भारत और किर्गिस्तान के संबंध ऐतिहासिक संबंधों के साथ सदियों से सद्भभाव से भरा है: प्रधानमंत्री
हम किर्गिस्तान को मध्य एशिया क्षेत्र में स्थायी शांति, स्थिरता और समृद्धि कायम करने के लिए एक अहम भागीदार मानते हैं: प्रधानमंत्री
हम द्विपक्षीय व्यापार, आर्थिक संबंधों और लोगों-से-लोगों के बीच के संबंधों को मजबूती देने की दिशा में काम करेंगे: नरेंद्र मोदी
हमें अपने तकनीकी और आर्थिक सहयोग कार्यक्रमों में यूथ एक्चेंज को विशेष महत्व देना होगा: प्रधानमंत्री

महामहिम श्री अल्माजबेक अताम्बाएव

किर्गिज गणराज्य के राष्ट्रपति,

देवियों एवं सज्जनों,

मीडिया से जुड़े मित्रों,

राष्ट्रपति अल्माजबेक अताम्बाएव की पहली राजकीय भारत यात्रा पर उनका स्वागत करते हुए मुझे काफी खुशी हो रही है। महामहिम, पिछले साल जुलाई में मेरी किर्गिज गणराज्य की यात्रा के दौरान जिस गर्मजोशी से आपने स्वागत-सत्कार किया था उसकी याद अभी भी ताजी है। आपकी इस यात्रा से हमें अपने सहयोग एवं उच्च स्तरीय संपर्क को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। भारत और किर्गिज गणराज्य के बीच संबंध सदियों के साझा ऐतिहासिक लिंक की सद्भावना से भरा है। हमारे समाज किर्गिज गणराज्य सहित मध्य एशिया के साथ हमारे संपर्कों की गर्मजोशी की भावना से ओतप्रोत है। हम जनतांत्रिक मूल्यों एवं परंपराओं की साझा धारणा से भी बंधे हुए हैं। किर्गिज गणराज्य में लोकतंत्र की मजबूत नींब के निर्माण एवं पोषण के लिए अधिकांश श्रेय राष्ट्रपति अताम्बाएव को जाता है।

मित्रों,

राष्ट्रपति अताम्बाएव और मैंने हमारे द्विपक्षीय संबंधों के पूरे दायरे पर व्यापक विचार-विमर्श किया। हमने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने और उसमें विविधता लाने की साझा प्राथमिकता पर ध्यान केंद्रित किया। हमने यह भी चर्चा की कि कैसे हम अपने युवाओं एवं समाज को आतंकवाद, उग्रवाद एवं कट्टरपंथ की साझा चुनौतियों से सुरक्षित रखने के लिए साथ मिलकर काम कर सकते हैं। हम अपने साझा हितों के लिए इन चुनौतियों से निपटने और उन्हें दूर करने के लिए मिलकर करीबी से काम करने की जरूरत पर सहमत हुए। हम किर्गिज गणराज्य को मध्य एशिया में स्थायी शांति, स्थिरता और समृद्धि का क्षेत्र बनाने के हमारे साझा लक्ष्य का एक महत्वपूर्ण भागीदार मानते हैं। हमें इन मुद्दों पर साथ मिलकर काम करने के लिए शंघाई सहयोग संगठन भी एक महत्वपूर्ण ढांचा मुहैया कराएगा।

मित्रों,

राष्ट्रपति अताम्बाएव और मैंने रक्षा क्षेत्र में हमारे सहयोगात्मक कार्यों की भी समीक्षा की है। किर्गिज-भारत माउंटेन बायो-मेडिकल रिसर्च सेंटर सफल सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह एक लाभप्रद अनुसंधान पहल साबित हुई है जिसे हमें और बढ़ावा देने की जरूरत है। हमने किर्गिज गणराज्य में किर्गिज-इंडिया ज्वाइंट मिलिटरी ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने के लिए काम शुरू कर दिया है। आतंकवाद से मुकाबले के लिए हमारा संयुक्त सैन्य अभ्यास अब सालाना गतिविधियों में शामिल हो चुका है। अगले साल की पहली तिमाही के दौरान किर्गिज गणराज्य में अगले आयोजन की योजना बनाई गई है। 

