"बिना किसी तनाव के उत्सव के मूड में परीक्षा के लिए उपस्थित हों"
"प्रौद्योगिकी को एक अवसर के रूप में लें, चुनौती के रूप में नहीं"
"राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए परामर्श विस्तृत रहा है। इस पर पूरे भारत के लोगों से सलाह ली गई”
“20वीं सदी की शिक्षा प्रणाली और अवधारणा 21वीं सदी में हमारे विकास पथ को निर्धारित नहीं कर सकती। हमें समय के साथ बदलना होगा"
“शिक्षकों और अभिभावकों के अधूरे सपनों को छात्रों पर नहीं थोपा जा सकता। बच्चों के लिए अपने सपनों को पूरा करना महत्वपूर्ण है"
"प्रेरणा के लिए कोई इंजेक्शन या फॉर्मूला नहीं है। इसके बजाय, अपने आप को बेहतर तरीके से खोजें और पता करें कि आपको किससे खुशी मिलती है और उस पर काम करें”
"वही करें जो आपको पसंद हों और तभी आपको अधिकतम परिणाम मिलेगा"
"आप एक विशेष पीढ़ी के हैं। हां, प्रतिस्पर्धा ज्यादा है लेकिन मौके भी ज्यादा हैं”
"बेटी परिवार की ताकत होती है। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हमारी नारी शक्ति को उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देखने से बेहतर और क्या होगा”
"दूसरों के गुणों की सराहना करने और उनसे सीखने की क्षमता विकसित करें"
“जब मैं आपसे जुड़ता हूं तो मुझे आपकी आकांक्षाओं और सपनों की झलक मिलती है और मैं अपने जीवन को उसके अनुसार ढालने की कोशिश करता हूं। इसलिए, यह कार्यक्रम मुझे आगे बढ़ने में मदद करता है"

परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी) के 5वें संस्करण में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ बातचीत की। बातचीत से पहले प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर छात्रों के प्रदर्शनों का निरीक्षण किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान, श्रीमती अन्नपूर्णा देवी, डॉ. सुभाष सरकार, डॉ. राजकुमार रंजन सिंह और श्री राजीव चंद्रशेखर सहित राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों, शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों की वर्चुअल तौर पर उपस्थिति थी। पूरी बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने एक संवादात्मक, जोशीला और संवादी स्वर बनाए रखा।

 

सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने पिछले साल वर्चुअल बातचीत के बाद अपने युवा मित्रों को संबोधित करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पीपीसी उनका पसंदीदा कार्यक्रम है। उन्होंने कल से शुरू होने वाले विक्रम संवत नव वर्ष के बारे में बताया और छात्रों को आने वाले कई त्योहारों के लिए बधाई दी। प्रधानमंत्री ने पीपीसी के 5वें संस्करण में एक नई प्रथा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा जो प्रश्न शामिल नहीं किए जा सके, नमो ऐप पर वीडियो, ऑडियो या टेक्स्ट मैसेज के जरिए उनके उत्तर दिए जाएंगे।

 

पहला सवाल दिल्ली की खुशी जैन ने किया। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से, वडोदरा की किनी पटेल ने भी परीक्षा को लेकर तनाव और दबाव के बारे में पूछा। प्रधानमंत्री ने उनसे कहा कि वे तनाव में न रहें क्योंकि यह उनके द्वारा दी जाने वाली पहली परीक्षा नहीं है। उन्होंने कहा, "एक तरह से आप परीक्षा-प्रमाणित हैं।" पिछली परीक्षाओं से उन्हें जो अनुभव मिला है, उससे उन्हें आगामी परीक्षाओं से निपटने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि अध्ययन का कुछ हिस्सा छूट सकता है, लेकिन उन्हें इस पर जोर न देने के लिए कहा। उन्होंने सुझाव दिया कि उन्हें अपनी तैयारी की ताकत पर ध्यान देना चाहिए और अपने दिन-प्रतिदिन की दिनचर्या में तनावमुक्त और स्वाभाविक रहना चाहिए। दूसरों की नकल के रूप में कुछ भी करने की कोशिश करने का कोई मतलब नहीं है, लेकिन अपनी दिनचर्या के साथ रहें और उत्सव की तरह निश्चिंतता से काम करें।

 

