प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने तमिलनाडु के तिरूपुर की यात्रा की और वहां विभिन्‍न विकास परियोजनाओं का अनावरण किया।

प्रधानमंत्री ने तिरूपुर के पेरूमन्‍नलूर गांव में विभिन्‍न विकास परियोजनाओं का अनावरण किया।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने तिरूपुर में कर्मचारी राज्‍य बीमा निगम (ईएसआईसी) के मल्‍टी स्‍पेशियलिटी अस्‍पताल का शिलान्‍यास किया। आधुनिक सुविधाओं से युक्‍त 100 बिस्‍तरों वाला यह अस्‍पताल तिरूपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले एक लाख कर्मचारियों तथा उनके परिजनों की चिकित्‍सा जरूरतों को पूरा करेगा। पहले इन कर्मचारियों को शहर के दो ईएसआईसी प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता था और विशेष चिकित्‍सा सुविधाओं के लिए 50 किलोमीटर दूर ईएसआईसी अस्‍पताल, कोयम्‍बटूर जाना पड़ता था।

प्रधानमंत्री ने चेन्‍नई में ईएसआईसी अस्‍पताल का लोकार्पण किया। 470 बिसतरों वाले इस आधुनिक अस्‍पताल में सभी प्रकार की चिकित्‍सा सुविधाएं उपलब्‍ध हैं।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने त्रिची हवाई अड्डे में नए एकीकृत भवन तथा चेन्‍नई हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण का शिलान्‍यास किया।

त्रिची हवाई अड्डे के इस नए एकीकृत भवन से प्रतिवर्ष 3.63 लाख यात्रियों का संचालन किया जा सकता है।व्‍यस्‍त समय में प्रति घंटे 2900 यात्रियों का संचालन किया जा सकता है और इसमें विस्‍तार की भी संभावना है। ई-गेट, बॉयोमेट्रिक आधारित यात्री पहचान प्रणाली आदि के साथ चेन्‍नई हवाई अड्डे का आधुनिकी‍करण किया जाएगा।

इस अवसर पर भारत पेट्रोलियम के एन्‍नोर तटीय टर्मिनल का लोकार्पण हुआ। यह तोंडियारपेट सुविधा का विकल्‍प होगा और क्षमता में इससे बड़ा होगा। इस टर्मिनल से उत्‍पादों को कोच्चि तट से भेजा जा सकेगा। सड़क मार्ग की तुलना में परिवहन खर्च में कमी आएगी।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने चेन्‍नई पोर्ट से चेन्‍नई पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड की मनाली रिफाइनरी की नई तेल पाइप लाइन का उद्घाटन किया। इस पाइप लाइन में सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए हैं और यह तमिलनाडु तथा पड़ोसी राज्‍यों की आवश्‍यकताओं को पूरा करेगा।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने चेन्‍नई मेट्रो की नई रेल लाइन एजी-डीएमएस मेट्रो स्‍टेशन तथा वासरमैनपेट मेट्रो स्‍टेशन का उद्घाटन किया। 10 किलोमीटर का यह रेलखंड चेन्‍नई मेट्रो के चरण-1 का हिस्‍सा है। इस नई रेल लाइन के बाद चरण-1 की कुल 45 किलोमीटर पर संचालन प्रारंभ हो गया है।

अपनी यात्रा के अंतिम चरण के तहत प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आज हुबली के लिए प्रस्‍थान किया।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India’s digital economy enters mature phase as video dominates: Nielsen

Media Coverage

India’s digital economy enters mature phase as video dominates: Nielsen
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।