साथ बातचीत की।

केन्द्रीय मंत्री श्री राजनाथ सिंह, श्री अमित शाह, श्रीमती निर्मला सीतारमण और डॉ. जितेन्द्र सिंह इस अवसर पर उपस्थित थे।

बातचीत की शुरूआत करते हुए, मंत्रिमंडल सचिव श्री पी.के. सिन्हा ने बताया कि सरकार के पिछले कार्यकाल में प्रधानमंत्री ने किस प्रकार निदेशक/उप-सचिव स्तर तक के सभी अधिकारियों के साथ सीधे तौर पर बातचीत की।

बातचीत में मंत्रिमंडल सचिव ने दो महत्वपूर्ण कार्यों के बारे में चर्चा की, जिन्हें क्षेत्रवार सचिवों के समूहों के सामने रखा जाएगाः (ए) सुपरिभाषित लक्ष्यों के साथ प्रत्येक मंत्रालय के लिए पंचवर्षीय योजना का दस्तावेज, (बी) प्रत्येक मंत्रालय में महत्वपूर्ण असरदार निर्णय, जिनके लिए 100 दिनों के भीतर मंजूरी प्राप्त की जाएगी।

बातचीत के दौरान, विभिन्न सचिवों ने अनेक विषयों पर अपने दृष्टिकोण और विचार साझा किए, जैसे प्राशासनिक निर्णय प्रक्रिया, कृषि, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी पहल, शैक्षिक सुधार, स्वास्थ्य सेवा, औद्योगिक नीति, आर्थिक विकास, कौशल विकास आदि।

बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री ने जून, 2014 में सचिवों के साथ इस प्रकार की पहली बातचीत का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि हाल के आम चुनावों में सरकार समर्थक वातावरण तैयार हुआ, जिसका श्रेय अधिकारियों की टीम को मिलना चाहिए, क्योंकि पिछले पांच वर्षों के दौरान उन्होंने कड़ी मेहनत की, योजनाएं तैयार की और विशिष्ठ परिणाम प्राप्त किए। उन्होंने कहा कि इस बार का चुनाव एक सकारात्मक मतदान का प्रतीक है, जो उस विश्वास से उत्पन्न हुआ है जो आम आदमी अपने दैनिक अनुभवों के आधार पर महसूस करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के मतदाताओं ने अगले पांच वर्ष के लिए अपना दृष्टिकोण निर्धारित किया और अब यह हमारे लिए एक अवसर है। उन्होंने कहा कि लोगों की बड़ी आकांक्षाओं को एक चुनौती के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि एक अवसर के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस जनादेश से यथास्थिति से बदलाव के लिए लोगों की इच्छाओं और आकांक्षाओं का पता चलता है और वे अपने लिए एक बेहतर जीवन चाहते हैं।

जनसंख्या से जुड़ी सकारात्मकता के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि जनसंख्या विज्ञान का कारगर इस्तेमाल करना हमारे लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यस्था बनाने में केन्द्र सरकार के प्रत्येक विभाग और प्रत्येक राज्य के सभी जिलों की भूमिका होगी। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के महत्व और इसकी प्रगति की जरूरत के बारे में भी चर्चा की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘कारोबारी सुगमता’ के क्षेत्र में भारत की प्रगति से छोटे कारोबारियों और उद्यमियों के लिए अधिकाधिक सुविधा का पता चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रत्येक मंत्रालय को ‘जीवन सुगमता’ पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जल, मत्स्यपालन और पशुपालन भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र होंगे।

उन्होंने कहा कि आज बातचीत के दौरान उन्हें लगा है कि सचिवों के पास देश को आगे ले जाने के लिए दृष्टिकोण, प्रतिबद्धता और ऊर्जा है। उन्होंने कहा कि इस समूह पर उन्हें गर्व है। उन्होंने सभी से प्रत्येक विभाग के परिणामों और दक्षता में सुधार लाने के लिए प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी विभागों के लिए देश की आजादी के 75वें वर्ष के आगामी लक्ष्य को निर्धारित करने की जरूरत है, जो लोगों को देश की बेहतरी के लिए योगदान करने हेतु प्रेरित करेगा। उन्होंने सभी का आह्वान करते हुए कहा कि लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए वे पूरे जोर-शोर से जुट जाएं।

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प्रधानमंत्री ने सुव्यवस्थित मानकों से मानवीय आचरण के मार्गदर्शन को दर्शाने वाले एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया
May 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसका अभिप्राय है कि श्रेष्ठ आचरण एक दीपक की तरह है जो न केवल एक व्यक्ति को बल्कि पूरे समाज को आलोकित करता है। श्री मोदी ने कहा कि इसी आदर्श को अपनाकर हमारे देश के लोग आज पूरे संयम, क्षमता और कर्तव्य परायणता के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा:

"श्रेष्ठ आचरण वह दीपक है, जिससे व्यक्ति के साथ-साथ समाज भी आलोकित होता है। इसी आदर्श को अपनाते हुए हमारे देशवासी आज पूरे संयम, सामर्थ्य और कर्तव्यनिष्ठा से राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।”

तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ।

ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि।।"

क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इसका निर्धारण व्यक्तिपरक राय या क्षणिक आवेग पर नहीं, बल्कि शास्त्र आधारित एक सुव्यवस्थित मानक के अनुसार होना चाहिए, जो आचरण को दिशा और अनुशासन प्रदान करता है। इसलिए, व्यक्ति को स्थापित मानकों की उस प्रणाली के अनुसार कार्य करना चाहिए, ताकि उसका आचरण संतुलित, मान्य और सार्थक हो सके।