अगला प्रश्न कर्नाटक के मैसूर के तरुण ने किया। उन्होंने पूछा कि यूट्यूब, आदि जैसे ध्यान भटकाने वाले कई ऑनलाइन माध्यम के बावजूद अध्ययन को एक ऑनलाइन मोड में कैसे आगे बढ़ाया जाए। दिल्ली के शाहिद अली, तिरुवनंतपुरम, केरल की कीर्तना और कृष्णागिरी, तमिलनाडु के एक शिक्षक चंद्रचूड़ेश्वरन के मन में भी यही सवाल था। प्रधानमंत्री ने कहा कि समस्या ऑनलाइन या ऑफलाइन अध्ययन के तरीकों से नहीं है। ऑफ़लाइन अध्ययन में भी, मन बहुत भटक सकता है। उन्होंने कहा, "यह माध्यम की नहीं बल्कि मन की समस्या है।" उन्होंने कहा कि चाहे ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, जब मन पढ़ाई में लगा हो तो ध्यान भटकाने वाली चीजों से छात्रों को परेशानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी विकसित होगी और छात्रों को शिक्षा में नई तकनीकों को अपनाना चाहिए। सीखने के नए तरीकों को एक अवसर के रूप में लिया जाना चाहिए, चुनौती के रूप में नहीं। ऑनलाइन आपके ऑफलाइन सीखने को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन संग्रह के लिए है और ऑफलाइन का संबंध क्षमता विकसित करने तथा काम करने से है। उन्होंने डोसा बनाने का उदाहरण दिया। कोई भी ऑनलाइन डोसा बनाना सीख सकता है लेकिन तैयारी और खपत ऑफलाइन होगी। उन्होंने कहा कि वर्चुअल दुनिया में रहने की तुलना में अपने बारे में सोचने और खुद के साथ रहने में बहुत खुशी होती है।

 

पानीपत, हरियाणा की एक शिक्षिका सुमन रानी ने पूछा कि नई शिक्षा नीति के प्रावधान छात्रों के जीवन को विशेष रूप से और समाज को कैसे सशक्त बनाएंगे, और यह कैसे नये भारत का मार्ग प्रशस्त करेगा। पूर्वी खासी हिल्स, मेघालय की शीला ने भी इसी तर्ज पर प्रश्न पूछा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक 'राष्ट्रीय' शिक्षा नीति है न कि 'नई' शिक्षा नीति। उन्होंने कहा कि विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद नीति का मसौदा तैयार किया गया था। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड होगा। "राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए परामर्श विस्तृत रहा है। इस पर पूरे भारत के लोगों से सलाह ली गई।” उन्होंने आगे कहा, यह नीति सरकार ने नहीं बल्कि नागरिकों, छात्रों और इसके शिक्षकों ने देश के विकास के लिए बनाई है। उन्होंने कहा कि पहले, शारीरिक शिक्षा और प्रशिक्षण पाठ्येतर गतिविधियां थीं। लेकिन अब वे शिक्षा का हिस्सा बन गई हैं और नई प्रतिष्ठा प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने कहा कि 20वीं सदी की शिक्षा प्रणाली और अवधारणा 21वीं सदी में हमारे विकास पथ को निर्धारित नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि अगर हम बदलती प्रणालियों के साथ विकसित नहीं हुए तो हम पीछे छूट जाएंगे और पीछे की ओर चले जाएंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति किसी के जुनून का अनुसरण करने का अवसर देती है। उन्होंने ज्ञान के साथ कौशल के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के हिस्से के रूप में कौशल को शामिल करने का यही कारण है। उन्होंने विषयों के चुनाव में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) द्वारा प्रदान किए गए लचीलेपन के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि एनईपी के उचित क्रियान्वयन से नए अवसर तैयार होंगे। उन्होंने पूरे देश के स्कूलों से छात्रों द्वारा आविष्कृत नई तकनीकों को लागू करने के नए तरीके खोजने का आग्रह किया।

 

गाजियाबाद, यूपी की रोशनी ने पूछा कि परिणामों के बारे में अपने परिवार की अपेक्षाओं से कैसे निपटें और क्या पढ़ाई को उतनी ही गंभीरता से लेना चाहिए जितना कि माता-पिता महसूस करते हैं या इसका एक उत्सव की तरह आनंद उठाना चाहिए। भटिंडा, पंजाब की किरण प्रीत कौर ने इसी तरह का सवाल पूछा। प्रधानमंत्री ने अभिभावकों और शिक्षकों से कहा कि वे अपने सपनों को छात्रों पर थोपे नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा, “शिक्षकों और अभिभावकों के अधूरे सपनों को छात्रों पर नहीं थोपा जा सकता। प्रत्येक बच्चे के लिए अपने सपनों को पूरा करना महत्वपूर्ण है।” उन्होंने माता-पिता और शिक्षकों से यह स्वीकार करने का आग्रह किया कि प्रत्येक छात्र में कोई न कोई विशेष क्षमता होती है और उसका पता लगाना चाहिए। उन्होंने छात्र से कहा कि अपनी ताकत को पहचानें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।

दिल्ली के वैभव कन्नौजिया ने पूछा कि जब हमारे पास अधिक बैकलॉग है तो कैसे प्रेरित रहें और सफल हों। ओडिशा के माता-पिता सुजीत कुमार प्रधान, जयपुर की कोमल शर्मा और दोहा के एरोन एबेन ने भी इसी विषय पर सवाल पूछा था। प्रधानमंत्री ने कहा, "प्रेरणा के लिए कोई इंजेक्शन या फॉर्मूला नहीं है। इसके बजाय, अपने आप को बेहतर तरीके से खोजें और पता करें कि आपको किससे खुशी मिलती है और वही काम करें।" उन्होंने छात्रों से उन चीजों की पहचान करने के लिए कहा जो उन्हें स्वाभाविक रूप से प्रेरित करती हैं, उन्होंने इस प्रक्रिया में स्वायत्तता पर जोर दिया और छात्रों से कहा कि वे अपने संकटों के लिए सहानुभूति प्राप्त करने का प्रयास न करें। उन्होंने छात्रों को अपने आस-पास देखने की सलाह दी कि कैसे बच्चे, दिव्यांग और प्रकृति अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा, "हमें अपने परिवेश के प्रयासों और शक्तियों का निरीक्षण करना चाहिए और उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।" उन्होंने अपनी पुस्तक एग्जाम वॉरियर से यह भी याद किया कि कैसे 'परीक्षा' के लिए एक पत्र लिखकर और अपनी ताकत व तैयारी के साथ परीक्षा को चुनौती देकर प्रेरित महसूस किया जा सकता है।

तेलंगाना के खम्मम की अनुषा ने कहा कि वह विषयों को समझती हैं जब शिक्षक उन्हें पढ़ाते हैं लेकिन थोड़ी देर बाद भूल जाती हैं कि इससे कैसे निपटना है। गायत्री सक्सेना ने नमो ऐप के जरिए याददाश्त और समझ को लेकर भी सवाल किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर चीजों को पूरे ध्यान से सीखा जाएगा तो कुछ भी नहीं भुलाया जा सकेगा। उन्होंने छात्र से वर्तमान में जीने को कहा। वर्तमान के बारे में यह सचेतनता उन्हें बेहतर ढंग से सीखने और याद रखने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान बेहद महत्वपूर्ण होता है और जो वर्तमान में जीता है और उसे पूरी तरह से समझता है वह जीवन का अधिकतम लाभ उठाता है। उन्होंने उनसे स्मृति की शक्ति को संजोने और उसका विस्तार करते रहने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि एक स्थिर दिमाग चीजों को याद करने के लिए सबसे उपयुक्त है।

 

झारखंड की श्वेता कुमारी ने कहा कि वह रात में पढ़ना पसंद करती हैं लेकिन दिन में पढ़ने के लिए कहा जाता है। राघव जोशी ने नमो ऐप के जरिए पढ़ाई के लिए उचित समय सारिणी के बारे में भी पूछा। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी के प्रयास के परिणाम का मूल्यांकन करना और समय कैसे व्यतीत किया जा रहा है, इसका मूल्यांकन करना अच्छा है। उन्होंने कहा कि आउटपुट और परिणाम का विश्लेषण करने की यह आदत शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अक्सर हम उन विषयों के लिए अधिक समय देते हैं जो हमारे लिए आसान और रुचिकर होते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए 'मन, दिल और शरीर के साथ होने वाली धोखाधड़ी' पर काबू पाने के लिए सोच-समझकर प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "ऐसी चीजें करें जो आपको पसंद हों और तभी आपको अधिकतम परिणाम मिलेगा।"

 

