प्रधानमंत्री मोदी करेंगे विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का अनावरण
सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर की मूर्ति गुजरात के नर्मदा जिले के केवडिया में स्थित है
नर्मदा के तट पर स्थित यह प्रतिमा महान सरदार पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि है
182 मीटर की ऊंचाई के साथ इसका वजन 1700 टन, पैर की ऊंचाई 80 फुट, हाथ की ऊंचाई 70 फुट, कंधे की ऊंचाई 140 फुट और चेहरे की ऊंचाई 70 फुट है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी कल 31 अक्‍टूबर, 2018 को गुजरात के केवड़ि‍या में विश्‍व की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ को राष्‍ट्र को समर्पित करेंगे।

सरदार वल्‍लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा उनकी जयंती पर गुजरात के नर्मदा जिले स्थित केव‍ड़ि‍या में राष्‍ट्र को समर्पित की जाएगी।

इस अवसर पर आयोजित समारोह के दौरान प्रधानमंत्री और अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ को राष्‍ट्र को समर्पित करने के मद्देनजर मिट्टी एवं नर्मदा के जल को एक कलश में डालेंगे।

प्रधानमंत्री इस अवसर पर उपस्थित जन समूह को संबोधित करेंगे।

प्रधानमंत्री इसके बाद ‘वाल ऑफ यूनिटी’ पर पहुंचेंगे और इसका उदघाटन करेंगे। प्रधानमंत्री ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ के सामने प्रार्थना करेंगे। वह संग्रहालय एवं प्रदर्शनी के साथ-साथ दर्शक दीर्घा का भी अवलोकन करेंगे। 153 मीटर ऊंची इस दर्शक दीर्घा में एक समय में अधिकतम 200 आगंतुक उपस्थित हो सकते हैं। यहां से सरदार सरोवर बांध, इसके जलाशय और सतपुड़ा एवं विंध्य पर्वत श्रृंखलाओं का मनोरम दृश्‍य नजर आता है।

इस प्रतिमा को राष्‍ट्र को समर्पित करने के अवसर पर आयोजित समारोह के दौरान भारतीय वायु सेना के विमान फ्लाईपास्ट करेंगे। इसके साथ ही विभिन्‍न सांस्‍कृतिक दल इस अवसर पर अपनी-अपनी अद्भुत कलाओं का प्रदर्शन भी करेंगे।

 

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प्रधानमंत्री ने निस्वार्थ सेवा और करुणा की भावना को उजागर करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
May 06, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्ची मानवता है। उन्होंने उल्लेख किया कि ऐसे कार्य न सिर्फ आत्मिक खुशी प्रदान करते हैं, बल्कि समाज के कल्याण में भी योगदान देते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।

अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥”

सुभाषितम् यह संदेश देता है कि किसी भी जीव के प्रति मन, वचन और कर्म से द्वेष न रखना, सभी के प्रति करुणा भाव रखना और उदारतापूर्वक दान करना—इन्हें आचरण का सर्वोच्च रूप माना गया है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्ची मानवता है। इससे आत्मिक खुशी तो मिलती ही है, समाज का भी कल्याण होता है।

अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।

अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥”