प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 77वें स्वतंत्रता दिवस पर बधाई और शुभकामनाओं के लिए विश्व के राजनेताओं को धन्यवाद दिया।

मालदीव गणराज्य के राष्ट्रपति के एक ट्वीट के जवाब में, प्रधानमंत्री ने कहा; "स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद, राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह।"

भूटान के प्रधानमंत्री के एक ट्वीट का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा; "हमारे स्वतंत्रता दिवस पर शुभकामनाओं के लिए आभार, पीएम भूटान डॉ. लोटे शेरिंग।"

नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के एक ट्वीट के जवाब में, प्रधानमंत्री ने कहा; "प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड, आपकी हार्दिक शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद।"

फ्रांस के राष्ट्रपति के एक ट्वीट के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा; “आपकी शुभकामनाओं के लिए आभारी हूं, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन। मैं पेरिस की अपनी यात्रा को याद करता हूं और भारत-फ्रांस संबंधों को बढ़ावा देने के प्रति आपकी भावना की सराहना करता हूं।''

मॉरीशस के प्रधानमंत्री के एक ट्वीट का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा; “प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ, आपकी हार्दिक शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद।

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प्रधानमंत्री आंतरिक ज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
April 09, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें उन्होंने आंतरिक ज्ञान को ब्रह्मांड का सच्चा सार बताते हुए उसके महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत की विरासत और संस्कृति ने हमेशा यह सिखाया है कि सच्चा ज्ञान और उसका सही सदुपयोग ही किसी राष्ट्र की प्रगति के आधार हैं। उन्होंने बताया कि इसी मार्ग पर चलते हुए देश के युवा एक समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह ज्ञान, जो हमारे भीतर ही स्थित है और सामान्य ज्ञान से कहीं अधिक श्रेष्ठ है, महान और विद्वान व्यक्तियों द्वारा पूजनीय माना जाता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स(X) पर लिखा:

"हमारी विरासत और संस्कृति हमें यही सिखाती आई है कि सच्चा ज्ञान और उसका सदुपयोग ही राष्ट्र की प्रगति का आधार है। इसी मार्ग पर चलकर आज हमारे देश के युवा समृद्ध और सशक्त भारत को गढ़ने में जुटे हैं।

अन्तःस्थमेव यज्ज्ञानं ज्ञानादपि च यत्परम्।

तदेव सर्वसंसारसारं सद्भिरुपास्यते॥"

जो ज्ञान हमारे भीतर स्थित है और जो सामान्य या बाहरी ज्ञान से भी श्रेष्ठ है, वही इस समस्त संसार का असली सार है। श्रेष्ठ पुरूषों और ज्ञानियों द्वारा उसी आंतरिक ज्ञान की उपासना की जाती है।