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर की एरिका जॉर्ज ने पूछा कि वैसे लोगों के लिए क्या किया जाना चाहिए जो जानकार तो हैं लेकिन किसी कारणवश सही परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए। गौतमबुद्धनगर के हरि ओम मिश्रा ने पूछा कि उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षा के लिए अध्ययन की मांगों को कैसे संभालना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि परीक्षा के लिए पढ़ना गलत है। उन्होंने कहा कि अगर कोई पूरे मन से पाठ्यक्रम का अध्ययन करता है, तो अलग-अलग परीक्षाएं मायने नहीं रखती हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा उत्तीर्ण करने के बजाय विषय में महारत हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि एथलीट खेल के लिए प्रशिक्षण लेते हैं न कि प्रतियोगिता के लिए। उन्होंने कहा, "आप एक विशेष पीढ़ी के हैं। हां, प्रतिस्पर्धा अधिक है लेकिन अवसर भी अधिक हैं।” उन्होंने छात्र से प्रतियोगिता को अपने समय का सबसे बड़ा उपहार मानने के लिए कहा।

 

गुजरात के नवसारी के माता-पिता सीमा चेतन देसाई ने प्रधानमंत्री से पूछा कि ग्रामीण लड़कियों के उत्थान में समाज कैसे योगदान दे सकता है। श्री मोदी ने कहा कि जब से लड़कियों की शिक्षा को नजरअंदाज किया गया, तब से लेकर अब तक स्थिति में काफी बदलाव आया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लड़कियों की उचित शिक्षा सुनिश्चित किए बिना कोई भी समाज सुधार नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि बेटियों के अवसरों और सशक्तिकरण को संस्थागत बनाया जाना चाहिए। बेटियां हमारी मूल्यवान धरोहर बन रही हैं और यह बदलाव स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव के वर्ष में, स्वतंत्र भारत के इतिहास में भारत में सबसे अधिक संसद सदस्य हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, "बेटी परिवार की ताकत होती है। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हमारी नारी शक्ति को उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देखने से बेहतर और क्या हो सकता है।”

 

दिल्ली की पवित्रा राव ने पूछा कि नई पीढ़ी को पर्यावरण की सुरक्षा में योगदान के लिए क्या करना चाहिए? चैतन्य ने पूछा कि अपनी कक्षा एवं पर्यावरण को स्वच्छ और हरा-भरा कैसे बनाया जाए। प्रधानमंत्री ने छात्रों को धन्यवाद दिया और इस देश को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने का श्रेय उन्हें दिया। बच्चों ने विरोधियों की अवहेलना की और प्रधानमंत्री की स्वच्छता की प्रतिज्ञा को सही मायने में समझा। उन्होंने कहा कि हम जिस पर्यावरण का आनंद ले रहे हैं वह हमारे पूर्वजों के योगदान के कारण है। इसी तरह हमें आने वाली पीढ़ी के लिए भी एक बेहतर माहौल छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह नागरिकों के योगदान से ही संभव हो सकता है। उन्होंने "पी3 मूवमेंट" - प्रो प्लैनेट पीपल एंड लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरनमेंट- लाइफ के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें 'यूज एंड थ्रो' संस्कृति से दूर होकर सर्कुलर इकोनॉमी की जीवनशैली की ओर बढ़ना होगा। प्रधानमंत्री ने अमृत काल के महत्व पर जोर दिया जो देश के विकास में छात्र के सर्वोत्तम वर्षों के साथ मेल खाता है। उन्होंने कर्तव्य पालन के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने टीकाकरण में अपना कर्तव्य निभाने के लिए छात्रों की प्रशंसा की।

 

अंत में प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम का संचालन करने वाले छात्रों को बुलाया और उनके कौशल और आत्मविश्वास की सराहना की। उन्होंने दूसरों में गुणों की सराहना करने और उनसे सीखने की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता को दोहराया। हमें ईर्ष्या के बजाय सीखने की प्रवृत्ति रखनी चाहिए। जीवन में सफलता के लिए यह क्षमता महत्वपूर्ण है।

 

उन्होंने इस व्यक्तिगत टिप्पणी के साथ अपने वक्तव्य का समापन किया कि उनके लिए पीपीसी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब वे युवा छात्रों के साथ बातचीत करते हैं तो वे खुद को 50 साल छोटा महसूस करते हैं। एक स्पष्ट रूप से उत्साहित प्रधानमंत्री ने निष्कर्ष के रूप में बताया, “मैं आपकी पीढ़ी के साथ जुड़कर आपसे सीखने की कोशिश करता हूं। जैसे-जैसे मैं आपसे जुड़ता हूं, मुझे आपकी आकांक्षाओं और सपनों की झलक मिलती है और मैं अपने जीवन को उसके अनुसार ढालने की कोशिश करता हूं। इसलिए यह कार्यक्रम मुझे बढ़ने में मदद करता है। मुझे अपनी मदद करने और बढ़ने के लिए समय देने के लिए मैं आप सभी का धन्यवाद करता हूं"।

 

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June 18, 2026

नमस्ते!