मित्रों,

राष्ट्रपति अताम्बाएव और मैं हमारी अर्थव्यवस्थाओं को काफी गहराई से कनेक्ट करने की जरूरत पर भी सहमत हुए। इस संदर्भ में हम अपने द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक लिंकेज को मजबूती देने के लिए काम करेंगे और लोगों के अधिक से अधिक आदान-प्रदान की सुविधा मुहैया कराएंगे। हम स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, खनन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में मौजूद संभावनाओं के दोहन में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए दोनों पक्षों के व्यापार एवं उद्योग को प्रोत्साहित करेंगे। हमने क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण सहित अपने विकास सहयोग को मजबूती देने का निर्णय लिया है। हमारे लोग इन गतिविधियों के केंद्र में होंगे। हम किर्गिज गणराज्य के साथ अपने तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम में युवाओं के आदान-प्रदान पर विशेष जोर देंगे। आज का निष्कर्ष इन दिशाओं में हमारी गतिविधियों का समर्थन करेगा। सबसे पहले मध्य एशिया क्षेत्र में हमने पिछले साल किर्गिज गणराज्य के साथ टेलीमेडिसिन लिंक की शुरुआत की थी। हम इस परियोजना का विस्तार किर्गिज गणराज्य के अन्य क्षेत्रों में करने के लिए कदम उठा रहे हैं।

मित्रों,

भारत और किर्गिज गणराज्य मार्च 2017 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 25वें वर्ष को मनाएंगे। इस मुकाम पर राष्ट्रपति अताम्बाएव की भारत यात्रा से प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने और हमारी भागीदारी को मजबूती देने में काफी बल मिलेगा।यह हमारी भागीदारी में हालिया लाभ को सुदृढ़ करने में भी मदद करेगा और आगामी महीनों एवं वर्षों के दौरान हमारे करारों को मजबूती देगा। मैं राष्ट्रपति अताम्बाएव की यादगार और उत्पादक भारत यात्रा के लिए कामना करता हूं।

धन्यवाद,

बहुत-बहुत धन्यवाद। 

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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर प्रधानमंत्री ने विभाजन पीड़ितों के साहस को किया याद
August 14, 2026
प्रधानमंत्री ने परिश्रम और पुरुषार्थ के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हम विभाजन से प्रभावित सभी लोगों के साहस को याद करते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास का वह एक ऐसा क्षण था जिसने कई जिंदगियां तबाह कर दीं, लोगों के परिवार उजड़ गए, कई लोगों को अपनों को खोना पड़ा और लोगों ने अत्यधिक पीड़ा झेली।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी स्थिति में भी लोगों ने शून्य से शुरू कर अपना जीवन पुनर्स्थापित किया, विपरीत परिस्थितियों को उपलब्धियों में बदला और राष्ट्र की प्रगति में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इन लोगों का जीवन सभी को मानवीय जिजीविषा की शक्ति की याद दिलाता है। श्री मोदी ने उम्मीद जताई कि यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने तथा विकसित भारत के निर्माण की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने के हमारे संकल्प को और मजबूत करे।

प्रधानमंत्री ने उस भयावह दौर से उबरकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान देने वाले सभी देशवासियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अपने साहस और क्षमता से उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को साकार करने का उदाहरण प्रस्तुत किया। श्री मोदी ने सभी से सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने एक सुभाषितम् साझा करते हुए इस बात पर बल दिया कि परिश्रम, उद्यम और समर्पित प्रयासों से ही विविध कलाएं, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प तथा नवाचार विकसित होते हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसलिए, किसी को भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए बल्कि साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्यों की ओर दृढ़ता से अग्रसर रहना चाहिए क्योंकि पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर श्रृंखलाबद्ध पोस्ट में लिखा:

आज हम #PartitionHorrorsRemembranceDay मना रहे हैं। विभाजन से प्रभावित सभी लोगों के साहस को हम याद करते हैं। इतिहास का वह क्षण कई जिंदगियों को तहस-नहस कर देने वाला था…परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खोया और असहनीय पीड़ा सहनी पड़ी।
इन सब पर विजय प्राप्त करते हुए, लोगों ने शून्य से अपना जीवन पुनर्स्थापित किया, विपत्ति को सफलता में परिवर्तित किया और राष्ट्र की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उनकी जीवन यात्राएं हमें मानवीय जिजीविषा की शक्ति की याद दिलाती हैं। आशा है कि यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के हमारे संकल्प को और मजबूत करेगा और हम सब मिलकर एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।

"विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है। आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें।

उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः।
कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥”

It is through hard work, enterprise and dedicated effort that diverse arts, science, technological skills, craftsmanship and innovations flourish, paving the way for success. Therefore, one should not remain dependent on fate; rather, one should move steadily towards one's goals with courage, diligence and persistent effort, for it is human endeavor that shapes destiny.