प्रधानमंत्री मोदी बिहार के दौरे पर जाएंगेपटना विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में भाग लेंगे
पीएम मोदी बिहार में 4 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं सहित नमामि गंगे के तहत 4 परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी दिनांक 14 अक्टूबर, 2017 को बिहार का दौरा करेंगे। 

प्रधानमंत्री पटना विश्वविद्यालय के शताब्‍दी समारोह को संबोधित करेंगे। 

मोकामा में, प्रधानमंत्री नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत चार निकास प्रणाली परियोजनाओं की तथा 4 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इन परियोजनाओं का कुल परिव्यय  3700 करोड़ रुपए से अधिक होगा। प्रधानमंत्री एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। 

निकास प्रणाली परियोजना में, बेउर में सीवरेज ट्रीटमेंट,  बेउर में सीवर नेटवर्क के साथ सीवरेज प्रणाली, करमालीचक में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सैदपुर में एसटीपी और निकास नेटवर्क शामिल है। ये सभी परियोजनाएं मिलकर 120 एमएलडी की नई क्षमता का निर्माण करेंगी और बेउर के लिए विद्यमान 20 एमएलडी का उन्नयन होगा। 

वह चार राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं निम्नलिखित हैं, जिन की आधारशिला रखी जाएगी: 

  • एनएच 31 के औंटा-सिमरिया खंड को चार लेन बनाना तथा 6 लेन का गंगा सेतु का निर्माण।
  • NH 31 के बख्तियारपुर- मोकामा खंड को चार लेन बनाना।
  • एनएच 107 के महेश खुंट-सहरसा-पूर्णिया खंड को दो लेन का निर्माण करना।
  • NH 82 के बिहारशरीफ- बरबीघा- मोकामा खंड का दो लेन निर्माण करना।
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मंत्रिमंडल ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में चार की वृद्धि को मंजूरी दी, जिससे संख्या 33 से बढ़कर 37 हो गई
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।