बों जू!

ऐसा लग रहा है, आप सब छुट्टी के मूड में हैं।

साथियों,

ये पेरिस शहर, Lights का शहर है, रंगों का शहर है, यहां Art है, Ideas हैं, और innovation की प्रेरणा भी है। इस शहर को भारत के अलग-अलग राज्यों से आए आप सभी लोग और भी खूबसूरत बना देते हैं। नए नए रंगों से भर देते हैं।

कोई तमिल है, कोई पंजाबी है, कोई गुजराती है, तो कोई मराठी है, और कोई बंगाली है। भारत के हर कोने का प्रतिनिधित्व यहां दिखाई देता है।

साथियों,

मैं जब 14 जून को नीस पहुंचा था तो सबसे पहले भारत इनोवेट्स कार्यक्रम में शामिल हुआ था। आज जब मैं फ्रांस से वापसी की तैयारी में हूं तो लग रहा है जैसे भारत कनेक्ट्स कार्यक्रम में आ गया हूं।

फ्रांस में रहने वाले आप लोगों ने 21वीं सदी के भारत-फ्रांस रिश्तों को जिस तरह कनेक्ट किया है, वो हमारी Strategic Partnership की बहुत बड़ी ताकत बन रही है। मैं आप सभी के लिए भारत से 140 करोड़ देशवासियों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं। इस आत्मीय स्वागत के लिए, मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

आज मैं ऐसे समय में फ्रांस आया हूं जब कुछ ही दिन पहले हमारी सरकार के 12 वर्ष पूरे हुए हैं। चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप निरंतर 12 साल तक देश की सेवा करना मेरे जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य रहा है। यह भारत के लोकतंत्र की शक्ति है जिसने एक चायवाले को यहां तक पहुंचा दिया।

साथियों,

बीते 12 वर्ष, 140 करोड़ भारतीयों के अद्भुत सामर्थ्य के रहे हैं। 12 साल के इस कालखंड में भारत का GDP दोगुना हुआ है। Airports की संख्या दोगुनी हुई है। Universities की संख्या भी दोगुनी हो गई है। Highway Construction की स्पीड तीन गुना बढ़ गई। और Metro Network, चार गुणा बड़ा हो गया है।

मैं आपको कुछ और फैक्ट्स दूंगा, उससे आप अंदाजा लगा पाएंगे कि भारत किस स्पीड और कितने बड़े स्केल पर काम कर रहा है। पिछले 12 वर्षों में भारत का Defence Export 35 गुणा यानि Thirty Five Times बढ़ गया है।

औऱ एक फैक्ट सुनिए भारत में मोबाइल मैन्यूफैक्टरिंग यूनिट्स में, 100 गुणा की बढ़ोतरी हुई है। 100 times. भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा mobile phone manufacturer है। इसी गति, इसी प्रगति का नतीजा है कि आज भारत दुनिया की Fastest Growing Major Economy है।

साथियों,

आज भारत की कहानी सिर्फ Economic Progress की कहानी नहीं है। सिर्फ यहाँ अटक नहीं जाती है। ये Social Transformation की भी कहानी है।

पिछले 12 साल में देश में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। यानि एक ऐसी प्रगति जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। फ्रांस में जितने घर हैं, उससे भी अधिक पक्के घर बीते 12 वर्ष में हमने जरूरतमंदों के लिए बनाए हैं।

अब हर परिवार के पास, गरीब से गरीब क्यों न हो, Bank Account है। Financial Inclusion एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का अभियान बना है।

साथियों,

इन 12 वर्षों की उपलब्धियों में, एक उपलब्धि ऐसी भी है जिसे किसी आंकड़े से, या अंकों से, नहीं मापा जा सकता। वह है 140 करोड़ भारतीयों का आत्मविश्वास।

आज का भारत और आज के भारत का युवा बहुत बड़े सपने देख रहा है। भारत का किसान नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत की महिलाएं नए नेतृत्व का परिचय दे रही हैं। इसलिए ये सिर्फ Achievements के 12 साल नहीं हैं, ये भारत की एस्पिरेशन्स को नई बुलंदी देने का कालखंड रहा है।

साथियों,

एक समय था जब दूर-दराज के गांवों तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचाना वाकई बहुत मुश्किल भरा था। आज उन्हीं गांवों में बिजली भी है, इंटरनेट भी है, और डिजिटल सेवाओं की पूरी दुनिया भी है। आज एक क्लिक पर, कभी भी, कहीं भी बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हैं।

आज मोबाइल फोन, भारत के नागरिकों को अनेक सुविधाओं से कनेक्ट कर रहा है। हमारे किसान, हमारे मछुआरे, हमारे dairy farmers, हमारी महिलाएं, हमारे स्टूडेंट्स, सभी टेक्नोलॉजी के माध्यम से सशक्त हो रहे हैं, और अपने लिए नए अवसर बना रहे हैं।

साथियों,

आपने 125 करोड़ से अधिक Aadhaar IDs के बारे में सुना है। लेकिन आज भारत सिर्फ पहचान को डिजिटल नहीं बना रहा। आज करीब 90 करोड़ भारतीयों की Unique Digital Health IDs बनाई जा चुकी हैं। जिससे मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित और accessible बन गए हैं। इससे हेल्थकेयर डिलीवरी और अधिक आसान और efficient हो रही है।

साथियों,

इन उपलब्धियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें से अधिकांश चीजें कुछ वर्ष पहले तक कल्पना जैसी लगती थीं। कौन सोच सकता था कि गांव-गांव तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचेगा ? कौन सोच सकता था कि दूर-सुदूर के गांवों में भी QR code जीवन का हिस्सा बन जायेगा ? गांव में कोई बहन, ड्रोन से खेती करने में मदद करेगी, ये भी असंभव लगता था।

लेकिन आज यह सब, भारत के करोड़ों लोगों के जीवन का सामान्य हिस्सा बनता जा रहा है। और आपको गर्व होगा साथियों, यही नए भारत की पहचान है।

जो कभी सपना था, वह आज सच्चाई है। जो कभी नामुमकिन लगता था, वो आज मुमकिन हुआ है, औऱ ये करने के पीछे सबसे बड़ी ताकत क्या है? किसकी वजह से ये सब संभव हुआ है? यह मोदी के कारण नहीं, वो ताकत है- भारत का लोकतंत्र, भारत की डेमोक्रेसी। इस डेमोक्रेसी में सबका साथ है, सबका विकास है।

साथियों,

आज से 50 या 100 साल बाद जब भारत के इस कालखंड की समीक्षा होगी, तो ये बात उभरकर सामने आएगी कि इस कालखंड को भारत की Aspirations ने ड्राइव किया। यह भारत के एस्पिरेशन्स का नया युग है।

जहां बिजली पहुंची है, वहां लोग सिर्फ बिजली नहीं चाहते, वे Smart Living चाहते हैं। जहां ट्रेन पहुंची है, वहां लोग High-Speed Connectivity चाहते हैं। जहां हाईवे बने हैं, वहां लोग World-Class Expressways चाहते हैं। जहां इंटरनेट पहुंचा है, वहां लोग AI और Digital Innovation में नेतृत्व चाहते हैं।

यानि आज भारत के लोग अपने जीवन को भी Next Level पर ले जाना चाहते हैं, और भारत को भी Next Level पर ले जाना उनका मकसद है, उनका संकल्प है, उनके सपने है।

और साथियों,

यही Aspirations आज भारत की विकास यात्रा की सबसे बड़ी शक्ति हैं। मैं आपको भारत की Space Journey का उदाहरण दूंगा।

भारत ने चंद्रयान को चंद्रमा के South Pole पर उतारा। दुनिया ने इसे एक बहुत बड़ी उपलब्धि माना। लेकिन भारत इसे अपनी मंजिल मानकर रुका नहीं। आज देश गगनयान की तैयारी कर रहा है। भारत अंतरिक्ष में अपना Space Station बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

हमारे Space Startups Global Space Economy में अपनी जगह बनाने के लिए पुरजोश काम कर रहे हैं, आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

Green Energy के क्षेत्र में भी भारत की यही एस्पिरेशंस दिखाई देती है। Solar Power में भारत की उपलब्धियों की दुनिया भर में लगातार चर्चा हो रही हैं। लेकिन भारत अगली छलांग की तैयारी कर रहा है।

Green Hydrogen में बड़े निवेश हो रहे हैं। Advanced Nuclear Energy पर तेजी से काम हो रहा है। आपने भारत के Fast Breeder nuclear Reactor से जुड़ी प्रोग्रेस के बारे में भी सुना ज़रूर होगा। ये भारत के न्यूक्लियर एनर्जी लैंडस्केप में क्रांतिकारी परिवर्तन करने का बहुत बड़ा अचीवमेंट हमारे सीसेन्टिस्टों ने किया है।

साथियों,

आज का भारत भविष्य का पूरा Ecosystem बना रहा है। भारत एक साथ हर उस क्षेत्र में निवेश कर रहा है, जो आने वाले दशकों की दिशा तय करेगा।

अभी आपने कुछ दिन पहले ही देखा है नीस में भारत इनोवेट्स का एक आयोजन किया। ये इवेंट भारत के डीप टेक सामर्थ्य को दुनिया तक पहुंचाने का एक और माध्यम था। इसमें भारत के 120 Deep-Tech Startups उपस्थित थे। Bharat Innovates में करीब एक हजार चार सौ B2B Meetings हुईं है। कई Startups के लिए Investment Commitments आगे बढ़ीं, Commercial Orders के लिए रास्ते खुले। French और European Universities तथा Incubators के साथ Engagements बढ़ रही हैं।

Student Exchanges, Joint Research, और Innovation Support के नए रास्ते बने। इसलिए Bharat Innovates सिर्फ एक Summit नहीं रहा। यह Innovation Diplomacy का एक नया मॉडल बना है।

और आज ही पेरिस में VivaTech इवेंट के जरिए, इस यात्रा को हमने और आगे बढ़ाया। नीस में हमने Ideas को Capital से जोड़ा और पेरिस में Indian Innovation को Global Scale से जोड़ा। आज दुनिया देख रही है भारत केवल भविष्य के लिए तैयार नहीं हो रहा है। भारत भविष्य को आकार दे रहा है।

साथियों,

एक समय था, जब देशों के बीच रिश्ते केवल व्यापार से तय होते थे। आज व्यापार के साथ-साथ Trust यानि भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।

हर देश Reliable Supply Chains चाहता है। हर देश Stable Partnerships चाहता है। हर देश ऐसे साथियों की तलाश में है, जिन पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके। और ऐसे समय में, भारत विश्व में एक Trusted Partner के रूप में उभर रहा है।

एवियां में G7 बैठक के दौरान मैंने trust based partnerships बनाने पर ज़ोर दिया। ग्लोबल साउथ के देशों के साथ equal पार्टनर्स के रूप में आगे बढ़ने का आह्वान किया। भारत का G7 समिट में संदेश था Global Governance तभी प्रभावी होगी जब वह Inclusive होगी। Global Growth तभी Sustainable होगी जब वह शेयर्ड होगी। और Global Technology तभी मानवता के लिए उपयोगी होगी जब वह Trusted होगी।

साथियों,

भारत और दुनिया के बीच व्यापारिक रिश्तों में नई ऊर्जा नज़र आ रही है। फ्रांस के साथ भारत का ट्रेड लगतार बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दुनिया के अनेक देशों के साथ Free Trade Agreements किए हैं। यूरोपियन यूनियन हो, यूनाइटेड किंगडम हो दुनिया के हर देश, हर रीजन के साथ भारत समझौते कर रहा है।

अगले महीने से भारत और UK के बीच ट्रेड एग्रीमेंट भी लागू हो जाएगा। यह एग्रीमेंट भारत के farmers, workers और innovators को अनेक नए अवसर प्रदान करेगा।

साथियों,

आज दुनिया Uncertainty और Disruption के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत और फ्रांस की साझेदारी विश्वास, स्थिरता और सहयोग का एक मजबूत स्तंभ बन रहा है।

इस वर्ष हमने भारत और फ्रांस के संबंधों को Special Global Strategic Partnership का दर्जा दिया था। नीस में मेरे मित्र President Macron और मैंने हमारे संबंधों को force for global good बनाने पर चर्चा की। Defence से लेकर space और नुक्लियर तक AI और क्रिटीकल मिनरल्स से लेकर high speed railway तक, हर क्षेत्र में हम मिलकर आगे बढ़ेंगे।

साथियों,

Solar energy हो, या AI के क्षेत्र में सहयोग हो, भारत और फ्रांस मिलकर ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं जो पूरी मानवता के हित में हैं। पिछले वर्ष पेरिस में और इस वर्ष दिल्ली में हमने AI Summit को Co-chair किया।

अब हम साथ मिलकर अगले वर्ष “तृष्णा” satellite को लॉन्च करने जा रहें हैं। यह “तृष्णा” satellite जो विश्व में फूड और वाटर सिक्युरिटी सुनिश्चित करने में योगदान देगा।

और साथियों,

यह सभी गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट पहलो में आप सभी का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। ये आप हैं जो भारत और यूरोप के बीच सबसे मजबूत सेतु हैं। आप दोनों समाजों को समझते हैं। दोनों बाजारों को समझते हैं। आने वाले समय में Talent, Trade, Technology, Tourism और Investment के नए अवसरों को आगे बढ़ाने में आपकी भूमिका लगातार बढ़ने वाली हैं।

साथियों,

भारत और फ्रांस के रिश्तों को साझा इतिहास, साझा मूल्यों और साझा विश्वास ने आगे बढ़ाया है। विश्व युद्धों के दौरान फ्रांस की धरती पर बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों की स्मृतियां आज भी हमें जोड़ती हैं।

मुझे पहले नव शापेल में श्रद्धांजलि देने का अवसर मिला, पिछले वर्ष प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मार्सेय के वॉर मेमोरियल जाने का अवसर भी मिला। ये हमारी साझा विरासत है।

फ्रांस, भारतीयों के योगदान को संजोता भी है और सराहता भी है। भारतीय मूल की नूर इनायत खान हों, जिन्होंने फ्रांस की Resistance के लिए अपना जीवन बलिदान किया, या महाराजा रणजीत सिंह के साथ काम करने वाले जनरल जां फ्रांस्वा अलार हों ये सभी भारत और फ्रांस की साझा विरासत के प्रतीक हैं।

भारत के राज्य पुडुचेरी में भी फ्रेंच विरासत की झलक दिखाई देती है। वहां का Architecture, वहां की कला-संस्कृति और खान-पान सभी में हमारे संबंधों की महेक है।

साथियों,

इस समय फ्रांस समेत पूरी दुनिया में International Yoga Day की तैयारी भी चल रही है। इस अवसर पर मैं, फ्रांस में योग को आगे बढ़ाने वाले श्रीमान महेश घाट्राड्याल जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धांजलि देता हूं। मैं पद्म पुरस्कार से सम्मानित, शार्लोत शोपां जी को भी प्रणाम करता हूं। जिन्होंने सौ वर्ष की आयु में भी, योग के माध्यम से फ़्रांस को भारत की विरासत से जोड़ा है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है: Yoga does not add years to life, it adds life to years.

साथियों,

मैं फ्रेद नेग्री जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धापूर्वक याद करता हूं। भारतीय विरासत को संरक्षित करने में उनका योगदान अतुल्य रहा है।

साथियों,

भारत और फ्रांस को कनेक्ट करने वाली एक और चीज है, और वो है फुटबॉल। इस वक्त यहां फुटबॉल फीवर पूरे जोर पर है। फ्रांस में इसकी दीवानगी, चप्पे-चप्पे पर दिखती है। लेकिन भारत में भी फुटबॉल का क्रेज़ सिर चढ़कर बोलता है।

खासतौर पर फ्रांस की टीम के फैन्स भारत में बहुत अधिक हैं। फ़्रांस ने इस वर्ल्ड कप की शुरुआत एक जोरदार जीत से शुरू की है। मैं फ्रांस की टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

जाने से पहले, आप सभी के लिए कुछ और अच्छी खबरें भी लेकर के आया हूँ। वो आपके लिए हैं। पिछले वर्ष, मार्सेय में कॉन्सुलेट खोला गया, इससे काफी अधिक सुविधा मिल रही है। कुछ हफ्ते पहले, Indian Nationals के लिए French Airports पर Visa-free Transit की व्यवस्था शुरू हो गई है।

Students और Professionals की Mobility बढ़ाना हो, या Educational Qualifications की Mutual Recognition की बात हो, या फिर French Universities के भारत में Campus खोलना हो, इन सभी पर हम मिलकर आगे बढ़ रहें हैं।

अब फ्रांस में UPI के उपयोग का दायरा भी और बढ़ने जा रहा है। यानि भारत-फ्रांस कनेक्ट भी Instant और आपसी Payment भी Instant!

साथियों,

इन सभी पहलों से, हम भारत और फ़्रांस को और करीब ला रहें हैं। और मैं फिर कहूंगा इस साझेदारी की नींव, इस रिश्ते की असली ताकत आप सभी हैं। आप सब मेरे देशवासी हैं।

आज जब भारत तेज़ी से विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तो मैं आप सभी से भारत के साथ और गहराई से जुडने का आग्रह करूंगा। इससे भारत की विकास यात्रा को नई शक्ति मिलेगी, और आपको अपनी पुरखों की धरती की सेवा करने का अवसर भी मिलेगा।

इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी के प्रेम आपके उत्साह और इस आत्मीय स्वागत के लिए मैं एक बार फिर आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं।

भारत माता की जय!

बहुत बहुत धन्यवाद।